Iran Israel War

Israeli PM Benjamin Netanyahu addressing media on ongoing Iran-Israel war and military progress update
ईरान-इजरायल युद्ध कब रुकेगा? नेतन्याहू का बड़ा बयान-‘आधे से ज्यादा लक्ष्य हासिल, फिलहाल जारी रहेगी जंग’

Iran और Israel के बीच जारी युद्ध को एक महीना पूरा हो चुका है, लेकिन संघर्ष थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि जंग अभी खत्म होने वाली नहीं है। ‘आधे से ज्यादा सैन्य लक्ष्य हासिल’ नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई अपने “आधे से ज्यादा लक्ष्य” हासिल कर चुकी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रगति मिशन के लिहाज से है, समयसीमा के अनुसार नहीं। उन्होंने युद्ध समाप्त करने की कोई तय समय-सीमा बताने से इनकार किया, जिससे संकेत मिलता है कि यह संघर्ष अभी जारी रहेगा। क्या है इजरायल की रणनीति? नेतन्याहू के अनुसार, मौजूदा ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करना है। इसमें उसकी मिसाइल क्षमता, हथियार उद्योग और परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाना शामिल है। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान में ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों और संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया गया है। ‘ईरानी शासन अंदर से ढह सकता है’ इजरायली प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि Iran का मौजूदा शासन अंदर से कमजोर हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सीधे तौर पर उनका घोषित लक्ष्य नहीं है, बल्कि मौजूदा फोकस सैन्य क्षमताओं को खत्म करने पर है। अमेरिका का रुख और दबाव इस युद्ध में United States भी इजरायल के साथ खड़ा नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले कहा था कि यह जंग 4 से 6 हफ्तों तक चल सकती है। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने संकेत दिया है कि यह संघर्ष कुछ और हफ्तों तक जारी रह सकता है, क्योंकि इससे तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। बढ़ती चिंता: वैश्विक असर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है-खासकर ऊर्जा बाजार, कूटनीतिक रिश्तों और क्षेत्रीय स्थिरता पर।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
US-Israel Iran war day 25 escalation with strikes, Gulf tension and Strait of Hormuz crisis
US-Israel vs Iran War Day 25: बातचीत के दावे पर टकराव, हमले जारी; खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव

अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू की गई जंग मंगलवार को 25वें दिन में प्रवेश कर गई। इस बीच शांति वार्ता को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच विरोधाभासी दावे सामने आए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हमले लगातार जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत चल रही है और बड़ा समझौता हो सकता है। हालांकि, तेहरान ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे “झूठ” और “प्रोपेगेंडा” बताया है। ईरान बनाम अमेरिका: बातचीत या रणनीति? ट्रंप का दावा: अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी, जल्द समझौते के संकेत ईरान का जवाब: बातचीत से इनकार, कहा- अमेरिका समय खरीदने की कोशिश कर रहा डेडलाइन: होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए अमेरिका ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, जिसे अब 5 दिन बढ़ाया गया ट्रंप का कदम: ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले 5 दिन के लिए टाले विशेषज्ञों के मुताबिक, बढ़ती महंगाई और घरेलू दबाव के कारण ट्रंप इस युद्ध से निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं। ईरान के अंदर क्या हो रहा है? तेहरान समेत कई शहरों में सरकार के समर्थन में रैलियां ईरान ने साफ किया- होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर रुख नहीं बदलेगा पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति से बात कर शांति की अपील की खाड़ी देशों में बढ़ा खतरा कुवैत: एक ही रात में 7 बार मिसाइल/ड्रोन अलर्ट सऊदी अरब: 20 ड्रोन हमले नाकाम बहरीन: लगातार चेतावनी सायरन ब्रिटेन: मिडिल ईस्ट में एयर डिफेंस सिस्टम भेजे खाड़ी देशों में सरकारें और आम लोग तनाव कम करने की अपील कर रहे हैं। इजराइल पर हमले और सिस्टम फेल ईरान ने इजराइल के उत्तरी हिस्से पर मिसाइल दागीं “डेविड्स स्लिंग” डिफेंस सिस्टम में खराबी, 2 मिसाइलें टकराईं हमले में कई लोग घायल इजराइली पीएम नेतन्याहू ने ट्रंप से बातचीत की और कहा कि सैन्य बढ़त को समझौते में बदला जा सकता है। लेबनान, इराक और सीरिया में जंग का विस्तार लेबनान: बेरूत के उपनगरों पर इजराइली हमला, हिज़्बुल्लाह को निशाना इराक: अमेरिका ने ईरान समर्थित गुट पर एयरस्ट्राइक की सीरिया: सैन्य बेस पर मिसाइल हमला विशेषज्ञों का कहना है कि इराक अब “सेकेंडरी बैटलफील्ड” बन गया है। होर्मुज स्ट्रेट बंद, जिससे तेल सप्लाई पर बड़ा असर दक्षिण कोरिया: 70% से ज्यादा तेल मिडिल ईस्ट से, संकट गहराया जापान: 95% तेल इसी रास्ते से, इमरजेंसी जैसे हालात UAE: इसे “आर्थिक आतंकवाद” करार दिया तेल की कीमतों में उछाल से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। अमेरिका के अंदर भी हलचल व्हाइट हाउस ने कहा- बातचीत को लेकर कोई फाइनल फैसला नहीं पेंटागन ने मीडिया एक्सेस में बदलाव किया मॉरिटानिया में अमेरिकी दूतावास ने आतंकी खतरे का अलर्ट जारी किया

surbhi मार्च 24, 2026 0
US and Israel strikes on Iran energy sites and Hezbollah targets in Beirut escalate Middle East conflict
Iran-Israel War: ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर US-इज़राइल के हमले, बेरूत में हिज़्बुल्लाह पर स्ट्राइक तेज

मध्य-पूर्व में जारी ईरान-इज़राइल युद्ध लगातार उग्र होता जा रहा है। ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाते हुए हमले किए हैं, जबकि लेबनान की राजधानी बेरूत में भी हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर बड़े स्तर पर स्ट्राइक की गई है। ट्रंप का दावा: ईरान के साथ “बहुत अच्छी” बातचीत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनकी एक अज्ञात ईरानी अधिकारी के साथ “बहुत अच्छी बातचीत” हुई है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने हाल ही में प्रस्तावित नए हमलों को अस्थायी रूप से टाल दिया है। हालांकि, इन दावों पर अभी तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बेरूत में इज़राइल के हमले, नागरिकों को पहले चेतावनी मंगलवार सुबह बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में कई धमाके सुने गए। यह इलाका हिज़्बुल्लाह का मजबूत गढ़ माना जाता है। इज़राइली सेना ने कहा कि वह “हिज़्बुल्लाह के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रही है” और हमले से पहले नागरिकों को क्षेत्र खाली करने की चेतावनी दी गई थी। इज़राइली सेना का सख्त संदेश इज़राइली सेना के अरबी प्रवक्ता ने कहा: “हिज़्बुल्लाह के खिलाफ लड़ाई अभी शुरू ही हुई है।” इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में सैन्य कार्रवाई और तेज हो सकती है। दक्षिणी लेबनान में कार्रवाई, दो लड़ाके गिरफ्तार इज़राइली सेना ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के दो सदस्यों को हिरासत में लिया है। इसे क्षेत्र में बढ़ती जमीनी कार्रवाई का संकेत माना जा रहा है। ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के ऊर्जा से जुड़े अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इससे क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक तेल बाजार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। युद्ध का दायरा बढ़ा, कई मोर्चों पर तनाव मौजूदा हालात में यह संघर्ष अब सिर्फ ईरान और इज़राइल तक सीमित नहीं रहा- लेबनान में हिज़्बुल्लाह के साथ टकराव तेज अमेरिका की सैन्य और कूटनीतिक भूमिका बढ़ी हमलों के साथ-साथ बातचीत के संकेत भी

surbhi मार्च 24, 2026 0
Iran war tensions with Israel and global concerns over escalating Middle East conflict
ईरान का बड़ा बयान: मुआवजा मिलने तक जारी रहेगी जंग, प्रतिबंध हटाने और अमेरिकी दखल न देने की मांग

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि वह मौजूदा संघर्ष से पीछे हटने वाला नहीं है। ईरान ने कहा है कि जब तक उसे युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिलता, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। ईरानी सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसिन रजेई ने कहा कि ईरान की शर्तें बिल्कुल स्पष्ट हैं- सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं और अमेरिका यह गारंटी दे कि भविष्य में वह किसी भी तरह की दखलंदाजी नहीं करेगा। रजेई ने टीवी बयान में कहा कि ईरानी सेना पूरी ताकत से ऑपरेशन चला रही है और नया नेतृत्व हालात को मजबूती से संभाल रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह युद्ध एक हफ्ते में खत्म हो सकता था, लेकिन इजराइल के रुख की वजह से संघर्ष लंबा खिंच गया। इजराइल पर लगातार मिसाइल हमले इजराइल की सेना (IDF) के मुताबिक, ईरान ने एक बार फिर बैलिस्टिक मिसाइल दागी। हालांकि ताजा हमले में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और मिसाइल खुले इलाके में गिरी। तेल अवीव, पेटाह टिक्वा और आसपास के इलाकों में सायरन बजाए गए, जिसके बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए। बाद में इजराइल की होम फ्रंट कमांड ने खतरा टलने की पुष्टि की। अमेरिका में मतभेद, ट्रम्प के बयान चर्चा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उनके रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के सबसे बड़े समर्थक रहे हैं। उनका कहना है कि ईरान की मिसाइल, ड्रोन और नौसेना क्षमता को खत्म करना जरूरी है। हालांकि, अमेरिकी सरकार के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद भी सामने आए हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस फैसले से पूरी तरह सहमत नहीं बताए जा रहे, जबकि कुछ अधिकारियों ने विरोध में इस्तीफा भी दिया है। वैश्विक असर: तेल संकट और कूटनीतिक हलचल तेज ईरान-इजराइल तनाव का असर पूरी दुनिया पर दिख रहा है। जापान ने तेल संकट को देखते हुए अपने भंडार जारी करने का फैसला लिया है। दक्षिण कोरिया ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर को लेकर चिंता जताई है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। जमीनी हालात: हमले, मौतें और राहत कार्य जारी तेहरान में एक हमले में एक प्रोफेसर और उनके दो बच्चों की मौत हो गई, जिससे हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं, मलबे में फंसे एक बच्चे को सुरक्षित निकालने का वीडियो भी सामने आया है।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Shashi Tharoor speaking at event amid debate over India’s stance on Iran-Israel conflict
ईरान-इजरायल युद्ध पर कांग्रेस में मतभेद: शशि थरूर ने सोनिया गांधी के बयान से बनाई दूरी, सरकार की चुप्पी का किया बचाव

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की विदेश नीति पर देश की राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। Iran और Israel के बीच बढ़ते संघर्ष को लेकर जहां विपक्ष सरकार पर हमलावर है, वहीं कांग्रेस के भीतर ही इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता Sonia Gandhi ने हाल ही में भारत सरकार की ‘चुप्पी’ पर सवाल उठाते हुए इसे नैतिक जिम्मेदारी से बचना बताया था। उन्होंने ईरान की संप्रभुता और वहां हुए हमलों पर भारत की ओर से खुलकर प्रतिक्रिया न देने को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की थी। थरूर का अलग रुख, कहा-यह ‘मोरल सरेंडर’ नहीं अब इसी मुद्दे पर कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री Shashi Tharoor ने अपनी ही पार्टी से अलग रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर भारत की चुप्पी को “मोरल सरेंडर” कहना गलत है। थरूर के अनुसार, यह चुप्पी दरअसल एक “रिस्पॉन्सिबल स्टेटक्राफ्ट” यानी सोच-समझकर अपनाई गई कूटनीतिक रणनीति है, जो भावनात्मक प्रतिक्रिया के बजाय राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देती है। अंतरराष्ट्रीय कानून पर उठाए सवाल थरूर ने अपने लेख में यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ किया गया सैन्य अभियान अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कदम उन मूल्यों के खिलाफ है, जिनका भारत ऐतिहासिक रूप से समर्थन करता रहा है-जैसे शांति, आक्रामकता का विरोध और संप्रभुता का सम्मान। ‘हर बार खुलकर निंदा जरूरी नहीं’ हालांकि, इन आपत्तियों के बावजूद थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि हर परिस्थिति में सार्वजनिक रूप से निंदा करना ही एकमात्र विकल्प नहीं होता। उनका मानना है कि कूटनीति में कई बार संतुलन बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण होता है। नेहरू की नीति का दिया उदाहरण थरूर ने भारत की विदेश नीति की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए Jawaharlal Nehru की गुटनिरपेक्ष नीति का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह नीति नैतिकता से समझौता नहीं, बल्कि उस समय के वैश्विक हालात में राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका थी। आज के बहुध्रुवीय विश्व में भारत “मल्टी-अलाइनमेंट” की नीति अपना रहा है, जहां वह अलग-अलग वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलन बनाए रखते हुए अपने रणनीतिक हितों को साधता है। ऐतिहासिक उदाहरणों से समझाया रुख थरूर ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि भारत ने पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी थी- 1956 में हंगरी संकट   1968 में चेकोस्लोवाकिया   1979 में अफगानिस्तान   इन मामलों में भी भारत ने अपने रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित रुख अपनाया था। राजनीतिक बहस तेज इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह साफ है कि ईरान-इजरायल युद्ध पर न सिर्फ सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं, बल्कि विपक्ष के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज हो सकती है, खासकर जब अंतरराष्ट्रीय हालात लगातार बदल रहे हैं।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Iranian missile strikes and explosions after retaliatory attack on Israel amid escalating Middle East war
ईरान-इजरायल युद्ध: मातम के बाद ईरान का पलटवार, क्लस्टर बम हमलों से बढ़ा तनाव

मध्य-पूर्व में जारी भीषण संघर्ष अब और खतरनाक मोड़ ले चुका है। ईरान और इजरायल के बीच चल रही जंग 19वें दिन में प्रवेश कर चुकी है, और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। ईरान ने अपने शीर्ष नेताओं की मौत के बाद पहले शोक मनाया, लेकिन अब वह पूरी ताकत से जवाबी कार्रवाई में जुट गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने इजरायल पर क्लस्टर बम और मल्टी-वॉरहेड मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए हैं। नेताओं की मौत के बाद बदले की कार्रवाई तेहरान में हाल ही में हुए इजरायली हमले में ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी और बसीज बलों के कमांडर गुलारजा सुलेमानी की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे तेहरान में शोक की लहर दौड़ गई। लेकिन कुछ ही समय में ईरान ने बदले की कसम खाते हुए इजरायल पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू कर दिए। क्लस्टर बम और मिसाइलों से हमला ईरान ने अपने हमलों में क्लस्टर बम और मल्टी वॉरहेड मिसाइलों का इस्तेमाल किया है, जिन्हें अत्यधिक विनाशकारी माना जाता है। इन हथियारों के इस्तेमाल से नागरिक इलाकों में भारी नुकसान की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले युद्ध को और व्यापक और खतरनाक बना सकते हैं। क्षेत्रीय तनाव: कई देशों में हमले और धमाके संघर्ष का असर अब पूरे मध्य-पूर्व में फैलता नजर आ रहा है: सऊदी अरब में प्रिंस सुल्तान एयरबेस के पास बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्ट किया गया   दुबई और दोहा में धमाकों की खबरें   बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला   लेबनान में हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच हिंसक झड़पें   इन घटनाओं से साफ है कि यह युद्ध अब एक बड़े क्षेत्रीय संकट में बदलता जा रहा है। अमेरिका और NATO के बीच मतभेद इस युद्ध में अमेरिका को अपेक्षित अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिल पा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NATO देशों पर सहयोग न करने को लेकर नाराजगी जताई है। इस बीच तेल की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, जो वैश्विक बाजार में अनिश्चितता को दर्शाता है। बढ़ती मौतें और मानवीय संकट संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत के अनुसार, अमेरिका-इजरायल हमलों में 1300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कुछ स्वतंत्र रिपोर्ट्स में यह आंकड़ा 1800 के पार बताया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के स्तर पर भी इस बढ़ते मानवीय संकट को लेकर चिंता जताई जा रही है। कूटनीतिक प्रयासों को झटका इसी बीच खबर है कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका के साथ किसी भी समझौते से इनकार कर दिया है। दो देशों द्वारा मध्यस्थता के प्रयास भी फिलहाल विफल होते नजर आ रहे हैं, जिससे युद्ध के जल्द खत्म होने की संभावना कम हो गई है। क्या और भड़केगा युद्ध? ईरान की आक्रामक प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय विस्तार के संकेत बताते हैं कि यह संघर्ष अब और लंबा और खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह युद्ध पूरे मध्य-पूर्व को अपनी चपेट में ले सकता है।  

surbhi मार्च 18, 2026 0
Drone attack near Dubai International Airport amid Iran-Israel tensions and rising Strait of Hormuz security concerns.
Iran War Update: Hormuz को लेकर ट्रंप का दबाव, दुबई एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमला

  मध्य-पूर्व में जारी जंग के बीच हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। Donald Trump ने अपने सहयोगी देशों से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को सुरक्षित रखने के लिए मदद मांगी है। दुनिया के लगभग 20% तेल की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। इधर United States और Israel ने Iran के कई शहरों-Tehran, Hamadan और Isfahan-पर हमले जारी रखे हैं। जवाब में ईरान भी मिसाइल और ड्रोन से जवाबी कार्रवाई कर रहा है।   दुबई एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमला Dubai International Airport के पास ड्रोन से जुड़े एक हमले के बाद ईंधन टैंक में आग लग गई। फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पा लिया है।   सुरक्षा के तौर पर कुछ समय के लिए उड़ानों को रोक दिया गया और कई फ्लाइट्स को Al Maktoum International Airport डायवर्ट किया गया।   ईरान-इजराइल हमले जारी इजराइल ने तेहरान पर नई एयर स्ट्राइक की, कई जगह धुएं के गुबार देखे गए।   अब तक लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और करीब 1500 नागरिकों की मौत की खबर है।   ईरान ने कहा कि यह “थोपी गई जंग” है।   खाड़ी देशों में हाई अलर्ट Saudi Arabia ने पूर्वी क्षेत्र में 23 ड्रोन मार गिराने का दावा किया।   Bahrain, Qatar और Kuwait में भी ड्रोन और मिसाइल अलर्ट जारी किए गए।   तेल बाजार पर असर जंग के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क Brent Oil 106 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।   वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है।   NATO सहयोगियों पर ट्रंप का दबाव NATO देशों से ट्रंप ने कहा कि अगर वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित रखने में मदद नहीं करते तो गठबंधन का भविष्य “खराब” हो सकता है।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
Families in Gaya village worried as relatives working in Middle East remain amid rising Iran–Israel tensions
मध्य-पूर्व तनाव की गूंज गया तक: बहेरा गांव के कई लोग विदेश में फंसे, ईद से पहले परिवारों की बढ़ी चिंता

  मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब बिहार तक महसूस किया जा रहा है। Gaya जिले के बहेरा गांव में इन दिनों डर और बेचैनी का माहौल है। गांव के एक दर्जन से अधिक लोग काम के सिलसिले में विदेश गए हुए हैं और क्षेत्र में जारी Iran–Israel युद्ध के कारण उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है।   मुस्लिम टोला में चिंता और दुआओं का माहौल डोभी प्रखंड के बहेरा गांव के मुस्लिम टोला में इन दिनों रमजान और आने वाली ईद के बीच खुशी की जगह चिंता का माहौल है। गांव के कई लोग रोज़गार की तलाश में खाड़ी देशों और अन्य देशों में काम करते हैं, लेकिन युद्ध जैसे हालात की खबरों से परिवारों की रातों की नींद उड़ गई है। हर घर में बस एक ही दुआ की जा रही है कि विदेश में गए लोग सुरक्षित रहें और जल्द घर लौट आएं।   अलग-अलग देशों में फंसे गांव के लोग गांव के करीब 12 से अधिक लोग Saudi Arabia, Dubai, Qatar और Russia में काम कर रहे हैं। सऊदी अरब में: ताहिर हुसैन, सजमा खातुन, शाहिद अंसारी और अशरफ दुबई में: कमर इकबाल, एकलाख, नौशाद और दानिश कतर में: शालुक और शाहरुख रूस में: एनाम, शेरु, अदनान और जिशान परिजनों का कहना है कि जब भी फोन नहीं लगता या नेटवर्क की समस्या होती है, तो परिवार के लोगों की चिंता और बढ़ जाती है।   एक कॉल न आए तो बढ़ जाती है बेचैनी गांव के लोगों के अनुसार, अगर एक दिन भी विदेश में काम कर रहे परिजनों से फोन पर बात नहीं हो पाती है तो घरों में डर का माहौल बन जाता है। कई बार नेटवर्क समस्या या फोन बंद होने से परिवार के लोग घबरा जाते हैं और तरह-तरह की आशंकाएं होने लगती हैं।   ईद की खुशियां फीकी रमजान के अंतिम दिनों में जहां आमतौर पर गांव में ईद की तैयारियां होती हैं, वहीं इस बार बहेरा गांव में माहौल अलग है। परिवारों का कहना है कि जब तक उनके अपने सुरक्षित नहीं लौटते, तब तक ईद की खुशी अधूरी ही रहेगी। गांव के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि हालात जल्द सामान्य हों और विदेश में फंसे उनके परिजन सुरक्षित अपने घर लौट सकें।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
Iran War Live: 12वें दिन में भी नहीं थमा संघर्ष, हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा खतरा; पूरे पश्चिम एशिया में बढ़ी अस्थिरता

  ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण सैन्य टकराव अब 12वें दिन में प्रवेश कर चुका है। बीते 11 दिनों में यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता का कारण बन गया है। लगातार हवाई हमलों, मिसाइल हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाई के बीच क्षेत्र में तनाव चरम पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल इस युद्ध का कोई स्पष्ट समाधान नजर नहीं आ रहा है, लेकिन इसके लंबे समय तक खिंचने से वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। रात भर पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में एयर डिफेंस सायरन बजते रहे और मिसाइलों के दागे जाने की खबरें सामने आती रहीं। इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सहयोगी देशों पर हमले तेज कर दिए हैं।   ईरान का बड़ा सैन्य अभियान, इजरायल के दावे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अपने सैन्य अभियान की 35वीं लहर शुरू कर दी है। इस चरण में मध्य-पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों और इजरायल के मध्य क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई उसके खिलाफ हो रहे हमलों का जवाब है। दूसरी ओर, इजरायली सेना का दावा है कि उसने तेहरान में ईरानी सरकार से जुड़े कई अहम ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा हालात उनके लिए एक ऐतिहासिक अवसर हो सकते हैं। उन्होंने ईरानियों से अपील करते हुए कहा कि वे मौजूदा शासन के खिलाफ आवाज उठाकर अपनी स्वतंत्रता की दिशा में कदम बढ़ाएं।   हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव इस युद्ध के बीच सबसे बड़ी चिंता का विषय हॉर्मुज जलडमरूमध्य बन गया है। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। यदि यह मार्ग बाधित होता है तो दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ सकती है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने इस क्षेत्र के आसपास ईरान के 16 नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया है। इन जहाजों में कुछ ऐसे पोत भी शामिल थे जिनका इस्तेमाल समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने के लिए किया जा सकता था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति मार्ग को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से की गई। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ईरान इस जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहा था, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता था।   बढ़ता मानवीय संकट संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत के अनुसार, युद्ध की शुरुआत से अब तक अमेरिका और इजरायल के हमलों में 1300 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है। कई शहरों में भारी तबाही और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, 28 फरवरी को दक्षिणी ईरान में एक प्राथमिक स्कूल पर हुए हमले के बाद मिले मिसाइल के अवशेष अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने स्वीकार किया है कि ईरान की जवाबी कार्रवाई में लगभग 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं। इनमें से 8 सैनिकों की हालत गंभीर बताई जा रही है।   लेबनान और खाड़ी देशों तक फैला संघर्ष यह युद्ध अब धीरे-धीरे पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में लेता नजर आ रहा है। लेबनान की राजधानी बेरूत के दहिया इलाके में इजरायल ने हवाई हमले किए हैं। यह इलाका ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह का मजबूत गढ़ माना जाता है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इन हमलों में कम से कम 95 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं हिज्बुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए एक ही दिन में इजरायल पर 30 हमले करने का दावा किया है। खाड़ी देशों में भी सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। बहरीन ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसने 106 मिसाइल और 176 ड्रोन मार गिराए हैं।   कतर ने अपने क्षेत्र में 7 मिसाइल हमलों की पुष्टि की है।   कुवैत ने अपने हवाई क्षेत्र में 5 ड्रोन के प्रवेश की जानकारी दी है।   सऊदी अरब ने 4 ड्रोन और 7 बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने का दावा किया है।   वहीं संयुक्त अरब अमीरात का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद से उसके खिलाफ 1475 ड्रोन और 260 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी जा चुकी हैं।   वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ता खतरा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और लंबा खिंचता है या हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति बाधित होती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ऊर्जा संकट और वैश्विक व्यापार में बाधा जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। कुल मिलाकर, ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी यह टकराव अब एक क्षेत्रीय संघर्ष से आगे बढ़कर वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास इस संकट को शांत कर पाएंगे या यह युद्ध और व्यापक रूप ले सकता है।  

surbhi मार्च 12, 2026 0
Rising Iran Israel conflict raises fears over Hormuz Strait oil supply
Iran-US-Israel War: ‘हॉर्मुज से एक लीटर तेल भी नहीं जाएगा’, ईरान की चेतावनी; रूस ने भी जताई चिंता

  मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब और गंभीर होता जा रहा है। Iran और Israel के बीच चल रहे संघर्ष का 11वां दिन है, लेकिन हालात शांत होने के बजाय और ज्यादा तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ गई है, जबकि इस युद्ध का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी साफ दिखाई देने लगा है। इस बीच Iran ने एक बड़ा बयान देते हुए चेतावनी दी है कि अगर तनाव इसी तरह जारी रहा तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति पूरी तरह रोक दी जाएगी। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि “हॉर्मुज से एक लीटर तेल भी नहीं जाने दिया जाएगा।”   तेहरान में धमाके, ईरान का जवाबी हमला रिपोर्टों के मुताबिक ईरान की राजधानी तेहरान में कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इसके जवाब में ईरान ने भी इजराइल की ओर मिसाइलें दागने का दावा किया है। यह हमला उस समय हुआ जब हाल ही में देश में नेतृत्व परिवर्तन के बाद Mojtaba Khamenei को नया सुप्रीम लीडर बनाए जाने की खबर सामने आई। वह पूर्व सुप्रीम लीडर Ali Khamenei के बेटे हैं। दूसरी ओर इजराइली सेना ने कहा कि उसने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए जवाबी हमले किए हैं। इनमें मिसाइल लॉन्च साइट्स और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कमांड सेंटर शामिल बताए गए हैं।   लेबनान और कतर तक पहुंचा तनाव संघर्ष का असर अब पड़ोसी देशों तक भी फैलता दिख रहा है। Lebanon की राजधानी क्षेत्र में भी तनाव बढ़ गया है, जहां इजराइल ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों पर हवाई हमले किए। इन इलाकों को Hezbollah से जुड़े ठिकानों के रूप में देखा जाता है। वहीं Qatar की राजधानी दोहा में भी धमाकों की खबरें सामने आईं। कतर के अधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी और तस्वीरें फैलाने के आरोप में 300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। मानवाधिकार संगठन Human Rights Watch ने आरोप लगाया है कि दक्षिणी लेबनान के रिहायशी इलाकों में इजराइल द्वारा व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन माना जाता है।   वैश्विक बाजारों पर असर इस युद्ध का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ रहा है। तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। वहीं यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी तेज उछाल देखा गया है। तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के चलते एशिया और यूरोप के कई प्रमुख शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है।   खाड़ी देशों में भी बढ़ी सतर्कता इस संघर्ष के बीच Saudi Arabia ने बताया कि उसने शायबह तेल क्षेत्र की ओर बढ़ रहे एक ड्रोन को मार गिराया। वहीं Bahrain ने भी ईरानी हमलों के बाद अपने ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी है।   ट्रंप-पुतिन की बातचीत इस बीच युद्ध को लेकर कूटनीतिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। Donald Trump और Vladimir Putin के बीच करीब एक घंटे तक फोन पर बातचीत हुई। रूस की ओर से इस युद्ध को रोकने के लिए कुछ संभावित प्रस्तावों पर चर्चा की गई और साथ ही मिडिल ईस्ट में बढ़ते ऊर्जा संकट को लेकर भी चेतावनी दी गई। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि युद्ध के जल्द खत्म होने के संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं। लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक बयानबाजी के बीच पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में इस संघर्ष का कोई राजनीतिक या कूटनीतिक समाधान निकल पाएगा।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
Missiles over Middle East conflict zone highlighting debate on war crimes and international law violations
क्या होता है वॉर क्राइम? मिडिल ईस्ट की जंग में उठे बड़े सवाल, क्या कभी नेताओं को मिलती है इसकी सजा

  मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव-जहां Iran, Israel और United States आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं-ने दुनिया भर में एक अहम बहस को जन्म दे दिया है। लगातार हो रहे मिसाइल हमलों और नागरिकों की मौतों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या युद्ध में भी कुछ नियम होते हैं और अगर इन नियमों का उल्लंघन होता है तो उसे अंतरराष्ट्रीय कानून कैसे देखता है। इसी संदर्भ में ‘वॉर क्राइम’ यानी युद्ध अपराध की चर्चा तेज हो गई है।   क्या होता है वॉर क्राइम? सरल शब्दों में समझें तो युद्ध के दौरान किए गए ऐसे गंभीर अपराध, जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के नियमों का उल्लंघन करते हैं, उन्हें वॉर क्राइम कहा जाता है। युद्ध में सैनिक एक-दूसरे के खिलाफ लड़ सकते हैं, लेकिन जानबूझकर आम नागरिकों, अस्पतालों, स्कूलों, धार्मिक स्थलों या राहत शिविरों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपराध माना जाता है। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध की स्थिति में भी मानवता और बुनियादी अधिकारों की रक्षा की जाए।   युद्ध के नियम कहां से आए दुनिया ने दो विनाशकारी विश्व युद्धों के बाद यह महसूस किया कि युद्ध के दौरान भी कुछ मानवीय सीमाएं तय होना जरूरी हैं। इसी सोच के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Geneva Conventions बनाए गए। इन समझौतों में स्पष्ट रूप से तय किया गया कि: नागरिकों को निशाना नहीं बनाया जाएगा।   अस्पतालों और राहत केंद्रों पर हमला प्रतिबंधित होगा।   युद्धबंदियों के साथ अमानवीय व्यवहार नहीं किया जाएगा।   अगर कोई देश या उसकी सेना इन नियमों का उल्लंघन करती है, तो उसे वॉर क्राइम की श्रेणी में रखा जा सकता है।   मिडिल ईस्ट के संघर्ष में क्यों उठ रहा यह सवाल मौजूदा समय में Iran और Israel के बीच लगातार सैन्य हमले हो रहे हैं, जबकि United States भी इस टकराव में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार कई सैन्य ठिकानों के साथ-साथ शहरों के आसपास भी हमले हुए हैं, जिनका असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बहस तेज हो गई है कि क्या इन हमलों के दौरान नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।   वॉर क्राइम की जांच और सजा कौन देता है ऐसे मामलों की जांच और सुनवाई के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष अदालतें बनाई गई हैं। इनमें सबसे प्रमुख है International Criminal Court (ICC)। यह अदालत उन मामलों की जांच कर सकती है जिनमें नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध और वॉर क्राइम जैसे गंभीर आरोप शामिल हों। हालांकि व्यवहार में यह प्रक्रिया अक्सर जटिल होती है, क्योंकि कई बार बड़े देशों की राजनीतिक शक्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करती है।   क्या किसी राष्ट्राध्यक्ष को कभी सजा मिली है इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं, जब राष्ट्राध्यक्षों या शीर्ष नेताओं को युद्ध अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया। लाइबेरिया के पूर्व राष्ट्रपति Charles Taylor को सिएरा लियोन के गृहयुद्ध में युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए 50 साल की सजा सुनाई गई।   इराक के पूर्व राष्ट्रपति Saddam Hussein को मानवाधिकार उल्लंघनों और युद्ध अपराधों के आरोपों में दोषी पाए जाने के बाद फांसी दी गई।   द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुए Nuremberg Trials में नाजी शासन के कई शीर्ष नेताओं को युद्ध अपराधों के लिए सजा दी गई, जिनमें कई को मृत्युदंड भी मिला।   कुछ मामलों में नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुए, लेकिन उन्हें सजा नहीं मिल सकी। उदाहरण के तौर पर सूडान के पूर्व राष्ट्रपति Omar al-Bashir के खिलाफ ICC ने वारंट जारी किया था, लेकिन अब तक मुकदमा पूरा नहीं हो सका।   क्या मौजूदा युद्ध में किसी नेता को सजा मिल सकती है सैद्धांतिक रूप से अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी भी देश के नेता पर वॉर क्राइम का मुकदमा चलाया जा सकता है। लेकिन व्यवहारिक रूप से यह बेहद कठिन होता है। कारण यह है कि कई शक्तिशाली देश ICC के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं करते या अंतरराष्ट्रीय जांच में सीमित सहयोग देते हैं। इसके अलावा किसी नेता के खिलाफ कार्रवाई तभी संभव होती है, जब वह सत्ता से बाहर हो या उसके खिलाफ वैश्विक राजनीतिक सहमति बन जाए।   वास्तविकता क्या कहती है विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े और शक्तिशाली देशों के नेताओं पर अंतरराष्ट्रीय अदालत में मुकदमा चलाना बहुत मुश्किल होता है। अक्सर ऐसे मामलों में कार्रवाई कमजोर या पराजित पक्ष के नेताओं पर ही होती है। यही वजह है कि मौजूदा मिडिल ईस्ट संघर्ष में भले ही युद्ध अपराधों को लेकर गंभीर आरोप और बहस हो रही हो, लेकिन निकट भविष्य में किसी बड़े नेता को अंतरराष्ट्रीय अदालत से सजा मिलने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। सरल शब्दों में कहा जाए तो युद्ध में भी नियम मौजूद हैं, लेकिन वैश्विक राजनीति और शक्ति संतुलन के कारण इन नियमों को लागू करना हमेशा आसान नहीं होता।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Crowd chaos at Nalanda Sheetla Temple during religious event causing stampede-like situation and casualties
बिहार

नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0