राजनीति

Tharoor Defends India’s Silence on Iran-Israel Conflict

ईरान-इजरायल युद्ध पर कांग्रेस में मतभेद: शशि थरूर ने सोनिया गांधी के बयान से बनाई दूरी, सरकार की चुप्पी का किया बचाव

surbhi मार्च 19, 2026 0
Shashi Tharoor speaking at event amid debate over India’s stance on Iran-Israel conflict
Tharoor vs Sonia Gandhi on Iran-Israel War

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की विदेश नीति पर देश की राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। Iran और Israel के बीच बढ़ते संघर्ष को लेकर जहां विपक्ष सरकार पर हमलावर है, वहीं कांग्रेस के भीतर ही इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आ रही है।

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता Sonia Gandhi ने हाल ही में भारत सरकार की ‘चुप्पी’ पर सवाल उठाते हुए इसे नैतिक जिम्मेदारी से बचना बताया था। उन्होंने ईरान की संप्रभुता और वहां हुए हमलों पर भारत की ओर से खुलकर प्रतिक्रिया न देने को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की थी।

थरूर का अलग रुख, कहा-यह ‘मोरल सरेंडर’ नहीं

अब इसी मुद्दे पर कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री Shashi Tharoor ने अपनी ही पार्टी से अलग रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर भारत की चुप्पी को “मोरल सरेंडर” कहना गलत है।

थरूर के अनुसार, यह चुप्पी दरअसल एक “रिस्पॉन्सिबल स्टेटक्राफ्ट” यानी सोच-समझकर अपनाई गई कूटनीतिक रणनीति है, जो भावनात्मक प्रतिक्रिया के बजाय राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देती है।

अंतरराष्ट्रीय कानून पर उठाए सवाल

थरूर ने अपने लेख में यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ किया गया सैन्य अभियान अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कदम उन मूल्यों के खिलाफ है, जिनका भारत ऐतिहासिक रूप से समर्थन करता रहा है-जैसे शांति, आक्रामकता का विरोध और संप्रभुता का सम्मान।

‘हर बार खुलकर निंदा जरूरी नहीं’

हालांकि, इन आपत्तियों के बावजूद थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि हर परिस्थिति में सार्वजनिक रूप से निंदा करना ही एकमात्र विकल्प नहीं होता। उनका मानना है कि कूटनीति में कई बार संतुलन बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण होता है।

नेहरू की नीति का दिया उदाहरण

थरूर ने भारत की विदेश नीति की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए Jawaharlal Nehru की गुटनिरपेक्ष नीति का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह नीति नैतिकता से समझौता नहीं, बल्कि उस समय के वैश्विक हालात में राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका थी।

आज के बहुध्रुवीय विश्व में भारत “मल्टी-अलाइनमेंट” की नीति अपना रहा है, जहां वह अलग-अलग वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलन बनाए रखते हुए अपने रणनीतिक हितों को साधता है।

ऐतिहासिक उदाहरणों से समझाया रुख

थरूर ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि भारत ने पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी थी-

  • 1956 में हंगरी संकट
     
  • 1968 में चेकोस्लोवाकिया
     
  • 1979 में अफगानिस्तान
     

इन मामलों में भी भारत ने अपने रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित रुख अपनाया था।

राजनीतिक बहस तेज

इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह साफ है कि ईरान-इजरायल युद्ध पर न सिर्फ सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं, बल्कि विपक्ष के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज हो सकती है, खासकर जब अंतरराष्ट्रीय हालात लगातार बदल रहे हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने पर शत्रुघ्न सिन्हा का बड़ा बयान

पटना, एजेंसियां। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनाव मैदान में उतरने पर राजनीति तेज हो गई है। इस बीच आसनसोल से सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने को बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति के लिए बड़ा घटनाक्रम बताया है।   'राजनीतिक गलियारों में नई हलचल' शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कि प्रशांत किशोर के चुनावी मैदान में उतरने से बिहार की राजनीति के साथ-साथ देशभर के राजनीतिक गलियारों और आम जनता के बीच नई हलचल पैदा हुई है। उन्होंने प्रशांत किशोर को दूरदर्शी, लोकप्रिय और चर्चित व्यक्तित्व बताते हुए उनके चुनाव लड़ने को महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम बताया।   युवाओं से समर्थन की अपील अपने संदेश में शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि एक 'बिहारी बाबू' होने के नाते उन्हें यह राजनीतिक घटनाक्रम बेहद रोचक और प्रभावशाली लग रहा है। उन्होंने लोगों, खासकर युवाओं से जाति, धर्म और दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर सोचने और एकजुट होने की अपील की। उन्होंने अपने संदेश का समापन 'जय बिहार, जय हिंद' के साथ किया।   बांकीपुर सीट से जुड़ा है सिन्हा परिवार का भी रिश्ता बांकीपुर विधानसभा सीट का संबंध शत्रुघ्न सिन्हा के परिवार से भी रहा है। वर्ष 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उनके बेटे लव सिन्हा ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में इसी सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि उन्हें भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नितिन नवीन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।   अब प्रशांत किशोर के चुनाव मैदान में उतरने से बांकीपुर उपचुनाव चर्चा का केंद्र बन गया है। राजनीतिक दलों की नजर इस सीट पर टिकी हुई है और माना जा रहा है कि इस चुनाव के नतीजे बिहार की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं।

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कोलकाता: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में एक विशेष समिति का गठन किया गया है। इसके साथ ही नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत पात्र लोगों को नागरिकता देने की प्रक्रिया को तेज करने का भी आश्वासन दिया। अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान जो वादे किए थे, उन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में "सोनार बांग्ला" के निर्माण की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। UCC लागू करने के लिए बनेगी विशेष समिति गृह मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता लागू करने के उद्देश्य से एक विशेष समिति का गठन किया गया है। उनके अनुसार यह समिति राज्य में UCC लागू करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगी और आगे की प्रक्रिया तय करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने संकल्प पत्र में किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी दिशा में यह कदम उठाया गया है। CAA के तहत नागरिकता प्रक्रिया होगी तेज अमित शाह ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के तहत पात्र शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन लोगों को कानून के तहत नागरिकता मिलने का अधिकार है, उन्हें जल्द इसका लाभ मिलेगा। अवैध घुसपैठ पर सख्त रुख अपने संबोधन में गृह मंत्री ने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सरकार हर अवैध घुसपैठिए की पहचान करेगी और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ अवैध घुसपैठ रोकने के लिए केंद्र सरकार लगातार कदम उठा रही है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा की रखी आधारशिला कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 फीट ऊंची प्रस्तावित प्रतिमा की आधारशिला भी रखी। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत को लेकर दिया गया योगदान देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। राजनीतिक संदेश भी दिया अपने संबोधन में अमित शाह ने राष्ट्रीय एकता, नागरिकता, कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपने सभी चुनावी संकल्पों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और पश्चिम बंगाल में भी विकास तथा सुशासन को प्राथमिकता दी जाएगी।  

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TMC MP Abhishek Banerjee faces police scrutiny over allegations that security personnel were seen hanging outside his moving vehicle in Kolkata.
गाड़ी पर सुरक्षाकर्मियों के लटकने का मामला: अभिषेक बनर्जी के जवाब से संतुष्ट नहीं कोलकाता पुलिस, फिर भेजेगी नोटिस

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उनकी गाड़ी के बाहर सुरक्षाकर्मियों के लटककर सफर करने के कथित मामले में कोलकाता पुलिस उनके जवाब से संतुष्ट नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस अब उन्हें एक नया नोटिस जारी करने की तैयारी कर रही है, जिसमें मांगे गए दस्तावेजों का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा। पुलिस ने मांगे थे जरूरी दस्तावेज कालीघाट थाने की ओर से पहले जारी नोटिस में अभिषेक बनर्जी से मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के कथित उल्लंघन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया था। उन्हें शनिवार तक जवाब देने की समय-सीमा दी गई थी। हालांकि निर्धारित समय बीतने के बाद अभिषेक बनर्जी ने अपने प्रतिनिधि के माध्यम से कालीघाट थाने में कुछ दस्तावेज जमा कराए। जवाब को पुलिस ने बताया अधूरा पुलिस सूत्रों के अनुसार, अभिषेक बनर्जी की ओर से जमा कराए गए दस्तावेजों में वह सभी जानकारियां उपलब्ध नहीं कराई गईं, जिनकी मांग की गई थी। इसी वजह से जांच अधिकारी उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। सूत्रों का कहना है कि अब नया नोटिस जारी कर स्पष्ट रूप से उन दस्तावेजों और सूचनाओं का उल्लेख किया जाएगा, जो अब तक पुलिस को उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। क्या है पूरा मामला? यह मामला बागुईहाटी निवासी राजीव सरकार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी की गाड़ी पर दो सुरक्षाकर्मी खतरनाक तरीके से बाहर लटककर यात्रा कर रहे थे, जो मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है। शिकायत में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 123 का हवाला दिया गया है, जिसमें चलती गाड़ी से लटककर यात्रा करने पर रोक है। साथ ही धारा 184का भी उल्लेख किया गया है, जो खतरनाक तरीके से वाहन चलाने या यात्रा करने को दंडनीय अपराध मानती है। पुलिस ने मांगी थीं ये जानकारियां जांच के दौरान पुलिस ने अभिषेक बनर्जी से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी थीं, जिनमें शामिल हैं— वाहन खरीदने की तारीख। वाहन चालक (ड्राइवर) का नाम, पता और पहचान। गाड़ी के बाहर लटककर यात्रा करने वाले सुरक्षाकर्मियों की पहचान। घटना से जुड़े अन्य आवश्यक दस्तावेज। पुलिस का दावा है कि इन जानकारियों में से कई अब भी उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। जांच जारी कोलकाता पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी तथ्यों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो पुलिस आगे भी कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर सकती है। गौरतलब है कि यह मामला अभी जांच के चरण में है और पुलिस की ओर से किसी भी प्रकार की कानूनी जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। वहीं, अभिषेक बनर्जी की ओर से भी इस मामले पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

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