political speculation

TMC MP Sayoni Ghosh amid political speculation over party strategy and Delhi meeting discussions.
सायोनी घोष के बागी खेमे में शामिल होने की चर्चा, दिल्ली बैठक ने बढ़ाई सियासी हलचल

  नई दिल्ली/कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में कथित अंदरूनी असंतोष और नेताओं के रुख को लेकर राजनीतिक चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। इसी बीच जादवपुर से सांसद सायोनी घोष का नाम भी उन नेताओं में शामिल किया जा रहा है, जिनके बारे में विभिन्न राजनीतिक दावे किए जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई एक बैठक के बाद राजनीतिक अटकलों को और बल मिला है। बैठक में क्या चर्चा हुई और उसमें शामिल नेताओं ने किस तरह का फैसला लिया, इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। दिल्ली बैठक पर बढ़ी चर्चा राजनीतिक सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि बैठक में पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और कुछ सांसदों की भावी रणनीति पर चर्चा हुई। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित नेताओं की ओर से भी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सायोनी घोष का नाम सामने आने के बाद बंगाल की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वह लंबे समय से टीएमसी की प्रमुख युवा चेहरों में गिनी जाती रही हैं और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी हैं। सांसदों को लेकर अलग-अलग दावे राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कुछ सांसदों के एक अलग समूह के रूप में सामने आने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। इस संबंध में न तो किसी संसदीय प्राधिकरण की ओर से कोई पुष्टि हुई है और न ही संबंधित सांसदों ने सार्वजनिक रूप से कोई औपचारिक घोषणा की है। टीएमसी की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान इन सभी दावों और अटकलों के बीच तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और सांसदों के रुख से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल दिल्ली में हुई कथित बैठक और उससे जुड़ी चर्चाओं ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
TMC MP Shatabdi Roy amid speculation over internal party differences and political developments in West Bengal.
शताब्दी रॉय के बागी खेमे में शामिल होने के दावों से बंगाल की राजनीति में हलचल, टीएमसी और विपक्ष आमने-सामने

  नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की वरिष्ठ सांसद शताब्दी रॉय के पार्टी नेतृत्व से नाराज होने और बागी खेमे के साथ खड़े होने के दावे सामने आए। इन दावों के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में कुछ सांसदों और नेताओं की बैठकों के बाद यह अटकलें तेज हुईं कि टीएमसी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। इन दावों पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। शताब्दी रॉय को लेकर क्या हैं दावे? राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि शताब्दी रॉय ने पार्टी के कामकाज और नेतृत्व शैली को लेकर नाराजगी जताई है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उन्होंने पार्टी के भीतर संवाद की कमी और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इस संबंध में कोई औपचारिक बयान सार्वजनिक रूप से जारी किया गया है। दिल्ली की बैठकों पर टिकी नजर सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में दिल्ली में कई राजनीतिक बैठकें हुई हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल के राजनीतिक भविष्य और संसदीय रणनीति पर चर्चा की गई। इन बैठकों के बाद विपक्षी दलों और टीएमसी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सही साबित होती हैं, तो इसका असर भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर पड़ सकता है। टीएमसी का पलटवार टीएमसी नेताओं ने पार्टी छोड़ने या बड़े पैमाने पर टूट की खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि विपक्ष जानबूझकर भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस एकजुट है और नेतृत्व के प्रति कार्यकर्ताओं का विश्वास कायम है। वहीं विपक्ष का दावा है कि राज्य की राजनीति में बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं और आने वाले दिनों में और भी राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। आगे क्या? फिलहाल सभी की नजर शताब्दी रॉय और टीएमसी नेतृत्व की ओर से आने वाली आधिकारिक प्रतिक्रियाओं पर है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि जब तक संबंधित पक्षों की ओर से स्पष्ट बयान नहीं आता, तब तक इन दावों को पुष्टि के बजाय राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी इस घटनाक्रम पर आने वाले दिनों में और तस्वीर साफ होने की संभावना है।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
K Annamalai arrives in Delhi amid speculation over his future role in BJP
क्या बीजेपी छोड़ेंगे अन्नामलाई? आज करेंगे पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात,चर्चाएं तेज

  तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष K. Annamalai के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों का दौर तेज हो गया है। राज्य की राजनीति में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या अन्नामलाई भाजपा में बने रहेंगे या कोई नया राजनीतिक रास्ता चुनेंगे। इन अटकलों के बीच वह सोमवार को दिल्ली पहुंचे, जहां उनकी मंगलवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin से मुलाकात होनी है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में पार्टी में उनकी भविष्य की भूमिका और तमिलनाडु की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा हो सकती है। भाजपा की ओर से अब तक किसी बड़े बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। कोयंबटूर में लगे पोस्टरों ने बढ़ाई सियासी हलचल अन्नामलाई के जन्मदिन से पहले कोयंबटूर में उनके समर्थकों द्वारा लगाए गए पोस्टरों ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। पोस्टरों पर "हमारे नेता, आइए और हमारा नेतृत्व कीजिए" जैसे संदेश लिखे गए हैं, जिसके बाद उनके नए राजनीतिक मंच बनाने की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई। इन पोस्टरों को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, अन्नामलाई ने अभी तक इस पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है। 'दो दिन इंतजार कीजिए', अन्नामलाई का संकेत दिल्ली रवाना होने से पहले अन्नामलाई ने मीडिया के सवालों पर कहा कि लोग दो दिन इंतजार करें। उन्होंने कहा कि जल्द ही वह अपनी स्थिति और आगे की योजना पर खुलकर बात करेंगे। उनके इस बयान ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है। कई विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में कोई बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। आईपीएस अधिकारी से भाजपा के प्रमुख चेहरे तक का सफर पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई वर्ष 2020 में भाजपा में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्होंने तेजी से पार्टी में अपनी पहचान बनाई और 2021 से 2025 तक तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई राज्यव्यापी अभियानों का नेतृत्व किया और युवाओं के बीच मजबूत समर्थन आधार तैयार किया। सोशल मीडिया पर भी उनकी बड़ी लोकप्रियता रही है। त्रिभाषा नीति पर रुख से बढ़ीं चर्चाएं  हाल के दिनों में अन्नामलाई ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए लागू की जा रही त्रिभाषा नीति को लेकर अपनी असहमति जताई थी और अधिसूचना वापस लेने की मांग की थी। उनके इस रुख के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या वह पार्टी नेतृत्व से कुछ मुद्दों पर अलग राय रखते हैं। भाजपा नेताओं ने किसी भी तरह के मतभेद की अटकलों को खारिज किया है। नई पार्टी या भाजपा में बड़ी जिम्मेदारी? राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बात को लेकर अलग-अलग राय है। कुछ का मानना है कि अन्नामलाई भाजपा में ही अधिक महत्वपूर्ण भूमिका की तलाश कर रहे हैं, जबकि कुछ पर्यवेक्षकों का अनुमान है कि वह भविष्य में अलग राजनीतिक मंच तैयार कर सकते हैं। भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि अन्नामलाई पार्टी के महत्वपूर्ण नेताओं में शामिल हैं और उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। पार्टी नेतृत्व भी किसी संभावित अलगाव की संभावना से इनकार कर रहा है। बैठक पर टिकीं राजनीतिक निगाहें फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति की नजरें अन्नामलाई और नितिन नवीन की बैठक पर टिकी हुई हैं। इस मुलाकात के बाद ही साफ हो सकेगा कि अन्नामलाई भाजपा के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखेंगे या कोई नया राजनीतिक कदम उठाएंगे।  

Deepshikha जून 2, 2026 0
Benjamin Netanyahu speaks on expanding Israeli military control over large parts of Gaza amid ongoing conflict
गाजा के 70% हिस्से पर कब्जे की तैयारी में इजराइल, नेतन्याहू बोले- धीरे-धीरे बढ़ाएंगे नियंत्रण

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी के 70 प्रतिशत हिस्से पर सैन्य नियंत्रण स्थापित करने का संकेत देकर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा दिया है। वेस्ट बैंक में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि इजराइली सेना धीरे-धीरे गाजा के बड़े हिस्से को अपने नियंत्रण में ले रही है और अब सैन्य दबाव को और बढ़ाया जाएगा। नेतन्याहू बोले- “एक-एक कदम आगे बढ़ेंगे” कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा, “हम इस समय हमास को दबा रहे हैं। पहले हम गाजा के 50 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित कर रहे थे, अब यह बढ़कर 60 प्रतिशत हो चुका है।” उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने सैन्य नियंत्रण को और बढ़ाने का आदेश दिया है। इसी दौरान भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने “100 प्रतिशत” कब्जे की मांग करते हुए नारे लगाए। इस पर नेतन्याहू ने जवाब दिया, “एक-एक कदम आगे बढ़ते हैं। पहले 70 प्रतिशत तक पहुंचते हैं। फिलहाल वहीं से शुरुआत करते हैं।” सीजफायर समझौते के खिलाफ माना जा रहा कदम विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि इजराइल का यह कदम अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम समझौते की शर्तों के विपरीत है। समझौते के तहत इजराइली सेना को एक तय “येलो लाइन” के पीछे हटना था। उस समय गाजा का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा इजराइली नियंत्रण में माना जा रहा था। हालांकि हमास का आरोप है कि इजराइल धीरे-धीरे इस सीमा को आगे बढ़ा रहा है और अब गाजा के लगभग 60 से 64 प्रतिशत हिस्से पर उसका नियंत्रण हो चुका है। शांति वार्ता ठप, दोनों पक्ष आमने-सामने इजराइल और हमास के बीच जारी शांति योजना के अगले चरण में हमास के हथियार छोड़ने और इजराइली सेना की वापसी का प्रस्ताव शामिल है। लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिलहाल पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। इजराइल का कहना है कि वह हमास को पूरी तरह कमजोर किए बिना पीछे नहीं हटेगा, जबकि हमास इजराइली सैन्य कार्रवाई को युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बता रहा है। गाजा में मानवीय संकट और गहरा सकता है विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इजराइल गाजा के 70 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है, तो वहां मानवीय संकट और गंभीर हो सकता है। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी स्थिति में गाजा की करीब 22 लाख आबादी को कुल जमीन के एक-तिहाई से भी कम हिस्से में रहने को मजबूर होना पड़ सकता है। युद्ध, बमबारी और लगातार विस्थापन के कारण गाजा के ज्यादातर इलाके पहले ही तबाह हो चुके हैं। “हर खाली जगह पर टेंट लगे हैं” यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के विजिटिंग फेलो मुहम्मद शेहादा ने कहा कि हालात पहले से ही बेहद खराब हैं। उन्होंने कहा, “हर खाली जगह पर विस्थापित परिवारों के टेंट लगे हुए हैं। अगर इलाका और छोटा हो गया, तो बड़ी संख्या में लोगों के पास रहने की जगह नहीं बचेगी।” सीजफायर के बाद भी जारी हैं हमले इजराइल और हमास के बीच अक्टूबर 2025 में युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन इसके बावजूद गाजा में सैन्य कार्रवाई पूरी तरह नहीं रुकी। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, सीजफायर लागू होने के बाद से अब तक करीब 900 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इजराइली सेना ने “येलो लाइन” के आसपास के बड़े इलाके को नो-मैन्स-लैंड घोषित कर दिया है, जहां किसी भी गतिविधि को खतरा मानते हुए कार्रवाई की जा रही है। संयुक्त राष्ट्र ने भी जताई चिंता संयुक्त राष्ट्र की हालिया ब्रीफिंग में उत्तरी गाजा के जबालिया इलाके में इजराइली टैंकों की बढ़ती आवाजाही और ड्रोन हमलों को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र में किसी भी संदिग्ध हलचल को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों में भय और असुरक्षा बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने की संभावना गाजा में बढ़ती सैन्य कार्रवाई और संभावित क्षेत्रीय कब्जे की रणनीति को लेकर इजराइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है। मानवाधिकार संगठनों और कई देशों ने पहले भी गाजा में नागरिकों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति इसी तरह आगे बढ़ती रही, तो पश्चिम एशिया में संघर्ष और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।  

surbhi मई 29, 2026 0
Lalu yadav news
आज सिंगापुर जायेंगे लालू यादव, क्या रोहिणी आचार्य की पार्टी में वापसी होगी?

पटना, एजेंसियां। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव शुक्रवार 29 मई को रात 11 बजे सिंगापुर के लिए रवाना होंगे। वे दिल्ली से सिंगापुर के लिए फ्लाईट पकड़ेंगे। जानकारी के अनुसार लालू प्रसाद रूटीन हेल्थ चेकअप के लिए सिंगापुर जा रहे हैं। उनकी एक बेटी रोहिणी आचार्य सिंगापुर में ही रहती है। लालू प्रसाद  10 जून तक भारत लौट आयेंगे। 11 जून को लालू प्रसाद का जन्मदिन है, लिहाजा उनकी वापसी की तारीख 10 जून मानी जा रही है। रोहिणी की वापसी का प्रयास करेंगे चर्चा है कि सिंगापुर यात्रा के दौरान लालू प्रसाद अपनी पुत्री रोहिणी आचार्य को वापस पार्टी में लाने का भी प्रयास करेंगे। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान रोहिणी आचार्य पार्टी से और अपने भाई तेजस्वी यादव से नाराज हो गयीं थी। लालू प्रसाद रोहिणी को राजद में संगठन के किसी पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इधर, एक चर्चा यह भी है कि लालू प्रसाद के बडे बेटे तेजप्रताप यादव को पार्टी में वापस लाया जायेगा। उन्हें बिहार विधान परिषद में एमएसली बनाया जा सकता है। सन आफ लालू प्रसाद ने की पुष्टि इधर, लालू प्रसाद के बेहद करीबी और सन आफ लालू प्रसाद के नाम से चर्चित राजद नेता इरफान अहमद अंसारी ने लालू प्रसाद के सिंगापुर जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि रोहिणी आचार्या को पार्टी में वापस लाया जा रहा है।

Unknown मई 29, 2026 0
Diljit Dosanjh
क्या दिलजीत दोसांझ बनेंगे पंजाब की राजनीति का नया सितारा?

चंडीगढ़, एजेंसियां। दिलजीत दोसांझ को लेकर पंजाब की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। दक्षिण भारत के सुपरस्टार विजय के तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय होने और मुख्यमंत्री बनने के बाद अब पंजाब में भी ऐसा चेहरा तलाशने की बहस तेज हो गई है। पूर्व सैन्य अधिकारियों और बुद्धिजीवियों के समूह Jago Punjab Manch ने दिलजीत दोसांझ से राजनीति में आने की भावुक अपील की है।   दिलजीत ने विनम्रता से ठुकराया प्रस्ताव सोशल मीडिया पर जब एक अखबार ने सवाल पूछा कि क्या दिलजीत पंजाब का नया राजनीतिक चेहरा बन सकते हैं, तो उन्होंने बेहद संक्षिप्त लेकिन साफ जवाब दिया। दिलजीत ने लिखा, “कभी नहीं... मेरा काम मनोरंजन करना है... मैं अपने क्षेत्र में बहुत खुश हूं।” उनके इस जवाब ने साफ कर दिया कि फिलहाल राजनीति में आने का उनका कोई इरादा नहीं है।   क्यों उठी दिलजीत को राजनीति में लाने की मांग? ‘जागो पंजाब मंच’ के प्रमुख और पूर्व आईएएस अधिकारी S. S. Boparai ने कहा कि पंजाब इस समय कर्ज, नशे और राजनीतिक नेतृत्व के संकट से गुजर रहा है। उन्होंने दिलजीत की बेदाग छवि, युवाओं में लोकप्रियता और देशभक्ति को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताया। बोपाराई के अनुसार, कनाडा में तिरंगा लहराकर दिलजीत ने अपने साहसी रुख का परिचय दिया।   विवादों और समर्थन के बीच दिलजीत दिलजीत हाल के वर्षों में कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा में रहे हैं। किसान आंदोलन के दौरान उन्होंने किसानों का खुलकर समर्थन किया था। वहीं, उन्हें खालिस्तानी समर्थक संगठनों से धमकियां भी मिलीं। इस बीच भाजपा ने उनका समर्थन करते हुए उन्हें भारत का “सांस्कृतिक राजदूत” बताया। प्रधानमंत्री Narendra Modi से उनकी मुलाकात ने भी राजनीतिक अटकलों को हवा दी।   कलाकारों का पंजाब राजनीति में मजबूत रिकॉर्ड पंजाब में कलाकारों का राजनीति में सफल रिकॉर्ड रहा है। Bhagwant Mann, Vinod Khanna, Hans Raj Hans और Sunny Deol जैसे कई नाम राजनीति में अपनी पहचान बना चुके हैं। हालांकि फिलहाल दिलजीत ने राजनीति से दूरी बनाए रखने का संकेत दिया है। 

Unknown मई 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0