मुंबई: धर्मा प्रोडक्शंस से जुड़े प्रोड्यूसर और क्रिएटिव डेवलपमेंट हेड सोमेन मिश्रा के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। सोमेन ने फिल्ममेकर अनुराग कश्यप को लेकर दावा किया है कि उन्होंने एक बार उनके घर आकर उनका सिर फोड़ने की धमकी दी थी। हालांकि, सोमेन मिश्रा ने इस कथित घटना के बारे में विस्तार से कोई जानकारी साझा नहीं की है। वहीं, अनुराग कश्यप की ओर से भी इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। एक किताब के ऐलान के बाद सामने आया दावा पूरा मामला तब शुरू हुआ जब प्रकाशन संस्था पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने फिल्ममेकर अनुराग कश्यप पर आधारित एक नई किताब के अधिकार हासिल करने का ऐलान किया। इस किताब को पत्रकार नमन रामचंद्रन और स्वयं अनुराग कश्यप मिलकर लिख रहे हैं। इसी घोषणा से जुड़े एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए सोमेन मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा: "अगर इसमें वह चैप्टर नहीं है, जिसमें AK (अनुराग कश्यप) मेरे घर आकर मेरा सिर फोड़ने की धमकी देते हैं, तो यह किसी काम की नहीं है।" इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई। अनुराग कश्यप की विरासत पर भी उठाए सवाल सोमेन मिश्रा ने एक अन्य पोस्ट में फिल्मों की विरासत और बॉक्स ऑफिस सफलता पर अपनी राय रखते हुए कहा कि केवल कमाई के आधार पर किसी फिल्मकार की विरासत तय नहीं की जा सकती। उन्होंने लिखा कि अगर सिर्फ बॉक्स ऑफिस सफलता ही मापदंड होती, तो फिल्म स्कूलों में गुरु दत्त की फिल्मों की बजाय 'जय संतोषी मां' जैसे ब्लॉकबस्टर सिनेमा का अध्ययन किया जाता। यूजर्स ने मांगी पूरी कहानी सोमेन मिश्रा के पोस्ट वायरल होने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उनसे पूरी घटना के बारे में जानकारी देने की मांग की। कुछ यूजर्स ने पूछा: "आखिर ऐसा क्यों हुआ?" "पूरी कहानी बताइए।" "यह तो स्पॉइलर जैसा लग रहा है।" हालांकि, अब तक सोमेन मिश्रा ने इस कथित घटना को लेकर कोई अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं की है। कौन हैं सोमेन मिश्रा? सोमेन मिश्रा लंबे समय से धर्मा प्रोडक्शंस और धर्माटिक एंटरटेनमेंट से जुड़े हुए हैं। वह वर्तमान में कंपनी में हेड ऑफ क्रिएटिव डेवलपमेंट (स्क्रिप्ट्स) की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कई चर्चित फिल्मों पर काम किया है, जिनमें: 'शेरशाह' 'राजी' 'गुड न्यूज' 'धड़क 2' 'होमबाउंड' जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। हाल ही में 'बंदर' को लेकर चर्चा में थे अनुराग कश्यप दूसरी ओर, अनुराग कश्यप अपनी हालिया फिल्म 'बंदर' को लेकर सुर्खियों में रहे। बॉबी देओल अभिनीत इस फिल्म को समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इसका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। नोट: अनुराग कश्यप पर लगाया गया यह आरोप फिलहाल केवल सोमेन मिश्रा के सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। इस मामले में स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और अनुराग कश्यप की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
वायरल वीडियो मामले में KEM अस्पताल की प्रारंभिक जांच पूरी, छात्रा ने मांगी लिखित माफी स्टैंड-अप कॉमेडियन प्राणित मोरे से जुड़े चर्चित ‘370 रुपये बिरयानी’ विवाद में नया मोड़ सामने आया है। मुंबई के KEM अस्पताल की प्रारंभिक जांच में MBBS छात्रा सेजल पवार की टिप्पणियों को "आपत्तिजनक और असंवेदनशील" पाया गया है। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि छात्रा का व्यवहार एक मेडिकल छात्र से अपेक्षित संवेदनशीलता, गरिमा और पेशेवर जिम्मेदारी के अनुरूप नहीं था। जांच के दौरान सेजल पवार ने लिखित रूप से माफी मांगते हुए स्वीकार किया कि उनकी कुछ टिप्पणियां अनुचित थीं और उनसे लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं। अस्पताल प्रशासन अब मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार कर रहा है, जिसमें अस्थायी निलंबन जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। माता-पिता को बुलाया गया, काउंसलिंग की तैयारी KEM अस्पताल के डीन डॉ. हरीश एम. पाठक ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो को लेकर कई शिकायतें मिलने के बाद एक प्रारंभिक तथ्य-जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने वीडियो की समीक्षा करने के साथ छात्रा से बातचीत भी की। अस्पताल प्रशासन ने छात्रा के माता-पिता को भी बुलाया है और उनकी मौजूदगी में काउंसलिंग कराने की तैयारी की जा रही है। साथ ही सोशल मीडिया पर प्रसारित आपत्तिजनक वीडियो क्लिप्स को हटाने के लिए संबंधित एजेंसियों और प्लेटफॉर्म्स से संपर्क करने पर भी विचार किया जा रहा है। महाराष्ट्र साइबर पुलिस की जांच तेज मामले में महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने प्राणित मोरे, सेजल पवार और एक अन्य युवक हिमांशु जांगड़ा के खिलाफ FIR दर्ज की है। जांच एजेंसियां वायरल वीडियो की फोरेंसिक जांच कराने की तैयारी में हैं और जल्द ही संबंधित लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान प्राणित मोरे के पुराने शो और ऑनलाइन कंटेंट की भी समीक्षा की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं पहले भी इसी तरह की विवादित सामग्री तो प्रस्तुत नहीं की गई थी। मुख्यमंत्री फडणवीस बोले- मनोरंजन के नाम पर मर्यादा जरूरी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार स्टैंड-अप कॉमेडी या कलाकारों के खिलाफ नहीं है, लेकिन मनोरंजन के नाम पर सामाजिक मर्यादा और शालीनता की सीमा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दूसरों की गरिमा और अधिकारों को प्रभावित करने लगती है, तब उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है। मेडिकल समुदाय ने भी जताई नाराजगी मामले को लेकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की सार्वजनिक स्वास्थ्य समिति में भी चर्चा हुई। समिति के अध्यक्ष हरीश भंडिग्रे ने कहा कि शरीर और अंगदान जैसे संवेदनशील विषयों पर की गई टिप्पणियां समाज में गलत संदेश देती हैं और जागरूकता अभियानों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। वहीं महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) की KEM इकाई ने स्पष्ट किया कि सेजल पवार संगठन की सदस्य नहीं हैं। संगठन ने उनकी टिप्पणियों को अनुचित बताया, लेकिन साथ ही सोशल मीडिया पर छात्रा के खिलाफ हो रही व्यक्तिगत ट्रोलिंग और अपमानजनक टिप्पणियों का भी विरोध किया। क्या है पूरा विवाद? विवाद उस समय शुरू हुआ जब स्टैंड-अप कॉमेडियन प्राणित मोरे के एक शो के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। एक वीडियो में सेजल पवार कथित तौर पर शवदान करने वाले पुरुषों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करती नजर आईं। वहीं दूसरे वीडियो में हिमांशु जांगड़ा द्वारा डेट पर 370 रुपये की बिरयानी खिलाने के बदले शारीरिक संबंधों को लेकर विवादित टिप्पणी की गई थी। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली, जिसके बाद पुलिस और अस्पताल प्रशासन दोनों ने जांच शुरू कर दी। आगे क्या? फिलहाल KEM अस्पताल की अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट के आधार पर छात्रा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी। दूसरी ओर साइबर पुलिस की जांच भी जारी है, जिससे मामले में कानूनी कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होगी।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई Cockroach Janta Party को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मामले में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें संगठन की गतिविधियों की जांच कराने और FIR दर्ज करने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह स्व-घोषित राजनीतिक संगठन सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर रहा है और उनका व्यावसायिक लाभ उठाया जा रहा है। CBI जांच की मांग याचिकाकर्ता ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा है कि इसकी जांच Central Bureau of Investigation से कराई जानी चाहिए। साथ ही याचिका में कथित फर्जी वकीलों और नकली डिग्री रखने वाले लोगों की जांच की भी मांग की गई है। संवैधानिक प्रक्रियाओं के दुरुपयोग का आरोप याचिका में कहा गया है कि कुछ संगठन अदालत की टिप्पणियों और संवैधानिक प्रक्रियाओं का इस्तेमाल प्रचार, डिजिटल मार्केटिंग और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए कर रहे हैं। इसे न्यायिक प्रक्रिया के “खतरनाक व्यावसायीकरण” के रूप में पेश किया गया है। सोशल मीडिया अकाउंट बंद होने का दावा कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक Abhijeet Deepak ने दावा किया है कि संगठन के सभी सोशल मीडिया अकाउंट और वेबसाइट ब्लॉक कर दिए गए हैं। उनका कहना है कि अब संगठन अपने आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक स्क्रीन रिकॉर्डिंग साझा करते हुए दावा किया था कि पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट को 22 अप्रैल से 21 मई के बीच 1.6 बिलियन व्यूज मिले। उनके मुताबिक, इस दौरान करीब 1.2 करोड़ नए फॉलोअर्स जुड़े। NEET-UG मुद्दे के बाद चर्चा में आई थी पार्टी कॉकरोच जनता पार्टी हाल ही में NEET-UG paper leak controversy को लेकर चलाए गए ऑनलाइन अभियान के बाद सुर्खियों में आई थी। इस अभियान में केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग की गई थी। शुरुआत में व्यंग्य के तौर पर शुरू हुआ यह डिजिटल अभियान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। बड़ी संख्या में यूजर्स खुद को “कॉकरोच” कहकर इस अभियान से जुड़ने लगे। कांग्रेस ने बीजेपी पर लगाए आरोप इस विवाद को लेकर Indian National Congress ने केंद्र सरकार और Bharatiya Janata Party पर निशाना साधा है। महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Nana Patole ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर बढ़ते जन आक्रोश को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि खुफिया एजेंसियों की चेतावनी के बाद इस डिजिटल संगठन के सोशल मीडिया अकाउंट बंद किए गए।
साउथ और बॉलीवुड फिल्मों के चर्चित अभिनेता Prakash Raj एक बार फिर अपने राजनीतिक तंज को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने एक वीडियो शेयर कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आम खाने की उनकी पसंद को लेकर व्यंग्य किया है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है। प्रकाश राज ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह आम को काटकर उसमें आइसक्रीम मिलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि “कॉकरोच ऐसे आम खाते हैं” और प्रधानमंत्री की ओर इशारा करते हुए टिप्पणी की। वीडियो में क्या दिखा? वीडियो में प्रकाश राज आम को एक अनोखे तरीके से तैयार करते नजर आते हैं और इसे “कॉकरोच स्टाइल” खाने का उदाहरण बताते हैं। उन्होंने पोस्ट के साथ हैशटैग #CockroachJantaParty भी इस्तेमाल किया, जो पहले से ही सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। इस बयान के बाद यूजर्स दो हिस्सों में बंट गए हैं-कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी और राजनीतिक व्यंग्य बता रहे हैं, जबकि कई इसे प्रधानमंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणी करार दे रहे हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ विवाद की पृष्ठभूमि यह पूरा विवाद उस समय और तेज हुआ जब सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान “कॉकरोच” शब्द का इस्तेमाल बेरोजगार युवाओं के संदर्भ में किया गया। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर #CockroachJantaParty नाम से एक व्यंग्यात्मक अभियान शुरू हुआ, जिसने तेजी से लोकप्रियता हासिल की। इस ऑनलाइन आंदोलन से कई फिल्मी हस्तियों और सोशल मीडिया यूज़र्स के जुड़ने की भी खबरें सामने आईं। इसी डिजिटल ट्रेंड को आधार बनाकर अब यह मुद्दा राजनीतिक और सोशल मीडिया बहस का केंद्र बन गया है। पीएम मोदी की आम पसंद का संदर्भ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मौकों पर आम को अपनी पसंदीदा फलों में शामिल बता चुके हैं। पुराने इंटरव्यू में भी उन्होंने आम के प्रति अपने लगाव का जिक्र किया था, जिसका हवाला देकर प्रकाश राज ने यह तंज कसा। सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया प्रकाश राज के इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भारी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। समर्थक इसे व्यंग्य और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक मर्यादा से बाहर का बयान मान रहे हैं।
Donald Trump ने एक AI-जनरेटेड वीडियो शेयर कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस वीडियो में अमेरिकी टीवी होस्ट Stephen Colbert को कूड़ेदान में फेंकते हुए दिखाया गया है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। क्या है वीडियो में? वीडियो में दिखाया गया है कि जैसे ही The Late Show with Stephen Colbert के अंतिम एपिसोड में स्टीफन कोल्बर्ट दर्शकों का स्वागत करते हैं, तभी पीछे से ट्रंप आते हैं। इसके बाद ट्रंप उन्हें कॉलर से पकड़कर डस्टबिन में फेंक देते हैं और फिर डांस करने लगते हैं। बैकग्राउंड में उनके चुनावी कैंपेन की धुन जैसी म्यूजिक भी सुनाई देती है। यह वीडियो AI तकनीक से तैयार किया गया बताया जा रहा है। शो के आखिरी एपिसोड के बाद बढ़ा विवाद यह वीडियो ऐसे समय सामने आया, जब ‘The Late Show with Stephen Colbert’ का आखिरी एपिसोड हाल ही में प्रसारित हुआ। 2015 में शुरू हुआ यह शो अमेरिका के सबसे लोकप्रिय लेट-नाइट टॉक शोज में शामिल रहा। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक शो का फिनाले एपिसोड रिकॉर्ड व्यूअरशिप के साथ खत्म हुआ। ओवरनाइट नीलसन रेटिंग्स के अनुसार इसे करीब 6.74 मिलियन लोगों ने देखा, जो 2015 के पहले एपिसोड से भी ज्यादा था। फिनाले एपिसोड में कई स्टार्स पहुंचे 21 मई को प्रसारित अंतिम एपिसोड में कई सेलिब्रिटी मेहमान शामिल हुए। कोल्बर्ट ने अपने खास अंदाज में दर्शकों को अलविदा कहा। शो के दौरान अभिनेता Bryan Cranston ने सरप्राइज एंट्री भी दी। क्यों बंद हुआ शो? CBS ने जुलाई 2025 में घोषणा की थी कि 30 साल पुराने इस शो को बंद किया जा रहा है। नेटवर्क ने इसके पीछे आर्थिक कारण बताए थे और कहा था कि पारंपरिक टीवी ब्रॉडकास्टिंग पर बढ़ते दबाव के चलते यह फैसला लिया गया। हालांकि आलोचकों और खुद कोल्बर्ट ने संकेत दिए थे कि इसके पीछे राजनीतिक वजहें भी हो सकती हैं। सोशल मीडिया और यूट्यूब का असर रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में लेट-नाइट टीवी शोज की लोकप्रियता में गिरावट आई है। अब बड़ी संख्या में दर्शक टीवी पर लाइव देखने के बजाय यूट्यूब और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शो के क्लिप्स देखना पसंद करते हैं। अब फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखेंगे कोल्बर्ट ‘The Late Show’ खत्म होने के बाद Stephen Colbert अब फिल्मों की स्क्रीनराइटिंग पर काम कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह Peter Jackson और अन्य राइटर्स के साथ मिलकर The Lord of the Rings: Shadow of the Past की कहानी लिख रहे हैं।
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर हुई गिरफ्तारी Delhi Police ने मशहूर डर्मेटोलॉजिस्ट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर डॉ. नीलम सिंह उर्फ “The Skin Doctor” को गिरफ्तार किया है। उन पर कारोबारी Sunjay Kapur की मौत के बाद कपूर परिवार से जुड़े कथित सोशल मीडिया पोस्ट करने का आरोप है। सूत्रों के अनुसार कपूर परिवार की शिकायत के बाद वसंत कुंज थाने में मामला दर्ज किया गया था, जिसके आधार पर जांच शुरू हुई। पुलिस ने शुरू की विस्तृत जांच अधिकारियों ने अभी तक सार्वजनिक रूप से आरोपों का पूरा विवरण साझा नहीं किया है, लेकिन मामले की जांच कई पहलुओं से की जा रही है। पुलिस सोशल मीडिया गतिविधियों और पोस्ट की प्रकृति की जांच कर रही है। कौन हैं ‘The Skin Doctor’? डॉ. नीलम सिंह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर @theskindoctor13 नाम से सक्रिय हैं। वे स्किन केयर, एंटी-एजिंग और ब्यूटी टिप्स से जुड़े कंटेंट के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा वे राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर भी लगातार टिप्पणी करते रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके लाखों फॉलोअर्स बताए जाते हैं। पहले भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल 2026 में भी दिल्ली पुलिस ने उन्हें एक अन्य हाई-प्रोफाइल संपत्ति विवाद से जुड़े पोस्ट के मामले में पूछताछ के लिए बुलाया था। इसके कुछ दिनों बाद उन्होंने संजय कपूर की मौत से जुड़ा पोस्ट किया, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया। पोस्ट में क्या कहा गया था? बताया जा रहा है कि डॉ. सिंह ने अपने पोस्ट में उस खबर का जिक्र किया था जिसमें कहा गया था कि पोलो खेलते समय संजय कपूर ने गलती से मधुमक्खी निगल ली थी। उन्होंने लिखा था कि ऐसी स्थिति में गंभीर एलर्जी, सांस रुकने या हार्ट संबंधी जटिलताएं हो सकती हैं। साथ ही उन्होंने ऐसी मेडिकल इमरजेंसी में तुरंत इलाज कराने की सलाह भी दी थी। संजय कपूर की मौत और परिवार विवाद Sunjay Kapur ऑटो कंपोनेंट कंपनी Sona Comstar के प्रमुख थे और अभिनेत्री Karisma Kapoor के पूर्व पति थे। जून में लंदन में पोलो खेलते समय उनकी मौत हो गई थी। मेडिकल रिपोर्ट में मौत का कारण हृदय संबंधी बीमारी बताया गया था। हालांकि बाद में परिवार की ओर से मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाए गए और जांच की मांग की गई। सोशल मीडिया और राजनीति से भी जुड़ा नाम डॉ. नीलम सिंह को सोशल मीडिया पर भाजपा समर्थक टिप्पणियों के लिए भी जाना जाता है। वे अक्सर प्रधानमंत्री Narendra Modi और बीजेपी से जुड़े मुद्दों पर पोस्ट करते रहे हैं। हाल ही में उनका नाम अभिनेत्री Samantha Ruth Prabhu से जुड़े सोशल मीडिया विवाद में भी सामने आया था। फिलहाल पुलिस मामले की जांच जारी रखे हुए है और डिजिटल रिकॉर्ड तथा सोशल मीडिया पोस्ट की गहन जांच की जा रही है।
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के सुपरस्टार Virat Kohli से जुड़ी एक छोटी-सी सोशल मीडिया गतिविधि ने इंटरनेट पर बड़ा बवाल खड़ा कर दिया। जर्मन इन्फ्लुएंसर LizLaz की इंस्टाग्राम पोस्ट पर कोहली के ‘लाइक’ और फिर ‘अनलाइक’ करने की खबर देखते ही देखते वायरल हो गई, जिससे सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। कैसे शुरू हुआ पूरा मामला? बताया जा रहा है कि एक फोटोग्राफर ने दावा किया कि कोहली ने LizLaz की तस्वीरों को लाइक किया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल होने लगे। हालांकि, कुछ ही समय बाद यह भी सामने आया कि कोहली ने उस पोस्ट को अनलाइक कर दिया। रातोंरात वायरल हुईं LizLaz इस घटना के बाद LizLaz अचानक इंटरनेट सेंसेशन बन गईं। खुद इन्फ्लुएंसर ने बताया कि जब यह सब हुआ, तब वह सो रही थीं और उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और डायरेक्ट मैसेज के जरिए मिली। उन्होंने कहा कि लोगों ने उन्हें लगातार मैसेज कर इस खबर के बारे में बताया और सोशल मीडिया पर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। “मुझे उनके लिए बुरा लगा” इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए LizLaz ने हैरानी जताई कि आखिर यह इतना बड़ा मुद्दा कैसे बन गया। उन्होंने कहा कि उन्हें कोहली के अनलाइक करने से कोई दुख नहीं हुआ, बल्कि उन्हें उनके लिए थोड़ा बुरा लगा। उनके मुताबिक, “शायद यह उनका इरादा नहीं था कि यह इतना बड़ा मुद्दा बने, लेकिन मैं उनके सपोर्ट के लिए आभारी हूं।” क्रिकेट से जुड़ा खास कनेक्शन LizLaz ने यह भी बताया कि उन्हें क्रिकेट का शौक भारत आने के बाद लगा। दक्षिण अफ्रीका में जन्मी और जर्मनी में पली-बढ़ी LizLaz के लिए यह खेल नया था, क्योंकि वहां फुटबॉल ज्यादा लोकप्रिय है। आईपीएल के दौरान दोस्तों के साथ मैच देखते-देखते वह Royal Challengers Bangalore की फैन बन गईं। उन्होंने कहा कि अगर आप RCB को सपोर्ट करते हैं, तो Virat Kohli को खेलते देखना सबसे रोमांचक अनुभव होता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।