अगर आप Samsung Galaxy स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं और अभी तक सिर्फ मैसेज टाइप करने के लिए ही डिफॉल्ट Samsung Keyboard का उपयोग कर रहे हैं, तो शायद आप इसके कई शानदार फीचर्स से अनजान हैं। सैमसंग ने अपने कीबोर्ड में ऐसे कई स्मार्ट टूल्स दिए हैं, जो टाइपिंग को तेज, आसान और अधिक सुविधाजनक बनाते हैं। चाहे लंबा ईमेल लिखना हो, अलग भाषा में चैट करनी हो या बिना ऐप बदले YouTube वीडियो शेयर करना हो, Samsung Keyboard के ये फीचर्स आपके रोजमर्रा के अनुभव को बेहतर बना सकते हैं। 1. स्पेसबार से करें Cursor Control लंबे मैसेज या ईमेल में किसी शब्द को एडिट करने के लिए बार-बार स्क्रीन पर टैप करना पड़ता है। Samsung Keyboard में यह काम बेहद आसान हो जाता है। बस स्पेसबार को दबाकर रखें और उंगली को दाएं या बाएं स्वाइप करें। इससे कर्सर आसानी से मूव होगा और आप बिल्कुल लैपटॉप के ट्रैकपैड की तरह टेक्स्ट एडिट कर सकेंगे। फायदा तेजी से टेक्स्ट एडिटिंग गलतियों को तुरंत सुधारना लंबी चैट या ईमेल में आसान नेविगेशन 2. इन-बिल्ट Translator से करें रियल-टाइम ट्रांसलेशन अगर आप किसी दूसरी भाषा बोलने वाले व्यक्ति से बातचीत कर रहे हैं, तो अलग से ट्रांसलेशन ऐप खोलने की जरूरत नहीं है। Samsung Keyboard में मौजूद Translate फीचर आपके लिखे हुए टेक्स्ट को रियल-टाइम में दूसरी भाषा में बदल देता है। कैसे करें इस्तेमाल? कीबोर्ड के ऊपर दिए गए Three Dots (⋮) पर टैप करें। Translate विकल्प चुनें। अपनी पसंद की भाषा सिलेक्ट करें। अब जो भी टाइप करेंगे, वह चुनी गई भाषा में ट्रांसलेट होकर भेजा जा सकेगा। 3. अपनी सुविधा के अनुसार बदलें Keyboard का Size हर व्यक्ति के हाथ और टाइपिंग का तरीका अलग होता है। Samsung Keyboard आपको कीबोर्ड का आकार और लेआउट बदलने की सुविधा भी देता है। आप चाहें तो कीबोर्ड को छोटा, बड़ा या स्क्रीन पर ऊपर-नीचे एडजस्ट कर सकते हैं। इसके अलावा One-Handed Mode ऑन करके एक हाथ से भी आराम से टाइपिंग की जा सकती है। फायदा बड़े फोन में आसान टाइपिंग एक हाथ से आरामदायक इस्तेमाल बेहतर यूजर एक्सपीरियंस 4. चैट के दौरान सीधे शेयर करें YouTube और Spotify लिंक दोस्तों के साथ बातचीत करते समय अगर कोई वीडियो या गाना शेयर करना हो, तो ऐप बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। Samsung Keyboard के टूलबार में मौजूद YouTube और Spotify आइकन की मदद से आप सीधे कीबोर्ड के अंदर ही कंटेंट सर्च करके चैट में शेयर कर सकते हैं। फायदा ऐप बदलने की जरूरत नहीं तेजी से वीडियो और गाने शेयर करें चैटिंग का अनुभव होगा और आसान 5. Swipe Delete से एक झटके में हटाएं पूरा टेक्स्ट अगर आपने गलती से लंबा वाक्य या पूरा पैराग्राफ टाइप कर दिया है, तो Backspace को बार-बार दबाने की जरूरत नहीं है। Samsung Keyboard में Swipe Delete फीचर की मदद से आप जेस्चर का इस्तेमाल करके तेजी से टेक्स्ट डिलीट कर सकते हैं। इसके लिए: Settings → Swipe, Touch and Feedback → Cursor Control / Backspace (Delete) विकल्प को सक्रिय करें।
आज के समय में घर या ऑफिस में तेज और स्थिर इंटरनेट कनेक्शन हर किसी की जरूरत बन चुका है। लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि एक कमरे में WiFi की स्पीड शानदार रहती है, जबकि दूसरे कमरे या बालकनी में पहुंचते ही सिग्नल कमजोर पड़ जाते हैं। ऐसे में अधिकांश लोग नया और महंगा राउटर खरीदने की सोचते हैं, जबकि कुछ आसान घरेलू उपाय भी WiFi सिग्नल को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। रिसर्च के मुताबिक, किचन में इस्तेमाल होने वाला एल्युमिनियम फॉयल (Aluminium Foil) और खाली सॉफ्ट ड्रिंक कैन WiFi सिग्नल की दिशा को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। डार्टमाउथ कॉलेज की WiPrint रिसर्च के अनुसार, सही तरीके से बनाए गए रिफ्लेक्टर कुछ स्थानों पर WiFi सिग्नल की ताकत में उल्लेखनीय सुधार कर सकते हैं। 1. एंटीना के पीछे लगाएं पैराबोलिक फॉयल रिफ्लेक्टर एल्युमिनियम फॉयल की एक शीट को हल्के घुमावदार (Parabolic) आकार में मोड़कर राउटर के एंटीना के पीछे लगाएं। यह डिश की तरह काम करता है और सिग्नल को चारों ओर फैलाने के बजाय एक निश्चित दिशा में भेजने में मदद करता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इससे कुछ जगहों पर सिग्नल स्ट्रेंथ में लगभग 55 प्रतिशत तक सुधार देखा गया। 2. कार्डबोर्ड ट्यूब और फॉयल से बनाएं DIY सिग्नल बूस्टर खाली टिश्यू रोल या कार्डबोर्ड ट्यूब पर एल्युमिनियम फॉयल लपेटकर उसे राउटर के एंटीना के आसपास लगाएं। यह रेडियो तरंगों को एक दिशा में रिफ्लेक्ट करता है, जिससे घर के उन हिस्सों में नेटवर्क बेहतर मिल सकता है जहां पहले सिग्नल कमजोर आते थे। 3. घर के बाहर सिग्नल जाने से रोकें यदि आपके WiFi का सिग्नल घर के बाहर तक फैल रहा है, तो एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल उसकी दिशा नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। इससे सिग्नल घर के अंदर अधिक केंद्रित रहता है और अनचाहे क्षेत्रों में कम फैलता है। रिसर्च में यह भी बताया गया है कि इस तरह सिग्नल को नियंत्रित करने से बाहरी अनधिकृत एक्सेस का जोखिम भी कुछ हद तक कम किया जा सकता है। 4. सोडा कैन से तैयार करें आसान रिफ्लेक्टर यदि आपके पास एल्युमिनियम फॉयल उपलब्ध नहीं है, तो खाली सॉफ्ट ड्रिंक कैन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। कैन को सावधानीपूर्वक काटकर उसे सेमी-सर्कल के आकार में राउटर के पीछे लगाएं। यह भी एक साधारण रिफ्लेक्टर की तरह काम करता है और WiFi सिग्नल को जरूरत वाली दिशा में केंद्रित करने में मदद करता है। ध्यान रखें ये सभी उपाय WiFi सिग्नल की दिशा और कवरेज को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन ये आपके इंटरनेट प्लान की वास्तविक स्पीड नहीं बढ़ाते। यदि समस्या इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर, पुराने राउटर या कम बैंडविड्थ की है, तो बेहतर प्लान, नया राउटर या WiFi Mesh सिस्टम अधिक प्रभावी समाधान हो सकता है।
नई दिल्ली: ज्यादातर स्मार्टफोन यूजर्स वॉल्यूम बटन का इस्तेमाल केवल आवाज कम या ज्यादा करने के लिए करते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि एंड्रॉयड स्मार्टफोन के ये छोटे-से बटन कई ऐसे काम भी कर सकते हैं, जो रोजमर्रा के इस्तेमाल को पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज बना देते हैं। फोटो क्लिक करने से लेकर कैमरा जूम कंट्रोल करने, कॉल को साइलेंट करने, अलार्म स्नूज करने और फोन को फोर्स रीस्टार्ट करने तक, वॉल्यूम बटन कई ऐसे उपयोगी फीचर्स देते हैं जिनका फायदा अधिकांश यूजर्स नहीं उठा पाते। हालांकि इनमें से कुछ फीचर फोन के ब्रांड और एंड्रॉयड वर्जन के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। 1. फोटो और वीडियो आसानी से करें शूट कैमरा ऐप खुला होने पर वॉल्यूम बटन शटर बटन की तरह काम करता है। इससे फोटो क्लिक करना आसान हो जाता है, खासकर सेल्फी लेते समय। कई स्मार्टफोन्स, जैसे Samsung Galaxy, में वॉल्यूम बटन से वीडियो रिकॉर्डिंग भी शुरू की जा सकती है। 2. कैमरा जूम करें कंट्रोल Google Pixel, Samsung Galaxy और कुछ अन्य एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में वॉल्यूम बटन से कैमरा जूम इन और जूम आउट किया जा सकता है। वहीं Open Camera जैसे थर्ड-पार्टी ऐप्स के जरिए ऑटोफोकस और एक्सपोज़र भी कंट्रोल किए जा सकते हैं। 3. लॉक स्क्रीन से तुरंत कैमरा खोलें कुछ एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में डबल प्रेस वॉल्यूम बटन फीचर मिलता है। इसे ऑन करने के बाद लॉक स्क्रीन से ही कैमरा तुरंत खोला जा सकता है। Redmi जैसे कई ब्रांड यह सुविधा उपलब्ध कराते हैं। 4. इनकमिंग कॉल को तुरंत साइलेंट करें अगर किसी मीटिंग या जरूरी काम के दौरान फोन बजने लगे तो कॉल रिजेक्ट किए बिना सिर्फ वॉल्यूम बटन दबाकर उसकी रिंगटोन को साइलेंट किया जा सकता है। 5. अलार्म को स्नूज करें सुबह अलार्म बजने पर स्क्रीन देखने की जरूरत नहीं पड़ती। अधिकांश एंड्रॉयड फोनों में वॉल्यूम बटन दबाते ही अलार्म स्नूज हो जाता है। 6. पसंदीदा ऐप तुरंत खोलें Accessibility Shortcut की मदद से दोनों वॉल्यूम बटन एक साथ दबाकर अपनी पसंदीदा ऐप, जैसे WhatsApp, UPI ऐप या अन्य जरूरी एप्लिकेशन तुरंत खोली जा सकती है। 7. एक्सेसिबिलिटी फीचर्स तुरंत ऑन करें वॉल्यूम बटन होल्ड करके TalkBack, Magnification और अन्य एक्सेसिबिलिटी फीचर्स बिना सेटिंग्स में जाए सक्रिय किए जा सकते हैं। यह फीचर विशेष रूप से जरूरतमंद यूजर्स के लिए काफी उपयोगी है। 8. फोन हैंग हो जाए तो करें फोर्स रीस्टार्ट यदि फोन पूरी तरह फ्रीज हो जाए, तो कई एंड्रॉयड डिवाइसों में पावर बटन और वॉल्यूम डाउन बटन को लगभग 7 सेकंड तक एक साथ दबाकर फोन को फोर्स रीस्टार्ट किया जा सकता है। 9. Button Mapper ऐप से बटन को बनाएं स्मार्ट अगर आपके फोन में ये सभी फीचर्स मौजूद नहीं हैं, तो Button Mapper जैसे ऐप की मदद से वॉल्यूम बटन को अपनी जरूरत के अनुसार कस्टमाइज किया जा सकता है। इससे स्क्रीनशॉट लेना, टॉर्च ऑन करना, कैमरा खोलना या दूसरी ऐप लॉन्च करना जैसे कई काम एक बटन से किए जा सकते हैं। 10. जेब से फोन निकाले बिना बदलें गाने कुछ एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में वॉल्यूम बटन की मदद से म्यूजिक ट्रैक बदले जा सकते हैं। जिन फोनों में यह सुविधा नहीं है, वहां Skip Track जैसे फीचर्स या ऐप्स के जरिए वॉल्यूम बटन को म्यूजिक कंट्रोल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। ध्यान रखें इनमें से सभी फीचर्स हर एंड्रॉयड स्मार्टफोन में उपलब्ध हों, यह जरूरी नहीं है। कई सुविधाएं फोन के ब्रांड, मॉडल, एंड्रॉयड वर्जन और सॉफ्टवेयर इंटरफेस पर निर्भर करती हैं। इसलिए अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर उपलब्ध विकल्पों को जरूर जांचें।
नई कार या बाइक खरीदते समय चाबी के साथ एक छोटा सा मेटल या एल्युमीनियम टैग जरूर मिलता है। ज्यादातर लोग इसे बेकार समझकर तुरंत हटा देते हैं या कहीं फेंक देते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह छोटा सा टैग आपकी गाड़ी की सुरक्षा और सुविधा से सीधे जुड़ा होता है। असल में इस टैग पर लिखा हुआ कोड आपकी गाड़ी की चाबी का बेहद महत्वपूर्ण “की-कोड” होता है। अगर कभी आपकी गाड़ी की चाबी खो जाए, चोरी हो जाए या खराब हो जाए, तो यही छोटा सा कोड आपको बड़ी परेशानी और भारी खर्च से बचा सकता है। क्या होता है इस मेटल टैग पर लिखा कोड? वाहन कंपनियां हर चाबी के साथ एक यूनिक अल्फान्यूमेरिक कोड देती हैं। यह कोड उस चाबी की तकनीकी पहचान माना जाता है। यह कोड चाबी की कटिंग डिजाइन और लॉक सिस्टम से जुड़ी जानकारी स्टोर करता है। इसी वजह से सर्विस सेंटर या अधिकृत डीलर उसी कोड के आधार पर आपकी गाड़ी की नई चाबी तैयार कर सकते हैं। नई चाबी बनवाने में कैसे करता है मदद? अगर आपकी गाड़ी की दोनों चाबियां खो जाएं, तो आमतौर पर लोग सोचते हैं कि पूरा लॉक सिस्टम बदलवाना पड़ेगा। पहले ऐसा ही होता था, लेकिन अब आधुनिक तकनीक ने यह काम आसान कर दिया है। अधिकृत सर्विस सेंटर में मौजूद मशीन इस की-कोड को पढ़कर बिल्कुल वैसी ही नई चाबी तैयार कर देती है जैसी कंपनी ने मूल रूप से दी थी। इससे समय भी बचता है और लॉक किट बदलने का भारी खर्च भी नहीं उठाना पड़ता। स्मार्ट की और की-फोब में भी है बेहद जरूरी आजकल कई आधुनिक कारों में स्मार्ट की और की-फोब सिस्टम दिया जाता है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग सिस्टम के साथ एक छोटी इमरजेंसी फिजिकल चाबी भी मौजूद रहती है। अगर यह इमरजेंसी चाबी खो जाए या फोब खराब हो जाए, तब भी यही की-कोड नई चाबी बनाने में काम आता है। इतना ही नहीं, अगर चाबी चोरी हो जाए तो सर्विस सेंटर इसी कोड की मदद से पुरानी चाबी को सिस्टम से हटाकर नई चाबी को रजिस्टर कर सकता है। क्यों नहीं रखना चाहिए इसे चाबी के साथ? विशेषज्ञों के मुताबिक इस टैग को चाबी के साथ लटकाकर रखना सुरक्षित नहीं माना जाता। अगर किसी गलत व्यक्ति के हाथ आपकी चाबी और यह कोड दोनों लग जाएं, तो वह आसानी से डुप्लीकेट चाबी बनवा सकता है। इसलिए बेहतर होगा कि इस टैग को वाहन के दस्तावेजों के साथ सुरक्षित जगह पर रखें। साथ ही इसके कोड की फोटो मोबाइल या ईमेल में सेव करके रखना भी समझदारी माना जाता है। छोटी सी चीज, लेकिन बड़े काम की दिखने में मामूली लगने वाला यह छोटा मेटल टैग आपकी गाड़ी की सुरक्षा का अहम हिस्सा है। इसे फेंकना या नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। इसलिए अगली बार नई गाड़ी खरीदें तो इस टैग को संभालकर जरूर रखें।
बड़ी पार्किंग में कार खड़ी करने के बाद उसकी लोकेशन भूल जाना बेहद आम बात है। खासकर एयरपोर्ट, मॉल, स्टेडियम या मल्टीलेवल पार्किंग में लौटते समय अक्सर लोग अपनी गाड़ी खोजते रह जाते हैं। ऐसे में Google Maps का एक शानदार फीचर आपकी यह परेशानी पूरी तरह खत्म कर सकता है। 'Save Parking Location' फीचर करेगा मदद Google Maps का 'Save Parking Location' फीचर आपकी कार की सटीक लोकेशन सेव कर देता है। गाड़ी पार्क करते ही आप उसकी जगह मैप पर मार्क कर सकते हैं। बाद में सिर्फ एक टैप में आप सीधे अपनी कार तक पहुंच सकते हैं। ऐसे करें इस्तेमाल गाड़ी पार्क करने के बाद Google Maps खोलें। मैप पर दिख रहे नीले लोकेशन डॉट पर टैप करें। "Save your parking" विकल्प चुनें। चाहें तो फ्लोर नंबर, पिलर नंबर या सेक्शन का नाम नोट करें। फोटो भी जोड़ सकते हैं। वापस आने पर सेव लोकेशन खोलें और Directions पर टैप करें। नोट्स और फोटो हैं सबसे बड़ा हथियार इंडोर या बेसमेंट पार्किंग में GPS कभी-कभी पूरी तरह सटीक नहीं होता। ऐसे में "B2, Pillar P17" जैसा नोट या पार्किंग स्पॉट की फोटो बाद में आपकी काफी मदद करती है। यही छोटी सी ट्रिक आपको लंबे समय तक भटकने से बचा सकती है। किन जगहों पर सबसे ज्यादा उपयोगी? यह फीचर खास तौर पर इन जगहों पर बेहद काम आता है: एयरपोर्ट की विशाल पार्किंग शॉपिंग मॉल स्टेडियम मल्टीलेवल बेसमेंट अनजान शहरों की भीड़भाड़ वाली सड़कें कार खोजने की टेंशन खत्म अब पार्किंग में घंटों भटकने की जरूरत नहीं। Google Maps का यह फीचर आपकी कार तक पहुंचने का सबसे आसान, तेज और स्मार्ट तरीका है। अगली बार जब भी किसी बड़ी पार्किंग में जाएं, इस फीचर का इस्तेमाल जरूर करें।
नई दिल्ली/एजेंसियां: मैसेजिंग की दुनिया में वॉट्सऐप का एक ऐसा फीचर है जिसे अक्सर लोग नया मान लेते हैं, जबकि यह काफी समय से प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। 'कंपैनियन मोड' नामक यह टूल यूजर्स को यह आजादी देता है कि वे अपने प्राथमिक स्मार्टफोन के अलावा एक अन्य मोबाइल फोन पर भी उसी नंबर से वॉट्सऐप अकाउंट सक्रिय कर सकें। यह उन लोगों के लिए एक सटीक समाधान है जो निजी और दफ्तर के काम के लिए अलग-अलग हैंडसेट इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अपनी चैट को हर जगह एक समान (सिंक्रोनाइज) रखना चाहते हैं। मल्टी-डिवाइस सपोर्ट की ताकत वॉट्सऐप का यह फीचर मूल रूप से इसके 'मल्टी-डिवाइस सपोर्ट' का विस्तार है। इसके माध्यम से उपयोगकर्ता मुख्य फोन के अतिरिक्त 4 अन्य डिवाइस को अपने खाते से जोड़ सकता है। इस तकनीकी व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक बार लिंक हो जाने के बाद, सेकेंडरी डिवाइस को काम करने के लिए मुख्य फोन के इंटरनेट से जुड़े रहने की अनिवार्यता नहीं होती। यदि आपका प्राइमरी फोन बंद भी है, तो भी आप दूसरे फोन से संदेश भेज और प्राप्त कर सकते हैं। स्टेप-बाय-स्टेप: दूसरे फोन पर कैसे करें सेटअप? इस छिपे हुए फीचर को एक्टिवेट करने की प्रक्रिया बेहद सरल है, बस आपको क्यूआर कोड (QR Code) का सही इस्तेमाल करना होगा: ऐप इंस्टॉलेशन: सबसे पहले अपने दूसरे फोन पर वॉट्सऐप का लेटेस्ट वर्जन इंस्टॉल करें। लिंक डिवाइस का चुनाव: ऐप ओपन करने पर जब मोबाइल नंबर मांगा जाए, तो वहां नंबर डालने के बजाय ऊपर दाईं ओर दिख रहे 'थ्री-डॉट्स' पर क्लिक करें। यहाँ आपको 'Link as Companion Device' का विकल्प मिलेगा। QR कोड स्कैनिंग: अब स्क्रीन पर एक क्यूआर कोड दिखाई देगा। इसके बाद अपने मुख्य (प्राइमरी) फोन के वॉट्सऐप में जाएं, सेटिंग्स में जाकर 'Linked Devices' चुनें और दूसरे फोन के कोड को स्कैन करें। चैट सिंकिंग: स्कैनिंग पूरी होते ही आपकी सभी पुरानी चैट्स दूसरे फोन पर लोड हो जाएंगी और आप उसे स्वतंत्र रूप से उपयोग कर पाएंगे। सुरक्षा और गोपनीयता के मानक चूंकि वॉट्सऐप अपनी सुरक्षा के लिए जाना जाता है, इसलिए कंपैनियन मोड में भी 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन' पूरी तरह सक्रिय रहता है। इसका अर्थ यह है कि आपकी बातचीत दोनों फोन पर पूरी तरह सुरक्षित और निजी रहती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से यूजर्स को समय-समय पर अपने 'लिंक्ड डिवाइसेज' की सूची चेक करते रहना चाहिए ताकि कोई अनधिकृत एक्सेस न हो सके। यह फीचर उन प्रोफेशनल्स के लिए गेम-चेंजर है जो एक ही समय में लैपटॉप, टैबलेट और दो अलग-अलग फोन पर सक्रिय रहना चाहते हैं। हालांकि यह फीचर पुराना है, लेकिन इसकी उपयोगिता आज भी पहले जैसी ही बनी हुई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।