बिहार

बेगूसराय में खतरे के निशान के करीब गंगा, कटाव बढ़ा

Ganga Water Level: बेगूसराय में खतरे के निशान के करीब पहुंची गंगा, कटाव से ग्रामीणों में दहशत

ranjan kumar tiwari अगस्त 10, 2026 0
बेगूसराय के हथीदह में बढ़ते गंगा जलस्तर और मटिहानी में कटाव का दृश्य
बेगूसराय में गंगा का जलस्तर बढ़ने से कटाव का खतरा बढ़ा

बेगूसराय। गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने बेगूसराय और आसपास के इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। हथीदह में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब एक मीटर नीचे पहुंच गया है। वहीं, मटिहानी इलाके में लगातार हो रहे कटाव के कारण ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में भी गंगा के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की जा रही है।

 

हथीदह में खतरे के निशान से करीब एक मीटर नीचे गंगा

 

बेगूसराय के हथीदह में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। खतरे का निशान 41.760 मीटर निर्धारित है, जबकि रविवार को जलस्तर 40.27 मीटर तक पहुंच गया।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यदि जलस्तर बढ़ने की मौजूदा रफ्तार बनी रही तो आने वाले दिनों में गंगा खतरे के निशान के करीब पहुंच सकती है। हालांकि, फिलहाल जिले में बाढ़ का तत्काल खतरा नहीं बताया गया है।

 

मटिहानी में कटाव से ग्रामीणों में दहशत

 

बेगूसराय के मटिहानी विधानसभा क्षेत्र के महेंद्रपुर गांव में पिछले करीब 20 दिनों से गंगा का कटाव जारी है। कटाव के कारण सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि नदी में समा चुकी है।

अब कटाव आबादी वाले क्षेत्र की ओर बढ़ने लगा है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि कटाव की रफ्तार नहीं थमी तो गांव के सामने भी खतरा बढ़ सकता है।

 

मुंगेर और कहलगांव में भी बढ़ रहा जलस्तर

 

बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, मुंगेर में गंगा का जलस्तर बढ़कर 36.24 मीटर तक पहुंच गया है। यहां खतरे का निशान 39.33 मीटर है।

भागलपुर के कहलगांव में भी गंगा का जलस्तर 29.82 मीटर दर्ज किया गया, जबकि यहां खतरे का निशान 31.090 मीटर है।

 

प्रयागराज से पटना तक बढ़ रहा पानी

 

गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी का असर उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में भी देखा जा रहा है। प्रयागराज में गंगा का जलस्तर 75.53 मीटर और वाराणसी में 63.72 मीटर दर्ज किया गया है।

बक्सर में गंगा 54.40 मीटर और पटना के गांधी घाट पर 47.36 मीटर के स्तर पर बह रही है। जलस्तर बढ़ने का सिलसिला जारी रहने से नदी किनारे बसे इलाकों के लोगों की चिंता बढ़ गई है।

 

फिलहाल तत्काल बाढ़ का खतरा नहीं

 

प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल बेगूसराय में तत्काल बाढ़ का खतरा नहीं बताया गया है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि नदी के जलस्तर में वृद्धि की रफ्तार कभी भी बदल सकती है।

गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर और मटिहानी में हो रहे कटाव को देखते हुए स्थानीय लोग सतर्क हैं। प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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मुजफ्फरपुर पुलिस द्वारा मानव तस्करी के खिलाफ रेस्क्यू अभियान
Muzaffarpur News: मानव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 648 महिलाओं और युवतियों का रेस्क्यू

मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर में मानव तस्करी और महिलाओं-युवतियों को झांसे में फंसाने वाले गिरोहों के खिलाफ पुलिस ने विशेष अभियान चलाया है। पुलिस के मुताबिक, इस अभियान के तहत अब तक बिहार समेत दूसरे राज्यों से 648 लापता महिलाओं और युवतियों को सुरक्षित बरामद किया जा चुका है। पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह नौकरी, प्रेम और बेहतर भविष्य का झांसा देकर महिलाओं और युवतियों को अपने जाल में फंसाते थे।   648 महिलाओं और युवतियों को कराया गया रेस्क्यू   मुजफ्फरपुर पुलिस के अनुसार, जिले से लापता महिलाओं और युवतियों की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। पुलिस ने बिहार के अलावा देश के अन्य राज्यों में भी कार्रवाई की और अब तक 648 महिलाओं एवं युवतियों को सुरक्षित बरामद किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लापता होने का कारण चाहे पारिवारिक विवाद, प्रेम प्रसंग या कोई अन्य परिस्थिति हो, हर मामले में महिला या युवती की सुरक्षित बरामदगी को प्राथमिकता दी जा रही है।   बस स्टैंड पर नौकरी का झांसा, रेड लाइट एरिया में पहुंचाया   पुलिस के मुताबिक, मुजफ्फरपुर की एक युवती घर से नाराज होकर बाहर निकली थी। इसी दौरान बस स्टैंड पर एक व्यक्ति ने उसे नौकरी दिलाने का झांसा दिया। आरोप है कि वह युवती को बहला-फुसलाकर पहले पश्चिम बंगाल और फिर भागलपुर के रेड लाइट इलाके में ले गया, जहां उसे बेच दिया गया। मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई कर युवती को सुरक्षित रेस्क्यू किया और उसके परिजनों को सौंप दिया।   रेलवे स्टेशन से सोशल मीडिया तक गिरोह का नेटवर्क   पुलिस की जांच में सामने आया है कि मानव तस्करी से जुड़े गिरोह बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी सक्रिय हैं। आरोपी कथित तौर पर फर्जी पहचान बनाकर युवतियों से संपर्क करते हैं और उन्हें नौकरी, पैसे या प्रेम का झांसा देते हैं। इसके बाद उन्हें ब्लैकमेल कर शोषण और तस्करी के जाल में फंसाने की कोशिश की जाती है।   महिलाओं और युवतियों से पुलिस ने की सतर्क रहने की अपील   मुजफ्फरपुर पुलिस ने महिलाओं और युवतियों से अनजान लोगों के नौकरी या मदद के प्रस्ताव पर तुरंत भरोसा नहीं करने की अपील की है। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर अजनबियों से बातचीत करते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए। पुलिस ने परिवारों से भी अपील की है कि यदि कोई महिला या युवती लापता होती है, तो मामले की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि उसकी तलाश जल्द शुरू की जा सके।   लापता लोगों की तलाश में टीमें लगातार सक्रिय   पुलिस के मुताबिक, अलग-अलग थाना क्षेत्रों में विशेष टीमें लापता महिलाओं और युवतियों की तलाश में लगातार काम कर रही हैं। जरूरत के अनुसार दूसरे राज्यों में भी पुलिस कार्रवाई कर रही है। अभियान के दौरान बरामद महिलाओं और युवतियों को सुरक्षित उनके परिजनों तक पहुंचाया जा रहा है।

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बिहार में पंचायत चुनाव कब होंगे? मंत्री दीपक प्रकाश ने बताया, पहले होगा परिसीमन, फिर चुनाव

कटिहार: बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर राज्य सरकार की ओर से महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने स्पष्ट किया है कि राज्य में पंचायत चुनाव परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कराए जाएंगे। सरकार ने पंचायतों के परिसीमन का निर्णय लिया है और इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। कटिहार जिले के कोढ़ा प्रखंड की मड़वा पंचायत में एक कार्यक्रम में पहुंचे पंचायती राज मंत्री ने पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि परिसीमन पूरा होने के बाद ही पंचायत चुनाव कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पहले परिसीमन, उसके बाद पंचायत चुनाव मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन का काम कराया जाएगा। सरकार की ओर से परिसीमन कराने का निर्णय लिया जा चुका है। इसके पूरा होने के बाद ही चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव निर्वाचन आयोग के निर्देशन में कराए जाने हैं। विभाग की ओर से निर्वाचन आयोग को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि परिसीमन और चुनाव से जुड़ी प्रक्रियाएं समय पर पूरी की जा सकें। चुनाव की तारीख बताना अभी संभव नहीं पंचायत चुनाव कब होंगे, इस सवाल पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि फिलहाल निश्चित तारीख बताना उनके या पंचायती राज विभाग के लिए संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव से जुड़ी पूरी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के स्तर पर पूरी की जानी है। मंत्री के मुताबिक सरकार की कोशिश रहेगी कि परिसीमन और चुनाव से संबंधित सभी आवश्यक कार्य समय पर पूरे हों। हालांकि, अंतिम समय-सारणी निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया और तैयारियों पर निर्भर करेगी। निर्वाचन आयोग के निर्देशन में होगी प्रक्रिया दीपक प्रकाश ने कहा कि पंचायत चुनाव से जुड़े कार्यों में निर्वाचन आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी आयोग को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है। उन्होंने भरोसा जताया कि विभाग अपनी ओर से हर संभव सहायता देगा, ताकि परिसीमन से लेकर चुनाव कराने तक की प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी की जा सके। कार्यक्रम में मौजूद रहे कई नेता मंत्री दीपक प्रकाश के कटिहार दौरे के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से जुड़े कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कोढ़ा की विधायक कविता पासवान समेत राष्ट्रीय लोक मोर्चा और भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। मंत्री का स्वागत मकदमपुर पंचायत के मड़वा गांव स्थित राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रदेश सचिव संतोष मेहता के आवास पर किया गया। इस दौरान उन्हें पुष्पगुच्छ और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता कुणाल सिंह, भारतीय जनता पार्टी के नेता रमन झा, कोढ़ा मंडल अध्यक्ष मनोज सिंह कुशवाहा समेत कई जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद रहे। बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। पंचायत चुनाव की तैयारी पर टिकी नजर मंत्री के बयान के बाद बिहार में पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर तस्वीर कुछ हद तक स्पष्ट हुई है। फिलहाल सरकार की प्राथमिकता परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करना है। इसके बाद निर्वाचन आयोग की देखरेख में चुनाव की आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि, पंचायत चुनाव की निश्चित तारीख अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में अब निगाहें परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने और निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाने पर टिकी हैं।  

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Tejashwi Yadav raises questions over alleged evidence and action in the Bihar Srijan scam during a political debate.
Srijan Scam: सृजन घोटाले पर तेजस्वी यादव का BJP पर बड़ा हमला, पूछा- सबूत मिले तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

पटना: बिहार का बहुचर्चित सृजन घोटाला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सवाल उठाते हुए जांच में सामने आए कथित साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा उठाया है। तेजस्वी यादव का आरोप है कि सृजन घोटाले की जांच के दौरान ऐसे दस्तावेज और साक्ष्य सामने आए थे, जिनसे घोटाले से जुड़े लोगों और कुछ प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों के बीच कथित संपर्क या लेनदेन के संकेत मिलते थे। उनका सवाल है कि अगर जांच एजेंसियों के पास ऐसे साक्ष्य मौजूद थे, तो संबंधित लोगों के खिलाफ आगे कार्रवाई क्यों नहीं की गई। हालांकि, ये दावे तेजस्वी यादव के राजनीतिक आरोप हैं और इनके संबंध में संबंधित भाजपा नेताओं या जांच एजेंसियों की विस्तृत प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के समय तक सामने नहीं आई है। सृजन घोटाले पर फिर गरमाई बिहार की राजनीति भागलपुर से सामने आया सृजन घोटाला बिहार के सबसे चर्चित वित्तीय घोटालों में शामिल रहा है। मामले में सरकारी विभागों और संस्थानों की रकम को कथित तौर पर फर्जी बैंक खातों और अन्य वित्तीय माध्यमों के जरिए स्थानांतरित किए जाने का आरोप सामने आया था। घोटाले का खुलासा होने के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हुआ। मामले की जांच आगे बढ़ी और केंद्रीय जांच एजेंसियां भी इसके अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल में शामिल हुईं। समय-समय पर विपक्ष इस मामले को लेकर तत्कालीन और मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व पर सवाल उठाता रहा है। अब तेजस्वी यादव के ताजा बयान ने पुराने मामले को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। तेजस्वी ने जांच और कार्रवाई के तरीके पर उठाया सवाल तेजस्वी यादव का मुख्य सवाल जांच के दौरान सामने आए कथित साक्ष्यों और उसके बाद हुई कार्रवाई को लेकर है। उनका कहना है कि यदि जांच के दौरान प्रभावशाली लोगों और सृजन घोटाले से जुड़े आरोपियों के बीच संबंधों के संकेत या प्रमाण मिले थे, तो कार्रवाई सभी संबंधित लोगों तक क्यों नहीं पहुंची। तेजस्वी ने इस आधार पर जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रभाव रखने वाले कुछ लोगों को कथित तौर पर बचाया गया। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक संलिप्तता या दोष सिद्ध होने का निष्कर्ष केवल राजनीतिक आरोपों के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए जांच एजेंसियों के आधिकारिक निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण हैं। क्या है सृजन घोटाला? सृजन घोटाला मुख्य रूप से बिहार के भागलपुर में सरकारी धन के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा मामला है। आरोपों के मुताबिक सरकारी विभागों और संस्थानों की रकम को ऐसे बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया, जिनका संबंध सृजन महिला विकास सहयोग समिति से बताया गया। लंबे समय तक इन कथित वित्तीय अनियमितताओं का पता नहीं चल पाया। बाद में बैंक खातों और सरकारी रिकॉर्ड की जांच के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आने के बाद मामला गंभीर जांच के दायरे में आया। इसके बाद राज्य स्तर पर कार्रवाई के साथ केंद्रीय जांच एजेंसियों ने भी मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की। राजनीतिक आरोपों के बीच भाजपा के जवाब पर नजर तेजस्वी यादव के ताजा बयान के बाद अब भाजपा की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। राजनीतिक रूप से यह मुद्दा विपक्ष के लिए सरकार और जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाने का एक और आधार बन सकता है। दूसरी ओर, किसी भी आरोप की वास्तविकता तय करने के लिए जांच एजेंसियों की रिपोर्ट, दस्तावेजी साक्ष्य और अदालतों में हुई कार्रवाई को देखना जरूरी होगा। चुनावी माहौल में फिर बड़ा मुद्दा बन सकता है सृजन घोटाला बिहार में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के बीच सृजन घोटाले का दोबारा चर्चा में आना महत्वपूर्ण है। भ्रष्टाचार, सरकारी धन की सुरक्षा और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता जैसे मुद्दे चुनावी राजनीति में पहले भी प्रमुख रहे हैं। तेजस्वी यादव के बयान से संकेत मिलता है कि RJD आने वाले समय में सृजन घोटाले को राजनीतिक मुद्दे के तौर पर और जोर से उठा सकती है। अब निगाहें भाजपा की प्रतिक्रिया और जांच एजेंसियों की ओर से सामने आने वाले आधिकारिक तथ्यों पर रहेंगी। यदि मामले में कोई नया दस्तावेज, जांच निष्कर्ष या न्यायिक कार्रवाई सामने आती है, तो सृजन घोटाले पर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।  

surbhi अगस्त 10, 2026 0
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