Shashi Tharoor

Congress MP Shashi Tharoor reacts to viral Cockroach Janata Party trend and youth political expression debate
“X अकाउंट बंद करना गलत फैसला”, Cockroach Janata Party पर बोले शशि थरूर

कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आई “Cockroach Janata Party (CJP)” को लेकर दिलचस्प प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक इंटरनेट ट्रेंड नहीं, बल्कि युवाओं की नाराजगी और राजनीतिक भावनाओं की अभिव्यक्ति है। थरूर ने इस उभरते घटनाक्रम को विपक्ष के लिए भी एक बड़ा संकेत बताया। “युवाओं की आवाज दबाना ठीक नहीं” शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि केवल पांच दिनों में इंस्टाग्राम पर 1.5 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स जुटाना यह दिखाता है कि देश के युवा अपनी बात नए तरीकों से रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में किसी अकाउंट को बंद करना सही कदम नहीं माना जा सकता। थरूर के मुताबिक, लोकतंत्र में असहमति, व्यंग्य, हास्य और गुस्से के लिए भी जगह होनी चाहिए। उन्होंने लिखा कि युवाओं की भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें समझने की जरूरत है। थरूर ने कहा कि सोशल मीडिया आज युवाओं के लिए अपनी राय व्यक्त करने का सबसे बड़ा मंच बन चुका है। “CJP अब सिर्फ इंटरनेट ट्रेंड नहीं” Cockroach Janata Party को लेकर दिए गए इंटरव्यू में थरूर ने कहा कि यह ट्रेंड अब सिर्फ ऑनलाइन मजाक या वायरल कंटेंट तक सीमित नहीं रह गया है। उनके अनुसार, यह मौजूदा राजनीति को लेकर युवाओं की निराशा और असंतोष को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि देश का युवा वर्ग पारंपरिक राजनीतिक ढांचे से अलग सोच रहा है और अपनी बात नए प्रतीकों और व्यंग्य के जरिए सामने ला रहा है। विपक्ष के लिए बताया बड़ा मौका थरूर ने कहा कि विपक्षी दलों को इस बदलते राजनीतिक मूड को गंभीरता से समझना चाहिए। उन्होंने माना कि युवाओं की इस ऊर्जा को मुख्यधारा की राजनीति और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ना जरूरी है। कांग्रेस सांसद के मुताबिक, अगर यह भावना सही दिशा में आगे बढ़ती है तो भविष्य में यह वोट और राजनीतिक भागीदारी के जरिए बदलाव की ताकत बन सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह आंदोलन आगे चलकर किस रूप में सामने आएगा, लेकिन यह स्पष्ट है कि युवाओं में राजनीतिक असंतोष बढ़ रहा है। सोशल मीडिया पर लगातार बढ़ रही चर्चा बीते कुछ दिनों में “Cockroach Janata Party” सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड कर रही है। खासतौर पर युवाओं के बीच यह नाम मीम्स, व्यंग्य और राजनीतिक चर्चाओं के जरिए लोकप्रिय हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के डिजिटल ट्रेंड अब केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे युवाओं की राजनीतिक सोच और सिस्टम के प्रति उनके नजरिए को भी दिखा रहे हैं।  

surbhi मई 22, 2026 0
Shashi Tharoor speaking to media after election results, highlighting Congress introspection and strategy concerns
चुनावी नतीजों पर शशि थरूर का बड़ा बयान– कांग्रेस को करना होगा गहरा आत्मचिंतन

Assembly Election Results: चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने पार्टी के प्रदर्शन पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मौजूदा हालात में कांग्रेस को गंभीर और ईमानदार आत्मचिंतन की जरूरत है, ताकि भविष्य की रणनीति को मजबूत बनाया जा सके। “गंभीर आत्ममंथन के बिना आगे बढ़ना मुश्किल” न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत में शशि थरूर ने कहा, “मुझे लगता है कि पार्टी को बहुत गंभीर आत्मचिंतन करना होगा, इसमें कोई शक नहीं है। हमने पहले भी यह बात कही है, लेकिन अब इसे और ठोस तरीके से लागू करने की जरूरत है।” उन्होंने इशारों में यह भी माना कि कुछ राज्यों में पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक स्तर पर कमियां सामने आई हैं, जिन्हें दूर करना बेहद जरूरी है। केरल मॉडल से सीखने की सलाह थरूर ने खास तौर पर केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पार्टी ने बेहतर रणनीति, मजबूत संगठन और सही गठबंधन के साथ अच्छा प्रदर्शन किया। गौरतलब है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने 102 सीटें जीतकर मजबूत स्थिति बनाई है। थरूर का कहना है कि अगर केरल में यह मॉडल सफल हो सकता है, तो इसे अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है। अन्य राज्यों में कमजोर प्रदर्शन चिंता का कारण जहां एक ओर केरल में कांग्रेस को सफलता मिली, वहीं अन्य राज्यों में पार्टी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया है। इसके अलावा तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिससे राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। रणनीति और नेतृत्व पर उठ रहे सवाल इन चुनावी नतीजों के बाद कांग्रेस के भीतर भी रणनीति, नेतृत्व और जमीनी संगठन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी को न सिर्फ अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव करना होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को मजबूत करने और मतदाताओं से जुड़ने के नए तरीके अपनाने होंगे। आगे की राह क्या? शशि थरूर के इस बयान को पार्टी के अंदर सुधार की दिशा में एक अहम संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में कांग्रेस को यह तय करना होगा कि वह किन मुद्दों, नेतृत्व और रणनीतियों के जरिए जनता का विश्वास दोबारा हासिल कर सकती है। कुल मिलाकर, इन चुनावी नतीजों ने कांग्रेस के सामने चुनौती भी रखी है और एक अवसर भी– खुद को नए सिरे से तैयार करने का।  

surbhi मई 5, 2026 0
Kerala election vote counting with UDF leading trends and Shashi Tharoor reacting to early results
Kerala Election Results 2026: शुरुआती रुझानों में UDF आगे, शशि थरूर बोले–बदलाव के संकेत साफ

तिरुवनंतपुरम, 4 मई: केरल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना सोमवार सुबह शुरू होते ही राजनीतिक तस्वीर साफ होने लगी है। शुरुआती रुझानों में United Democratic Front (UDF) बढ़त बनाता नजर आ रहा है, जिससे Indian National Congress (कांग्रेस) खेमे में उत्साह है। रुझानों में UDF को बढ़त अब तक सामने आए शुरुआती रुझानों के अनुसार: UDF 60 से अधिक सीटों पर आगे Left Democratic Front (LDF) 50 से ज्यादा सीटों पर बढ़त ये आंकड़े फिलहाल डाक मतपत्रों की गिनती पर आधारित हैं, जो कुल वोटों का लगभग 1.36% है। शशि थरूर का बयान कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने कहा कि मतगणना के शुरुआती डेढ़ घंटे में ही रुझान स्पष्ट रूप से UDF के पक्ष में दिख रहे हैं। उन्होंने बताया कि LDF के कई मजबूत और लोकप्रिय नेता भी पीछे चल रहे हैं, जो राज्य में बदलाव के संकेत दे रहे हैं। थरूर ने कहा, “केरल की जनता बधाई की हकदार है, क्योंकि उसने बदलाव का मन बना लिया है।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम नतीजों से पहले कोई जश्न नहीं मनाया जाएगा। “सरकार बदलना सबसे जरूरी” Shashi Tharoor ने जोर देते हुए कहा कि सबसे जरूरी है कि राज्य में सरकार बदले और नीतियों में सुधार हो। उन्होंने कहा कि: केरल की आर्थिक स्थिति को सुधारने की जरूरत है निवेश को बढ़ावा देना होगा युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे क्या कहते हैं संकेत? शुरुआती रुझानों से यह संकेत मिल रहा है कि इस बार केरल में सत्ता परिवर्तन की संभावना बन रही है। हालांकि, अंतिम नतीजों के लिए अभी इंतजार करना होगा, क्योंकि आगे की गिनती में तस्वीर बदल भी सकती है।  

surbhi मई 4, 2026 0
Shashi Tharoor
ईरान-अमेरिका विवाद: 'मध्यस्थता के पीछे वॉशिंगटन का हाथ', शशि थरूर ने पाकिस्तान की भूमिका पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, एजेंसियां। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान द्वारा की जा रही मध्यस्थता की कोशिशों पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। थरूर ने स्पष्ट किया कि इस मामले में भारत और पाकिस्तान की तुलना नहीं की जा सकती क्योंकि दोनों देशों की परिस्थितियां और हित पूरी तरह भिन्न हैं। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि अमेरिका के इशारे पर यह भूमिका निभा रहा है।   पाकिस्तान की भौगोलिक और आंतरिक मजबूरी शशि थरूर ने पाकिस्तान की सक्रियता के पीछे ठोस भौगोलिक और सामाजिक कारणों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की 900 किलोमीटर लंबी सीमा ईरान से लगती है। इसके अलावा, पाकिस्तान में लगभग 4 करोड़ शिया मुस्लिम आबादी रहती है। शरणार्थी संकट: थरूर के अनुसार, यदि ईरान पर दोबारा हमला होता है, तो वहां से पलायन करने वाले शरणार्थी सीधे पाकिस्तान का रुख करेंगे, जो उसकी अर्थव्यवस्था और स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती होगी। पड़ोसी होने का दबाव: सीमा साझा करने के कारण ईरान में होने वाली किसी भी बड़ी हलचल का सीधा असर पाकिस्तान की सुरक्षा पर पड़ता है।   'वॉशिंगटन की स्क्रिप्ट' पर काम कर रहा है इस्लामाबाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए इसे 'वॉशिंगटन प्रेरित' करार दिया। थरूर ने एक हालिया घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के एक सोशल मीडिया पोस्ट की हेडिंग में 'ड्राफ्ट: एक्स पर पाकिस्तान के पीएम का मैसेज' लिखा था। भाषा और शब्दावली: थरूर का तर्क है कि उस संदेश में इस्तेमाल की गई भाषा पूरी तरह से वॉशिंगटन की थी और उसमें कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया था जो अक्सर डोनाल्ड ट्रंप इस्तेमाल करते हैं। निष्कर्ष: उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ पाकिस्तान के संबंध ऐसे हैं कि वह उनके कहने पर ऐसी भूमिका निभा रहा है जिसे 'सिर्फ पाकिस्तान ही कर सकता है'।   भारतीय अर्थव्यवस्था और नागरिकों पर युद्ध का प्रभाव भारत के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए शशि थरूर ने कहा कि हमारा प्राथमिक हित शांति और समाधान में है। उन्होंने बताया कि इस युद्ध जैसी स्थिति का भारत पर व्यापक असर पड़ रहा है: ऊर्जा सुरक्षा: भारत की प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते कतर और बहरीन जैसे देशों से आता है। युद्ध के कारण इस आपूर्ति श्रृंखला में बाधा आ रही है। प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा: खाड़ी देशों (Gulf Countries) में लाखों भारतीय नागरिक रहते हैं और काम करते हैं। युद्ध की स्थिति उनकी सुरक्षा और आजीविका के लिए बड़ा खतरा है। घरेलू अर्थव्यवस्था: वैश्विक तेल कीमतों में अस्थिरता का सीधा असर भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ता है।   शांति की अपील और भविष्य की राह शशि थरूर ने जोर देकर कहा कि भारत चाहता है कि यह युद्ध जल्द से जल्द समाप्त हो। हालांकि भारत सीधे तौर पर पाकिस्तान की तरह मध्यस्थता की दौड़ में नहीं है, लेकिन क्षेत्र में शांति बनाए रखना भारत की प्राथमिकता है। उन्होंने केरल में अपने काफिले पर हुए हालिया हमले और अन्य राजनीतिक विषयों पर भी बात की, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की इस 'विशिष्ट' भूमिका को लेकर उनका बयान सबसे अधिक चर्चा में बना हुआ है।

Anjali Kumari अप्रैल 11, 2026 0
Shashi Tharoor
केरल में चुनाव प्रचार के दौरान शशि थरूर के काफिले पर हमला, एक आरोपी हिरासत में

तिरुवंतपुरम, एजेंसियां। केरलम के मलप्पुरम जिले में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के चुनावी काफिले से जुड़ी एक गंभीर घटना सामने आई है। शुक्रवार शाम वांडूर इलाके में प्रचार कार्यक्रम के लिए जाते समय उनके काफिले को कुछ लोगों ने कथित तौर पर रोक लिया और इस दौरान उनके ड्राइवर व गनमैन पर हमला कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, घटना शाम करीब 7:30 बजे थिरुवल्ली-चेल्लीथोडु पुल के पास हुई, जब सड़क पर जाम जैसी स्थिति बनी हुई थी और काफिले की रफ्तार धीमी हो गई थी।   कैसे हुआ हमला? एफआईआर के मुताबिक, दो वाहनों में सवार करीब पांच लोग अचानक सांसद के वाहन के आगे आ गए और रास्ता रोक दिया। जब गनमैन रतीश के.पी. ने उन्हें हटाने और रास्ता साफ करने की कोशिश की, तो आरोपियों ने कथित तौर पर उनके साथ-साथ ड्राइवर पर भी हमला कर दिया। पुलिस का कहना है कि सड़क संकरी थी और सुरक्षा कर्मी ने केवल आगे चल रहे वाहन को थोड़ा आगे बढ़ाने के लिए कहा था, ताकि काफिला निकल सके। इसी बात पर विवाद बढ़ गया।   एक आरोपी हिरासत में, बाकी की तलाश जारी वांडूर पुलिस ने गनमैन की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में लिया है, जबकि अन्य हमलावरों की पहचान भी कर ली गई है। कुछ रिपोर्टों में दो वाहनों को जब्त किए जाने और अन्य संदिग्धों को पकड़ने के लिए छापेमारी की बात भी सामने आई है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हमला अचानक हुआ या इसके पीछे कोई सुनियोजित मंशा थी।   चुनावी माहौल में बढ़ी सुरक्षा चिंता इस घटना ने केरल में चुनावी माहौल के बीच वीआईपी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है और मतगणना 4 मई को होगी। ऐसे में चुनाव प्रचार के दौरान इस तरह की घटना राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकती है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Anjali Kumari अप्रैल 4, 2026 0
Kerala: Attack on Shashi Tharoor convoy injures gunman and driver
केरल में शशि थरूर के काफिले पर हमला, गनमैन और ड्राइवर घायल

वंडूर (केरल): कांग्रेस सांसद शशि थरूर के काफिले पर शुक्रवार शाम हमला होने की घटना सामने आई है। इस हमले में उनके गनमैन और ड्राइवर घायल हो गए, जबकि शशि थरूर सुरक्षित हैं। पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य की तलाश जारी है। जानकारी के मुताबिक, यह घटना वंडूर क्षेत्र के चेलिथोडे इलाके में शाम करीब 7:30 बजे हुई। उस समय शशि थरूर एक चुनावी कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। रास्ते में पुल के पास सड़क संकरी होने के कारण जाम की स्थिति बन गई थी। इसी दौरान दो गाड़ियों में सवार करीब पांच लोगों ने थरूर के काफिले को रोक लिया। बताया जा रहा है कि जब गनमैन रतीश के पी ने रास्ता खाली करने के लिए सामने खड़ी गाड़ी को हटाने को कहा, तो आरोपियों ने गनमैन और ड्राइवर पर हमला कर दिया। घटना के बाद गनमैन की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने देर रात एक आरोपी को हिरासत में लिया, जबकि अन्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और हमले के पीछे की वजह जानने का प्रयास कर रही है। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उनके गार्ड पर हमले को लेकर चिंता जताने वाले सभी लोगों का वह धन्यवाद करते हैं। उन्होंने बताया कि गार्ड अब सुरक्षित है और उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा। थरूर ने यह भी कहा कि घटना के बावजूद उन्होंने अपने तय कार्यक्रम पूरे किए। फिलहाल, पुलिस जांच के बाद ही इस हमले के कारणों का खुलासा हो सकेगा।  

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
Shashi Tharoor speaking at event amid debate over India’s stance on Iran-Israel conflict
ईरान-इजरायल युद्ध पर कांग्रेस में मतभेद: शशि थरूर ने सोनिया गांधी के बयान से बनाई दूरी, सरकार की चुप्पी का किया बचाव

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की विदेश नीति पर देश की राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। Iran और Israel के बीच बढ़ते संघर्ष को लेकर जहां विपक्ष सरकार पर हमलावर है, वहीं कांग्रेस के भीतर ही इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता Sonia Gandhi ने हाल ही में भारत सरकार की ‘चुप्पी’ पर सवाल उठाते हुए इसे नैतिक जिम्मेदारी से बचना बताया था। उन्होंने ईरान की संप्रभुता और वहां हुए हमलों पर भारत की ओर से खुलकर प्रतिक्रिया न देने को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की थी। थरूर का अलग रुख, कहा-यह ‘मोरल सरेंडर’ नहीं अब इसी मुद्दे पर कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री Shashi Tharoor ने अपनी ही पार्टी से अलग रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर भारत की चुप्पी को “मोरल सरेंडर” कहना गलत है। थरूर के अनुसार, यह चुप्पी दरअसल एक “रिस्पॉन्सिबल स्टेटक्राफ्ट” यानी सोच-समझकर अपनाई गई कूटनीतिक रणनीति है, जो भावनात्मक प्रतिक्रिया के बजाय राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देती है। अंतरराष्ट्रीय कानून पर उठाए सवाल थरूर ने अपने लेख में यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ किया गया सैन्य अभियान अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कदम उन मूल्यों के खिलाफ है, जिनका भारत ऐतिहासिक रूप से समर्थन करता रहा है-जैसे शांति, आक्रामकता का विरोध और संप्रभुता का सम्मान। ‘हर बार खुलकर निंदा जरूरी नहीं’ हालांकि, इन आपत्तियों के बावजूद थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि हर परिस्थिति में सार्वजनिक रूप से निंदा करना ही एकमात्र विकल्प नहीं होता। उनका मानना है कि कूटनीति में कई बार संतुलन बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण होता है। नेहरू की नीति का दिया उदाहरण थरूर ने भारत की विदेश नीति की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए Jawaharlal Nehru की गुटनिरपेक्ष नीति का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह नीति नैतिकता से समझौता नहीं, बल्कि उस समय के वैश्विक हालात में राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका थी। आज के बहुध्रुवीय विश्व में भारत “मल्टी-अलाइनमेंट” की नीति अपना रहा है, जहां वह अलग-अलग वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलन बनाए रखते हुए अपने रणनीतिक हितों को साधता है। ऐतिहासिक उदाहरणों से समझाया रुख थरूर ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि भारत ने पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी थी- 1956 में हंगरी संकट   1968 में चेकोस्लोवाकिया   1979 में अफगानिस्तान   इन मामलों में भी भारत ने अपने रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित रुख अपनाया था। राजनीतिक बहस तेज इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह साफ है कि ईरान-इजरायल युद्ध पर न सिर्फ सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं, बल्कि विपक्ष के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज हो सकती है, खासकर जब अंतरराष्ट्रीय हालात लगातार बदल रहे हैं।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0