Russia Ukraine War

Russia Ukraine War
रूस-यूक्रेन युद्ध में फिर तेज हुए ड्रोन हमले, शांति वार्ता को लगा झटका; कई शहरों में तबाही

मॉस्को, एजेंसियां। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर तेज हो गया है। पिछले 24 घंटों में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए, जिससे कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ। इस बीच शांति वार्ता को लेकर भी कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है, जिससे जल्द युद्ध समाप्त होने की उम्मीदों को झटका लगा है।   रूस का यूक्रेन पर बड़ा ड्रोन हमला   यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, रूस ने रातभर कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। राजधानी कीव समेत कई क्षेत्रों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। हवाई हमलों के कारण कई इमारतों और ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचा, जबकि नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।   यूक्रेन ने भी किया जवाबी हमला   यूक्रेन की सेना ने दावा किया कि उसने रूस के कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक ठिकानों को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया। रूस ने भी कुछ ड्रोन हमलों को नाकाम करने का दावा किया है।   शांति वार्ता पर फिर बढ़ी अनिश्चितता   हालिया हमलों के बाद दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की संभावनाएं फिर कमजोर पड़ती दिख रही हैं। कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रहने के बावजूद किसी बड़े समझौते के संकेत नहीं मिले हैं।   नागरिकों पर बढ़ रहा युद्ध का असर   लगातार हो रहे हमलों से दोनों देशों में आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति, परिवहन और अन्य आवश्यक सेवाएं प्रभावित हुई हैं। लोगों को बार-बार हवाई हमले के सायरन के बीच शरणस्थलों में जाना पड़ रहा है।   अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ी   संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष इसी तरह जारी रहा, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और खाद्य आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

anjali kumari जुलाई 10, 2026 0
Emergency responders work at the site of missile and drone strikes in Kyiv after a large-scale Russian attack ahead of the NATO Summit.
NATO समिट से पहले रूस का कीव पर बड़ा मिसाइल हमला, कई धमाकों से दहली यूक्रेन की राजधानी

कीव: तुर्की में मंगलवार से शुरू होने वाले NATO शिखर सम्मेलन से ठीक पहले रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर बड़ा मिसाइल और ड्रोन हमला किया। सोमवार तड़के हुए इस हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि कई इलाकों में आग लगने और भारी नुकसान की खबर है। यह एक सप्ताह से भी कम समय में कीव पर दूसरा बड़ा हमला है। ऐसे समय में यह हमला हुआ है जब NATO समिट में रूस-यूक्रेन युद्ध सबसे प्रमुख मुद्दा रहने की उम्मीद है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इसमें शामिल होने वाले हैं। बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से किया गया हमला यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, रूस ने राजधानी कीव पर एक साथ बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन दागे। तड़के सुबह शहर में कई तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जबकि हमले से कुछ देर पहले पूरे शहर में एयर रेड सायरन बजने लगे थे। कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि शहर के कम से कम दो जिलों में मिसाइलों के मलबे गिरने और आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। राहत एवं बचाव दल प्रभावित इलाकों में अभियान चला रहे हैं। जेलेंस्की ने पहले ही दी थी चेतावनी यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने एक दिन पहले ही बड़े रूसी हमले की आशंका जताई थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा था कि यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों को संकेत मिले हैं कि रूस एक और बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस NATO शिखर सम्मेलन से पहले अधिक से अधिक तबाही मचाकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक यह राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की रणनीति का हिस्सा है। पिछले सप्ताह भी हुआ था घातक हमला यह हमला पिछले गुरुवार को कीव पर हुए बड़े रूसी हमले के कुछ ही दिनों बाद हुआ है। उस हमले में कम से कम 30 लोगों की मौत हुई थी और इसे युद्ध शुरू होने के बाद राजधानी पर सबसे घातक हमलों में से एक माना गया था। लगातार हो रहे हमलों ने राजधानी की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। NATO समिट में युद्ध रहेगा मुख्य मुद्दा तुर्की में मंगलवार से शुरू हो रहे NATO शिखर सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध प्रमुख एजेंडा रहेगा। सम्मेलन में सदस्य देशों के नेता यूक्रेन को सैन्य सहायता, यूरोप की सुरक्षा और रूस पर आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। इस बीच रूस पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर रहा है। वहीं यूक्रेन भी रूस के भीतर तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले बढ़ा रहा है। ट्रंप-पुतिन की हालिया बातचीत भी चर्चा में NATO समिट से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 4 जुलाई को लगभग 90 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई थी। रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत के दौरान ट्रंप ने एक बार फिर यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की थी। हालांकि, ताजा रूसी हमले के बाद युद्ध को लेकर तनाव और बढ़ गया है तथा NATO देशों की आगे की रणनीति पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
Saint Petersburg
यूक्रेन का रूस पर बड़ा ड्रोन हमला, सेंट पीटर्सबर्ग के तेल टर्मिनल को बनाया निशाना

मॉस्को, एजेंसियां। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने रूस की ऊर्जा अवसंरचना पर एक और बड़ा हमला किया है। शनिवार देर रात यूक्रेनी ड्रोन ने रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर सेंट पीटर्सबर्ग के प्रमुख तेल टर्मिनल और आसपास के बंदरगाह क्षेत्र को निशाना बनाया। हमले के बाद तेल टर्मिनल में आग लग गई और इलाके में धुएं का बड़ा गुबार दिखाई दिया। रूसी अधिकारियों ने इसे हाल के महीनों का सबसे बड़ा ड्रोन हमला बताया।   72 ड्रोन मार गिराने का रूस का दावा   रूस के लेनिनग्राद क्षेत्र के गवर्नर के अनुसार, एयर डिफेंस सिस्टम ने हमले के दौरान 72 यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराया। इसके बावजूद सेंट पीटर्सबर्ग ऑयल टर्मिनल और वायसोत्स्क बंदरगाह क्षेत्र में नुकसान हुआ। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।   रूस की ऊर्जा आपूर्ति को निशाना बना रहा यूक्रेन   विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन लगातार रूस की तेल और ईंधन आपूर्ति से जुड़ी परियोजनाओं को निशाना बना रहा है, ताकि युद्ध के लिए जरूरी लॉजिस्टिक्स और आर्थिक संसाधनों पर दबाव बनाया जा सके। हाल के महीनों में रूस के कई तेल डिपो, रिफाइनरी और बंदरगाहों पर ऐसे हमले हो चुके हैं।   युद्ध के बीच बढ़ा तनाव   यह हमला ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच हवाई हमलों और ड्रोन हमलों की तीव्रता लगातार बढ़ रही है। रूस ने भी यूक्रेन के कई शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऊर्जा अवसंरचना पर बढ़ते हमले आने वाले दिनों में संघर्ष को और अधिक तीखा बना सकते हैं।

abhishek singh जुलाई 5, 2026 0
India Petroleum Supply
भारत से रूस ने पेट्रोलियम आपूर्ति बढ़ाई, यूक्रेन हमलों के बाद ईंधन संकट गहराया

नई दिल्ली, एजेंसियां। रूस ने यूक्रेन के हमलों के बाद पैदा हुए ईंधन संकट के बीच भारत से पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति बढ़ानी शुरू कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक रूस को घरेलू मांग पूरी करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते वह भारत समेत एशियाई देशों से ईंधन आयात कर रहा है।   ऊर्जा संकट के बीच बढ़ा व्यापारिक दबाव   सूत्रों के अनुसार, रूस के कई रिफाइनरी और ऊर्जा ढांचे पर हाल के हमलों के बाद उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसी कारण पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति में कमी देखने को मिल रही है, जिसे पूरा करने के लिए रूस भारत से खरीदारी कर रहा है।   भारत के ऊर्जा निर्यात पर असर की संभावना   विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो भारत के ऊर्जा व्यापार और निर्यात पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि फिलहाल इसे अल्पकालिक रणनीति माना जा रहा है।   वैश्विक तेल बाजार पर नजर   इस घटनाक्रम के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी हलचल देखी जा रही है, क्योंकि आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन पर असर पड़ सकता है।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
Ukrainian President Volodymyr Zelenskyy during a press event amid a diplomatic dispute with Poland over historical memory and honours.
पोलैंड-यूक्रेन रिश्तों में तनाव: जेलेंस्की ने लौटाया सर्वोच्च सम्मान, UPA विवाद से बढ़ी कड़वाहट

  वारसॉ/कीव: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच पोलैंड और यूक्रेन के रिश्तों में नया तनाव पैदा हो गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने पोलैंड का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’ वापस करने की घोषणा की है। यह कदम पोलैंड के राष्ट्रपति कारोल नावरोकी द्वारा सम्मान वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कहने के बाद उठाया गया। विवाद की जड़ यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की का वह फैसला है, जिसमें उन्होंने एक सैन्य इकाई का नाम यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) के नाम पर रखा। पोलैंड में UPA को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हजारों पोलिश नागरिकों के नरसंहार के लिए जिम्मेदार माना जाता है। जेलेंस्की बोले- यह सम्मान यूक्रेनी जनता और सेना के लिए था जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 2023 में मिला ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’ सम्मान केवल उनके लिए नहीं, बल्कि यूक्रेनी जनता और सेना के लिए था। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने यह सम्मान पोलैंड को वापस भेजने का फैसला किया है। यह सम्मान उन्हें वर्ष 2023 में तत्कालीन पोलिश राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा ने सुरक्षा, स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा में योगदान के लिए प्रदान किया था। कई यूक्रेनी अधिकारियों ने भी लौटाए सम्मान जेलेंस्की के अलावा यूक्रेन के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी पोलैंड से मिले पुरस्कार लौटाने का ऐलान किया है। इनमें राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख किरिलो बुदानोव, पोलैंड में यूक्रेन के राजदूत वासिल बोडनार और विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा शामिल हैं। क्या है UPA और उससे जुड़ा विवाद? यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) 1940 और 1950 के दशक में सक्रिय एक राष्ट्रवादी संगठन था। यूक्रेन में इसे सोवियत संघ और नाजी जर्मनी के खिलाफ संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के रूप में देखा जाता है। पोलैंड का आरोप है कि UPA ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वोल्हिनिया और पूर्वी गैलिसिया क्षेत्रों में हजारों पोलिश नागरिकों की हत्या की थी। यही ऐतिहासिक विवाद आज दोनों देशों के संबंधों में तनाव का कारण बन गया है। पोलैंड ने सम्मान वापस लेने का फैसला क्यों किया? पोलैंड के राष्ट्रपति कारोल नावरोकी ने कहा कि UPA को सम्मानित करना पोलिश समाज की ऐतिहासिक संवेदनाओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अधिकांश पोलिश नागरिक UPA को ऐसे संगठन के रूप में देखते हैं, जिसने पोलैंड के नागरिकों के खिलाफ क्रूर अपराध किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेलेंस्की से सम्मान वापस लेने का फैसला इतिहास और स्मृति के सम्मान के लिए है। यूक्रेन ने फैसले को बताया ‘रूस के लिए तोहफा’ यूक्रेन ने पोलैंड के इस कदम की तीखी आलोचना की है। राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख किरिलो बुदानोव ने इसे यूक्रेनी जनता के प्रति गैर-मित्रवत कदम बताया और कहा कि इससे रूस को दोनों देशों के बीच दरार पैदा करने का मौका मिलेगा। विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने इसे एक ‘रणनीतिक गलती’ करार दिया, जबकि राजदूत वासिल बोडनार ने कहा कि रूस के हमलों का सामना कर रहे यूक्रेन के लिए यह फैसला बेहद पीड़ादायक है। समर्थन जारी रखने का भरोसा राष्ट्रपति कारोल नावरोकी ने स्पष्ट किया है कि इस विवाद का मतलब यह नहीं है कि पोलैंड रूस के खिलाफ यूक्रेन का समर्थन कम करेगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की संप्रभुता और सुरक्षा के समर्थन की पोलैंड की नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। फिर भी, इतिहास से जुड़ा यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब रूस के खिलाफ लड़ाई में पोलैंड, यूक्रेन का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी रहा है और लाखों यूक्रेनी शरणार्थियों को शरण भी दे चुका है। अब यह देखना होगा कि दोनों देश इस कूटनीतिक तनाव को कैसे संभालते हैं।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Smoke rises near Moscow after a Ukrainian drone attack targeted an oil refinery and disrupted airport operations.
यूक्रेन के भीषण ड्रोन हमले से दहला मॉस्को, तेल रिफाइनरी बनी निशाना; रूस ने 555 ड्रोन मार गिराने का दावा किया

  मॉस्को/कीव: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने एक बार फिर रूस की राजधानी मॉस्को को निशाना बनाते हुए बड़ा ड्रोन हमला किया है। रूसी अधिकारियों के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार हुए इस हमले में मॉस्को की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया। हमले के बाद राजधानी के कई हिस्सों में आग और धुएं के गुबार देखे गए, जबकि सुरक्षा कारणों से मॉस्को के चार प्रमुख हवाई अड्डों पर उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। चार वर्षों से अधिक समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान इसे यूक्रेन के सबसे बड़े ड्रोन अभियानों में से एक माना जा रहा है। रूस का दावा- 555 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने रातभर में यूक्रेन की ओर से भेजे गए 555 ड्रोन को नष्ट कर दिया। मंत्रालय के अनुसार: लगभग 200 ड्रोन मॉस्को की ओर बढ़ रहे थे। अधिकांश ड्रोन को राजधानी तक पहुंचने से पहले ही मार गिराया गया। हाल के महीनों में यूक्रेन ने रूस के सैन्य और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमलों की संख्या बढ़ा दी है। मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर गिरे कई ड्रोन मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने बताया कि शहर के दक्षिण-पूर्वी बाहरी इलाके में स्थित मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर कई ड्रोन गिरे। अधिकारियों ने तत्काल किसी बड़े नुकसान या हताहत की पुष्टि नहीं की है, लेकिन घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया। यह रिफाइनरी रूस की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए इसे रणनीतिक दृष्टि से भी बड़ा हमला माना जा रहा है। चार प्रमुख हवाई अड्डों पर उड़ानें प्रभावित रूसी परिवहन मंत्रालय के अनुसार, ड्रोन हमले के बाद सुरक्षा कारणों से मॉस्को के चार प्रमुख हवाई अड्डों से उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। हमले के कारण: कई उड़ानें रद्द हुईं। बड़ी संख्या में उड़ानों में देरी हुई। यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। हाल के महीनों में रूस में ड्रोन हमलों के बाद हवाई यातायात प्रभावित होने की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। जेलेंस्की बोले- रूस के हमलों का यह जायज जवाब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर कहा कि यूक्रेन के लंबी दूरी के हमलों ने एक बार फिर मॉस्को क्षेत्र और रूस के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है। जेलेंस्की ने कहा, “यह हमारे शहरों और समुदायों पर रूस के हमलों का पूरी तरह से जायज जवाब है। यह रूस की युद्ध मशीन को चलाने वाले ठिकानों के खिलाफ हमारी कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण परिणाम है।” उन्होंने यह भी बताया कि: मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर इस सप्ताह दूसरी बार हमला किया गया। रोस्तोव ओब्लास्ट और यूक्रेन के अस्थायी रूप से कब्जे वाले इलाकों में भी ठिकानों को निशाना बनाया गया। ट्रंप और मैक्रों से बातचीत के बाद यूक्रेन का बड़ा कदम यह हमला ऐसे समय हुआ है जब राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें और वार्ता की हैं। जेलेंस्की ने कहा कि: बातचीत यूक्रेन के लिए बेहद अहम रही। युद्ध की दिशा में बड़े बदलाव की उम्मीद है। जी-7 देशों ने यूक्रेन को भविष्य में भी हरसंभव समर्थन देने का भरोसा दिया है। जी-7 देशों ने दोहराया समर्थन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि हाल के दिन यूक्रेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं क्योंकि जी-7 देश एक बार फिर उसके समर्थन में एकजुट दिखाई दिए हैं। उन्होंने कहा कि सहयोगी देश: यूक्रेन को सैन्य सहायता देना जारी रखेंगे। उसकी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करेंगे। रूस के खिलाफ प्रभावी जवाबी कार्रवाई के लिए रणनीतिक सहयोग बढ़ाएंगे। आसियान नेताओं की मेजबानी कर रहे हैं पुतिन इसी बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मॉस्को से लगभग 700 किलोमीटर दूर स्थित कजान में आसियान नेताओं की मेजबानी कर रहे हैं। रूस इस मंच के माध्यम से एशियाई देशों के साथ: व्यापार, निवेश, और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। चार साल से अधिक समय से जारी है युद्ध रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को चार वर्ष से अधिक समय हो चुका है। संघर्ष अब केवल सीमा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों देश एक-दूसरे के रणनीतिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना रहे हैं। एक ओर यूक्रेन रूस के भीतर गहराई तक हमले करने की क्षमता बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर रूस अपनी वायु रक्षा और सैन्य प्रतिक्रिया को और मजबूत करने में जुटा हुआ है। ऐसे में दोनों देशों के बीच संघर्ष और तेज होने की आशंका बढ़ती जा रही है।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
Emergency responders inspect damage after fresh Russia-Ukraine border attacks causing civilian casualties.
रूस-यूक्रेन सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, दोनों ओर के हमलों में 3 लोगों की मौत

  रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। सीमा से सटे क्षेत्रों में दोनों देशों की ओर से हुए ताजा हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। घायलों में एक पांच वर्षीय बच्चा भी शामिल बताया गया है। दोनों देशों के अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में हुए हमलों की पुष्टि की है। युद्धकालीन परिस्थितियों में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि करना कठिन है। ब्रायंस्क क्षेत्र में यूक्रेनी हमले का दावा रूस के सीमावर्ती क्षेत्र ब्रायंस्क के अधिकारियों के अनुसार, यूक्रेन की ओर से की गई गोलाबारी में दो लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। ब्रायंस्क के कार्यवाहक गवर्नर येगोर कोवलचुक ने बताया कि सीमा के निकट स्थित सूजेमका क्षेत्र को निशाना बनाया गया। उनके अनुसार, हमले से स्थानीय नागरिक प्रभावित हुए और कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचा। स्टारोडुब में पेट्रोल पंपों पर हमला रूसी अधिकारियों का दावा है कि ब्रायंस्क क्षेत्र के स्टारोडुब इलाके में हुए एक अन्य हमले में पेट्रोल पंपों को निशाना बनाया गया। इस घटना में सात लोग घायल हुए हैं। इसके अतिरिक्त, एक अलग ड्रोन हमले में पांच वर्षीय बच्चे के घायल होने की भी जानकारी दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित लोगों के इलाज की व्यवस्था किए जाने की बात कही है। रूस का पलटवार, यूक्रेन में भी नुकसान दूसरी ओर, यूक्रेनी अधिकारियों ने रूसी ड्रोन हमलों में नागरिक हताहतों की सूचना दी है। यूक्रेन के सुमी क्षेत्र के गवर्नर ओलेह ह्रीहोरोव के अनुसार, रूसी ड्रोन हमले में 44 वर्षीय एक महिला की मौत हो गई, जबकि एक अन्य महिला गंभीर रूप से घायल हुई है। मायकोलाइव में भी ड्रोन हमले यूक्रेन के दक्षिणी शहर मायकोलाइव में भी ड्रोन हमलों की सूचना मिली है। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, इस हमले में कम से कम तीन लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी है तथा नुकसान का आकलन किया जा रहा है। नागरिकों पर बढ़ रहा युद्ध का असर चार वर्षों से अधिक समय से जारी इस संघर्ष का सबसे अधिक असर सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों पर पड़ रहा है। हाल के हमले इस बात का संकेत हैं कि मोर्चों पर तनाव अभी भी बना हुआ है और दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखे हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा सकती हैं, जबकि नागरिक आबादी लगातार युद्ध की कीमत चुका रही है।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
Russian President Vladimir Putin discusses Ukraine peace talks and conditions for a possible settlement.
रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म होने की उम्मीद! ट्रंप के शांति प्रस्ताव पर पुतिन तैयार, यूक्रेन के सामने रखीं शर्तें

  रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संकेत दिया है कि मॉस्को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्रस्ताव के आधार पर यूक्रेन के साथ समझौते के लिए तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी शांति समझौते के लिए यूक्रेन को कुछ महत्वपूर्ण शर्तें स्वीकार करनी होंगी। ट्रंप के प्रस्ताव पर रूस की सकारात्मक प्रतिक्रिया रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस शांतिपूर्ण समाधान चाहता है और वह उन प्रस्तावों पर आगे बढ़ने को तैयार है जिन पर अलास्का के एंकरेज में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ चर्चा हुई थी। पुतिन ने कहा कि यदि यूक्रेन भी इन प्रस्तावों को स्वीकार करता है तो संघर्ष का समाधान अपेक्षाकृत जल्दी संभव हो सकता है। उनके अनुसार, रूस बातचीत के रास्ते को बंद नहीं करना चाहता, लेकिन समझौता दोनों पक्षों की सहमति से ही संभव होगा। रूस की प्रमुख शर्तें क्या हैं? रूसी पक्ष के अनुसार संभावित समझौते के लिए कुछ प्रमुख मुद्दों पर सहमति आवश्यक होगी: यूक्रेन को डोनबास क्षेत्र पर रूस के नियंत्रण को स्वीकार करना होगा। खेरसोन और ज़ापोरिज्जिया क्षेत्रों में रूसी दावों को मान्यता देनी होगी। यूक्रेन को नाटो सदस्यता की दिशा में आगे नहीं बढ़ना होगा। सुरक्षा और सीमा संबंधी कुछ अन्य मुद्दों पर भी सहमति बनानी होगी। इन शर्तों पर यूक्रेन की ओर से अभी तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है। जेलेंस्की ने पुतिन को लिखा खुला पत्र इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने पुतिन को एक खुला पत्र लिखकर सीधे संवाद का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने युद्ध समाप्त करने के लिए आमने-सामने बातचीत और पूर्ण युद्धविराम की आवश्यकता पर जोर दिया। जेलेंस्की ने कहा कि स्थायी शांति केवल प्रत्यक्ष वार्ता के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने पुतिन को व्यक्तिगत बैठक का प्रस्ताव भी दिया है। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन ने पुष्टि की है कि उसे यह पत्र प्राप्त हो चुका है। युद्ध के मैदान में रूस का दावा पुतिन ने दावा किया कि रूसी सेना विभिन्न मोर्चों पर लगातार बढ़त बनाए हुए है। उनके अनुसार, हाल के महीनों में रूस ने हजारों वर्ग किलोमीटर अतिरिक्त क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित किया है। रूसी राष्ट्रपति का कहना है कि लुहांस्क क्षेत्र पर लगभग पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो चुका है, जबकि दोनेत्स्क और ज़ापोरिज्जिया के बड़े हिस्सों पर भी रूसी सेना का नियंत्रण है। यूरोप की भूमिका पर रूस का सवाल पुतिन ने यूरोपीय देशों की मध्यस्थता क्षमता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो देश लंबे समय से रूस की रणनीतिक हार की बात करते रहे हैं, उनके लिए निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाना कठिन होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस यूरोपीय देशों के साथ संवाद के रास्ते बंद नहीं करना चाहता। शांति वार्ता में क्यों आया ठहराव? रूस और यूक्रेन के बीच जिनेवा, इस्तांबुल और अबू धाबी सहित कई स्थानों पर पहले भी वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया। फरवरी 2022 में शुरू हुआ युद्ध अब चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और लाखों लोगों को प्रभावित कर चुका है। ट्रंप के प्रस्ताव, पुतिन की प्रतिक्रिया और जेलेंस्की की नई पहल के बाद एक बार फिर कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। क्या जल्द खत्म हो सकता है युद्ध? विशेषज्ञों का मानना है कि शांति समझौते की संभावना तभी बढ़ेगी जब दोनों पक्ष अपनी-अपनी अधिकतम मांगों में लचीलापन दिखाएं। फिलहाल रूस और यूक्रेन के रुख में बड़ा अंतर बना हुआ है, लेकिन हालिया बयानों ने भविष्य में वार्ता की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया है।  

surbhi जून 6, 2026 0
Ukrainian President Volodymyr Zelenskyy proposes direct talks with Russian President Vladimir Putin to advance peace efforts.
जेलेंस्की ने पुतिन को लिखा खुला पत्र, आमने-सामने वार्ता का दिया प्रस्ताव

  यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin को खुला पत्र लिखकर आमने-सामने बातचीत का प्रस्ताव दिया है। तीन साल से अधिक समय से जारी युद्ध के बीच इसे शांति प्रयासों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। जेलेंस्की ने कहा कि युद्ध समाप्त करने का सबसे प्रभावी तरीका दोनों नेताओं के बीच सीधी वार्ता है। उन्होंने बैठक के लिए निश्चित तारीख तय करने और बातचीत के दौरान पूर्ण युद्धविराम लागू करने का सुझाव भी दिया। युद्धबंदियों की अदला-बदली से शुरू हो सकती है शांति प्रक्रिया अपने पत्र में जेलेंस्की ने कहा कि सभी युद्धबंदियों की "ऑल-फॉर-ऑल" यानी सभी के बदले सभी की रिहाई शांति प्रक्रिया की शुरुआत का आधार बन सकती है। उन्होंने दोहराया कि क्षेत्रीय विवादों और कब्जे वाले इलाकों से जुड़े जटिल मुद्दों का समाधान केवल शीर्ष नेतृत्व के बीच प्रत्यक्ष बातचीत से ही संभव है। मॉस्को का जवाब- बातचीत करनी है तो रूस आइए जेलेंस्की के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए क्रेमलिन के प्रवक्ता Dmitry Peskov ने कहा कि यदि यूक्रेनी राष्ट्रपति चाहें तो किसी भी समय मॉस्को आ सकते हैं। जेलेंस्की पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वह मॉस्को या कीव में वार्ता के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने स्विट्जरलैंड, तुर्किये और कुछ अरब देशों को संभावित मेजबान के रूप में सुझाया है। रूस की शर्त- पहले समझौते की रूपरेखा बने रूस लगातार यह रुख अपनाता रहा है कि पुतिन और जेलेंस्की की मुलाकात तभी होनी चाहिए जब किसी संभावित समझौते की मुख्य रूपरेखा पहले से तैयार हो। पुतिन पहले भी कह चुके हैं कि वह केवल ऐसे समझौते को अंतिम रूप देने के लिए यूक्रेनी राष्ट्रपति से मिलेंगे, जिस पर दोनों पक्षों के बीच पहले से सहमति बन चुकी हो। ट्रंप ने किया वार्ता प्रस्ताव का स्वागत अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दोनों नेताओं की संभावित मुलाकात का स्वागत किया है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि यदि दोनों नेता आमने-सामने बैठते हैं तो यह सकारात्मक कदम होगा। उन्होंने यह भी कहा कि रूस और यूक्रेन दोनों को समाधान के लिए कुछ समझौते करने होंगे। कई दौर की बातचीत के बावजूद नहीं निकला समाधान हाल के महीनों में इस्तांबुल, अबू धाबी और जेनेवा में विभिन्न स्तरों पर वार्ताएं हुईं, लेकिन क्षेत्रीय नियंत्रण, सुरक्षा गारंटी और युद्धोत्तर व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। इसी बीच दोनों देशों के बीच मिसाइल, ड्रोन और लंबी दूरी के हमलों का सिलसिला भी जारी है। पुतिन ने फिर उठाए जेलेंस्की की वैधता पर सवाल सेंट पीटर्सबर्ग में विदेशी पत्रकारों से बातचीत के दौरान पुतिन ने एक बार फिर जेलेंस्की की राजनीतिक वैधता पर सवाल उठाए। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि यह विश्लेषण का विषय है कि जेलेंस्की अभी भी यूक्रेन के वैध राष्ट्रपति हैं या नहीं। यूक्रेनी राष्ट्रपति का कार्यकाल 2024 में समाप्त हो चुका है, लेकिन देश में लागू मार्शल लॉ के कारण चुनाव नहीं कराए गए हैं। युद्ध के मैदान में बढ़ रहा दबाव रूस फरवरी 2022 से यूक्रेन में सैन्य अभियान चला रहा है। मॉस्को अब भी मांग कर रहा है कि यूक्रेन पूर्वी डोनबास क्षेत्र से अपनी सेना हटाए। रूस का दावा है कि उसकी सेना कई मोर्चों पर आगे बढ़ रही है, जबकि यूक्रेन लगातार रूसी सैन्य और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमले कर रहा है। हाल ही में यूक्रेन ने Saint Petersburg के पास स्थित तेल टर्मिनल और नौसैनिक सुविधाओं को निशाना बनाया था। कीव की चिंता- दुनिया का ध्यान यूक्रेन से हट रहा है नए शांति प्रस्ताव के बीच जेलेंस्की ने चिंता जताई है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अब पहले की तुलना में यूक्रेन युद्ध पर कम हो गया है। Mark Rutte के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि वर्तमान में अमेरिका और पश्चिमी देशों का प्रमुख फोकस मध्य पूर्व और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों पर है, जबकि यूक्रेन का मुद्दा प्राथमिकता सूची में नीचे चला गया है। शांति की कोशिशों को मिला नया अवसर जेलेंस्की के खुले पत्र और रूस की प्रतिक्रिया ने लंबे समय बाद प्रत्यक्ष वार्ता की संभावना को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि दोनों पक्षों के बीच कई बड़े मतभेद अब भी कायम हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शीर्ष स्तर की बैठक होती है तो यह युद्ध समाप्ति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।  

Deepshikha जून 5, 2026 0
Russia warns of possible major strike on Kyiv amid escalating Ukraine war tensions
रूस ने दी बड़े हमले की चेतावनी, विदेशी नागरिकों से कहा- तुरंत कीव छोड़ें

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। रूस ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में यूक्रेन की राजधानी कीव पर बड़ा हमला किया जा सकता है। रूस ने विदेशी नागरिकों और राजनयिक मिशनों से जुड़े लोगों से जल्द से जल्द कीव छोड़ने की अपील की है। रूस ने अमेरिका से भी की राजनयिक हटाने की बात रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio से फोन पर बातचीत की। इस दौरान रूस ने अमेरिका से कहा कि वह अपने राजनयिक कर्मचारियों को यूक्रेन से बाहर निकाल ले। अमेरिका ने जताई चिंता मार्को रूबियो ने फिलहाल यह साफ नहीं किया कि अमेरिका अपने राजनयिकों को कीव से हटाएगा या नहीं। उन्होंने कहा कि युद्ध लगातार लंबा खिंचता जा रहा है और इसे खत्म करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका युद्ध खत्म कराने के प्रयासों में मदद के लिए तैयार है। यूरोपीय देशों ने कीव छोड़ने से किया इनकार रूस की चेतावनी के बावजूद अभी तक किसी यूरोपीय देश ने कीव छोड़ने का फैसला नहीं किया है। यूरोपीय संघ, फ्रांस और पोलैंड के राजनयिक मिशनों ने साफ कहा है कि वे यूक्रेन की राजधानी में बने रहेंगे। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने भी कहा कि फिलहाल खतरे का स्तर पहले जैसा ही है और स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। रूस ने ड्रोन और मिसाइलों से किया हमला यूक्रेन की वायुसेना के मुताबिक, रूस ने रातभर में बड़े पैमाने पर हमला किया। इन हमलों में 100 से ज्यादा ड्रोन और दो बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। यूक्रेन ने कहा कि रूस लगातार प्रमुख शहरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है। रूस ने फिर इस्तेमाल की खतरनाक मिसाइल रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस ने हाल ही में यूक्रेन पर हाइपरसोनिक ओरेश्निक बैलिस्टिक मिसाइल से भी हमला किया था। चार साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध में यह तीसरी बार है जब रूस ने इस हथियार का इस्तेमाल किया है। जेलेंस्की ने मांगी और रक्षा प्रणाली यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने कहा है कि रूस की बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव के लिए यूक्रेन को और आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण इन प्रणालियों की उपलब्धता कम हो गई है। 2022 से जारी है रूस-यूक्रेन युद्ध रूस ने 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन पर हमला शुरू किया था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच लगातार युद्ध जारी है। अब रूस की नई चेतावनी के बाद आशंका बढ़ गई है कि आने वाले दिनों में युद्ध और ज्यादा तेज हो सकता है।  

surbhi मई 27, 2026 0
Explosions light up Kyiv skyline after Russia launches drones and missiles, including a claimed Oreshnik strike.
रूस का कीव पर बड़ा हमला, ओरेश्निक हाइपरसोनिक मिसाइल इस्तेमाल करने का दावा

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने दावा किया है कि रूस ने राजधानी कीव पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया, जिसमें हाइपरसोनिक “ओरेश्निक” बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। यूक्रेन के मुताबिक, इस हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हुई है, जबकि कई सरकारी इमारतें, रिहायशी इलाके और स्कूल क्षतिग्रस्त हुए हैं। तीसरी बार इस्तेमाल हुई ओरेश्निक मिसाइल जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने कीव क्षेत्र के बिला त्सेरक्वा इलाके को निशाना बनाने के लिए ओरेश्निक मिसाइल दागी। यूक्रेन का दावा है कि यह चार साल से जारी युद्ध में तीसरी बार है जब रूस ने इस अत्याधुनिक हथियार का इस्तेमाल किया है। रूस इससे पहले नवंबर 2024 में निप्रो और जनवरी 2026 में लवीव क्षेत्र में भी ओरेश्निक मिसाइल इस्तेमाल कर चुका है। रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin पहले दावा कर चुके हैं कि ओरेश्निक मिसाइल मैक-10 यानी ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज रफ्तार से हमला कर सकती है और गहरे भूमिगत बंकरों को भी तबाह करने में सक्षम है। रूस ने 600 ड्रोन और 90 मिसाइल दागने का दावा यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, रूस ने संयुक्त हमले में लगभग 600 ड्रोन और 90 मिसाइलों का इस्तेमाल किया। यूक्रेन ने दावा किया कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने 549 ड्रोन और 55 मिसाइलों को नष्ट या इंटरसेप्ट कर दिया। कई मिसाइलें राजधानी कीव और आसपास के इलाकों तक पहुंच गईं, जिससे भारी नुकसान हुआ। स्कूल और रिहायशी इलाके बने निशाना कीव सैन्य प्रशासन प्रमुख Tymur Tkachenko के अनुसार, राजधानी के कम से कम नौ जिलों में हमलों से नुकसान हुआ है। वहीं कीव के मेयर Vitali Klitschko ने कहा कि शेवचेंको जिले में एक स्कूल भी हमले की चपेट में आया, जहां लोग शरण लिए हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पूरी रात सायरन बजते रहे और शहर के कई हिस्सों में विस्फोटों के बाद धुआं उठता दिखाई दिया। रूस ने हमले की पुष्टि की रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि उसने यूक्रेन के सैन्य ठिकानों, एयरबेस और कमांड सेंटरों को निशाना बनाया। मंत्रालय के मुताबिक, यह कार्रवाई रूस के अंदर यूक्रेनी हमलों के जवाब में की गई। क्या है ओरेश्निक मिसाइल? ओरेश्निक रूस की नई पीढ़ी की हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल मानी जाती है। रूसी भाषा में “ओरेश्निक” का मतलब “हेज़लनट का पेड़” होता है। इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहद तेज गति और गहरे भूमिगत ठिकानों को नष्ट करने की क्षमता मानी जाती है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी तेज रफ्तार वाली मिसाइलों को मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम से रोकना बेहद मुश्किल होता है।  

surbhi मई 25, 2026 0
Donald Trump announces temporary Russia-Ukraine ceasefire agreement and prisoner exchange amid ongoing war
रूस-यूक्रेन में 3 दिन का सीजफायर, ट्रंप बोले- मेरे कहने पर बनी सहमति

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच तीन दिन के युद्धविराम का ऐलान किया गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनकी पहल और मध्यस्थता के बाद दोनों देशों ने अस्थायी सीजफायर पर सहमति जताई है. ट्रंप के मुताबिक, यह युद्धविराम 9, 10 और 11 मई तक लागू रहेगा. इस दौरान दोनों देशों के बीच सभी सैन्य गतिविधियां रोकी जाएंगी और युद्धबंदियों की अदला-बदली भी की जाएगी. ट्रंप ने किया सीजफायर का ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट कर कहा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में तीन दिन का सीजफायर होगा.” उन्होंने कहा कि रूस में यह अवधि “विक्ट्री डे” समारोह के कारण महत्वपूर्ण है, जबकि यूक्रेन भी द्वितीय विश्व युद्ध का अहम हिस्सा रहा है. ट्रंप ने दावा किया कि युद्धविराम के लिए अनुरोध उन्होंने सीधे किया था और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तथा यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की दोनों ने इस पर सहमति जताई. 1,000-1,000 युद्धबंदियों की अदला-बदली सीजफायर के तहत दोनों देशों के बीच 1,000-1,000 युद्धबंदियों की अदला-बदली भी होगी. ट्रंप ने कहा कि इस दौरान सभी “काइनेटिक एक्टिविटी” यानी सैन्य हमलों और लड़ाई को पूरी तरह रोका जाएगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता लंबे और विनाशकारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में पहला बड़ा कदम साबित हो सकता है. जेलेंस्की ने भी की पुष्टि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने भी इस अस्थायी युद्धविराम की पुष्टि की है. उन्होंने टेलीग्राम पर लिखा कि अमेरिकी मध्यस्थता में चल रही बातचीत के तहत रूस ने युद्धबंदियों की अदला-बदली पर सहमति दी है. जेलेंस्की ने कहा, “हमें 1,000 के बदले 1,000 युद्धबंदियों की अदला-बदली के लिए रूस की मंजूरी मिल गई है.” उन्होंने इसे शांति वार्ता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. युद्ध खत्म करने की कोशिशें तेज ट्रंप ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह सबसे बड़ा सैन्य संघर्ष है और इसे खत्म करने के लिए लगातार बातचीत चल रही है. उन्होंने लिखा, “हम हर दिन युद्ध खत्म होने के और करीब पहुंच रहे हैं.” हालांकि यह सीजफायर फिलहाल केवल तीन दिनों के लिए है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे संभावित व्यापक शांति समझौते की शुरुआत के रूप में देख रहा है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Russian President Vladimir Putin amid heightened security concerns and reports of bunker-based operations
बढ़ी सुरक्षा, बंकर और तख्तापलट की आशंका… क्या सच में डर के साये में हैं पुतिन?

रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin को लेकर एक बड़ी रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि यूक्रेन युद्ध, ड्रोन हमलों और तख्तापलट की आशंकाओं के बीच उनकी सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा कड़ी कर दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, हालात ऐसे बन चुके हैं कि पुतिन अब लंबे समय तक जमीन के नीचे बने हाई-सिक्योरिटी बंकरों में रहकर काम कर रहे हैं. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में बड़ा दावा ब्रिटिश अखबार Financial Times की रिपोर्ट के अनुसार, रूस की फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस (FSO) ने पिछले कुछ महीनों में पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया है. यूरोपीय खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पुतिन अब पहले की तुलना में ज्यादा अलग-थलग हो गए हैं और सार्वजनिक गतिविधियों में भी उनकी भागीदारी कम हो गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के बाद से ही पुतिन का दायरा सीमित होने लगा था, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद सुरक्षा चिंताएं कई गुना बढ़ गईं. ड्रोन हमलों ने बढ़ाई चिंता रिपोर्ट में यूक्रेन के कथित ड्रोन ऑपरेशन “स्पाइडरवेब” का भी जिक्र किया गया है. दावा है कि पिछले साल यूक्रेनी ड्रोन ने आर्कटिक सर्कल के पास रूसी एयरफील्ड्स को निशाना बनाया था, जिससे क्रेमलिन की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गईं. सूत्रों के मुताबिक, मार्च तक रूस को तख्तापलट और ड्रोन हमलों का खतरा और ज्यादा गंभीर लगने लगा था. इसके बाद पुतिन की यात्राएं सीमित कर दी गईं और उनसे मिलने वालों की जांच बेहद सख्त कर दी गई. बंकर में बिताते हैं लंबा समय? रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन दक्षिणी रूस के क्रास्नोदार क्षेत्र में बने एक सुरक्षित बंकर में कई-कई हफ्तों तक रहते हैं और वहीं से सरकारी कामकाज और युद्ध से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी करते हैं. यह भी दावा किया गया है कि रूसी सरकारी मीडिया कई बार पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो प्रसारित कर सामान्य माहौल दिखाने की कोशिश करता है, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि सब कुछ सामान्य है. करीबी लोगों पर भी कड़ी निगरानी रिपोर्ट में कहा गया है कि पुतिन के बेहद करीबी लोगों के लिए भी सख्त सुरक्षा नियम लागू किए गए हैं. उनके रसोइयों, फोटोग्राफरों और बॉडीगार्ड्स तक को सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. इसके अलावा: इंटरनेट वाले मोबाइल फोन रखने पर रोक है उनके घरों में CCTV निगरानी बढ़ाई गई है व्यक्तिगत संपर्क और आवाजाही सीमित कर दी गई है रूस की ओर से नहीं आई आधिकारिक पुष्टि हालांकि, इन दावों पर रूस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. क्रेमलिन ने पहले भी पुतिन की सेहत और सुरक्षा से जुड़ी कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों को खारिज किया है. लेकिन यूक्रेन युद्ध लंबा खिंचने, रूस के भीतर बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों और लगातार ड्रोन हमलों के बीच यह साफ है कि मॉस्को अब किसी भी तरह के खतरे को हल्के में नहीं लेना चाहता.  

surbhi मई 8, 2026 0
Ukrainian military experts training Middle East forces on anti-drone systems amid rising Iran drone threat
मिडिल ईस्ट में यूक्रेन की ‘ड्रोन डिप्लोमेसी’: रूस से जंग के बीच 200+ मिलिट्री एक्सपर्ट क्यों तैनात?

रूस के साथ जारी युद्ध के बीच एक सवाल वैश्विक रणनीतिक हलकों में तेजी से उभरा है-जब यूक्रेन खुद मोर्चे पर है, तो उसके 200 से अधिक सैन्य विशेषज्ञ मिडिल ईस्ट में क्या कर रहे हैं? इस सवाल का जवाब खुद वोलोडिमीर ज़ेलेंस्की ने ब्रिटेन की संसद में दिया, और इसके साथ ही एक नई भू-राजनीतिक तस्वीर सामने आई। यूक्रेन की ‘नई भूमिका’: युद्ध से सहयोग तक ज़ेलेंस्की के मुताबिक, यूक्रेन के 200 से ज्यादा एंटी-ड्रोन मिलिट्री एक्सपर्ट इस समय खाड़ी और मिडिल ईस्ट के कई देशों में तैनात हैं। ये सैनिक पारंपरिक युद्ध नहीं लड़ रहे, बल्कि: ईरानी ड्रोन हमलों से बचाव की ट्रेनिंग दे रहे हैं   स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों को तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं   एंटी-ड्रोन सिस्टम को मजबूत करने में मदद कर रहे हैं   यह यूक्रेन की रणनीति में बड़ा बदलाव दर्शाता है- ‘सिर्फ युद्ध लड़ने वाला देश’ से ‘सुरक्षा समाधान देने वाला साझेदार’। किन देशों में है तैनाती? यूक्रेनी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि उनकी टीमें: संयुक्त अरब अमीरात   कतर   सऊदी अरब   में पहले से मौजूद हैं, जबकि अगला पड़ाव कुवैत है। इसके अलावा, कई अन्य देशों के साथ भी समझौते हो चुके हैं। ईरान के ड्रोन: असली खतरा क्या है? मिडिल ईस्ट में तनाव की जड़ है ईरान के ‘शाहेद’ ड्रोन, जिन्हें कम लागत और आत्मघाती हमले की क्षमता के कारण बेहद घातक माना जाता है। ज़ेलेंस्की ने कहा: यही ड्रोन रूस 2022 से यूक्रेन के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है   ईरान ने न सिर्फ रूस को ये ड्रोन दिए, बल्कि इनके इस्तेमाल और निर्माण की तकनीक भी साझा की   यानी यूक्रेन अब उसी खतरे से दूसरों को बचाने की कोशिश कर रहा है, जिससे वह खुद जूझ चुका है। ‘रूस-ईरान गठजोड़’ पर सीधा हमला अपने भाषण में ज़ेलेंस्की ने साफ कहा: “रूस और ईरान नफरत के साझेदार हैं, और हथियारों में भी सहयोगी।” उनका संदेश स्पष्ट था- यह केवल यूक्रेन की जंग नहीं है   बल्कि वैश्विक सुरक्षा का मुद्दा है   ड्रोन टेक्नोलॉजी: यूक्रेन की असली ताकत यूक्रेन ने पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन युद्ध में असाधारण प्रगति की है। ज़ेलेंस्की के अनुसार: रूस को होने वाले 90% नुकसान ड्रोन के जरिए हो रहे हैं   यूक्रेन अब रोजाना 2000 तक इंटरसेप्टर ड्रोन बना सकता है   इनमें शामिल हैं: FPV इंटरसेप्टर ड्रोन   समुद्री ड्रोन   एंटी-एयर डिफेंस ड्रोन   यह तकनीक अब यूक्रेन की ‘एक्सपोर्टेबल सिक्योरिटी स्ट्रेंथ’ बन चुकी है। अमेरिका क्यों अलग खड़ा है? दिलचस्प बात यह है कि जहां खाड़ी देश यूक्रेन की मदद ले रहे हैं, वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका को इस मामले में यूक्रेन की मदद की जरूरत नहीं है। अमेरिका ने अपने स्तर पर ‘लुकास’ ड्रोन सिस्टम विकसित किया है, जो ईरानी ड्रोन का मुकाबला करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। असली कहानी: रणनीति या मजबूरी? यूक्रेन का यह कदम केवल सहयोग नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है: वैश्विक मंच पर अपनी उपयोगिता साबित करना   सहयोगी देशों के साथ सैन्य रिश्ते मजबूत करना   रूस-ईरान गठजोड़ के खिलाफ व्यापक मोर्चा तैयार करना   क्यों अहम है यह घटनाक्रम? मिडिल ईस्ट में यूक्रेन की यह सक्रियता कई बड़े संकेत देती है: युद्ध अब सीमाओं तक सीमित नहीं रहा   ड्रोन टेक्नोलॉजी आधुनिक युद्ध का केंद्र बन चुकी है   छोटे लेकिन तकनीकी रूप से सक्षम देश भी वैश्विक समीकरण बदल सकते हैं  

surbhi मार्च 18, 2026 0
Ukraine Proposes Drone Defense Swap for Advanced Systems
ड्रोन रक्षा के बदले फंड और तकनीक की मांग: जेलेंस्की ने अमेरिका और खाड़ी देशों के सामने रखा प्रस्ताव

  रूस के साथ जारी युद्ध और बढ़ते ड्रोन हमलों के बीच Ukraine ने अपनी रक्षा रणनीति को और मजबूत करने के लिए एक नया प्रस्ताव रखा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने कहा है कि उनका देश अपने विकसित किए गए सस्ते ड्रोन इंटरसेप्टर के बदले अमेरिका और खाड़ी देशों से आर्थिक सहायता, तकनीक और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम चाहता है। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि विदेशी सरकारें या कंपनियां यूक्रेनी ड्रोन सीधे निर्माताओं से खरीदकर सरकार को दरकिनार नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा कि रक्षा से जुड़े किसी भी सौदे को आधिकारिक सरकारी प्रक्रिया के जरिए ही पूरा किया जाना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर देश की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ता है।   ड्रोन तकनीक में बढ़ती वैश्विक दिलचस्पी हाल के महीनों में यूक्रेन द्वारा विकसित कम लागत वाले ड्रोन इंटरसेप्टर ने कई देशों का ध्यान आकर्षित किया है। खासकर मध्य पूर्व में बढ़ते ड्रोन खतरे के बीच अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की रुचि इन तकनीकों में बढ़ी है। जेलेंस्की ने कहा कि उनकी सरकार ने एक निजी कंपनी को फटकार भी लगाई है, जिसने सरकारी अनुमति के बिना ड्रोन इंटरसेप्टर बेचने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों को भी राष्ट्रीय सुरक्षा के नियमों का पालन करना होगा।   पैट्रियट सिस्टम की मांग यूक्रेन ने यह भी संकेत दिया है कि वह अपने कम लागत वाले इंटरसेप्टर के बदले उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम हासिल करना चाहता है। कीव ने विशेष रूप से अमेरिकी निर्मित Patriot Missile System की मांग की है, जो बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम माना जाता है। जेलेंस्की का कहना है कि रूस ने फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से यूक्रेन पर हजारों ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। इनसे निपटने के लिए यूक्रेन फिलहाल सस्ते इंटरसेप्टर ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम और विमान-रोधी हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि, उन्नत रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों के खतरे से निपटने के लिए पैट्रियट जैसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत पहले से अधिक महसूस की जा रही है।   रणनीतिक सहयोग की तलाश यूक्रेन का मानना है कि ड्रोन इंटरसेप्टर तकनीक साझा करने के बदले उसे वित्तीय सहायता और आधुनिक रक्षा उपकरण मिल सकते हैं। इससे न केवल उसकी अपनी रक्षा क्षमता मजबूत होगी, बल्कि उसके सहयोगी देशों को भी कम लागत में प्रभावी ड्रोन-रोधी तकनीक उपलब्ध हो सकेगी। जेलेंस्की ने जोर देकर कहा कि ऐसे सभी रक्षा समझौते यूक्रेनी सरकार की मंजूरी से ही किए जाएंगे, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
Military drones flying near air defense systems highlighting modern warfare shift toward low-cost drone threats
सस्ते ड्रोन बनाम महंगे मिसाइल सिस्टम: पश्चिम एशिया के युद्ध से सबक लेते हुए भारत ने बदली रणनीति

  पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने आधुनिक युद्ध की रणनीतियों को लेकर दुनिया भर की सेनाओं को नया सबक दिया है। Iran, Israel और United States के बीच बढ़े तनाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब युद्ध केवल अत्याधुनिक और महंगे हथियारों के दम पर नहीं जीते जा सकते। सस्ते लेकिन प्रभावी ड्रोन और मिसाइलों ने पारंपरिक सैन्य रणनीतियों को चुनौती दी है। इन घटनाओं से सीख लेते हुए भारत भी अपनी वायु रक्षा रणनीति को नए सिरे से मजबूत करने में जुट गया है। रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय वायुसेना ने रूस से कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली खरीदने की प्रक्रिया तेज कर दी है, ताकि सस्ते ड्रोन और कम ऊंचाई वाले खतरों से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।   युद्ध ने बदला आधुनिक रक्षा रणनीति का गणित विशेषज्ञों के मुताबिक हाल के संघर्षों में Iran ने अपेक्षाकृत कम लागत वाले ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल कर शक्तिशाली सैन्य प्रणालियों को चुनौती दी। दूसरी ओर United States और Israel को इन ड्रोन हमलों को रोकने के लिए अत्यंत महंगे इंटरसेप्टर मिसाइल और उन्नत रक्षा प्रणालियों का उपयोग करना पड़ा। इस स्थिति ने युद्ध की अर्थव्यवस्था को भी एक अहम कारक बना दिया है-जहां कम लागत के हथियार महंगे डिफेंस सिस्टम पर भारी पड़ते दिखाई दिए।   महंगे सिस्टम से सस्ते ड्रोन गिराना क्यों पड़ता है भारी उदाहरण के तौर पर रूस का अत्याधुनिक वायु रक्षा सिस्टम S-400 air defense system लंबी दूरी के खतरों को खत्म करने के लिए बनाया गया है। यह 400 किलोमीटर तक की दूरी से आने वाले फाइटर जेट, बैलिस्टिक मिसाइल और अवाक्स जैसे बड़े सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है। लेकिन इसकी एक मिसाइल दागने की लागत कई करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। ऐसे में यदि इसी सिस्टम का इस्तेमाल छोटे और सस्ते ड्रोन को गिराने के लिए किया जाए तो यह सैन्य दृष्टि से आर्थिक रूप से बेहद महंगा पड़ सकता है।   रूस से कम दूरी के सिस्टम की खरीद की तैयारी इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए भारतीय वायुसेना ने रूस के Pantsir-S1 air defense system को खरीदने का निर्णय लिया है। यह एक शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे विशेष रूप से ड्रोन, क्रूज मिसाइल और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक भारत ऐसे 13 सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है। इनकी खरीद पर करीब 6,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इन्हें आपातकालीन खरीद नीति के तहत हासिल किया जाएगा, जिससे डिलीवरी प्रक्रिया तेज हो सके।   S-400 और Pantsir-S1 में मुख्य अंतर लागत: S-400 से मिसाइल दागने की लागत कई करोड़ रुपये तक हो सकती है।   Pantsir-S1 से इंटरसेप्शन की लागत लगभग 90 लाख से 1.3 करोड़ रुपये के बीच मानी जाती है।   रेंज: S-400 की मारक क्षमता लगभग 400 किलोमीटर तक है।   Pantsir-S1 की प्रभावी रेंज लगभग 20 किलोमीटर है।   टार्गेट: S-400: बैलिस्टिक मिसाइल, फाइटर जेट और बड़े हवाई खतरे।   Pantsir-S1: ड्रोन, क्रूज मिसाइल और कम ऊंचाई वाले हवाई लक्ष्य।   विशेषज्ञों का मानना है कि Pantsir-S1 जैसे सिस्टम का मुख्य उद्देश्य S-400 जैसे लंबी दूरी के रक्षा सिस्टम को सुरक्षा कवच देना और छोटे खतरों को पहले ही निष्क्रिय कर देना होता है।   युद्धों से मिल रही रणनीतिक सीख Russia-Ukraine War में भी सस्ते ड्रोन ने बड़े सैन्य उपकरणों को नुकसान पहुंचाकर युद्ध की रणनीति बदल दी थी। इसी तरह पश्चिम एशिया के हालिया संघर्ष ने भी दिखाया है कि भविष्य के युद्धों में लो-कॉस्ट ड्रोन और मिसाइलों का उपयोग निर्णायक भूमिका निभा सकता है। भारत अब बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है, जिसमें लंबी दूरी के सिस्टम के साथ-साथ कम दूरी के एंटी-ड्रोन सिस्टम भी शामिल होंगे।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0