Search and Rescue

Passenger ferry engulfed in flames near Madura Island as rescue teams search for missing passengers.
इंडोनेशिया में समुद्र के बीच नौका में भीषण आग, 5 लोगों की मौत; 41 यात्री लापता, राहत अभियान जारी

Indonesia Boat Fire: इंडोनेशिया के मदुरा द्वीप के पास रविवार सुबह एक बड़ा समुद्री हादसा हुआ। सुराबाया से सुलावेसी द्वीप जा रही यात्रियों से भरी 'केएमपी मुटियारा सेंटोसा 2' नौका में अचानक भीषण आग लग गई। इस हादसे में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 41 यात्री अब भी लापता हैं। नौका पर चालक दल सहित करीब 250 लोग सवार थे। यात्रा के कुछ घंटे बाद लगी आग अधिकारियों के मुताबिक, नौका तंजुंग पेराक बंदरगाह (सुराबाया) से रवाना होकर मकासार जा रही थी। यात्रा शुरू होने के कुछ ही घंटों बाद कप्तान ने आपातकालीन नियंत्रण कक्ष को जहाज में आग लगने की सूचना दी। इसके तुरंत बाद नौका से संपर्क टूट गया। सुराबाया खोज एवं बचाव (SAR) कार्यालय ने बताया कि हादसे के समय नौका सपुदी द्वीप से लगभग 19 समुद्री मील उत्तर में थी। जान बचाने के लिए समुद्र में कूदे यात्री सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि आग तेजी से पूरी नौका में फैल गई और उससे घना काला धुआं उठने लगा। घबराए यात्री लाइफ जैकेट पहनकर जहाज के एक हिस्से में इकट्ठा हो गए, जबकि कई लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए जलती नौका से सीधे समुद्र में छलांग लगा दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि कई यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। कई जहाज राहत अभियान में जुटे हादसे की सूचना मिलते ही आसपास मौजूद जहाज तुरंत बचाव कार्य में जुट गए। सुराबाया खोज एवं बचाव कार्यालय के प्रमुख नानंग सिगिट ने बताया कि टीबी हसनूर 26 और ब्रिटिश मेंटर नामक जहाज समुद्र में कूदे यात्रियों को सुरक्षित निकाल रहे हैं। इसके अलावा चार अन्य जहाज भी राहत और बचाव अभियान में लगाए गए हैं। बचाव दल लापता यात्रियों की तलाश में लगातार समुद्र में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। आग लगने के कारणों की जांच शुरू फिलहाल नौका में आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। इंडोनेशियाई समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों का पता लगाने के बाद ही हादसे की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी। इंडोनेशिया हजारों द्वीपों वाला देश है, जहां समुद्री परिवहन लोगों की आवाजाही का प्रमुख साधन है। हालांकि, सुरक्षा मानकों में कमी और खराब मौसम के कारण वहां समय-समय पर इस तरह के समुद्री हादसे सामने आते रहे हैं।  

kalpana अगस्त 3, 2026 0
Search and rescue teams operate in the Arabian Sea after wreckage of a Pakistan cargo aircraft was located off the coast of Balochistan following its disappearance from radar.
पाकिस्तानी कार्गो विमान का मलबा अरब सागर में मिला, 5 क्रू मेंबरों की तलाश जारी

कराची: शारजाह से कराची आ रहा पाकिस्तान का एक कार्गो विमान मंगलवार रात रहस्यमय परिस्थितियों में रडार से गायब हो गया था। अब बलूचिस्तान तट के पास अरब सागर में विमान का मलबा बरामद किया गया है। विमान में सवार पांचों क्रू मेंबरों की तलाश के लिए सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। बलूचिस्तान तट के पास मिला मलबा पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी (PAA) के अनुसार, विमान का मलबा बलूचिस्तान के ओर्मारा तट से लगभग 53 समुद्री मील (करीब 98 किलोमीटर) दूर अरब सागर में मिला है। हादसे के बाद पाकिस्तान नौसेना, वायुसेना और अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से राहत एवं खोज अभियान चला रही हैं। उड़ान के दौरान आई थी तकनीकी खराबी जानकारी के मुताबिक, रात करीब 9:18 बजे पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को नेविगेशन सिस्टम में खराबी की सूचना दी थी। इसके बाद कंट्रोल रूम ने विमान को सुरक्षित मार्गदर्शन देने की कोशिश की, लेकिन करीब तीन मिनट बाद विमान से संपर्क पूरी तरह टूट गया। आखिरी बार विमान को कराची से लगभग 155 नॉटिकल मील (287 किलोमीटर) पश्चिम में ट्रैक किया गया था। फ्लाइट डेटा में दिखी असामान्य गतिविधि फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, संपर्क टूटने से पहले विमान ने अचानक ऊंचाई खोनी शुरू की, फिर कुछ समय के लिए ऊपर गया और इसके बाद तेजी से नीचे आने लगा। इस असामान्य उड़ान पैटर्न के बाद विमान रडार से गायब हो गया। हादसे की वजह अभी स्पष्ट नहीं पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ने कहा है कि दुर्घटना के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। विमान में सवार पांचों क्रू मेंबरों की स्थिति को लेकर भी फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। दुर्घटना की जांच शुरू कर दी गई है। विशेषज्ञ ने उठाए सवाल एविएशन विशेषज्ञ इमरान असलम के अनुसार, यदि केवल इंजन फेल होता है तो विमान सामान्यतः कुछ दूरी तक ग्लाइड करता है। उनका कहना है कि विमान का इतनी तेजी से नीचे गिरना सामान्य स्थिति नहीं माना जाता और वास्तविक कारण विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा। 2024 में बेड़े में शामिल हुआ था विमान हादसे का शिकार हुआ 27 साल पुराना Boeing 737 कार्गो विमान वर्ष 2024 में K2 Airways के बेड़े में शामिल किया गया था। यह एयरलाइन का इकलौता विमान था और इसकी पिछली उड़ान 28 जून को संचालित हुई थी। K2 Airways ने कहा है कि वह पाकिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटी और अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ जांच में पूरा सहयोग कर रही है। क्या होता है नेविगेशन सिस्टम? नेविगेशन सिस्टम विमान की दिशा, ऊंचाई, स्थिति और तय उड़ान मार्ग की जानकारी देता है। इसमें GPS, इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) और अन्य आधुनिक सेंसर का उपयोग किया जाता है। तकनीकी खराबी आने पर पायलट एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सूचना देता है और बैकअप सिस्टम की मदद से विमान को सुरक्षित उतारने की कोशिश की जाती है। हालांकि, यदि नेविगेशन सिस्टम की खराबी के साथ अन्य तकनीकी समस्याएं भी जुड़ जाएं, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। 2020 में भी हुआ था बड़ा विमान हादसा गौरतलब है कि मई 2020 में पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) का एक यात्री विमान कराची में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें 97 लोगों की मौत हुई थी। उस हादसे की जांच में पायलट, सह-पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल की मानवीय त्रुटियों को प्रमुख कारण माना गया था।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
Rescue teams search through collapsed buildings after powerful earthquakes struck Venezuela, causing widespread destruction and casualties.
वेनेजुएला में भूकंप से तबाही: 164 लोगों की मौत, 971 घायल; राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने दी जानकारी

  Venezuela Earthquake: वेनेजुएला में बुधवार को आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंपों ने भारी तबाही मचा दी है। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने गुरुवार को पुष्टि करते हुए बताया कि अब तक कम से कम 164 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 971 लोग घायल हुए हैं। सरकार का कहना है कि राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है और मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है। 30 आफ्टरशॉक्स से बढ़ी मुश्किलें डेल्सी रोड्रिगेज ने बताया कि शुरुआती दो बड़े भूकंपों के बाद अब तक करीब 30 आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए हैं। सबसे अधिक नुकसान पहले आए दो तेज झटकों से हुआ। कई रिहायशी और व्यावसायिक इमारतें पूरी तरह ढह गई हैं, जबकि अनेक भवन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। राहत एजेंसियों की टीमें लगातार मलबा हटाकर फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं। अधिकारियों के अनुसार, कई इलाकों में बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र और IMF से मांगी मदद सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यवाहक राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सरकार राहत और बचाव अभियान को तेज करने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में भेजे जा सकें। उन्होंने यह भी बताया कि पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए लगभग 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर के शुरुआती सहायता पैकेज को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से भी बातचीत की जा रही है। ला गुएरा सबसे अधिक प्रभावित सरकार के अनुसार, ला गुएरा प्रांत इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। यहां बड़ी संख्या में इमारतें ढह गई हैं और कई इलाकों में सड़क व संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे राहत कार्यों में कठिनाई आ रही है। भूकंप के झटके इतने शक्तिशाली थे कि पड़ोसी देशों तक महसूस किए गए। ब्राजील के अमेजन क्षेत्र में एहतियात के तौर पर कई इमारतों को खाली कराया गया। मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी बचाव दल क्षतिग्रस्त इमारतों में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाएं, राहत सामग्री और अस्थायी शिविरों की व्यवस्था शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी प्रभावित क्षेत्रों की पूरी तरह जांच नहीं हो जाती, तब तक मृतकों की अंतिम संख्या बताना संभव नहीं होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेनेजुएला में आई इस विनाशकारी आपदा पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी संदेश में उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के साथ खड़ा है और हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की। अमेरिका ने भेजी मानवीय सहायता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने घोषणा की है कि अमेरिका वेनेजुएला के लिए तत्काल खोज एवं बचाव दल, चिकित्सा संसाधन और मानवीय सहायता भेज रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी एजेंसियां स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत कार्यों में सहयोग कर रही हैं। जापान में भी आया 7.2 तीव्रता का भूकंप इसी बीच गुरुवार को जापान के उत्तरी तट के पास भी 7.2 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। हालांकि जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने स्पष्ट किया कि इस भूकंप के बाद सुनामी का कोई खतरा नहीं है। भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 50 किलोमीटर की गहराई में था। इसके झटके पूर्वोत्तर जापान के कई इलाकों के साथ राजधानी टोक्यो में भी महसूस किए गए। जापान में फिलहाल बड़े नुकसान की सूचना नहीं जापान सरकार के शीर्ष प्रवक्ता मिनोरू किहारा ने बताया कि अब तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि सरकार की आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत कार्य शुरू किए जाएंगे।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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French Rafale multirole fighter jet during flight as France submits a 114-aircraft proposal to strengthen the Indian Air Force.
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भारत की हवाई ताकत को मिलेगा बड़ा बूस्ट? फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट का प्रस्ताव सौंपा, 94 विमान भारत में बनाने की योजना

surbhi अगस्त 7, 2026 0