Shubhendu Adhikari

West Bengal Assembly prepares to debate the Uniform Civil Code (UCC) Bill during a crucial legislative session.
बंगाल विधानसभा में आज UCC विधेयक पर संग्राम, सत्ता पक्ष बनाम टीएमसी के दोनों गुटों के बीच होगी तीखी टक्कर

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा का सोमवार का सत्र राजनीतिक रूप से बेहद अहम रहने वाला है। राज्य की भाजपा सरकार अपना बहुप्रतीक्षित और विवादास्पद समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक सदन में पेश करने जा रही है। विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन के बाद यह भाजपा सरकार का सबसे बड़ा वैचारिक विधेयक माना जा रहा है। इस विधेयक पर मुकाबला सिर्फ सरकार और विपक्ष के बीच नहीं होगा। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान भी विधानसभा में खुलकर सामने आने की संभावना है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों गुट यूसीसी के विरोध को लेकर अपनी-अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। UCC पर टीएमसी के दोनों गुट आमने-सामने विधानसभा में यूसीसी विधेयक पर बहस के दौरान टीएमसी के दोनों गुट सरकार को घेरने की तैयारी कर चुके हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने अपने विधायकों को विधेयक का कड़ा विरोध करने के निर्देश दिए हैं। ममता बनर्जी का कहना है कि समान नागरिक संहिता देश की सामाजिक विविधता, सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। उनका आरोप है कि इस तरह के कानून से भारत की बहुलतावादी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। वहीं विपक्ष के नेता रीतब्रत बनर्जी का गुट भी सरकार पर निशाना साधने की रणनीति बना चुका है। उनका कहना है कि सरकार बिना व्यापक चर्चा और सामाजिक सहमति के इतना महत्वपूर्ण कानून लाने की जल्दबाजी कर रही है। भाजपा के पास बहुमत, विधेयक पारित होने की संभावना विधानसभा में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण विधेयक के पारित होने में किसी बड़ी बाधा की संभावना नहीं है। इसके बावजूद सदन में होने वाली बहस राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह राज्य की नई राजनीतिक दिशा और विपक्ष की रणनीति दोनों को स्पष्ट करेगी। क्या है समान नागरिक संहिता (UCC)? समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए धर्म से अलग एक समान नागरिक कानून लागू करना है। इसके तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के अधिकार, गोद लेने और पारिवारिक मामलों में अलग-अलग धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है। भाजपा लंबे समय से इसे अपने प्रमुख चुनावी और वैचारिक एजेंडे का हिस्सा बताती रही है। पार्टी का तर्क है कि इससे सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे और कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित होगी। सदन में होगी विस्तृत चर्चा विधानसभा की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे शुरू होगी। सरकार पहले अन्य विधेयक पेश करेगी, जिसके बाद दूसरे चरण में यूसीसी विधेयक पर चर्चा होने की संभावना है। इस दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, विपक्ष के नेता रीतब्रत बनर्जी और विभिन्न दलों के वरिष्ठ विधायक अपनी-अपनी बात रखेंगे। बहस के बाद सरकार विधेयक को सदन से पारित कराने का प्रयास करेगी। राजनीतिक नजरें विधानसभा पर यूसीसी विधेयक पर होने वाली चर्चा को केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीति का अहम पड़ाव माना जा रहा है। एक ओर भाजपा इसे अपने वैचारिक एजेंडे की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करना चाहती है, वहीं टीएमसी के दोनों गुट इस मुद्दे पर अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता और नेतृत्व क्षमता साबित करने की कोशिश करेंगे। ऐसे में सोमवार का विधानसभा सत्र राज्य की राजनीति के लिए काफी अहम रहने वाला है।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
West Bengal Chief Minister Shubhendu Adhikari addresses Assembly on illegal infiltration and deportation policy.
घुसपैठ पर बंगाल सरकार का सख्त रुख, ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति पर अडिग रहने का दावा

  पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार केंद्र की ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति को पूरी दृढ़ता के साथ लागू कर रही है और इससे पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है। 10 हजार घुसपैठियों की पहचान का दावा मुख्यमंत्री ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार बनने के बाद पिछले लगभग डेढ़ महीने के दौरान 10 हजार अवैध घुसपैठियों की पहचान की गई है। उन्होंने दावा किया कि इनमें से बड़ी संख्या में लोगों को सीमा पार वापस भेजा जा चुका है और शेष के खिलाफ भी कार्रवाई जारी है। 12 होल्डिंग सेंटरों में रखे गए 1800 लोग मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य सरकार ने हाल ही में 12 होल्डिंग सेंटर स्थापित किए हैं, जहां फिलहाल 1800 लोगों को रखा गया है। उन्होंने कहा कि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन लोगों को भी जल्द डिपोर्ट किया जाएगा। गिरफ्तारी के बाद बीएसएफ को सौंपे जाएंगे लोग मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध घुसपैठ के मामलों में गिरफ्तार व्यक्तियों को जेल में रखने के बजाय सीधे सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंपा जाएगा, ताकि उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत सीमा पार भेजा जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पूर्ववर्ती सरकार पर लगाए आरोप अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए आवश्यक सहयोग नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई। बीएसएफ को 142.79 एकड़ भूमि देने का दावा मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद डेढ़ महीने से भी कम समय में बीएसएफ को 142.79 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई है। उनके अनुसार इससे सीमा पर कंटीले तार लगाने और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने का काम तेज होगा। ‘जो भागना चाहते हैं, वे भाग जाएं’ मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि जो लोग अवैध रूप से राज्य में रह रहे हैं और भागना चाहते हैं, वे सीमा पर बाड़ पूरी होने से पहले चले जाएं। उन्होंने दावा किया कि सरकार की सख्ती के बाद कुछ क्षेत्रों से अवैध घुसपैठियों के वापस लौटने की सूचनाएं भी मिली हैं। भारतीय नागरिकों को चिंता की जरूरत नहीं मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वास्तविक भारतीय नागरिकों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार की कार्रवाई केवल अवैध घुसपैठियों के खिलाफ है और इसका किसी धर्म, जाति या समुदाय से कोई संबंध नहीं है। सरकारी योजनाओं का लाभ केवल नागरिकों को मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ केवल भारतीय नागरिकों को मिलेगा। उन्होंने अन्नपूर्णा भंडार, वृद्धावस्था पेंशन, बेरोजगारी भत्ता, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी संसाधनों का उपयोग केवल पात्र नागरिकों के लिए किया जाएगा और किसी भी अवैध घुसपैठिये को इन योजनाओं का लाभ नहीं लेने दिया जाएगा। आगे और तेज हो सकती है कार्रवाई मुख्यमंत्री के बयान से संकेत मिला है कि राज्य सरकार आने वाले दिनों में अवैध घुसपैठ के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज कर सकती है। पहचान, हिरासत और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां जारी हैं और सरकार इसे अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
West Bengal Chief Minister Shubhendu Adhikari addresses Assembly on anti-corruption measures and asset seizure law.
भ्रष्टाचार पर बंगाल सरकार का बड़ा संदेश, अवैध संपत्तियां जब्त कर भूमिहीनों को बसाने का संकेत

  पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति दोहराते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि भ्रष्टाचार और अपराध से अर्जित संपत्तियों को केवल जब्त ही नहीं किया जाएगा, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर उनकी नीलामी भी की जा सकती है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्तियों पर बनेगा नया कानून विधानसभा में अपने जवाबी भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में गुंडाराज, माफियातंत्र और वसूली की राजनीति को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार इस सत्र में एक नया विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, जिसके माध्यम से भ्रष्टाचार और आपराधिक गतिविधियों से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने तथा उनकी नीलामी का कानूनी प्रावधान किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल जेल जाने या लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने से कोई बच नहीं सकेगा। यदि किसी व्यक्ति की संपत्ति अवैध तरीके से अर्जित पाई जाती है तो सरकार उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। आलीशान इमारतों का किया उल्लेख अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने कोलकाता के हरीश मुखर्जी रोड और हरीश चटर्जी रोड स्थित आलीशान इमारतों का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी बड़ी संपत्तियों का उपयोग उन लोगों के पुनर्वास के लिए किया जा सकता है, जो आज सड़कों, फुटपाथों और फ्लाईओवरों के नीचे जीवन बिताने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि उन्हें जनहित में उपयोग में लाना भी है। राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चाएं मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इसे तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर इशारा माना जा रहा है। हरीश मुखर्जी रोड और हरीश चटर्जी रोड क्षेत्र में स्थित कुछ चर्चित संपत्तियों को लेकर पहले भी निर्माण संबंधी अनियमितताओं और अन्य विवादों की चर्चा होती रही है। सरकार की ओर से किसी विशेष व्यक्ति या संपत्ति के खिलाफ आधिकारिक कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है। सत्ता पक्ष ने किया समर्थन मुख्यमंत्री के बयान के दौरान सत्ता पक्ष के कई विधायकों और मंत्रियों ने मेज थपथपाकर समर्थन जताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार का यह रुख आने वाले समय में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को और तेज करने का संकेत है। विपक्ष की प्रतिक्रिया पर नजर मुख्यमंत्री के बयान के बाद अब विपक्ष की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं। माना जा रहा है कि प्रस्तावित विधेयक और उससे जुड़े प्रावधानों को लेकर विधानसभा और राज्य की राजनीति में आगे भी तीखी बहस देखने को मिल सकती है।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
West Bengal government reviews road names as debate grows over historical and colonial-era naming.
बंगाल में बदलेंगे सड़कों और सार्वजनिक स्थलों के नाम! सरकार ने शुरू की समीक्षा प्रक्रिया

  पश्चिम बंगाल में सड़क और सार्वजनिक स्थलों के नामकरण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कोलकाता के पार्क सर्कस स्थित सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर ‘गोपाल मुखर्जी रोड’ किए जाने के बाद राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि अन्य सड़कों और इलाकों के नामों की भी समीक्षा की जा सकती है। इस उद्देश्य से एक विशेष समिति का गठन किया गया है, जिसकी जिम्मेदारी कार्तिक महाराज को सौंपी गई है। मुगल, पठान और ब्रिटिश शासकों के नाम पर नहीं रहेंगी सड़कें: सरकार विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार बंगाल की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय गौरव और ऐतिहासिक पहचान को प्राथमिकता देते हुए नामकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोलकाता सहित राज्य में किसी मुगल, पठान या अत्याचारी ब्रिटिश शासक के नाम पर सड़कें नहीं रखी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगिनी निवेदिता को छोड़कर किसी विदेशी व्यक्ति के नाम पर सड़क रखने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम जैसे राष्ट्रभक्त व्यक्तित्वों को सम्मान देने की बात भी कही। विधानसभा में विपक्ष ने उठाए सवाल मंगलवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता रितब्रत बंद्योपाध्याय ने सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलने के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। उनका दावा था कि इस सड़क का नाम पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री हुसैन शहीद सुहरावर्दी के नाम पर नहीं, बल्कि उनके दादा मौलाना उबैदुल्लाह सुहरावर्दी के नाम पर रखा गया था। विपक्ष के साथ-साथ कुछ इतिहासकारों ने भी सरकार के इस फैसले और उसके पीछे दिए गए तर्कों पर आपत्ति जताई है। जनता से भी मांगे जाएंगे सुझाव मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में स्वतंत्रता सेनानी बीना दास का उल्लेख करते हुए कहा कि बंगाल के इतिहास और राष्ट्रीय स्वाभिमान को प्रमुखता देने के लिए नामकरण की समीक्षा जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से भी सुझाव देने की अपील की और कहा कि गठित समिति सभी प्रस्तावों पर विचार करेगी। राज्यभर में हो सकता है नामों का पुनर्मूल्यांकन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में कोलकाता सहित पश्चिम बंगाल के अन्य हिस्सों में भी सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों के नामों के पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। ऐसे में यह मुद्दा राज्य की राजनीति और सार्वजनिक विमर्श का प्रमुख विषय बन सकता है।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
West Bengal Chief Minister Shubhendu Adhikari announces farmer welfare schemes and financial aid in the state budget.
Bengal Budget 2026: किसानों के लिए ‘डबल धमाका’, केंद्र के 6,000 रुपये के साथ राज्य देगा 3,000 रुपये अतिरिक्त सहायता

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने अपने पहले बजट में किसानों के लिए कई बड़ी घोषणाएं की हैं। वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए किसानों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता, सस्ती बिजली, डिजिटल ऋण सुविधा और कृषि बुनियादी ढांचे के विस्तार का ऐलान किया। राज्य सरकार ने कृषि विभाग के लिए 8,565.84 करोड़ रुपये के बजट आवंटन का प्रस्ताव रखा है। सबसे बड़ी घोषणा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) के लाभार्थी किसानों के लिए की गई है। केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाले 6,000 रुपये के अलावा अब पश्चिम बंगाल सरकार भी प्रत्येक पात्र किसान परिवार को प्रतिवर्ष 3,000 रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता देगी। किसानों को सालाना मिलेंगे कुल 9,000 रुपये वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने बजट भाषण में कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को केंद्र सरकार की ओर से प्रति वर्ष 6,000 रुपये तीन समान किस्तों में मिलते हैं। अब राज्य सरकार किसानों की अतिरिक्त कृषि जरूरतों को देखते हुए प्रति किसान परिवार 3,000 रुपये अतिरिक्त देगी। इस तरह राज्य के पात्र किसानों को अब सालाना कुल 9,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी। कृषि विभाग के लिए 8,565 करोड़ रुपये का प्रावधान सरकार ने कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर बजटीय प्रावधान किए हैं। कृषि विभाग के लिए: 8,565.84 करोड़ रुपये कृषि विपणन विभाग के लिए: 364.99 करोड़ रुपये सरकार का कहना है कि इन संसाधनों का उपयोग किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उपज का बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने और कृषि बुनियादी ढांचे के विकास में किया जाएगा। 15 दिनों की जगह 15 मिनट में मिलेगा किसान ऋण बजट में किसानों के लिए डिजिटल किसान क्रेडिट कार्ड प्रणाली (Digital Kisan Credit Card System) शुरू करने की घोषणा भी की गई है। यह व्यवस्था भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सहयोग से यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (ULI) के माध्यम से लागू की जाएगी। इस नई व्यवस्था के तहत: ऋण स्वीकृति का समय 15 दिनों से घटकर 15 मिनट रह जाएगा। एपीआई आधारित भूमि रिकॉर्ड के जरिए पेपरलेस लोन स्वीकृति संभव होगी। किसानों को बैंकों और सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पीएमकेएसवाई योजना के लिए 100 करोड़ रुपये दो हेक्टेयर तक कृषि भूमि रखने वाले पात्र किसानों को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY-PDMC) का लाभ देने के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव रखा है। इस योजना के तहत किसान परियोजना लागत का केवल 10 प्रतिशत भुगतान करेंगे, जबकि शेष राशि राज्य सरकार वहन करेगी। किसानों को मिलेगी सस्ती बिजली खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार ने कृषि सिंचाई में उपयोग होने वाले सबमर्सिबल पंपों की बिजली पर प्रति यूनिट 2 रुपये की सब्सिडी देने की घोषणा की है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों की सिंचाई लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी और कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। आलू और धान किसानों के लिए भी बड़ी राहत मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बजट के बाद कहा कि सरकार कृषि और उद्योग दोनों को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने घोषणा की कि: धान खरीद मूल्य पर प्रति क्विंटल 200 रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे। सरकार धीरे-धीरे धान का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 3,100 रुपये प्रति क्विंटल तक ले जाने की दिशा में काम करेगी। प्रत्येक आलू किसान को 200 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त सहायता मिलेगी। रेशा (फाइबर) खेती और ग्रामीण कृषि विकास को मिलेगा बढ़ावा सरकार ने रेशा खेती के आधुनिकीकरण, प्रसंस्करण और बाजार विस्तार के लिए राष्ट्रीय रेशा मिशन परियोजना शुरू करने की भी घोषणा की है। इसके अलावा, ग्रामीण कृषि बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए: Alipurduar Darjeeling Purulia Jhargram में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (DDKY) लागू की जाएगी। 'कृषि और किसान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता' मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार के डिजिटल कृषि मिशन को राज्य में लागू किया जाएगा, ताकि किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में किसानों के लिए और भी कई कल्याणकारी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा, "यह सरकार लंबे समय तक किसानों के हित में काम करेगी। हम चरणबद्ध तरीके से किसानों के लिए और फैसले लेते रहेंगे।"  

Deepshikha जून 23, 2026 0
West Bengal government announces statewide census survey beginning August 2026 for development planning
बंगाल में 1 अगस्त से जनगणना अभियान शुरू,  शुभेंदु अधिकारी बोले-विकास के लिए जनगणना जरूरी

पश्चिम बंगाल में लंबे इंतजार के बाद जनगणना प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। राज्य सरकार ने 1 अगस्त 2026 से व्यापक जनगणना अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है, जो फरवरी 2027 तक चलेगा। सरकार का दावा है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य राज्य की जनसंख्या, सामाजिक संरचना और विकास संबंधी जरूरतों का सटीक आकलन करना है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचाया जा सके। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जनगणना को विकास और प्रशासनिक योजना निर्माण के लिए आवश्यक बताते हुए कहा कि इसे राजनीतिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, पिछले डेढ़ दशक में राज्य की जनसंख्या और जनसांख्यिकीय स्वरूप में बड़े बदलाव आए हैं, जिनका अद्यतन आंकड़ा विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जरूरी है। अगस्त से शुरू होगा घर-घर सर्वे सरकार की ओर से जारी प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, अगस्त के पहले सप्ताह से प्रगणक (एन्यूमरेटर) घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करना शुरू करेंगे। यह अभियान राज्य के सभी जिलों, नगर निगम क्षेत्रों, नगरपालिकाओं और ग्रामीण इलाकों में चलाया जाएगा। प्रशासन ने फरवरी 2027 तक डेटा संग्रह का मुख्य चरण पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके बाद आंकड़ों का सत्यापन और विश्लेषण किया जाएगा। डिजिटल तकनीक का होगा इस्तेमाल इस बार जनगणना प्रक्रिया को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। प्रगणकों को टैबलेट और मोबाइल एप्लिकेशन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनके माध्यम से डेटा सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाएगा। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल प्रणाली अपनाने से आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी और डेटा प्रोसेसिंग में लगने वाला समय भी कम होगा। इसके लिए जून और जुलाई के दौरान हजारों सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों और फील्ड स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। जनगणना फॉर्म बंगाली, हिंदी, अंग्रेजी और नेपाली भाषाओं में उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को जानकारी देने में सुविधा हो। विकास योजनाओं की बेहतर योजना पर जोर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जनगणना के जरिए प्राप्त आंकड़े राज्य की कल्याणकारी योजनाओं, खाद्य वितरण, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि सटीक जनसंख्या आंकड़ों के बिना विकास योजनाओं की वास्तविक जरूरतों का आकलन करना कठिन हो जाता है। सरकार का उद्देश्य संसाधनों के वितरण में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करना है। विपक्ष ने उठाए सवाल सरकार इस अभियान को पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया बता रही है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे लेकर आशंकाएं व्यक्त की हैं। कुछ विपक्षी नेताओं का कहना है कि डेटा संग्रह की प्रक्रिया का इस्तेमाल नागरिकता और पहचान से जुड़े विवादित मुद्दों को आगे बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जनगणना एक नियमित संवैधानिक प्रक्रिया है और इसका किसी राजनीतिक एजेंडे से संबंध नहीं है। प्रशासन के सामने बड़ी चुनौतियां विशेषज्ञों के अनुसार, सीमावर्ती जिलों, दुर्गम पहाड़ी इलाकों और घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में सटीक आंकड़े जुटाना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। इसके अलावा डिजिटल डेटा संग्रह व्यवस्था को सुचारु रूप से लागू करना भी एक महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है। राज्य सरकार को उम्मीद है कि आधुनिक तकनीक और व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम की मदद से इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकेगा। पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित जनगणना को राज्य की भविष्य की विकास नीतियों और संसाधन वितरण की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण कवायद के रूप में देखा जा रहा है।  

surbhi जून 1, 2026 0
West Bengal Chief Minister Shubhendu Adhikari during cabinet expansion as new ministers take oath
पश्चिम बंगाल में मंत्रिमंडल विस्तार, आज 35 नए मंत्री लेंगे शपथ

पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के गठन के लगभग एक महीने बाद सोमवार (1 जून) को मंत्रिमंडल विस्तार होने जा रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार में 35 नए मंत्री शपथ लेंगे। इसके साथ ही राज्य मंत्रिमंडल लगभग पूर्ण आकार में पहुंच जाएगा और मंत्रियों की कुल संख्या 41 हो जाएगी। राजभवन की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह सुबह 11 बजे लोकभवन में आयोजित होगा, जहां राज्यपाल आर.एन. रवि नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। सरकार गठन के बाद पहला बड़ा विस्तार भाजपा सरकार के गठन के बाद 9 मई को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ पांच मंत्रियों ने शपथ ली थी। तब से विपक्ष और राजनीतिक हलकों में पूर्ण मंत्रिमंडल के गठन में देरी को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब मंत्रिमंडल विस्तार के साथ सरकार प्रशासनिक स्तर पर पूरी क्षमता से काम करने की स्थिति में आ जाएगी। मुख्यमंत्री के साथ पहले चरण में शपथ लेने वाले मंत्रियों में दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, नीशीथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया और खुदीराम टुडू शामिल थे। कई बड़े नामों पर नजर मंत्रिमंडल विस्तार से पहले संभावित मंत्रियों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता और रासबिहारी विधायक स्वपन दासगुप्ता का नाम प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। उन्हें पहले ही शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी दी जा चुकी है, जिससे उनके शिक्षा मंत्री बनने की अटकलें लगाई जा रही हैं। इसके अलावा मानिकतला विधायक तापस रॉय के भी मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। संभावित मंत्रियों की सूची में शंकर घोष, रुद्रनील घोष, डॉ. शारद्वत मुखर्जी, प्रणत टुडू, रूपा गांगुली, कल्याण चक्रवर्ती, चंदना बाउड़ी, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, अशोक डिंडा और सुब्रत मैत्रा जैसे नाम भी चर्चा में हैं। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर फोकस भाजपा नेतृत्व मंत्रिमंडल विस्तार में उत्तर बंगाल, जंगलमहल, आदिवासी क्षेत्रों, अनुसूचित जाति समुदाय, महिलाओं और दक्षिण बंगाल के प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाने पर विशेष ध्यान दे सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मंत्रिमंडल की संरचना से भाजपा की आगामी राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक प्राथमिकताओं की झलक भी मिलेगी। वर्तमान मंत्रियों के पास कौन से विभाग? मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पास मुख्यमंत्री कार्यालय के अलावा कई प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी है। दिलीप घोष पंचायत एवं ग्रामीण विकास, पशुपालन विकास और कृषि विपणन विभाग संभाल रहे हैं। अग्निमित्रा पॉल महिला एवं बाल विकास तथा नगर विकास विभाग की जिम्मेदारी निभा रही हैं। नीशीथ प्रमाणिक के पास उत्तर बंगाल विकास और खेल विभाग है, जबकि अशोक कीर्तनिया खाद्य विभाग और खुदीराम टुडू पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं अल्पसंख्यक मामलों का प्रभार संभाल रहे हैं। संवैधानिक सीमा के करीब पहुंचेगी सरकार संविधान के अनुसार किसी राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में अधिकतम 44 मंत्री बनाए जा सकते हैं। 35 नए मंत्रियों के शपथ लेने के बाद मंत्रिपरिषद की संख्या 41 हो जाएगी, जिससे सरकार संवैधानिक सीमा के काफी करीब पहुंच जाएगी। भाजपा सरकार की प्रशासनिक दिशा होगी स्पष्ट राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मंत्रिमंडल विस्तार केवल रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि नई सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं और राजनीतिक संतुलन को भी परिभाषित करेगा। शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी नए मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर सकते हैं, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।  

surbhi जून 1, 2026 0
Families gather at Hakimpur border amid Bengal’s 3D policy and deportation fears
बंगाल में 3D नीति का असर, हकीमपुर बॉर्डर पर लौटने को जुटे संदिग्ध बांग्लादेशी

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद शुरू हुई 3D नीति का असर अब सीमा क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की “Detect, Delete and Deport” यानी “पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो” नीति के बाद अवैध रूप से रह रहे संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों में दहशत का माहौल बताया जा रहा है। उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट स्थित हकीमपुर बॉर्डर पर पिछले दो दिनों में बड़ी संख्या में लोग सीमा पार कर बांग्लादेश लौटने की कोशिश करते दिखाई दिए। इनमें पुरुषों के साथ महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सामान और परिवार के साथ बॉर्डर पर जुटे लोग हकीमपुर सीमा चौकी पर पहुंचे कई लोग अपने साथ घरेलू सामान, बिस्तर, बर्तन और बड़े-बड़े बोरे लेकर पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से अधिकतर लोग कोलकाता, दमदम, न्यूटाउन और डानकुनी जैसे इलाकों में वर्षों से दिहाड़ी मजदूर या घरेलू सहायक के तौर पर काम कर रहे थे। सीमा पर मौजूद लोगों का कहना है कि प्रशासन की सख्ती और निरुद्ध केंद्रों की शुरुआत के बाद उनके बीच डर का माहौल बन गया है। एक व्यक्ति ने कहा, “अगर सरकार हमें यहां रहने नहीं देगी और डिटेंशन सेंटर में भेज देगी, तो हमारे पास वापस लौटने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।” मालदा में शुरू हुआ पहला निरुद्ध केंद्र राज्य सरकार की कार्रवाई के तहत मालदा में पहला निरुद्ध केंद्र शुरू किया गया है। यहां फिलहाल 9 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है। प्रशासन के अनुसार, इन्हें कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक केंद्र में रखा जाएगा, जिसके बाद निर्वासन की कार्रवाई की जाएगी। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अन्य जिलों में भी ऐसे केंद्र सक्रिय करने की तैयारी चल रही है। बीएसएफ भी बढ़ी भीड़ से सतर्क सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पिछले दो दिनों में सीमा पार लौटने की कोशिश करने वालों की संख्या अचानक बढ़ी है। अधिकारियों के अनुसार, दस्तावेजों की जांच की जा रही है और बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड (BGB) के साथ समन्वय बनाकर आगे की प्रक्रिया तय की जा रही है। बीएसएफ के अधिकारियों का कहना है कि कई लोग खुद ही सीमा चौकी पर पहुंचकर वापस भेजे जाने की मांग कर रहे हैं। जाली दस्तावेज पकड़े जाने का डर सूत्रों के मुताबिक, कई लोगों को यह आशंका है कि यदि घर-घर जांच अभियान चलाया गया तो उनके आधार कार्ड और अन्य पहचान दस्तावेजों की जांच हो सकती है। इसी डर के चलते कई परिवार जल्द से जल्द सीमा पार लौटने की कोशिश कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्रशासन अवैध पहचान पत्रों और फर्जी दस्तावेजों की भी जांच कर रहा है। हकीमपुर बॉर्डर पर शरणार्थी शिविर जैसे हालात हकीमपुर सीमा चौकी पर मौजूद तस्वीरों में लोग प्लास्टिक की चादरों के नीचे खुले आसमान में बैठे नजर आ रहे हैं। उनके पास वर्षों की जमा पूंजी और घरेलू सामान से भरे बैग और गठरियां दिखाई दे रही हैं। सीमा क्षेत्र में अचानक बढ़ी भीड़ के कारण प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। पहले भी दिखा था ऐसा माहौल पिछले वर्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान भी सीमा क्षेत्रों में ऐसी हलचल देखी गई थी। इस बार नई सरकार की सख्ती और 3D अभियान के कारण स्थिति अधिक गंभीर मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्य सरकार की नई नीति ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अवैध प्रवास के मामलों में अब सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

surbhi मई 27, 2026 0
Students in a West Bengal madrasa singing Vande Mataram during morning assembly after new government directive.
बंगाल के मदरसों में अब अनिवार्य होगा ‘वंदे मातरम्’, शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला

पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने राज्य के मदरसों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राज्य के अल्पसंख्यक कार्य और मदरसा शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य कर दिया है। सरकार के नए आदेश के बाद अब राज्य के सभी मदरसों को सुबह की प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम्’ गाना होगा। इस फैसले को लेकर राज्य में राजनीतिक और शैक्षणिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। पहले स्कूलों के लिए जारी हुआ था आदेश इससे पहले पश्चिम बंगाल के स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया था कि हर दिन कक्षाएं शुरू होने से पहले ‘वंदे मातरम्’ का गायन सुनिश्चित किया जाए। विभाग ने कहा था कि सुबह की प्रार्थना सभा में राष्ट्रगीत गाने से छात्रों में देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार का यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय के उस निर्देश के बाद सामने आया है, जिसमें राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इसे व्यापक रूप से गाने की बात कही गई थी। नए आदेश में राज्य गीत को लेकर स्थिति साफ नहीं बंगाल में पहले से स्कूलों की सुबह की सभा में ‘बांग्लार माटी बांग्लार जल’ गीत गाना अनिवार्य था। हालांकि नए आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि राज्य गीत को अब भी जारी रखा जाएगा या नहीं। कुछ स्कूल प्रबंधन ने इस फैसले को लागू करने में व्यावहारिक चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया है। स्कूल प्रमुखों का कहना है कि राष्ट्रगान पहले से अनिवार्य है और अब ‘वंदे मातरम्’ जोड़े जाने के बाद अगर राज्य गीत भी जारी रहता है तो प्रार्थना सभा का समय काफी बढ़ जाएगा। स्कूलों ने शुरू किया पालन शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार फिलहाल निर्देश केवल ‘वंदे मातरम्’ को लेकर जारी किया गया है। विभाग ने साफ किया कि स्कूल प्रार्थना में राष्ट्रगीत को शामिल करना जरूरी होगा, जबकि राज्य गीत पर कोई अलग निर्देश नहीं दिया गया है। कई स्कूलों ने इस आदेश का पालन भी शुरू कर दिया है। जादवपुर विद्यापीठ के प्रधानाध्यापक पार्थ प्रतिम बैद्य ने बताया कि उनके स्कूल में पिछले सप्ताह से राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम्’ गाया जा रहा है। राजनीतिक बहस तेज मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य किए जाने के फैसले ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर सरकार इसे राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष और कुछ शिक्षा विशेषज्ञ इस फैसले के सामाजिक और प्रशासनिक प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं।  

surbhi मई 21, 2026 0
Shubhendu Adhikari
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की पहली कैबिनेट बैठक में बड़े फैसले, BSF को जमीन हस्तांतरण को मंजूरी

कोलकाता, एजेंसियां। शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद अपनी पहली कैबिनेट बैठक में कई बड़े और अहम फैसले लिए। कोलकाता स्थित राज्य सचिवालय नाबन्न में हुई बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वास्थ्य योजनाओं, सरकारी नौकरियों और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों को मंजूरी दी गई।   BSF को जमीन हस्तांतरण की मंजूरी कैबिनेट बैठक में सीमावर्ती इलाकों में बाड़ लगाने के लिए Border Security Force को जमीन के कानूनी हस्तांतरण को मंजूरी दे दी गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वर्षों से लंबित इस प्रक्रिया को 45 दिनों के भीतर पूरा किया जाए। चुनाव प्रचार के दौरान सीमा सुरक्षा और अधूरी बाड़ का मुद्दा प्रमुख राजनीतिक विषय रहा था।   आयुष्मान भारत और उज्ज्वला 3.0 लागू मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि Ayushman Bharat और Pradhan Mantri Ujjwala Yojana जैसी केंद्रीय योजनाएं अब पश्चिम बंगाल में लागू की जाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्य की मौजूदा सामाजिक सुरक्षा योजनाएं भी जारी रहेंगी और लाभार्थियों की पारदर्शी जांच की जाएगी।   राजनीतिक हिंसा पीड़ितों के परिवारों को सहायता सरकार ने राजनीतिक हिंसा में मारे गए बीजेपी कार्यकर्ताओं के परिवारों की जिम्मेदारी लेने का भी ऐलान किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में लगभग 321 भाजपा कार्यकर्ता राजनीतिक हिंसा का शिकार हुए हैं।   जनगणना और नए आपराधिक कानून लागू मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में जनगणना प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार इसे लागू किया जा रहा है। साथ ही, कैबिनेट ने पश्चिम बंगाल में नए आपराधिक कानून Bharatiya Nyaya Sanhita को तत्काल लागू करने का निर्णय लिया।   सरकारी नौकरियों में आयु सीमा में छूट राज्य सरकार ने नई भर्तियों के लिए उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में पांच साल की छूट देने का फैसला किया है। इसके अलावा IAS, IPS और अन्य अधिकारियों को अब दिल्ली और दूसरे राज्यों में ट्रेनिंग लेने की अनुमति भी दी जाएगी।

Unknown मई 11, 2026 0
PA murder case
बंगाल के CM शुभेंदु के PA हत्याकांड में 3 गिरफ्तार, बिहार के बक्सर, यूपी के बलिया से पकड़ाए

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदू अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या मामले में बिहार और यूपी से 3 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। तीनों को बंगाल लाया जा रहा है। बंगाल CID ने बताया कि बिहार के बक्सर से मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य, जबकि उत्तर प्रदेश के बलिया से राज सिंह को रविवार रात हिरासत में लिया गया। इन्हें सोमवार सुबह गिरफ्तार किया गया। राज सिंह शार्प शूटर बताया जा रहा है। 6 मई को चंद्रनाथ का मर्डर हुआ था बंगाल चुनाव के नतीजे आने के दो दिन बाद 6 मई को 42 साल के चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम इलाके में हुई। हमलावर ने रथ की कार रुकवाकर कई राउंड फायरिंग की थी। रथ को सीने और पेट में तीन गोलियां लगी थीं। हमलावर के सुपारी किलर्स होने की आशंका बंगाल पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद रथ की हत्या में सुपारी किलर्स के शामिल होने की आशंका जताई थी। पुलिस ने कहा कि शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि रथ की हत्या प्लानिंग के तहत की गई और इसमें प्रोफेशनल शूटर शामिल हो सकते हैं। पुलिस ने घटनास्थल से एक कार जब्त की, जिससे रथ की स्कॉर्पियो का पीछा किया गया था। कार की नंबर प्लेट फर्जी निकली। कार का चेसिस और इंजन नंबर मिटाया गया था। इसके अलावा, हमले में दो बाइक शामिल थीं। इनमें से एक मोटरसाइकिल भी घटनास्थल से करीब 4 किमी दूर चाय की दुकान के पास मिली। उस पर भी फर्जी रजिस्ट्रेशन था। दूसरी बाइक नहीं मिली है। शुभेंदु TMC में थे, तब से चंद्रनाथ उनके साथ थे चंद्रनाथ पहले एयरफोर्स में अफसर थे। VRS लेने के बाद कुछ समय कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया। इसके बाद राजनीति में आ गए। सुवेंदु जब तृणमूल कांग्रेस में थे, तब से चंद्रनाथ उनके लिए काम कर रहे थे। उन्हें सुवेंदु अधिकारी के बेहद करीबी लोगों में गिना जाता था। चंद्रनाथ 2019 में सुवेंदु की ऑफिशियल टीम का हिस्सा बने, तब सुवेंदु ममता बनर्जी सरकार में मंत्री थे। चंद्रनाथ ने भवानीपुर में सुवेंदु के चुनाव अभियान की जिम्मेदारी संभाली थी। भवानीपुर वही सीट है जहां से सुवेंदु ने ममता बनर्जी को विधानसभा चुनाव में करीब 15 हजार वोटों से हराया है। चंद्रनाथ की मां भी शुभेंदु के साथ भाजपा में गई थी सुवेंदु की तरह चंद्रनाथ का परिवार भी पहले TMC से जुड़ा था। उनकी मां हाशी रथ ने TMC शासन के दौरान पूर्व मेदिनीपुर में स्थानीय पंचायत निकाय में पद संभाला था, लेकिन 2020 में सुवेंदु अधिकारी के साथ भाजपा में शामिल हो गईं। चंद्रनाथ शांत स्वभाव और लो-प्रोफाइल थे। उन्होंने रहारा रामकृष्ण मिशन से अपनी पढ़ाई पूरी की थी। कई सालों तक सुवेंदु के करीबी होने के बावजूद वह सुर्खियों से दूर ही रहते थे। चंद्रकात की सुवेंदु के साथ कोई फोटो नहीं है।

Unknown मई 11, 2026 0
Shubhendu Adhikari PA death
शुभेंदु अधिकारी के पीए की मौत का धनबाद कनेक्शन!

धनबाद। पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम में हुई भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हाई-प्रोफाइल हत्या के तार अब धनबाद से जुड़ रहे हैं। इस मामले की जांच अब झारखंड के धनबाद तक पहुंच गई है। बीते 6 मई की रात अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर चंद्रनाथ की जान ले ली थी। इस सनसनीखेज मामले की तफ्तीश में जुटी पुलिस उस वक्त हैरान रह गई जब मौके से बरामद बाइक का नंबर एक सेलकर्मी के नाम पर दर्ज मिला। पश्चिम बंगाल पुलिस की टीम तुरंत धनबाद के चासनाला पहुंची और संबंधित व्यक्ति से घंटों पूछताछ की। लेकिन, गहन छानबीन और सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद ये साफ हो गया कि सेलकर्मी का इस हत्याकांड से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि शूटरों ने फर्जी नंबर का इस्तेमाल किया था। फर्जी नंबर प्लेट का खुलासा विभाष भट्टाचार्य ने पुलिस को बताया कि उनकी बाइक घर पर ही खड़ी है। जब पुलिस ने मौके पर जाकर जांच की, तो पाया कि अपराधियों की बाइक और विभाष की बाइक के मॉडल और रंग में जमीन-आसमान का अंतर था। विभाष के कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज ने यकीन दिलाया कि वारदात के समय वे ड्यूटी पर थे। अपराधियों ने पुलिस को भ्रमित करने के लिए विभाष की बाइक के नंबर का क्लोन तैयार किया था। चंद्रनाथ रथ की कार को घेरकर बाइक और कार सवार अपराधियों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। इस हमले में चंद्रनाथ रथ की मौत हो गई, जबकि उनका चालक गंभीर रूप से घायल हुआ। राज्य सरकार ने इस हाई-प्रोफाइल मामले को सुलझाने के लिए सात सदस्यीय SIT का गठन किया है। असली अपराधियों की तलाश जारी विभाष भट्टाचार्य को निर्दोष पाए जाने पर पुलिस ने छोड़ दिया है। अब जांच का पूरा ध्यान उन शूटरों पर है जिन्होंने इतनी चालाकी से फर्जी नंबर प्लेट का उपयोग किया। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अपराधियों को विभाष की बाइक का नंबर कैसे मिला और इस बड़ी साजिश के पीछे मुख्य मास्टरमाइंड कौन है।  दरअसल, धनबाद में SAIL (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) का मुख्य कार्यालय चासनाला में स्थित हैं, जो कोलियरीज प्रभाग (Collieries Division) के अंतर्गत आते हैं। इसी ऑफिस में विभाष की पोस्टिंग है। विभाष ने पुलिस को बताया कि उनकी बाइक घर में ही खड़ी है। जब पुलिस ने विभाष के घर जाकर बाइक की जांच की और उनके कार्यालय का सीसीटीवी फुटेज देखा तो पाया कि विभाष घटना के वक्त अपने कार्यालय में ड्यूटी पर थे। कोलकाता में किसने चलाई गोलियां ? चंद्रनाथ रथ हत्या मामला क्या है? पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या हुई। 6 मई 2026 की रात लगभग 10:30 बजे मध्यमग्राम के दोहारिया में अपराधियों ने चंद्रनाथ की कार पर अंधाधुंध फायरिंग की। बाइक और कार से हमलावर आए थे। पुलिस को गुमराह करने के लिए गाड़ियों पर फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया था। अपराधियों की बाइक (WB 44D 1990) का नंबर झारखंड के धनबाद (चासनाला) में रहने वाले एक सेलकर्मी का निकला।

Unknown मई 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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anjali kumari जून 24, 2026 0