Trinamool Congress

Lok Sabha Suspension
कल्याण बनर्जी लोकसभा से पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित, 'चोर' टिप्पणी को लेकर बढ़ा विवाद

नई दिल्ली, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी को लोकसभा से पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी के बागी सांसद को लेकर सदन परिसर में आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए 'चोर' शब्द का इस्तेमाल किया। इस मामले के बाद विवाद बढ़ गया और लोकसभा में कार्रवाई की गई।   असंसदीय भाषा के आरोप में हुई कार्रवाई   लोकसभा में लगातार जारी हंगामे के बीच कल्याण बनर्जी के खिलाफ यह कार्रवाई की गई। आरोप है कि उन्होंने टीएमसी से अलग हुए सांसदों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके बाद मामला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तक पहुंचा। शिकायत के बाद सदन में उनके निलंबन का फैसला लिया गया।   सदन में टकराव की स्थिति बनी   जानकारी के अनुसार, कार्यवाही स्थगित होने के बाद कल्याण बनर्जी और कुछ अन्य सांसदों के बीच बहस हुई। इस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कई विपक्षी सांसदों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराने की कोशिश की। बाद में संबंधित सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।   टीएमसी में अंदरूनी खींचतान भी चर्चा में   कल्याण बनर्जी टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में शामिल हैं। वहीं, जिन सांसदों को लेकर विवाद हुआ, वे पहले टीएमसी से जुड़े थे और बाद में पार्टी से अलग हो गए। इस घटनाक्रम ने टीएमसी के अंदर चल रही राजनीतिक खींचतान को भी उजागर किया है।   मानसून सत्र में विपक्ष का हंगामा जारी   संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष लगातार विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार पर हमलावर है। नीट पेपर लीक, सीजेपी प्रदर्शन पर कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।

anjali kumari जुलाई 22, 2026 0
TMC Martyrs Day Rally
टीएमसी शहीद दिवस रैली से पहले बवाल, मंच पर तोड़फोड़ को लेकर ममता बनर्जी ने लगाए गंभीर आरोप

कोलकाता, एजेंसियां। कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के शहीद दिवस कार्यक्रम से एक दिन पहले रैली स्थल पर कथित तोड़फोड़ को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है। बिड़ला प्लेनेटेरियम के सामने आयोजित होने वाली रैली के लिए तैयार किए जा रहे मंच पर देर रात हुई घटना के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं मौके पर पहुंचीं और भाजपा तथा पुलिस की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए। भाजपा ने इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।   ममता का आरोप- मंच, बिजली और साउंड सिस्टम को नुकसान पहुंचाया गया ममता बनर्जी ने दावा किया कि देर रात मोटरसाइकिल सवार लोगों के एक समूह ने रैली स्थल पर पहुंचकर मंच को नुकसान पहुंचाया, बिजली और माइक्रोफोन की लाइनें काट दीं तथा बैनर-पोस्टर फाड़ दिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वहां काम कर रहे मजदूरों और पार्टी कार्यकर्ताओं को धमकाकर मौके से भगा दिया गया। ममता के अनुसार, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ भी धक्का-मुक्की की गई।   पुलिस पर उठाए सवाल, कोर्ट की अवमानना की चेतावनी मुख्यमंत्री ने पुलिस पर हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि अदालत ने रैली स्थल पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस को सौंपी थी, लेकिन घटना के समय पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था मौजूद नहीं थी। ममता ने कहा कि वह पुलिस और राज्य प्रशासन के खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला उठाने की मांग करेंगी। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।   कड़ी सुरक्षा के बीच अलग-अलग कार्यक्रम 21 जुलाई को मनाए जाने वाले शहीद दिवस पर टीएमसी, पार्टी के बागी गुट और कांग्रेस की ओर से कोलकाता में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। तीनों आयोजन स्थल एक-दूसरे के काफी करीब हैं, जिसके चलते पूरे इलाके में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि टीएमसी हर वर्ष 21 जुलाई को 1993 में पुलिस फायरिंग में मारे गए 13 युवा कार्यकर्ताओं की स्मृति में शहीद दिवस मनाती है। इस बार रैली से पहले हुई कथित तोड़फोड़ ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्मा दिया है।

anjali kumari जुलाई 21, 2026 0
Former West Bengal minister Partha Chatterjee speaking on TMC leadership and Abhishek Banerjee
अभिषेक बनर्जी को आगे बढ़ाने से शुरू हुआ तृणमूल का पतन: पार्थ चटर्जी का बड़ा दावा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस की चुनावी हार के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच पार्टी के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के संगठनात्मक कमजोर होने की शुरुआत उस समय हुई, जब अभिषेक बनर्जी को संगठन में प्रमुखता दी जाने लगी। "अभिषेक को आगे बढ़ाने की कीमत पार्टी ने चुकाई" एक निजी चैनल से बातचीत में पार्थ चटर्जी ने कहा कि अभिषेक बनर्जी को स्थापित करने की प्रक्रिया में कई वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की गई। उनका आरोप है कि इसी वजह से संगठन कमजोर होता गया और अंततः इसका असर चुनावी प्रदर्शन पर भी पड़ा।उन्होंने कहा कि पार्टी धीरे-धीरे आम लोगों से दूर होती चली गई, जिसका परिणाम वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में हार के रूप में सामने आया। शुभेंदु अधिकारी को नहीं मिला उचित सम्मान पार्थ चटर्जी ने कहा कि अभिषेक बनर्जी को आगे बढ़ाने के दौरान शुभेंदु अधिकारी जैसे नेताओं को वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे। उनके अनुसार, वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा ने संगठन के भीतर असंतोष बढ़ाया और इसका असर पार्टी की एकजुटता पर पड़ा। "हर पार्टी छोड़ने वाला गद्दार नहीं" पूर्व मंत्री ने कहा कि तृणमूल छोड़ने वाले सभी नेताओं को गद्दार कहना उचित नहीं है। उन्होंने ममता बनर्जी के हालिया बयान का जिक्र करते हुए तंज कसते हुए कहा कि यदि अभिषेक बनर्जी को "बाघ" कहा जा रहा है, तो बाकी नेताओं को क्या कहा जाएगा। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, "अगर अभिषेक बाघ हैं, तो फिर बाघ के अत्याचार से बाकी बिल्लियां भाग गईं।" पार्टी के भीतर बढ़ सकती है सियासी हलचल पार्थ चटर्जी के इस बयान को तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी की ओर से उनके आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनके बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं।  

kalpana जुलाई 17, 2026 0
Realme China Exit
OnePlus के बाद Realme का बड़ा फैसला, चीन से समेटेगी कारोबार; वैश्विक बाजारों पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली, एजेंसियां। स्मार्टफोन ब्रांड Realme ने अपनी वैश्विक रणनीति में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। कंपनी अब अपने घरेलू बाजार चीन से स्मार्टफोन कारोबार चरणबद्ध तरीके से समेटने की तैयारी कर रही है और भविष्य में यूरोप समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर अधिक ध्यान देगी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब हाल ही में OnePlus ने भी अपनी वैश्विक रणनीति में बड़े बदलाव की घोषणा की थी।   क्यों लिया गया यह फैसला?   रिपोर्ट के मुताबिक, Realme की मूल कंपनी Oppo अपने विभिन्न ब्रांडों के पुनर्गठन पर काम कर रही है। इसी रणनीति के तहत Realme चीन में नए स्मार्टफोन लॉन्च कम करेगी और वैश्विक बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर फोकस करेगी। कंपनी खासतौर पर यूरोप के नॉर्डिक देशों में विस्तार की योजना बना रही है।   भारत पर नहीं पड़ेगा असर   Realme ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले का भारत में कंपनी के कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत कंपनी के सबसे बड़े बाजारों में शामिल है और यहां नए स्मार्टफोन लॉन्च, बिक्री, सर्विस और सॉफ्टवेयर अपडेट पहले की तरह जारी रहेंगे। कंपनी ने हाल ही में भारतीय बाजार के लिए नए स्मार्टफोन और रिटेल विस्तार की योजनाओं का भी ऐलान किया है।   सॉफ्टवेयर रणनीति में भी बदलाव   कंपनी ने यह भी घोषणा की है कि भविष्य में Realme के स्मार्टफोन ColorOS आधारित सॉफ्टवेयर पर चलेंगे। इस बदलाव का उद्देश्य सॉफ्टवेयर अपडेट प्रक्रिया को अधिक तेज और बेहतर बनाना बताया गया है। हालांकि, मौजूदा ग्राहकों को नियमित अपडेट और सपोर्ट मिलता रहेगा।   बाजार की नजर अगले कदम पर   विशेषज्ञों का मानना है कि Oppo समूह की यह रणनीति वैश्विक स्तर पर ब्रांडों के बीच जिम्मेदारियों को नए सिरे से तय करने की दिशा में बड़ा कदम है। फिलहाल Realme का फोकस चीन की बजाय अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर रहेगा, जबकि भारत कंपनी के लिए प्रमुख रणनीतिक बाजार बना रहेगा।

anjali kumari जुलाई 17, 2026 0
West Bengal Sand Smuggling
बंगाल में अवैध बालू तस्करी पर मंत्री का सख्त एक्शन, 12 से 14 बालू लदे डंपर पकड़कर पुलिस को सौंपे

बीरभूम, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में अवैध बालू तस्करी के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। कृषि मंत्री और मयूरेश्वर के विधायक दुध कुमार मंडल ने गुरुवार को खुद सड़क पर उतरकर अवैध बालू परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की। मंत्री ने बिना वैध दस्तावेजों के बालू लेकर जा रहे करीब 12 से 14 डंपरों को रोककर पुलिस के हवाले कर दिया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में बालू माफियाओं के बीच हड़कंप मच गया, जबकि स्थानीय लोगों ने मंत्री के कदम का स्वागत किया।   शिकायतों के बाद मंत्री ने संभाली कमान जानकारी के अनुसार, मंत्री को पिछले कई दिनों से अवैध बालू तस्करी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि कई वाहन बिना आवश्यक अनुमति और वैध कागजात के बालू का परिवहन कर रहे हैं। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए मंत्री स्वयं सड़क पर पहुंचे और संदिग्ध डंपरों की जांच शुरू कराई। इस दौरान कई वाहनों को रोका गया और दस्तावेजों की जांच में अनियमितता मिलने पर उन्हें तत्काल पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।   घटनास्थल पर जुटी भीड़, पुलिस ने संभाला मोर्चा मंत्री की कार्रवाई की सूचना मिलते ही मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्र हो गए। कुछ समय के लिए इलाके में तनाव जैसी स्थिति भी बनी, लेकिन पुलिस ने हालात को जल्द ही नियंत्रित कर लिया। पकड़े गए सभी डंपरों की जांच शुरू कर दी गई है और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।   अवैध कारोबार पर नहीं होगी कोई रियायत कृषि मंत्री दुध कुमार मंडल ने स्पष्ट कहा कि जिले में अवैध बालू खनन और तस्करी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पुलिस और प्रशासन को इस अवैध कारोबार पर स्थायी रोक लगाने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई में लापरवाही बरती गई तो और कड़े कदम उठाए जाएंगे। मंत्री की इस पहल के बाद स्थानीय लोगों ने भी अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।

anjali kumari जुलाई 16, 2026 0
Koel Mallick
पश्चिम बंगाल : तृणमूल सांसद कोयल मल्लिक ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की चर्चित अभिनेत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बुधवार को दिल्ली पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से अपना इस्तीफा सौंपा। इससे पहले जून में उन्होंने ईमेल के माध्यम से इस्तीफा भेजने की कोशिश की थी, लेकिन संसदीय नियमों के तहत उसे स्वीकार नहीं किया गया था। अब उनके औपचारिक इस्तीफे के बाद बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।   ईमेल नहीं, खुद पहुंचकर दिया इस्तीफा जानकारी के अनुसार, कोयल मल्लिक अपने पति और फिल्म निर्माता निशपाल सिंह के साथ दिल्ली पहुंचीं और राज्यसभा सचिवालय में व्यक्तिगत रूप से इस्तीफा सौंपा। बताया जा रहा है कि विदेश यात्रा के कारण वह पहले यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकी थीं। देश लौटने के बाद उन्होंने औपचारिक रूप से अपनी सदस्यता छोड़ने का फैसला लिया।   हाल ही में ली थी राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ कोयल मल्लिक ने इसी वर्ष 6 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने अपने परिवार के साथ तस्वीर साझा करते हुए कहा था कि उन्हें बंगाल की जनता की सेवा करने का अवसर मिला है और वह पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारी निभाएंगी। चुनाव प्रचार के दौरान भी वह पार्टी के लिए सक्रिय दिखाई दी थीं, लेकिन उसके बाद उनकी राजनीतिक गतिविधियां सीमित हो गई थीं।   भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज कोयल मल्लिक के इस्तीफे के बाद उनके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अब तक न तो भाजपा की ओर से और न ही कोयल मल्लिक ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया है। ऐसे में उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर सस्पेंस बरकरार है। फिलहाल राजनीतिक गलियारों में इस इस्तीफे को बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यदि कोयल मल्लिक अपनी नई राजनीतिक दिशा का ऐलान करती हैं तो इसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
Madan Mitra
मदन मित्रा ने TMC से दिया इस्तीफा, ऋतब्रत बनर्जी के गुट में हुए शामिल; बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल होने का ऐलान किया। इस फैसले को TMC के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान का बड़ा संकेत माना जा रहा है।   नेतृत्व से नाराजगी बनी वजह   मदन मित्रा ने अपने इस्तीफे के पीछे पार्टी नेतृत्व से मतभेद को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन के भीतर उनकी बातों को महत्व नहीं दिया जा रहा था और पार्टी में फैसले लेने की प्रक्रिया बदल गई है। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए।   बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल   मदन मित्रा के इस कदम के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के बाद TMC के भीतर उभर रहे मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं।   TMC के लिए बड़ा झटका   मदन मित्रा लंबे समय से ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिने जाते रहे हैं। ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना TMC के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। हाल ही में उन्हें संगठन में अहम जिम्मेदारी भी दी गई थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।   आगे की रणनीति पर नजर   मदन मित्रा के बागी गुट में शामिल होने के बाद अब सभी की नजर पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और TMC नेतृत्व की अगली रणनीति पर टिकी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर और भी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
TMC Relief
कलकत्ता हाईकोर्ट से टीएमसी को अंतरिम राहत, फ्रीज बैंक खातों से सीमित खर्च की मिली अनुमति

कोलकाता, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। पार्टी के तीन बैंक खातों में जमा करीब 440 करोड़ रुपये फ्रीज किए जाने के मामले में अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए सीमित वित्तीय लेन-देन की अनुमति दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि टीएमसी अपने दैनिक संगठनात्मक कार्य, प्रशासनिक खर्च और अदालतों में चल रहे मामलों से जुड़े कानूनी खर्चों के लिए इन खातों से राशि निकाल सकती है। हालांकि, खातों का संचालन पूरी तरह पार्टी के नियंत्रण में नहीं होगा।   स्पेशल ऑफिसर रखेंगे हर लेन-देन पर नजर जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूर्व न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार को स्पेशल ऑफिसर नियुक्त किया है। वे 30 सितंबर 2026 तक खातों के संचालन और धन निकासी की निगरानी करेंगे। अदालत के निर्देशानुसार, पार्टी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता द्वारा जारी प्रत्येक चेक पर स्पेशल ऑफिसर के काउंटर सिग्नेचर के बाद ही बैंक भुगतान करेगा।   केवल आवश्यक खर्चों की अनुमति हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि खातों से केवल नियमित संगठनात्मक खर्च, कर्मचारियों के वेतन और कानूनी मामलों से जुड़े भुगतान ही किए जा सकेंगे। किसी भी बड़े, असामान्य या पूंजीगत खर्च पर फिलहाल रोक रहेगी। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच पूरी होने तक धन का उपयोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए ही हो।   पुलिस कार्रवाई पर अदालत ने जताई नाराजगी सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायत दर्ज होने के महज 24 घंटे के भीतर बैंक खाते फ्रीज किए जाने पर सवाल उठाए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि सामान्य मामलों में पुलिस की कार्रवाई धीमी रहती है, लेकिन इस प्रकरण में असाधारण तेजी दिखाई गई, जिसके पर्याप्त कारण रिकॉर्ड पर नजर नहीं आते।   गुटबाजी पर फैसला नहीं, अगली सुनवाई सितंबर में टीएमसी के भीतर नेतृत्व विवाद को लेकर उठे सवालों पर अदालत ने कहा कि यह आदेश केवल अंतरिम राहत के लिए है और इससे किसी भी गुट के वैध होने का फैसला नहीं माना जाएगा। पार्टी के वास्तविक नेतृत्व का मुद्दा अभी निर्वाचन आयोग के समक्ष विचाराधीन है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी, जिसमें आगे की स्थिति पर निर्णय लिया जाएगा।

abhishek singh जुलाई 11, 2026 0
Mamata Banerjee News
ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका? राज्यसभा सांसद के इस्तीफे की अटकलें तेज

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए राजनीतिक चुनौतियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। हाल ही में तीन राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद अब एक और सांसद के इस्तीफे की चर्चाओं ने सियासी हलचल तेज कर दी है। सूत्रों के अनुसार राज्यसभा सांसद रुक्मणी मलिक ने अपना इस्तीफा राज्यसभा के उपसभापति को ई-मेल के माध्यम से भेजा है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।   राज्यसभा में संख्या बल घटने की आशंका सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस के कुछ और राज्यसभा सांसद पार्टी से दूरी बना सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो उच्च सदन में पार्टी का संख्या बल और प्रभाव दोनों कमजोर हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे इस्तीफे केवल संख्यात्मक नुकसान नहीं हैं, बल्कि पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और नेतृत्व संबंधी चुनौतियों का भी संकेत देते हैं। बताया जा रहा है कि अब तक करीब 20 सांसद अलग-अलग समय पर पार्टी छोड़ चुके हैं या अन्य दलों में शामिल हो चुके हैं।   संगठन में भी बढ़ी चुनौती राज्यसभा के घटनाक्रम के साथ-साथ टीएमसी संगठन के भीतर भी संकट गहराता दिख रहा है। ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट समानांतर संगठन खड़ा करने में सक्रिय है। इस गुट ने पहले ही नई वर्किंग कमेटी का गठन कर खुद को "असली तृणमूल" बताया है और संबंधित दस्तावेज चुनाव आयोग को सौंपने का दावा किया है। अब राज्य और जिला स्तर पर नई संगठनात्मक इकाइयों के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।   नेतृत्व पर बढ़ता दबाव बताया जा रहा है कि कोलकाता में आयोजित दो दिवसीय बैठक में राज्य अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष और विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों के नामों पर मंथन किया जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सांसदों का पलायन जारी रहता है और समानांतर संगठन अपनी पकड़ मजबूत करता है, तो तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर संघर्ष आने वाले समय में और तेज हो सकता है। फिलहाल पार्टी की ओर से इन अटकलों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0
Person performing strength training exercises to build chest and back muscles, highlighting their potential link to better heart health.
मजबूत छाती और पीठ की मांसपेशियां हार्ट अटैक का खतरा 31% तक घटा सकती हैं? नए अध्ययन में सामने आए अहम संकेत

शोध में मांसपेशियों की गुणवत्ता और हृदय स्वास्थ्य के बीच मिला मजबूत संबंध दिल की बीमारियां दुनिया भर में मौत के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। ऐसे में एक नए अध्ययन ने संकेत दिया है कि सिर्फ स्वस्थ खानपान और कार्डियो एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि छाती और पीठ की मजबूत व स्वस्थ मांसपेशियां भी हार्ट अटैक के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि मांसपेशियों की गुणवत्ता किसी व्यक्ति की समग्र फिटनेस और लंबे समय तक हृदय स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेत हो सकती है। क्या कहता है नया अध्ययन? यह अध्ययन प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल Radiology में प्रकाशित हुआ है। इसमें 1,722 वयस्कों को शामिल किया गया, जिनकी औसत आयु 57 वर्ष थी। सभी प्रतिभागियों का कोरोनरी कंप्यूटेड टोमोग्राफी एंजियोग्राफी (CCTA) स्कैन किया गया, जिससे हृदय की धमनियों की स्थिति का आकलन किया जाता है। शोधकर्ताओं ने इन लोगों के स्वास्थ्य पर लगभग 10 वर्षों तक नजर रखी। 31% तक कम हुआ हार्ट अटैक का जोखिम अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों की छाती और पीठ की मांसपेशियों की गुणवत्ता बेहतर थी, उनमें हार्ट अटैक का खतरा काफी कम पाया गया। मुख्य निष्कर्ष इस प्रकार रहे— मांसपेशियों की गुणवत्ता में हर 10 अंकों की बढ़ोतरी पर हार्ट अटैक का जोखिम 31% तक कम हुआ। अगले 10 वर्षों में मृत्यु का जोखिम 39% तक कम पाया गया। उम्र, लिंग और धमनियों में कैल्शियम जमाव जैसे कारकों को ध्यान में रखने के बाद भी यह संबंध बना रहा। मांसपेशियों का आकार नहीं, गुणवत्ता ज्यादा महत्वपूर्ण शोध की सबसे अहम बात यह रही कि मांसपेशियों का बड़ा आकार नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता अधिक मायने रखती है। स्वस्थ मांसपेशियों में वसा कम होती है और वे स्कैन में अधिक घनी दिखाई देती हैं। इसके विपरीत, केवल अधिक मांसपेशियां होने से समान लाभ नहीं मिला। विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी मांसपेशियां इस बात का संकेत हैं कि व्यक्ति नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियां करता है और उसकी जीवनशैली अपेक्षाकृत स्वस्थ है। AI ने आसान बनाया विश्लेषण इस अध्ययन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का भी उपयोग किया गया। AI सॉफ्टवेयर ने हार्ट स्कैन के दौरान छाती और पीठ की मांसपेशियों, वसा, हड्डियों और अन्य अंगों का कुछ ही सेकंड में विश्लेषण किया। जहां किसी रेडियोलॉजिस्ट को यह काम करने में कई घंटे लग सकते थे, वहीं AI ने प्रति स्कैन एक मिनट से भी कम समय में यह प्रक्रिया पूरी कर दी। शोधकर्ताओं का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक हृदय रोग के जोखिम की पहचान को और आसान बना सकती है। क्या मजबूत मांसपेशियां सीधे हार्ट अटैक से बचाती हैं? विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन केवल संबंध (Association) दिखाता है। इससे यह साबित नहीं होता कि मजबूत मांसपेशियां सीधे हार्ट अटैक को रोकती हैं। संभव है कि जिन लोगों की मांसपेशियां बेहतर होती हैं, वे नियमित व्यायाम करते हों, उनका वजन नियंत्रित हो और उनकी जीवनशैली अधिक स्वस्थ हो। यही सभी कारक मिलकर हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। मांसपेशियों की गुणवत्ता कैसे बढ़ाएं? विशेषज्ञों के अनुसार बेहतर मांसपेशियां बनाने के लिए घंटों जिम में समय बिताना जरूरी नहीं है। सप्ताह में 2 से 3 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करना भी पर्याप्त हो सकता है। इन एक्सरसाइज से फायदा मिल सकता है— पुश-अप्स चेस्ट प्रेस रो (Rows) प्लैंक रेजिस्टेंस बैंड एक्सरसाइज बॉडीवेट वर्कआउट इसके साथ ही रोजाना पैदल चलना, साइकिल चलाना या तैराकी जैसी एरोबिक गतिविधियां भी हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक मानी जाती हैं। विशेषज्ञों की सलाह स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत और सक्रिय मांसपेशियां स्वस्थ जीवनशैली का संकेत हैं। इसलिए केवल वजन कम करने पर नहीं, बल्कि शरीर की ताकत और फिटनेस बढ़ाने पर भी ध्यान देना चाहिए। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और स्वस्थ आदतें लंबे समय तक दिल को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं।  

surbhi जुलाई 11, 2026 0
Mamata Banerjee
ममता बनर्जी की रैली में हंगामा, प्रदर्शनकारियों ने फेंके अंडे; TMC प्रमुख की सुरक्षा पर उठे सवाल

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी की रैली के दौरान कोलकाता में हंगामा हो गया। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर रैली के दौरान अंडे फेंके और नारेबाजी की। घटना के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है और ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।   TMC की विरोध रैली के दौरान हुआ विवाद   जानकारी के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व में कोलकाता में एक विरोध मार्च निकाला गया था। इसी दौरान कुछ लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कथित तौर पर अंडे फेंके और नारे लगाए। घटना के बाद मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को संभाला।   रैली में लगे विरोधी नारे   रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की ओर से नारेबाजी भी की गई, जिसके बाद रैली स्थल पर तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस और सुरक्षा बलों ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।   सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल   घटना के बाद TMC नेताओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान इस तरह का विरोध सुरक्षा में चूक को दर्शाता है।   राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज   इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। TMC और विपक्षी दलों के बीच बयानबाजी शुरू हो गई है। ममता बनर्जी ने भी रैली के दौरान हुई घटनाओं को लेकर सरकार और पुलिस पर सवाल उठाए हैं।   पुलिस कर रही मामले की जांच   प्रशासन की ओर से पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि प्रदर्शनकारी कौन थे और वे सुरक्षा व्यवस्था के बीच तक कैसे पहुंचे।

abhishek singh जुलाई 9, 2026 0
Kriti Sanon Egg Freezing
कृति सेनन का बड़ा खुलासा, 'मिमी' की तैयारी के दौरान एग फ्रीज करवाने का लिया था फैसला

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन ने पहली बार अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा बड़ा खुलासा किया है। कृति ने बताया कि उन्होंने फिल्म 'मिमी' की तैयारी के दौरान अपने एग फ्रीज करवाने का फैसला लिया था। उनका कहना है कि वह शादी या मातृत्व को किसी सामाजिक दबाव या "बायोलॉजिकल क्लॉक" के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी इच्छा और सही समय पर चुनना चाहती हैं।   'मिमी' की तैयारी के दौरान लिया फैसला   कृति ने बताया कि 'मिमी' के लिए उन्हें वजन बढ़ाना था और उसी दौरान उन्होंने एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया पूरी कराई। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया के दौरान शरीर में सूजन और हार्मोनल बदलाव आते हैं, इसलिए उन्हें लगा कि यह इसके लिए सबसे उपयुक्त समय है।   'यह मेरे लिए सबसे बड़ा तोहफा था'   कृति सेनन ने कहा कि एग फ्रीजिंग का फैसला आसान नहीं था, लेकिन यह उनके जीवन के सबसे अच्छे फैसलों में से एक है। उन्होंने कहा कि वह खुद को भविष्य के लिए एक विकल्प देना चाहती थीं, ताकि शादी और परिवार शुरू करने का निर्णय पूरी तरह उनकी इच्छा पर आधारित हो।   महिलाओं को दिया अपना फैसला खुद लेने का संदेश   अभिनेत्री ने कहा कि हर महिला को अपनी जिंदगी के बड़े फैसले खुद लेने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने माना कि यह प्रक्रिया महंगी है और हर किसी के लिए संभव नहीं होती, लेकिन यदि अवसर मिले तो महिलाओं को अपने भविष्य के बारे में स्वतंत्र रूप से सोचने का अधिकार होना चाहिए।

anjali kumari जुलाई 7, 2026 0
West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee during a Trinamool Congress meeting amid the party symbol dispute before the Election Commission.
TMC चुनाव चिह्न विवाद: ममता बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग को सौंपा जवाब, कहा- 2027 तक वैध है राष्ट्रीय समिति

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी आंतरिक विवाद के बीच पार्टी के चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ को लेकर मामला चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। इस बीच ममता बनर्जी गुट ने निर्वाचन आयोग को अपना विस्तृत जवाब सौंपते हुए दावा किया है कि पार्टी की वर्तमान राष्ट्रीय कार्यसमिति वर्ष 2027 तक पूरी तरह वैध है और उससे पहले किसी समानांतर संगठन का गठन पार्टी संविधान के अनुरूप नहीं है। आयोग को सौंपे कानूनी और संगठनात्मक दस्तावेज ममता बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग को दिए गए दस्तावेजों में कहा है कि पार्टी के संविधान और संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया के अनुसार मौजूदा राष्ट्रीय समिति का कार्यकाल 2027 तक निर्धारित है। ऐसे में इस अवधि के दौरान किसी अन्य गुट द्वारा खुद को "असली तृणमूल कांग्रेस" घोषित करना या समानांतर समिति बनाना नियमों के विरुद्ध है। पार्टी का कहना है कि वर्तमान नेतृत्व को निर्धारित कार्यकाल तक संगठन चलाने का पूर्ण वैधानिक अधिकार प्राप्त है। बागी गुट ने 22 जून को बनाई थी नई समिति तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने 22 जून को नई राष्ट्रीय समिति गठित करने का दावा किया था। इस गुट ने खुद को पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि बताते हुए चुनाव चिह्न पर अधिकार जताया था। हालांकि, ममता बनर्जी गुट ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि पार्टी के अधिकृत संगठन में इस तरह के किसी बदलाव का कोई संवैधानिक आधार नहीं है। डेरेक ओब्रायन और अभिषेक बनर्जी ही अधिकृत प्रतिनिधि चुनाव आयोग को दिए गए जवाब में ममता गुट ने स्पष्ट किया है कि आयोग के समक्ष पार्टी का आधिकारिक पक्ष रखने के लिए केवल डेरेक ओब्रायनऔर राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ही अधिकृत प्रतिनिधि हैं। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाली चंद्रिमा भट्टाचार्य या बागी गुट का कोई अन्य नेता पार्टी की ओर से चुनाव आयोग के समक्ष प्रतिनिधित्व करने का अधिकार नहीं रखता। बहुमत का भी किया दावा ममता बनर्जी खेमे ने दावा किया है कि पार्टी के अधिकांश सांसद, जिला संगठन और जमीनी कार्यकर्ता आज भी उनके नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं। उनका कहना है कि कुछ विधायकों या नेताओं के अलग होने से पार्टी के मूल संगठन की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता। अब चुनाव आयोग के फैसले पर नजर दोनों गुटों द्वारा अपने-अपने दावे और दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के बाद अब फैसला चुनाव आयोग के हाथ में है। आयोग दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच करेगा और उसके बाद व्यक्तिगत सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। आयोग के अंतिम निर्णय से यह स्पष्ट होगा कि तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक संगठन और उसके चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ पर किस गुट का अधिकार रहेगा।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
TMC Headquarter
TMC मुख्यालय पर सियासी संग्राम तेज, बागी गुट के कब्जे के बाद बढ़ा विवाद

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी सत्ता संघर्ष अब खुलकर सामने आ गया है। कोलकाता स्थित पार्टी के राज्य मुख्यालय पर बागी गुट के नियंत्रण के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने शुक्रवार को पार्टी कार्यालय पर कब्जा कर लिया, जिसके बाद परिसर में तनाव बढ़ गया। स्थिति को देखते हुए मौके पर CRPF और कोलकाता पुलिस के जवान तैनात किए गए।   बागी गुट ने जताया मुख्यालय पर दावा बताया जा रहा है कि बागी गुट ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के नाम, फंड और चुनाव चिह्न पर दावा पेश करने के एक दिन बाद यह कदम उठाया। ऋतब्रत बनर्जी अपने समर्थक नेताओं के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे और वहां लगे पुराने साइनबोर्ड हटाकर नया बैनर लगा दिया। बागी गुट ने वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया चेयरमैन घोषित करने का भी दावा किया।   बागी नेताओं का कहना है कि कार्यालय का पुराना किराया समझौता समाप्त हो चुका था और नई वर्किंग कमेटी के तहत नया समझौता किया गया है। उनका दावा है कि कार्यालय पर उनका वैध अधिकार है, हालांकि उन्होंने ममता बनर्जी के प्रति सम्मान जताते हुए अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार करने से इनकार किया।   ममता गुट ने लगाया अवैध कब्जे का आरोप मुख्यालय पर कब्जे की खबर के बाद ममता बनर्जी समर्थक नेताओं ने इसे अवैध कार्रवाई बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने आरोप लगाया कि बागी गुट को केंद्रीय सुरक्षा बलों का संरक्षण मिल रहा है। वहीं टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी इस कार्रवाई को अदालत और जनता दोनों के सामने चुनौती देगी।   अब चुनाव आयोग के फैसले पर निगाहें कोलकाता पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कार्यालय के स्वामित्व और लीज से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही वहां नियमित राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी। इस बीच चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से 6 जुलाई की शाम 5:30 बजे तक पार्टी के संगठन, नाम और चुनाव चिह्न पर अपने-अपने दावे और जवाब दाखिल करने को कहा है। अब इस विवाद का अगला बड़ा फैसला चुनाव आयोग के रुख पर निर्भर करेगा।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Swapan Das Gupta
बंगाल में जारी रहेंगी ममता सरकार की योजनाएं, लाभार्थियों का होगा सत्यापन

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में शुरू की गई प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने का फैसला किया है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन योजनाओं का लाभ केवल पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए लाभार्थियों की व्यापक जांच कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य फर्जीवाड़े पर रोक लगाकर योजनाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।   वोटर लिस्ट और डोर-टू-डोर सत्यापन से होगी जांच सरकारी अधिकारियों के अनुसार सभी लाभार्थियों के रिकॉर्ड का मिलान अंतिम मतदाता सूची से किया जाएगा। जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हट चुके हैं या जो अपात्र पाए जाएंगे, उन्हें योजनाओं की सूची से बाहर किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर घर-घर जाकर भी सत्यापन किया जाएगा, ताकि सरकारी सहायता केवल वास्तविक और जरूरतमंद लाभार्थियों तक पहुंचे। नवंबर 2025 में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान करीब 80 लाख संदिग्ध नाम हटाए गए थे, जिनके आधार पर अब कल्याणकारी योजनाओं की भी समीक्षा की जाएगी।   वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने क्या कहा ? राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने अपने पहले बजट भाषण में संकेत दिया था कि सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं जारी रहेंगी, लेकिन उनमें पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सुधार किए जाएंगे। इसी क्रम में सरकार ने जनकल्याण शिविरों में प्राप्त नए आवेदनों की जांच शुरू कर दी है। सत्यापन पूरा होने तक वृद्धावस्था और विधवा पेंशन जैसी कुछ योजनाओं के वितरण को अस्थायी रूप से रोका गया है, जबकि कन्याश्री और रूपश्री जैसी योजनाओं की भी कड़ी निगरानी की जा रही है।   वहीं, सरकार ने तृणमूल कांग्रेस की महत्वाकांक्षी 'कृषक बंधु' योजना को बंद कर दिया है। अधिकारियों का दावा है कि इस योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और फर्जी लाभार्थी शामिल थे। इसके स्थान पर भाजपा सरकार नई योजना के तहत प्रत्येक पात्र किसान को सालाना 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता देगी। कृषि विभाग का अनुमान है कि सख्त सत्यापन के बाद मौजूदा लाभार्थियों में से 40 प्रतिशत से अधिक अपात्र नाम हटाए जा सकते हैं।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Mamata Banerjee Abhishek Banerjee
शहीद दिवस रैली अवमानना मामला: कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से मांगा जवाब

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने शहीद दिवस रैली से जुड़े कथित अवमानना मामले में दोनों नेताओं से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि वे निर्धारित समय के भीतर अपना हलफनामा दाखिल करें।    क्या है पूरा मामला?   याचिकाकर्ता का आरोप है कि शहीद दिवस रैली के आयोजन के दौरान हाईकोर्ट के पहले जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर अदालत में अवमानना याचिका दायर की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था।    हाईकोर्ट ने मांगा हलफनामा   सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को निर्देश दिया कि वे आरोपों पर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए हलफनामा दाखिल करें। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 अगस्त की नई तारीख भी तय की है, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Mahua Moitra
अंडे-बैंगन हमले के बाद महुआ मोइत्रा ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा, मांगी सुरक्षा

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा पर कथित तौर पर अंडे, बैंगन और कीचड़ फेंके जाने के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। घटना के बाद महुआ मोइत्रा ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करते हुए सुरक्षा और कानूनी संरक्षण की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी शिकायत पर पुलिस ने गंभीरता से कार्रवाई नहीं की, जबकि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर पर तेजी दिखाई जा रही है।   हाईकोर्ट ने याचिका दाखिल करने की दी अनुमति शुक्रवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की अदालत में महुआ मोइत्रा की ओर से याचिका दायर करने की अनुमति मांगी गई। उनके वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस का रवैया पक्षपातपूर्ण है और उनकी शिकायत को नजरअंदाज किया जा रहा है। दलीलें सुनने के बाद अदालत ने याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी। अब अगली सुनवाई में इस मामले में पुलिस की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अदालत का रुख स्पष्ट हो सकता है।   कार्यकर्ता सभा के दौरान हुआ था विरोध प्रदर्शन यह पूरा मामला एक जुलाई को नदिया जिले के कालीगंज में आयोजित टीएमसी की कार्यकर्ता सभा से जुड़ा है। महुआ मोइत्रा कार्यक्रम में मौजूद थीं, तभी पार्टी कार्यालय के बाहर राष्ट्रीय राजमार्ग पर काले झंडे लेकर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हो गए। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने “गो बैक” और “हाय-हाय” के नारे लगाए और पार्टी कार्यालय की खिड़की की ओर अंडे, बैंगन और कीचड़ फेंके। इतना ही नहीं, टीएमसी कार्यकर्ताओं और महुआ को बाहर निकलने से रोकने की भी कोशिश की गई।   पुलिस पर निष्क्रिय रहने का आरोप घटना के बाद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो साझा कर दावा किया कि प्रदर्शनकारी भाजपा समर्थक थे और पुलिस पूरे घटनाक्रम के दौरान मूकदर्शक बनी रही। उन्होंने कहा कि पुलिस ने न तो भीड़ को हटाने की कोशिश की और न ही हमलावरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की। महुआ का कहना है कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है। अब इस पूरे विवाद पर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Samajwadi Party MP Jaya Bachchan meets TMC chief Mamata Banerjee at her Kalighat residence in Kolkata, with TMC MP Derek O'Brien also present.
जया बच्चन ने कोलकाता में ममता बनर्जी से की मुलाकात, विपक्षी एकजुटता पर फिर शुरू हुई चर्चा

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद राज्य की राजनीति में लगातार हलचल बनी हुई है। इसी बीच समाजवादी पार्टी (सपा) की राज्यसभा सांसद Jaya Bachchan ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee से उनके कालीघाट स्थित आवास पर मुलाकात की। इस बैठक को विपक्षी राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। बैठक में तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद Derek O'Brien भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है यह मुलाकात? यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब हाल ही में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता Kiranmoy Nanda ने कोलकाता दौरे के दौरान तृणमूल कांग्रेस की चुनावी हार के लिए ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा था कि राज्य की जनता अब ममता बनर्जी को नहीं चाहती। नंदा के इस बयान के बाद विपक्षी गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच रिश्तों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। चुनाव के बाद अखिलेश यादव भी पहुंचे थे कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav भी कोलकाता पहुंचे थे और उन्होंने ममता बनर्जी से उनके आवास पर मुलाकात की थी। उस समय इस मुलाकात को तृणमूल कांग्रेस के प्रति समर्थन और विपक्षी एकजुटता के संकेत के रूप में देखा गया था। अब जया बच्चन की मुलाकात ने एक बार फिर दोनों दलों के बीच राजनीतिक संवाद को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों की राय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं की सार्वजनिक आलोचना के बावजूद शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर संवाद जारी है। ऐसे में यह मुलाकात संकेत देती है कि विपक्षी दल भविष्य की राजनीतिक रणनीति और राष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग बनाए रखने के इच्छुक हैं। कुणाल घोष ने क्या कहा? तृणमूल कांग्रेस के नेता Kunal Ghosh ने बैठक के बाद कहा कि ममता बनर्जी और जया बच्चन के बीच लंबे समय से व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंध हैं। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रीय मुद्दों और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई तथा राष्ट्रहित के मुद्दों पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। बैठक में किसी विशेष राजनीतिक रणनीति या भविष्य के गठबंधन को लेकर दोनों दलों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
TMC Dispute
चुनाव आयोग ने टीएमसी विवाद पर दोनों गुटों से जवाब मांगा, 6 जुलाई शाम 5:30 बजे तक देना होगा जवाब

नई दिल्ली, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में नेतृत्व और चुनाव चिन्ह को लेकर बढ़े विवाद के बीच चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को नोटिस जारी कर अपना-अपना पक्ष रखने को कहा है। आयोग ने ममता बनर्जी गुट और बागी गुट से 6 जुलाई 2026 को शाम 5:30 बजे तक दावे, प्रति-दावे और संबंधित दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए हैं।   दोनों गुटों से मांगे गए दावे और दस्तावेज   चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से पार्टी के संगठनात्मक चुनाव, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं , पार्टी के संविधान और 'जुड़वां फूल'  चुनाव चिन्ह पर अपने दावे के समर्थन में सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। आयोग दोनों पक्षों की ओर से दाखिल किए जाने वाले रिकॉर्ड का परीक्षण करेगा।   चुनाव चिन्ह पर बना है मुख्य विवाद   बागी गुट का दावा है कि उसे पार्टी के अधिकांश विधायकों और पदाधिकारियों का समर्थन प्राप्त है, इसलिए वही असली टीएमसी है। वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट पार्टी के संविधान और संगठनात्मक ढांचे के आधार पर खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बता रहा है।   6 जुलाई के बाद होगी अगली कार्रवाई   निर्धारित समय सीमा तक दोनों पक्षों के जवाब मिलने के बाद चुनाव आयोग दस्तावेजों की समीक्षा करेगा। आवश्यकता पड़ने पर आयोग अगली सुनवाई की तारीख तय करेगा और इसके बाद पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिन्ह को लेकर आगे का निर्णय लिया जाएगा।   राजनीतिक हलकों की नजर आयोग के फैसले पर   टीएमसी से जुड़े इस विवाद पर पूरे देश की राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग का फैसला पश्चिम बंगाल की राजनीति और पार्टी के भविष्य पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
Ritabrata Banerjee
बागी टीएमसी विधायक दल आज चुनाव आयोग से करेगा मुलाकात, पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर ठोक सकता है दावा

कोलकाता एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी सियासी हलचल के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का बागी विधायक दल आज चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल पार्टी के संगठनात्मक ढांचे, नेतृत्व और चुनाव चिन्ह से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष आयोग के समक्ष रखेगा।   नेतृत्व विवाद को लेकर चुनाव आयोग के सामने रखेगा पक्ष   सूत्रों के अनुसार, बागी गुट का कहना है कि पार्टी में नए नेतृत्व का गठन किया गया है और इसकी आधिकारिक जानकारी चुनाव आयोग को दी जानी चाहिए। वहीं ममता बनर्जी समर्थक गुट का दावा है कि टीएमसी की वैध राष्ट्रीय कार्यसमिति और पदाधिकारियों की सूची पहले ही आयोग को सौंप दी गई है और पार्टी पर उनका ही अधिकार है।   चुनाव चिन्ह पर भी हो सकती है चर्चा   राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बागी गुट की यह पहल भविष्य में पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक अधिकारों को लेकर कानूनी विवाद का रूप ले सकती है। हालांकि, अभी तक चुनाव आयोग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।   राजनीतिक हलकों की नजर आयोग के फैसले पर   आज होने वाली इस मुलाकात पर राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग के अगले कदम से इस विवाद की दिशा और पश्चिम बंगाल की राजनीति पर इसका असर आने वाले दिनों में साफ हो सकेगा।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
Annapurna Bhandar Yojana
टीएमसी ने अन्नपूर्णा भंडार योजना लाभार्थियों के नाम हटाने को बताया 'पहला घोटाला'

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की अन्नपूर्णा भंडार योजना को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। टीएमसी नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार ने योजना के तहत बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम लाभार्थियों की सूची से हटाकर अपना पहला बड़ा घोटाला किया है। वहीं, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि केवल अपात्र और फर्जी आवेदनों को ही रद्द किया गया है।   टीएमसी ने उठाए लाभार्थियों की संख्या पर सवाल साकेत गोखले ने कहा कि ममता बनर्जी सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना के तहत करीब 2.4 करोड़ महिलाओं को लाभ मिल रहा था, जबकि नई अन्नपूर्णा भंडार योजना में लाभार्थियों की संख्या घटकर लगभग 1.3 करोड़ रह गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 1.1 करोड़ महिलाओं के नाम क्यों हटाए गए। टीएमसी का आरोप है कि भाजपा सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से महिलाओं को योजना से बाहर किया है।   सरकार का दावा- फर्जी आवेदन हटाए गए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार को योजना के लिए करीब 1.6 करोड़ आवेदन मिले थे। विस्तृत जांच के बाद 27 लाख आवेदन रद्द किए गए, जिनमें मृत लाभार्थियों के नाम, डुप्लीकेट बैंक खाते, मतदाता सूची से हटे नाम और नागरिकता या निवास से जुड़ी विसंगतियां पाई गईं। उन्होंने कहा कि सभी पात्र महिलाओं के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए पहली किस्त भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और लगभग 1.1 करोड़ खातों में राशि जमा कराई जा चुकी है।   सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य केवल पात्र महिलाओं तक पारदर्शी तरीके से लाभ पहुंचाना है, जबकि टीएमसी इसे महिलाओं के अधिकारों पर हमला बताते हुए भाजपा सरकार को लगातार घेर रही है। अन्नपूर्णा भंडार योजना को लेकर दोनों दलों के बीच सियासी टकराव फिलहाल और तेज होने के आसार हैं।

anjali kumari जुलाई 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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