मुंबई, एजेंसियां। राजकुमार राव की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ की रिलीज डेट बदल दी गई है। मेकर्स ने घोषणा की है कि फिल्म अब 16 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इससे पहले फिल्म को 7 अगस्त को रिलीज किया जाना था। राजकुमार राव निभा रहे उज्ज्वल निकम का किरदार फिल्म में राजकुमार राव देश के चर्चित सरकारी वकील उज्ज्वल निकम की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म उनके करियर और देश के कई महत्वपूर्ण आपराधिक मामलों से जुड़े कानूनी संघर्षों पर केंद्रित है। वामिका गब्बी भी फिल्म में अहम भूमिका निभा रही हैं। अविनाश अरुण ने किया निर्देशन ‘प्रहार’ का निर्देशन अविनाश अरुण धवरे ने किया है, जिन्हें ‘थ्री ऑफ अस’ और ‘पाताल लोक’ जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाता है। फिल्म का निर्माण दिनेश विजान ने मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले किया है। फिल्म में जयदीप अहलावत और सिकंदर खेर भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। पहले 7 अगस्त को होनी थी रिलीज मेकर्स ने पहले ‘प्रहार’ को 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में उतारने की योजना बनाई थी। बाद में रिलीज टल गई और अब नई तारीख 16 अक्टूबर तय की गई है। मेकर्स ने नई तारीख की घोषणा सोशल मीडिया पर की। रिलीज में बदलाव की कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। उज्ज्वल निकम के चर्चित मामलों की झलक फिल्म की कहानी उज्ज्वल निकम के चर्चित कानूनी करियर को पर्दे पर पेश करेगी। इसमें 1993 मुंबई बम धमाकों और 2008 मुंबई ट्रेन हमलों से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका को भी दिखाया जाएगा। राजकुमार राव का किरदार फिल्म में न्याय और कानूनी लड़ाई के केंद्र में रहेगा।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता राजकुमार राव की बहुप्रतीक्षित कोर्टरूम ड्रामा फिल्म ‘प्रहार – द उज्ज्वल निकम स्टोरी’ की रिलीज को फिलहाल टाल दिया गया है। फिल्म पहले 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब मेकर्स ने इसकी रिलीज डेट आगे बढ़ाने का फैसला किया है। नई रिलीज तारीख की घोषणा अभी नहीं की गई है। बड़े फिल्मों के क्लैश से बचने के लिए लिया फैसला रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘प्रहार’ की रिलीज को टालने का एक बड़ा कारण उस समय सिनेमाघरों में आने वाली कई बड़ी फिल्मों से टकराव बताया जा रहा है। अगस्त में हॉलीवुड और बॉलीवुड की कई बड़ी रिलीज के चलते मेकर्स फिल्म को बेहतर स्क्रीन और दर्शक प्रतिक्रिया दिलाने के लिए नई तारीख पर विचार कर रहे हैं। उज्ज्वल निकम की भूमिका में नजर आएंगे राजकुमार राव फिल्म में राजकुमार राव देश के चर्चित सरकारी वकील उज्ज्वल निकम का किरदार निभा रहे हैं। कहानी उनके चर्चित मामलों और कानूनी सफर पर आधारित है, जिसमें 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मुकदमे जैसे महत्वपूर्ण मामलों का संदर्भ भी शामिल है। वामिका गब्बी भी फिल्म का हिस्सा फिल्म में राजकुमार राव के साथ वामिका गब्बी भी अहम भूमिका में नजर आएंगी। फिल्म का टीजर और फर्स्ट लुक सामने आने के बाद दर्शकों में इसे लेकर उत्सुकता बढ़ी थी। राजकुमार राव के फैंस को नई तारीख का इंतजार ‘प्रहार’ को लेकर दर्शकों में काफी उम्मीदें हैं क्योंकि राजकुमार राव इससे पहले भी गंभीर और वास्तविक किरदारों के लिए पहचाने जाते रहे हैं। अब फैंस को फिल्म की नई रिलीज डेट और आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता राजकुमार राव अपने एक पुराने राजनीतिक गाने 'मोदी है तो मुमकिन है' को लेकर चर्चा में आ गए हैं। दरअसल, NEET और छात्र प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे पर अपनी राय रखने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने उन्हें पुराने गाने में शामिल होने को लेकर सवाल किया। इसके जवाब में राजकुमार राव ने कहा कि लोग किसी व्यक्ति की परिस्थितियों और उस पर पड़ने वाले दबाव को पूरी तरह नहीं जानते। NEET प्रदर्शन पर पोस्ट के बाद शुरू हुआ विवाद राजकुमार राव ने हाल ही में छात्रों के प्रदर्शन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि छात्रों की आवाज को सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए और उनकी परेशानियों को गंभीरता से समझना जरूरी है। इसके बाद कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके पुराने राजनीतिक गाने को लेकर उन्हें निशाने पर लिया। यूजर के सवाल पर दिया जवाब एक यूजर ने राजकुमार राव से सवाल किया कि उन्होंने उस गाने में काम करके अपना सम्मान खो दिया है। इस पर अभिनेता ने जवाब देते हुए कहा कि लोग यह नहीं समझ सकते कि किसी व्यक्ति पर किस तरह का दबाव हो सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक दिन लोग उनके नजरिए को समझेंगे और उनका सम्मान वापस करेंगे। दबाव किस तरह का था, यह साफ नहीं किया राजकुमार राव ने अपने जवाब में "दबाव" का जिक्र जरूर किया, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह दबाव किसकी ओर से था या किस परिस्थिति में था। इसी वजह से सोशल मीडिया पर उनके बयान को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक गाने को लेकर पहले भी हुई थी चर्चा 'मोदी है तो मुमकिन है' गाने में राजकुमार राव के साथ कुछ अन्य कलाकारों के शामिल होने को लेकर पहले भी चर्चा हुई थी। गाना रिलीज होने के बाद इसे लेकर राजनीतिक बहस देखने को मिली थी। बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज राजकुमार राव के ताजा बयान के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स उनसे पुराने गाने को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। फिलहाल अभिनेता का बयान मनोरंजन जगत के साथ-साथ राजनीतिक चर्चा का भी विषय बन गया है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के 54वें जन्मदिन पर उनके प्रशंसकों को बड़ा तोहफा मिला है। लंबे समय से चर्चा में रही उनकी बायोपिक ‘दादा: द सौरव गांगुली स्टोरी’ का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है। फिल्म में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता राजकुमार राव सौरव गांगुली की भूमिका निभाते नजर आएंगे। निर्माताओं ने फिल्म का फर्स्ट लुक भी जारी कर दिया है, जिसने सोशल मीडिया पर आते ही क्रिकेट और सिनेमा प्रेमियों का ध्यान खींच लिया। फर्स्ट लुक में दिखा लॉर्ड्स का ऐतिहासिक पल फिल्म के पोस्टर में राजकुमार राव बिल्कुल सौरव गांगुली के मशहूर अंदाज में नजर आ रहे हैं। पोस्टर में वह साल 2002 के नेटवेस्ट ट्रॉफी फाइनल के बाद लॉर्ड्स की बालकनी में टी-शर्ट लहराते हुए दिखाई दे रहे हैं। इंग्लैंड के खिलाफ उस ऐतिहासिक जीत के बाद गांगुली का यह जश्न भारतीय क्रिकेट के सबसे यादगार पलों में गिना जाता है। फर्स्ट लुक को देखकर फैंस फिल्म को लेकर काफी उत्साहित हैं। सौरव गांगुली ने जताई खुशी फिल्म का पोस्टर साझा करते हुए सौरव गांगुली ने सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि यह उनके जन्मदिन का अब तक का सबसे बेहतरीन तोहफा है और उन्हें बड़े पर्दे पर अपनी क्रिकेट यात्रा को देखने का बेसब्री से इंतजार है। बताया जा रहा है कि फिल्म में गांगुली के बचपन, भारतीय टीम में उनके संघर्ष, सफल कप्तानी और बाद में बीसीसीआई अध्यक्ष बनने तक की पूरी कहानी दिखाई जाएगी। 2027 में होगी रिलीज, विक्रमादित्य मोटवाने करेंगे निर्देशन 'दादा: द सौरव गांगुली स्टोरी' का निर्देशन विक्रमादित्य मोटवाने कर रहे हैं, जबकि फिल्म का निर्माण लव रंजन, अंकुर गर्ग, गुलशन कुमार, भूषण कुमार और टी-सीरीज़ के सहयोग से किया जा रहा है। यह फिल्म 14 मई 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पहले इस भूमिका के लिए रणबीर कपूर और आयुष्मान खुराना के नाम पर भी विचार किया गया था, लेकिन अंततः राजकुमार राव को चुना गया। बड़े बजट में बन रही यह फिल्म भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में से एक सौरव गांगुली के प्रेरणादायक सफर को बड़े पर्दे पर जीवंत करेगी।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता राजकुमार राव और निर्माता दिनेश विजान एक बार फिर साथ काम करने जा रहे हैं। मैडॉक फिल्म्स ने अपनी नई बायोग्राफिकल फिल्म Prahaar: The Ujjwal Nikam Story की रिलीज डेट का आधिकारिक एलान कर दिया है। फिल्म 7 अगस्त 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इस घोषणा के बाद फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। मशहूर वकील उज्ज्वल निकम के जीवन पर आधारित है फिल्म ‘प्रहार- द उज्ज्वल निकम स्टोरी’ एक बायोग्राफिकल ड्रामा फिल्म है, जो देश के चर्चित सरकारी वकील और विशेष लोक अभियोजक Ujjwal Nikam के जीवन और उनके कानूनी सफर पर आधारित है। फिल्म में राजकुमार राव मुख्य भूमिका निभाते नजर आएंगे। माना जा रहा है कि यह फिल्म न्याय व्यवस्था, कानूनी संघर्ष और देश के चर्चित मामलों को बड़े पर्दे पर पेश करेगी। वामिका गब्बी, जयदीप अहलावत और सिकंदर खेर भी आएंगे नजर फिल्म में राजकुमार राव के अलावा Wamiqa Gabbi, Jaideep Ahlawat और Sikandar Kher भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। मजबूत स्टारकास्ट के कारण फिल्म को लेकर उम्मीदें और बढ़ गई हैं। अविनाश अरुण संभालेंगे निर्देशन की कमान फिल्म का निर्देशन अविनाश अरुण कर रहे हैं, जो अपने संवेदनशील और प्रभावशाली निर्देशन के लिए जाने जाते हैं। वहीं मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले बनने वाली इस फिल्म से एक बार फिर दिनेश विजन और राजकुमार राव की सफल साझेदारी देखने को मिलेगी। अगस्त में बड़े पर्दे पर होगी कानूनी संघर्ष की कहानी ट्रेड विश्लेषकों के अनुसार, ‘प्रहार’ सिर्फ एक बायोपिक नहीं बल्कि एक प्रेरणादायक कहानी होगी, जिसमें न्याय के लिए लड़े गए संघर्षों को दर्शाया जाएगा। दमदार कलाकारों और मजबूत विषयवस्तु के साथ यह फिल्म अगले साल अगस्त में दर्शकों के बीच पहुंचेगी और बॉक्स ऑफिस पर बड़ी चर्चा बटोर सकती है।
बॉलीवुड अभिनेता Rajkummar Rao इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में पिता बने एक्टर ने अपनी नन्हीं बेटी को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। जहां आमतौर पर बच्चे के जन्म को परिवार की “किस्मत बदलने वाला” माना जाता है, वहीं राजकुमार राव ने इस सोच से अलग हटकर एक बेहद संवेदनशील और सोचने पर मजबूर करने वाला नजरिया पेश किया। ‘बेटी प्यार लाई है, किस्मत नहीं बदलती’ आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में Rajkummar Rao ने साफ कहा कि उनकी बेटी उनके जीवन में ढेर सारा प्यार लेकर आई है, लेकिन वह उसे अपनी सफलता का कारण नहीं मानते। उन्होंने कहा कि जिंदगी में सफलता मेहनत, समय और किस्मत का मिश्रण होती है–इसे किसी एक व्यक्ति, खासकर एक छोटे बच्चे से जोड़ना सही नहीं है। बेटी पर नहीं डालना चाहते किसी तरह का दबाव राजकुमार राव ने अपनी सोच को और स्पष्ट करते हुए कहा कि वह अपनी बेटी पर किसी भी तरह की उम्मीद या “लकी चार्म” का टैग नहीं डालना चाहते। उनका मानना है कि हर बच्चे का अपना अलग व्यक्तित्व और जीवन होता है, जिसे उसे बिना किसी दबाव के जीने की आजादी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, “बच्चों को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उन्हें परिवार के लिए कुछ खास साबित करना है। उन्हें अपनी पहचान खुद बनाने का मौका मिलना चाहिए।” खुशी का दिन, लेकिन ‘सिर्फ इत्तेफाक’ इस बातचीत में Rajkummar Rao ने उस खास दिन का भी जिक्र किया जब उनकी बेटी का जन्म हुआ। उसी दिन उनकी पत्नी Patralekha को फिल्म ‘फुले’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला था। हालांकि, इस डबल खुशी को भी उन्होंने “सिर्फ एक प्यारा इत्तेफाक” बताया और साफ किया कि सफलता का असली श्रेय मेहनत और लगन को ही जाता है, न कि किसी संयोग को।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।