Security Alert

BSF and Jammu Police conduct anti-tunnel search operation along the India-Pakistan border ahead of Independence Day
स्वतंत्रता दिवस से पहले हाई अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियां, पाकिस्तान सीमा पर BSF और जम्मू पुलिस का संयुक्त ऑपरेशन

Security in Jammu Kashmir: 15 अगस्त से पहले किसी भी संभावित घुसपैठ या आतंकी साजिश को नाकाम करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने चौकसी बढ़ा दी है। इसी क्रम में जम्मू पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संयुक्त एंटी-टनल सर्च ऑपरेशन चलाया। इस अभियान के दौरान किसी भी संदिग्ध गतिविधि या सुरंग का पता नहीं चला। स्वतंत्रता दिवस से पहले बढ़ाई गई निगरानी भारत अगले सप्ताह 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। इसे देखते हुए देशभर में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। खासकर पाकिस्तान से सटी सीमाओं पर घुसपैठ और आतंकवादी गतिविधियों की आशंका को देखते हुए निगरानी और तलाशी अभियान तेज कर दिए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर चला एंटी-टनल सर्च ऑपरेशन जम्मू पुलिस और BSF ने संयुक्त रूप से बॉर्डर पुलिस पोस्ट अल्लाह के अधिकार क्षेत्र में आने वाले बॉर्डर आउट पोस्ट (BOP) पीतल इलाके में एंटी-टनल सर्च ऑपरेशन चलाया। अभियान का उद्देश्य सीमा के आसपास जमीन के नीचे बनी संभावित सुरंगों और किसी भी संदिग्ध गतिविधि का पता लगाना था, जिनका इस्तेमाल घुसपैठ के लिए किया जा सकता है। नहीं मिला कोई संदिग्ध सुराग सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र की गहन तलाशी ली। अभियान के दौरान कोई सुरंग, संदिग्ध गतिविधि या अवैध घुसपैठ का संकेत नहीं मिला। अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ और सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य बनी हुई है। नियमित रूप से चलाए जाते हैं ऐसे अभियान जम्मू पुलिस, BSF और अन्य सुरक्षा एजेंसियां सीमा क्षेत्रों में लगातार संयुक्त अभियान चलाती रहती हैं। इन अभियानों का उद्देश्य सीमा पार से होने वाली घुसपैठ, हथियारों की तस्करी और अन्य सुरक्षा खतरों को समय रहते रोकना है। दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में भी सुरक्षा कड़ी स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित देश के कई महत्वपूर्ण शहरों में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दिल्ली पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों को किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। सार्वजनिक स्थानों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा जांच और निगरानी बढ़ा दी गई है।  

kalpana अगस्त 4, 2026 0
Jharkhand ATS
झारखंड में ISIS-अलकायदा से जुड़े 61 संदिग्ध एटीएस के रडार पर, कार्रवाई की तैयारी तेज

रांची। झारखंड में आतंकी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से राज्य की एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। एटीएस ने राज्य में ISIS और अलकायदा से जुड़े 61 संदिग्धों की पहचान की है। इनमें 12 लोगों का संबंध ISIS और 49 का संबंध अलकायदा से जुड़े मामलों से बताया गया है। अब इन संदिग्धों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखते हुए कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया तेज की जा रही है।   जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, एटीएस ने इस संबंध में एडीजी (अभियान), डीजी (अभियान) और राज्य के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजकर आवश्यक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई विदेश मंत्रालय द्वारा 3 अप्रैल 2026 को जारी उस निर्देश के अनुरूप की जा रही है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 26 मार्च 2026 के निर्णय के आधार पर आतंकवादी संगठनों और उनसे जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कदम उठाने को कहा गया था।   संयुक्त राष्ट्र के निर्देशों के तहत संदिग्ध व्यक्तियों की संपत्तियों को जब्त करने, उनकी यात्रा पर प्रतिबंध लगाने तथा हथियारों से जुड़े लेन-देन पर रोक लगाने जैसे प्रावधान लागू किए जा सकते हैं। एटीएस का कहना है कि चिन्हित व्यक्तियों के नाम पहले से आतंकवाद से जुड़े मामलों में सामने आ चुके हैं या वे जांच एजेंसियों के संदेह के दायरे में हैं।   सूत्रों के मुताबिक सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में इन संदिग्धों के बैंक खातों, आर्थिक लेन-देन, संपत्तियों और अन्य वित्तीय गतिविधियों की भी गहन जांच की जाएगी। इसके साथ ही जिला पुलिस को निर्देश दिया गया है कि ऐसे लोगों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत एटीएस मुख्यालय को दी जाए। एटीएस का मानना है कि समय रहते निगरानी और समन्वित कार्रवाई से राज्य में आतंकी नेटवर्क की संभावित गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Delhi Police investigates a bomb threat email case targeting key Indian security and strategic institutions, with officials conducting technical analysis and questioning a suspect.
ISRO-DRDO समेत कई बड़े संस्थानों को बम से उड़ाने की धमकी, दिल्ली पुलिस ने गाजियाबाद के संदिग्ध से की पूछताछ

नई दिल्ली: देश की कई प्रमुख सुरक्षा और रणनीतिक संस्थाओं को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले ईमेल मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। इस मामले में पुलिस ने गाजियाबाद निवासी एक संदिग्ध से पूछताछ की है। शुरुआती जांच में सभी धमकियां फर्जी पाई गई हैं, हालांकि पुलिस ईमेल भेजने के उद्देश्य और पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच कर रही है। 29 जून को मिला था धमकी भरा ईमेल 29 जून को विभिन्न सरकारी और सुरक्षा एजेंसियों को एक धमकी भरा ईमेल भेजा गया था। इसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), नागरिक उड्डयन मंत्रालय और दिल्ली-न्यूयॉर्क एयर इंडिया फ्लाइट को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। ईमेल मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। संबंधित सभी कार्यालयों और परिसरों की तत्काल जांच कराई गई, लेकिन कहीं भी कोई विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। तकनीकी जांच के बाद गाजियाबाद पहुंची पुलिस धमकी भरे ईमेल की तकनीकी जांच के आधार पर दिल्ली पुलिस गाजियाबाद के संयोग नगर स्थित बैंक कॉलोनी पहुंची। यहां 36 वर्षीय निशांत त्यागीसे पूछताछ की गई। पुलिस ने संदिग्ध के घर की तलाशी भी ली, लेकिन वहां से कोई विस्फोटक या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई। प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया? पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला कि संदिग्ध वर्ष 2008 से एक गंभीर बीमारी से पीड़ित है और कई प्रतिष्ठित अस्पतालों में उसका इलाज हो चुका है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि धमकी भरा ईमेल किस उद्देश्य से भेजा गया था और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका है या नहीं। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ISRO मुख्यालय में मच गया था हड़कंप धमकी भरे ईमेल के बाद सबसे अधिक सतर्कता ISRO मुख्यालय में बरती गई। ईमेल मिलते ही अधिकारियों ने तत्काल इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू कर परिसर खाली कराया और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। बम निरोधक दस्ता, सुरक्षा एजेंसियां और जांच टीमों ने पूरे परिसर की गहन तलाशी ली, लेकिन जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। जांच जारी दिल्ली पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियां अब ईमेल की तकनीकी जांच, डिजिटल ट्रेल और संदिग्ध की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Nabanna security breach
नबन्ना की सुरक्षा में सेंध? वीआईपी जोन में मिला संदिग्ध युवक, STF की पूछताछ जारी

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिवालय नबन्ना के वीआईपी सुरक्षा क्षेत्र में एक संदिग्ध युवक के पहुंच जाने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। युवक कथित तौर पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के काफिले की तस्वीरें अपने मोबाइल फोन से ले रहा था। सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ जवानों ने उसकी गतिविधियों पर तुरंत संदेह जताया और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई।     जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम मुख्यमंत्री नबन्ना से रवाना होने वाले थे। उनका काफिला पार्किंग जोन से वीआईपी लिफ्ट की ओर बढ़ रहा था, तभी एक युवक सुरक्षा घेरे के पास पहुंच गया और मोबाइल फोन से काफिले की तस्वीरें लेने लगा। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उसे रोक लिया और नबन्ना के सुरक्षा निदेशक को इसकी जानकारी दी। इसके बाद युवक को पुलिस के हवाले कर दिया गया।   पुलिस के मुताबिक, हिरासत में लिए गए युवक की पहचान पंकज कुमार के रूप में हुई है। शुरुआती पूछताछ के बाद उसे हावड़ा पुलिस आयुक्त कार्यालय ले जाया गया, जहां से मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के हवाले कर दिया गया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि युवक का उद्देश्य क्या था और वह वीआईपी क्षेत्र तक कैसे पहुंचा।फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि युवक मुख्यमंत्री के काफिले की रेकी कर रहा था या केवल उत्सुकतावश तस्वीरें ले रहा था। सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की चूक हुई है या नहीं, इसकी भी समीक्षा की जा रही है।   पहले भी ऐसा एक बार हो चूका है  गौरतलब है कि वर्ष 2024 में भी नबन्ना परिसर के बाहर एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लिया गया था। ताजा घटना के बाद एक बार फिर राज्य सचिवालय की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने पूरे मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।

anjali kumari जून 19, 2026 0
Bengal Weapons Cache
बंगाल के तालाब में मिला हथियारों का जखीरा

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के एक तालाब में हथियारों का जखीरा मिला है। राज्य में अवैध हथियारों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में पुलिस को यह बड़ी सफलता मिली है। पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली-बसीरहाट क्षेत्र में एक तालाब से 16 लंबी बंदूकें और 2,345 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। यह कार्रवाई खुफिया सूचना के आधार पर की गई। सर्च ऑपरेशन चला रही एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, 6 जून को बसीरहाट और बरूईपुर में हुई हथियार बरामदगी के बाद जांच चल रही थी। उसी जांच के दौरान मिले नए इनपुट और तकनीकी सूचनाओं के आधार पर एसटीएफ ने यह सर्च ऑपरेशन चलाया। इसके दौरान तालाब से भारी मात्रा में हथियार और कारतूस बरामद हुए। संगठित नेटवर्क की आशंका इस ताजा कार्रवाई के बाद मामले में 51 हथियार और 2,705 राउंड गोला-बारूद बरामद किए जा चुके हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसके पीछे एक संगठित अवैध हथियार नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। पहले भी मिल चुके हथियार कुछ दिन पहले संदेशखाली क्षेत्र में एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर तालाब और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में अवैध हथियार बरामद किए थे। कई लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से लगातार तलाशी अभियान जारी है। बरामद हथियारों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। एसटीएफ यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हथियार कहां से लाए गए। किसके लिए जमा किए गए थे। इनके पीछे कौन-सा नेटवर्क काम कर रहा था। फिलहाल इलाके में सर्च ऑपरेशन और जांच जारी है।

anjali kumari जून 12, 2026 0
Security personnel and bomb disposal squad inspecting Ahmedabad government offices after bomb threat email
गुजरात में हाई अलर्ट: CMO, AMC और RSS कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी, जांच में जुटी पुलिस

  गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO), अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। यह धमकी अज्ञात ईमेल के जरिए भेजी गई, जिसके बाद पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड ने शुरू की तलाशी सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम मौके पर पहुंची। बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad), डॉग स्क्वॉड और स्थानीय पुलिस ने तीनों स्थानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह धमकी भरा ईमेल बुधवार सुबह एक सरकारी ईमेल आईडी पर प्राप्त हुआ, जिसमें तीनों प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की बात कही गई थी। घंटों चली जांच, कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली सीएमओ, एएमसी और आरएसएस कार्यालयों में कई घंटों तक तलाशी अभियान चला, लेकिन अभी तक किसी भी स्थान से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है। सुरक्षा के मद्देनजर सभी परिसरों के आसपास आने-जाने वालों की सघन जांच की जा रही है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने मामले की जांच शुरू कर दी है और ईमेल भेजने वाले के आईपी एड्रेस को ट्रेस किया जा रहा है। फर्जी धमकी की आशंका, पहले भी मिल चुके हैं ऐसे मेल पुलिस कमिश्नर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह किसी शरारती तत्व की हरकत प्रतीत हो रही है, किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले भी गुजरात के कई स्कूलों और एयरपोर्ट को इसी तरह के धमकी भरे ईमेल मिल चुके हैं, जो जांच में फर्जी साबित हुए थे। मामला दर्ज, साइबर जांच तेज पुलिस ने ईमेल के आधार पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है और साइबर टीम को जांच सौंपी गई है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें।  

Deepshikha जून 11, 2026 0
Delhi Terror Plot
दिल्ली में बड़ी आतंकी साजिश नाकाम, ISI और अंडरवर्ल्ड से जुड़े नौ संदिग्ध गिरफ्तार

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और मुंबई अंडरवर्ल्ड से जुड़े एक संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इस अभियान के दौरान नौ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से हथियार और विस्फोटक सामग्री भी बरामद की गई है। यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही खुफिया निगरानी और जांच के आधार पर की गई।   महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की थी साजिश प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी कथित तौर पर आईएसआई और अंडरवर्ल्ड से जुड़े तत्वों के निर्देश पर काम कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, उनका मकसद राष्ट्रीय राजधानी में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और सुरक्षा से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाना था। पूछताछ में यह भी जानकारी मिली है कि संदिग्ध पावर प्लांट, न्यूक्लियर प्लांट, बिजली घर, एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों जैसे संवेदनशील स्थानों पर हमले की योजना बना रहे थे।   खुफिया सूचना के बाद चला विशेष अभियान अधिकारियों ने बताया कि इस मॉड्यूल की गतिविधियों पर काफी समय से नजर रखी जा रही थी। संदिग्धों के नेटवर्क, संपर्कों और गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाने के बाद एक समन्वित अभियान चलाया गया, जिसके तहत सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का मानना है कि समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया गया।   नेटवर्क और फंडिंग की जांच जारी गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां उनके पूरे नेटवर्क, अन्य सहयोगियों, फंडिंग स्रोतों और बरामद हथियारों व विस्फोटकों की सप्लाई चेन का पता लगाने में जुटी हैं। साथ ही विदेश में बैठे कथित संचालकों और सीमा पार कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।   सुरक्षा एजेंसियां सतर्क इस कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को पूरी तरह समाप्त किया जा सके और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके।

Unknown मई 30, 2026 0
Suvendu adhikari
शुभेंदु सरकार के कड़े रुख के बाद भारत बांग्लादेश बॉर्डर पर बढ़ी गुसपैठियों की हलचल

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में नई सरकार की ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति के बाद अवैध प्रवासियों के बीच हड़कंप की स्थिति बताई जा रही है। भाजपा नेताओं और सोशल मीडिया पोस्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश लौटने के लिए उत्तर 24 परगना जिले के हाकिमपुर सीमा क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग जमा होने लगे हैं। भाजपा ने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि राज्य में अवैध रूप से रह रहे लोग अब सीमा पार लौटने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि विशेष पहचान प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी ऐसे दृश्य सामने आए थे और अब सरकार की सख्त नीति के बाद फिर से सीमा क्षेत्रों में भीड़ बढ़ने लगी है।   होल्डिंग सेंटर और पहचान प्रक्रिया पर जोर रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य सरकार ने मालदा में एक होल्डिंग सेंटर तैयार किया है, जहां कथित अवैध प्रवासियों को रखा जाएगा। इसके बाद उनकी पहचान प्रक्रिया पूरी कर उन्हें संबंधित एजेंसियों के माध्यम से डिपोर्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।   राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि सरकार अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए विशेष अभियान चला रही है। इसके तहत दस्तावेजों की जांच और नागरिकता संबंधी सत्यापन पर जोर दिया जा रहा है।   शुभेंदु अधिकारी के बयान से बढ़ी चर्चा हाल ही में एक बैठक के दौरान भाजपा नेता शुवेंदी अधिकारी  ने कहा था कि जो लोग नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के दायरे में नहीं आते, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जाएगा और सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपा जाएगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।   आधिकारिक पुष्टि का इंतजार हालांकि, सीमा पर जुटी भीड़ और बड़े पैमाने पर लोगों के लौटने के दावों की अब तक प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विपक्षी दलों ने भी भाजपा के दावों पर सवाल उठाए हैं। इसके बावजूद राज्य में अवैध प्रवास और नागरिकता का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

Unknown मई 26, 2026 0
Amritsar Firing
कपिल शर्मा के अमृतसर घर के बाहर फायरिंग की खबर, जांच में जुटी पुलिस

अनृतसर, एजेंसियां। मशहूर कॉमेडियन कपिल शर्मा  के अमृतसर स्थित घर के बाहर कथित फायरिंग की घटना सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि सोमवार देर रात कुछ बाइक सवार बदमाशों ने होली सिटी इलाके में स्थित उनके घर के बाहर गोलियां चलाईं। घटना के समय कपिल शर्मा का परिवार घर के अंदर मौजूद था, जबकि कपिल मुंबई में शूटिंग के सिलसिले में थे। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली है।   पुलिस ने साधी चुप्पी, जांच जारी घटना के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और इलाके की जांच शुरू की गई। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने फिलहाल मामले पर खुलकर कुछ भी कहने से इनकार किया है। पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर और सहायक पुलिस आयुक्त कमलप्रीत सिंह से संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन अधिकारियों ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और संदिग्धों की पहचान करने में जुटी हुई है।   कनाडा हमले से भी जोड़ा जा रहा मामला इस घटना को कनाडा में हाल ही में हुई एक फायरिंग घटना से भी जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार कनाडा स्थित एक कैफे, जो कथित तौर पर कपिल शर्मा से जुड़ा बताया जाता है, वहां भी कुछ समय पहले फायरिंग हुई थी। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यह मामला किसी तरह की धमकी या रंगदारी से जुड़ा हो सकता है। हालांकि पुलिस ने इस एंगल पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।   परिवार और फैंस में चिंता घटना की खबर सामने आने के बाद कपिल शर्मा के प्रशंसकों और परिवार के करीबी लोगों में चिंता का माहौल है। सोशल मीडिया पर भी लोग कॉमेडियन और उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी।

Unknown मई 25, 2026 0
CAPF personnel guard West Bengal counting centre with strict QR code entry security
बंगाल काउंटिंग डे पर अभेद सुरक्षा घेरा: 700 CAPF कंपनियां तैनात, QR कोड के बिना एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना (4 मई) को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर कड़ी कर दी गई है। राज्य में अक्सर चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को ध्यान में रखते हुए इस बार भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने पहले से ही व्यापक रणनीति तैयार कर ली है। “राज्य के हर कोने में कानून का राज रहेगा” चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की हिंसा, उपद्रव या अवैध गतिविधि को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने कहा है कि मतगणना के दौरान और उसके बाद भी पूरे राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। 700 CAPF कंपनियों की तैनाती, मल्टी-लेयर सिक्योरिटी सुरक्षा के मद्देनजर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की करीब 700 कंपनियों को राज्यभर में तैनात किया जा रहा है। यह तैनाती सिर्फ काउंटिंग डे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नतीजों के बाद भी संवेदनशील इलाकों में बलों की मौजूदगी बनी रहेगी। सुरक्षा व्यवस्था को तीन स्तरों में बांटा गया है: पहला घेरा: काउंटिंग सेंटर के बाहरी इलाके में, जहां भारी संख्या में केंद्रीय बल तैनात रहेंगे। दूसरा घेरा: सेंटर के प्रवेश द्वार पर, जहां पहचान और जांच की कड़ी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। तीसरा घेरा: काउंटिंग हॉल के अंदर, जहां केवल अधिकृत अधिकारी और कर्मचारी ही मौजूद रहेंगे। इसके अलावा, ‘वल्नरेबल’ और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी तरह की भीड़ या हिंसक गतिविधि को तुरंत रोका जा सके। QR कोड आधारित डिजिटल एंट्री सिस्टम इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और आधुनिक बनाते हुए काउंटिंग सेंटर्स में प्रवेश के लिए QR-Coded Photo ID अनिवार्य कर दिया गया है। बिना इस डिजिटल पहचान पत्र के किसी भी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं होगी। यह कदम फर्जी पहचान या अनधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। 24/7 कमांड हब और हाई-टेक निगरानी चुनाव आयोग ने राज्यभर में अत्याधुनिक कमांड हब स्थापित किए हैं, जहां से चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाएगी। सभी मतगणना केंद्रों को CCTV कैमरों से जोड़ा गया है और उनकी लाइव फीड सीधे आयोग के नियंत्रण कक्ष तक पहुंचेगी। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्या सामने आने पर तुरंत एक्शन लेने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) भी तैनात की गई है। आम जनता के लिए हेल्पलाइन और शिकायत व्यवस्था आयोग ने नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1800 345 0008 और ईमेल wbfreeandfairpolls@gmail.com जारी किया है। कोई भी व्यक्ति हिंसा या गड़बड़ी की सूचना दे सकता है शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी हर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है हाईकोर्ट की निगरानी में चुनाव प्रक्रिया कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भी स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान पूरा नागरिक और पुलिस प्रशासन चुनाव आयोग के नियंत्रण में रहेगा। कोर्ट ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। पोस्ट-पोल हिंसा रोकने पर विशेष फोकस पश्चिम बंगाल में पिछले चुनावों के बाद हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा एजेंसियों को पहले से ही अलर्ट मोड पर रखा गया है। संवेदनशील जिलों में फ्लैग मार्च लगातार ड्रोन और CCTV निगरानी स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों के बीच समन्वय लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में बड़ा कदम चुनाव आयोग की यह व्यापक और सख्त तैयारी इस बात का संकेत है कि इस बार किसी भी कीमत पर शांति भंग नहीं होने दी जाएगी। आयोग का उद्देश्य सिर्फ मतगणना कराना नहीं, बल्कि ऐसा सुरक्षित माहौल तैयार करना है, जहां हर नागरिक बिना डर के लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सके।  

surbhi मई 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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