Rath Yatra

Jagannath Rath Yatra
रथयात्रा के पांचवें दिन मनाई जाएगी हेरा पंचमी, रथ भंगिनी की अनूठी परंपरा निभाएंगे श्रद्धालु

खरसावां। जगन्नाथ रथयात्रा के पांचवें दिन मनाई जाने वाली हेरा पंचमी जगन्नाथ संस्कृति का एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। यह केवल एक पारंपरिक उत्सव नहीं, बल्कि भगवान जगन्नाथ और देवी महालक्ष्मी के बीच प्रेम, विरह और मान-मनौव्वल का प्रतीक माना जाता है। ओडिशा के श्रीजगन्नाथ पुरी की तर्ज पर झारखंड के सरायकेला, खरसावां और हरिभंजा में भी सोमवार को श्रद्धा और परंपरा के साथ रथ भंगिनी की रस्म निभाई जाएगी।   हेरा पंचमी के अवसर पर क्या होता है? हेरा पंचमी के अवसर पर शाम को मां महालक्ष्मी की कांस्य प्रतिमा को श्रीमंदिर स्थित लक्ष्मी मंदिर से विशेष पालकी में विराजमान कर भव्य शोभायात्रा के साथ गुंडिचा मंदिर ले जाया जाएगा। मंदिर के मुख्य द्वार पर विधि-विधान से पूजा और पारंपरिक संवाद के बाद देवी महालक्ष्मी भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ तक पहुंचेंगी। यहां वह अपनी नाराजगी के प्रतीक स्वरूप रथ के अगले हिस्से की लकड़ी और पहिए को प्रतीकात्मक रूप से क्षतिग्रस्त करेंगी। इसी रस्म को रथ भंगिनी कहा जाता है। इसके बाद पुजारी और सेवायत देवी का मान-मनौव्वल कर उन्हें सम्मानपूर्वक श्रीमंदिर वापस ले जाएंगे।   इस अनुष्ठान में भगवान जगन्नाथ के सेवकों की अपेक्षा मां लक्ष्मी के भक्तों, विशेषकर महिलाओं की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पालकी यात्रा में शामिल होकर इस परंपरा का हिस्सा बनते हैं।   पौराणिक मान्यता के अनुसार पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर चले जाते हैं और कई दिनों तक वापस नहीं लौटते। इससे नाराज होकर देवी महालक्ष्मी स्वयं उनसे मिलने पहुंचती हैं और क्रोध में उनके रथ का एक हिस्सा प्रतीकात्मक रूप से तोड़ देती हैं। पुजारियों के माध्यम से ओड़िया भाषा में मान-मनौव्वल के बाद देवी लौट जाती हैं।   हेरा पंचमी के साथ ही भगवान जगन्नाथ की श्रीमंदिर वापसी यानी बाहुड़ा रथयात्रा की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं। इस परंपरा को जगन्नाथ संस्कृति में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व प्राप्त है।

anjali kumari जुलाई 20, 2026 0
Traffic restrictions and route diversions implemented in Asansol and Durgapur for Rath Yatra
रथ यात्रा के लिए आसनसोल-दुर्गापुर में ट्रैफिक प्लान लागू, कई सड़कें बंद, दर्जनों मार्गों पर रूट डायवर्ट

कोलकाता। रथ यात्रा के मद्देनजर पश्चिम बंगाल के आसनसोल और दुर्गापुर में यातायात व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया गया है। श्रद्धालुओं की भीड़ और रथ यात्रा के सुचारु संचालन को देखते हुए प्रशासन ने कई प्रमुख सड़कों पर वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी है, जबकि कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है। पुलिस आयुक्त डॉ. प्रणव कुमार के निर्देश पर यह विशेष ट्रैफिक व्यवस्था गुरुवार सुबह 10 बजे से रथ यात्रा कार्यक्रम समाप्त होने तक प्रभावी रहेगी। प्रशासन ने लोगों से यात्रा पर निकलने से पहले वैकल्पिक मार्गों की जानकारी लेने की अपील की है। आसनसोल में इन प्रमुख मार्गों पर रहेगा प्रतिबंध आसनसोल साउथ थाना क्षेत्र में हटन रोड, इस्माइल मोड़, बुद्ध मोड़, नूरुद्दीन रोड, कालीपहाड़ी मोड़, आश्रम मोड़, पंपू तालाव मोड़, बीएनआर मोड़ और भगत सिंह मोड़ समेत कई महत्वपूर्ण स्थानों पर यातायात प्रतिबंध लागू रहेगा। बड़ी गाड़ियों को विभिन्न वैकल्पिक मार्गों जैसे जुबली मोड़, ऑफिसर्स क्लब, डीएस मोड़, जोगी बाबा मोड़, एचएलजी मोड़ और आसनसोल सिटी बस स्टैंड की ओर डायवर्ट किया जाएगा। हीरापुर क्षेत्र में भी रहेगा ट्रैफिक डायवर्जन हीरापुर थाना क्षेत्र में कोर्ट मोड़, विद्यासागर स्टैच्यू मोड़, गैलेक्सी मॉल मोड़, पोलो ग्राउंड, ध्रुबडांगाल रेल गेट और हाउसिंग मोड़ के बीच भी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध रहेगा। इन मार्गों पर आने वाले वाहनों को कोर्ट मोड़, बर्नपुर रोड और गैलेक्सी मॉल की ओर मोड़ने की व्यवस्था की गई है। रानीगंज में कई प्रवेश मार्ग बंद रानीगंज थाना क्षेत्र में पंजाबी मोड़, गिरजापाड़ा मोड़, मंगलपुर मोड़, टीबी हॉस्पिटल वॉटर टैंक, राजबाड़ी मोड़, अनाथ काली मंदिर और सियरसोल इलाके में भी विशेष ट्रैफिक व्यवस्था लागू रहेगी। राष्ट्रीय राजमार्ग-19 और बांकुरा की ओर से आने वाले वाहनों को निर्धारित वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा, ताकि रथ यात्रा के दौरान यातायात बाधित न हो। दुर्गापुर में भी लागू रहेगा विशेष ट्रैफिक प्लान दुर्गापुर में बसुंधरा रोटरी, रघुनाथपुर मोड़, अकबर रोटरी, एनेक्स रोटरी, एलआईसी रोटरी, चित्रालय रोटरी, प्रांतिका मोड़ और भीरिंगी अंडरपास के आसपास यातायात में बदलाव किया गया है। इन मार्गों पर विशेष रूप से बड़ी बसों और भारी वाहनों को लिंक रोड तथा अन्य वैकल्पिक मार्गों से होकर गुजरने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की अपील पुलिस प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि रथ यात्रा के दौरान अनावश्यक रूप से प्रतिबंधित मार्गों पर जाने से बचें और ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करें। प्रशासन का कहना है कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और शहर में यातायात को सुचारु बनाए रखना है।  

kalpana जुलाई 16, 2026 0
National Media Conference 2026
नई दिल्ली में 17 जुलाई को होगी नेशनल मीडिया कॉन्फ्रेंस, झारखंड सहित देशभर के पत्रकार होंगे शामिल

रांची। भारत निर्वाचन आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में मीडिया की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 17 जुलाई को नई दिल्ली में राष्ट्रीय मीडिया कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का फैसला किया है। यह एक दिवसीय सम्मेलन द्वारका स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM) के सभागार में आयोजित होगा। इसमें झारखंड समेत देश के विभिन्न राज्यों से चुनावी रिपोर्टिंग से जुड़े पत्रकार हिस्सा लेंगे। सम्मेलन को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार संबोधित करेंगे और मीडिया से सीधे संवाद भी करेंगे।   चुनावी रिपोर्टिंग के विभिन्न पहलुओं पर होगा मंथन सुबह 9 बजे से शुरू होने वाले इस सम्मेलन में निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी चुनावी प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी देंगे। कार्यक्रम की शुरुआत डीजी (मीडिया) आशीष गोयल के संबोधन से होगी, जिसमें चुनाव में मीडिया की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद IIIDEM के महानिदेशक राकेश कुमार वर्मा प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे।   सम्मेलन में डीजी (आईटी) डॉ. सीमा खन्ना चुनाव आयोग के ECINET प्लेटफॉर्म और चुनावी प्रक्रिया में तकनीक के बढ़ते उपयोग की जानकारी देंगी। वहीं, डीडीजी (लॉ) विजय कुमार पांडे चुनाव संबंधी संवैधानिक प्रावधानों और हाल के महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों पर प्रकाश डालेंगे। इसके अलावा अपूर्वा कुमार सिंह इलेक्ट्रोरल रोल, मतदान प्रक्रिया और मतगणना प्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रस्तुति देंगे।   पत्रकारों को मिलेगा सवाल पूछने का अवसर सम्मेलन का सबसे अहम आकर्षण मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का विशेष संबोधन होगा, जिसमें वे चुनावी प्रक्रिया में मीडिया की जिम्मेदारी, पारदर्शिता और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के महत्व पर अपने विचार रखेंगे। उनके संबोधन के बाद शाम 4:30 बजे से 5:30 बजे तक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें पत्रकार सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त से सवाल पूछ सकेंगे।   झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि राज्य से 10 से 12 पत्रकार इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल से चुनावी रिपोर्टिंग से जुड़े पत्रकारों को निर्वाचन प्रक्रिया, कानून, तकनीक और आयोग की कार्यप्रणाली की बेहतर समझ मिलेगी, जिससे भविष्य में चुनाव संबंधी खबरों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता मजबूत होगी।

anjali kumari जुलाई 16, 2026 0
Heavy rainfall and strong wind alert issued in West Bengal ahead of Rath Yatra
रथ यात्रा पर बारिश की दस्तक: कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल के आठ जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

पश्चिम बंगाल में रथ यात्रा के दौरान मौसम का मिजाज बिगड़ा रह सकता है। मौसम विभाग ने गुरुवार को दक्षिण बंगाल के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। खासकर कोलकाता सहित आठ जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। वहीं तटीय क्षेत्रों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी आशंका व्यक्त की गई है। बंगाल की खाड़ी में बना नया निम्न दबाव मौसम विभाग के अनुसार, एक निम्न दबाव क्षेत्र के समाप्त होने के बाद बंगाल की खाड़ी में नया निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय हो गया है। यह प्रणाली बंगाल-ओडिशा तट के पास केंद्रित है और ओडिशा के रास्ते आगे बढ़ रही है। इसके प्रभाव से पूरे पश्चिम बंगाल में व्यापक बारिश होने की संभावना है। बारिश से खेती को लाभ मिलने की उम्मीद है, लेकिन निचले इलाकों में जलभराव की समस्या बढ़ सकती है। बुधवार सुबह से ही कई क्षेत्रों में लगातार बारिश दर्ज की गई है। तीन जिलों में ऑरेंज अलर्ट रथ यात्रा के दिन दक्षिण बंगाल के आठ जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है। इनमें तीन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है। मछुआरों को समुद्र में जाने पर रोक निम्न दबाव के प्रभाव को देखते हुए मछुआरों को 19 जुलाई तक समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है। तटीय इलाकों में तेज हवाओं और ऊंची लहरों की आशंका के कारण यह एहतियाती कदम उठाया गया है। कब मिलेगी राहत? मौसम विभाग का अनुमान है कि दक्षिण बंगाल में अगले शनिवार से बारिश की तीव्रता धीरे-धीरे कम होने लगेगी। हालांकि उत्तर बंगाल में रविवार से फिर बारिश बढ़ने की संभावना है। उत्तर बंगाल के पांच जिलों के लिए रविवार और सोमवार को भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को मौसम को ध्यान में रखते हुए यात्रा करने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।  

kalpana जुलाई 16, 2026 0
Odisha CM launches Samarpan online donation service for Jagannath Temple before Rath Yatra
रथ यात्रा से पहले श्रद्धालुओं को बड़ी सौगात, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने शुरू की 'समर्पण' डिजिटल दान सेवा

अब देश-विदेश से घर बैठे कर सकेंगे ऑनलाइन दान, तकनीक से जुड़ेगी आस्था विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले ओडिशा सरकार ने करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए एक नई डिजिटल सुविधा शुरू की है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बुधवार को पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के लिए 'समर्पण' नामक ऑनलाइन दान सेवा का शुभारंभ किया। इस पहल के जरिए अब देश और विदेश में रहने वाले श्रद्धालु घर बैठे सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से मंदिर में दान कर सकेंगे। 'समर्पण' डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्घाटन श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के कार्यालय में किया गया। इस सेवा का उद्देश्य दान प्रक्रिया को सरल, सुरक्षित और अधिक पारदर्शी बनाना है। भक्तों और भगवान के बीच बनेगा डिजिटल सेतु मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि 'समर्पण' केवल एक ऑनलाइन सुविधा नहीं, बल्कि भगवान जगन्नाथ और श्रद्धालुओं के बीच आस्था का मजबूत डिजिटल सेतु है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से अधिक से अधिक भक्त मंदिर की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में आसानी से अपनी भागीदारी निभा सकेंगे। उनके अनुसार, डिजिटल माध्यम से दान करने की सुविधा मिलने से प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक भरोसेमंद और सुविधाजनक होगी। आधुनिक तकनीक से तैयार हुआ प्लेटफॉर्म इस ऑनलाइन दान प्रणाली को ओडिशा कंप्यूटर एप्लीकेशन सेंटर (ओसीएसी) ने विकसित किया है। सरकार का कहना है कि नई प्रणाली से मंदिर प्रशासन को दान का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिलेगी। साथ ही श्रद्धालुओं को किसी बिचौलिए या जटिल प्रक्रिया का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस सुविधा के माध्यम से देश-विदेश में रहने वाले जगन्नाथ भक्त भी आसानी से मंदिर से जुड़ सकेंगे। रथ यात्रा से पहले श्रद्धालुओं में उत्साह हर वर्ष आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। ऐसे में रथ यात्रा से पहले शुरू की गई 'समर्पण' सेवा को श्रद्धालुओं के लिए बड़ी सौगात माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस डिजिटल पहल से मंदिर में मिलने वाले दान में पारदर्शिता बढ़ेगी और श्रद्धालुओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से अपनी आस्था व्यक्त करने का आसान माध्यम मिलेगा। सरकार का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं को डिजिटल सुविधाओं से जोड़कर श्रद्धालुओं को बेहतर और सहज अनुभव उपलब्ध कराना है।  

kalpana जुलाई 16, 2026 0
Devotees pull the grand chariots of Lord Jagannath, Balabhadra, and Subhadra during the Jagannath Rath Yatra in Puri.
Jagannath Rath Yatra 2026: 16 जुलाई से शुरू होगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा, जानें 10 खास और रोचक बातें

पुरी: विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ 16 जुलाई 2026 (गुरुवार) से होने जा रहा है। यह भव्य धार्मिक उत्सव 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) तक चलेगा। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई भगवान बलभद्र (बलराम) और बहन देवी सुभद्रा अपने-अपने भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर की यात्रा करेंगे। इस पावन अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं और रथ की रस्सियां खींचकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम भी है। आइए जानते हैं जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण और रोचक बातें। जगन्नाथ रथ यात्रा की 10 खास बातें 1. आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से होती है शुरुआत जगन्नाथ रथ यात्रा हर वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से प्रारंभ होती है। इसकी शुरुआत ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से होती है। 2. तीन देवता, तीन अलग-अलग रथ भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा तीन अलग-अलग रथों में विराजमान होकर गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। यह यात्रा भगवान के अपनी बुआ के घर जाने का प्रतीक मानी जाती है। 3. विशेष लकड़ी से बनते हैं रथ रथ निर्माण के लिए विशेष प्रकार की पवित्र नीम की लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जिसे 'दारु' कहा जाता है। शुभ वृक्षों का चयन परंपरागत विधि से किया जाता है। 4. हर रथ का अलग नाम और पहचान भगवान जगन्नाथ का रथ – नंदीघोष (गरुड़ध्वज) भगवान बलभद्र का रथ – तालध्वज देवी सुभद्रा का रथ – दर्पदलन (पद्म रथ) 5. बिना लोहे की कीलों के बनता है रथ मान्यता है कि रथ निर्माण में लोहे की कीलों का उपयोग नहीं किया जाता। रथ निर्माण की प्रक्रिया वसंत पंचमी से शुरू होती है और अक्षय तृतीया से निर्माण कार्य औपचारिक रूप से आरंभ होता है। 6. हेरा पंचमी की अनोखी परंपरा रथ यात्रा के पांचवें दिन 'हेरा पंचमी' मनाई जाती है। मान्यता के अनुसार माता लक्ष्मी नाराज होकर गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं और भगवान जगन्नाथ के रथ के पहिये को सांकेतिक रूप से क्षति पहुंचाती हैं। यह भगवान के बिना उन्हें साथ लिए चले जाने का प्रतीक है। 7. बहुड़ा यात्रा से होती है वापसी भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा लगभग एक सप्ताह गुंडिचा मंदिर में प्रवास करते हैं। इसके बाद आषाढ़ शुक्ल दशमी को उनकी वापसी यात्रा होती है, जिसे बहुड़ा यात्रा कहा जाता है। 8. नीलाद्रि विजय की परंपरा वापसी के बाद भी भगवान जगन्नाथ को माता लक्ष्मी की नाराजगी दूर करनी पड़ती है। जब देवी प्रसन्न होती हैं, तभी भगवान को मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश मिलता है। इस रस्म को नीलाद्रि विजय कहा जाता है। 9. सालबेग की मजार पर रुकता है रथ लोकमान्यता के अनुसार रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ का रथ मुस्लिम भक्त सालबेग की मजार के पास कुछ समय के लिए रुकता है। यह भगवान की समभाव और सर्वधर्म सम्मान की परंपरा का प्रतीक माना जाता है। 10. रथ की रस्सी खींचना माना जाता है पुण्य धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु भगवान के रथ की रस्सी खींचते हैं, उन्हें पापों से मुक्ति और भगवान विष्णु के धाम में स्थान प्राप्त होता है। यही वजह है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस सेवा का हिस्सा बनने के लिए पुरी पहुंचते हैं। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का महापर्व पुरी की यह विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा लगभग तीन किलोमीटर लंबी होती है। भीड़ और श्रद्धालुओं की भारी संख्या के कारण कई बार रथों को गुंडिचा मंदिर तक पहुंचने में पूरा दिन या उससे अधिक समय भी लग जाता है। यह पर्व भारतीय संस्कृति, भक्ति और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक माना जाता है।  

surbhi जुलाई 15, 2026 0
Rathyatra
रथ यात्रा को लेकर झारखंड में हाई अलर्ट, 16 से 25 जुलाई तक सुरक्षा के रहेंगे कड़े इंतजाम

रांची। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा और बहुड़ा यात्रा को लेकर झारखंड पुलिस मुख्यालय ने पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हाई अलर्ट जारी किया है। 16 जुलाई से शुरू होकर 25 जुलाई तक चलने वाले धार्मिक आयोजन के दौरान सभी जिलों के उपायुक्त (डीसी) और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को कानून-व्यवस्था बनाए रखने, भीड़ प्रबंधन और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। राजधानी रांची के लिए अलग से विशेष सुरक्षा व्यवस्था करने को भी कहा गया है।   संवेदनशील इलाकों पर रहेगी विशेष नजर पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को अपने-अपने क्षेत्र के संवेदनशील और विवादित स्थलों की पहचान कर वहां अतिरिक्त पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती करने का निर्देश दिया है। रथ यात्रा के मार्ग, प्रमुख चौक-चौराहों, बाजारों और मंदिर परिसरों में लगातार निगरानी रखी जाएगी। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और भड़काऊ पोस्ट पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।   16 जुलाई को निकलेगी रथ यात्रा, 25 जुलाई को होगी बहुड़ा यात्रा निर्देश के अनुसार 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की रथ यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में विराजमान रहने के बाद 25 जुलाई को बहुड़ा (वापसी) रथ यात्रा निकाली जाएगी। दोनों आयोजनों के दौरान व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू रहेगी।   भीड़ प्रबंधन और आपात सेवाओं पर रहेगा फोकस पुलिस मुख्यालय ने जिलों को पर्याप्त पुलिस बल, ट्रैफिक प्रबंधन, चिकित्सा सुविधा, अग्निशमन दल और आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध रखने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से निगरानी की जाएगी। खोया-पाया केंद्र स्थापित करने, बिजली के झूलते तारों की मरम्मत, पॉकेटमारी और छेड़छाड़ जैसी घटनाओं की रोकथाम, अवैध शराब, जुआ और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर कार्रवाई करने को भी कहा गया है।   शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील पुलिस मुख्यालय ने जिला प्रशासन को शांति समिति के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों और धार्मिक आयोजकों के साथ समन्वय बनाकर आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आम लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए पर्व को सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने की अपील की गई है।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Rath Yatra 2026
रथयात्रा मेले में पार्किंग चार्ज तय करेगा नगर निगम

रांची। रांची में भगवान जगन्नाथ की 335वीं रथयात्रा के आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार मेले में पार्किंग शुल्क को लेकर विशेष व्यवस्था की जा रही है ताकि श्रद्धालुओं से मनमानी वसूली पर रोक लगाई जा सके। जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को समाहरणालय सभागार में आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पार्किंग संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी। चयनित एजेंसी केवल रांची नगर निगम द्वारा निर्धारित शुल्क ही वसूल सकेगी। साथ ही पार्किंग दरों का स्पष्ट प्रदर्शन डिस्प्ले बोर्ड पर करना अनिवार्य होगा।   सुरक्षा और सुविधाओं पर रहेगा विशेष फोकस बैठक में रथयात्रा मेले को सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के अनुकूल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। पूरे मेला क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए वॉच टावर बनाए जाएंगे तथा खोया-पाया केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था सुनिश्चित करने और फायर ब्रिगेड की तैनाती करने का निर्देश दिया गया है। मेले के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति भी सुनिश्चित की जाएगी।   शराब और प्लास्टिक पर रहेगा प्रतिबंध प्रशासन ने मेला क्षेत्र की परिधि से 500 मीटर के दायरे में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मेला क्षेत्र में प्लास्टिक और सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग पर भी पूरी तरह रोक रहेगी। रथयात्रा मार्ग पर दुकानों को केवल निर्धारित क्षेत्र में ही लगाने की अनुमति दी जाएगी।   पिछली शिकायतों के बाद लिया गया फैसला उल्लेखनीय है कि वर्तमान में दोपहिया वाहनों के लिए 10 रुपये और चारपहिया वाहनों के लिए 30 रुपये पार्किंग शुल्क निर्धारित है। हालांकि पिछले वर्ष कई स्थानों पर वाहन चालकों से 100 रुपये तक वसूले जाने की शिकायतें मिली थीं। इन्हीं शिकायतों को देखते हुए प्रशासन ने इस बार सख्त व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। रथयात्रा महोत्सव 16 जुलाई से शुरू होकर 25 जुलाई को घूरती रथयात्रा के साथ संपन्न होगा।

anjali kumari जून 10, 2026 0
temples for spiritual blessings
महाकाल से जगन्नाथ धाम तक सितारों की भीड़, सेलेब्स में बढ़ती आध्यात्मिक लहर

नई दिल्ली: भारत में आस्था और आध्यात्म सिर्फ आम लोगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब फिल्मी सितारों और ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़े लोग भी तेजी से धार्मिक स्थलों की ओर रुख कर रहे हैं। इस हफ्ते उज्जैन के Shri Mahakaleshwar Temple से लेकर पुरी के Shri Jagannath Temple तक कई मशहूर हस्तियां दर्शन करते नजर आईं। महाकाल दरबार में पहुंचे मिलिंद सोमन फिटनेस आइकन Milind Soman अपनी पत्नी Ankita Konwar के साथ उज्जैन पहुंचे। उन्होंने प्रसिद्ध भस्म आरती में हिस्सा लिया, जो भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन और विशेष परंपरा है। मिलिंद सोमन पहले भी मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन की अहमियत पर जोर देते रहे हैं। उनका यह दौरा उसी सोच को दर्शाता है। नई पीढ़ी भी आध्यात्म की ओर युवा अभिनेत्री Sara Arjun भी हाल ही में महाकाल मंदिर पहुंचीं। उन्होंने भी भस्म आरती में शामिल होकर इसे अपने जीवन का खास अनुभव बताया। यह दिखाता है कि Gen Z कलाकार भी अब सिर्फ ग्लैमर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपनी जड़ों और आध्यात्म से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। पुरी जगन्नाथ धाम में गोविंदा की श्रद्धा वहीं बॉलीवुड अभिनेता Govinda ने पुरी के Shri Jagannath Temple में दर्शन किए। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे गोविंदा ने भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लिया। पुरी का यह मंदिर देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, खासकर Rath Yatra के दौरान। मिस इंडिया कंटेस्टेंट्स ने भी लिया आशीर्वाद Femina Miss India 2026 की प्रतिभागियों ने भी पुरी पहुंचकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए। पारंपरिक पाटा साड़ी में सजी इन प्रतिभागियों ने फाइनल से पहले आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने Konark Sun Temple और Chandrabhaga Beach का भी दौरा किया। क्यों बढ़ रही है आध्यात्मिक रुचि? सेलेब्स के इन दौरों से एक बात साफ होती है कि: सफलता के बीच मानसिक शांति की तलाश बढ़ रही है नई पीढ़ी भी संस्कृति और परंपरा से जुड़ना चाहती है धार्मिक स्थल अब सिर्फ पूजा ही नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और संतुलन का माध्यम बन रहे हैं महाकाल की भस्म आरती हो या जगन्नाथ धाम की भव्यता–इन जगहों की ओर बढ़ता सेलेब्स का रुझान यही दिखाता है कि अंततः हर व्यक्ति सुकून और स्थिरता के लिए अपनी जड़ों की ओर लौटता है। हालांकि, आस्था को सिर्फ ट्रेंड या सोशल मीडिया तक सीमित रखने के बजाय उसे दिल से अपनाना ही इसका असली अर्थ है।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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