TMC News

Annapurna Bhandar Yojana
टीएमसी ने अन्नपूर्णा भंडार योजना लाभार्थियों के नाम हटाने को बताया 'पहला घोटाला'

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की अन्नपूर्णा भंडार योजना को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। टीएमसी नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार ने योजना के तहत बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम लाभार्थियों की सूची से हटाकर अपना पहला बड़ा घोटाला किया है। वहीं, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि केवल अपात्र और फर्जी आवेदनों को ही रद्द किया गया है।   टीएमसी ने उठाए लाभार्थियों की संख्या पर सवाल साकेत गोखले ने कहा कि ममता बनर्जी सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना के तहत करीब 2.4 करोड़ महिलाओं को लाभ मिल रहा था, जबकि नई अन्नपूर्णा भंडार योजना में लाभार्थियों की संख्या घटकर लगभग 1.3 करोड़ रह गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 1.1 करोड़ महिलाओं के नाम क्यों हटाए गए। टीएमसी का आरोप है कि भाजपा सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से महिलाओं को योजना से बाहर किया है।   सरकार का दावा- फर्जी आवेदन हटाए गए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार को योजना के लिए करीब 1.6 करोड़ आवेदन मिले थे। विस्तृत जांच के बाद 27 लाख आवेदन रद्द किए गए, जिनमें मृत लाभार्थियों के नाम, डुप्लीकेट बैंक खाते, मतदाता सूची से हटे नाम और नागरिकता या निवास से जुड़ी विसंगतियां पाई गईं। उन्होंने कहा कि सभी पात्र महिलाओं के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए पहली किस्त भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और लगभग 1.1 करोड़ खातों में राशि जमा कराई जा चुकी है।   सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य केवल पात्र महिलाओं तक पारदर्शी तरीके से लाभ पहुंचाना है, जबकि टीएमसी इसे महिलाओं के अधिकारों पर हमला बताते हुए भाजपा सरकार को लगातार घेर रही है। अन्नपूर्णा भंडार योजना को लेकर दोनों दलों के बीच सियासी टकराव फिलहाल और तेज होने के आसार हैं।

anjali kumari जुलाई 2, 2026 0
Abhishek Banerjee speaks to media after police search at his Kolkata residence as Mamata Banerjee arrives
अभिषेक बनर्जी के घर तड़के पुलिस की छापेमारी, ममता बनर्जी पहुंचीं; बोले- “क्या मैंने कुछ छिपाया है?”

बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल, अभिषेक बनर्जी के आवास पर घंटों चली तलाशी पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को उस समय हलचल मच गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास पर पुलिस ने कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के बाद टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी भी तुरंत अपने भतीजे के घर पहुंचीं, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगी और निजी सहायक माने जाने वाले सुमित रॉय से जुड़े एक मामले के सिलसिले में की गई। सुबह 3 बजे शुरू हुई कार्रवाई जानकारी के मुताबिक, शनिवार तड़के करीब 3 बजे पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी थाना की टीम कोलकाता पुलिस और केंद्रीय बलों की मौजूदगी में अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पहुंची। पुलिसकर्मियों ने घर के विभिन्न हिस्सों की जांच की और करीब चार घंटे से अधिक समय तक तलाशी अभियान जारी रखा। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई थी और घर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। तलाशी के बाद अभिषेक बनर्जी का पलटवार तलाशी पूरी होने के बाद मीडिया से बातचीत में अभिषेक बनर्जी ने जांच एजेंसियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कुछ छिपाया गया होता तो एजेंसियां खुद बता सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने घर का ताला तोड़कर प्रवेश किया और सभी कमरों की जांच की। साथ ही उन्होंने यह भी खारिज कर दिया कि उनके सहयोगी को घर में छिपाकर रखा गया था। ममता बनर्जी की अचानक एंट्री तलाशी अभियान की खबर फैलते ही टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी सीधे अभिषेक बनर्जी के आवास पहुंचीं। बताया जा रहा है कि उन्होंने कुछ समय तक वहां मौजूद रहकर स्थिति की जानकारी ली। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी की यह त्वरित प्रतिक्रिया इस मामले की संवेदनशीलता और पार्टी के भीतर इसके राजनीतिक प्रभाव को दर्शाती है। टीएमसी ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि विपक्षी ताकतें जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर टीएमसी नेताओं को निशाना बना रही हैं। सीआईडी जांच और कानूनी दबाव भी जारी यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अभिषेक बनर्जी हाल ही में विधानसभा हस्ताक्षर जालसाजी मामले में सीआईडी के समक्ष कई घंटों तक पूछताछ का सामना कर चुके हैं। इस मामले में उन्हें अदालत से अंतरिम राहत मिली हुई है, लेकिन जांच अभी भी जारी है। सीआईडी अधिकारियों ने उन्हें आगे की पूछताछ के लिए फिर से बुलाने के संकेत दिए हैं। मदन मित्रा पर भी ईडी की कार्रवाई इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने टीएमसी विधायक मदन मित्रा से जुड़े कई ठिकानों पर भी छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित नगर निकाय भर्ती घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ी बताई जा रही है। जांच एजेंसियों का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच की जा रही है। पार्टी के भीतर भी बढ़ रहा दबाव टीएमसी पहले से ही आंतरिक मतभेदों और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। हाल के दिनों में पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा अभिषेक बनर्जी पर सार्वजनिक टिप्पणी किए जाने के बाद संगठन के भीतर असहज स्थिति बनी हुई है। हालांकि बाद में दोनों नेताओं ने विवाद को कम करने की कोशिश की, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी पर कानूनी और राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। आगे क्या? अभिषेक बनर्जी के घर पर हुई तलाशी, ईडी की समानांतर कार्रवाई और जारी जांचों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।  

surbhi जून 13, 2026 0
Mahua Moitra addresses media while backing Mamata Banerjee amid TMC internal political turmoil
बंगाल के सियासी संकट के बीच महुआ मोइत्रा का पलटवार, बागी नेताओं को बताया ‘अवसरवादी तत्व’

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी उथल-पुथल के बीच पार्टी सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं को संगठन के लिए नुकसान नहीं, बल्कि एक तरह की "सफाई प्रक्रिया" करार दिया। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख Mamata Banerjee के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए कहा कि वह अंतिम समय तक उनके साथ खड़ी रहेंगी। बागी नेताओं पर साधा निशाना कृष्णानगर से लोकसभा सांसद Mahua Moitra ने कहा कि जो नेता कठिन समय में पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं, वे कभी भी संगठन और उसकी विचारधारा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं थे। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के जाने से पार्टी कमजोर नहीं होती, बल्कि संगठन और अधिक मजबूत तथा स्पष्ट दिशा में आगे बढ़ता है। महुआ ने दावा किया कि टीएमसी से अवसरवादी तत्वों के बाहर जाने को संकट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ममता बनर्जी के प्रति जताई अटूट निष्ठा महुआ मोइत्रा ने कहा कि राजनीतिक जीवन के कठिन दौर में पार्टी नेतृत्व ने हमेशा उन पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि इसी विश्वास के कारण वह टीएमसी नेतृत्व के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका राजनीतिक भविष्य तृणमूल कांग्रेस के साथ जुड़ा हुआ है और वह किसी अन्य राजनीतिक दल का हिस्सा बनने की कल्पना भी नहीं करतीं। अभिषेक बनर्जी के समर्थन में आईं सामने टीएमसी सांसद ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दबाव या जांच एजेंसियों की कार्रवाई से पार्टी नेतृत्व को कमजोर नहीं किया जा सकता। महुआ ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका मजबूती से निभाती रहेगी और नेतृत्व किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। कांग्रेस में विलय की चर्चाओं को बताया निराधार हाल के दिनों में ममता बनर्जी और कांग्रेस नेतृत्व के बीच हुई बैठकों के बाद टीएमसी और कांग्रेस के संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई चर्चाएं सामने आई थीं। महुआ मोइत्रा के बयान को इन चर्चाओं के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बरकरार रहेगी और तृणमूल कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे और क्षेत्रीय आधार के साथ आगे बढ़ती रहेगी। टीएमसी में जारी है राजनीतिक खींचतान पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर बढ़ती गुटबाजी और नेताओं के अलग-अलग रुख ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दे दी है। एक ओर बागी गुट लगातार अपने समर्थन का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर महुआ मोइत्रा जैसे वरिष्ठ नेता खुलकर ममता बनर्जी के नेतृत्व के समर्थन में सामने आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर शक्ति संतुलन और नेतृत्व को लेकर संघर्ष और तेज हो सकता है, जिसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी देखने को मिलेगा।  

Deepshikha जून 11, 2026 0
Former Tamil Nadu BJP leaders resign and join Annamalai’s new political movement in Chennai
तमिलनाडु बीजेपी में बढ़ी टूट, अन्नामलाई के बाद उपाध्यक्ष और प्रदेश सचिव ने भी छोड़ी पार्टी

  चेन्नई: तमिलनाडु भाजपा में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई के इस्तीफे के बाद पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। शुक्रवार को भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष कारू नागराजन और राज्य सचिव सुमति वेंकटेश ने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। दोनों नेताओं के फैसले ने राज्य इकाई में राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है। अन्नामलाई के नए अभियान के साथ जुड़े कारू नागराजन भाजपा छोड़ने के बाद कारू नागराजन ने स्पष्ट किया कि वह अन्नामलाई के नए राजनीतिक अभियान का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि अपने समर्थकों के साथ विचार-विमर्श के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया है। मीडिया से बातचीत में नागराजन ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी नेता या पार्टी की आलोचना करना नहीं है, बल्कि वे अन्नामलाई की कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता से प्रभावित हैं। उनके अनुसार, अन्नामलाई एक ऊर्जावान और जनसरोकारों से जुड़े नेता हैं, जिनके साथ मिलकर वे काम करना चाहते हैं। प्रदेश सचिव सुमति वेंकटेश ने भी दिया इस्तीफा अन्नामलाई के इस्तीफे के कुछ ही समय बाद तमिलनाडु भाजपा की प्रदेश सचिव सुमति वेंकटेश ने भी पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना इस्तीफा साझा करते हुए प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने की जानकारी दी। उनके इस्तीफे को भी राज्य भाजपा में बढ़ते असंतोष और अन्नामलाई के प्रति समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। युवा मोर्चा के नेता ने भी छोड़ा साथ भाजपा युवा मोर्चा की तमिलनाडु इकाई के कानूनी संयोजक अभिलाष गोपीनाथ ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि अन्नामलाई के नेतृत्व, ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन के प्रति समर्पण ने उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी वे अन्नामलाई के राजनीतिक विजन और विचारों का समर्थन करते रहेंगे। नई राजनीति का दावा कर रहे हैं अन्नामलाई पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई ने भाजपा छोड़ने के बाद एक नए राजनीतिक आंदोलन की घोषणा की है। उनका कहना है कि यह पहल व्यक्ति-पूजा, चाटुकारिता और वंशवादी राजनीति से अलग आम लोगों की राजनीति को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। सोशल मीडिया पर जारी संदेश में उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के इर्द-गिर्द नहीं, बल्कि विचार और सामाजिक परिवर्तन पर आधारित होगा। उन्होंने अपने अभियान का मूल मंत्र “मारुवोम, मातृवोम” (खुद को बदलें, बदलाव लाएं) बताया। किसी दल से टकराव नहीं, वैकल्पिक राजनीति पर जोर अन्नामलाई ने स्पष्ट किया है कि उनका नया राजनीतिक अभियान किसी मौजूदा राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी दलों को अपने विचार रखने का अधिकार है और उनका उद्देश्य केवल जनता के सामने एक वैकल्पिक राजनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है। उन्होंने कहा कि उचित समय आने पर आंदोलन की नीतियों और कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। वेबसाइट लॉन्च होते ही हजारों समर्थक जुड़े अपने नए राजनीतिक अभियान को संगठित करने के लिए अन्नामलाई ने एक विशेष वेबसाइट भी लॉन्च की है। उनके अनुसार, वेबसाइट शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर लगभग 8.9 लाख लोगों ने स्वयंसेवक के रूप में पंजीकरण कराया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा से लगातार हो रहे इस्तीफे और अन्नामलाई के नए अभियान को मिल रहा शुरुआती समर्थन तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत हो सकता है।  

Deepshikha जून 6, 2026 0
TMC Former MLA
बम विस्फोट मामले में फरार चल रहे TMC के पूर्व विधायक को NIA ने किया गिरफ्तार

कोलकाता, एजेंसियां।  एनआईए की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बम विस्फोट मामले में फरार चल रहे टीएमसी के पूर्व विधायक को गिरफ्तार कर लिया है। एनआईए की टीम ने पश्चिम बंगाल के चर्चित भांगड़ बम विस्फोट मामले में यह कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने मामले के मुख्य संदिग्ध और फरार चल रहे पूर्व विधायक शौकत मोल्ला को दक्षिण 24 परगना जिले से गिरफ्तार किया है। चुनाव से पहले बम बनाते समय हुआ था धमाका एनआईए की जांच के मुताबिक, यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले का है। जब अवैध रूप से क्रूड बम (कच्चा बम) बनाने के दौरान एक जोरदार विस्फोट हुआ था। इस धमाके में बम बनाने वाले एक शख्स की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। साजिश रचने और सबूत मिटाने का आरोप शौकत मोल्ला इस पूरे मामले में चौथे आरोपी हैं, जिन्हें गिरफ्तार किया गया है। एनआईए की तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि पूर्व विधायक ही इस पूरी साजिश के मुख्य सूत्रधार थे। उन्होंने ही अन्य आरोपियों को बम बनाने के निर्देश दिए थे। यही नहीं, विस्फोट होने के बाद कानून के शिकंजे से बचने के लिए मोल्ला ने आरोपियों को घटनास्थल से सबूत मिटाने और दृश्य के साथ छेड़छाड़ करने का भी आदेश दिया था।

Unknown जून 6, 2026 0
Mamata Banerjee
अभिषेक हमले पर ममता का बड़ा आरोप, बोलीं- भर्ती रोकने के लिए बनाया गया दबाव

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के बाद उनके इलाज को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। ममता बनर्जी ने दावा किया कि दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में हुई घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर दबाव बनाया गया ताकि अभिषेक बनर्जी को अस्पताल में भर्ती न किया जाए। उन्होंने इस पूरे मामले को राजनीतिक हस्तक्षेप बताते हुए सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए।   अस्पताल प्रशासन को धमकी भरे फोन आने का दावा ममता बनर्जी ने कहा कि एक अस्पताल प्रशासक ने उन्हें बताया था कि पुलिस की ओर से लगातार धमकी भरे फोन किए जा रहे थे। उनके अनुसार, इलाज की प्रक्रिया को प्रभावित करने और अस्पताल पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन को स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने दिया गया।   इलाज की प्रक्रिया पर उठाए सवाल मुख्यमंत्री ने पूछा कि यदि अभिषेक बनर्जी की स्थिति गंभीर नहीं थी और भर्ती की आवश्यकता नहीं थी, तो उन्हें पहले आईटीयू में क्यों रखा गया। उन्होंने कहा कि करीब दो घंटे तक डॉक्टरों की निगरानी में रखने और कई मेडिकल जांच व स्कैन कराने की सलाह दिए जाने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी क्यों दी गई। ममता ने पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग की है।   शरीर पर मिले चोट के निशान ममता बनर्जी के मुताबिक, हमले के बाद अभिषेक बनर्जी को शाम से रात तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया। चिकित्सकों ने उनके चेहरे, पीठ, छाती और गर्दन पर चोट के निशान पाए थे। संभावित अंदरूनी चोट या हड्डी टूटने की आशंका को खारिज करने के लिए कई जांच कराने की सलाह दी गई थी।   सोनारपुर में क्या हुआ था? पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी के पहुंचते ही माहौल तनावपूर्ण हो गया था। आरोप है कि कुछ लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी की, पत्थर और अंडे फेंके तथा धक्का-मुक्की की कोशिश की। हालात बिगड़ते देख सुरक्षाकर्मियों ने मानव शृंखला बनाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। घटना के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

Unknown जून 1, 2026 0
Mamata Banerjee and Abhishek Banerjee face legal controversy amid rising political tensions in West Bengal
बंगाल की राजनीति में बढ़ा सियासी तनाव, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी कानूनी विवादों में घिरे

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सियासी टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की शीर्ष नेतृत्व टीम अब कानूनी विवादों में घिरती नजर आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के खिलाफ सिलीगुड़ी में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गयी है, जबकि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोलकाता के भवानीपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज करायी गयी है। दोनों नेताओं पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने और विवादित टिप्पणियों के जरिए सामाजिक तनाव बढ़ाने के आरोप लगाये गये हैं। इन घटनाओं के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। ममता बनर्जी पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप सिलीगुड़ी के साइबर क्राइम थाने में अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह की ओर से ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज करायी गयी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ममता बनर्जी ने 2025 की ईद और 2026 विधानसभा चुनाव से पहले हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान ऐसे बयान दिये, जिनसे हिंदू और सनातन धर्म से जुड़े लोगों की भावनाएं आहत हुईं। शिकायतकर्ता का कहना है कि एक संवैधानिक पद पर रह चुकी नेता को ऐसी टिप्पणी करने से बचना चाहिए, जिससे किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाये जाने का संदेश जाये। पुलिस ने गंभीर धाराओं में दर्ज किया मामला पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और सामाजिक शांति भंग करने की कोशिश जैसे आरोप शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, मामले की शुरुआती जांच शुरू कर दी गयी है और आने वाले दिनों में ममता बनर्जी को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है। अभिषेक बनर्जी के सोशल मीडिया पोस्ट पर भी उठा विवाद टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी भी विवादों में घिर गये हैं। भवानीपुर निवासी अर्नबकांति दास ने उनके खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करायी है। यह विवाद अभिषेक बनर्जी के एक सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर ‘एंटी-बंगाल गुजराती गैंग’ शब्द का इस्तेमाल किया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस तरह की टिप्पणी विभिन्न समुदायों के बीच तनाव और नफरत फैलाने का कारण बन सकती है। शिकायतकर्ता ने लगाया राजनीतिक शक्ति के दुरुपयोग का आरोप अर्नबकांति दास ने अपनी शिकायत में कहा है कि एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि को ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जो सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करें। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की बयानबाजी राजनीतिक लाभ के लिए की जा रही है और इससे राज्य में सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है। कोलकाता पुलिस मुख्यालय लालबाजार की ओर से अभी तक FIR दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है, लेकिन मामले में प्रारंभिक जांच शुरू होने की जानकारी सामने आयी है। बीजेपी ने कहा- कानून अपना काम कर रहा है इन घटनाओं के बाद बीजेपी ने टीएमसी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि किसी भी नेता को धर्म या समुदाय विशेष के खिलाफ भड़काऊ बयान देने की छूट नहीं दी जा सकती। पार्टी नेताओं ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और अगर किसी ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बयान दिया है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होना स्वाभाविक है। टीएमसी का पलटवार, कहा- विपक्ष दबाना चाहता है आवाज तृणमूल कांग्रेस ने इन कानूनी कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनावी हार के बाद बीजेपी अब अदालतों और पुलिस के जरिए ममता बनर्जी और टीएमसी नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। टीएमसी नेताओं का दावा है कि विपक्ष जानबूझकर ऐसे विवाद खड़े कर रहा है ताकि राज्य की राजनीति में तनाव पैदा किया जा सके और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। बढ़ सकती हैं टीएमसी नेतृत्व की कानूनी मुश्किलें राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से जुड़े ये विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकते हैं। अभिषेक बनर्जी पहले से ही कुछ साइबर क्राइम मामलों और नगर निगम के नोटिसों का सामना कर रहे हैं। अब ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद टीएमसी की शीर्ष नेतृत्व टीम की कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही हैं। बंगाल की राजनीति में पहले से जारी टकराव के बीच इन घटनाओं ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।  

surbhi मई 29, 2026 0
FIR filed against Mamata Banerjee over alleged remarks on Sanatan Dharma in West Bengal
सनातन धर्म पर टिप्पणी को लेकर ममता बनर्जी के खिलाफ FIR, बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सनातन धर्म को लेकर कथित विवादित टिप्पणी करने के मामले में FIR दर्ज की गई है। यह कार्रवाई एक अधिवक्ता की शिकायत के आधार पर की गई है। पुलिस के अनुसार, सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। शिकायत में ममता बनर्जी पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया गया है। क्या है पूरा मामला? शिकायतकर्ता रिंकी चटर्जी सिंह के मुताबिक, मामला वर्ष 2025 में कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित ईद कार्यक्रम से जुड़ा है। आरोप है कि उस कार्यक्रम में ममता बनर्जी ने सार्वजनिक मंच से हिंदू धर्म और सनातन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि तृणमूल कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं ने भी समय-समय पर हिंदू देवी-देवताओं और सनातन धर्म को लेकर विवादित बयान दिए। रिंकी चटर्जी सिंह ने आरोप लगाया कि उन्होंने पहले भी इस मामले में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की थी, लेकिन शुरुआत में पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की। शिकायतकर्ता ने पुलिस पर भी लगाए आरोप अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के दौरान उन्हें कथित तौर पर अपमानित किया गया और उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। बाद में शिकायत की समीक्षा के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। फिलहाल मामले की जांच जारी है। चुनावी हार के बाद टीएमसी में बढ़ी बेचैनी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और राजनीतिक हलचल लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कई नेता पार्टी से दूरी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि बड़ी संख्या में पार्षदों और स्थानीय नेताओं ने भी इस्तीफा दिया है, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विपक्ष ने साधा निशाना ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद विपक्षी दलों ने टीएमसी पर हमला तेज कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि तुष्टिकरण की राजनीति के चलते हिंदू भावनाओं का अपमान किया गया। वहीं टीएमसी की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक माहौल गरमाया बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य का राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है। एक तरफ टीएमसी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पुराने बयानों और विवादों को लेकर कानूनी कार्रवाई भी तेज होती दिखाई दे रही है। सभी की नजर इस मामले में आगे होने वाली कानूनी प्रक्रिया और टीएमसी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।  

surbhi मई 27, 2026 0
TMC MP Kakoli Ghosh Dastidar resigns as Barasat district president amid growing internal party tensions.
TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह, काकोली घोष दस्तिदार ने छोड़ा जिला अध्यक्ष पद

All India Trinamool Congress में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी की वरिष्ठ सांसद Kakoli Ghosh Dastidar ने बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने क्षेत्र में पार्टी के खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ा, लेकिन साथ ही पार्टी की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक ढांचे पर भी सवाल उठाए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अपेक्षा से कमजोर प्रदर्शन के बाद टीएमसी के भीतर लगातार असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। काकोली घोष का इस्तीफा इसी कड़ी में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। I-PAC और नई रणनीति पर सवाल काकोली घोष दस्तिदार ने राज्य टीएमसी अध्यक्ष Subrata Bakshi को भेजे अपने इस्तीफे में कहा कि पार्टी को फिर से पुराने तरीके की “सड़क की राजनीति” में लौटना चाहिए। उन्होंने इशारों में Indian Political Action Committee (I-PAC) और पार्टी में उभरे नए राजनीतिक ढांचे पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि ईमानदार और पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ पहले की तरह काम करने से पार्टी की छवि दोबारा मजबूत हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टिप्पणी सीधे तौर पर I-PAC की भूमिका पर सवाल है, जिसे टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee के करीबी रणनीतिक ढांचे से जोड़ा जाता है। “पुराने कार्यकर्ताओं के साथ व्यवहार ठीक नहीं था” पत्रकारों से बातचीत में काकोली घोष ने कहा कि I-PAC से जुड़े कुछ युवा कार्यकर्ताओं का रवैया पुराने पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति सम्मानजनक नहीं था। उन्होंने कहा, “मैंने I-PAC को नियुक्त नहीं किया था, लेकिन मैंने देखा कि वे हम जैसे पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं के साथ कैसा व्यवहार करते थे।” पार्टी में बढ़ते भ्रष्टाचार पर भी जताई चिंता काकोली घोष दस्तिदार ने पार्टी में बढ़ते अपराधीकरण और भ्रष्टाचार को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं से लोगों में डर और असंतोष बढ़ा है और राजनीति में पारदर्शिता तथा जवाबदेही को प्राथमिकता देने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि टीएमसी की सीटें घटकर 80 तक पहुंच जाना उनके लिए स्वीकार करना कठिन है। उन्होंने साफ किया कि वह पार्टी नहीं छोड़ रही हैं और एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में काम करती रहेंगी। ममता बनर्जी की करीबी मानी जाती हैं काकोली घोष Mamata Banerjee की करीबी मानी जाने वाली काकोली घोष दस्तिदार बारासात से चार बार सांसद रह चुकी हैं। वह पार्टी के महिला संगठन में भी अहम जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। हाल ही में उन्हें लोकसभा में टीएमसी के मुख्य सचेतक पद से हटाया गया था और उनकी जगह Kalyan Banerjee को नियुक्त किया गया।  

surbhi मई 25, 2026 0
BJP candidate Debangshu Panda celebrates massive victory in Falta bypoll with supporters in West Bengal.
फालता उपचुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत, देबांग्शु पांडा ने 1 लाख से ज्यादा वोटों से दर्ज की जीत

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फालता विधानसभा सीट पर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। भाजपा उम्मीदवार Debangshu Panda ने एक लाख से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल कर तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। यह सीट पहले All India Trinamool Congress के पास थी और इसे पार्टी के वरिष्ठ नेता Abhishek Banerjee का मजबूत इलाका माना जाता है। ऐसे में बीजेपी की इस बड़ी जीत को राज्य की राजनीति में अहम माना जा रहा है। दोबारा मतदान के बाद आया नतीजा फालता सीट पर पहले हुए मतदान में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगे थे, जिसके बाद पूरा चुनाव रद्द कर दोबारा वोटिंग कराई गई। पुनर्मतदान के बाद हुई मतगणना में बीजेपी ने भारी बढ़त के साथ जीत दर्ज की। किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले? बीजेपी के Debangshu Panda - 1,49,666 वोट सीपीएम के Shambhu Nath Kurmi - 40,645 वोट कांग्रेस के Abdur Razzaq Molla - 10,084 वोट टीएमसी के Jahangir Khan - 7,783 वोट दिलचस्प बात यह रही कि टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने पुनर्मतदान से पहले ही चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। विधानसभा में बीजेपी की संख्या बढ़ी फालता में जीत के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में बीजेपी की सीटों की संख्या 207 से बढ़कर 208 हो गई है। नंदीग्राम सीट खाली होने के कारण पार्टी की प्रभावी संख्या में बड़ा बदलाव नहीं माना जा रहा है। ममता बनर्जी ने लगाए गंभीर आरोप मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने चुनाव नतीजों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मतगणना के दौरान फिर से वोटों की चोरी हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्रीय बलों के कुछ लोग बीजेपी एजेंट की तरह मतगणना केंद्र के अंदर मौजूद थे। शुभेंदु अधिकारी का टीएमसी पर हमला वहीं पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता Suvendu Adhikari ने बीजेपी की जीत को जनता का जनादेश बताया। उन्होंने कहा कि “डायमंड हार्बर मॉडल अब तृणमूल का लॉस मॉडल बन चुका है।” उन्होंने फालता की जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि लोगों ने बीजेपी उम्मीदवार को भारी मतों से जिताकर बदलाव का संदेश दिया है। शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि उन्होंने 1 लाख वोटों से जीत की अपील की थी और जीत का अंतर उससे भी ज्यादा रहा। देबांग्शु पांडा का अभिषेक बनर्जी पर तंज जीत के बाद देबांग्शु पांडा ने अभिषेक बनर्जी पर तंज कसते हुए कहा कि चुनाव से पहले कहा गया था कि उन्हें मछली बेचनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि अगर अभिषेक बनर्जी फालता आएंगे तो वह उन्हें “मछली-भात” जरूर खिलाएंगे। उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान उर्फ ‘पुष्पा’ पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने चुनाव परिणाम के जरिए जवाब दे दिया है।  

surbhi मई 25, 2026 0
Voters standing in queues at Falta polling booths during peaceful re-polling under tight security in West Bengal.
Falta Re-Polling: फालता में दोबारा मतदान जारी, वोटरों ने कहा- इस बार बिना डर के डाला वोट

पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर गुरुवार को दोबारा मतदान जारी है। दक्षिण 24 परगना जिले की 144-फलता सीट के सभी 285 मतदान केंद्रों पर री-पोलिंग कराई जा रही है। पिछली वोटिंग के दौरान ईवीएम में कथित छेड़छाड़ और अनियमितताओं की शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने मतदान रद्द कर दोबारा चुनाव कराने का फैसला लिया था। सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग उत्साह के साथ मतदान में हिस्सा ले रहे हैं। वोटों की गिनती 24 मई को होगी। वोटरों ने कहा- इस बार माहौल शांतिपूर्ण मतदाता देबाशीष घोष ने कहा कि इस बार मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा है और लोग बिना किसी डर के वोट डाल पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली बार विभिन्न राजनीतिक दलों, खासकर तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से दबाव बनाया गया था। उन्होंने कहा कि पिछली बार लोगों को घर-घर जाकर तय समय पर वोट डालने के लिए कहा जा रहा था और इलाके में डर का माहौल था, लेकिन इस बार सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने से मतदाता खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बीजेपी ने जीत का किया दावा भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने कहा कि इलाके में मतदान शांतिपूर्ण और उत्सव जैसा माहौल है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी बड़ी जीत दर्ज करेगी। पांडा ने कहा कि लोग आराम से वोट डाल रहे हैं और उन्हें पूरा भरोसा है कि उनकी पार्टी डेढ़ लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल करेगी। उन्होंने टीएमसी नेता जहांगीर खान पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्हें पहले ही हार का अंदाजा हो गया था। सुरक्षा के कड़े इंतजाम राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक, इस बार हर मतदान केंद्र पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के आठ जवान तैनात किए गए हैं। पिछली वोटिंग में प्रत्येक बूथ पर केवल चार जवान मौजूद थे। फलता विधानसभा क्षेत्र में कुल 35 कंपनियां केंद्रीय बलों की तैनात की गई हैं। इसके अलावा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 30 क्विक रिस्पांस टीम भी बनाई गई हैं। टीएमसी उम्मीदवार ने छोड़ा मैदान री-पोलिंग से पहले टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव मैदान से हटने का ऐलान कर दिया था। हालांकि पार्टी ने इसे उनका निजी फैसला बताया है। अब इस सीट पर मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्र में लंबे समय तक वाम दलों का प्रभाव रहा है, इसलिए मुकाबले में वामपंथी दलों की भूमिका को भी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पहले मतदान में क्या हुआ था? 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान कई मतदान केंद्रों से ईवीएम पर इत्र और चिपकने वाला टेप लगाए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद चुनाव आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए पूरे निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया था।  

surbhi मई 21, 2026 0
Election officials verifying voter lists in West Bengal during Special Intensive Revision process
वोटर लिस्ट की ‘सफाई’ ने बदली बंगाल की सियासत? SIR प्रक्रिया पर उठे बड़े सवाल

SIR Impact on Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद अब राजनीतिक गलियारों में हार और जीत के कारणों को लेकर गहन चर्चा शुरू हो गयी है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) की बड़ी हार के पीछे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को एक अहम फैक्टर माना जा रहा है. चुनावी आंकड़ों के विश्लेषण में यह दावा किया जा रहा है कि जिन सीटों पर मतदाता सूची से सबसे ज्यादा नाम हटाये गये, वहां भाजपा को भारी फायदा मिला. मतदाता सूची में बड़े बदलाव और बदला चुनावी गणित चुनाव आयोग की ओर से चलायी गयी SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से मृत, डुप्लीकेट और कथित फर्जी मतदाताओं के नाम हटाये गये. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसका सबसे ज्यादा असर उन सीटों पर पड़ा, जहां तृणमूल कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक मजबूत माना जाता था. बताया जा रहा है कि बंगाल की 177 ऐसी विधानसभा सीटें थीं, जहां हटाये गये मतदाताओं की संख्या 2021 में टीएमसी की जीत के अंतर से अधिक थी. इन सीटों में से 140 से ज्यादा सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की. इससे यह चर्चा तेज हो गयी है कि मतदाता सूची में बदलाव ने चुनावी नतीजों को प्रभावित किया. 15 हजार से ज्यादा नाम हटे, कई मंत्री हारे विश्लेषण के मुताबिक, करीब 50 सीटों पर 15 हजार से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाये गये थे. इन्हीं सीटों पर टीएमसी के कई बड़े नेताओं और मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा. भाजपा ने इन इलाकों में आक्रामक प्रचार और बूथ स्तर पर मजबूत रणनीति अपनायी, जिसका फायदा उसे चुनाव में मिला. SIR प्रक्रिया से कैसे बदला समीकरण? निर्वाचन आयोग की SIR प्रक्रिया में डिजिटल वेरिफिकेशन, आधार लिंकिंग और रिकॉर्ड मिलान के जरिए मतदाता सूची को अपडेट किया गया. इसके तहत मृत और पलायन कर चुके मतदाताओं के नाम हटाये गये. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इससे कथित फर्जी मतदान की संभावना कम हुई और चुनावी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनी. दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इसे टीएमसी के चुनावी नेटवर्क पर बड़ा झटका बताया. ममता बनर्जी ने पहले ही जतायी थी आशंका चुनाव से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी नेताओं ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाये थे. पार्टी का आरोप था कि उनके समर्थकों के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से हटाये जा रहे हैं. हालांकि निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष बताया था. अब चुनावी नतीजों के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गयी है. भाजपा का दावा है कि मतदाता सूची की सफाई से वास्तविक जनमत सामने आया, जबकि टीएमसी इसे अपने वोट बैंक को कमजोर करने की रणनीति बता रही है. भाजपा को मिला बड़ा फायदा राज्य में भाजपा ने 207 सीटों तक पहुंचकर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि SIR प्रक्रिया, सत्ताविरोधी माहौल और बूथ स्तर की मजबूत रणनीति ने भाजपा को बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. फिलहाल बंगाल की राजनीति में SIR प्रक्रिया सबसे बड़ा चर्चा का विषय बनी हुई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना है.  

surbhi मई 7, 2026 0
IPL 2026 Punjab vs Hyderabad
IPL 2026- कोनोली का शतक बेकार, पंजाब की लगातार तीसरी हार, हैदराबाद 33 रन से जीता

हैदराबाद, एजेंसियां। सनराइजर्स हैदराबाद ने पंजाब किंग्स को 33 रन से हराकर IPL 2026 पॉइंट्स टेबल में टॉप स्थान हासिल कर लिया। वहीं, पंजाब को इस सीजन में लगातार तीसरी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद टीम पहले स्थान से खिसककर दूसरे नंबर पर पहुंच गई। राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में पंजाब ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। इसके बाद हैदराबाद ने 20 ओवर में 3 विकेट पर 235 रन बनाए। जवाब में 236 रन के टारगेट का पीछा करते हुए पंजाब की टीम 20 ओवर में 7 विकेट पर 202 रन ही बना सकी।   हैदराबाद की ओर से 2 फिफ्टी लगी पहले बैटिंग करने उतरी हैदराबाद के लिए हेनरिक क्लासन और ईशान किशन ने अर्धशतक लगाए। क्लासन ने 43 बॉल पर 69 और ईशान ने 32 बॉल पर 55 रन बनाए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 88 रन की साझेदारी हुई। क्लासन और नीतीश रेड्डी (29*) के बीच चौथे विकेट के लिए 63 रन की साझेदारी हुई। इसके अलावा अभिषेक शर्मा (35) और ट्रैविस हेड (38) ने 55 रन की ओपनिंग पार्टनरशिप की। पंजाब के लिए लॉकी फर्ग्यूसन, विजयकुमार वैशाख, युजवेंद्र चहल को 1-1 विकेट मिला।   काम ना आया कोनोली का शतक पंजाब का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। टीम ने फील्डिंग के दौरान 3 कैच छोड़े, जबकि टारगेट का पीछा करते समय लगातार विकेट गंवाती रही। पंजाब के लिए कूपर कोनोली के अलावा कोई बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सका। कोनोली ने 59 बॉल पर नाबाद 107 रन बनाए। उनके अलावा मार्कस स्टोयनिस ने 28 और सूर्यांश शेडगे ने 25 रन का योगदान दिया। हैदराबाद के लिए पैट कमिंस और शिवांग कुमार ने 2-2 विकेट लिए। नीतीश रेड्डी, ईशान मलिंगा और साकिब हुसैन को 1-1 विकेट मिला। पैट कमिंस प्लेयर ऑफ द् मैच चुने गये।

Unknown मई 7, 2026 0
Mamata Banerjee accuses BJP and Election Commission observers of poll rigging in West Bengal
ममता बनर्जी का BJP पर बड़ा हमला: चुनाव में “धांधली” और EC ऑब्जर्वर्स पर गंभीर आरोप

कोलकाता में गरमाया सियासी माहौल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है और इसे “धांधली” के जरिए अंजाम दिया जा रहा है। ममता बनर्जी ने यहां तक कहा कि चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त ऑब्जर्वर “आतंकियों जैसा व्यवहार” कर रहे हैं, जिससे राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। BJP पर “इलेक्शन रिगिंग” का आरोप कोलकाता में TMC पार्षद असीम बोस से मुलाकात के दौरान ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा चुनाव में गड़बड़ी कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बलों का इस्तेमाल डराने और दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जिससे मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। केंद्रीय बलों पर गंभीर आरोप मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्रीय सुरक्षा बल TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं के घरों में जबरन प्रवेश कर रहे हैं और लोगों को डराने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इसी तरह की एक घटना देर रात TMC पार्षद असीम बोस के घर पर हुई, जिसके बाद वह उनसे मिलने पहुंचीं। चुनाव आयोग के ऑब्जर्वर्स पर विवादित बयान ममता बनर्जी ने Election Commission of India के ऑब्जर्वर्स पर भी गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनका व्यवहार निष्पक्षता के विपरीत दिखाई दे रहा है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में तनाव और बढ़ गया है। विपक्षी दलों ने ममता के आरोपों को चुनावी माहौल बिगाड़ने वाला बताया है, जबकि TMC ने अपने रुख का बचाव किया है। चुनाव के माहौल में ममता बनर्जी के इन आरोपों ने सियासी टकराव को और तेज कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग और भाजपा इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
West Bengal 2026 assembly election, TMC versus BJP contest across 294 seats with voter demographics
बंगाल चुनाव 2026: ममता का ‘चौका’ या BJP का ‘परिवर्तन’?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 राज्य की राजनीति के लिए निर्णायक माना जा रहा है। 294 सीटों पर होने वाला यह चुनाव मुख्य रूप से TMC बनाम BJP की सीधी टक्कर बन चुका है। चुनाव शेड्यूल (2 चरण) पहला चरण: 23 अप्रैल 2026 (152 सीटें) दूसरा चरण: 29 अप्रैल 2026 (142 सीटें) मतगणना: 4 मई 2026 प्रक्रिया पूरी: 6 मई 2026 294 सीटों का गणित कुल सीटें: 294 बहुमत का आंकड़ा: 148 सीटें SC सीटें: 68 ST सीटें: 16 सामान्य सीटें: 210 SC आबादी (~23.5%) लगभग 127 सीटों पर असर डालती है क्षेत्रीय समीकरण (Game Changer) उत्तर बंगाल (54 सीटें): निर्णायक भूमिका दार्जिलिंग: गोरखा पहचान मुद्दा जलपाईगुड़ी/अलीपुरदुआर: चाय बागान + आदिवासी वोट मालदा-मुर्शिदाबाद: मुस्लिम बहुल दिनाजपुर: कृषि आधारित क्षेत्र मुख्य मुकाबला TMC (ममता बनर्जी) नारा: “बंगाल बचाओ” फोकस: महिला योजनाएं (लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री) मजबूत संगठन + “बंगाल की बेटी” छवि BJP नारा: “परिवर्तन, सोनार बांग्ला” मुद्दे: भ्रष्टाचार, हिंसा, CAA-NRC चेहरा: मोदी-शाह + शुभेंदु अधिकारी अन्य खिलाड़ी कांग्रेस: अकेले चुनाव वाम मोर्चा + ISF: सीमित प्रभाव लेकिन ये वोट कटवा फैक्टर बन सकते हैं वोटर प्रोफाइल कुल मतदाता: ~7.4 करोड़ पुरुष: 3.60 करोड़ महिला: 3.44 करोड़ पहली बार वोटर: 5.23 लाख 20–29 आयु वर्ग: 1.31 करोड़ चुनाव के बड़े मुद्दे बेरोजगारी और विकास राजनीतिक हिंसा पहचान की राजनीति (CAA/NRC) किसान और ग्रामीण संकट केंद्र vs राज्य टकराव 2021 vs अब (पॉलिटिकल बैकग्राउंड) TMC: 215 सीटें (48%) BJP: 77 सीटें (38%) TMC अभी मजबूत स्थिति में, लेकिन BJP चुनौती दे रही निर्णायक फैक्टर SC/ST वोट (खासकर मतुआ, नमशूद्र) उत्तर बंगाल की सीटें मुस्लिम वोट का ध्रुवीकरण शहरी मध्यम वर्ग का रुख चुनावी हिंसा पर नियंत्रण

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
President Droupadi Murmu amid protocol row over meeting request and Bengal political tensions
राष्ट्रपति मुर्मू से मिलने का TMC का अनुरोध ठुकराया, ‘समय की कमी’ का हवाला; प्रोटोकॉल विवाद से बढ़ा तनाव

  पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए प्रोटोकॉल विवाद के बीच एक नया घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रपति कार्यालय ने Droupadi Murmu से मुलाकात के लिए All India Trinamool Congress (TMC) के प्रतिनिधिमंडल के अनुरोध को फिलहाल अस्वीकार कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति सचिवालय ने इसके पीछे समय की कमी का कारण बताया है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अगले सप्ताह के लिए नया समय मांगा है।   12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मिलने का किया गया था अनुरोध सूत्रों के मुताबिक, TMC के एक वरिष्ठ नेता ने सोमवार को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात का समय मांगा था। इस बैठक का उद्देश्य राज्य सरकार द्वारा आदिवासी समुदायों के लिए चल रही कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी राष्ट्रपति को देना था। पार्टी के भीतर इसे राष्ट्रपति और राज्य सरकार के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की पहल के रूप में भी देखा जा रहा था।   कैसे शुरू हुआ था प्रोटोकॉल विवाद दरअसल, यह विवाद पिछले सप्ताह सिलीगुड़ी में आयोजित एक आदिवासी सम्मेलन के दौरान सामने आया था। राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने Bagdogra Airport पर अपने स्वागत के समय मुख्यमंत्री या किसी मंत्री की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए थे। इसके अलावा कार्यक्रम स्थल में बदलाव को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई थी। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा था कि आदिवासी समुदायों तक केंद्र सरकार की कई योजनाएं शायद पूरी तरह नहीं पहुंच रही हैं।   ममता बनर्जी की तीखी प्रतिक्रिया राष्ट्रपति की टिप्पणियों पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इन बयानों को “राजनीतिक” बताते हुए कहा कि ऐसे बयान राष्ट्रपति पद की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं, खासकर तब जब राज्य में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ममता बनर्जी ने यह भी सवाल उठाया कि मतदाता सूची में संशोधन के दौरान कई आदिवासियों के नाम हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।   PM मोदी ने बताया ‘शर्मनाक’ इस पूरे विवाद पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन को “शर्मनाक” बताते हुए कहा कि लोकतंत्र और आदिवासी समुदाय के सम्मान में विश्वास रखने वाले लोगों को इससे निराशा हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति, जो स्वयं आदिवासी समुदाय से आती हैं, उनकी पीड़ा और निराशा बेहद दुखद है।   बंगाल सरकार ने आरोपों को किया खारिज वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिस कार्यक्रम में राष्ट्रपति शामिल हुईं, वह निजी तौर पर आयोजित था और उसमें मुख्यमंत्री की उपस्थिति अनिवार्य नहीं थी। राज्य सरकार का कहना है कि जिला प्रशासन की ओर से किसी भी तरह का प्रोटोकॉल उल्लंघन नहीं हुआ है और इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0