भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जबरदस्त रिकवरी देखने को मिली। सोमवार को शुरुआती भारी गिरावट के बाद बाजार ने जिस तरह वापसी की थी, उसी तेजी को आज भी जारी रखा गया। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 400 अंकों की मजबूती के साथ 75,700 के ऊपर कारोबार करता नजर आया, जबकि NIFTY 50 100 अंकों की तेजी के साथ 23,750 के पार पहुंच गया। बाजार में चौतरफा खरीदारी के चलते निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत होता दिखा। आईटी शेयरों में लगातार खरीदारी आज के कारोबार में सबसे ज्यादा मजबूती आईटी सेक्टर में देखने को मिली। Nifty IT इंडेक्स के शेयरों में जोरदार खरीदारी जारी रही। विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद निवेशक आईटी कंपनियों के लंबे समय के ग्रोथ आउटलुक को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। इसी वजह से इस सेक्टर में लगातार निवेश बढ़ रहा है। हालांकि दूसरी तरफ Nifty Private Bank इंडेक्स पर दबाव बना रहा। प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली। एशियाई बाजारों का मिला-जुला रुख एशियाई बाजारों से मिले संकेत पूरी तरह सकारात्मक नहीं रहे। Hang Seng Index में 0.24% की बढ़त दर्ज की गई। Nikkei 225 में 0.64% की गिरावट रही। KOSPI में 3% से ज्यादा की बड़ी कमजोरी देखने को मिली। इसके बावजूद भारतीय बाजार ने मजबूती बनाए रखी। अमेरिकी बाजारों में मिला-जुला कारोबार बीती रात अमेरिकी बाजारों में भी मिश्रित रुख देखने को मिला। Dow Jones Industrial Average 160 अंक चढ़कर बंद हुआ। Nasdaq Composite में गिरावट रही। S&P 500 लगभग सपाट बंद हुआ। टेक शेयरों में दबाव और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता अमेरिकी बाजारों पर असर डालती दिखी। विदेशी निवेशकों की वापसी बनी बड़ा सहारा भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक संकेत विदेशी निवेशकों की वापसी मानी जा रही है। काफी समय से लगातार बिकवाली कर रहे Foreign Institutional Investors (FII/FPI) सोमवार को खरीदारी करते नजर आए। निवेशकों की स्थिति कैटेगरी सोमवार की स्थिति FII/FPI ₹1,329 करोड़ की खरीदारी DII ₹1,959 करोड़ की बिकवाली हालांकि पिछले 30 दिनों में विदेशी निवेशक अब भी बिकवाल बने हुए हैं, लेकिन हालिया खरीदारी ने बाजार को बड़ा समर्थन दिया है। निवेशकों की नजर अब किस पर? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में: वैश्विक बाजारों का रुख अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़े संकेत विदेशी निवेशकों का फ्लो आईटी और बैंकिंग सेक्टर की चाल भारतीय बाजार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल बाजार में लौटती मजबूती ने निवेशकों का भरोसा जरूर बढ़ाया है।
घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी दिन तेजी देखने को मिली। रुपये में कमजोरी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और एशियाई बाजारों में गिरावट के बावजूद भारतीय बाजार मजबूती के साथ कारोबार करते नजर आए। सुबह के कारोबार में BSE Sensex 400 अंकों से अधिक उछल गया, जबकि NIFTY 50 में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। बाजार का हाल सुबह 10 बजे तक: सेंसेक्स 348.65 अंक यानी 0.46% बढ़कर 75,747.37 पर पहुंच गया निफ्टी 102.70 अंक यानी 0.43% चढ़कर 23,792.30 पर ट्रेड करता दिखा पिछले सत्र में भी बाजार में मजबूत तेजी दर्ज की गई थी। किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी? सेंसेक्स में सबसे ज्यादा तेजी इन कंपनियों के शेयरों में देखी गई: Adani Ports and Special Economic Zone Infosys Tata Consultancy Services Power Grid Corporation of India HCL Technologies Tech Mahindra Maruti Suzuki India आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। किन शेयरों में आई गिरावट? दूसरी ओर कुछ दिग्गज कंपनियों के शेयर दबाव में रहे: State Bank of India Asian Paints UltraTech Cement Reliance Industries इनमें करीब 2% तक की गिरावट दर्ज की गई। रुपया फिर कमजोर भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुरुआती कारोबार में 29 पैसे टूटकर 95.93 तक पहुंच गया। कमजोर रुपये का असर आमतौर पर आयात लागत और विदेशी निवेश धारणा पर पड़ता है। कच्चे तेल में फिर तेजी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी जारी रही। ब्रेंट क्रूड: 107 डॉलर प्रति बैरल तेजी: 1.22% कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय मानी जाती हैं। विदेशी निवेशकों का रुख बदला विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने गुरुवार को: 187 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे यह लगातार सात दिनों की बिकवाली के बाद पहली खरीदारी रही, जिसने बाजार सेंटीमेंट को मजबूत किया। एशियाई बाजारों में दबाव एशियाई बाजारों में गिरावट का माहौल रहा: दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3% से ज्यादा टूटा जापान का निक्केई 1% से ज्यादा गिरा हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग भी लाल निशान में रहा चीन का शंघाई कंपोजिट हल्की बढ़त में दिखा इसके विपरीत अमेरिकी और यूरोपीय बाजार पिछले कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुए थे।
मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। सुबह 9:22 बजे बीएसई सेंसेक्स 448.92 अंकों की बढ़त के साथ 75,057.90 पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 139.11 अंक चढ़कर 23,551.70 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। हालांकि, बाजार खुलने के कुछ समय बाद मुनाफावसूली के चलते बढ़त सीमित हो गई। 10:01 बजे तक सेंसेक्स 83 अंक और निफ्टी 52 अंक की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। अदाणी समूह और बैंकिंग-ऑटो शेयरों में खरीदारी शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के 30 में से 25 से अधिक शेयरों में तेजी देखने को मिली। खासकर अदाणी समूह के शेयरों ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया। अदाणी एंटरप्राइजेज का शेयर बीएसई पर 5.3 प्रतिशत तक उछलकर 2,634 रुपये के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स और ट्रेंट जैसे शेयरों में भी 1.5 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा एनटीपीसी, सन फार्मा, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में अच्छी खरीदारी रही। आईटी शेयरों पर दबाव, वैश्विक संकेतों से उम्मीद दूसरी ओर आईटी सेक्टर में कमजोरी देखने को मिली। टेक महिंद्रा, टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल टेक के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और चीन के बीच होने वाली शिखर वार्ता से निवेशकों में उम्मीद बढ़ी है। माना जा रहा है कि व्यापार और तकनीकी मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत वैश्विक बाजारों को स्थिरता दे सकती है। वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 4,703 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 5,869 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया।
घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट देखने को मिली है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों में घबराहट बढ़ गई है। इसी बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपील ने भी बाजार की चिंता को और बढ़ा दिया। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संकट को कोरोना महामारी के बाद सबसे बड़ा वैश्विक संकट बताते हुए लोगों से ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है। साथ ही उन्होंने वर्क फ्रॉम होम अपनाने की सलाह भी दी है। 24 घंटे में यह उनकी दूसरी ऐसी अपील मानी जा रही है। दो दिन में 2,000 अंक टूटा Sensex मंगलवार को शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 850 अंक तक लुढ़क गया, जबकि Nifty 50 में 200 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। सुबह 11 बजे तक सेंसेक्स 860.48 अंक यानी 1.13% गिरकर 75,154.80 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 226.75 अंक यानी 0.95% टूटकर 23,589.10 पर पहुंच गया। सोमवार को भी सेंसेक्स 1312.91 अंक गिरा था। इस तरह दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स लगभग 2,000 अंक टूट चुका है। रुपया डॉलर के मुकाबले ऑल टाइम लो पर भारतीय रुपया भी दबाव में दिखाई दिया। डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 0.2 फीसदी टूटकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुला। तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाला है। किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट? Infosys में सबसे ज्यादा 2.57% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा: Tech Mahindra Tata Consultancy Services HCL Technologies Asian Paints HDFC Bank Bajaj Finserv Titan Company जैसे शेयरों में भी तेज गिरावट देखी गई। वहीं दूसरी ओर Reliance Industries, State Bank of India, Tata Steel और UltraTech Cement के शेयरों में तेजी रही। निवेशकों को 5 लाख करोड़ का नुकसान लगातार गिरावट के कारण Bombay Stock Exchange में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 5 लाख करोड़ रुपये घटकर 462 लाख करोड़ रुपये रह गया। ब्रॉडर मार्केट में भी बिकवाली का दबाव रहा। निफ्टी मिडकैप 1.03% और स्मॉलकैप इंडेक्स 1.34% टूट गया। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता अंतरराष्ट्रीय बाजार में Saudi Aramco की चेतावनी के बाद तेल बाजार में चिंता और बढ़ गई है। कंपनी का कहना है कि वैश्विक तेल भंडार तेजी से घट रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण कुवैत और अन्य देशों का तेल निर्यात प्रभावित हुआ है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये की कमजोरी भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली और दिन का कारोबार हरे निशान में बंद हुआ। BSE Sensex 940.73 अंकों की उछाल के साथ 77,958.52 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 298.15 अंक चढ़कर 24,330.95 के स्तर पर पहुंच गया। इस तेजी ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। वैश्विक संकेतों से बाजार को मिला सहारा बाजार में इस उछाल के पीछे वैश्विक कारकों का बड़ा योगदान रहा। अमेरिका की ओर से ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव पर नरम रुख अपनाने के संकेत मिले, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक माहौल बना। इसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया और खरीदारी का रुख मजबूत हुआ। रुपये में भी आई मजबूती शेयर बाजार की तेजी के साथ भारतीय मुद्रा में भी सुधार दर्ज किया गया। Indian Rupee डॉलर के मुकाबले 56 पैसे मजबूत होकर 94.62 (अस्थायी) पर बंद हुआ। यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय अर्थव्यवस्था पर बना हुआ है। सेक्टरों में रही व्यापक खरीदारी आईटी, बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों ने मजबूत वैश्विक संकेतों और घरेलू आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए बाजार में सक्रियता दिखाई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी का रुख रहा। आगे की राह विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं और विदेशी निवेश का प्रवाह जारी रहता है, तो बाजार में यह तेजी आगे भी बनी रह सकती है। हालांकि, निवेशकों को सतर्क रहते हुए सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
नई दिल्ली: देश के पांच राज्यों–पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुड्डुचेरी–में विधानसभा चुनावों की मतगणना के बीच घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 900 अंकों से अधिक उछल गया, जबकि Nifty 50 24,250 के स्तर को पार कर गया। सुबह करीब 9:50 बजे सेंसेक्स 923.85 अंक यानी 1.20% की बढ़त के साथ 77,837.35 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 272.50 अंक यानी 1.14% चढ़कर 24,270.05 पर पहुंच गया। इस दौरान रुपये में हल्की कमजोरी देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले रुपया 0.04% गिरकर 94.95 पर खुला, जबकि पिछले सत्र में यह 94.91 पर बंद हुआ था। किन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा तेजी? बाजार की इस तेजी में ऑटो और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर ने अहम भूमिका निभाई। Maruti Suzuki India और Adani Ports के शेयरों में करीब 4% तक की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा Hindustan Unilever, Larsen & Toubro, IndiGo, Bajaj Finance, Mahindra & Mahindra, HDFC Bank, State Bank of India और Tata Steel में भी 1% से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली। हालांकि, Kotak Mahindra Bank के शेयरों में करीब 4% की गिरावट आई, जबकि ‘इटरनल’ में भी कमजोरी दर्ज की गई। सेक्टरवाइज प्रदर्शन कैसा रहा? निफ्टी के सेक्टरल इंडेक्स की बात करें तो: ऑटो, रियल्टी और मेटल सेक्टर में सबसे ज्यादा तेजी मीडिया, आईटी और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में गिरावट ब्रॉडर मार्केट में भी मजबूती दिखी–निफ्टी मिडकैप 0.73% और स्मॉलकैप 0.89% चढ़े। बाजार की तेजी के पीछे क्या वजह? विशेषज्ञों के मुताबिक, चुनावी नतीजों के बीच स्थिर सरकार की उम्मीद और निवेशकों की सकारात्मक धारणा ने बाजार को सपोर्ट दिया है। इसके अलावा वैश्विक संकेतों और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव का भी असर देखने को मिला। कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भी हलचल रही। Donald Trump द्वारा ‘ऑपरेशन फ्रीडम’ की घोषणा के बाद शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड में 2.45% की गिरावट आई। हालांकि बाद में इसमें रिकवरी देखने को मिली और कीमत 0.46% बढ़कर 108.7 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। यह कदम Strait of Hormuz के आसपास फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने से जुड़ा है, जिससे सप्लाई चेन को राहत मिलने की उम्मीद है।
मुंबई, एजेंसियां। हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बेंचमार्क सूचकांक BSE Sensex 494.12 अंक गिरकर 78,779.21 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं Nifty 50 भी 142.2 अंक टूटकर 24,434.40 पर आ गया। इससे पहले मंगलवार को बाजार में तेज बढ़त दर्ज की गई थी, जब सेंसेक्स 753 अंक चढ़कर 79,273 के करीब बंद हुआ था। आईटी और बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली बाजार में गिरावट का मुख्य कारण आईटी और बैंकिंग सेक्टर में भारी बिकवाली रही। प्रमुख कंपनियों जैसे इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टेक महिंद्रा और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में दबाव देखने को मिला। एचसीएल टेक के कमजोर तिमाही संकेतों के बाद उसके शेयरों में भी करीब 9% की गिरावट दर्ज की गई। रुपये पर दबाव, 31 पैसे कमजोर विदेशी बाजारों में अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 31 पैसे गिरकर 93.75 पर पहुंच गया। यह लगातार तीसरा सत्र था जब रुपया दबाव में रहा। वैश्विक बाजार और कच्चे तेल का असर एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला, जबकि अमेरिकी बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए। कच्चे तेल के वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 98.20 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही। पश्चिम एशिया में तनाव और संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं ने तेल बाजार को प्रभावित किया। निवेशकों में सतर्कता का माहौल विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और कॉरपोरेट नतीजों की अनिश्चितता के कारण निवेशक सतर्क बने हुए हैं। इसके चलते बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
मुंबई, एजेंसियां। मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की। BSE Sensex में शुरुआती कारोबार के दौरान 400 अंकों से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जबकि Nifty 50 24,450 के अहम स्तर को पार कर गया। सेंसेक्स 445.82 अंक चढ़कर 78,966.12 पर पहुंचा, वहीं निफ्टी 121.15 अंक बढ़कर 24,486 पर कारोबार करता नजर आया। बैंकिंग और इंफ्रा शेयरों में खरीदारी बाजार की इस तेजी में बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के शेयरों का अहम योगदान रहा। Adani Ports और ICICI Bank के शेयरों में करीब 2% तक की बढ़त देखी गई। इसके अलावा एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, इंटरग्लोब एविएशन और एनटीपीसी भी लाभ में रहे। हालांकि, आईटी और सीमेंट सेक्टर में दबाव बना रहा, जहां Infosys और Tata Consultancy Services जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक संकेतों से मिला सहारा बाजार में इस तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारकों की बड़ी भूमिका रही। अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की खबरों से निवेशकों में सकारात्मक भावना बनी है। साथ ही Brent Crude Oil की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने से भी बाजार को मजबूती मिली है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। रुपये में कमजोरी, लेकिन बाजार मजबूत इस बीच भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 16 पैसे कमजोर होकर 93.32 पर आ गया। हालांकि विदेशी निवेश और घरेलू बाजार की मजबूती ने निवेशकों का भरोसा बनाए रखा है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार फिलहाल वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर है और आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर बाजार ने दमदार वापसी की। महावीर जयंती के कारण मंगलवार को बाजार बंद रहने के बाद आज निवेशकों ने मजबूती के साथ कारोबार शुरू किया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 1,899.53 अंक चढ़कर 73,847.08 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 572.55 अंक की उछाल के साथ 22,903.95 पर कारोबार करता दिखा। वहीं, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे मजबूत होकर 94.70 पर पहुंच गया। बाजार में तेजी की बड़ी वजह बाजार में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान तनाव के जल्द खत्म होने की उम्मीद रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की ओर से संकट खत्म करने के संकेतों ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इसका असर एशियाई और भारतीय बाजारों में साफ दिखाई दिया। सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों में तेजी आज की तेजी की खास बात यह रही कि सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों के शेयर हरे निशान में रहे। इनमें ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, अदानी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस, इंटरग्लोब एविएशन और लार्सन एंड टुब्रो प्रमुख बढ़त वाले शेयर रहे। इससे निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल देखने को मिला। एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिला सपोर्ट वैश्विक बाजारों में भी तेजी रही। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 7%, जापान का निक्केई 225 चार फीसदी से अधिक, जबकि हैंग सेंग और शंघाई सूचकांक भी मजबूती में रहे। अमेरिकी बाजार में भी मंगलवार को नैस्डैक 3.83%, एसएंडपी 500 2.91% और डाउ जोन्स 2.49% चढ़ा था। तेल की कीमतें और निवेशकों की सतर्कता हालांकि बाजार में तेजी के बीच ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जो चिंता का विषय बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव से सप्लाई बाधित होने का खतरा है। उधर, सोमवार को एफआईआई ने 11,163 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि डीआईआई ने 14,894 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी।
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार (18 मार्च 2026) को भी तेजी का सिलसिला जारी रहा। लगातार तीसरे दिन बाजार हरे निशान में खुला, जिससे निवेशकों में उत्साह देखा गया। शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ ट्रेड करते नजर आए। शुरुआती कारोबार में मजबूत बढ़त सुबह 9:16 बजे के आसपास: Nifty 50 23,683 के स्तर पर पहुंच गया, जो करीब 102 अंकों (0.43%) की बढ़त है BSE Sensex 76,389 के स्तर पर रहा, जिसमें 319 अंकों (0.42%) की तेजी दर्ज की गई इससे पहले मंगलवार को भी बाजार मजबूती के साथ बंद हुआ था। वैश्विक संकेतों से मिला सहारा बाजार की इस तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय संकेतों का बड़ा योगदान रहा: अमेरिकी बाजारों में बढ़त, खासकर ट्रैवल सेक्टर में खरीदारी एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक रुख कच्चे तेल की कीमतों में नरमी विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक अब वैश्विक तनाव के बावजूद स्थिरता की उम्मीद कर रहे हैं। क्या कहते हैं एक्सपर्ट? वी के विजयकुमार, चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, Geojit Investments Limited के अनुसार: बाजार में अनिश्चितता के बावजूद रिकवरी देखने को मिल रही है कच्चा तेल $120 के पार नहीं गया, इससे राहत मिली आगे बाजार अच्छे और बुरे खबरों पर सीमित प्रतिक्रिया देगा सेक्टर में बदल रहा निवेश का रुख रिपोर्ट के अनुसार, निवेशक अब कुछ सेक्टरों में अपनी रणनीति बदल रहे हैं: IT और महंगे FMCG से पैसा निकल रहा है टेलीकॉम, फार्मा, डिफेंस और फाइनेंशियल सेक्टर में निवेश बढ़ रहा है इससे टेलीकॉम जैसे सेक्टर में मजबूती देखी जा रही है। FII-DII का अलग-अलग रुख मंगलवार के आंकड़ों के अनुसार: विदेशी निवेशक (FII) ने ₹4,741 करोड़ की बिकवाली की घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) ने ₹5,225 करोड़ की खरीदारी की यानी घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को सपोर्ट दिया। तेल और सोने का हाल कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट अमेरिका में क्रूड स्टॉक बढ़ने के संकेत सोने की कीमतें स्थिर, निवेशक सतर्क आगे क्या रहेगा ट्रेंड? विशेषज्ञों का मानना है कि: बाजार में फिलहाल हल्की सकारात्मक धारणा बनी रह सकती है वैश्विक घटनाओं और फेडरल रिजर्व के फैसले पर नजर रहेगी निवेशक सतर्क रहकर ही निवेश कर रहे हैं
वैश्विक तनाव और बढ़ती महंगाई के बीच शुक्रवार 13 मार्च 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। कारोबार शुरू होते ही बाजार लाल निशान में चला गया, जिससे निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया। सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट आज बाजार खुलते ही BSE Sensex में करीब 590 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 75,444.22 के स्तर पर आ गया। वहीं Nifty 50 भी करीब 177 अंकों की गिरावट के साथ 23,462.50 पर खुला। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार हो रही बिकवाली और वैश्विक तनाव के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है। बाजार गिरने की बड़ी वजहें विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं- विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता युद्ध और तनाव मार्केट विशेषज्ञ अजय बग्गा के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, तो विदेशी निवेशक अपने नुकसान की भरपाई के लिए उभरते बाजारों से पूंजी निकाल लेते हैं, जिससे भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ जाता है। कच्चे तेल और महंगाई का असर वैश्विक तनाव के कारण Brent Crude की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। वहीं Strait of Hormuz में आपूर्ति प्रभावित होने से तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि भारत ने Russia से करीब 3 करोड़ बैरल तेल सुरक्षित कर लिया है, लेकिन महंगाई का खतरा अभी भी बना हुआ है। देश में खुदरा महंगाई दर 3.21% तक पहुंच गई है और विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यह और बढ़ सकती है। इन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर आज के कारोबार में लगभग सभी सेक्टरों में कमजोरी देखने को मिली। सबसे ज्यादा गिरावट ऑटो सेक्टर में रही, जो एक प्रतिशत से ज्यादा टूट गया। इसके अलावा प्राइवेट बैंक, आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में भी भारी बिकवाली देखी गई। वैश्विक बाजारों का भी असर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी दबाव देखा गया। अमेरिका का Dow Jones Industrial Average और जापान का Nikkei 225 भी गिरावट के साथ बंद हुए थे। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है और निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।
पिछले कारोबारी दिन की तेज गिरावट के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की। वैश्विक बाजारों से मिले अच्छे संकेतों और मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इसी कारण शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सूचकांकों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूत शुरुआत बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 809.57 अंकों की तेजी के साथ 78,375.73 पर खुला। वहीं एनएसई का निफ्टी 252.75 अंक बढ़कर 24,280.80 के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले पिछले सत्र में सेंसेक्स 77,566.16 और निफ्टी 24,028.05 पर बंद हुए थे। मिडकैप में तेजी, स्मॉलकैप में दबाव शुरुआती कारोबार में व्यापक बाजार का रुख मिश्रित रहा। बीएसई मिडकैप सेलेक्ट इंडेक्स में करीब 1.29 प्रतिशत की तेजी देखी गई, जबकि स्मॉलकैप सेलेक्ट इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की गई। इसी बीच बाजार की अस्थिरता मापने वाला इंडिया वीआईएक्स लगभग 12 प्रतिशत तक नीचे आया। इन शेयरों में दिखी तेजी सेंसेक्स की कंपनियों में इंडिगो, एशियन पेंट्स, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट और लार्सन एंड टुब्रो जैसे शेयर बढ़त में कारोबार करते नजर आए। इंडिगो शुरुआती कारोबार में लगभग 3.84 प्रतिशत चढ़कर सबसे ज्यादा लाभ में रहा। वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज में हल्की गिरावट देखी गई। बाजार की चौड़ाई कमजोर एनएसई में बाजार की चौड़ाई फिलहाल नकारात्मक रही। शुरुआती ट्रेडिंग के दौरान करीब 870 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, जबकि 1,601 शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। वहीं 28 शेयरों में कोई बदलाव नहीं देखा गया। निवेशकों के लिए अहम स्तर बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए 24,000 से 23,900 के बीच का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। यदि बाजार इन स्तरों के ऊपर बना रहता है तो आगे 24,200 से 24,300 तक की तेजी संभव है। वहीं इन स्तरों के नीचे फिसलने पर बिकवाली बढ़ सकती है। गिफ्ट निफ्टी से मिले सकारात्मक संकेत गिफ्ट निफ्टी ने भी बाजार को मजबूत शुरुआत का संकेत दिया। यह लगभग 319 अंकों की बढ़त के साथ 24,335 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार सातवें सत्र में बिकवाली करते दिखे। 9 मार्च को उन्होंने करीब 6,030 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 9,013 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया। एशियाई बाजारों में भी तेजी मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद निवेशकों की धारणा मजबूत हुई। जापान का निक्केई सूचकांक 2 प्रतिशत से अधिक चढ़ा, जबकि हांगकांग, दक्षिण कोरिया और चीन के बाजारों में भी बढ़त दर्ज की गई।
बाजार में लाल निशान, सेंसेक्स-निफ्टी में तेज गिरावट शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में फिर से गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 400 से ज्यादा अंक गिरकर 80,000 के स्तर से और दूर चला गया, जबकि निफ्टी करीब 100 अंक टूटकर 24,650 के आसपास पहुंच गया। बाजार की इस कमजोरी की बड़ी वजह वैश्विक संकेत और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी मानी जा रही है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जबकि यूएस क्रूड 81 डॉलर प्रति बैरल के पार बंद हुआ। निफ्टी के लिए 24,500 का स्तर अहम विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,500 का स्तर सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट बना हुआ है। अगर यह स्तर टूटता है तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं बैंकिंग इंडेक्स निफ्टी बैंक अभी 60,000 के लक्ष्य से दूर दिखाई दे रहा है। फिलहाल इसे 59,000 और फिर 58,500 के स्तर को बचाने की चुनौती है। रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट शुक्रवार को निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में लगभग 2% की गिरावट दर्ज की गई। इस सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव Godrej Properties के शेयरों पर दिखा, जो करीब 3% तक गिरकर निफ्टी-50 के टॉप लूजर बन गए। इन तीन शेयरों में दिख रहा निवेश का मौका ब्रोकरेज फर्म JM Financial के विश्लेषक राहुल शर्मा के अनुसार बाजार की मौजूदा कमजोरी के बीच कुछ मजबूत कंपनियों के शेयर अच्छे स्तरों पर आ गए हैं। उन्होंने तीन कंपनियों को वैल्यू पिक बताया है: Larsen & Toubro State Bank of India Titan Company उनका मानना है कि हाल की गिरावट के कारण इन कंपनियों के शेयर महत्वपूर्ण टेक्निकल सपोर्ट के करीब पहुंच गए हैं। इन शेयरों में तेज हलचल आज बाजार में कुछ शेयरों में खास हलचल देखने को मिली: DCX Systems के शेयर 10% से ज्यादा उछले, क्योंकि कंपनी को Hindustan Aeronautics Limited से ₹68.05 करोड़ का ऑर्डर मिला है। Cochin Shipyard और अन्य शिपिंग कंपनियों के शेयरों में भी तेजी देखी गई। Solar Industries India के शेयर इस हफ्ते लगभग 17% तक चढ़ गए। रक्षा क्षेत्र की मजबूती के कारण Garden Reach Shipbuilders & Engineers और Bharat Dynamics Limited के शेयरों में भी तेजी बनी रही। ED की कार्रवाई से रिलायंस पावर चर्चा में इस बीच Reliance Power से जुड़ी कंपनियों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की है। बताया जा रहा है कि Anil Ambani से जुड़ी कंपनियों पर 10–12 स्थानों पर कार्रवाई की गई, जिसके कारण यह शेयर भी फोकस में रहा। रुपये में मामूली मजबूती डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा में हल्की मजबूती दर्ज की गई। रुपया 2 पैसे मजबूत होकर 91.62 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। यह मजबूती उस खबर के बाद आई जब अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में दबाव कुछ कम हुआ। आईटी सेक्टर में जल्द आ सकता है उछाल विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में आईटी शेयरों में आई भारी गिरावट के बाद अब रिकवरी की संभावना बन सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।