Sensex Nifty

Stock Market
Stock Market: उतार-चढ़ाव के साथ शुरू हुआ शेयर बाजार

मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर बनी अनिश्चितता का असर बुधवार, 13 मई 2026 को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा। शुरुआती कारोबार में तेजी के बावजूद बाजार जल्द ही दबाव में आ गया। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण इक्विटी बाजारों में चौथे दिन भी कमजोरी बनी रही। BSE Sensex शुरुआती बढ़त के बाद फिसलकर 70.46 अंक (0.09%) की गिरावट के साथ 74,488.78 पर बंद हुआ। वहीं NIFTY 50 में 18.11 अंक (0.08%) की मामूली बढ़त दर्ज हुई और यह 23,397.65 पर पहुंच गया।   विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव बाजार में लगातार बिकवाली का मुख्य कारण ग्लोबल अनिश्चितता और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति (risk aversion) रही। निवेशकों ने सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया, जिससे इक्विटी बाजार पर दबाव बढ़ा। बैंकिंग और कुछ बड़े सेक्टर्स में भी हल्की कमजोरी देखी गई।   कमोडिटी बाजार में तेज उछाल शेयर बाजार के विपरीत कमोडिटी मार्केट में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। सरकार द्वारा सोने और चांदी के आयात पर कस्टम ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% करने के फैसले ने कीमतों में भारी उछाल ला दिया। Multi Commodity Exchange of India पर जून 2026 डिलीवरी वाला सोना 9,206 रुपये (6%) बढ़कर 1,62,648 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। वहीं चांदी 16,743 रुपये (6%) की तेजी के साथ 2,95,805 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।   आगे का रुख विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में बाजार की दिशा वैश्विक घटनाओं, भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

Anjali Kumari मई 13, 2026 0
Indian stock market screen showing Sensex Nifty fluctuations amid Iran US tension and rising crude oil prices
ईरान-अमेरिका तनाव से डरा बाजार: सतर्क रुख में दिखा भारतीय शेयर बाजार, निवेशक कर रहे इंतजार

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आ रहा है। Iran और United States के बीच बढ़ती तनातनी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को बाजार की शुरुआत सुस्त रही। हालांकि शुरुआती गिरावट के बाद बाजार ने कुछ हद तक संभलने की कोशिश जरूर की। शुरुआती गिरावट के बाद हल्की रिकवरी सुबह कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में खुले, लेकिन धीरे-धीरे रिकवरी देखने को मिली। सुबह 9:23 बजे तक सेंसेक्स करीब 124 अंकों की बढ़त के साथ 78,618 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24 अंकों की तेजी के साथ 24,377 पर ट्रेड करता दिखा। बाजार में अनिश्चितता का माहौल विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में अस्थिरता की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर विरोधाभासी संकेत हैं। जहां पहले निवेशकों को समझौते की उम्मीद थी, वहीं अब आरोप-प्रत्यारोप ने स्थिति को जटिल बना दिया है। इस अनिश्चितता के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है, जिसका असर ‘India VIX’ इंडेक्स में 5.82% की तेजी के रूप में देखा गया। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। तेल की कीमतों में यह उछाल भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है और निवेशकों का भरोसा प्रभावित होता है। किन सेक्टर्स ने दिया सहारा बाजार की सुस्ती के बीच कुछ सेक्टर्स ने मजबूती दिखाई। PSU बैंक, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में खरीदारी देखी गई। इंडिविजुअल शेयरों में Trent, State Bank of India और ICICI Bank ने बाजार को सहारा दिया। वहीं Jio Financial Services, Hindalco Industries और Tata Motors जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। एक्सपर्ट्स की राय मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक सीजफायर डेडलाइन पर स्पष्टता नहीं आती, बाजार में सतर्कता बनी रहेगी। निफ्टी के लिए 24,100 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 24,700 के स्तर को पार करना बाजार के लिए जरूरी होगा। फिलहाल विदेशी निवेशकों (FIIs) की खरीदारी जारी है, लेकिन घरेलू निवेशकों (DIIs) की बिकवाली से बाजार पर दबाव बना हुआ है।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Stock market screen showing Sensex Nifty fall with Indian rupee strengthening against dollar
छठे हफ्ते भी गिरावट में शेयर बाजार, लेकिन रुपये की दमदार वापसी ने संभाला माहौल

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार छठे सप्ताह भी जारी रहा। वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच बाजार दबाव में रहा। हालांकि, हफ्ते के अंत में रुपये की मजबूती और कुछ सेक्टर्स के बेहतर प्रदर्शन ने नुकसान को सीमित करने में मदद की। सेंसेक्स और निफ्टी में हल्की गिरावट इस सप्ताह BSE Sensex 263.67 अंक यानी 0.35% गिरकर 73,319.55 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 106.5 अंक यानी 0.46% की कमजोरी के साथ 22,713.10 पर बंद हुआ। यह गिरावट ऐसे समय में आई जब बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहा और निवेशकों में सतर्कता बनी रही। किन सेक्टर्स में दिखी सबसे ज्यादा कमजोरी? सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे: Nifty Healthcare और Nifty Pharma में 3% से ज्यादा की गिरावट Nifty Auto, PSU Bank, Private Bank और Consumer Durables में करीब 1% की कमजोरी वहीं, कुछ सेक्टर्स ने बाजार को सहारा दिया: Nifty IT, Metal और Defence इंडेक्स में 2–3% की बढ़त किन कंपनियों को हुआ फायदा-नुकसान? इस सप्ताह Bharti Airtel में सबसे ज्यादा मार्केट कैप गिरावट Sun Pharmaceutical Industries, NTPC Limited और ICICI Bank में भी गिरावट वहीं दूसरी ओर: Tata Consultancy Services Infosys Limited Bharat Electronics Limited इन कंपनियों ने बाजार में मजबूती दिखाई। मिडकैप और स्मॉलकैप का हाल BSE Smallcap इंडेक्स में लगभग 1% की बढ़त कुछ शेयरों में 10–20% तक की तेजी देखी गई BSE Midcap इंडेक्स 0.5% गिरा, जिसमें कई फाइनेंशियल और ऑटो स्टॉक्स दबाव में रहे रुपये की ऐतिहासिक वापसी इस हफ्ते भारतीय मुद्रा ने शानदार रिकवरी की। सोमवार को यह पहली बार 95.12 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था लेकिन हफ्ते के अंत तक 171 पैसे मजबूत होकर 93.10 पर बंद हुआ यह पिछले 12 वर्षों में रुपये की सबसे बड़ी साप्ताहिक मजबूती मानी जा रही है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली Foreign Institutional Investors ने सातवें हफ्ते भी बिकवाली जारी रखी इस दौरान ₹29,425 करोड़ के शेयर बेचे वहीं Domestic Institutional Investors ने लगभग ₹29,274 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
Stock market graph showing volatility with rising and falling trends in FY26 impacting investors
Stock Markets: FY26 में उतार-चढ़ाव का साल, किसने कमाया और किसने गंवाया?

वित्त वर्ष 2025-26 भारतीय शेयर बाजार के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। लंबे समय बाद ऐसा हुआ जब बाजार ने निवेशकों को निगेटिव रिटर्न दिया। पूरे साल बाजार में अस्थिरता बनी रही और खासतौर पर आखिरी तिमाही में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार क्यों गिरा? FY26 में बाजार पर कई बड़े फैक्टर्स का असर पड़ा: विदेशी निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली ऊंचे वैल्यूएशन, जिससे निवेशकों में डर बना रहा आईटी सेक्टर में दबाव, खासकर AI टेक्नोलॉजी के कारण मिडिल ईस्ट तनाव (अमेरिका-इजरायल-ईरान), जिससे ग्लोबल सेंटीमेंट कमजोर हुआ इन सभी कारणों से बाजार में लगातार दबाव बना रहा और निवेशकों का भरोसा डगमगाया। इंडेक्स का प्रदर्शन Sensex: -7% Nifty: -5% मार्च महीना सबसे ज्यादा खराब रहा: सेंसेक्स: -11.48% निफ्टी: -11.14% बैंक निफ्टी: -15.95% यानी साल का अंत सबसे ज्यादा नुकसान के साथ हुआ। गिरावट में भी चमके ये शेयर बाजार भले गिरा, लेकिन कुछ कंपनियों ने मजबूत प्रदर्शन किया: भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL): +35% (डिफेंस सेक्टर का बूम) Shriram Finance: +36% (NBFC सेक्टर की मजबूती) Hindalco: +34% (मेटल डिमांड का फायदा) Titan: +33% (ज्वेलरी और रिटेल ग्रोथ) SBI: +27% (बैंकिंग सेक्टर का सपोर्ट) इन स्टॉक्स ने साबित किया कि सही सेक्टर चुनना कितना जरूरी है। इन शेयरों ने किया निराश कुछ बड़े और भरोसेमंद माने जाने वाले स्टॉक्स भी गिरावट से नहीं बच पाए: TCS: -33% (AI के कारण IT सेक्टर पर दबाव) ITC: -29% (प्रॉफिट बुकिंग और स्लो ग्रोथ) IndiGo: -21% (कॉस्ट और ऑपरेशन प्रेशर) Trent: -40% (सबसे ज्यादा गिरावट, वैल्यूएशन करेक्शन) इससे साफ है कि बड़े नाम भी जोखिम से बाहर नहीं हैं। निवेशकों के लिए क्या सीख? सिर्फ बड़े ब्रांड देखकर निवेश करना सुरक्षित नहीं सेक्टर ट्रेंड और ग्लोबल फैक्टर्स समझना जरूरी गिरते बाजार में भी मौके होते हैं डायवर्सिफिकेशन सबसे जरूरी रणनीति है

surbhi मार्च 31, 2026 0
Indian stock market crash with Sensex and Nifty falling sharply as HDFC Bank shares tumble
शेयर बाजार में भारी गिरावट: HDFC Bank में बड़ी टूट, तेल की कीमत और Fed के रुख से बढ़ा दबाव

सुबह खुलते ही बाजार में मचा हड़कंप गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली। निफ्टी 50 2.24% टूटकर 23,245 के स्तर पर आ गया, जबकि सेंसेक्स 2.33% गिरकर 74,906 पर पहुंच गया। बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट का माहौल देखने को मिला। HDFC Bank में भारी गिरावट, बाजार पर पड़ा असर इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह HDFC Bank के शेयर में आई तेज गिरावट रही। बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद शेयर में करीब 8.6% तक की गिरावट दर्ज की गई, जो दो साल में सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि “गवर्नेंस और पारदर्शिता” को लेकर उठे सवालों ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है, जिससे बैंकिंग सेक्टर पर सीधा असर पड़ा। तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। ईरान और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है, जिससे भारत जैसे आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। फेडरल रिजर्व के ‘हॉकिश’ रुख का असर फेडरल रिजर्व ने भले ही ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया, लेकिन उसका सख्त (हॉकिश) रुख बाजार के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। इससे विदेशी निवेशकों का रुझान उभरते बाजारों (जैसे भारत) से कम हो सकता है। सभी सेक्टर लाल निशान में बाजार में व्यापक गिरावट देखने को मिली- बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में करीब 3% की गिरावट मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में लगभग 2% की कमजोरी कुल 16 के 16 सेक्टर लाल निशान में बंद ग्लोबल संकेत भी रहे कमजोर एशियाई बाजारों में भी करीब 2.3% की गिरावट आई, जो अमेरिकी बाजारों में आई कमजोरी का असर है। वैश्विक स्तर पर निवेशक बढ़ती तेल कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव से चिंतित हैं। L&T समेत कई शेयर दबाव में मिडिल ईस्ट में कारोबार रखने वाली लार्सन एंड टुब्रो के शेयर में भी करीब 3.5% की गिरावट आई, क्योंकि क्षेत्र में तनाव बढ़ने से इसके बिजनेस पर असर पड़ने की आशंका है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। बढ़ती तेल कीमतें, वैश्विक तनाव और केंद्रीय बैंकों की सख्ती निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ा रही है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0