नई दिल्ली, एजेंसियां। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट मॉडरेशन एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में फेसबुक (Meta) से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो हटाए जाने के बाद यह सवाल उठने लगा कि आखिर Meta, X (पूर्व में Twitter) और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म करोड़ों पोस्ट और वीडियो में यह कैसे तय करते हैं कि किस कंटेंट पर कार्रवाई करनी है। इन प्लेटफॉर्म्स का कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ह्यूमन रिव्यू और कानूनी आदेशों के आधार पर काम करता है।
हर मिनट लाखों पोस्ट, तस्वीरें और वीडियो अपलोड होते हैं। इनकी शुरुआती जांच AI और मशीन लर्निंग सिस्टम करते हैं। कंपनियों का दावा है कि नग्नता, बाल यौन शोषण, हिंसक या चरमपंथी सामग्री और कॉपीराइट उल्लंघन जैसे मामलों में अधिकांश कंटेंट इंसानों तक पहुंचने से पहले ही AI पहचान कर हटा देता है।
जहां AI किसी पोस्ट के संदर्भ, व्यंग्य या स्थानीय भाषा को ठीक से नहीं समझ पाता, वहां मामला ह्यूमन रिव्यू टीम के पास जाता है। यूजर की शिकायत मिलने पर भी यही टीम कंपनी की कम्युनिटी गाइडलाइंस के अनुसार कंटेंट की समीक्षा कर कार्रवाई करती है।
भारत में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियम, 2021 के तहत सरकार या अदालत किसी कंटेंट को राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था या भ्रामक सूचना से जुड़ा मानने पर उसे हटाने का आदेश दे सकती है। ऐसे मामलों में सोशल मीडिया कंपनियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई करनी होती है।
Meta (Facebook-Instagram): कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स के आधार पर हेट स्पीच, बुलिंग और भ्रामक जानकारी पर कार्रवाई करता है। विवादित मामलों की समीक्षा के लिए स्वतंत्र ओवरसाइट बोर्ड भी मौजूद है.
YouTube: कम्युनिटी गाइडलाइंस के तहत वीडियो की समीक्षा करता है। जनहित या बड़े राजनीतिक मुद्दों से जुड़े कुछ वीडियो हटाने के बजाय चेतावनी के साथ जारी रखे जा सकते हैं.
X (पूर्व में Twitter): एलन मस्क के नेतृत्व में प्लेटफॉर्म ने कंटेंट हटाने के बजाय "Community Notes" मॉडल को बढ़ावा दिया है, जहां यूजर स्वयं संदर्भ और फैक्ट-चेक जोड़ सकते हैं.
यदि किसी यूजर का पोस्ट या वीडियो हटाया जाता है, तो Meta, YouTube और X तीनों प्लेटफॉर्म अपील करने की सुविधा देते हैं। समीक्षा के बाद यदि कार्रवाई गलत पाई जाती है, तो कंटेंट को दोबारा बहाल किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो हटाए जाने के मामले ने यह बहस तेज कर दी है कि क्या वैश्विक टेक कंपनियों के एल्गोरिदम और रिव्यू सिस्टम भारतीय राजनीतिक और सामाजिक संदर्भों को सही ढंग से समझ पाते हैं। साथ ही, इसने डिजिटल संप्रभुता, प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और कंटेंट मॉडरेशन की पारदर्शिता पर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। POCO ने आज यानी 4 अगस्त 2026 को भारत में अपना नया स्मार्टफोन POCO M8 Power लॉन्च कर दिया है। फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 8,000mAh सिलिकॉन-कार्बन बैटरी है। इसके अलावा इसमें 120Hz AMOLED डिस्प्ले, Snapdragon 4 Gen 4 चिपसेट और 50 मेगापिक्सल का डुअल AI कैमरा दिया गया है। 120Hz AMOLED डिस्प्ले और दमदार प्रोसेसर POCO M8 Power में 6.72 इंच का AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है। कंपनी ने फोन में Qualcomm का Snapdragon 4 Gen 4 प्रोसेसर दिया है। यह फोन रोजमर्रा के इस्तेमाल, सोशल मीडिया, वीडियो स्ट्रीमिंग और सामान्य गेमिंग के लिए बेहतर प्रदर्शन देने पर केंद्रित है। फोन में 6GB और 8GB RAM के साथ 128GB और 256GB तक स्टोरेज विकल्प मिलने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, सभी कॉन्फिगरेशन और उनकी कीमतों की जानकारी लॉन्च के बाद ही स्पष्ट हुई है। 8,000mAh बैटरी और 45W फास्ट चार्जिंग POCO M8 Power की सबसे खास बात इसकी 8,000mAh बैटरी है। कंपनी का दावा है कि यह बैटरी एक बार चार्ज करने पर तीन दिन तक का इस्तेमाल दे सकती है। फोन में 45W वायर्ड फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट भी दिया गया है। बड़ी बैटरी के साथ फोन में 22.5W रिवर्स वायर्ड चार्जिंग का सपोर्ट भी मिलने की जानकारी सामने आई है। इससे यूजर्स जरूरत पड़ने पर दूसरे डिवाइस को भी चार्ज कर सकेंगे। 50MP कैमरा और 5G कनेक्टिविटी फोटोग्राफी के लिए POCO M8 Power में 50MP AI डुअल रियर कैमरा दिया गया है। फोन में 5G कनेक्टिविटी के साथ आधुनिक कनेक्टिविटी फीचर्स भी मिलते हैं। कंपनी ने फोन को मुख्य रूप से लंबी बैटरी लाइफ और बड़ी AMOLED स्क्रीन चाहने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखकर पेश किया है। POCO M8 Power की बिक्री भारत में Flipkart के जरिए की जाएगी। लॉन्च से पहले फोन की कीमत को लेकर करीब ₹15,000 से ₹20,000 के बीच होने का अनुमान लगाया जा रहा था, लेकिन वास्तविक कीमत और बिक्री ऑफर लॉन्च के बाद स्पष्ट हुए हैं। कुल मिलाकर, 8,000mAh बैटरी, 120Hz AMOLED स्क्रीन और 5G कनेक्टिविटी के कारण POCO M8 Power बजट और मिड-रेंज सेगमेंट में उन ग्राहकों को आकर्षित कर सकता है, जो सबसे ज्यादा बैटरी बैकअप को प्राथमिकता देते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सैमसंग ने भारतीय बाजार में अपना नया मिड-रेंज स्मार्टफोन Galaxy F70 Pro 5G लॉन्च कर दिया है। फोन में 120Hz AMOLED डिस्प्ले, Snapdragon 6 Gen 3 प्रोसेसर, 6000mAh की बड़ी बैटरी और 50 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा दिया गया है। कंपनी ने इसे भारत में 25,999 रुपये की शुरुआती कीमत के साथ पेश किया है। तीन स्टोरेज वेरिएंट में आया फोन Samsung Galaxy F70 Pro 5G को तीन कॉन्फिगरेशन में पेश किया गया है। इसके 6GB RAM + 128GB स्टोरेज मॉडल की कीमत ₹25,999, 8GB + 128GB मॉडल की कीमत ₹29,999 और 8GB + 256GB वेरिएंट की कीमत ₹34,999 बताई गई है। फोन Aura Green और Alpha Black रंगों में उपलब्ध है। यह फोन फ्लिपकार्ट के जरिए बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया है। Galaxy F70 Pro 5G को Galaxy M47 5G के रीब्रांडेड वर्जन के तौर पर भी रिपोर्ट किया गया है。 120Hz AMOLED डिस्प्ले और Snapdragon प्रोसेसर Galaxy F70 Pro 5G में 6.7 इंच का FHD+ AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है। फोन में Qualcomm Snapdragon 6 Gen 3 चिपसेट लगाया गया है। इसमें LPDDR5X RAM और UFS 3.1 स्टोरेज तकनीक भी मिलती है। स्मार्टफोन Android 16 आधारित One UI 8.5 पर चलता है। कंपनी ने फोन के लिए 6 साल तक ऑपरेटिंग सिस्टम और सिक्योरिटी अपडेट देने का वादा किया है, जो इस सेगमेंट में इसकी बड़ी खासियतों में से एक है। 6000mAh बैटरी और 50MP कैमरा फोन में 6000mAh की बैटरी दी गई है, जो 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है। कैमरा सेटअप की बात करें तो पीछे 50MP मुख्य कैमरे के साथ 5MP अल्ट्रा-वाइड और 2MP मैक्रो कैमरा दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 12MP का फ्रंट कैमरा मिलता है। इसके अलावा फोन में 5G कनेक्टिविटी के साथ IP64 रेटिंग और NFC जैसे फीचर्स भी मिलते हैं। बड़ी बैटरी, AMOLED स्क्रीन और लंबे सॉफ्टवेयर सपोर्ट के कारण Galaxy F70 Pro 5G का मुकाबला भारतीय बाजार के अन्य मिड-रेंज 5G स्मार्टफोन से होगा।
Russia Anti-Starlink Weapon: रूस ने कथित तौर पर ऐसा नया इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम विकसित किया है, जिसे Starlink सैटेलाइट नेटवर्क को बाधित करने के लिए डिजाइन किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Volna Kupol Garant नाम का यह सिस्टम जमीन पर मौजूद Starlink टर्मिनल्स को सीधे निशाना बनाने के बजाय अंतरिक्ष में करीब 500 किलोमीटर की ऊंचाई पर मौजूद सैटेलाइट्स के संचार सिग्नल को प्रभावित करने की कोशिश करता है। इस दावे ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि Starlink नेटवर्क आधुनिक संचार व्यवस्था के साथ-साथ यूक्रेन युद्ध में सैन्य संचार के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में सैटेलाइट संचार को बाधित करने वाली किसी तकनीक का विकास रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट्स में इस सिस्टम की वास्तविक युद्धक क्षमता और बड़े पैमाने पर इसके प्रभाव को लेकर अभी कई सवाल मौजूद हैं। जमीन पर टर्मिनल नहीं, सीधे सैटेलाइट पर निशाना आमतौर पर सैटेलाइट इंटरनेट को बाधित करने के लिए जमीन पर मौजूद टर्मिनल या उसके आसपास के रेडियो लिंक को निशाना बनाया जा सकता है। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक Volna Kupol Garant का तरीका अलग है। बताया गया है कि यह सिस्टम शक्तिशाली रेडियो सिग्नल के जरिए अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट के रिसीविंग एंटेना को प्रभावित करने का प्रयास करता है। इसका उद्देश्य सैटेलाइट और जमीन के बीच संचार को बाधित करना है, जिससे संबंधित क्षेत्र में Starlink की इंटरनेट और संचार सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। रिपोर्ट्स में करीब 20 किलोमीटर के क्षेत्र में सेवा बाधित होने का दावा किया गया है। हालांकि, इस दायरे और सिस्टम की वास्तविक प्रभावशीलता की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है। Volna Kupol Garant कैसे काम करता है? रिपोर्ट के अनुसार, इस सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के लिए नैरो-बीम हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो सिग्नल और फेज्ड-एरे एंटेना जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इसका मूल उद्देश्य सैटेलाइट के संचार रिसेप्शन को इतना प्रभावित करना है कि सिग्नल अस्थिर हो जाएं और संबंधित क्षेत्र में Starlink कनेक्टिविटी बाधित हो। रिपोर्ट्स में Starlink के कई डेटा ट्रांसमिशन बैंड्स को प्रभावित करने की क्षमता का भी दावा किया गया है। हालांकि, इस तरह के तकनीकी दावों को स्वतंत्र परीक्षण और विश्वसनीय सार्वजनिक डेटा के बिना अंतिम निष्कर्ष के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी। छह मॉड्यूल वाला बताया जा रहा है सिस्टम Volna Kupol Garant को कथित तौर पर मॉड्यूलर डिजाइन के साथ तैयार किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके ढांचे में छह ट्रेलर-माउंटेड मॉड्यूल शामिल हैं और इनमें ऐसे एंटेना लगाए गए हैं जिन्हें अलग-अलग स्थानों से संचालित किया जा सकता है। इस तरह की संरचना का एक संभावित फायदा यह हो सकता है कि सिस्टम को जरूरत के अनुसार अलग-अलग जगहों पर तैनात किया जा सके। लेकिन बड़े आकार और सक्रिय एंटेना के कारण इसकी मौजूदगी को इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणालियों से छिपाना चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है। रूस के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह तकनीक? Starlink जैसी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं पारंपरिक संचार नेटवर्क के बाधित होने की स्थिति में भी कनेक्टिविटी उपलब्ध करा सकती हैं। इसी वजह से आधुनिक युद्ध में सैटेलाइट संचार का रणनीतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है। अगर किसी देश के पास सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क को बाधित करने की प्रभावी क्षमता विकसित हो जाती है, तो इसका असर केवल इंटरनेट सेवा तक सीमित नहीं रह सकता। संचार, निगरानी और युद्धक्षेत्र में सूचनाओं के आदान-प्रदान पर भी इसका रणनीतिक प्रभाव पड़ सकता है। यही वजह है कि रूस की कथित एंटी-Starlink क्षमता को अमेरिका और यूक्रेन के लिए भी गंभीर रणनीतिक चिंता के तौर पर देखा जा रहा है। सिस्टम की कमजोरियां भी कम नहीं इस तकनीक की अपनी सीमाएं भी बताई जा रही हैं। बड़े आकार के उपकरण और लगातार सक्रिय रहने वाले एंटेना इसे इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस के लिए अपेक्षाकृत आसानी से पहचाने जाने वाला लक्ष्य बना सकते हैं। इसके अलावा, किसी सिस्टम के कागज पर मौजूद तकनीकी दावे और वास्तविक युद्धक्षेत्र में उसकी क्षमता अलग-अलग हो सकती है। फिलहाल इस सिस्टम के युद्ध में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और उसकी वास्तविक प्रभावशीलता को लेकर सार्वजनिक रूप से पर्याप्त स्वतंत्र प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। क्या Starlink के लिए बढ़ सकता है खतरा? रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध ने सैटेलाइट इंटरनेट को आधुनिक संघर्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है। ऐसे में Starlink जैसे नेटवर्क को बाधित करने वाली इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीकों का विकास भविष्य के युद्धों की दिशा को प्रभावित कर सकता है। लेकिन यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क केवल एक तकनीक पर निर्भर नहीं होते। नेटवर्क में मौजूद सैटेलाइट्स, ग्राउंड सिस्टम और सॉफ्टवेयर स्तर पर किए जाने वाले बदलाव किसी भी जैमिंग प्रयास के प्रभाव को कम करने में भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए Volna Kupol Garant को फिलहाल एक संभावित एंटी-Starlink इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली के रूप में देखना अधिक उचित होगा, न कि Starlink को पूरी तरह निष्क्रिय कर देने वाले सिद्ध हथियार के तौर पर।