रूस के साथ जारी युद्ध और बढ़ते ड्रोन हमलों के बीच Ukraine ने अपनी रक्षा रणनीति को और मजबूत करने के लिए एक नया प्रस्ताव रखा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने कहा है कि उनका देश अपने विकसित किए गए सस्ते ड्रोन इंटरसेप्टर के बदले अमेरिका और खाड़ी देशों से आर्थिक सहायता, तकनीक और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम चाहता है।
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि विदेशी सरकारें या कंपनियां यूक्रेनी ड्रोन सीधे निर्माताओं से खरीदकर सरकार को दरकिनार नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा कि रक्षा से जुड़े किसी भी सौदे को आधिकारिक सरकारी प्रक्रिया के जरिए ही पूरा किया जाना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर देश की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ता है।
हाल के महीनों में यूक्रेन द्वारा विकसित कम लागत वाले ड्रोन इंटरसेप्टर ने कई देशों का ध्यान आकर्षित किया है। खासकर मध्य पूर्व में बढ़ते ड्रोन खतरे के बीच अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की रुचि इन तकनीकों में बढ़ी है।
जेलेंस्की ने कहा कि उनकी सरकार ने एक निजी कंपनी को फटकार भी लगाई है, जिसने सरकारी अनुमति के बिना ड्रोन इंटरसेप्टर बेचने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों को भी राष्ट्रीय सुरक्षा के नियमों का पालन करना होगा।
यूक्रेन ने यह भी संकेत दिया है कि वह अपने कम लागत वाले इंटरसेप्टर के बदले उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम हासिल करना चाहता है। कीव ने विशेष रूप से अमेरिकी निर्मित Patriot Missile System की मांग की है, जो बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम माना जाता है।
जेलेंस्की का कहना है कि रूस ने फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से यूक्रेन पर हजारों ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। इनसे निपटने के लिए यूक्रेन फिलहाल सस्ते इंटरसेप्टर ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम और विमान-रोधी हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है।
हालांकि, उन्नत रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों के खतरे से निपटने के लिए पैट्रियट जैसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत पहले से अधिक महसूस की जा रही है।
यूक्रेन का मानना है कि ड्रोन इंटरसेप्टर तकनीक साझा करने के बदले उसे वित्तीय सहायता और आधुनिक रक्षा उपकरण मिल सकते हैं। इससे न केवल उसकी अपनी रक्षा क्षमता मजबूत होगी, बल्कि उसके सहयोगी देशों को भी कम लागत में प्रभावी ड्रोन-रोधी तकनीक उपलब्ध हो सकेगी।
जेलेंस्की ने जोर देकर कहा कि ऐसे सभी रक्षा समझौते यूक्रेनी सरकार की मंजूरी से ही किए जाएंगे, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2027 वित्तीय वर्ष के लिए 1.5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 139 लाख करोड़ रुपये) के विशाल रक्षा बजट का प्रस्ताव रखा है। अगर इसे कांग्रेस मंजूरी देती है, तो यह अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा बजट होगा। 42% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी यह बजट पिछले साल के मुकाबले करीब 42% ज्यादा है रक्षा खर्च में इतनी बड़ी बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी गई ‘गोल्डन डोम’ डिफेंस सिस्टम पर फोकस इस बजट में ट्रंप के प्रस्तावित ‘Golden Dome’ मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए फंड शामिल है इसका उद्देश्य अमेरिका को आधुनिक और अगली पीढ़ी के हवाई खतरों से बचाना है नए ‘Trump-Class’ बैटलशिप बजट में दर्जनों सैन्य जहाजों के निर्माण का प्रावधान अमेरिकी नौसेना के लिए नई ‘Trump-Class’ बैटलशिप सीरीज भी शामिल घरेलू उत्पादन पर जोर यह प्रस्ताव ट्रंप प्रशासन के घरेलू रक्षा उत्पादन और बड़े प्रोजेक्ट्स पर फोकस को दर्शाता है इसका मकसद अमेरिका की मिलिट्री ताकत को और मजबूत करना है ईरान युद्ध से अलग बजट यह रक्षा बजट प्रस्ताव ईरान के साथ चल रहे संघर्ष से अलग है पेंटागन ने ‘Operation Epic Fury’ के लिए अलग से 200 अरब डॉलर (करीब 18.5 लाख करोड़ रुपये) की मांग की है क्या है इसका मतलब? अमेरिका अपनी सैन्य ताकत को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ाने की तैयारी में है बढ़ते वैश्विक तनाव और तकनीकी युद्ध को देखते हुए यह कदम रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव कम होने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं। सीजफायर के लिए चल रही कूटनीतिक कोशिशों को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि ईरान ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित बातचीत में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। क्या है पूरा मामला? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक: ईरान ने मध्यस्थों को स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिकी अधिकारियों से मिलने को तैयार नहीं है उसने अमेरिका की शर्तों को “अस्वीकार्य” बताया है इस वजह से सीजफायर के लिए चल रही बातचीत ठप पड़ गई है पाकिस्तान की कोशिशें भी नाकाम इस मामले में पाकिस्तान समेत कई क्षेत्रीय देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे थे। पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में बातचीत की मेजबानी का प्रस्ताव दिया था विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा था कि पाकिस्तान इस प्रक्रिया में सहयोग देने को तैयार है लेकिन ईरान के इनकार के बाद यह पहल फिलहाल अधर में लटक गई है। बढ़ सकता है तनाव विशेषज्ञों का मानना है कि: बातचीत रुकने से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है सीजफायर की संभावना फिलहाल कमजोर पड़ गई है आगे क्या? अब नजर इस बात पर है कि क्या दोनों देश किसी नए मंच या शर्तों के तहत बातचीत के लिए तैयार होंगे या फिर हालात और बिगड़ेंगे।
पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों को लेकर बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। हाल ही में कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद अब सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पेट्रोल के दाम में कटौती कर दी है। ऊर्जा मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ के मुताबिक, 4 अप्रैल 2026 से पेट्रोल की कीमत में 80 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। इस फैसले के बाद देश में पेट्रोल की नई कीमत 378.41 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गई है। हालांकि, सरकार ने डीज़ल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। डीज़ल अभी भी 520.35 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर के स्तर पर बना हुआ है। एक दिन पहले ही हुई थी भारी बढ़ोतरी इससे पहले गुरुवार को पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल दोनों की कीमतों में जोरदार इजाफा किया था। पेट्रोल में 137.23 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी डीज़ल में 184.49 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी इस बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत 458.41 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी, जिससे आम जनता पर भारी बोझ पड़ा। सरकार का यू-टर्न प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की सरकार ने बढ़ते दबाव और महंगाई के असर को देखते हुए अब पेट्रोल की कीमतों में राहत देने का फैसला लिया है। हालांकि, डीज़ल की कीमतों को जस का तस रखना सवाल खड़े कर रहा है, क्योंकि इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट और महंगाई पर पड़ता है। आम जनता को आंशिक राहत पेट्रोल सस्ता होने से आम लोगों को कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन डीज़ल की ऊंची कीमतें अभी भी चिंता का विषय बनी हुई हैं।