Qatar Mediation

Oil tankers sailing through the Strait of Hormuz as U.S.-Iran tensions rise over maritime security and global energy supplies.
US-Iran Conflict: होर्मुज जलडमरूमध्य पर हमले रोकने को अमेरिका का ईरान को अल्टीमेटम, बढ़ा मध्य पूर्व में तनाव

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है। युद्धविराम खत्म होने के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी और कूटनीतिक दबाव तेज हो गया है। इसी बीच अमेरिका ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में जहाजों पर हमले रोकने और समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखने को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका की सख्त चेतावनी अमेरिका ने ईरान से मांग की है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों और तेल टैंकरों पर होने वाले हमलों को तुरंत रोके तथा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग को बिना किसी बाधा के खुला रखे। अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि हमले जारी रहे तो ईरान को गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। ट्रंप ने युद्धविराम खत्म होने का किया ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच लागू युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है। ट्रंप का दावा है कि ईरान ने बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई थी, लेकिन अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि अब हालात पहले जैसे नहीं हैं और आगे की कार्रवाई ईरान के व्यवहार पर निर्भर करेगी। अमेरिका की नई शर्तें मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि ईरान सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करे कि: होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर कोई हमला नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय जहाजों से किसी प्रकार का अतिरिक्त ट्रांजिट शुल्क नहीं लिया जाएगा। समुद्री व्यापार बाधित नहीं किया जाएगा। अमेरिका का कहना है कि इन शर्तों से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित रह सकेगी। ईरान ने अमेरिकी दावे खारिज किए ईरान ने अमेरिका के इस दावे को खारिज कर दिया कि उसने सीधे वॉशिंगटन से बातचीत का अनुरोध किया है। तेहरान का कहना है कि यदि कोई बातचीत होगी तो वह कतर जैसे मध्यस्थ देशों के जरिए होगी। ईरान ने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी सैन्य दबाव का जवाब दिया जाएगा। होर्मुज पर अमेरिकी मांगों का विरोध ईरान ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी गतिविधियां उसके अधिकार क्षेत्र और क्षेत्रीय व्यवस्थाओं से संबंधित हैं। तेहरान का आरोप है कि बाहरी देशों का हस्तक्षेप पहले से बने समझौतों के खिलाफ है और इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। हमलों को लेकर अमेरिका का रुख अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यदि जहाजों पर हमलों में ईरान समर्थित समूह शामिल भी हों, तब भी इसकी जिम्मेदारी ईरान की मानी जाएगी। वॉशिंगटन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। कूटनीतिक प्रयास भी जारी तनाव के बीच कतर ने दोनों देशों के बीच संवाद बहाल कराने की पहल की है। रिपोर्टों के अनुसार, कतर के अधिकारी तेहरान में बातचीत कर रहे हैं। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची के ओमान जाकर होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और समुद्री मार्गों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने की संभावना जताई जा रही है। क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। यह ओमान की खाड़ी को फारस की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज में स्थिति और बिगड़ती है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
U.S. President Donald Trump and Iranian flags displayed against the backdrop of rising Middle East tensions, following Trump's remarks on renewed talks with Iran.
Iran-US Tension: ट्रंप का दावा- ईरान फिर चाहता है बातचीत, लेकिन युद्धविराम खत्म होने की दी चेतावनी

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने दोबारा बातचीत की इच्छा जताई है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भी वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही स्पष्ट कर दिया कि दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है। उनके इस बयान से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ट्रंप बोले- ईरान बातचीत चाहता है डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि ईरान ने अमेरिका से बातचीत जारी रखने का अनुरोध किया है और वॉशिंगटन इसके लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि युद्धविराम अब खत्म हो चुका है और यदि ईरान की ओर से हमले जारी रहे तो अमेरिका पहले से अधिक कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। हालिया हमलों के बाद बढ़ा तनाव ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले दो दिनों में अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने कतर, बहरीन और कुवैत की दिशा में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइलें दागीं। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, कार्रवाई के दौरान ईरान में लगभग 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें मिसाइल लॉन्चर, हवाई अड्डों के रनवे और अन्य सैन्य प्रतिष्ठान शामिल थे। वहीं, ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई और 78 अन्य घायल हुए हैं। ट्रंप की नई चेतावनी नाटो शिखर सम्मेलन से लौटने के बाद ट्रंप ने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिकी कार्रवाई की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने फिर हमला किया तो अमेरिका दस गुना अधिक ताकत से जवाब देगा। ट्रंप ने ईरान के बिजली संयंत्रों, समुद्री जल शोधन संयंत्रों और खर्ग द्वीप जैसे रणनीतिक ठिकानों को भी संभावित लक्ष्य बताया। तनाव कम कराने की कोशिशें तेज सैन्य टकराव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी तेज हो गए हैं। इसी सिलसिले में कतर के मध्यस्थ तेहरान पहुंचे हैं। उनका उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई वार्ता को दोबारा शुरू कराने और क्षेत्रीय तनाव कम करने का रास्ता तैयार करना है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार फिलहाल वॉशिंगटन सीमित सैन्य कार्रवाई के साथ कूटनीतिक समाधान की रणनीति पर भी काम कर रहा है ताकि व्यापक युद्ध की स्थिति से बचा जा सके। बातचीत और सैन्य तैयारी साथ-साथ अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर सभी सैन्य विकल्प खुले हैं, लेकिन प्राथमिकता अब भी राजनयिक समाधान तलाशने की है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कतर और अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर लौटते हैं तो पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने की संभावना बन सकती है, हालांकि मौजूदा हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
US Vice President JD Vance attends peace talks with Iranian delegates in Switzerland amid efforts to ease Middle East tensions.
अमेरिका ने ईरान के सामने रखी दोस्ती की बड़ी शर्त, मिडिल ईस्ट में शांति के लिए स्विट्जरलैंड में मंथन जारी

  बर्गेनस्टॉक (स्विट्जरलैंड): मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में स्थायी शांति बहाल करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका और ईरान के बीच अहम शांति वार्ता शुरू हो गई है। इस बातचीत में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव, परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। बैठक के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वार्ता को "ऐतिहासिक अवसर" करार देते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका, ईरान के साथ अपने संबंधों को नई और सकारात्मक दिशा देने के लिए तैयार है। ईरान के सामने अमेरिका की बड़ी शर्त जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका, ईरान के साथ संबंध सामान्य करने और दोस्ती का नया अध्याय शुरू करने को तैयार है, लेकिन इसके लिए तेहरान को दो महत्वपूर्ण शर्तों को स्थायी रूप से स्वीकार करना होगा— क्षेत्र में अस्थिरता और संघर्ष फैलाने वाली नीतियों का त्याग। परमाणु हथियार हासिल करने की महत्वाकांक्षा को हमेशा के लिए छोड़ना। वेंस ने कहा कि यदि ईरान इन दोनों मुद्दों पर सकारात्मक और स्थायी कदम उठाता है, तो वाशिंगटन उसके साथ रिश्तों को पूरी तरह बदलने के लिए तैयार है। होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु मुद्दे पर प्रगति का दावा अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने जैसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक लक्ष्यों की दिशा में पहले ही महत्वपूर्ण प्रगति हो चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह वार्ता मध्य पूर्व में स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए नए रास्ते खोलेगी। पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना जेडी वेंस ने इस शांति वार्ता को संभव बनाने में पाकिस्तान की भूमिका की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की कूटनीतिक कोशिशों ने अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज तक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वेंस ने आसिम मुनीर को "एक महान सैन्य नेता और कुशल राजनयिक" बताया। भारतीय पत्नी और पाकिस्तानी जनरल का किया जिक्र हल्के-फुल्के अंदाज में जेडी वेंस ने कहा कि उनकी जिंदगी में दो बेहद महत्वपूर्ण लोग हैं—एक उनकी भारतीय मूल की पत्नी उषा वेंस और दूसरे पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर। उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों में उनकी जनरल मुनीर के साथ लगातार बातचीत हुई है और क्षेत्रीय शांति स्थापित करने के प्रयासों में उनका सहयोग महत्वपूर्ण रहा है। मिडिल ईस्ट में शांति और ऊर्जा सुरक्षा पर नजर वेंस ने उम्मीद जताई कि स्विट्जरलैंड में जारी यह वार्ता मध्य पूर्व में तनाव कम करने, तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह वार्ता सफल रहती है, तो न केवल क्षेत्रीय संघर्ष कम हो सकते हैं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Iranian and American delegations at the Bürgenstock resort in Switzerland amid tense nuclear and regional security talks.
कैमरे चलते रहे, ईरानी प्रतिनिधिमंडल उठकर चला गया; जेडी वेंस देखते रह गए, स्विट्जरलैंड वार्ता की शुरुआत में बढ़ा तनाव

  बर्गेनस्टॉक (स्विट्जरलैंड): अमेरिका और ईरान के बीच रविवार (21 जून) को स्विट्जरलैंड में शुरू हुई बहुप्रतीक्षित वार्ता की शुरुआत ही तनावपूर्ण माहौल में हुई। बातचीत शुरू होने से पहले ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित संयुक्त फोटो सेशन और हाथ मिलाने के कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके कुछ देर बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य कार्रवाई की नई चेतावनी पर नाराजगी जताते हुए ईरानी प्रतिनिधिमंडल बैठक स्थल से बाहर निकल गया। इस घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी चर्चा तेज हो गई है। बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में हुई पहली बैठक अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का पहला दौर स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में आयोजित किया गया। बैठक में अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए। पाकिस्तान और कतर इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। यह वार्ता हाल ही में हुए 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' (MoU) के तहत शुरू हुई है, जिसके अनुसार अगले 60 दिनों तक दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत होगी। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की जानी है। हाथ मिलाने और फोटो सेशन से ईरान का इनकार ईरानी समाचार एजेंसी के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और आयोजकों ने बातचीत शुरू होने से पहले दोनों पक्षों के नेताओं के बीच हाथ मिलाने और संयुक्त फोटो सेशन की व्यवस्था की थी। ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ तथा विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसमें हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। दोनों नेता निर्धारित फोटो सेशन से पहले ही बैठक कक्ष से बाहर निकल गए। कैमरे में कैद हुआ पूरा घटनाक्रम सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कमरे से बाहर निकलने से ठीक पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से संक्षिप्त बातचीत की। इसके बाद वह अचानक मुड़े और पूरे ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक कक्ष से बाहर चले गए। यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड हो गया, जिससे वार्ता की शुरुआत में ही दोनों पक्षों के बीच मौजूद अविश्वास और तनाव उजागर हो गया। ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी नाराजगी सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य कार्रवाई संबंधी हालिया बयान ने ईरानी पक्ष की नाराजगी बढ़ा दी। ईरान का मानना है कि कूटनीतिक बातचीत के दौरान इस तरह की सार्वजनिक चेतावनियां वार्ता के माहौल को प्रभावित करती हैं और आपसी भरोसे को कमजोर करती हैं। आगे की बातचीत पर दुनिया की नजर शुरुआती तनाव के बावजूद दोनों पक्षों के बीच वार्ता प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं हुई है। मध्यस्थ देशों पाकिस्तान और कतर की कोशिश है कि बातचीत का अगला दौर सकारात्मक माहौल में आगे बढ़े। विशेषज्ञों का मानना है कि स्विट्जरलैंड में शुरू हुई यह वार्ता पश्चिम एशिया की राजनीति, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजारों के भविष्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Indian women's cricket team reacts after losing to South Africa in the Women's T20 World Cup 2026.
महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026: टीम इंडिया पर मंडराया बाहर होने का खतरा, दक्षिण अफ्रीका से हार के बाद बिगड़े समीकरण

नई दिल्ली: महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली हार ने भारतीय टीम की सेमीफाइनल की राह मुश्किल कर दी है। पाकिस्तान और नीदरलैंड्स को हराकर शानदार शुरुआत करने वाली टीम इंडिया तीसरे मुकाबले में प्रोटियाज टीम के सामने टिक नहीं सकी। अब सिर्फ एक हार ने ग्रुप-1 के समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। ग्रुप-1 में कैसी है स्थिति? ग्रुप-1 में ऑस्ट्रेलिया लगातार तीन जीत के साथ शीर्ष पर है। भारत ने तीन मैचों में दो जीत हासिल की हैं और फिलहाल दूसरे स्थान पर मौजूद है। दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश के अंक समान हैं, लेकिन बेहतर नेट रन रेट के कारण अफ्रीकी टीम को बढ़त हासिल है। वहीं पाकिस्तान और नीदरलैंड्स की लगातार तीन हार के बाद उनकी नॉकआउट की उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी हैं। भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता? आईसीसी के नियमों के अनुसार प्रत्येक ग्रुप से सिर्फ दो टीमें ही नॉकआउट चरण में पहुंचेंगी। भारत को अब अपने बचे हुए मुकाबले बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलने हैं। अगर भारतीय टीम बांग्लादेश को हराने में सफल रहती है लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार जाती है, तो उसके कुल 6 अंक होंगे। दूसरी ओर दक्षिण अफ्रीका के सामने बांग्लादेश और नीदरलैंड्स जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीमें हैं। यदि प्रोटियाज टीम दोनों मुकाबले जीत लेती है, तो वह 8 अंकों के साथ सेमीफाइनल में जगह बना सकती है और भारत बाहर हो सकता है। हालांकि अगर ऑस्ट्रेलिया अपने आगामी मैचों में हारती है या अन्य परिणाम भारत के पक्ष में जाते हैं, तो टीम इंडिया के लिए उम्मीदें बनी रह सकती हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच का हाल भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 159 रन का लक्ष्य रखा था। जवाब में दक्षिण अफ्रीका ने अनुभवी बल्लेबाज मारिजाम काप की शानदार 81 रन की पारी की बदौलत लक्ष्य को 5 गेंद शेष रहते और 6 विकेट से हासिल कर लिया। मैच के दौरान राधा यादव ने मारिजाम काप के दो अहम कैच छोड़े, जब वह 27 और 66 रन के निजी स्कोर पर थीं। यही चूक अंत में भारतीय टीम पर भारी पड़ गई। अब टीम इंडिया के लिए हर मुकाबला करो या मरो जैसा बन गया है और सेमीफाइनल की उम्मीदों को जिंदा रखने के लिए अगले मैचों में जीत बेहद जरूरी होगी।  

surbhi जून 22, 2026 0
US President Donald Trump speaks about the Israel-Hezbollah ceasefire amid renewed tensions in the Middle East.
इजरायल-हिजबुल्लाह युद्धविराम के लिए ट्रंप ने इजरायल से की अपील, बोले- 'कभी-कभी शांत होकर सोचना पड़ता है'

  वॉशिंगटन/तेल अवीव: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि उन्होंने इजरायल से लेबनान में Hezbollah के साथ युद्धविराम बनाए रखने और तनाव कम करने के प्रयासों का समर्थन करने का आग्रह किया है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही इजरायल और हिजबुल्लाह ने एक-दूसरे पर नए हमले शुरू कर दिए। एनबीसी न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने बताया कि वह पूरे दिन इजरायली नेतृत्व के संपर्क में रहे और उन्होंने क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों को समर्थन देने की अपील की। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनकी सीधे तौर पर इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से बातचीत हुई या नहीं। 'यह सोने पर सुहागा जैसा कदम' इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम को ट्रंप ने सकारात्मक विकास करार देते हुए कहा कि यह पश्चिम एशिया में शांति बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा, "यह सोने पर सुहागा जैसा है।" ट्रंप का इशारा हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए उस समझौता ज्ञापन की ओर था, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय संघर्ष को कम करना और ईरान के साथ तकनीकी एवं कूटनीतिक वार्ता के लिए नए रास्ते खोलना है। नेतन्याहू के साथ संबंधों पर बोले ट्रंप इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अपने संबंधों पर ट्रंप ने कहा, "बीबी के साथ मेरे संबंध हमेशा अच्छे रहे हैं। बस आपको कभी-कभी शांत होकर अपने दिमाग का इस्तेमाल करना होता है।" ट्रंप के इस बयान को इजरायल से संयम बरतने और सैन्य कार्रवाई को सीमित रखने की अप्रत्यक्ष सलाह के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिका, कतर और ईरान की मध्यस्थता से लागू हुआ युद्धविराम सूत्रों के मुताबिक, इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच नया युद्धविराम शुक्रवार सुबह लागू हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, यह समझौता अमेरिका और Qatar की मध्यस्थता से संभव हुआ, जबकि एक अन्य राजनयिक सूत्र ने बताया कि ईरान ने भी पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों पक्षों के बीच स्थानीय समयानुसार सुबह 9 बजे से युद्धविराम प्रभावी करने पर सहमति बनी। इजरायली सेना ने जारी रखी चेतावनी Israel Defense Forces (आईडीएफ) ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी संभावित खतरे या युद्धविराम उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी। आईडीएफ के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने कहा, "हम किसी भी तत्काल खतरे का जवाब देना और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जारी रखेंगे।" इस बयान से संकेत मिलता है कि युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। स्विट्जरलैंड में शांति वार्ता फिर टली ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance भविष्य में स्विट्जरलैंड में ईरान के साथ प्रस्तावित शांति वार्ता में हिस्सा ले सकते हैं। शुक्रवार को प्रस्तावित बैठक स्थगित कर दी गई। ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जेडी वेंस भविष्य में इस प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे, जबकि विशेष दूत स्टीव विटकॉफ अलग से वार्ता प्रयासों में जुटे हैं। स्विस विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित बैठक फिलहाल स्थगित कर दी गई है, लेकिन वार्ता के लिए तैयारियां जारी हैं। अमेरिका-ईरान 14-सूत्रीय समझौते में क्या है? अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं, जिनमें: लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकना 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत पूरी करना अमेरिका द्वारा नौसैनिक नाकेबंदी और कुछ प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाना ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन की सुविधा देना ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर तकनीकी वार्ता शुरू करना ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना ईरानी तेल निर्यात के लिए अमेरिकी छूट प्रदान करना ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास कार्यक्रम का खाका तैयार करना पश्चिम एशिया में शांति की दिशा में बड़ा कदम, लेकिन चुनौतियां बरकरार विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल-हिजबुल्लाह युद्धविराम और अमेरिका-ईरान समझौता पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। जमीनी स्तर पर जारी सैन्य गतिविधियां और आपसी अविश्वास इस शांति प्रक्रिया के सामने अभी भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Donald Trump speaks on Iran nuclear deal and enriched uranium conditions.
ट्रंप ने ईरान को दी चेतावनी, बोले- यूरेनियम सौंपो या नष्ट करो, तभी होगी डील

Donald Trump ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर परमाणु समझौता करना है तो Iran को अपने संवर्धित यूरेनियम का भंडार या तो अमेरिका को सौंपना होगा या अंतरराष्ट्रीय निगरानी में नष्ट करना होगा। ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका “आधा-अधूरा समझौता” नहीं करेगा। ट्रंप ने क्या कहा? ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान के “एनरिच्ड यूरेनियम” को तुरंत अमेरिका को सौंपा जा सकता है, जहां उसे नष्ट किया जाएगा। दूसरा विकल्प यह है कि ईरान की सहमति से किसी तय स्थान पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी में उसे खत्म किया जाए। उन्होंने यूरेनियम को “न्यूक्लियर डस्ट” बताते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया की निगरानी परमाणु एजेंसियां करेंगी। परमाणु मुद्दे पर बढ़ी बातचीत अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव बना हुआ है। माना जा रहा है कि यह मुद्दा दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद रहा है। अब रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईरान सिद्धांत रूप में अपने उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के भंडार को छोड़ने पर सहमत हो सकता है। इसे संभावित परमाणु समझौते की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। कतर में हुई अहम बैठक रिपोर्ट्स के मुताबिक, Qatar में ईरानी प्रतिनिधिमंडल और मध्यस्थों के बीच बातचीत हुई। ईरान की तरफ से वरिष्ठ नेता Mohammad Bagher Ghalibaf और विदेश मंत्री Abbas Araghchi मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। बातचीत में ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को खोलने का मुद्दा भी शामिल है। ट्रंप बोले- या शानदार समझौता होगा, या कुछ नहीं ट्रंप ने कहा कि अमेरिका केवल ऐसा समझौता स्वीकार करेगा जो “बेहद अहम और सार्थक” हो। उन्होंने लिखा, “ईरान के साथ डील या तो शानदार होगी, या फिर कोई डील नहीं होगी।” ईरान ने क्या कहा? ईरान ने संकेत दिए हैं कि कई मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ी है, लेकिन उसने अमेरिकी अधिकारियों के बदलते बयानों पर चिंता भी जताई है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा कि कई मामलों में प्रगति हुई है, लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि समझौता तुरंत हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के बदलते रुख से बातचीत जटिल हो रही है।  

surbhi मई 26, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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