भागलपुर, एजेंसियां। बिहार के भागलपुर नगर निगम के कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। कर्मचारियों के आंदोलन के कारण नगर निगम से जुड़ी कई सेवाओं पर असर पड़ने लगा है। सफाई व्यवस्था, कचरा उठाव और अन्य नागरिक सुविधाएं प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
नगर निगम कर्मियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कर्मचारी वेतन भुगतान, नियमितीकरण, सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान और अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
हड़ताल के कारण शहर में कचरा उठाव और सफाई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कई इलाकों में नियमित सफाई नहीं होने से स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। नगर निगम प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है।
नगर निगम अधिकारियों की ओर से कर्मचारियों से बातचीत कर हड़ताल खत्म कराने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि जनता से जुड़ी जरूरी सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए समाधान निकालने की कोशिश जारी है।
कर्मचारी संगठनों ने कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। इस आंदोलन से भागलपुर शहर की नगर सेवाओं पर सीधा असर पड़ सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
गंभीर हालत में AIIMS पटना में भर्ती, पुलिस ने शुरू की जांच; हमलावरों की तलाश जारी पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना से सटे नौबतपुर थाना क्षेत्र के चिरौड़ा गांव के पास बुधवार देर शाम एक युवती पर सरेआम फायरिंग की घटना सामने आई है। बाइक सवार बदमाशों ने युवती को एक के बाद एक तीन गोलियां मार दीं, जिसके बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे इलाज के लिए AIIMS पटना में भर्ती कराया गया है। काम से लौटते समय बनाया निशाना घायल युवती की पहचान पूजा कुमारी के रूप में हुई है। वह मूल रूप से समस्तीपुर की रहने वाली बताई जा रही है और दानापुर स्थित एक निजी संस्थान में काम करती थी। पुलिस के अनुसार, वह काम खत्म कर नौबतपुर स्थित अपने किराए के मकान की ओर लौट रही थी, तभी चिरौड़ा गांव के पास बदमाशों ने हमला कर दिया। घटनास्थल से मिले खोखे, CCTV खंगाल रही पुलिस घटना की सूचना मिलते ही नौबतपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से सबूत जुटाए हैं और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके। मामले की जांच के लिए एफएसएल टीम की मदद भी ली जा रही है। फायरिंग के कारण का खुलासा नहीं फिलहाल युवती पर हमला क्यों किया गया, इसकी वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस प्रेम प्रसंग, व्यक्तिगत विवाद और अन्य संभावित कारणों को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।
नए बिजली कनेक्शन, लोड बढ़ाने और अन्य सेवाओं के लिए उपभोक्ताओं को अब संशोधित शुल्क देना होगा पटना, एजेंसियां। बिहार में बिजली उपभोक्ताओं के लिए नए बिजली कनेक्शन की दरें तय कर दी गई हैं। बिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) की ओर से निर्धारित शुल्क के अनुसार अब घरेलू, व्यावसायिक और अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं को नया कनेक्शन लेने के लिए नई दरों के आधार पर भुगतान करना होगा। घरेलू कनेक्शन के लिए नया शुल्क बिजली कनेक्शन की कीमत उपभोक्ता के लोड (किलोवाट), कनेक्शन के प्रकार और दूरी के आधार पर तय होगी। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सिंगल फेज और थ्री फेज कनेक्शन की अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं। सिंगल फेज घरेलू कनेक्शन: स्वीकृत लोड के अनुसार शुल्क थ्री फेज कनेक्शन: अधिक लोड वाले उपभोक्ताओं के लिए अलग शुल्क मीटर, सर्विस कनेक्शन और अन्य उपकरणों का खर्च भी नियमों के अनुसार लिया जाएगा। नए कनेक्शन के अलावा इन सेवाओं के लिए भी बदली दरें नई व्यवस्था में सिर्फ नया कनेक्शन ही नहीं, बल्कि कई अन्य सेवाओं के शुल्क में भी बदलाव किया गया है। बिजली लोड बढ़ाने का शुल्क मीटर बदलने का शुल्क नाम परिवर्तन और कनेक्शन स्थानांतरण शुल्क अस्थायी बिजली कनेक्शन की फीस इन सभी सेवाओं के लिए निर्धारित दरों के अनुसार भुगतान करना होगा। ऑनलाइन आवेदन की सुविधा बिहार की बिजली वितरण कंपनियां NBPDCL और SBPDCL के माध्यम से उपभोक्ता नए कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोर दिया जा रहा है। उपभोक्ताओं को मिलेगी पारदर्शी व्यवस्था बिजली विभाग का कहना है कि नई दरों का उद्देश्य कनेक्शन प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। उपभोक्ताओं को अब आवेदन से पहले ही पता चल सकेगा कि उन्हें कितनी राशि जमा करनी होगी।
सड़क और सरकारी जमीन पर कब्जे के खिलाफ कार्रवाई, पुलिस बल की मौजूदगी में चला अभियान दरभंगा, एजेंसियां। बिहार के दरभंगा जिले के बेनीपुर में प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। नगर और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर सड़क किनारे और सरकारी जमीन पर किए गए अवैध निर्माणों को हटाया गया। अतिक्रमणकारियों को पहले दिया गया था नोटिस प्रशासन के अनुसार, कार्रवाई से पहले अतिक्रमण करने वाले लोगों को नोटिस देकर स्वयं अवैध निर्माण हटाने का निर्देश दिया गया था। तय समय सीमा के बाद भी कब्जा नहीं हटाने पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की। सड़क जाम और यातायात समस्या से राहत की कोशिश अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण के कारण कई जगहों पर सड़कें संकरी हो गई थीं, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। अभियान के बाद सड़क को खाली कराने और लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा देने का प्रयास किया गया। पुलिस बल की तैनाती के बीच हुई कार्रवाई अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान किसी भी विवाद की स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन और सार्वजनिक रास्तों पर अवैध कब्जे के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। स्थानीय लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया कुछ लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि अतिक्रमण हटने से बाजार और सड़कों की स्थिति बेहतर होगी। वहीं, प्रभावित लोगों ने प्रशासन से पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग भी की है।