नई दिल्ली, एजेंसियां। टेक दिग्गज Google ने भारत में शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 'ATL Saathi' AI प्लेटफॉर्म का विस्तार करने की घोषणा की है। इस पहल के तहत देशभर के शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल लर्निंग टूल्स का बेहतर प्रशिक्षण और उपयोग उपलब्ध कराया जाएगा। शिक्षकों को मिलेगा AI का प्रशिक्षण Google के अनुसार, प्लेटफॉर्म के जरिए शिक्षकों को AI आधारित कंटेंट तैयार करने, स्मार्ट क्लासरूम चलाने और छात्रों के लिए इंटरैक्टिव लर्निंग अनुभव विकसित करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे डिजिटल शिक्षा को नई गति मिलने की उम्मीद है। क्लाउड और AI टूल्स हुए अपग्रेड कंपनी ने 'ATL Saathi' में कई नए AI फीचर्स और Google Cloud आधारित सेवाएं जोड़ी हैं। इनकी मदद से शिक्षक लेसन प्लान तैयार करने, क्विज़ बनाने, असाइनमेंट तैयार करने और छात्रों की प्रगति का बेहतर विश्लेषण कर सकेंगे। अटल टिंकरिंग लैब्स को मिलेगा फायदा यह पहल अटल इनोवेशन मिशन (AIM) के तहत संचालित अटल टिंकरिंग लैब्स (ATL) से जुड़े स्कूलों को विशेष रूप से लाभ पहुंचाएगी। Google का लक्ष्य छात्रों में AI, रोबोटिक्स, कोडिंग और नवाचार से जुड़ी कौशल विकसित करना है। डिजिटल शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित शिक्षा प्लेटफॉर्म के विस्तार से भारत के स्कूलों में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। इससे शिक्षकों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और छात्रों को आधुनिक तकनीकों के साथ सीखने का अवसर मिलेगा। नई शिक्षा नीति के अनुरूप पहल Google ने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के उद्देश्यों के अनुरूप है और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से छात्रों को AI एवं डिजिटल स्किल्स से लैस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी दिन भी मजबूती देखने को मिली। एशियाई बाजारों में कमजोरी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 250 अंक से अधिक उछल गया, जबकि एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स 24,150 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी मामूली मजबूती के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बाजार की स्थिति सुबह करीब 9:24 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 242.70 अंक (0.31%) की बढ़त के साथ 77,428.13 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 62.35 अंक (0.26%) की तेजी के साथ 24,140.85 अंक पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार सकारात्मक रुख के साथ बंद हुआ था। उस दिन सेंसेक्स 130.49 अंक और निफ्टी 26.45 अंक की बढ़त दर्ज करने में सफल रहा था। रुपये में भी मामूली मजबूती शेयर बाजार की तेजी के बीच भारतीय मुद्रा में भी हल्की मजबूती देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1 पैसे मजबूत होकर 96.24 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। सेंसेक्स के इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी 30 शेयरों वाले सेंसेक्स में शुरुआती कारोबार के दौरान 20 कंपनियों के शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। सबसे ज्यादा तेजी एचसीएल टेक में देखने को मिली, जिसके शेयर करीब 2.6% तक उछल गए। इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, टाइटन, मारुति सुजुकी, टीसीएस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स और ट्रेंट जैसे शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों पर रहा दबाव दूसरी ओर बैंकिंग और कुछ अन्य सेक्टर के शेयरों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई। एक्सिस बैंक, अडानी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) और एनटीपीसी के शेयर शुरुआती कारोबार में लाल निशान में कारोबार करते दिखे। निफ्टी में आईटी शेयरों का दबदबा निफ्टी 50 इंडेक्स में एचसीएल टेक, मारुति सुजुकी और विप्रो सबसे अधिक बढ़त वाले शेयर रहे। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी आईटी और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में सबसे अच्छी तेजी देखने को मिली। वहीं, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर दबाव में रहा और इसमें सबसे ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बढ़त ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो निवेशकों का रुझान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सकारात्मक रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में करीब 0.02% जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.34% की बढ़त दर्ज की गई। निवेशकों की नजर आगे किन बातों पर रहेगी? विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों, वैश्विक बाजारों के रुख, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और रुपये की चाल पर बनी रहेगी। यदि आईटी और ऑटो सेक्टर में खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को आगे भी मजबूती मिल सकती है।
मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को खरीदारी का माहौल देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 200 से अधिक अंक चढ़ा, जबकि निफ्टी 24,100 के ऊपर कारोबार करता दिखा। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और निवेशकों की खरीदारी के चलते बाजार में मजबूती बनी रही। आज आएंगे कई बड़ी कंपनियों के नतीजे आज पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के वित्तीय नतीजे जारी करने वाली प्रमुख कंपनियों पर निवेशकों की खास नजर है। HDFC Life Insurance, HDB Financial Services, ICICI Prudential Life Insurance और Jana Small Finance Bank समेत 40 से अधिक कंपनियां अपने तिमाही नतीजे जारी करेंगी। इन परिणामों का असर संबंधित शेयरों के साथ पूरे बाजार की चाल पर भी पड़ सकता है। वैश्विक संकेतों का भी रहेगा असर विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की नजर बनी रहेगी। इन कारकों के आधार पर दिनभर कारोबार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों ने दी सतर्क निवेश की सलाह बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि तिमाही नतीजों का सीजन शुरू होने के कारण चुनिंदा शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और बाजार के संकेतों को ध्यान में रखकर ही निवेश का फैसला लेने की सलाह दी जा रही है।
मुंबई: पिछले कारोबारी सत्र की बड़ी गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को जोरदार वापसी की। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 500 अंक की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी 24,200 के करीब पहुंच गया। एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के चलते घरेलू बाजार में निवेशकों का भरोसा लौटता दिखा। सुबह करीब 9:25 बजे सेंसेक्स 500.85 अंक (0.65%) की बढ़त के साथ 77,555.79 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 141.75 अंक (0.59%) चढ़कर 24,193.80 के स्तर पर पहुंच गया। पिछले सत्र में आई थी बड़ी गिरावट मंगलवार को बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। उस दौरान: सेंसेक्स 561.46 अंक गिरकर 77,054.94 पर बंद हुआ था। निफ्टी 158.95 अंक टूटकर 24,052.05 पर बंद हुआ था। आज की तेजी ने निवेशकों को कुछ राहत जरूर दी है। इन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स के 30 शेयरों में से अधिकांश हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। सबसे ज्यादा बढ़त वाले प्रमुख शेयर: बजाज फाइनेंस (+2.33%) एक्सिस बैंक (+1.92%) इंडिगो (+1.75%) इटरनल (+1.64%) अल्ट्राटेक सीमेंट (+1.47%) भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ICICI बैंक एशियन पेंट्स रिलायंस इंडस्ट्रीज HDFC बैंक बजाज फिनसर्व अडानी पोर्ट्स बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, सीमेंट और एविएशन सेक्टर में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों पर रहा दबाव बाजार में तेजी के बावजूद आईटी सेक्टर के कुछ बड़े शेयरों में कमजोरी बनी रही। गिरावट वाले प्रमुख शेयर: TCS इंफोसिस टेक महिंद्रा पावर ग्रिड NTPC हिंदुस्तान यूनिलीवर टाटा स्टील आईटी इंडेक्स अन्य सेक्टरों की तुलना में कमजोर बना रहा। ब्रॉडर मार्केट में भी दिखी मजबूती केवल लार्जकैप ही नहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स लगभग 0.39% चढ़ा। निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में भी करीब 0.39% की तेजी दर्ज की गई। सेक्टरवार प्रदर्शन में आईटी को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख सेक्टर सकारात्मक दायरे में कारोबार करते नजर आए। वैश्विक संकेतों का मिला सहारा बाजार को वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक संकेत मिले। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20% ट्रांजिट शुल्क नहीं लगाया जाएगा, जिससे वैश्विक निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रही और ब्रेंट क्रूड लगभग 1.16% बढ़कर 85.71 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। रुपये की चाल भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग स्थिर रहा। रुपया 96.1725 प्रति डॉलर पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में यह 96.20 पर बंद हुआ था। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल बाजार वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कॉर्पोरेट नतीजों पर नजर बनाए हुए है। यदि बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में खरीदारी जारी रहती है, तो बाजार में आगे भी सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है।
कोलकाता: कोलकाता में इस्कॉन (ISKCON) की 55वीं ऐतिहासिक रथयात्रा बुधवार, 16 जुलाई को भव्य रूप से निकाली जाएगी। इस वर्ष पहली बार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ करेंगे। वहीं, इस्कॉन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी इस समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। मुख्यमंत्री करेंगे रथयात्रा का शुभारंभ इस्कॉन के अनुसार मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सुबह करीब 11:45 बजे कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगे। वह भगवान जगन्नाथ, बलराम और देवी सुभद्रा के दर्शन करने के बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ करेंगे। नई सरकार बनने के बाद यह पहला अवसर होगा, जब मुख्यमंत्री इस्कॉन की कोलकाता रथयात्रा में शामिल होंगे। 55वें वर्ष में प्रवेश कर रही रथयात्रा इस्कॉन कोलकाता द्वारा आयोजित यह रथयात्रा पिछले 54 वर्षों से लगातार आयोजित की जा रही है। इस वर्ष का मुख्य विषय "भारत-मंदिर संस्कृति की विरासत" रखा गया है। आयोजकों के अनुसार चीन, रूस, यूक्रेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन में भाग लेने के लिए कोलकाता पहुंचे हैं। इस मार्ग से गुजरेगी रथयात्रा रथयात्रा की शुरुआत इस्कॉन मंदिर, 3सी अल्बर्ट रोड से होगी। इसके बाद यात्रा सरत बोस रोड, एक्साइड चौराहा, हंगरफोर्ड स्ट्रीट, एजेसी बोस रोड, हाजरा रोड, श्यामा प्रसाद मुखर्जी रोड, जवाहरलाल नेहरू रोड और आउटराम रोड से होते हुए ब्रिगेड परेड ग्राउंड स्थित मौसी बाड़ी पहुंचेगी, जहां परंपरा के अनुसार भगवान का रथ ठहरेगा। 24 जुलाई को निकलेगी बहुदा यात्रा भगवान जगन्नाथ की वापसी यात्रा यानी बहुदा (उल्टा) रथयात्रा 24 जुलाई को आयोजित होगी। यह यात्रा ब्रिगेड परेड ग्राउंड से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए पुनः इस्कॉन मंदिर पहुंचेगी। 17 से 23 जुलाई तक लगेगा श्री जगन्नाथ महामेला रथयात्रा के अगले दिन से 17 जुलाई से 23 जुलाई तक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में श्री जगन्नाथ महामेला आयोजित किया जाएगा। यहां तिरुपति बालाजी मंदिर की स्थापत्य शैली पर आधारित गुंडिचा मंदिर की प्रतिकृति बनाई जाएगी, जहां सात दिनों तक भगवान जगन्नाथ, बलराम और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। शांति और सद्भाव का संदेश देगी रथयात्रा आयोजकों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक तनाव और संघर्ष के दौर में इस वर्ष की रथयात्रा शांति, प्रेम, भाईचारे और मानवता का संदेश देने का प्रयास करेगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए हैं।
मुंबई, एजेंसियां। आज के कारोबारी सत्र में कई बड़े शेयर निवेशकों के रडार पर रहेंगे। पहली तिमाही के नतीजे, कॉरपोरेट घोषणाएं और सेक्टर से जुड़े अपडेट्स के चलते इन कंपनियों के शेयरों में अच्छी-खासी हलचल देखने को मिल सकती है। बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को इन शेयरों पर खास नजर रखने की सलाह दी है। इन शेयरों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर आज दिवीज़ लैबोरेट्रीज़ , बजाज फिनसर्व, भारत फोर्ज और कोफोर्ज प्रमुख फोकस में रहेंगे। ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि इन कंपनियों में तकनीकी संकेत और कारोबारी संभावनाएं बेहतर दिखाई दे रही हैं। कॉरपोरेट अपडेट वाले शेयर भी चर्चा में इसके अलावा टाटा एलेक्सी , एचसीएल टेक , ICICI Prudential AMC, बायोकॉन, और स्पाइसजेट भी आज निवेशकों की निगाह में रहेंगे। इन कंपनियों से जुड़े ताज़ा कॉरपोरेट घटनाक्रम और कारोबारी अपडेट्स के कारण इनमें उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। अदाणी समूह के शेयरों पर भी फोकस बाजार में अदाणी एंटरप्राइजेज भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हाल के दिनों में कंपनी के शेयरों में तेजी देखने को मिली है और निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज भी इस शेयर में अच्छी गतिविधि बनी रह सकती है। बाजार की दिशा पर इन कारकों की नजर विश्लेषकों के अनुसार आज के कारोबार में अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और पहली तिमाही के नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को किसी भी निवेश निर्णय से पहले बाजार की चाल और कंपनियों के ताज़ा अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 500 अंक तक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 24,100 के नीचे फिसल गया। बाजार पर अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर साफ दिखाई दिया। तेल की कीमतों ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगे कच्चे तेल से महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इसी वजह से निवेशकों ने बाजार खुलते ही बिकवाली शुरू कर दी। इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट शुरुआती कारोबार में बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। वहीं फार्मा सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और कुछ दवा कंपनियों के शेयरों में खरीदारी दर्ज की गई। आईटी शेयरों में भी मिला-जुला रुख रहा। आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजे, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतें और मध्य-पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति बाजार की दिशा तय करेंगी। यदि वैश्विक तनाव कम होता है तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है, लेकिन फिलहाल उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत तेज गिरावट के साथ हुई। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला। सुबह कारोबार के दौरान BSE Sensex 626.40 अंक यानी 0.81% गिरकर 76,942.99 पर पहुंच गया, जबकि NSE Nifty 50 184 अंक यानी 0.76% टूटकर 24,022.90 पर कारोबार करता दिखा। मध्य पूर्व तनाव से बाजार पर दबाव बाजार में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव रही। रिपोर्ट्स के अनुसार, सप्ताहांत में दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमले हुए, जिसके बाद ईरान ने एक बार फिर Strait of Hormuz को बंद करने का दावा किया। यह समुद्री मार्ग दुनिया में तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके बंद होने की आशंका से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। कच्चे तेल की कीमतों में 4% से ज्यादा उछाल तनाव बढ़ने के बाद: Brent Crude 4% से अधिक बढ़कर 79.12 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। WTI Crude भी 4% से ज्यादा चढ़कर 74.33 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करने लगा। भारत अपनी अधिकांश तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है। सभी सेक्टर लाल निशान में सोमवार सुबह बाजार में बिकवाली लगभग सभी सेक्टरों में देखने को मिली। सभी 16 सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। सबसे ज्यादा दबाव इन सेक्टरों पर रहा: बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज मेटल मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में गिरावट बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले थोड़ी कम रही। वहीं India VIX, जिसे बाजार का "फियर इंडेक्स" कहा जाता है, 10% से ज्यादा उछल गया, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता का संकेत है। इन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट सेंसेक्स के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे: टाटा स्टील इंडिगो बजाज फाइनेंस BEL अल्ट्राटेक सीमेंट लार्सन एंड टुब्रो (L&T) टाइटन HDFC बैंक मारुति सुजुकी बजाज फिनसर्व इंडिगो के शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 3% तक टूट गए। आईटी शेयरों ने दिखाई मजबूती बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ आईटी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों में बढ़त दर्ज की गई: TCS HCLTech Tech Mahindra NTPC विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर तिमाही नतीजों की उम्मीद से आईटी सेक्टर को समर्थन मिल रहा है। विशेषज्ञों की क्या राय है? बाजार विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे अहम संकेतक कच्चे तेल की कीमत है। उनका कहना है कि यदि Brent Crude 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहता है, तो बाजार पर दबाव सीमित रह सकता है। लेकिन यदि कीमतें 90 डॉलर के ऊपर जाती हैं, तो बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार खरीदारी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है, जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिल सकता है।
मुंबई, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबारी सप्ताह की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 606.04 अंक टूटकर 76,963.35 के स्तर पर खुला, जबकि एनएसई का निफ्टी 167 अंक लुढ़ककर 24,039 पर पहुंच गया। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और निवेशकों की बढ़ती सतर्कता ने बाजार पर दबाव बनाया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव रिटेल सेक्टर के शेयरों पर दिखा। Trent Ltd के शेयर पहली तिमाही के कमजोर नतीजों के बाद 12 प्रतिशत से अधिक टूट गए। इसके अलावा कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली का माहौल रहा। एशियाई बाजारों और वॉल स्ट्रीट पर भी दबाव वैश्विक बाजारों में भी तनाव का असर देखने को मिला। जापान का निक्केई 225 करीब 0.70 प्रतिशत गिर गया, जबकि अमेरिकी शेयर वायदा बाजार भी लाल निशान में कारोबार करता दिखा। डाऊ जोन्स फ्यूचर्स 135 अंक, एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.3 प्रतिशत और नैस्डैक-100 फ्यूचर्स 0.5 प्रतिशत तक नीचे रहे। निवेशक मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। क्रूड ऑयल और डॉलर में तेजी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 4.41 प्रतिशत की तेजी के साथ 79.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 74.57 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखा। घरेलू वायदा बाजार में भी कच्चे तेल की कीमत करीब 177 रुपये बढ़कर 6,991 रुपये प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.18 प्रतिशत बढ़कर 101.13 पर पहुंच गया। मजबूत डॉलर और महंगे तेल से रुपये पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जल्द नहीं थमा, तो आने वाले दिनों में वैश्विक और भारतीय बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को मजबूत शुरुआत करते हुए निवेशकों का भरोसा फिर से बढ़ा दिया। वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद घरेलू बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला। आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी TCS के उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में राहत ने बाजार की तेजी को मजबूती दी। सुबह करीब 9:20 बजे बीएसई सेंसेक्स 676.12 अंक यानी 0.88 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,417.94 पर कारोबार कर रहा था। वहीं एनएसई निफ्टी 50 196.30 अंक यानी 0.82 प्रतिशत चढ़कर 24,159.10 के स्तर पर पहुंच गया। TCS के शानदार नतीजों से IT सेक्टर में जबरदस्त खरीदारी बाजार की तेजी का सबसे बड़ा कारण आईटी शेयरों में आई मजबूती रही। जून तिमाही के नतीजों में TCS ने बाजार की उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे पूरे आईटी सेक्टर में सकारात्मक माहौल बन गया। निफ्टी आईटी इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 3 प्रतिशत से अधिक उछल गया। Tech Mahindra, TCS, HCLTech और Infosys जैसे प्रमुख शेयरों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा L&T Technology Services और Coforge के शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। मुनाफे और ऑर्डर बुक दोनों में मजबूत प्रदर्शन TCS ने जून तिमाही में 13,349 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक है। कंपनी की आय बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये पहुंच गई। इसके साथ ही कंपनी के बोर्ड ने 12 रुपये प्रति शेयर अंतरिम लाभांश देने का भी ऐलान किया। कंपनी की ऑर्डर बुक 9.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। वहीं AI कारोबार का वार्षिक रन रेट बढ़कर 2.6 अरब डॉलर हो गया, जो इस क्षेत्र में बढ़ती मांग का संकेत माना जा रहा है। 9 हजार से ज्यादा नई भर्तियों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा TCS ने जून तिमाही के दौरान 9,279 नए कर्मचारियों की नियुक्ति की, जो पिछले एक साल से अधिक समय में सबसे ज्यादा तिमाही भर्ती है। इसे भविष्य की मांग को लेकर कंपनी के भरोसे का संकेत माना जा रहा है। कंपनी के सीईओ के. कृतिवासन ने भी आने वाली तिमाहियों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए। उनका कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग और लाइफ साइंस सेक्टर में टेक्नोलॉजी खर्च बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि AI कारोबार के लिए खतरा नहीं बल्कि नए अवसर लेकर आ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों से भी मिली राहत बाजार को एक और बड़ी राहत कच्चे तेल की कीमतों से मिली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बावजूद ब्रेंट क्रूड करीब 76.52 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड लगभग 72.29 डॉलर प्रति बैरल पर बना रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चा तेल 80 से 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचता तो भारत की अर्थव्यवस्था, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता था। फिलहाल कीमतों के नियंत्रण में रहने से निवेशकों की चिंता कम हुई है। लगभग सभी सेक्टरों में लौटी तेजी आईटी के अलावा बैंकिंग और अन्य सेक्टरों में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, पीएसयू बैंक, ऑटो, एफएमसीजी, मीडिया और रियल्टी इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी रही। वहीं बाजार की अस्थिरता मापने वाला इंडिया VIX 5 प्रतिशत से अधिक गिर गया, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर? विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार की दिशा दो अहम कारकों पर निर्भर करेगी। पहला, अमेरिका-ईरान के बीच भू-राजनीतिक घटनाक्रम और दूसरा, जून तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजे। TCS ने कमाई के सीजन की सकारात्मक शुरुआत की है। अब निवेशकों की नजर अन्य बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी, जो आने वाले दिनों में शेयर बाजार की अगली चाल तय कर सकते हैं। नोट: शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले किसी योग्य वित्तीय सलाहकार की सलाह अवश्य लें।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत वापसी की। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक चढ़ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,000 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में तीन महीनों की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट दर्ज की गई थी। सुबह करीब 9:40 बजे सेंसेक्स 516.15 अंक (0.67%) की बढ़त के साथ 77,019.75 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 139.90 अंक (0.59%) चढ़कर 24,021.95 पर पहुंच गया। बुधवार की गिरावट के बाद क्यों लौटा बाजार? बुधवार को अमेरिका की ओर से ईरान पर सैन्य कार्रवाई और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई थी। इससे वैश्विक बाजारों में बिकवाली देखने को मिली और भारतीय बाजार भी 2% से अधिक टूट गया। हालांकि गुरुवार को निवेशकों की धारणा में सुधार देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल हालात उतने गंभीर नहीं हैं, जितनी आशंका पहले जताई जा रही थी। इसी वजह से निवेशकों ने फिर से खरीदारी शुरू कर दी। कच्चे तेल की कीमत अभी चिंता का बड़ा कारण नहीं विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 79–80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। यह स्तर भारत के लिए चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन फिलहाल अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकट नहीं माना जा रहा। विश्लेषकों का कहना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित नहीं होती और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर नहीं जातीं, तो भारतीय बाजार पर इसका बड़ा नकारात्मक असर पड़ने की संभावना कम है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी से मिला बाजार को सहारा बाजार में मजबूती का एक बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार खरीदारी भी रही है। पिछले चार कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगभग 3,954 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी आगे भी बनी रह सकती है। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में भी दिखी तेजी गुरुवार की तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली। Nifty Smallcap 100 में 1% से अधिक की बढ़त Nifty Midcap 50 और Midcap 100 में लगभग 1% की तेजी India VIX में 7% से अधिक की गिरावट, जिससे बाजार में घबराहट कम होने के संकेत मिले किन सेक्टरों ने दिखाई सबसे ज्यादा मजबूती? गुरुवार के कारोबार में कई सेक्टरों में अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। सबसे ज्यादा तेजी इन सेक्टरों में रही— कंज्यूमर ड्यूरेबल्स रियल्टी प्राइवेट बैंक फार्मा हेल्थकेयर ऑटो एफएमसीजी पीएसयू बैंक वहीं आईटी सेक्टर दबाव में रहा। निवेशकों ने TCS के तिमाही नतीजों से पहले मुनाफावसूली की, जिससे Infosys, HCLTech, TCS और Tech Mahindra के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स के टॉप गेनर्स और लूजर्स शुरुआती कारोबार में Eternal सबसे ज्यादा बढ़त वाला शेयर रहा। इसके अलावा Sun Pharma, Titan, Bharti Airtel, ICICI Bank, Asian Paints, Larsen & Toubro, HDFC Bank, Power Grid, UltraTech Cement और BEL में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई। दूसरी ओर Infosys में सबसे ज्यादा गिरावट रही, जबकि HCLTech, TCS और Tech Mahindra भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। रुपये में स्थिरता से भी मिला समर्थन भारतीय रुपया शुरुआती कारोबार में 95.55 प्रति डॉलर के स्तर पर लगभग स्थिर रहा। मुद्रा बाजार में स्थिरता ने भी निवेशकों के भरोसे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। क्या कहते हैं बाजार के जानकार? विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी रहेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव और नहीं बढ़ता तथा तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में आगे भी रिकवरी जारी रह सकती है।
मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के चलते बुधवार को शुरुआती कारोबार में घरेलू बाजार भारी दबाव में नजर आया। सेंसेक्स 550 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 24,250 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में चौतरफा बिकवाली के कारण निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना रहा। बाजार में इस तेज गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या है? सुबह करीब 9:32 बजे सेंसेक्स 549.79 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,630.93 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 173.71 अंक यानी 0.71 प्रतिशत टूटकर 24,225.00 के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर बाजार और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। सबसे ज्यादा दबाव तेल और एविएशन सेक्टर के शेयरों पर देखा गया। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) का शेयर करीब चार प्रतिशत तक लुढ़क गया। वहीं, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) के शेयरों में भी लगभग दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल के महंगा होने से एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की लागत बढ़ने की आशंका ने एयरलाइन कंपनियों के शेयरों पर दबाव बनाया। वैश्विक बाजारों का हाल क्या है? वैश्विक बाजारों में भी मिश्रित रुख देखने को मिला। जापान का टोपिक्स और ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 इंडेक्स गिरावट में रहे, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। अमेरिकी और यूरोपीय फ्यूचर्स में सीमित उतार-चढ़ाव रहा। बाजार विश्लेषकों का क्या है कहना? बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा गिरावट मुख्य रूप से भू-राजनीतिक तनाव का असर है। आगे बाजार की दिशा जून तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति और मानसून की स्थिति पर निर्भर करेगी। विशेषज्ञों ने निवेशकों को घबराहट में निर्णय लेने से बचने और दीर्घकालिक निवेश रणनीति अपनाने की सलाह दी है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 150 अंक से अधिक चढ़कर 78,450 के ऊपर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 ने 24,450 का स्तर पार कर लिया। बाजार में यह लगातार पांचवां कारोबारी सत्र है, जब प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। विदेशी निवेश और मजबूत तिमाही अपडेट से बाजार को सहारा विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी, कंपनियों के मजबूत पहली तिमाही कारोबारी अपडेट और कच्चे तेल की स्थिर कीमतों ने बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाए रखा है। शुरुआती कारोबार में अधिकांश सेकोरों में खरीदारी देखने को मिली। रिलायंस, टाइटन और बैंकिंग शेयरों में तेजी कारोबार के दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाइटन, प्रमुख बैंकिंग शेयरों और चुनिंदा मिडकैप कंपनियों में अच्छी खरीदारी देखी गई। हालांकि, ट्रेंट के शेयर कमजोर तिमाही राजस्व वृद्धि के कारण दबाव में रहे। पहली तिमाही नतीजों पर निवेशकों की नजर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों की नजर अब आईटी, बैंकिंग और उपभोक्ता क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के आगामी परिणामों पर रहेगी।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL), टाइटन और ट्रेंट समेत कई प्रमुख कंपनियों के शेयर निवेशकों के फोकस में रहेंगे। कंपनियों के तिमाही कारोबारी अपडेट, कॉर्पोरेट घोषणाओं और वैश्विक बाजार के संकेतों के बीच इन शेयरों में कारोबार के दौरान अच्छी हलचल देखने को मिल सकती है। तिमाही अपडेट पर रहेगी नजर विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों की निगाह कंपनियों के पहली तिमाही के कारोबारी प्रदर्शन और आगे की रणनीति से जुड़े संकेतों पर रहेगी। इसी वजह से रिलायंस, टाइटन और ट्रेंट के शेयरों में खरीदारी और मुनाफावसूली दोनों देखने को मिल सकती हैं। अन्य शेयर भी रहेंगे चर्चा में इनके अलावा कोचीन शिपयार्ड, इंडियन ऑयल, नेस्ले इंडिया समेत कई अन्य कंपनियों के शेयर भी बाजार में चर्चा का केंद्र बने रह सकते हैं। निवेशकों को सलाह दी गई है कि किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनियों के ताजा अपडेट और बाजार की स्थिति पर नजर रखें
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती देखने को मिली। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और शांति की उम्मीद से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 500 अंक से अधिक चढ़ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 24,300 अंक के ऊपर कारोबार करता नजर आया। सुबह करीब 9:22 बजे सेंसेक्स 487.81 अंक (0.63%) की बढ़त के साथ 77,989.93 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 156.80 अंक (0.65%) मजबूत होकर 24,332.50 के स्तर पर पहुंच गया। IT सेक्टर ने संभाली बाजार की कमान सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 24 शेयर बढ़त के साथ खुले। सबसे ज्यादा तेजी HCL Technologies के शेयर में दर्ज की गई, जिसमें 4 प्रतिशत से अधिक उछाल आया। इसके अलावा Tech Mahindra, Infosys, TCS, Tata Steel, Sun Pharma, Bajaj Finserv और UltraTech Cement जैसे दिग्गज शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। आईटी सेक्टर में मजबूत निवेशकों की दिलचस्पी ने बाजार की तेजी को और मजबूती दी। इन शेयरों में दिखी गिरावट बाजार की तेजी के बावजूद कुछ शेयर दबाव में रहे। Mahindra & Mahindra के शेयर में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा SBI, Kotak Mahindra Bank, IndiGo, Titan, Adani Ports और Asian Paints जैसे शेयरों में भी हल्की कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10 बजे तक प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन तेजी वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे— HCL Technologies: +4.31% Tech Mahindra: +2.81% Tata Steel: +2.78% Sun Pharma: +2.07% BEL: +1.88% Eternal: +1.75% Trent: +1.56% Bajaj Finserv: +1.55% TCS: +1.33% UltraTech Cement: +1.23% वहीं गिरावट वाले प्रमुख शेयर— Mahindra & Mahindra: -0.95% SBI: -0.67% Kotak Mahindra Bank: -0.38% IndiGo: -0.34% Titan: -0.33% Adani Ports: -0.28% ब्रॉडर मार्केट में भी खरीदारी मुख्य सूचकांकों के साथ-साथ व्यापक बाजार में भी मजबूती देखने को मिली। Nifty Midcap Index करीब 0.21% चढ़ा। Nifty Smallcap Index में लगभग 0.47% की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स में Nifty Metal और Nifty IT सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर रहे। दूसरी ओर Nifty Bank और Nifty PSU Bank अपेक्षाकृत कमजोर रहे। निवेशकों का बढ़ा भरोसा विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद, विदेशी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और आईटी शेयरों में मजबूत खरीदारी ने भारतीय शेयर बाजार को लगातार तीसरे दिन बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार का सकारात्मक रुख जारी रह सकता है।
मुंबई: घरेलू शेयर बाजार ने लगातार दूसरे कारोबारी दिन मजबूत शुरुआत की। अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत से भू-राजनीतिक तनाव कम होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 500 अंक तक उछल गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 24,150 अंक के करीब पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी आईटी शेयरों में देखने को मिली, जबकि व्यापक बाजार (Broader Market) में भी सकारात्मक माहौल बना रहा। सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूत शुरुआत सुबह करीब 9:40 बजे तक— बीएसई सेंसेक्स 493.71 अंक यानी 0.64% की बढ़त के साथ 77,416.35 अंक पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी 50 143.85 अंक यानी 0.60% चढ़कर 24,149.70 अंक पर पहुंच गया। वहीं, शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया भी मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा। आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी बाजार की तेजी में सबसे बड़ा योगदान आईटी सेक्टर का रहा। Infosys के शेयरों में 3 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जिससे यह सेंसेक्स के सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहा। इसके अलावा— HCL Technologies TCS Tech Mahindra के शेयरों में भी लगभग 2 प्रतिशत तक की बढ़त देखने को मिली। आईटी शेयरों में आई इस तेजी ने पूरे बाजार की धारणा को मजबूत किया। Adani Enterprises सहित कई दिग्गज शेयरों में बढ़त आईटी कंपनियों के अलावा Adani Enterprises सहित कई अन्य प्रमुख शेयरों में भी निवेशकों की अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। हालांकि, सभी शेयरों में तेजी नहीं रही। Bajaj Finance के शेयरों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और यह सेंसेक्स में सबसे अधिक नुकसान उठाने वाला शेयर रहा। ब्रॉडर मार्केट में भी दिखी मजबूती केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी निवेशकों का उत्साह देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 करीब 0.3% मजबूत रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में भी लगभग 0.3% की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो— निफ्टी आईटी लगभग 3% चढ़ा। निफ्टी रियल्टी में करीब 1% की तेजी रही। निफ्टी मेटल इंडेक्स भी लगभग 1% मजबूत हुआ। एनएसई पर कारोबार के दौरान लगभग— 1,818 शेयरों में तेजी, 586 शेयरों में गिरावट, जबकि 99 शेयर बिना किसी बदलाव के कारोबार करते नजर आए। यह आंकड़े बाजार में व्यापक खरीदारी का संकेत देते हैं। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिला समर्थन विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी है। ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 1.06 प्रतिशत गिरकर 70.81 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। बताया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच कतर की राजधानी दोहा में जारी वार्ता से निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई है। दोनों देशों के प्रतिनिधि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से सामान्य रूप से संचालित करने और ईरान के फ्रीज किए गए फंड को जारी करने जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की संभावना बढ़ सकती है। निवेशकों की नजर आगे के संकेतों पर विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यही कारक आगे बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन तेजी देखी गयी। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 400 अंकों से अधिक चढ़ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,100 के स्तर के ऊपर कारोबार करता दिखा। बाजार में तेजी की अगुवाई आईटी और बैंकिंग शेयरों ने की। क्यों आई बाजार में तेजी? विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने, वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में प्रगति की खबरों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। आईटी शेयरों ने दिखाई मजबूती आज के कारोबार में Infosys, TCS और अन्य आईटी कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। ऑटो और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों ने भी बाजार को समर्थन दिया। विशेषज्ञों की राय बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक संकेत सकारात्मक बने रहे और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रही, तो आने वाले दिनों में निफ्टी 24,500–25,000 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। हालांकि, निवेशकों को उतार-चढ़ाव के बीच सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार, 29 जून 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्त और मिले-जुले रुख के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज करने के बाद बीएसई सेंसेक्स लाल निशान में फिसल गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर बने रहने में सफल रहा। निवेशकों ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सतर्क रुख अपनाया, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स 47.96 अंक यानी 0.06 फीसदी की गिरावट के साथ 77,052.51 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 13.55 अंक यानी 0.06 फीसदी की बढ़त के साथ 24,069.55 पर बना रहा। इस दौरान इटरनल और ट्रेंट के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए टॉप गेनर्स की सूची में जगह बनाई। ईरान-अमेरिका तनाव का बाजार पर असर बाजार की सुस्त शुरुआत के पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव रहा। सप्ताहांत में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी देखने को मिली। तेल महंगा होने की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया, जिसका असर घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत पर भी दिखाई दिया। विशेषज्ञों का नजरिया अब भी सकारात्मक हालांकि बाजार की शुरुआत कमजोर रही, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार की दीर्घकालिक और निकट अवधि की तस्वीर अब भी मजबूत बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के 24,000 के स्तर से ऊपर बने रहने की संभावना है। उनका मानना है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है और भारतीय रुपये में मजबूती बनी रहती है, तो बाजार को आगे भी समर्थन मिलता रहेगा। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले संकेत भी निवेशकों के लिए उत्साहजनक रहे। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स करीब 1.9 फीसदी की बढ़त के साथ सबसे मजबूत रहा। चीन का शंघाई कंपोजिट और ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 भी बढ़त में कारोबार करते दिखे। वहीं, अमेरिकी एसएंडपी 500 फ्यूचर्स और यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स में भी मजबूती दर्ज की गई। कुल मिलाकर, आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निवेशकों की नजर रहेगी, क्योंकि यही बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
वैश्विक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमत घटने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ, जिससे बाजार की शुरुआत हरे निशान में हुई। शुरुआती कारोबार में S&P BSE Sensex 306.22 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,570.55 पर पहुंच गया। वहीं Nifty 50 72.95 अंक या 0.31 प्रतिशत चढ़कर 23,926.85 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। ईरान-अमेरिका समझौते से कच्चे तेल में गिरावट बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक शांति समझौते की खबर रही। इससे लंबे समय तक चलने वाले भू-राजनीतिक संघर्ष की आशंकाएं कम हुईं और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसलकर 82.99 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड करीब 80.74 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में गिरावट देश के लिए राहत की खबर मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई, चालू खाता घाटा और रुपये पर दबाव कम हो सकता है। रुपये में मजबूती से बाजार को मिला सहारा विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की मजबूती बाजार को समर्थन दे रही है। हाल के दिनों में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.96 के निचले स्तर से सुधरकर 94.71 तक पहुंच गया है। इससे विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली पर भी कुछ हद तक रोक लग सकती है। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में AI आधारित निवेश थीम की मजबूती के कारण विदेशी निवेश का कुछ हिस्सा भारत से बाहर जा सकता है। आईटी सेक्टर बना बाजार का स्टार सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आईटी शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी आईटी : +1.43% निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स : +0.91% निफ्टी मीडिया : +0.64% निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज : +0.42% वहीं मेटल शेयरों पर दबाव बना रहा और निफ्टी मेटल इंडेक्स 1.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे कमजोर सेक्टर साबित हुआ। इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में आईटी कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन किया। सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयर: HCLTech (+3.11%) Bajaj Finserv (+1.61%) Bajaj Finance (+1.60%) Hindustan Unilever (+1.55%) Tech Mahindra (+1.46%) Tata Consultancy Services (+1.44%) इसके अलावा Infosys, Bharti Airtel, HDFC Bank और Larsen & Toubro में भी खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों पर रहा दबाव दूसरी ओर कुछ बड़े शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। Axis Bank (-1.10%) UltraTech Cement (-0.56%) Tata Steel (-0.48%) Power Grid Corporation of India (-0.42%) Bharat Electronics Limited (-0.40%) मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बनी रही तेजी बाजार की मजबूती केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में भी निवेशकों की खरीदारी जारी रही। निफ्टी मिडकैप 50 : +0.35% निफ्टी मिडकैप 100 : +0.31% निफ्टी स्मॉलकैप 100 : +0.42% इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों का भरोसा बाजार के विभिन्न वर्गों में बना हुआ है। आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर? विश्लेषकों के अनुसार, हालिया तेजी को समर्थन जरूर मिला है, लेकिन आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई अहम कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक AI रैली, घरेलू वैल्यूएशन, मानसून की प्रगति और महंगाई के आंकड़े प्रमुख रहेंगे।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। वैश्विक संकेतों के मजबूत रहने और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने की खबरों के बीच सेंसेक्स 736.38 अंक की बढ़त के साथ 76,264.33 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 231 अंक चढ़कर 23,853.90 के स्तर पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में बाजार ने 1,000 से अधिक अंकों की शुरुआती बढ़त भी दर्ज की। रुपये में मजबूती, डॉलर के मुकाबले 47 पैसे की बढ़त विदेशी मुद्रा बाजार में भी भारतीय रुपये ने मजबूती दिखाई। सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 47 पैसे मजबूत होकर बंद हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपये को समर्थन मिला है। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की खबरों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ा। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 5 प्रतिशत गिरकर 82.90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जो पिछले तीन महीनों का निचला स्तर माना जा रहा है। इससे भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को राहत मिलने की उम्मीद है। एशियाई बाजारों में भी मजबूत तेजी वैश्विक बाजारों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई 225 सूचकांक करीब 5 प्रतिशत तक उछले, जबकि हांगकांग और शंघाई के बाजार भी तेजी के साथ बंद हुए। घरेलू बाजार में ट्रेंट, मारुति, बजाज फिनसर्व और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। विशेषज्ञों की राय और बाजार की स्थिति बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-ईरान समझौते की संभावनाओं से वैश्विक जोखिम कम हुआ है, जिसका सीधा फायदा इक्विटी बाजारों को मिला है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत में महंगाई पर दबाव घटने और आर्थिक स्थिरता में सुधार की उम्मीद है। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने हाल ही में 1,082 करोड़ रुपये की बिकवाली की है, जो बाजार के लिए सतर्क संकेत माना जा रहा है। कुल मिलाकर, वैश्विक सकारात्मक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे सत्र में तेजी दर्ज की गई और निवेशकों की धारणा मजबूत बनी रही।
मुंबई, एजेंसियां। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने जोरदार शुरुआत की। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव कम होने की खबर के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा और इसका असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 1000 अंकों से अधिक की तेजी के साथ खुला, जबकि एनएसई निफ्टी 330 अंकों से ज्यादा चढ़कर कारोबार करता नजर आया। विदेशी मुद्रा बाजार में भी सकारात्मक माहौल रहा और रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 53 पैसे मजबूत होकर खुला। इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स में सूचीबद्ध कंपनियों में इंडिगो, इटरनल, बजाज फाइनेंस और एशियन पेंट्स के शेयरों में सबसे अधिक तेजी दर्ज की गई। वहीं, निफ्टी में श्रीराम फाइनेंस, इंडिगो, इटरनल, बजाज फाइनेंस और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल (TMPV) के शेयर प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। बाजार में खरीदारी का माहौल बनने से अधिकांश सेक्टर हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। एशियाई बाजारों में भी लौटी मजबूती अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद एशियाई बाजारों में भी शानदार तेजी देखने को मिली। जापान का निक्केई सूचकांक चार प्रतिशत से अधिक चढ़कर नई ऊंचाई पर पहुंच गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी 4.3 प्रतिशत मजबूत हुआ, जबकि ऑस्ट्रेलिया का ASX200 भी अच्छी बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। वैश्विक निवेशकों ने इस घटनाक्रम को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया। कच्चे तेल की कीमतों में राहत वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.45 डॉलर घटकर 83.88 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 3.95 डॉलर टूटकर 80.93 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल की कीमतों में नरमी से भारत जैसे आयातक देशों को राहत मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गिरावट जारी रहती है तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह सामान्य होने में अभी कुछ समय लग सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।