जमशेदपुर: भाजपा द्वारा बुलाये गये झारखंड बंद के बीच मंगलवार को जमशेदपुर में फिलहाल जनजीवन सामान्य नजर आ रहा है. शहर में बस, ऑटो और मिनी बसों का परिचालन जारी है, वहीं निजी और सरकारी स्कूलों में भी सुबह की पाली में पढ़ाई सामान्य रूप से चलती रही. हालांकि, बंद को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए जिले के 55 प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर 55 दंडाधिकारियों की तैनाती की गयी है. जेपी सेतु बस स्टैंड से बसों का परिचालन जारी मंगलवार सुबह भुइयांडीह स्थित जेपी सेतु बस स्टैंड से रांची, धनबाद, बोकारो, चाईबासा समेत राज्य के अलग-अलग हिस्सों के लिए यात्री बसों का परिचालन जारी रहा. शहर के भीतर भी ऑटो और मिनी बसें सामान्य दिनों की तरह चलती दिखीं. इससे यात्रियों को फिलहाल आवागमन में किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा. वहीं, शहर के निजी और सरकारी स्कूलों में भी सुबह की पाली में पठन-पाठन सामान्य रूप से जारी रहा. बच्चे समय पर स्कूल पहुंचे और शैक्षणिक गतिविधियां भी संचालित होती रहीं. 55 जगहों पर मजिस्ट्रेट तैनात बंद के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. जमशेदपुर के 55 प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गयी है. मानगो, साकची, बिष्टुपुर, जुगसलाई, टेल्को, परसुडीह और बागबेड़ा के अलावा घाटशिला, चाकुलिया और बहरागोड़ा जैसे क्षेत्रों में भी पुलिस और प्रशासन की निगरानी बढ़ा दी गयी है. डिमना चौक और टाटानगर स्टेशन पर विशेष सुरक्षा बंद के दौरान भीड़ या किसी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए डिमना चौक और टाटानगर रेलवे स्टेशन पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गयी है. यहां वाटर कैनन, वज्र वाहन और अश्रुगैस टीमों को तैयार रखा गया है. एसडीओ धालभूम, एसडीओ घाटशिला, सिटी एसपी और ग्रामीण एसपी समेत वरीय अधिकारी अलग-अलग क्षेत्रों में भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं. पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है. जबरन दुकान बंद करायी तो होगी FIR जिला प्रशासन ने बंद समर्थकों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी. प्रशासन के अनुसार, बंद के नाम पर जबरन दुकान बंद कराने, एनएच-33 या रेलवे ट्रैक को बाधित करने, सार्वजनिक आवागमन रोकने अथवा सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जायेगी. वीडियोग्राफी से रखी जा रही नजर प्रदर्शन और जुलूस के संभावित मार्गों के साथ प्रमुख चौक-चौराहों पर वीडियोग्राफी भी करायी जा रही है. इसका उद्देश्य उपद्रव या कानून तोड़ने वालों की पहचान करना है. प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी तरह की हिंसा या तोड़फोड़ करने वालों को बख्शा नहीं जायेगा. फिलहाल बंद का असर सीमित मंगलवार सुबह तक जमशेदपुर में बंद का व्यापक असर देखने को नहीं मिला है. बस, ऑटो और मिनी बसों के परिचालन के साथ स्कूल-कॉलेज भी सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं. हालांकि, प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है और संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है.
जमशेदपुर: JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में छात्र संगठनों के 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव को लेकर जमशेदपुर में पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है. रांची जाने वाले छात्रों को रोकने के लिए शहर के प्रमुख मार्गों, चेक पोस्ट और बस स्टैंडों पर पुलिस बल तैनात किया गया है. वाहनों की सघन जांच की जा रही है. जमशेदपुर से बड़ी संख्या में छात्रों के रांची पहुंचने की संभावना को देखते हुए पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. रांची की ओर जाने वाले मार्गों पर बसों और निजी वाहनों को रोककर जांच की जा रही है. संदिग्ध नजर आने वाले युवाओं और छात्रों से पूछताछ भी की जा रही है. मेरिन ड्राइव, काली मंदिर और जेपी सेतु पर चेकिंग प्रशासन ने जमशेदपुर से रांची जाने वाले प्रमुख रास्तों पर विशेष निगरानी बढ़ा दी है. सोनारी मेरिन ड्राइव, काली मंदिर पारडीह और जेपी सेतु समेत अन्य प्रमुख स्थानों पर पुलिस की तैनाती की गयी है. इन रास्तों से गुजरने वाली यात्री बसों और निजी चार पहिया वाहनों की जांच की जा रही है. पुलिस यह भी पता कर रही है कि संदिग्ध युवक या छात्रों के समूह रांची की ओर तो नहीं जा रहे हैं. हालांकि आम यात्रियों वाली बसों को रोकने और वाहनों की जांच के संबंध में प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं दी गयी है. क्या है छात्रों का आंदोलन? छात्र संगठन JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. उनकी प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं को रद्द करना, निष्पक्ष जांच कराना और पारदर्शी तरीके से दोबारा परीक्षा आयोजित करना शामिल है. आंदोलनकारी छात्र पूरे मामले की CBI जांच की भी मांग कर रहे हैं. छात्रों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ा है. 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान परीक्षा विवाद के बाद राज्यभर से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे थे, जहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया. अब छात्रों ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए 10 अगस्त को पुरानी विधानसभा से नयी विधानसभा तक मार्च और घेराव का ऐलान किया है. इसे देखते हुए रांची के साथ-साथ जमशेदपुर और राज्य के अन्य जिलों में भी पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है. जमशेदपुर में मुख्य मार्गों और सीमावर्ती चेक पोस्टों पर निगरानी बढ़ने से रांची जाने वाले यात्रियों को भी जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है.
जमशेदपुर: झारखंड विधानसभा घेराव और छात्र आंदोलन के ऐलान को लेकर सोमवार को जमशेदपुर में पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट नजर आया. राजधानी रांची में प्रस्तावित विधानसभा घेराव में प्रदर्शनकारियों के शामिल होने की आशंका को देखते हुए शहर के प्रमुख मार्गों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी है. पुलिस की ओर से शहर के अलग-अलग हिस्सों में वाहनों की जांच की जा रही है. प्रशासन की कोशिश है कि कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को समय रहते रोका जा सके. सुबह 7 बजे से डोबा पुल पर पुलिस तैनात सोनारी स्थित मरीन ड्राइव के डोबा पुल के पास सोमवार सुबह करीब सात बजे से ही पुलिस बल की तैनाती कर दी गयी. यहां से गुजरने वाले छोटे-बड़े वाहनों की बारीकी से जांच की जा रही है. पुलिस यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि कोई भी व्यक्ति संदिग्ध तरीके से राजधानी की ओर न जाए. वाहनों को रोककर उनकी जांच की जा रही है और जरूरत के मुताबिक पूछताछ भी की जा रही है. प्रमुख चौक-चौराहों पर बढ़ाई गयी निगरानी डोबा पुल के अलावा जमशेदपुर के प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है. पुलिस अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं. विधानसभा घेराव को लेकर राजधानी रांची में पहले से ही सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गये हैं. ऐसे में जमशेदपुर से बड़ी संख्या में लोगों के रांची जाने की संभावना को देखते हुए स्थानीय स्तर पर भी निगरानी बढ़ायी गयी है. प्रशासन की लोगों से शांतिपूर्ण रहने की अपील पुलिस-प्रशासन की ओर से लोगों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की गयी है. अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखना है.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।