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झारखंड विधानसभा मानसून सत्र: JPSC समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी

anjali kumari अगस्त 4, 2026 0
Jharkhand Assembly Monsoon Session
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रांची। झारखंड विधानसभा के 6 से 12 अगस्त तक प्रस्तावित मानसून सत्र को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने सोमवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को सत्र की सभी प्रशासनिक और विधायी तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश दिए। इस बार सत्र के दौरान JPSC परीक्षा विवाद, छात्रों के मुद्दे और अन्य जनहित के सवालों पर विपक्ष के सरकार को घेरने की संभावना है।

 

स्पीकर ने अधिकारियों को दिए जरूरी निर्देश

 

स्पीकर कक्ष में आयोजित बैठक में संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह सचिव वंदना दादेल, वित्त सचिव प्रशांत कुमार समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में सत्र के सुचारु संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा की गई।

 

विधानसभा अध्यक्ष ने अधिकारियों से कहा कि सदस्यों को पूछे गए प्रश्नों के उत्तर और विधेयकों की प्रतियां समय पर उपलब्ध कराई जाएं, ताकि सदन की कार्यवाही बाधित न हो।

 

धरना-प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी फोकस

 

मानसून सत्र के दौरान विधानसभा परिसर के बाहर संभावित धरना-प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था को लेकर भी पुलिस अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। स्पीकर ने सभी दलों के विधायकों से सदन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से चलाने में सहयोग की अपील की।

 

JPSC समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी

 

पांच दिवसीय मानसून सत्र में विपक्ष JPSC परीक्षा अनियमितता, छात्रों से जुड़े मुद्दों और अन्य जनहित के मामलों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

 

इस पर संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सरकार छात्रों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष सदन में इन मुद्दों को उठाता है तो सरकार सभी सवालों का जवाब देगी, लेकिन हंगामे से छात्रों के मुद्दों पर सार्थक चर्चा प्रभावित होगी।

 

लंबित जवाबों पर स्पीकर की नाराजगी

 

बैठक में विभागों की ओर से लंबित जवाबों का मुद्दा भी उठा। जानकारी के अनुसार, विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए 1,390 आश्वासनों पर अब तक विभागों ने जवाब नहीं दिया है। वहीं, शून्यकाल में विधायकों द्वारा उठाए गए 440 मामलों में से 321 का उत्तर भी लंबित है।

 

स्पीकर ने इस पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी लंबित जवाब जल्द उपलब्ध कराए जाएं, ताकि सदन की कार्यवाही प्रभावी और जवाबदेह तरीके से संचालित हो सके।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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रांची। झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे अभ्यर्थियों के आंदोलन को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का समर्थन मिला है। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे झारखंड के छात्रों के प्रति समर्थन जताते हुए परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग का समर्थन किया है।   छात्रों के आंदोलन को मिला समर्थन   JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड में अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की मांग है कि विवादित परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।   हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया के जरिए छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया। उनके समर्थन के बाद यह मामला झारखंड की सीमाओं से बाहर भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।   परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग   आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। अभ्यर्थियों की ओर से संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने, पूरे मामले की जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग की जा रही है।   रांची में आंदोलन जारी   JPSC-JSSC विवाद को लेकर रांची में छात्रों का आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी शुरू की है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।   सरकार के रुख पर टिकी नजर   छात्र आंदोलन और हिमंत बिस्वा सरमा के समर्थन के बाद अब झारखंड सरकार के रुख पर नजर है। आंदोलनकारियों की मांगों पर सरकार क्या कदम उठाती है और परीक्षा विवाद की जांच को लेकर क्या फैसला होता है, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेगा।   वहीं, छात्रों के आंदोलन को दूसरे नेताओं और संगठनों से मिलने वाले समर्थन के कारण यह मुद्दा झारखंड में और बड़ा राजनीतिक विषय बनता जा रहा है।

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पहली पुण्यतिथि पर दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि, नेमरा में प्रतिमा का अनावरण करेंगे सीएम हेमंत सोरेन

रामगढ़। झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता, राज्य निर्माण के सूत्रधार और पद्मभूषण से सम्मानित दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर मंगलवार को उनके पैतृक गांव नेमरा में भव्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और लुकैयाटांड़ में स्थापित शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा का अनावरण करेंगे।   विकास मेला के साथ होगा परिसंपत्ति वितरण कार्यक्रम के तहत विकास मेला सह परिसंपत्ति वितरण शिविर भी लगाया जाएगा, जहां विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभुकों को परिसंपत्तियां सौंपी जाएंगी। अलग-अलग विभागों के स्टॉल के माध्यम से लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी और पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ा जाएगा।   12 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था कार्यक्रम को लेकर नेमरा में व्यापक तैयारियां की गई हैं। आयोजन स्थल पर करीब 12 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में मंत्री, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता और आम लोगों के शामिल होने की संभावना है।   डीसी-एसपी ने तैयारियों का लिया जायजा उपायुक्त ऋतुराज और पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुनायत ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अधिकारियों को मंच व्यवस्था, पेयजल, स्वास्थ्य, स्वच्छता, बिजली, पार्किंग और लाभुकों की सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।   सुरक्षा और ट्रैफिक पर विशेष फोकस वीआईपी मूवमेंट, भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। कार्यक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहेगा।   संघर्ष और विरासत को किया जाएगा याद 4 अगस्त 2025 को शिबू सोरेन का निधन हुआ था। उनकी पहली पुण्यतिथि पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके संघर्ष, सामाजिक योगदान और झारखंड आंदोलन में निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका को भी याद किया जाएगा।

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रांची। झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 6 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। सत्र को लेकर विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने सोमवार को उच्चस्तरीय बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह सचिव वंदना दादेल, वित्त सचिव प्रशांत कुमार समेत कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में 6 से 12 अगस्त तक चलने वाले मानसून सत्र के दौरान प्रशासनिक तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था और सदन के सुचारू संचालन को लेकर चर्चा की गई।   सदस्यों को समय पर जवाब और दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश     विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सदस्यों के सवालों के जवाब और विधेयकों से संबंधित जरूरी दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि कई बार विधायक सवालों के जवाब नहीं मिलने या बिल की कॉपी समय पर नहीं मिलने की शिकायत करते हैं, जिसे दूर करने की जरूरत है।   इसके अलावा विधानसभा परिसर के बाहर होने वाले धरना-प्रदर्शन और कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस अधिकारियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।   JPSC समेत कई मुद्दों पर हंगामे के आसार     पांच दिवसीय मानसून सत्र में विपक्ष झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) विवाद समेत कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। विपक्ष परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाने की रणनीति बना रहा है।   संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि सरकार हमेशा छात्रों के हित में खड़ी रही है। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना चाहता है तो सरकार जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन हंगामा होने से छात्रों की समस्याओं पर चर्चा प्रभावित होगी।   1390 आश्वासनों पर विभागों से नहीं मिला जवाब     विधानसभा में लंबित मामलों को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार, सरकार की ओर से दिए गए 1390 आश्वासनों पर अब तक विभागों से जवाब नहीं मिला है।   वहीं, शून्यकाल में विधायकों द्वारा उठाए गए 440 मामलों में से 321 का जवाब लंबित है। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य समेत कई महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं। समय पर जवाब नहीं मिलने से विधायकों में नाराजगी बनी हुई है।   स्पीकर ने सदस्यों से की सहयोग की अपील     विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने सभी दलों के सदस्यों से सदन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से चलाने में सहयोग की अपील की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पिछले सत्र की तरह इस बार भी सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित होगी।  

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kalpana जुलाई 30, 2026 0

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