झारखंड

Jamshedpur on Alert Ahead of Assembly Gherao, Vehicle Checks Intensified

विधानसभा घेराव को लेकर जमशेदपुर में प्रशासन मुस्तैद, चौक-चौराहों पर चेकिंग अभियान तेज

kalpana अगस्त 10, 2026 0
Police conducting vehicle checks at Doba Bridge in Jamshedpur amid student protest alert
Jamshedpur Police Intensify Checking Ahead of Jharkhand Assembly Gherao

जमशेदपुर: झारखंड विधानसभा घेराव और छात्र आंदोलन के ऐलान को लेकर सोमवार को जमशेदपुर में पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट नजर आया. राजधानी रांची में प्रस्तावित विधानसभा घेराव में प्रदर्शनकारियों के शामिल होने की आशंका को देखते हुए शहर के प्रमुख मार्गों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी है.

पुलिस की ओर से शहर के अलग-अलग हिस्सों में वाहनों की जांच की जा रही है. प्रशासन की कोशिश है कि कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को समय रहते रोका जा सके.

सुबह 7 बजे से डोबा पुल पर पुलिस तैनात

सोनारी स्थित मरीन ड्राइव के डोबा पुल के पास सोमवार सुबह करीब सात बजे से ही पुलिस बल की तैनाती कर दी गयी. यहां से गुजरने वाले छोटे-बड़े वाहनों की बारीकी से जांच की जा रही है.

पुलिस यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि कोई भी व्यक्ति संदिग्ध तरीके से राजधानी की ओर न जाए. वाहनों को रोककर उनकी जांच की जा रही है और जरूरत के मुताबिक पूछताछ भी की जा रही है.

प्रमुख चौक-चौराहों पर बढ़ाई गयी निगरानी

डोबा पुल के अलावा जमशेदपुर के प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है. पुलिस अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं.

विधानसभा घेराव को लेकर राजधानी रांची में पहले से ही सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गये हैं. ऐसे में जमशेदपुर से बड़ी संख्या में लोगों के रांची जाने की संभावना को देखते हुए स्थानीय स्तर पर भी निगरानी बढ़ायी गयी है.

प्रशासन की लोगों से शांतिपूर्ण रहने की अपील

पुलिस-प्रशासन की ओर से लोगों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की गयी है. अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखना है.

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

kalpana

झारखंड

View more
JPSC-JSSC protestors gathered near barricades during the Assembly gherao in Ranchi
JPSC-JSSC विधानसभा घेराव: चौथे बैरिकेड तक पहुंचे छात्र, देवेंद्र महतो भी आंदोलन में शामिल; BJP नेता हिरासत में

रांची: JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में छात्रों का विधानसभा घेराव आंदोलन सोमवार को उग्र हो गया. राज्य के अलग-अलग जिलों से रांची पहुंचे छात्र पुराने विधानसभा से नयी विधानसभा की ओर बढ़े. इस दौरान कई जगह पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़कर छात्र आगे बढ़े. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और वाटर कैनन भी तैयार रखा गया है. चौथे बैरिकेड तक पहुंचे छात्र जगन्नाथपुर मंदिर के पास छात्रों को पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया. इसके बाद प्रदर्शनकारी धरने पर बैठ गये और नारेबाजी करने लगे. इससे पहले छात्रों ने मौसीबाड़ी के पास दूसरी बैरिकेडिंग और फिर आगे की बैरिकेडिंग तोड़ दी. छात्र चौथे बैरिकेड तक पहुंच गये हैं. शिबू सोरेन की तस्वीर लेकर पहुंचे देवेंद्र महतो JLKM नेता देवेंद्रनाथ महतो भी छात्रों के आंदोलन में शामिल हुए. वह पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर लेकर प्रदर्शन करते नजर आये. बताया जा रहा है कि महतो पिछले नौ दिनों से भूख हड़ताल पर हैं. वह एंबुलेंस से विधानसभा की ओर रवाना हुए थे. वाटर कैनन और ड्रोन से निगरानी प्रदर्शनकारियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पुलिस ने विधानसभा के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है. रास्ते में तीन लेयर की बैरिकेडिंग की गयी है. मौके पर वाटर कैनन तैनात है, जबकि ड्रोन कैमरे से पूरे प्रदर्शन की निगरानी और रिकॉर्डिंग की जा रही है. BJP नेताओं को भी हिरासत में लिया गया छात्र आंदोलन के बीच भाजपा ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की कोशिश की. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत कई विधायक और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया. पुलिस सभी हिरासत में लिये गये प्रदर्शनकारियों को बसों से खेलगांव स्टेडियम लेकर गयी, जहां उन्हें गेस्ट हाउस में रखा गया है. 24 जिलों से पहुंचे छात्र आंदोलनकारियों के अनुसार, JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर विधानसभा घेराव में शामिल होने के लिए राज्य के 24 जिलों से छात्र रांची पहुंचे हैं. छात्रों का आरोप है कि कई जगह उन्हें रांची आने से रास्ते में ही रोका गया. प्रदर्शनकारी सरकार से परीक्षा में कथित गड़बड़ियों पर ठोस कार्रवाई और अपनी मांगों पर लिखित आश्वासन की मांग कर रहे हैं. विधानसभा में विपक्ष नदारद विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन JPSC-JSSC मुद्दे पर हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही जारी है. शुरुआती कार्यवाही के दौरान विपक्ष का कोई विधायक सदन में मौजूद नहीं था और सत्ता पक्ष के विधायकों के सवाल लिये जा रहे थे.  

kalpana अगस्त 10, 2026 0
JPSC-JSSC आंदोलन के बीच हिरासत में लिए गए बाबूलाल मरांडी और भाजपा नेता

JPSC-JSSC Protest: बाबूलाल मरांडी समेत BJP नेता हिरासत में, विधानसभा सत्र से दूर रहे भाजपा विधायक

मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का JPSC-JSSC छात्र आंदोलन पर बयान

JPSC-JSSC Protest: मंत्री सुदिव्य कुमार का BJP पर हमला, बोले- छात्रों के आंदोलन को ‘हाईजैक’ करने की कोशिश

BJP leaders and workers protesting near the Jharkhand Chief Minister’s residence in Ranchi

CM आवास घेरने पहुंचे BJP नेता और कार्यकर्ता, पुलिस से झड़प; बाबूलाल समेत कई नेता हिरासत में

Children dressed in traditional tribal attire performing folk dances at a World Tribal Day event in Gumla
विश्व आदिवासी दिवस पर पारंपरिक वेशभूषा में सजे बच्चों ने बिखेरी संस्कृति की छटा, लोकगीत-नृत्य से मोहा मन

गुमला: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बिशुनपुर स्थित विकास भारती द्वारा संचालित ज्ञान निकेतन में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा, लोककला और पारंपरिक जीवनशैली की आकर्षक झलक देखने को मिली. बच्चों ने विभिन्न जनजातियों की पारंपरिक वेशभूषा धारण कर लोकगीत और लोकनृत्य प्रस्तुत किये, जिसे देखकर कार्यक्रम में मौजूद लोग मंत्रमुग्ध हो गये. पारंपरिक वेशभूषा में नजर आये बच्चे कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी-अपनी जनजातीय पहचान के अनुरूप पारंपरिक परिधान पहनकर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं. बच्चों की वेशभूषा, नृत्य और लोकगीतों में झारखंड की समृद्ध आदिवासी विरासत की झलक साफ दिखाई दी. कार्यक्रम के दौरान बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था. उनकी प्रस्तुतियों पर पूरा कार्यक्रम स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. असुर और खेरवार जनजाति के नृत्य ने खींचा ध्यान कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण असुर जनजाति का लोकनृत्य, खेरवार जनजाति का जादूर नृत्य तथा उरांव और बिरजिया जनजातियों के पारंपरिक नृत्य रहे. बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ इन लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी. लोकगीतों और पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति के माध्यम से बच्चों ने अपनी संस्कृति और परंपरा को जीवंत रूप में सामने रखा. संस्कृति को बचाने में नई पीढ़ी की भूमिका अहम मौके पर संस्था के संयुक्त सचिव महेंद्र भगत ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, परंपरा और पारंपरिक पहनावे से होती है. आधुनिकता के दौर में अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाये रखना बड़ी चुनौती है. ऐसे में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ना बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि बच्चों को अपनी संस्कृति के बारे में जानकारी देने और उन्हें पारंपरिक कला से जोड़ने से आने वाली पीढ़ी अपनी विरासत को बेहतर तरीके से समझ सकेगी. विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और पहचान के संरक्षण का संकल्प लेने का भी दिन है. बच्चों की प्रस्तुति ने बढ़ाया कार्यक्रम का आकर्षण कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने गीत, नृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से आदिवासी संस्कृति के अलग-अलग रंगों को प्रदर्शित किया. कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना की. आयोजन के माध्यम से बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने और उसे मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर भी मिला.  

kalpana अगस्त 10, 2026 0
Bokaro DC Ajay Nath Jha addressing young participants at the EYDS-2026 closing ceremony

ईवाईडीएस-2026 का समापन, डीसी ने युवाओं को दिया निरंतर सीखते रहने का संदेश

Saffron-clad Kanwariyas gathered in large numbers at Baba Baidyanath Dham in Deoghar during the second Somwari of Shravan Mela 2026

बोल बम के जयघोष से गूंजा बाबाधाम, दूसरी सोमवारी पर केसरिया सैलाब में डूबा देवघर

देवघर बाबा बैद्यनाथ धाम में दूसरी सोमवारी पर जलाभिषेक करते श्रद्धालु

श्रावणी मेले की दूसरी सोमवारी पर देवघर में उमड़ा आस्था का सैलाब, 4 लाख भक्तों के पहुंचने का अनुमान

Police checking buses and vehicles in Jamshedpur ahead of the JPSC-JSSC student assembly gherao
विधानसभा घेराव को लेकर जमशेदपुर में सख्ती, सीमाओं पर बसों और वाहनों की जांच तेज

जमशेदपुर: JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में छात्र संगठनों के 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव को लेकर जमशेदपुर में पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है. रांची जाने वाले छात्रों को रोकने के लिए शहर के प्रमुख मार्गों, चेक पोस्ट और बस स्टैंडों पर पुलिस बल तैनात किया गया है. वाहनों की सघन जांच की जा रही है. जमशेदपुर से बड़ी संख्या में छात्रों के रांची पहुंचने की संभावना को देखते हुए पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. रांची की ओर जाने वाले मार्गों पर बसों और निजी वाहनों को रोककर जांच की जा रही है. संदिग्ध नजर आने वाले युवाओं और छात्रों से पूछताछ भी की जा रही है. मेरिन ड्राइव, काली मंदिर और जेपी सेतु पर चेकिंग प्रशासन ने जमशेदपुर से रांची जाने वाले प्रमुख रास्तों पर विशेष निगरानी बढ़ा दी है. सोनारी मेरिन ड्राइव, काली मंदिर पारडीह और जेपी सेतु समेत अन्य प्रमुख स्थानों पर पुलिस की तैनाती की गयी है. इन रास्तों से गुजरने वाली यात्री बसों और निजी चार पहिया वाहनों की जांच की जा रही है. पुलिस यह भी पता कर रही है कि संदिग्ध युवक या छात्रों के समूह रांची की ओर तो नहीं जा रहे हैं. हालांकि आम यात्रियों वाली बसों को रोकने और वाहनों की जांच के संबंध में प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं दी गयी है. क्या है छात्रों का आंदोलन? छात्र संगठन JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. उनकी प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं को रद्द करना, निष्पक्ष जांच कराना और पारदर्शी तरीके से दोबारा परीक्षा आयोजित करना शामिल है. आंदोलनकारी छात्र पूरे मामले की CBI जांच की भी मांग कर रहे हैं. छात्रों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ा है. 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान परीक्षा विवाद के बाद राज्यभर से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे थे, जहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया. अब छात्रों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए 10 अगस्त को पुरानी विधानसभा से नयी विधानसभा तक मार्च और घेराव का ऐलान किया है. इसे देखते हुए रांची के साथ-साथ जमशेदपुर और राज्य के अन्य जिलों में भी पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है. जमशेदपुर में मुख्य मार्गों और सीमावर्ती चेक पोस्टों पर निगरानी बढ़ने से रांची जाने वाले यात्रियों को भी जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है.  

kalpana अगस्त 10, 2026 0
India Post parcel counter showing new postal rates under Post Office Regulations 2026

डाकघर विनियम-2026 लागू, स्थानीय पार्सल सस्ता तो दूसरे राज्यों में भेजना हुआ महंगा

Sahara investors staging a protest near Lok Bhavan in Ranchi demanding the return of their deposited money

सहारा में फंसे 32,600 करोड़ रुपये की वापसी को लेकर रांची में सत्याग्रह, लोकभवन के सामने जुटे निवेशक

Dark monsoon clouds over Ranchi, Jharkhand, as rain is expected across the state

झारखंड में फिर सक्रिय हुआ मॉनसून, पांच दिन बारिश के आसार; कोल्हान में भारी बारिश का अलर्ट

0 Comments

Top week

French Rafale multirole fighter jet during flight as France submits a 114-aircraft proposal to strengthen the Indian Air Force.
राष्ट्रीय

भारत की हवाई ताकत को मिलेगा बड़ा बूस्ट? फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट का प्रस्ताव सौंपा, 94 विमान भारत में बनाने की योजना

surbhi अगस्त 7, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?