Social Media Viral

Sudesh Berry praising PM Modi and criticizing CJP during a controversial podcast interview
PM मोदी को ‘विष्णु अवतार’ बताकर बोले सुदेश बैरी, CJP पर जमकर बरसे; विवादित बयानों का वीडियो वायरल

बॉलीवुड अभिनेता सुदेश बैरी अपने एक हालिया पॉडकास्ट इंटरव्यू को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें ‘विष्णु अवतार’ तक बताया। वहीं, दूसरी ओर उन्होंने CJP और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचकों पर बेहद तीखी और आपत्तिजनक भाषा में निशाना साधा। उनके बयान से जुड़े कई वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। पीएम मोदी की तुलना भगवान विष्णु से की ‘अकंपनी अक्की’ नाम के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान सुदेश बैरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोग ईश्वर को देखे बिना उनकी पूजा करते हैं, उसी तरह वह भी पीएम मोदी का सम्मान करते हैं। अभिनेता ने प्रधानमंत्री को ‘विष्णु अवतार’ बताते हुए कहा कि वह उनके पैर धोकर पीना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश और दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। CJP पर तीखे हमले पॉडकास्ट के दौरान सुदेश बैरी ने CJP और उससे जुड़े लोगों पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने पार्टी और उसके आंदोलनकारियों के लिए कई आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग देश को पीछे ले जाने का काम कर रहे हैं। अभिनेता ने यह भी दावा किया कि CJP के अध्यक्ष ने उन्हें फोन कर आंदोलन से जुड़ने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर फोन ब्लॉक कर दिया। बैरी ने कहा कि वह इस राजनीतिक गतिविधि का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे क्लिप सुदेश बैरी के पॉडकास्ट में दिए गए बयानों के कुछ हिस्से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल हो रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद उनके बयान पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग उनके प्रधानमंत्री के समर्थन वाले बयान की चर्चा कर रहे हैं, जबकि कई यूजर्स उनके द्वारा राजनीतिक विरोधियों के लिए इस्तेमाल की गई भाषा पर सवाल उठा रहे हैं। पीएम मोदी के आलोचकों पर भी निशाना अभिनेता ने उन लोगों की भी आलोचना की जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक असहमति अपनी जगह हो सकती है, लेकिन किसी व्यक्ति के खिलाफ गाली-गलौज करना उचित नहीं है। हालांकि, इसी दौरान उन्होंने खुद CJP और उसके समर्थकों के खिलाफ कई बेहद तीखे और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसके कारण उनके बयान को लेकर विवाद और तेज हो गया है। बयान पर बढ़ी राजनीतिक चर्चा सुदेश बैरी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब देश में राजनीतिक मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर तीखी बयानबाजी लगातार चर्चा में रहती है। ऐसे में किसी अभिनेता का किसी प्रधानमंत्री के समर्थन में इस तरह खुलकर सामने आना और साथ ही विरोधी समूह पर व्यक्तिगत टिप्पणियां करना सोशल मीडिया बहस का विषय बन गया है। फिलहाल, वायरल क्लिप्स को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। पूरे मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि वायरल वीडियो के छोटे-छोटे हिस्सों के बजाय अभिनेता के पूरे पॉडकास्ट संदर्भ को देखकर ही उनके बयान का आकलन किया जाए।  

surbhi जुलाई 30, 2026 0
Mouni Roy reacts to paparazzi while sitting in a car after a restaurant outing with Anusha Dandekar in Mumbai.
Mouni Roy Viral Video: पपाराजी पर भड़कीं मौनी रॉय, कार के अंदर तक रिकॉर्डिंग से बढ़ा विवाद; अनुषा दांडेकर ने संभाला मामला

Mouni Roy Viral Video: अभिनेत्री मौनी रॉय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह पपाराजी पर नाराज़ होती दिखाई दे रही हैं। घटना उस समय हुई जब मौनी रॉय अभिनेत्री अनुषा दांडेकर के साथ मुंबई के एक रेस्टोरेंट से बाहर निकलकर अपनी कार में बैठ रही थीं। इसी दौरान पपाराजी लगातार उनकी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करते रहे, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कार के अंदर तक पहुंची रिकॉर्डिंग, नाराज़ हुईं मौनी वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पहले अनुषा दांडेकर कार में बैठती हैं और उसके बाद मौनी रॉय वहां पहुंचती हैं। चारों ओर मौजूद फोटोग्राफर लगातार कैमरे उनकी ओर किए हुए थे। वीडियो के अनुसार, रिकॉर्डिंग कार के काफी करीब तक जारी रही, जिससे मौनी स्पष्ट रूप से असहज नजर आईं। शुरुआत में उन्होंने खुद को शांत रखने की कोशिश की, लेकिन जब रिकॉर्डिंग नहीं रुकी तो उन्होंने नाराज़गी जताते हुए कहा, "बंद करो... बंद करो इसे।" उनके चेहरे पर गुस्सा और असहजता साफ दिखाई दे रही थी। अनुषा दांडेकर ने शांत कराया माहौल स्थिति बिगड़ती देख अनुषा दांडेकर ने बीच-बचाव किया। उन्होंने पपाराजी से रिकॉर्डिंग रोकने का इशारा किया और साथ ही मौनी रॉय को भी शांत करने की कोशिश की। इसके बाद मामला धीरे-धीरे सामान्य हुआ और दोनों वहां से रवाना हो गईं। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स का मानना है कि निजी स्पेस का सम्मान किया जाना चाहिए, जबकि कुछ लोगों ने मौनी के गुस्से पर अलग-अलग राय व्यक्त की है। हालांकि, वीडियो के आधार पर उनकी नाराज़गी के पीछे किसी व्यक्तिगत कारण की पुष्टि नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती। हाल ही में निजी जिंदगी भी रही चर्चा में हाल के दिनों में मौनी रॉय अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी सुर्खियों में रही हैं। उनके और पति सूरज नांबियार के अलग होने की खबरों ने काफी चर्चा बटोरी थी। इसके अलावा, उन्होंने हाल ही में अपने बारे में फैली कुछ अफवाहों पर भी खुलकर प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि उनके बारे में कई गलत बातें कही गईं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। प्राइवेसी बनाम पपाराजी कल्चर पर फिर छिड़ी बहस इस घटना के बाद एक बार फिर सेलिब्रिटीज़ की निजता और पपाराजी कल्चर को लेकर बहस तेज हो गई है। सवाल यह उठ रहा है कि सार्वजनिक स्थानों पर कवरेज की सीमा क्या होनी चाहिए और क्या कलाकारों की निजी जगह का सम्मान किया जाना चाहिए। यह चर्चा सोशल मीडिया पर लगातार जारी है।  

surbhi जुलाई 15, 2026 0
U.S. President Donald Trump speaks on trade policy as the U.S. Supreme Court's ruling leads to the refund of billions of dollars in tariff collections to companies.
ट्रंप की टैरिफ नीति पर कोर्ट की रोक, अमेरिका को लौटाने पड़े 81 अरब डॉलर

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार को कंपनियों से वसूले गए करीब 81 अरब डॉलर (लगभग 6.7 लाख करोड़ रुपये) वापस करने पड़े हैं। अदालत ने ट्रंप प्रशासन की विवादित टैरिफ व्यवस्था को कानून के अनुरूप नहीं माना था। मई-जून में लौटाए गए 71 अरब डॉलर मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अमेरिकी सरकार ने मई और जून के दौरान लगभग 71 अरब डॉलर कंपनियों को वापस कर दिए हैं। शेष राशि का भुगतान भी चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। क्यों लगा था टैरिफ? राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप प्रशासन ने भारत, चीन, यूरोप सहित कई देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। सरकार का तर्क था कि इससे विदेशी सामान महंगे होंगे, अमेरिकी उत्पादों की मांग बढ़ेगी और घरेलू उद्योग को लाभ मिलेगा। हालांकि, कई बड़ी कंपनियों ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने इस वर्ष फरवरी में सुनाए गए फैसले में कहा कि संबंधित टैरिफ नियम कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थे। इसके बाद सरकार को कंपनियों से वसूली गई राशि ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया गया। नए टैरिफ की तैयारी में ट्रंप अदालती फैसले के बावजूद ट्रंप प्रशासन नए आयात शुल्क लागू करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, मौजूदा टैरिफ व्यवस्था समाप्त होने के बाद कई देशों के आयात पर 10% से 12.5% तक नया शुल्क लगाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसका असर भारत, चीन, जापान, ब्रिटेन और ताइवान जैसे देशों के निर्यात पर पड़ सकता है। ब्राजील और यूरोप को भी चेतावनी रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने ब्राजील पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। साथ ही उन्होंने कहा है कि यदि यूरोपीय देश अमेरिकी टेक कंपनियों पर नए कर लागू करते हैं, तो अमेरिका उनके उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाने पर विचार कर सकता है। वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका नई टैरिफ नीति लागू करता है, तो वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर इसका असर पड़ सकता है। साथ ही अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के साथ व्यापारिक तनाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Raghav Juyal Ashish Chanchlani viral photos
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों के बाद फैंस के बीच शुरू हुई चर्चा, आशीष चंचलानी के कमेंट ने बढ़ाया सस्पेंस

मुंबई, एजेंसियां। डांसर और अभिनेता राघव जुयाल तथा लोकप्रिय इन्फ्लुएंसर-अभिनेत्री निहारिका एनएम की हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने इंटरनेट पर हलचल मचा दी है। दोनों ने अपने-अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साथ में कुछ कॉजी तस्वीरें साझा की हैं, जिनके सामने आते ही फैंस उनके रिश्ते को लेकर तरह-तरह के कयास लगाने लगे हैं। हालांकि दोनों में से किसी ने भी इन तस्वीरों के पीछे की वजह का खुलासा नहीं किया है।   तस्वीरों में निहारिका लाल रंग की स्वेटशर्ट पहने नजर आ रही हैं, जबकि दोनों बेहद सहज और खुश दिखाई दे रहे हैं। पोस्ट के साथ लाल दिल, स्टार और बुरी नजर वाले इमोजी का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन कोई कैप्शन नहीं दिया गया। इसी वजह से फैंस यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या दोनों वास्तव में एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं या फिर किसी नए प्रोजेक्ट का प्रमोशन करने की तैयारी है।   आशीष चंचलानी के कमेंट ने बढ़ाई चर्चा इस पोस्ट पर मशहूर यूट्यूबर और इन्फ्लुएंसर आशीष चंचलानी ने चार बुरी नजर वाले इमोजी के साथ दोनों को टैग करते हुए कमेंट किया। निहारिका ने भी इमोजी के जरिए जवाब दिया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर और तेज हो गया।   फैंस ने दिए दिलचस्प रिएक्शन पोस्ट पर हजारों यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। किसी ने लिखा, "आप दोनों साथ में बहुत प्यारे लग रहे हैं", तो किसी ने इसे "सबसे बड़ा सरप्राइज" बताया। कई फैंस ने दोनों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि अगर यह रिश्ता है तो दोनों हमेशा साथ रहें। वहीं कुछ यूजर्स का मानना है कि यह किसी म्यूजिक वीडियो, फिल्म या अन्य प्रोजेक्ट का प्रमोशनल स्टंट भी हो सकता है।   फिलहाल राघव जुयाल और निहारिका एनएम की ओर से डेटिंग या किसी नए प्रोजेक्ट को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह साफ नहीं है कि वायरल तस्वीरें उनकी निजी जिंदगी की झलक हैं या फिर किसी नई घोषणा का संकेत।

anjali kumari जून 30, 2026 0
Justice Markandey Katju and Mahua Moitra amid social media debate over the reported Ishq Karo Party.
महुआ मोइत्रा को ‘इश्क करो पार्टी’ में शामिल होने का ऑफर? जस्टिस काटजू और TMC सांसद को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

  नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश Markandey Katju द्वारा कथित तौर पर शुरू की गई ‘इश्क करो पार्टी’ को लेकर सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई है। इस बीच तृणमूल कांग्रेस की सांसद Mahua Moitra का नाम भी चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल दावों को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ‘इश्क करो पार्टी’ को लेकर क्या है दावा? सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने ‘इश्क करो पार्टी’ (IKP) नामक एक राजनीतिक मंच की घोषणा की है। बताया जा रहा है कि इस मंच का उद्देश्य समाज में बढ़ती नफरत और विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ प्रेम, सामाजिक एकता और संवाद को बढ़ावा देना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, काटजू ने लोगों से जाति, धर्म और क्षेत्रीय विभाजन से ऊपर उठकर सामाजिक सद्भाव के लिए काम करने की अपील की है। महुआ मोइत्रा का नाम क्यों आया चर्चा में? कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि काटजू ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को भी इस नए राजनीतिक मंच से जुड़ने का न्योता दिया है। साथ ही यह भी कहा गया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और टीएमसी के भीतर चल रही कथित चुनौतियों का जिक्र किया। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इस संबंध में कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित जवाब वायरल दावों में यह भी कहा गया कि महुआ मोइत्रा ने जस्टिस काटजू की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। कथित जवाब में उन्होंने अपने राजनीतिक रुख और विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि संबंधित पोस्ट या बयान दोनों पक्षों के आधिकारिक सोशल मीडिया खातों पर स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में इन दावों की सत्यता को लेकर सवाल बने हुए हैं। आधिकारिक पुष्टि का इंतजार राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा जरूर है, लेकिन अभी तक न तो जस्टिस मार्कंडेय काटजू की ओर से और न ही महुआ मोइत्रा की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी किया गया है, जिससे वायरल दावों की पुष्टि हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में राजनीतिक हस्तियों से जुड़े कई दावे तेजी से वायरल हो जाते हैं, इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है। क्यों चर्चा में है मामला? ‘इश्क करो पार्टी’ नाम की वजह से सोशल मीडिया पर बहस तेज। महुआ मोइत्रा का नाम जुड़ने से राजनीतिक दिलचस्पी बढ़ी। वायरल दावों की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं। दोनों पक्षों की ओर से स्पष्ट बयान आने का इंतजार। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित है तथा वायरल दावों की सत्यता को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Police investigate after viral video shows namaz being offered inside temple premises in Bulandshahr.
हनुमान मंदिर परिसर में नमाज का वीडियो वायरल, पुलिस ने शुरू की जांच

  उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में एक हनुमान मंदिर परिसर में नमाज पढ़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है और जांच शुरू कर दी है। मजदूरी के दौरान मंदिर परिसर में पहुंचे थे लोग पुलिस के अनुसार, 31 मई को असर मोहम्मद अपने साथी नजर मोहम्मद और अन्य लोगों के साथ औरंगाबाद थाना क्षेत्र के औलीना गांव में राजमिस्त्री का काम करने पहुंचे थे। वे राजकुमार नामक व्यक्ति के घर निर्माण कार्य में लगे हुए थे। काम के दौरान दोपहर में भोजन और आराम के लिए विराम लिया गया। इसी दौरान कथित तौर पर असर मोहम्मद ने हल्की बारिश से बचने के लिए मंदिर परिसर में प्रवेश किया और वहां नमाज अदा की। उस समय नजर मोहम्मद भी मौके पर मौजूद था। वीडियो वायरल होने के बाद सामने आया मामला घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद गांव में इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई। स्थानीय लोगों ने मामले पर आपत्ति जताई, जिसके बाद पुलिस ने वीडियो और अन्य तथ्यों की जांच शुरू की। पुलिस ने दर्ज की एफआईआर प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की विस्तार से जांच की जा रही है और सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का क्या कहना है? औरंगाबाद थाना प्रभारी मोहम्मद असलम ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस वीडियो की सत्यता, घटना की परिस्थितियों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
Rare albino buffalo nicknamed Donald Trump at a Bangladesh farm before Eid-ul-Adha sale
बांग्लादेश में बिक गया ‘डोनाल्ड ट्रंप’ नाम का भैंसा, बकरीद पर होगी कुर्बानी

बांग्लादेश में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के नाम पर रखा गया एक दुर्लभ एल्बिनो भैंसा इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। ढाका के पास नारायणगंज जिले के एक एग्रो फार्म में पाले गए इस भैंसे को उसकी अनोखी हेयरस्टाइल और हल्के गुलाबी रंग की वजह से सोशल मीडिया पर खूब लोकप्रियता मिली। अब यह भैंसा ईद-उल-अजहा (बकरीद) से पहले बिक चुका है और इसकी कुर्बानी दी जाएगी। हेयरस्टाइल की वजह से पड़ा ‘डोनाल्ड ट्रंप’ नाम भैंसे के मालिक जियाउद्दीन मैरदा ने बताया कि उन्होंने यह दुर्लभ एल्बिनो भैंसा करीब 10 महीने पहले राजशाही सिटी हाट से खरीदा था। इसके सिर पर मौजूद सफेद और घुंघराले बाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हेयरस्टाइल जैसे लगते थे। इसी वजह से उनके छोटे भाई ने मजाक में इसका नाम “डोनाल्ड ट्रंप” रख दिया। नाम सामने आने के बाद भैंसे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। बड़ी संख्या में लोग फार्म पर सिर्फ इस भैंसे को देखने पहुंचने लगे। फार्म मालिक का कहना है कि नाम केवल मजाक और पहचान के लिए रखा गया था। 700 किलो वजन, लाखों में हुआ सौदा चार साल के इस भैंसे का वजन करीब 700 किलोग्राम बताया गया है। इसे “लाइव वेट” यानी वजन के हिसाब से बेचा गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसकी कीमत 550 टका प्रति किलो तय हुई। भैंसे को ओल्ड ढाका के व्यापारी मोहम्मद शोरोन ने खरीदा है। उन्होंने इसे ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी के लिए खरीदा है। हालांकि, मीडिया के पहुंचने पर खरीदार ने भैंसे को सार्वजनिक रूप से दिखाने से इनकार कर दिया। सोशल मीडिया वायरल होने के बाद बढ़ी चर्चा स्थानीय लोगों का मानना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस भैंसे को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता बढ़ गई थी। फार्म पर भीड़ जुटने लगी थी, इसलिए अब खरीदार इसे सार्वजनिक तौर पर दिखाने से बच रहे हैं। बांग्लादेश में बकरीद से पहले बड़े और दुर्लभ जानवरों की खरीद-फरोख्त हमेशा चर्चा में रहती है, लेकिन “डोनाल्ड ट्रंप” नाम के इस एल्बिनो भैंसे ने इस बार सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं।  

surbhi मई 23, 2026 0
PM Narendra Modi gifts Melody toffee to Italy PM Giorgia Meloni during Rome visit
भारत-इटली रिश्तों में घुली मिठास, पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी को गिफ्ट की ‘मेलोडी’ टॉफी

Narendra Modi और Giorgia Meloni के बीच बढ़ती दोस्ती एक बार फिर चर्चा में है। इटली दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी को भारत की लोकप्रिय ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट की, जिसके बाद दोनों नेताओं की मुलाकात सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो गई। मेलोनी ने इस खास गिफ्ट के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद देते हुए एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह मुस्कुराते हुए कहती नजर आईं कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें “बहुत बढ़िया टॉफी” गिफ्ट की है। इटली दौरे पर पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी अपने पांच देशों के दौरे के अंतिम चरण में Italy पहुंचे हैं। यह यात्रा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर हो रही है। भारत और इटली इस समय “जॉइंट स्ट्रेटेजिक एक्शन प्लान 2025-2029” के तहत अपने संबंधों को नई मजबूती देने पर काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, विज्ञान, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। कोलोसियम में साथ दिखे मोदी और मेलोनी रोम पहुंचने के बाद पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी के साथ मशहूर Colosseum का दौरा भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि रोम पहुंचने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ डिनर किया और फिर ऐतिहासिक कोलोसियम घूमने गए। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने कई वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार साझा किए। भारत-इटली सहयोग पर होगी अहम बातचीत बुधवार को पीएम मोदी और मेलोनी के बीच औपचारिक वार्ता होने वाली है। इसमें: व्यापार और निवेश रक्षा सहयोग क्लीन एनर्जी इनोवेशन साइंस और टेक्नोलॉजी सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। हाल के वर्षों में भारत और इटली के रिश्तों में तेजी से मजबूती आई है और दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए गंभीरता से काम कर रहे हैं। रोम में दिखी काशी की झलक पीएम मोदी ने अपने दौरे के दौरान यह भी बताया कि इटालियन कलाकार Giampaolo Tomassetti ने उन्हें वाराणसी की एक खूबसूरत पेंटिंग भेंट की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति के प्रति टोमासेटी का लगाव चार दशक से भी ज्यादा पुराना है। उन्होंने वैदिक संस्कृति और Mahabharata से जुड़ी कई कलाकृतियों पर काम किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई ‘मेलोडी डिप्लोमेसी’ पीएम मोदी द्वारा मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट किए जाने को सोशल media पर लोग “मेलोडी डिप्लोमेसी” कहकर भी चर्चा कर रहे हैं। दोनों नेताओं की दोस्ताना केमिस्ट्री पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुर्खियां बटोर चुकी है।   

surbhi मई 20, 2026 0
Nepal PM Balen Shah appears in white outfit and sneakers, sparking political and fashion discussions online.
बालेन शाह के बदले लुक ने नेपाल की राजनीति में बढ़ाई हलचल, सफेद कपड़ों पर शुरू हुई चर्चा

Balen Shah एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई राजनीतिक बयान नहीं बल्कि उनका बदला हुआ लुक है। काठमांडू के मेयर से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक अक्सर ब्लैक टी-शर्ट, ब्लैक कोट और काले चश्मे में नजर आने वाले बालेन शाह अब अचानक सफेद कपड़ों में दिखाई दिए हैं, जिसके बाद नेपाल में राजनीतिक और सोशल मीडिया हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर 10 मई को बालेन शाह ने Facebook और TikTok पर अपनी नई तस्वीर और वीडियो पोस्ट की। इसमें वह: सफेद शर्ट धारीदार ट्राउजर सफेद स्नीकर्स पहने नजर आए। खास बात यह रही कि उन्होंने पोस्ट के साथ कोई कैप्शन नहीं लिखा, लेकिन कुछ ही मिनटों में तस्वीर वायरल हो गई। नेपाल में फेसबुक, इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर उनके नए स्टाइल को लेकर जमकर चर्चा शुरू हो गई। जूतों की कीमत भी बनी चर्चा का विषय सोशल मीडिया पर लोगों ने उनके सफेद स्नीकर्स को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी। कुछ यूजर्स ने दावा किया कि प्रधानमंत्री के जूतों की कीमत सिर्फ 1200 नेपाली रुपये है। कई टिकटॉक यूजर्स ने वीडियो बनाकर कहा कि बालेन शाह की लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि साधारण जूते भी ट्रेंड बन गए हैं। एक यूजर ने कहा: “प्रधानमंत्री बनने के लिए महंगे जूते जरूरी नहीं हैं।” अब तक मीडिया से दूरी Balen Shah प्रधानमंत्री बनने के बाद से अब तक बेहद कम सार्वजनिक रूप से नजर आए हैं। उन्होंने: देश को संबोधित नहीं किया कोई बड़ा इंटरव्यू नहीं दिया प्रेस कॉन्फ्रेंस से दूरी बनाए रखी हालांकि इसके बावजूद वह लगातार चर्चा में बने हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाह “कम बोलो, ज्यादा काम करो” की रणनीति पर चल रहे हैं। ब्लैक लुक से बनी थी अलग पहचान राजनीति में आने से पहले बालेन शाह एक रैपर और परफॉर्मर भी रह चुके हैं। ऐसे में फैशन और विजुअल पहचान को लेकर उनकी अलग शैली पहले से चर्चा में रही है। काठमांडू के मेयर रहते हुए भी उन्होंने पारंपरिक राजनीतिक ड्रेस कोड से दूरी बनाए रखी थी। औपचारिक कार्यक्रमों में भी वह अक्सर: ब्लैक आउटफिट सनग्लासेस मॉडर्न स्टाइल में नजर आते थे। यहां तक कि प्रधानमंत्री पद की शपथ के दौरान पहनी गई पारंपरिक नेपाली पोशाक “दौरा-सुरुवाल” का रंग भी काला था। सफेद कपड़ों के पीछे क्या है संदेश? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका अचानक सफेद कपड़ों में नजर आना सिर्फ फैशन बदलाव नहीं हो सकता। कुछ विशेषज्ञ इसे: सॉफ्ट इमेज बनाने की कोशिश राजनीतिक संदेश विवादों के बीच नई शुरुआत का संकेत मानकर देख रहे हैं। विवादों में रही है बालेन सरकार हाल के महीनों में बालेन सरकार कई मुद्दों को लेकर आलोचना झेल रही है। इनमें: काठमांडू में बुलडोजर कार्रवाई नदी किनारे बसे लोगों को हटाना चीफ जस्टिस की नियुक्ति विवाद प्रशासनिक फैसलों को लेकर सवाल शामिल हैं। इसी वजह से कुछ लोग उनके सफेद लुक को “इमेज मेकओवर” की कोशिश भी बता रहे हैं। हालांकि बालेन शाह ने खुद इस बदलाव पर कोई टिप्पणी नहीं की है। नेपाल में बना फैशन ट्रेंड बालेन शाह की लोकप्रियता का असर बाजार में भी दिखाई देने लगा है। नेपाल में कई दुकानदार अब: उनके जैसे काले चश्मे सफेद स्नीकर्स ब्लैक और व्हाइट आउटफिट बेचते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके स्टाइल को लेकर मीम्स, वीडियो और फैशन पोस्ट लगातार वायरल हो रहे हैं।  

surbhi मई 12, 2026 0
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‘जय श्रीराम’ बोलो, 500 रुपये बचाओ! बंगाल के डॉक्टर का अनोखा ऑफर

कोलकाता, एजेंसियां।  पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक हृदय रोग विशेषज्ञ के अनोखे ऑफर ने सामाजिक और राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रकाश कुमार हाजरा ने घोषणा की है कि जो भी मरीज उनकी क्लीनिक में ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाएगा, उसे फीस में 500 रुपये की छूट दी जाएगी।   मरीजों में दिखा उत्सुकता का माहौल डॉ. हाजरा के इस ऐलान के बाद कुछ मरीज इस ऑफर का लाभ लेने उनकी क्लीनिक पहुंचने लगे हैं। इस अनोखी पहल ने स्थानीय स्तर पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि, यह ऑफर जितना चर्चा में है, उतना ही विवादों में भी घिर गया है।   चिकित्सा नैतिकता पर उठे सवाल इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद शांतनु सेन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे चिकित्सा पेशे की नैतिकता के खिलाफ बताते हुए कहा कि डॉक्टरों को बिना किसी भेदभाव के सभी मरीजों का इलाज करना चाहिए। धार्मिक या राजनीतिक नारे के आधार पर छूट देना डॉक्टरों की शपथ के विपरीत है।   डॉक्टर का पक्ष विवाद बढ़ने के बीच डॉ. हाजरा ने अपनी सफाई में कहा कि वे नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से प्रेरित हैं। उनके अनुसार, ‘जय श्रीराम’ अब सिर्फ धार्मिक नारा नहीं रहा, बल्कि एक सामाजिक और राजनीतिक प्रतीक बन चुका है।   बढ़ती राजनीतिक बहस इस घटना ने एक बार फिर धर्म, राजनीति और पेशेवर नैतिकता के बीच संतुलन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर कुछ लोग इसे व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग इसे पेशे की गरिमा के खिलाफ मान रहे हैं।

Unknown अप्रैल 15, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 27, 2026 0