Paneer Nirvana Recipe: अगर आप रोज़ एक जैसी पनीर की सब्जी खाकर बोर हो चुके हैं, तो इस बार घर पर रेस्टोरेंट स्टाइल पनीर निर्वाण जरूर बनाएं। नारियल के दूध, करी पत्ता, कच्चे आम और हल्के मसालों से तैयार यह दक्षिण भारतीय डिश स्वाद और पोषण का बेहतरीन मेल है। कम तेल में बनने वाली यह हाई-प्रोटीन रेसिपी लंच, डिनर या वीकेंड स्पेशल मील के लिए शानदार विकल्प है। पनीर निर्वाण दक्षिण भारत की पारंपरिक फिश निर्वाण से प्रेरित एक शाकाहारी डिश है। समय के साथ यह देशभर के कई प्रीमियम रेस्टोरेंट्स में बेहद लोकप्रिय हो चुकी है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें पनीर को पहले मसालों में मैरिनेट किया जाता है और फिर नारियल के दूध के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है, जिससे इसका स्वाद बेहद क्रीमी और रिच बन जाता है। पनीर निर्वाण की उत्पत्ति इस डिश की प्रेरणा केरल की पारंपरिक फिश निर्वाण रेसिपी से मानी जाती है। नारियल का दूध, केले का पत्ता और करी पत्ता दक्षिण भारतीय व्यंजनों की पहचान हैं, जो इस डिश को खास स्वाद और खुशबू देते हैं। सबसे ज्यादा कहां पसंद की जाती है? केरल तमिलनाडु कर्नाटक भारत के प्रीमियम साउथ इंडियन रेस्टोरेंट्स फाइन डाइनिंग और फ्यूजन रेस्टोरेंट्स आवश्यक सामग्री मैरिनेशन के लिए 200 ग्राम पनीर (मोटे स्लाइस) 1 छोटा चम्मच हल्दी 2 छोटे चम्मच लाल मिर्च पाउडर 1 छोटा चम्मच काली मिर्च स्वादानुसार नमक आधे नींबू का रस 1 छोटा चम्मच तेल करी पत्ता पकाने के लिए थोड़ा तेल 1 केला पत्ता ½ कप नारियल का दूध 2 हरी मिर्च 1 इंच अदरक थोड़ा कच्चा आम करी पत्ता 1 छोटा चम्मच काली मिर्च बनाने की आसान विधि स्टेप 1: सभी मसालों में पनीर को मिलाकर 10 मिनट तक मैरिनेट करें। स्टेप 2: हल्के तेल में पनीर को दोनों तरफ से हल्का सुनहरा होने तक सेक लें। स्टेप 3: मिट्टी के बर्तन या पैन में केले का पत्ता बिछाकर पनीर रखें। स्टेप 4: ऊपर से नारियल का दूध, अदरक, हरी मिर्च, कच्चा आम, करी पत्ता और काली मिर्च डालें। स्टेप 5: ढक्कन लगाकर धीमी आंच पर 10–12 मिनट पकाएं। स्टेप 6: स्टीम्ड राइस, अप्पम, नीर डोसा या मलाबार परोट्टा के साथ गरमागरम सर्व करें। अनुमानित पोषण (प्रति सर्विंग) कैलोरी: 320–380 kcal प्रोटीन: 18–22 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 8–12 ग्राम फैट: 24–28 ग्राम कैल्शियम: अच्छी मात्रा (पोषण सामग्री उपयोग की गई सामग्री के अनुसार बदल सकती है।) तैयार होने में कितना समय लगेगा? तैयारी: 15 मिनट मैरिनेशन: 10 मिनट पकाने का समय: 15 मिनट कुल समय: लगभग 40 मिनट किन लोगों के लिए है बेहतर? हाई-प्रोटीन डाइट लेने वाले फिटनेस लवर्स शाकाहारी लोग फैमिली लंच और डिनर वीकेंड स्पेशल मील साउथ इंडियन फूड पसंद करने वाले जरूरी टिप्स पनीर को ज्यादा देर तक न पकाएं, इससे वह सख्त हो सकता है। नारियल का दूध हमेशा धीमी आंच पर पकाएं। केले के पत्ते का इस्तेमाल स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ाता है। ऊपर से ताजा करी पत्ता और काली मिर्च डालकर सर्व करें। ध्यान रखें: अगर आप लो-फैट डाइट फॉलो कर रहे हैं, तो लो-फैट पनीर और कम मात्रा में नारियल के दूध का इस्तेमाल करें।
South Indian Style Banana Kofta Recipe: अगर रोज-रोज एक जैसी सब्जियां खाकर बोर हो चुके हैं, तो इस बार कच्चे केले से बनाएं साउथ इंडियन स्टाइल केले के कोफ्ते। नारियल, करी पत्ता और हल्के मसालों से तैयार यह रेसिपी स्वाद के साथ पोषण भी देती है। आज क्या बनाएं? ट्राई करें साउथ इंडियन स्टाइल केले के कोफ्ते अगर आप लंच या डिनर में कुछ नया, स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाना चाहते हैं, तो साउथ इंडियन स्टाइल केले के कोफ्ते एक बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। कच्चे केले, बेसन और हल्के मसालों से तैयार यह डिश बाहर से हल्की कुरकुरी और अंदर से बेहद मुलायम होती है। नारियल और करी पत्ते की खुशबू इसका स्वाद और भी खास बना देती है। यह रेसिपी चपाती, पराठा, नीर डोसा, अप्पम या स्टीम्ड राइस के साथ शानदार लगती है। आवश्यक सामग्री कोफ्ते के लिए 2 कच्चे केले 3 बड़े चम्मच बेसन 1 छोटा चम्मच अदरक-हरी मिर्च पेस्ट ½ छोटा चम्मच हल्दी ½ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर नमक स्वादानुसार 1 बड़ा चम्मच बारीक कटा हरा धनिया 1–2 चम्मच तेल (शैलो फ्राई/एयर फ्राई के लिए) ग्रेवी के लिए 1 छोटा प्याज (बारीक कटा) 2 टमाटर की प्यूरी ¼ कप ताजा कद्दूकस नारियल 8–10 करी पत्ते 1 छोटा चम्मच राई ½ छोटा चम्मच जीरा 2–3 लहसुन की कलियां 1 छोटा चम्मच सांभर पाउडर ½ छोटा चम्मच हल्दी 1 कप पानी 1 छोटा चम्मच तेल बनाने की विधि सबसे पहले कच्चे केले को उबालकर छील लें और अच्छी तरह मैश करें। इसमें बेसन, अदरक-हरी मिर्च पेस्ट, नमक, हल्दी, लाल मिर्च और हरा धनिया मिलाकर छोटे-छोटे कोफ्ते बना लें। इन्हें शैलो फ्राई करें या 180°C पर 12–15 मिनट एयर फ्राई करें। ग्रेवी बनाने के लिए पैन में तेल गर्म करें। राई, जीरा और करी पत्ता तड़काएं। प्याज और लहसुन भूनें, फिर टमाटर प्यूरी, नारियल, हल्दी और सांभर पाउडर डालकर 5–6 मिनट पकाएं। थोड़ा पानी डालकर ग्रेवी तैयार करें और आखिर में तैयार कोफ्ते डालकर 2–3 मिनट धीमी आंच पर पकाएं। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 250–300 kcal प्रोटीन: 7–9 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 35–40 ग्राम फैट: 8–10 ग्राम फाइबर: 6–8 ग्राम संभावित फायदे कच्चा केला रेजिस्टेंट स्टार्च और फाइबर का अच्छा स्रोत है। लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकता है। पाचन तंत्र को सपोर्ट करने में सहायक हो सकता है। शरीर को ऊर्जा देने वाले जटिल कार्बोहाइड्रेट उपलब्ध कराता है। नारियल और करी पत्ता रेसिपी के स्वाद और पोषण को बढ़ाते हैं। किसके साथ खाएं? मल्टीग्रेन रोटी नीर डोसा अप्पम इडियप्पम स्टीम्ड राइस ध्यान दें अगर आप वजन नियंत्रित करना चाहते हैं, तो कोफ्तों को डीप फ्राई करने की बजाय एयर फ्राई या शैलो फ्राई करें। डायबिटीज या किडनी रोग जैसी स्वास्थ्य समस्याओं में अपनी डाइट के अनुसार डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।
गिलास वाले अनोखे पारंपरिक तरीके से बनने वाली यह साउथ इंडियन डिश नाश्ते, ब्रंच, शाम के स्नैक या हल्के डिनर के लिए बेहतरीन विकल्प मानी जाती है। अगर आप रोज-रोज इडली, डोसा या उत्तपम खाकर कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं, तो आंध्र प्रदेश की पारंपरिक डिब्बा रोटी आपकी किचन के लिए एक शानदार रेसिपी हो सकती है। यह मोटी साउथ इंडियन रोटी बाहर से सुनहरी और कुरकुरी होती है, जबकि अंदर से रुई जैसी मुलायम और स्पंजी रहती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बनाने के लिए आटा गूंथने की जरूरत नहीं होती, बल्कि इडली-डोसा के बैटर से ही आसानी से तैयार किया जाता है। डिब्बा रोटी को खास बनाने वाला इसका पारंपरिक 'गिलास वाला तरीका' है। कड़ाही में मोटी परत में बैटर डालने के बाद उसके बीच में पानी से भरा स्टील या पीतल का गिलास रखा जाता है। इससे रोटी अंदर तक समान रूप से पकती है और बीच में आकर्षक रिंग शेप बन जाती है। धीमी आंच पर पकाने से इसकी बाहरी परत बेहद क्रिस्पी और अंदर का हिस्सा नरम व फ्लफी बनता है। बनाने में कितना समय लगता है? तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 12–15 मिनट कुल समय: लगभग 25 मिनट आवश्यक सामग्री 2 कप इडली/डोसा बैटर 3–4 बड़े चम्मच तेल 1 छोटा चम्मच जीरा पानी से भरा छोटा स्टील/पीतल का गिलास बनाने की आसान विधि भारी तले की कड़ाही में तेल गर्म करें और धीमी आंच पर मोटी परत में बैटर डालें। बीच में पानी से भरा गिलास रखें और ऊपर से जीरा छिड़क दें। ढक्कन लगाकर 8–10 मिनट पकाएं। जब रोटी ऊपर से सेट हो जाए, तो गिलास निकालकर दूसरी तरफ 2–3 मिनट सेक लें। तैयार डिब्बा रोटी को गरमागरम परोसें। किसके साथ परोसें? नारियल की चटनी टमाटर की चटनी मूंगफली की चटनी सांभर आलू मसाला वेज कुरमा मसालेदार दही ज्यादातर कब खाई जाती है? सुबह का नाश्ता (Breakfast) ब्रंच शाम का स्नैक हल्का लंच हल्का डिनर क्यों करें ट्राई? बिना आटा गूंथे बनने वाली आसान रेसिपी बाहर से सुपर क्रिस्पी, अंदर से मुलायम टेक्सचर इडली-डोसा बैटर का नया और स्वादिष्ट इस्तेमाल परिवार के लिए झटपट बनने वाला साउथ इंडियन विकल्प
अगर आप बच्चों को हेल्दी और टेस्टी नाश्ता खिलाना चाहते हैं, तो ये गाजर की इडली परफेक्ट ऑप्शन है। इसका रंग, स्वाद और सॉफ्ट टेक्सचर बच्चों को तुरंत पसंद आ जाएगा बनाने के लिए सामग्री सफेद चावल – 1 कप उड़द दाल – ½ कप गाजर – 1 कप (कद्दूकस की हुई) नमक – स्वादानुसार ईनो – 1 छोटा चम्मच (या ¼ छोटा चम्मच बेकिंग सोडा) पानी – जरूरत अनुसार तेल – ग्रीस करने के लिए बनाने की आसान विधि दाल-चावल भिगोएं चावल और उड़द दाल को अलग-अलग 4–5 घंटे पानी में भिगो दें। घोल तैयार करें भीगे हुए चावल और दाल को मिक्सी में पीसकर स्मूद बैटर (घोल) बना लें (न ज्यादा पतला, न ज्यादा गाढ़ा) गाजर मिलाएं अब इसमें कद्दूकस की हुई गाजर नमक डालकर अच्छे से मिक्स करें चाहें तो हल्की तीखापन के लिए काली मिर्च या हरी मिर्च भी डाल सकते हैं ईनो डालें इडली बनाने से ठीक पहले बैटर में ईनो डालें और हल्के हाथ से मिलाएं बैटर तुरंत फूल जाएगा स्टीम करें इडली सांचे को तेल से ग्रीस करें बैटर डालें 10–12 मिनट तक स्टीम करें टूथपिक डालकर चेक करें - साफ निकले तो इडली तैयार कैसे परोसें? गरमा-गरम इडली को परोसें: नारियल चटनी टमाटर चटनी सांभर क्यों है हेल्दी? गाजर से मिलता है विटामिन A और फाइबर हल्की और आसानी से पचने वाली बच्चों और बड़ों दोनों के लिए परफेक्ट टिप अगर समय कम हो तो आप इंस्टेंट रवा इडली बैटर + गाजर मिलाकर भी बना सकते हैं
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।