रांची। झारखंड की महिला हॉकी को एक और बड़ी उपलब्धि मिली है। राजधानी रांची स्थित सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, बरियातू हॉकी सेंटर की तीन प्रतिभाशाली खिलाड़ी बिनीमा धान, पार्वती टोप्पो और रोशनी आइंद का चयन भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम में हुआ है। तीनों खिलाड़ी 5 से 14 जुलाई तक होने वाले इंग्लैंड और स्कॉटलैंड दौरे पर भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करेंगी। इस दौरे के दौरान भारतीय जूनियर महिला टीम कुल सात अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलेगी। झारखंड के लिए यह गर्व का क्षण है, क्योंकि एक ही सेंटर से तीन खिलाड़ियों का राष्ट्रीय टीम में चयन राज्य की मजबूत खेल संस्कृति और प्रशिक्षण व्यवस्था को दर्शाता है। विदेशी दौरा देगा अंतरराष्ट्रीय अनुभव इंग्लैंड और स्कॉटलैंड दौरे के दौरान भारतीय टीम को यूरोप की मजबूत टीमों के खिलाफ खेलने का अवसर मिलेगा। इससे खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मिलेगा, जो उनके खेल, आत्मविश्वास और भविष्य के करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बरियातू हॉकी सेंटर लंबे समय से महिला हॉकी प्रतिभाओं को तराशने का प्रमुख केंद्र रहा है और यहां से कई खिलाड़ी पहले भी भारतीय टीम का हिस्सा बन चुकी हैं। तीनों खिलाड़ियों से इस दौरे में शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। खेल जगत ने दी बधाई, युवा खिलाड़ियों के लिए बनीं प्रेरणा हॉकी झारखंड के महासचिव विजय शंकर सिंह ने तीनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि बरियातू हॉकी सेंटर लगातार राष्ट्रीय टीम को खिलाड़ी देकर यह साबित कर रहा है कि झारखंड में जमीनी स्तर पर बेहतरीन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं, सेंटर की कोच करुणा पूर्ति ने कहा कि बिनीमा, पार्वती और रोशनी ने कड़ी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बल पर यह उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने विश्वास जताया कि तीनों खिलाड़ी विदेशी दौरे का पूरा लाभ उठाते हुए भारतीय टीम के लिए शानदार प्रदर्शन करेंगी। लगातार राष्ट्रीय टीम में खिलाड़ियों का चयन इस बात का प्रमाण है कि झारखंड महिला हॉकी की नई प्रतिभाओं को तैयार करने में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।
हजारीबाग। रांची के खेलगांव स्थित रोलर स्केटिंग स्टेडियम में आयोजित 12वीं नेशनल रैंकिंग ओपन स्पीड स्केटिंग चैंपियनशिप 2026 में हजारीबाग के दो युवा खिलाड़ियों ने तीन पदक जीतकर पूरे देश में अपना परचम लहराया। इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि प्रतिभा सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। कौन हैं ये होनहार खिलाड़ी? 14 वर्षीय नूर आलम ने स्वर्ण और रजत पदक अपने नाम किए, जबकि मात्र 6 वर्षीय राजवीर ने कांस्य पदक जीतकर सबको चौंका दिया। ये दोनों खिलाड़ी हजारीबाग झील परिसर में सुबह-शाम कड़ी मेहनत करते हैं, जहां बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। देशभर से 2000 से अधिक खिलाड़ियों ने लिया हिस्सा 17 से 21 जून तक आयोजित इस प्रतियोगिता में देशभर से 2,000 से अधिक खिलाड़ी रांची पहुंचे थे। झारखंड रोलर स्केटिंग एसोसिएशन (RSAJ) ने पहली बार इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता की मेजबानी की। रोलर स्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (RSFI) के तत्वावधान में आयोजित इस चैंपियनशिप में झारखंड के खिलाड़ियों ने कुल 18 पदक जीते, जिनमें से तीन अकेले हजारीबाग के खाते में आए। प्रतिभा को मिली पहचान, कोच ने कही दिल की बात हजारीबाग के स्केटिंग प्रशिक्षक का कहना है कि सुविधाहीन माहौल में भी खिलाड़ियों को कड़ा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन बच्चों की सफलता ने झारखंड को स्केटिंग के नक्शे पर राष्ट्रीय पहचान दिलाई है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है।
रांची। झारखंड टी-20 क्रिकेट लीग के लिए आयोजित प्लेयर ऑक्शन में धनबाद के आठ प्रतिभाशाली क्रिकेटरों का चयन विभिन्न फ्रेंचाइजी टीमों में हुआ है। इस उपलब्धि ने धनबाद के क्रिकेट जगत में उत्साह का माहौल पैदा कर दिया है। खिलाड़ियों के चयन को जिले में क्रिकेट के बढ़ते स्तर और युवा प्रतिभाओं की सफलता के रूप में देखा जा रहा है। धनबाद क्रिकेट एसोसिएशन (डीसीए) ने भी इसे जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है। इन खिलाड़ियों को मिला मौका झारखंड टी-20 लीग के लिए चयनित खिलाड़ियों में कुनैन कुरैशी, श्रेष्ठ, राहुल प्रसाद, अनुराग सिंह सेंगर, प्रतीक रंजन, सिद्धार्थ सिन्हा, युवराज सिंह और आर्यमन लाला शामिल हैं। इन खिलाड़ियों ने पिछले कुछ वर्षों में अपने प्रदर्शन और मेहनत के दम पर क्रिकेट जगत का ध्यान आकर्षित किया है। इसी का परिणाम है कि विभिन्न फ्रेंचाइजी टीमों ने उन्हें अपनी टीम का हिस्सा बनाया है। खिलाड़ियों की मेहनत का मिला पुरस्कार धनबाद क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव विनय कुमार सिंह ने सभी चयनित खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर बेहतर प्रदर्शन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राज्य की प्रतिष्ठित टी-20 लीग में जगह बनाना किसी भी युवा क्रिकेटर के लिए बड़ी उपलब्धि होती है और यह जिले के अन्य खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा। डीसीए ने जताया गर्व डीसीए सचिव ने कहा कि संगठन हमेशा से युवा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और प्रतिस्पर्धात्मक अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। भविष्य में भी खिलाड़ियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि चयनित खिलाड़ी लीग में शानदार प्रदर्शन कर धनबाद का नाम रोशन करेंगे। अब प्रदर्शन पर टिकी निगाहें झारखंड टी-20 लीग राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए अपनी क्षमता दिखाने का बड़ा मंच माना जाता है। ऐसे में धनबाद के इन आठ खिलाड़ियों से जिले के खेल प्रेमियों को काफी उम्मीदें हैं। सभी की नजर अब उनके प्रदर्शन पर रहेगी, जहां वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर नई पहचान बनाने की कोशिश करेंगे।
रांची। दिल्ली में आयोजित एशियन चैंपियनशिप 2026 में झारखंड के खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर राज्य का नाम रोशन किया है। प्रतियोगिता 6 अप्रैल से 11 अप्रैल तक आयोजित हुई थी, जिसमें झारखंड के खिलाड़ियों ने पदक तालिका में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। गोल्ड और सिल्वर मेडल से बढ़ा राज्य का मान इस प्रतियोगिता में दिनेश कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। वहीं बसंती कुमारी ने महिला अंडर-25 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य को गौरवान्वित किया। रेशमा कुमारी ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए एक रजत और एक कांस्य पदक हासिल किया। इन उपलब्धियों से झारखंड खेल जगत में एक बार फिर चर्चा में आ गया है। DC से की शिष्टाचार मुलाकात खिलाड़ियों ने झारखंड ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव डॉ. मधुकांत पाठक के नेतृत्व में रांची के उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान खिलाड़ियों ने अपनी उपलब्धियों और अनुभवों को साझा किया। प्रशासन ने दी बधाई और सहयोग का भरोसा उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने खिलाड़ियों को उनकी सफलता पर बधाई देते हुए कहा कि यह पूरे झारखंड के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि राज्य के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। DC ने भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन के लिए खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया और जिला प्रशासन की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। खेलों में बढ़ती पहचान झारखंड के खिलाड़ियों की यह उपलब्धि राज्य में खेल संस्कृति को नई दिशा दे रही है। लगातार मिल रही सफलताओं से युवा खिलाड़ियों में भी उत्साह और प्रेरणा बढ़ रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।