सड़क हादसे का रूप देकर हत्या छिपाने की कोशिश, पुलिस जांच में खुली साजिश; बेटी समेत 7 आरोपी गिरफ्तार, एक फरार नौकरी और संपत्ति के लालच में बेटी ने कराई मां की हत्या राजस्थान की राजधानी जयपुर से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां 23 वर्षीय युवती ने सरकारी नौकरी और संपत्ति पाने के लिए अपनी ही मां की सुपारी देकर हत्या करवा दी। आरोपियों ने वारदात को सड़क हादसा दिखाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस जांच में पूरी साजिश का पर्दाफाश हो गया। मामले में आरोपी बेटी समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक आरोपी अभी भी फरार है। पहले सड़क हादसा माना गया मामला पुलिस के अनुसार, प्रताप नगर के रविंद्र नगर निवासी 45 वर्षीय नीरज शर्मा की 3 जुलाई को तेज रफ्तार स्कॉर्पियो की टक्कर से मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में इसे सड़क दुर्घटना माना गया, लेकिन मृतका के भाई राकेश शर्मा ने अपनी भांजी पर शक जताते हुए हत्या की आशंका व्यक्त की। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की। अनुकंपा नौकरी और जायदाद बना हत्या का कारण जांच में सामने आया कि नीरज शर्मा के पति विजय कुमार शर्मा अदालत में कनिष्ठ लिपिक (एलडीसी) थे। करीब एक वर्ष पहले उनके निधन के बाद नीरज शर्मा को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। पुलिस के मुताबिक, उनकी बेटी आयुषी चाहती थी कि यह सरकारी नौकरी उसे मिले। जब उसकी मां ने नौकरी छोड़ने से इनकार कर दिया और स्वयं कार्यभार संभाल लिया, तो दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। आरोप है कि आयुषी ने नौकरी और मां की संपत्ति हासिल करने के लिए हत्या की साजिश रची। ताऊ और रिश्तेदारों के साथ मिलकर बनाई योजना पुलिस जांच में पता चला कि आयुषी ने अपने ताऊ और उनके बेटे के साथ मिलकर मां की हत्या की योजना बनाई। आरोपियों ने कुछ लोगों को सुपारी देकर नीरज शर्मा को वाहन से कुचलने की साजिश रची ताकि मामला सामान्य सड़क हादसा लगे और किसी को हत्या का संदेह न हो। योजना के तहत 3 जुलाई को स्कॉर्पियो से टक्कर मारकर नीरज शर्मा की हत्या कर दी गई। पुलिस ने खोला पूरा राज पुलिस उपायुक्त (पूर्व) रंजीता शर्मा ने बताया कि तकनीकी साक्ष्यों, पूछताछ और अन्य सबूतों के आधार पर हत्या की पूरी साजिश का खुलासा हुआ। मामले में मुख्य आरोपी बेटी आयुषी, उसके ताऊ और अन्य सहयोगियों समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। एक आरोपी अब भी फरार पुलिस के अनुसार, इस मामले का एक आरोपी अभी भी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस कर रही आगे की जांच जांच एजेंसियां अब आरोपियों के बीच हुई बातचीत, आर्थिक लेन-देन और हत्या की साजिश से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि वारदात की योजना कब और कैसे बनाई गई तथा इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे।
दौसा: राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बुधवार तड़के एक भीषण सड़क हादसा हो गया। उत्तराखंड के ऋषिकेश से मध्य प्रदेश के इंदौर जा रही एक निजी बस आगे चल रहे ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों वाहनों में आग लग गई। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई यात्री घायल हो गए। धनावड़ा के पास हुआ हादसा पुलिस के अनुसार, दुर्घटना कोलवा थाना क्षेत्र के धनावड़ा के पास हुई। दौसा के पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित ने बताया कि हादसे में पांच लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि दो अन्य की सिर में गंभीर चोट लगने से जान चली गई। उन्होंने बताया कि हंस ट्रेवल्स की बस ऋषिकेश से इंदौर जा रही थी। इसी दौरान दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बस आगे चल रहे ट्रक से टकरा गई। टक्कर के तुरंत बाद दोनों वाहनों में आग लग गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया हादसे के बाद स्थानीय लोगों और बचाव दल की मदद से यात्रियों को बस से बाहर निकाला गया। घायलों को तत्काल दौसा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। दमकल और पुलिस ने संभाला मोर्चा घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया और राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। हादसे का वीडियो आया सामने इस भीषण दुर्घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बस और ट्रक आग की लपटों में घिरे दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में तेज रफ्तार या चालक की लापरवाही की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है, वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में सोमवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो युवकों को हिरासत में ले लिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। यह घटना जयपुर के शहीद स्मारक पर हुई, जहां बड़ी संख्या में युवा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पेपर लीक, बेरोजगारी और युवाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। भीड़ के बीच पहुंचे थे अभिजीत दीपके पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अभिजीत दीपके अपने समर्थकों के कंधों पर सवार होकर प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे। इसी दौरान भीड़ में मौजूद कुछ युवकों ने कथित तौर पर उनके साथ धक्का-मुक्की की और उन्हें थप्पड़ मार दिए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। दीपके के समर्थकों ने कथित आरोपियों को पकड़ लिया और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों को अलग किया। दो युवक हिरासत में, जांच जारी पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले में दो युवकों को हिरासत में लिया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है और घटना के पीछे की वजहों का पता लगाया जा रहा है। साथ ही, घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि यदि किसी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत दी जाती है, तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने पेपर लीक, भ्रष्टाचार और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्रवाई की मांग करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की भी मांग की। पुलिस के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और युवाओं के रोजगार संबंधी मुद्दों को उठाना था। सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई घटना के बाद शहीद स्मारक और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने गुरुवार (4 जून) को अपने सात उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और झारखंड से अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है। कर्नाटक से खरगे, पवन खेड़ा और मंसूर अली खान मैदान में कांग्रेस ने कर्नाटक से पार्टी अध्यक्ष Mallikarjun Kharge को एक बार फिर राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। वे वर्तमान में भी कर्नाटक से राज्यसभा सदस्य हैं और उच्च सदन में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा पार्टी के मीडिया विभाग प्रमुख Pawan Khera को भी कर्नाटक से पहली बार राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया है। तीसरे उम्मीदवार के रूप में मंसूर अली खान को टिकट दिया गया है। मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन उम्मीदवार मध्य प्रदेश से कांग्रेस ने पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा है। वह वर्तमान में पार्टी की तेलंगाना प्रभारी हैं। इस सीट पर दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उन्होंने पहले ही राज्यसभा न जाने की इच्छा जताई थी। राजस्थान, तमिलनाडु और झारखंड से भी नाम घोषित राजस्थान से मौजूदा राज्यसभा सदस्य नीरज डांगी को दोबारा उम्मीदवार बनाया गया है। तमिलनाडु से प्रवीण चक्रवर्ती को टिकट मिला है, जो AICC के प्रोफेशनल कांग्रेस और डेटा विभाग के प्रमुख हैं। झारखंड से राष्ट्रीय सचिव प्रणव झा को उम्मीदवार घोषित किया गया है। 18 जून को होगा राज्यसभा चुनाव राज्यसभा की 24 सीटों के लिए चुनाव 18 जून को होंगे। इन सीटों पर चुनाव 10 राज्यों में कराया जाएगा, जहां सदस्यों का कार्यकाल 21 जून से 19 जुलाई के बीच समाप्त हो रहा है। नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून निर्धारित की गई है।
Central Bureau of Investigation की जांच में NEET पेपर लीक मामले को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के अनुसार, मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG का प्रश्नपत्र पांच राज्यों में बेचा गया था। इनमें सबसे ज्यादा मामले Maharashtra से सामने आए हैं, जबकि Rajasthan दूसरे स्थान पर है। सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और जब्त किए गए डिजिटल गैजेट्स की जांच के बाद यह जानकारी सामने आई है। एजेंसी का मानना है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले का दायरा और बड़ा हो सकता है। महाराष्ट्र बना पेपर लीक का सबसे बड़ा केंद्र जांच में पता चला है कि पेपर लीक नेटवर्क का सबसे बड़ा संचालन महाराष्ट्र से हो रहा था। यहीं से कथित “क्वेश्चन बैंक” राजस्थान समेत अन्य राज्यों के छात्रों तक पहुंचाया गया। सीबीआई को महाराष्ट्र और राजस्थान में पेपर के प्रिंट निकालकर बेचने के सबूत मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई लोगों ने प्रश्नपत्र आगे दूसरे छात्रों और अभिभावकों तक भी पहुंचाया, जिससे इसका दायरा काफी बढ़ गया। इसी कारण एजेंसी अभी यह तय नहीं कर पा रही है कि आखिर कितने छात्रों तक पेपर पहुंचा था। पेरेंट्स भी जांच एजेंसी के निशाने पर अब जांच केवल पेपर लीक करने वाले बिचौलियों और मास्टरमाइंड तक सीमित नहीं है। सीबीआई अब उन अभिभावकों की भी पहचान कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर भारी रकम देकर पेपर खरीदा था। एजेंसी उन बैंक खातों की जांच कर रही है, जिनसे आरोपी शिवराज मोटेगांवकर, पी.वी. कुलकर्णी और उनकी सहयोगी मनीषा वाघमारे के खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए थे। सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ऐसे सभी पेरेंट्स की सूची तैयार कर रही है, जिनके खिलाफ वित्तीय लेन-देन के सबूत मिले हैं। कई टीमें जांच में जुटीं सीबीआई की कई टीमें अलग-अलग स्तर पर जांच में लगी हुई हैं। दो टीमें उन संदिग्ध किरदारों के खिलाफ सबूत जुटा रही हैं, जिनकी भूमिका National Testing Agency (NTA) के बाहर मानी जा रही है। वहीं, तीन अन्य टीमें पेपर खरीदने वाले छात्रों और उनके परिजनों तक पहुंचने की तैयारी कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, 20 मई की रात महाराष्ट्र से कार्रवाई की शुरुआत भी हो चुकी है और जल्द ही दूसरे राज्यों में भी छापेमारी हो सकती है। अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार जांच एजेंसी अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा सात आरोपी महाराष्ट्र से हैं। सीबीआई का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और डिजिटल डेटा, बैंक ट्रांजैक्शन व कॉल रिकॉर्ड्स की भी जांच की जा रही है। 3 मई को हुई थी परीक्षा, 12 मई को रद्द NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में करीब 23 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। NTA के अनुसार, 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायतें मिलने लगी थीं। इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया। जांच में शुरुआती स्तर पर गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और री-एग्जाम कराने का फैसला लिया गया। जांच का दायरा बढ़ने की संभावना सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि यह मामला शुरुआती अनुमान से कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है। एजेंसी को शक है कि पेपर लीक नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और इसमें शिक्षा माफिया, बिचौलियों और प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
जांच में सामने आया सीकर कोचिंग नेटवर्क NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच में अब राजस्थान का बड़ा नेटवर्क सामने आया है। जांच एजेंसियों को पता चला है कि सीकर जिले में कुछ लोगों और कोचिंग संस्थानों के जरिए कथित तौर पर प्रश्नपत्र छात्रों तक पहुंचाया गया। सूत्रों के अनुसार, यश यादव नाम के युवक को इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा है। उसका संबंध विकास बिवाल नामक व्यक्ति से बताया जा रहा है, जिसका नाम भी जांच में सामने आया है। हार्ड कॉपी को PDF बनाकर फैलाने का आरोप जांच में यह भी पता चला है कि विकास बिवाल के पिता दिनेश बिवाल ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र की हार्ड कॉपी स्कैन कर उसे PDF फाइल में बदला। इसके बाद यह डिजिटल कॉपी सीकर के कई कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों तक पहुंचाई गई। छात्रों ने 3 से 10 लाख रुपये देने की बात कबूली पूछताछ के दौरान कई छात्रों ने जांच एजेंसियों को बताया कि उन्होंने कथित तौर पर लीक पेपर पाने के लिए 3 लाख से 10 लाख रुपये तक का भुगतान किया था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर पेपर सबसे पहले कहां से लीक हुआ और किस चैन के जरिए छात्रों तक पहुंचा। एक आरोपी ने खुद को बताया बेगुनाह मामले में सामने आए शुभम नामक व्यक्ति ने आरोपों से इनकार किया है। उसने कहा कि वह इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड नहीं है। हालांकि जांच एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी सबूतों की मदद से पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं। सीबीआई की पूछताछ तेज Central Bureau of Investigation ने इस मामले में कई कोचिंग संस्थानों के मालिकों और कर्मचारियों से पूछताछ की है। गिरफ्तार आरोपियों और छात्रों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। मनी ट्रेल पर एजेंसियों की नजर अब जांच का फोकस आर्थिक लेन-देन पर भी पहुंच गया है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पैसे किन खातों में जमा हुए और किसने ट्रांजैक्शन को संभाला। जांच अधिकारियों के मुताबिक यह हाल के वर्षों के सबसे बड़े परीक्षा घोटालों में से एक हो सकता है, इसलिए हर डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है।
रांची। अमूल दूध गुरुवार 14 मई से झारखंड समेत पूरे देश में महंगा हो गया है। इसकी कीमत में प्रति लीटर 2 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। अमूल ब्रांड के तहत उत्पाद बेचने वाली गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (GCMMF) ने बढ़ती इनपुट लागत के कारण पूरे भारत में दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। 14 मई से बढ़े हुए दामों में अमूल के दूध मिल रहे हैं। दूध की कीमतों में वृद्धि से खाद्य मुद्रास्फीति पर असर पड़ने की संभावना है और इससे मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं के बजट पर दबाव पड़ेगा। पिछली बार कीमतों में बढ़ोतरी 1 मई, 2025 को की गई थी। जीसीएमएमएफ ने एक बयान में कहा कि उसने भारत भर में प्रमुख दूध विक्रय प्रकारों/पैकेटों में ताजे पाउच दूध की कीमतों में 14 मई से 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। कंपनी का तर्क कंपनी की ओर से कहा गया है कि यह बढ़ोतरी प्रति लीटर लगभग 2.5-3.5 प्रतिशत के बराबर है, जो औसत खाद्य मुद्रास्फीति से कम है। कहा गया कि दूध के संचालन और उत्पादन की कुल लागत में वृद्धि के कारण कीमतों में बढ़ोतरी की जा रही है। इस दौरान पशुओं के चारे, दूध की पैकेजिंग फिल्म और ईंधन की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है। सहकारी समिति ने कहा कि उसके सदस्य संघों ने किसानों के खरीद मूल्य में 30 रुपये प्रति किलोग्राम वसा की वृद्धि की है, जो मई 2025 की तुलना में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि है। भैंस के दूध की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के लिए 500 मिलीलीटर पैक की संशोधित दरों के अनुसार, स्लिम एन वेरिएंट की कीमत 27 रुपये, ताजा की कीमत 30 रुपये, गाय के दूध की कीमत 31 रुपये और गोल्ड की कीमत 36 रुपये होगी। भैंस के दूध की कीमत में 4 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है और अब यह 80 रुपये प्रति लीटर हो गया है। 20 प्रतिशत दुग्ध उत्पादकों को देती है कंपनी जीसीएमएमएफ ने कहा कि अमूल की नीति के तहत, दूध और दूध उत्पादों के लिए उपभोक्ताओं द्वारा भुगतान किए गए प्रत्येक रुपये में से लगभग 80 पैसे दूध उत्पादकों को दिए जाते हैं। जीसीएमएमएफ ने आगे कहा कि मूल्य संशोधन से दूध उत्पादकों को लाभकारी दूध मूल्य बनाए रखने में मदद मिलेगी और उन्हें अधिक दूध उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। एक लाख करोड़ से ज्यादा का कारोबार डेयरी उत्पादों की बढ़ती मांग के चलते, वित्त वर्ष 2025-26 में अमूल ब्रांड का कुल कारोबार 11 प्रतिशत बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया। पिछले वित्त वर्ष में जीसीएमएमएफ का कारोबार 11.4 प्रतिशत बढ़कर 73,450 करोड़ रुपये हो गया, जबकि उससे पिछले वित्त वर्ष में यह 65,911 करोड़ रुपये था। जीसीएमएमएफ दुनिया की सबसे बड़ी किसान-स्वामित्व वाली डेयरी सहकारी संस्था है, जिसमें 36 लाख किसान शामिल हैं। यह प्रतिदिन 31 मिलियन लीटर दूध एकत्र करता है और सालाना 24 बिलियन से अधिक अमूल उत्पादों के पैकेट वितरित करता है, जिनमें दूध, मक्खन, पनीर, घी और आइसक्रीम आदि शामिल हैं।
एक रात में दो अपराध, देश को झकझोर देने वाली घटना दिल्ली और राजस्थान से सामने आई इस सनसनीखेज घटना ने पूरे देश को हिला दिया है। 23 वर्षीय आरोपी राहुल मीणा ने कथित तौर पर 12 घंटे के भीतर दो जघन्य अपराधों को अंजाम दिया। पहले उसने Alwar में अपनी पड़ोसी महिला के साथ दुष्कर्म किया, और इसके कुछ घंटों बाद Delhi पहुंचकर अपने पूर्व नियोक्ता के घर में उनकी 22 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी। अलवर में पहली वारदात, धमकी देकर फरार पुलिस के अनुसार, आरोपी ने रात करीब 10:30 बजे पड़ोसी के घर में घुसकर महिला के साथ मारपीट की और फिर दुष्कर्म किया। वारदात के बाद उसने पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी और मौके से फरार हो गया। इस मामले में अलवर पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। दिल्ली में दूसरी वारदात, घर में घुसकर हत्या अगली सुबह आरोपी दिल्ली के अमर कॉलोनी इलाके में स्थित अपने पूर्व नियोक्ता के घर पहुंचा। उस समय घर में युवती अकेली थी। करीब एक घंटे के भीतर उसने वारदात को अंजाम दिया और फरार हो गया। जब युवती के माता-पिता घर लौटे, तो उन्होंने अपनी बेटी को खून से लथपथ हालत में पाया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि युवती के साथ दुष्कर्म के बाद गला घोंटकर हत्या की गई। CCTV से खुला राज, 15 टीमों ने किया गिरफ्तार दिल्ली पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए 15 टीमें बनाई थीं। CCTV फुटेज के जरिए आरोपी की पहचान और उसकी गतिविधियों का पता लगाया गया। फुटेज में आरोपी को घर में प्रवेश और बाहर निकलते हुए अलग-अलग कपड़ों में देखा गया। ऑटो चालक की मदद से पुलिस आरोपी तक पहुंची और उसे एक होटल से गिरफ्तार कर लिया। पहले नौकरी से निकाला गया था आरोपी आरोपी पहले पीड़िता के घर में काम करता था, लेकिन उसे कथित वित्तीय गड़बड़ी और सट्टेबाजी की आदत के कारण नौकरी से निकाल दिया गया था। जांच में सामने आया है कि वह पैसे के लिए धोखाधड़ी करता था और कर्ज में डूबा हुआ था। कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और घरेलू कर्मचारियों के वेरिफिकेशन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सख्त जांच और सुरक्षा उपायों की तत्काल जरूरत है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।