tribal culture

Children dressed in traditional tribal attire performing folk dances at a World Tribal Day event in Gumla
विश्व आदिवासी दिवस पर पारंपरिक वेशभूषा में सजे बच्चों ने बिखेरी संस्कृति की छटा, लोकगीत-नृत्य से मोहा मन

गुमला: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बिशुनपुर स्थित विकास भारती द्वारा संचालित ज्ञान निकेतन में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा, लोककला और पारंपरिक जीवनशैली की आकर्षक झलक देखने को मिली. बच्चों ने विभिन्न जनजातियों की पारंपरिक वेशभूषा धारण कर लोकगीत और लोकनृत्य प्रस्तुत किये, जिसे देखकर कार्यक्रम में मौजूद लोग मंत्रमुग्ध हो गये. पारंपरिक वेशभूषा में नजर आये बच्चे कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी-अपनी जनजातीय पहचान के अनुरूप पारंपरिक परिधान पहनकर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं. बच्चों की वेशभूषा, नृत्य और लोकगीतों में झारखंड की समृद्ध आदिवासी विरासत की झलक साफ दिखाई दी. कार्यक्रम के दौरान बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था. उनकी प्रस्तुतियों पर पूरा कार्यक्रम स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. असुर और खेरवार जनजाति के नृत्य ने खींचा ध्यान कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण असुर जनजाति का लोकनृत्य, खेरवार जनजाति का जादूर नृत्य तथा उरांव और बिरजिया जनजातियों के पारंपरिक नृत्य रहे. बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ इन लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी. लोकगीतों और पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति के माध्यम से बच्चों ने अपनी संस्कृति और परंपरा को जीवंत रूप में सामने रखा. संस्कृति को बचाने में नई पीढ़ी की भूमिका अहम मौके पर संस्था के संयुक्त सचिव महेंद्र भगत ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, परंपरा और पारंपरिक पहनावे से होती है. आधुनिकता के दौर में अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाये रखना बड़ी चुनौती है. ऐसे में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ना बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि बच्चों को अपनी संस्कृति के बारे में जानकारी देने और उन्हें पारंपरिक कला से जोड़ने से आने वाली पीढ़ी अपनी विरासत को बेहतर तरीके से समझ सकेगी. विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और पहचान के संरक्षण का संकल्प लेने का भी दिन है. बच्चों की प्रस्तुति ने बढ़ाया कार्यक्रम का आकर्षण कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने गीत, नृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से आदिवासी संस्कृति के अलग-अलग रंगों को प्रदर्शित किया. कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना की. आयोजन के माध्यम से बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने और उसे मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर भी मिला.  

kalpana अगस्त 10, 2026 0
Students attending a film-making master class during Jharkhand Tribal Festival 2026
आदिवासी महोत्सव में फिल्म फेस्टिवल और मास्टर क्लास, 9 अगस्त को युवाओं को मिलेगा फिल्म मेकिंग का प्रशिक्षण

रांची: आदिवासी महोत्सव-2026 के तहत 9 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में झारखंड फिल्म फेस्टिवल और मास्टर क्लास का आयोजन किया जाएगा. झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य के युवाओं और विद्यार्थियों को फिल्म निर्माण, विजुअल स्टोरीटेलिंग और मीडिया इंडस्ट्री में करियर की संभावनाओं से परिचित कराना है. कार्यक्रम में आदिवासी जीवन, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा. फिल्म और मीडिया के क्षेत्र में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए यह कार्यक्रम खास होगा. झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के कुलपति को पत्र भेजकर कार्यक्रम में विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया है. विश्वविद्यालय से जनसंचार, पत्रकारिता, मीडिया स्टडीज, फिल्म स्टडीज, परफॉर्मिंग आर्ट्स और विजुअल कम्युनिकेशन जैसे विषयों के कम से कम 50 विद्यार्थियों को नामित कर कार्यक्रम में भेजने का अनुरोध किया गया है. आदिवासी जीवन और संस्कृति पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन फिल्म फेस्टिवल के दौरान आदिवासी जीवन, स्वदेशी संस्कृति, सामाजिक मुद्दों और उत्कृष्ट सिनेमा पर आधारित फिल्मों की स्क्रीनिंग की जाएगी. इसके माध्यम से प्रतिभागियों को आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को सिनेमा के माध्यम से समझने का अवसर मिलेगा. इसके साथ ही "फिल्म मेकिंग एंड करियर ऑपर्च्युनिटीज इन द फिल्म इंडस्ट्री" विषय पर विशेष मास्टर क्लास आयोजित होगी. इसमें सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI), कोलकाता के विशेषज्ञ और प्राध्यापक युवाओं को फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी देंगे. फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखेंगे छात्र मास्टर क्लास के दौरान प्रतिभागियों को फिल्म निर्माण की शुरुआती तकनीकों से लेकर विजुअल स्टोरीटेलिंग तक की जानकारी दी जाएगी. विशेषज्ञ पटकथा लेखन, निर्देशन, सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग और साउंड डिजाइन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर मार्गदर्शन करेंगे. विद्यार्थियों को यह भी बताया जाएगा कि किसी कहानी को विजुअल माध्यम में कैसे बदला जाता है और फिल्म या डिजिटल कंटेंट तैयार करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. इससे फिल्म और मीडिया के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं को इंडस्ट्री की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझने में मदद मिलेगी. फिल्म, टीवी, ओटीटी और डिजिटल कंटेंट में करियर की जानकारी कार्यक्रम में सिर्फ फिल्म निर्माण तक ही सीमित जानकारी नहीं दी जाएगी, बल्कि फिल्म, टेलीविजन, ओटीटी और डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में उपलब्ध करियर के अवसरों पर भी चर्चा होगी. विशेषज्ञ विद्यार्थियों को अलग-अलग प्रोफेशनल भूमिकाओं, आवश्यक स्किल्स और उच्च शिक्षा के विकल्पों के बारे में जानकारी देंगे. खासकर पत्रकारिता, मीडिया और विजुअल कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह मास्टर क्लास अपने कौशल को बेहतर करने और इंडस्ट्री की जरूरतों को समझने का अच्छा अवसर माना जा रहा है. युवाओं की रचनात्मक क्षमता को मिलेगा मंच झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य राज्य के युवाओं में रचनात्मकता को बढ़ावा देना और उन्हें फिल्म एवं मीडिया उद्योग की व्यावहारिक समझ उपलब्ध कराना है. आदिवासी महोत्सव जैसे बड़े मंच पर फिल्म फेस्टिवल और मास्टर क्लास के आयोजन से विद्यार्थियों को विशेषज्ञों से सीधे सीखने और अपने करियर को लेकर बेहतर दिशा हासिल करने का मौका मिलेगा. झारखंड में फिल्म शिक्षा को लेकर बढ़ रही पहल गौरतलब है कि 22 जुलाई को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में झारखंड राज्य फिल्म विकास निगम और सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट, कोलकाता के बीच रांची में फिल्म इंस्टीट्यूट की स्थापना को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे. ऐसे में आदिवासी महोत्सव के दौरान आयोजित यह फिल्म फेस्टिवल और मास्टर क्लास झारखंड में फिल्म शिक्षा और स्थानीय प्रतिभाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है.  

kalpana अगस्त 8, 2026 0
Thousands of tribal artists in traditional attire participating in the grand Tribal Jatra during Jharkhand Tribal Festival 2026 in Ranchi.
आदिवासी दिवस पर रांची में निकलेगा भव्य जतरा, 5000 कलाकार बनेंगे सांस्कृतिक विरासत के वाहक

रांची: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राजधानी रांची में 9 और 10 अगस्त को झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 का भव्य आयोजन किया जाएगा. मोरहाबादी मैदान में होने वाले इस दो दिवसीय महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं. राज्य सरकार की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा, लोककला और इतिहास की झलक देखने को मिलेगी. महोत्सव का उद्घाटन 9 अगस्त को दोपहर 1:30 बजे होगा. इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण भव्य 'जतरा' होगा, जिसमें देशभर से आए 5,000 से अधिक आदिवासी कलाकार अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्य यंत्रों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हिस्सा लेंगे. मांदर और नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक नृत्य और लोकगीतों के बीच राजधानी रांची आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगी नजर आएगी. जेल चौक से मोरहाबादी तक निकलेगा भव्य जतरा महोत्सव के पहले दिन निकलने वाला जतरा जेल म्यूजियम (जेल चौक) से शुरू होगा. यहां से कलाकार गेट संख्या-1 से होते हुए जेल चौक, करमटोली चौक, प्रेस क्लब, लोकायुक्त कार्यालय और गेरिसन चौक होते हुए मोरहाबादी मैदान पहुंचेंगे. गेरिसन चौक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जतरा में शामिल कलाकारों और प्रतिभागियों का स्वागत करेंगे. इसके बाद पूरा जतरा मोरहाबादी मैदान पहुंचेगा, जहां मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा. आयोजन स्थल पर लोगों की सुविधा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए पांच अलग-अलग प्रवेश द्वार बनाए गए हैं. पूरे रूट पर सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण और चिकित्सा सुविधाओं की भी विशेष व्यवस्था की गई है. संस्कृति, खान-पान और कला का होगा संगम दो दिवसीय महोत्सव में झारखंड की आदिवासी संस्कृति को कई रूपों में प्रस्तुत किया जाएगा. यहां पारंपरिक जनजातीय व्यंजनों के स्टॉल, कला एवं शिल्प प्रदर्शनी, आदिवासी पुस्तक मेला, लोक चित्रकला गैलरी और हस्तशिल्प प्रदर्शनी लगाई जाएगी. आगंतुकों को झारखंड की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराने के लिए विभिन्न गोष्ठियों और सांस्कृतिक चर्चाओं का भी आयोजन होगा. ड्रोन शो और 5D इमर्सिव जोन होंगे खास आकर्षण इस बार महोत्सव में आधुनिक तकनीक का भी खास समावेश किया गया है. ड्रोन और लेजर शो के जरिए झारखंड आंदोलन, दिशोम गुरु शिबू सोरेन और राज्य के आंदोलनकारी शहीदों की गाथा को प्रस्तुत किया जाएगा. इसके अलावा 5D इमर्सिव जोन तैयार किया गया है, जहां आगंतुक आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिबू सोरेन के जीवन, संघर्ष और झारखंड आंदोलन के इतिहास को करीब से जान सकेंगे. फैशन शो, फिल्म फेस्टिवल और वृत्तचित्र भी होंगे शामिल महोत्सव में पहली बार ट्राइबल फैशन शो का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न जनजातियों की पारंपरिक वेशभूषा और हस्तनिर्मित परिधानों का प्रदर्शन होगा. इसके साथ ही आदिवासी जीवन, संस्कृति और इतिहास पर आधारित फिल्मों और वृत्तचित्रों का प्रदर्शन भी किया जाएगा. राज्य सरकार के आदिवासी कल्याण विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय महोत्सव का समापन 10 अगस्त को होगा. आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि झारखंड की आदिवासी पहचान, विरासत और गौरव को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने का प्रयास है. बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए हैं.  

kalpana अगस्त 7, 2026 0
President Droupadi Murmu meets Bastar delegation and honors Bastar Pandum winners at Rashtrapati Bhavan
राष्ट्रपति भवन में गूंजा बस्तर का वैभव, मांझी-चालकी से मिलीं राष्ट्रपति मुर्मु, बस्तर पंडुम विजेताओं का हुआ सम्मान

राष्ट्रपति भवन में शुक्रवार को बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। पहली बार बस्तर के 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन पहुंचकर अपनी पारंपरिक वेशभूषा, संस्कृति और लोकजीवन की झलक पेश की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं, मांझी-चालकी, परगना मांझी और पद्मश्री सम्मानित हस्तियों को विशेष रूप से सम्मानित किया। राष्ट्रपति ने खुद परोसा भोजन, बस्तर दशहरा में आने की जताई इच्छा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में विशेष भोज का आयोजन किया। खास बात यह रही कि उन्होंने स्वयं सभी अतिथियों को भोजन परोसकर आत्मीयता का परिचय दिया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ने बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककला, पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और बस्तर पंडुम के आयोजन की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि भविष्य में वह बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में स्वयं शामिल होना चाहेंगी। राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर दशहरा उनके हृदय के बेहद करीब है और भगवान जगन्नाथ की परंपरा से उनका विशेष जुड़ाव रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता भी मांझी रहे थे, इसलिए इस परंपरा से उनका भावनात्मक संबंध है। बस्तर पंडुम को बताया सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक पहचान का जीवंत उत्सव है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से युवाओं का अपनी जड़ों से जुड़ाव मजबूत होता है और स्थानीय पर्यटन, रोजगार तथा पारंपरिक कला को नई पहचान मिलती है। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि बस्तर के कलाकार, शिल्पकार और युवा अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयासों से बस्तर अब शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। शिक्षा, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार इस परिवर्तन का प्रमाण है। राष्ट्रपति ने मांझी और चालकी की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वे समाज और प्रशासन के बीच मजबूत सेतु का कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भेंट की 300 साल पुरानी 'झिटकू-मिटकी' कलाकृति इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी प्रेमगाथा का प्रतीक 'झिटकू-मिटकी' स्मृति-चिह्न भेंट किया। यह कलाकृति बस्तर की लोकआस्था, प्रेम, समर्पण, त्याग और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया और कहा कि उनके आगमन से बस्तर की संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। अमित शाह बोले- पहली बार राष्ट्रपति भवन में दिखी बस्तर की ऐसी झलक कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि वह कई बार राष्ट्रपति भवन आए हैं, लेकिन पहली बार यहां बस्तर की पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल को देखकर विशेष खुशी हुई। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय विरासत के सम्मान का महत्वपूर्ण अवसर बताया। प्रतिनिधिमंडल ने किया राष्ट्रपति भवन का भ्रमण कार्यक्रम के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी किया और देश की लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। प्रतिनिधिमंडल में गृहमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागी, मांझी-चालकी, पद्मश्री सम्मानित हस्तियां, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
Jharkhand tribal languages
क्या क्लस्टर सिस्टम खत्म कर देगा झारखंड की जनजातीय भाषाएं?

रांची। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत झारखंड के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लागू क्लस्टर सिस्टम से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (TRL) विभागों में पढ़ने वाले छात्रों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सीटों की कटौती, विषयों के पुनर्वितरण और चांसलर पोर्टल के माध्यम से हो रहे सीट आवंटन को लेकर छात्र, शोधार्थी और भाषा प्रेमी गहरी चिंता में हैं।  झारखंड टीआरएल संघ ने भी इस व्यवस्था में मौजूद विसंगतियों को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को क्लस्टर सिस्टम से बाहर रखने की मांग की है।    क्या है क्लस्टर सिस्टम? दरअसल, क्लस्टर सिस्टम के तहत आसपास के कई कॉलेजों को एक समूह में जोड़ दिया जाता है और विषयों का बंटवारा किया जाता है। इसका उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, लेकिन झारखंड में इसके क्रियान्वयन को लेकर उठ रहे सवाल यह संकेत दे रहे हैं कि जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं जैसे संवेदनशील विषयों में स्थानीय जरूरतों और सांस्कृतिक सरोकारों को ध्यान में रखते हुए संतुलित समाधान तलाशना आवश्यक होगा। फिलहाल यह मुद्दा शिक्षा जगत में बहस का विषय बना हुआ है और आने वाले समय में इस पर व्यापक चर्चा की संभावना है।    भाषाविद और संघ की मांग कुरमाली भाषा के विद्वान राजाराम महतो का कहना है कि भाषा संरक्षण के लिए छात्रों की सहज पहुंच और पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता जरूरी है। झारखंड TRL संघ ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर जनजातीय भाषाओं को क्लस्टर सिस्टम से बाहर रखने की मांग की है।   विश्वविद्यालय का पक्ष रांची विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सरोज शर्मा ने कहा कि यह व्यवस्था उपलब्ध शिक्षकों और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए लागू की गई है। हालांकि उन्होंने माना कि छात्रों की व्यावहारिक समस्याओं पर विश्वविद्यालय गंभीरता से विचार कर रहा है। फिलहाल यह मुद्दा शिक्षा जगत में बहस का विषय बना हुआ है।

anjali kumari जून 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 7, 2026 0