Sonia Gandhi

Sonia Gandhi Narendra Modi
गाजा मुद्दे पर केंद्र और विपक्ष में तीखी बयानबाजी, सोनिया गांधी के लेख से सियासी घमासान

नई दिल्ली, एजेंसियां। गाजा में जारी संघर्ष को लेकर भारत की विदेश नीति पर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा केंद्र सरकार की नीति की आलोचना करने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस ने सरकार पर गाजा संकट को लेकर "चुप्पी" साधने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस पर "वोट बैंक की राजनीति" करने का आरोप लगाया।   सोनिया गांधी ने उठाए सवाल   सोनिया गांधी ने एक लेख में कहा कि गाजा को लेकर केंद्र सरकार का रुख भारत की पारंपरिक विदेश नीति और नैतिक जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी से भारत की नैतिक और रणनीतिक स्थिति प्रभावित हुई है।   राहुल गांधी ने भी किया समर्थन   लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोनिया गांधी के लेख का समर्थन करते हुए कहा कि भारत को "नैतिक स्पष्टता" के साथ अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार का रुख भारत की पारंपरिक कूटनीतिक नीति से अलग दिखाई देता है।   भाजपा का पलटवार   भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारत की गाजा नीति संतुलित रही है। पार्टी का कहना है कि भारत ने लगातार शांति, मानवीय सहायता और युद्धविराम की आवश्यकता का समर्थन किया है तथा संयुक्त राष्ट्र में भी इसी दिशा में अपना रुख स्पष्ट किया है। भाजपा ने कांग्रेस पर विदेश नीति के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया।   विदेश नीति पर बढ़ी राजनीतिक बहस   गाजा संकट को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच जारी बयानबाज़ी से यह मुद्दा घरेलू राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि सरकार ने अपनी आधिकारिक नीति में कोई बदलाव घोषित नहीं किया है और भारत अब भी क्षेत्र में शांति, मानवीय सहायता तथा संवाद के माध्यम से समाधान की बात दोहरा रहा है।

abhishek singh जून 28, 2026 0
Sonia Gandhi and Mamata Banerjee share a warm interaction during INDIA alliance coordination meeting in Delhi.
सोनिया गांधी से गले मिलते ही भावुक हुईं ममता बनर्जी, INDIA बैठक की तस्वीरों ने खींचा ध्यान

  नई दिल्ली: INDIA गठबंधन की समन्वय समिति की बैठक के दौरान सोमवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी देखने को मिली। इस दौरान ममता बनर्जी भावुक भी नजर आईं। दिल्ली में विपक्षी नेताओं की मुलाकात बनी चर्चा का विषय INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल होने पहुंचीं ममता बनर्जी का सोनिया गांधी ने स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच कुछ समय तक बातचीत हुई और मुलाकात की तस्वीरें तेजी से चर्चा में आ गईं। राजनीतिक जानकार इसे विपक्षी दलों के बीच बढ़ते संवाद का संकेत मान रहे हैं। तीन दशक पुराने रिश्तों की फिर हुई चर्चा कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के रिश्ते भारतीय राजनीति के सबसे दिलचस्प अध्यायों में से एक रहे हैं। 1998 में कांग्रेस से अलग होकर ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। इसके बाद दोनों दलों के बीच सहयोग और प्रतिस्पर्धा का दौर लगातार चलता रहा। बंगाल की राजनीति में कई बार आमने-सामने आए दोनों दल पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और टीएमसी कई चुनावों में प्रतिद्वंद्वी रही हैं। राज्य की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के उभार के साथ कांग्रेस का प्रभाव सीमित होता गया। इसके बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर दोनों दल कई मौकों पर एक साथ भी नजर आए हैं। 2024 के चुनाव के बाद बढ़ी थी राजनीतिक दूरी लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए थे। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था, जिसके बाद कांग्रेस और टीएमसी के रिश्तों में तनाव की चर्चा तेज हो गई थी। INDIA गठबंधन को मजबूत करने पर हुई बातचीत सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान विपक्षी एकजुटता और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर भी चर्चा हुई। विपक्षी दल आगामी चुनावों को देखते हुए साझा मुद्दों पर साथ आने की कोशिश कर रहे हैं। 10 जनपथ पर फिर हुई अहम मुलाकात बैठक के अगले दिन ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी से उनके आवास 10 जनपथ पर भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बातचीत को विपक्षी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टीएमसी की चुनौतियों के बीच बढ़ी राजनीतिक सक्रियता हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस को संगठनात्मक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में ममता बनर्जी की विपक्षी नेताओं के साथ लगातार बैठकें राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही हैं। विपक्षी राजनीति में नए संकेत दे रही है यह मुलाकात विश्लेषकों का मानना है कि सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की यह मुलाकात केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय और संवाद की संभावनाओं को भी दर्शाती है। आने वाले समय में इसका असर राष्ट्रीय राजनीति में देखने को मिल सकता है।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
INDIA alliance leaders meet in New Delhi to discuss opposition strategy and key national issues.
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से चुनावी पारदर्शिता तक: केंद्र सरकार को घेरने के लिए INDIA गठबंधन की नई रणनीति

  नई दिल्ली: विपक्षी गठबंधन INDIA (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) ने केंद्र सरकार के खिलाफ साझा मोर्चा मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सोमवार (8 जून) को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित बैठक में 23 विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया और कई राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने कहा कि गठबंधन पांच प्रमुख मुद्दों पर एकजुट होकर संघर्ष करेगा और इन विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगा। NEET और CBSE विवाद पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग बैठक में NEET-UG परीक्षा और CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। INDIA गठबंधन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan से तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बहाल करने के लिए जवाबदेही तय होना जरूरी है। मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल बैठक में चुनावी पारदर्शिता को लेकर भी चर्चा हुई। गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी निष्पक्षता से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त की। इस संबंध में INDIA गठबंधन ने निर्णय लिया कि वह Surya Kant को पत्र लिखकर चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग करेगा। बेरोजगारी और महंगाई पर सर्वदलीय बैठक की मांग विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से देश की आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। गठबंधन का कहना है कि इन मुद्दों का असर सीधे आम जनता पर पड़ रहा है और इन पर व्यापक राजनीतिक संवाद की आवश्यकता है। मानसून सत्र के लिए विपक्ष की तैयारी बैठक में संसद के आगामी मानसून सत्र को लेकर भी रणनीति बनाई गई। विपक्षी दलों ने तय किया कि सत्र के दौरान समन्वय बनाए रखने के लिए प्रतिदिन नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में बैठक आयोजित की जाएगी। इसके अलावा गठबंधन की नियमित बैठकों का सिलसिला जारी रखने पर सहमति बनी है। निर्णय लिया गया कि INDIA गठबंधन की अगली बैठक हैदराबाद में आयोजित की जाएगी। बैठक में शामिल हुए प्रमुख नेता बैठक में कांग्रेस की ओर से Sonia Gandhi, Rahul Gandhi और मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद रहे। इसके अलावा Mamata Banerjee, Akhilesh Yadav, Tejashwi Yadav, Supriya Sule और Uddhav Thackeray समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। वहीं Omar Abdullah, Mehbooba Mufti, D Raja और Dipankar Bhattacharya ने भी बैठक में भाग लिया। DMK और AAP ने बनाई दूरी बैठक में Dravida Munnetra Kazhagam और Aam Aadmi Party शामिल नहीं हुईं। AAP पहले ही सार्वजनिक रूप से INDIA गठबंधन से दूरी बना चुकी है, जबकि DMK ने राजनीतिक कारणों का हवाला देते हुए बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया था। भाजपा के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ विपक्षी एकता पर जोर बैठक के दौरान नेताओं ने देश में भाजपा के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव और विपक्षी दलों के सामने मौजूद चुनौतियों पर भी चर्चा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सभी सहयोगी दलों से एकजुटता बनाए रखने और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ साझा संघर्ष जारी रखने की अपील की। गठबंधन नेताओं का मानना है कि आगामी राजनीतिक और संसदीय चुनौतियों का सामना करने के लिए विपक्षी एकता को और मजबूत करना समय की आवश्यकता है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
Ashok Gehlot speaks on the 2022 Rajasthan Congress crisis and party unity.
2022 के सियासी संकट पर बोले अशोक गहलोत, कहा- आलाकमान नहीं, सचिन पायलट को लेकर था विरोध

  जयपुर: राजस्थान की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहे 25 सितंबर 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर अपनी चुप्पी तोड़ी है। गहलोत ने स्पष्ट किया कि उस समय कांग्रेस विधायकों का विरोध पार्टी आलाकमान के खिलाफ नहीं था, बल्कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावनाओं को लेकर असहमति का परिणाम था। उन्होंने कहा कि उस पूरे प्रकरण को गलत तरीके से कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग थी। ‘आलाकमान के खिलाफ नहीं था कोई विद्रोह’ अशोक गहलोत ने कहा कि सितंबर 2022 की घटना को लेकर कई तरह की धारणाएं बनाई गईं, लेकिन कांग्रेस विधायकों ने कभी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत नहीं की। उन्होंने कहा, “यह विरोध उस व्यक्ति के खिलाफ था जिसका नाम मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चा में था। इसे आलाकमान के खिलाफ विद्रोह कहना सही नहीं है। विधायकों ने उस समय पार्टी और सरकार को बचाने की जिम्मेदारी निभाई थी।” कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ और विवाद का दौर गहलोत ने याद दिलाया कि उस समय उनका नाम कांग्रेस अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल था।घटनाक्रम के बाद हालात बदल गए और पूरे विवाद का असर उनकी राजनीतिक छवि पर भी पड़ा। उन्होंने बताया कि उस समय उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर उन्होंने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के समक्ष खेद भी व्यक्त किया था। सचिन पायलट को दी नसीहत, बोले- सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए सचिन पायलट का नाम लिए बिना गहलोत ने कहा कि राजनीति में हर व्यक्ति से गलतियां हो सकती हैं और यदि कोई भूल हुई है तो उसे स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा, “सच्चाई का कोई विकल्प नहीं होता। उस समय की परिस्थितियों को समझना और स्वीकार करना जरूरी है।” 2020 के मानेसर प्रकरण का भी किया जिक्र पूर्व मुख्यमंत्री ने वर्ष 2020 के राजनीतिक संकट को भी याद किया, जब सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ हरियाणा के मानेसर में ठहरे थे। गहलोत ने कहा कि उस समय उनके खिलाफ विद्रोह की धारणा बनाई गई थी, जबकि वास्तविक स्थिति कुछ और थी। उन्होंने संकेत दिया कि उस संकट के दौरान भी पार्टी को गंभीर राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। ‘हम सचिन पायलट के दुश्मन नहीं हैं’ गहलोत ने अपने और सचिन पायलट के रिश्तों को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उनका परिवार से वर्षों पुराना संबंध रहा है और व्यक्तिगत स्तर पर उनके बीच कोई दुश्मनी नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं उनके परिवार को बचपन से जानता हूं। हम उनके विरोधी नहीं हैं। राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत रिश्ते अलग होते हैं।” गहलोत ने यह भी दावा किया कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के दौरान उन्होंने सचिन पायलट को केंद्रीय मंत्री बनाए जाने में सहयोग किया था, इसका कभी सार्वजनिक उल्लेख नहीं किया गया। कांग्रेस नेताओं से एकजुट रहने की अपील राजस्थान की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए गहलोत ने कहा कि कांग्रेस को इस समय संगठनात्मक मजबूती की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और अन्य नेताओं को मिलकर पार्टी को मजबूत बनाने के लिए काम करना चाहिए। राहुल गांधी की सराहना का किया जिक्र गहलोत ने हाल ही में पुष्कर में आयोजित कांग्रेस प्रशिक्षण शिविर का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने राजस्थान कांग्रेस के कामकाज की सराहना की थी और विशेष रूप से गोविंद सिंह डोटासरा तथा टीकाराम जूली के नेतृत्व की प्रशंसा की थी। ‘अब पद की नहीं, संगठन की चिंता’ अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर अशोक गहलोत ने कहा कि उन्होंने राजनीति में बहुत कुछ हासिल किया है और अब उनकी प्राथमिकता केवल संगठन को मजबूत करना है। उन्होंने कहा, “तीन बार मुख्यमंत्री बनना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। भविष्य में कौन मुख्यमंत्री बनेगा, इसका फैसला समय करेगा। फिलहाल मेरी पूरी ऊर्जा कांग्रेस को मजबूत करने में लगी है।”  

Deepshikha जून 8, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and Congress leaders pay tribute to former PM Rajiv Gandhi at Veer Bhumi in Delhi.
पूर्व पीएम राजीव गांधी को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी और कांग्रेस नेताओं ने किया नमन

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर गुरुवार को देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर नरेंद्र मोदी समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें याद किया और उनके योगदान को नमन किया। राजधानी दिल्ली स्थित ‘वीर भूमि’ में आयोजित प्रार्थना सभा में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री की समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने किया नमन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर राजीव गांधी को याद किया। उन्होंने लिखा, “पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी जी को उनकी पुण्यतिथि पर नमन।” प्रधानमंत्री के संदेश के बाद कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी सोशल मीडिया पर पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित की। वीर भूमि पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने वीर भूमि पहुंचकर राजीव गांधी की समाधि पर फूल चढ़ाए और उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सोनिया गांधी भी मौजूद रहीं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अपने पिता की समाधि पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। राहुल गांधी ने साझा किया भावुक संदेश राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राजीव गांधी के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “पापा, आपने जिस कुशल, समृद्ध और मजबूत भारत का सपना देखा था, उसे साकार करने की जिम्मेदारी मैं पूरी करूंगा। आपकी सीख, आपके संस्कार और आपकी यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी।” उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में रहा। 1984 में बने थे प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने 31 अक्टूबर 1984 से 2 दिसंबर 1989 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल में सूचना प्रौद्योगिकी, टेलीकॉम और आधुनिक भारत की नींव रखने वाले कई कदम उठाए गए। 21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर में चुनाव प्रचार के दौरान एक आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गई थी। उनकी पुण्यतिथि पर हर वर्ष देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।  

surbhi मई 21, 2026 0
Congress leaders meet in Delhi as suspense continues over Kerala chief minister candidate
केरल में मुख्यमंत्री चेहरे पर सस्पेंस बरकरार, कांग्रेस ने फिर टाला ऐलान

कांग्रेस अब भी नहीं तय कर पाई मुख्यमंत्री का नाम Kerala में नई सरकार के गठन को लेकर सस्पेंस अभी खत्म नहीं हुआ है। कांग्रेस नेतृत्व ने मुख्यमंत्री पद के चेहरे की घोषणा एक बार फिर टाल दी है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि पार्टी गुरुवार को अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर सकती है। हालांकि बुधवार को संकेत मिले थे कि दिन में ही फैसला सामने आ सकता है, लेकिन देर रात तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई। दिल्ली से होगा अंतिम फैसला केरल कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ ने कहा था कि मुख्यमंत्री के नाम पर लगभग सभी चर्चाएं पूरी हो चुकी हैं और अंतिम घोषणा दिल्ली से की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी कार्यकर्ता और नेता हाईकमान के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। सोनिया गांधी की तबीयत बनी देरी की वजह? रिपोर्ट्स के अनुसार बुधवार को Sonia Gandhi का गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में रूटीन हेल्थ चेकअप हुआ था। माना जा रहा है कि इसी कारण निर्णय प्रक्रिया में देरी हुई। बाद में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने जानकारी दी कि सोनिया गांधी जांच के बाद घर लौट चुकी हैं। तीन नेताओं के बीच फंसा मामला मुख्यमंत्री पद की दौड़ फिलहाल तीन बड़े नेताओं के बीच मानी जा रही है – KC Venugopal, VD Satheesan और Ramesh Chennithala। दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान लगातार इन नेताओं के साथ बैठकें कर रहा है ताकि अंतिम नाम पर सहमति बन सके। राहुल गांधी और खड़गे की अहम बैठक Rahul Gandhi ने मंगलवार को इन तीनों नेताओं के साथ बैठक की थी। इसके बाद बुधवार को उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के साथ करीब 40 मिनट तक चर्चा की। इस बैठक को मुख्यमंत्री चयन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी के अंदर गुटबाजी भी चर्चा में सूत्रों के मुताबिक पार्टी के भीतर अलग-अलग गुट सक्रिय हैं। केरल के कई स्थानीय नेता वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला के समर्थन में बताए जा रहे हैं, जबकि केसी वेणुगोपाल को राहुल गांधी का करीबी माना जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अधिकांश कांग्रेस विधायकों ने वेणुगोपाल के नाम का समर्थन किया है। IUML का झुकाव सतीशन की ओर यूडीएफ की सहयोगी पार्टी Indian Union Muslim League ने कथित तौर पर वीडी सतीशन का समर्थन किया है। पार्टी का मानना है कि सतीशन को जनता के बीच व्यापक समर्थन हासिल है। विधानसभा चुनाव में UDF की बड़ी जीत हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेतृत्व वाले United Democratic Front ने 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की थी। इसके साथ ही Pinarayi Vijayan के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार का दशकभर का शासन खत्म हो गया।  

surbhi मई 14, 2026 0
Sonia Gandhi arriving at Medanta Hospital in Gurugram for treatment amid health concerns
सोनिया गांधी फिर अस्पताल में भर्ती, गुरुग्राम के मेदांता में चल रहा इलाज

Sonia Gandhi की तबीयत एक बार फिर खराब हो गई है। उन्हें गुरुग्राम स्थित Medanta - The Medicity में भर्ती कराया गया है। सूत्रों के मुताबिक सोनिया गांधी आंख से जुड़ी समस्या के कारण अस्पताल पहुंची हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि उनकी हालत स्थिर है और उन्हें कुछ समय बाद डिस्चार्ज किया जा सकता है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी अस्पताल पहुंचे अस्पताल में भर्ती सोनिया गांधी के साथ उनके बेटे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi तथा बेटी Priyanka Gandhi Vadra भी मौजूद हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों नेता अस्पताल में उनके साथ हैं और डिस्चार्ज के बाद उन्हें घर लेकर जाएंगे। पहले से कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहीं सोनिया गांधी कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रही हैं। उन्हें पेट, फेफड़ों और सांस से जुड़ी परेशानियां रहती हैं। उनका इलाज समय-समय पर Sir Ganga Ram Hospital, Indira Gandhi Medical College and Hospital और मेदांता अस्पताल में चलता रहा है। कांग्रेस की अहम रणनीतिक नेता हैं सोनिया गांधी सोनिया गांधी लंबे समय तक Indian National Congress की सबसे प्रभावशाली नेताओं में रही हैं। उन्होंने पार्टी संगठन और रणनीति तय करने में दशकों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi की पत्नी हैं और राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी वाड्रा की मां हैं। 1997 में राजनीति में की थी एंट्री राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी कई वर्षों तक सक्रिय राजनीति से दूर रहीं। बाद में पार्टी नेताओं के लगातार आग्रह पर उन्होंने 1997 में सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया। 1998 में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद संभाला और लगातार 22 वर्षों तक पार्टी का नेतृत्व किया। इसके बाद 2019 में वह दोबारा कांग्रेस अध्यक्ष बनीं और तीन साल तक इस पद पर रहीं। केरल में सरकार गठन के बीच बढ़ी चिंता सोनिया गांधी की तबीयत खराब होने की खबर ऐसे समय आई है जब Kerala में कांग्रेस को बहुमत मिलने के बाद मुख्यमंत्री चयन को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में उनके स्वास्थ्य को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच चिंता बढ़ गई है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Anurag Thakur addressing media on women’s reservation bill ahead of Parliament special session
महिला आरक्षण पर सियासी घमासान: अनुराग ठाकुर का विपक्ष पर हमला, TMC पर भी साधा निशाना

  नई दिल्ली: महिला आरक्षण को लेकर संसद के विशेष सत्र से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अनुराग ठाकुर ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “महिला-विरोधी सोच” रखने वाली पार्टियां ही इस बिल का विरोध कर रही हैं। ‘महिला-विरोधी मानसिकता वाले कर रहे विरोध’ आईएएनएस से बातचीत में अनुराग ठाकुर ने कहा कि जो दल महिला आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, उनकी विचारधारा महिलाओं के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं को 33% आरक्षण देने का रास्ता साफ किया जा चुका है और अब इसे लागू करने की दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि 1971 के आधार पर सीटों का निर्धारण पहले ही हो चुका है और दक्षिण भारतीय राज्यों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला हुआ है। विपक्षी नेताओं पर सीधा निशाना भाजपा सांसद ने कई बड़े नेताओं पर सीधे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी ममता बनर्जी डीएमके और अन्य विपक्षी दल महिला आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उनकी सोच महिलाओं के हित में नहीं है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि अपने शासनकाल में वह इस बिल को पारित नहीं करा पाई। संसद सत्र में होगी अहम चर्चा संसद के विस्तारित सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधन और परिसीमन विधेयक पर चर्चा होने की संभावना है। इसका उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करना है। बंगाल चुनाव पर भी दिया बड़ा बयान अनुराग ठाकुर ने पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस की हार तय है 4 मई को सत्ता परिवर्तन होगा ममता बनर्जी अपनी उपलब्धियां गिनाने में असफल रही हैं उन्होंने ममता सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद राज्य को “भ्रष्टाचार, कमीशन और अवैध घुसपैठ” से मुक्त किया जाएगा। सियासी टकराव तेज महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे पर तीखी बहस और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Sonia Gandhi criticizes Indian government over delimitation and women reservation bill political debate in Parliament
“महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन असली मुद्दा” – सोनिया गांधी का सरकार पर हमला

Sonia Gandhi ने महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि असली मुद्दा “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” नहीं, बल्कि परिसीमन (Delimitation) है। उन्होंने Narendra Modi पर राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया। परिसीमन को बताया “खतरनाक” सोनिया गांधी ने कहा कि प्रस्तावित परिसीमन: सिर्फ गणितीय नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी न्यायसंगत होना चाहिए गलत तरीके से लागू हुआ तो यह संविधान पर असर डाल सकता है इसे जल्दबाजी में लाना “खतरनाक” हो सकता है PM मोदी की मंशा पर सवाल अपने लेख में उन्होंने आरोप लगाया कि: सरकार जाति आधारित जनगणना को टालना चाहती है संसद के विशेष सत्र में बिल लाकर विपक्ष को दबाव में डालने की कोशिश की जा रही है चुनावी माहौल (Tamil Nadu और West Bengal) के बीच यह कदम राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया महिला आरक्षण कानून पर क्या कहा? सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि: Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2023 पहले ही 2023 में पास हो चुका है इसमें लोकसभा और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण का प्रावधान है इसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होना था “30 महीने बाद फैसला क्यों बदला?” उन्होंने सवाल उठाया: सरकार को अपना रुख बदलने में 30 महीने क्यों लगे? अगर संशोधन जरूरी था, तो कुछ हफ्ते और इंतजार क्यों नहीं किया गया? सोनिया गांधी का साफ कहना है कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन और राजनीतिक रणनीति को आगे बढ़ा रही है। इस मुद्दे पर अब सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की संभावना है।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
Congress leaders including Rahul Gandhi and Priyanka Gandhi campaigning for Bengal Election 2026
Bengal Election 2026: कांग्रेस ने उतारी स्टार प्रचारकों की फौज

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए कांग्रेस ने पहले चरण के लिए 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में पार्टी के शीर्ष राष्ट्रीय नेता शामिल हैं, जो राज्य में व्यापक चुनाव प्रचार करेंगे। चेहरे जो करेंगे प्रचार कांग्रेस की स्टार लिस्ट में शामिल प्रमुख नाम: सोनिया गांधी राहुल गांधी प्रियंका गांधी वाड्रा मल्लिकार्जुन खरगे (कांग्रेस अध्यक्ष) सुखविंदर सिंह सुक्खू (हिमाचल CM) इसके अलावा कई दिग्गज नेता भी मैदान में उतरेंगे: के.सी. वेणुगोपाल शशि थरूर अशोक गहलोत सलमान खुर्शीद रणदीप सुरजेवाला कन्हैया कुमार मोहम्मद अजहरुद्दीन बंगाल के स्थानीय नेताओं को भी अहम भूमिका राज्य कांग्रेस के नेता भी प्रचार में सक्रिय रहेंगे: अधीर रंजन चौधरी दीपा दासमुंशी प्रदीप भट्टाचार्य शुभंकर सरकार (प्रदेश अध्यक्ष) ईशा खान चौधरी चुनाव की तारीखें पहला चरण: 23 अप्रैल दूसरा चरण: 29 अप्रैल मतगणना: 4 मई कुल सीटें: 294 कांग्रेस की रणनीति कांग्रेस नेता के मुताबिक: इस बार पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ रही है लक्ष्य है कि पहले चरण में सभी सीटों पर सीधे मतदाताओं तक पहुंच बनाई जाए राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी से पार्टी मजबूत मुकाबले की कोशिश में है

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
Shashi Tharoor speaking at event amid debate over India’s stance on Iran-Israel conflict
ईरान-इजरायल युद्ध पर कांग्रेस में मतभेद: शशि थरूर ने सोनिया गांधी के बयान से बनाई दूरी, सरकार की चुप्पी का किया बचाव

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की विदेश नीति पर देश की राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। Iran और Israel के बीच बढ़ते संघर्ष को लेकर जहां विपक्ष सरकार पर हमलावर है, वहीं कांग्रेस के भीतर ही इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता Sonia Gandhi ने हाल ही में भारत सरकार की ‘चुप्पी’ पर सवाल उठाते हुए इसे नैतिक जिम्मेदारी से बचना बताया था। उन्होंने ईरान की संप्रभुता और वहां हुए हमलों पर भारत की ओर से खुलकर प्रतिक्रिया न देने को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की थी। थरूर का अलग रुख, कहा-यह ‘मोरल सरेंडर’ नहीं अब इसी मुद्दे पर कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री Shashi Tharoor ने अपनी ही पार्टी से अलग रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर भारत की चुप्पी को “मोरल सरेंडर” कहना गलत है। थरूर के अनुसार, यह चुप्पी दरअसल एक “रिस्पॉन्सिबल स्टेटक्राफ्ट” यानी सोच-समझकर अपनाई गई कूटनीतिक रणनीति है, जो भावनात्मक प्रतिक्रिया के बजाय राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देती है। अंतरराष्ट्रीय कानून पर उठाए सवाल थरूर ने अपने लेख में यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ किया गया सैन्य अभियान अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कदम उन मूल्यों के खिलाफ है, जिनका भारत ऐतिहासिक रूप से समर्थन करता रहा है-जैसे शांति, आक्रामकता का विरोध और संप्रभुता का सम्मान। ‘हर बार खुलकर निंदा जरूरी नहीं’ हालांकि, इन आपत्तियों के बावजूद थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि हर परिस्थिति में सार्वजनिक रूप से निंदा करना ही एकमात्र विकल्प नहीं होता। उनका मानना है कि कूटनीति में कई बार संतुलन बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण होता है। नेहरू की नीति का दिया उदाहरण थरूर ने भारत की विदेश नीति की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए Jawaharlal Nehru की गुटनिरपेक्ष नीति का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह नीति नैतिकता से समझौता नहीं, बल्कि उस समय के वैश्विक हालात में राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका थी। आज के बहुध्रुवीय विश्व में भारत “मल्टी-अलाइनमेंट” की नीति अपना रहा है, जहां वह अलग-अलग वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलन बनाए रखते हुए अपने रणनीतिक हितों को साधता है। ऐतिहासिक उदाहरणों से समझाया रुख थरूर ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि भारत ने पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी थी- 1956 में हंगरी संकट   1968 में चेकोस्लोवाकिया   1979 में अफगानिस्तान   इन मामलों में भी भारत ने अपने रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित रुख अपनाया था। राजनीतिक बहस तेज इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह साफ है कि ईरान-इजरायल युद्ध पर न सिर्फ सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं, बल्कि विपक्ष के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज हो सकती है, खासकर जब अंतरराष्ट्रीय हालात लगातार बदल रहे हैं।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Indian Parliament session in progress amid debate on LPG shortage and suspended MPs return
संसद LIVE: निलंबित सांसदों की वापसी संभव, LPG किल्लत और अन्य मुद्दों पर गरमाएगा सदन

संसद के मौजूदा सत्र में आज का दिन अहम रहने वाला है। सोमवार को हुई सर्वदलीय बैठक के बाद संकेत मिल रहे हैं कि सदन की कार्यवाही अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रह सकती है। ओम बिरला की अध्यक्षता में हुई बैठक में आठ निलंबित सांसदों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बन गई है, जिसे आज सदन में प्रस्ताव के जरिए लागू किया जा सकता है।   निलंबित सांसदों की वापसी पर सहमति सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष की ओर से प्रस्ताव लाकर आठ सांसदों का निलंबन रद्द किया जाएगा। इससे बीते दिनों से जारी गतिरोध खत्म होने और संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने की उम्मीद है।   LPG किल्लत पर सरकार को घेरने की तैयारी हालांकि, शांति के संकेतों के बीच विपक्ष आज भी LPG की किल्लत के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति में है। आम जनता से जुड़े इस मुद्दे को लेकर सदन में तीखी बहस होने के आसार हैं।   देवेगौड़ा ने जताई चिंता इसी बीच, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर संसद के भीतर हो रहे ‘व्यवधान’ और बाहर विपक्षी प्रदर्शनों पर चिंता जताई है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया।   अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की मांग संजय सिंह ने राज्यसभा में मिडिल ईस्ट संकट के भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, व्यापार और प्रवासी भारतीयों पर प्रभाव को लेकर चर्चा की मांग उठाई है। इस मुद्दे पर विपक्ष की अन्य पार्टियां भी समर्थन में हैं। कुल मिलाकर, संसद का आज का दिन राजनीतिक बहस, सहमति और टकराव - तीनों का मिश्रण साबित हो सकता है।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0