अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में किसी भी जहाज पर मिसाइल, ड्रोन या गोलीबारी से हमला किया गया, तो अमेरिका ईरान के भीतर पुलों, पावर प्लांट और अन्य रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाएगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक तनाव चरम पर है। ट्रंप की दो टूक चेतावनी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अमेरिकी या अन्य देशों के जहाजों पर ईरान की ओर से मिसाइल, ड्रोन या गोलीबारी की जाती है, तो अमेरिका इसका सीधा जवाब ईरान के महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकानों पर हमला करके देगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। ईरान ने लगाए अंतरराष्ट्रीय कानून उल्लंघन के आरोप ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने और ईरान की परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने की धमकी देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी सभी जानकारियां पहले ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। बगाई ने अमेरिकी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ स्थानों को लेकर लगाए जा रहे आरोप केवल सैन्य कार्रवाई का बहाना हैं। ईरान की पलटवार की चेतावनी ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर किसी भी हमले का पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा। इस्माइल बगाई ने कहा कि ईरानी जनता किसी भी बाहरी आक्रामकता का सामना करने के लिए तैयार है और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। लारक द्वीप पर कथित हमले से बढ़ा तनाव तनाव के बीच ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित लारक द्वीप पर अमेरिकी मिसाइल हमला हुआ। ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम के अनुसार, स्थानीय लोगों ने विस्फोट की आवाजें सुनीं और अधिकारी नुकसान का आकलन कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिका ने इस कथित हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, इसलिए इसकी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने दोबारा बातचीत की इच्छा जताई है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भी वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही स्पष्ट कर दिया कि दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है। उनके इस बयान से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ट्रंप बोले- ईरान बातचीत चाहता है डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि ईरान ने अमेरिका से बातचीत जारी रखने का अनुरोध किया है और वॉशिंगटन इसके लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि युद्धविराम अब खत्म हो चुका है और यदि ईरान की ओर से हमले जारी रहे तो अमेरिका पहले से अधिक कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। हालिया हमलों के बाद बढ़ा तनाव ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले दो दिनों में अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने कतर, बहरीन और कुवैत की दिशा में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइलें दागीं। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, कार्रवाई के दौरान ईरान में लगभग 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें मिसाइल लॉन्चर, हवाई अड्डों के रनवे और अन्य सैन्य प्रतिष्ठान शामिल थे। वहीं, ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई और 78 अन्य घायल हुए हैं। ट्रंप की नई चेतावनी नाटो शिखर सम्मेलन से लौटने के बाद ट्रंप ने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिकी कार्रवाई की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने फिर हमला किया तो अमेरिका दस गुना अधिक ताकत से जवाब देगा। ट्रंप ने ईरान के बिजली संयंत्रों, समुद्री जल शोधन संयंत्रों और खर्ग द्वीप जैसे रणनीतिक ठिकानों को भी संभावित लक्ष्य बताया। तनाव कम कराने की कोशिशें तेज सैन्य टकराव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी तेज हो गए हैं। इसी सिलसिले में कतर के मध्यस्थ तेहरान पहुंचे हैं। उनका उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई वार्ता को दोबारा शुरू कराने और क्षेत्रीय तनाव कम करने का रास्ता तैयार करना है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार फिलहाल वॉशिंगटन सीमित सैन्य कार्रवाई के साथ कूटनीतिक समाधान की रणनीति पर भी काम कर रहा है ताकि व्यापक युद्ध की स्थिति से बचा जा सके। बातचीत और सैन्य तैयारी साथ-साथ अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर सभी सैन्य विकल्प खुले हैं, लेकिन प्राथमिकता अब भी राजनयिक समाधान तलाशने की है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कतर और अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर लौटते हैं तो पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने की संभावना बन सकती है, हालांकि मौजूदा हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में घिर गए हैं। ट्रंप ने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार एक तस्वीर साझा की, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा को विवादित तरीके से दिखाया गया है। तस्वीर में अरबी शब्द "अल्हम्दुलिल्लाह" भी लिखा गया है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं, ट्रंप ने NATO शिखर सम्मेलन से पहले इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर भी एक मीम साझा किया, जिससे नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। ओबामा की AI तस्वीर पर विवाद ट्रंप द्वारा साझा की गई AI-जनरेटेड तस्वीर में बराक ओबामा और मिशेल ओबामा को राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान की सीढ़ियों पर मुस्कुराते और हाथ हिलाते हुए दिखाया गया है। तस्वीर में विमान पर "Yes We Can", "Obama", "BLM" (Black Lives Matter) जैसे शब्दों के साथ अरबी भाषा में "अल्हम्दुलिल्लाह" भी लिखा हुआ दिखाई देता है। इस पोस्ट को लेकर कई लोगों ने ट्रंप पर नस्लीय और सांप्रदायिक संकेतों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की AI तस्वीरें राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती हैं और सार्वजनिक संवाद की गरिमा को प्रभावित करती हैं। पहले भी विवादों में रह चुके हैं ट्रंप यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने ओबामा को लेकर विवादित पोस्ट साझा किया हो। इससे पहले भी वह सोशल मीडिया पर AI और एडिटेड तस्वीरों के जरिए पूर्व राष्ट्रपति और उनके परिवार पर व्यक्तिगत टिप्पणियां कर चुके हैं। ट्रंप पर पहले भी ओबामा के जन्मस्थान को लेकर झूठे दावे फैलाने और नस्लीय टिप्पणी करने के आरोप लगते रहे हैं। उनकी कई पोस्टों की दोनों प्रमुख अमेरिकी राजनीतिक दलों के नेताओं ने आलोचना की थी। मेलोनी पर भी शेयर किया मीम ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर भी एक मीम साझा किया। इस पोस्ट में हाल ही में फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन की तस्वीर के साथ लिखा था— "Restraining Order Needed" (रोक लगाने वाले आदेश की जरूरत है)। हालांकि पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया गया, लेकिन इसे मेलोनी पर तंज के रूप में देखा गया। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे इटली की प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाने वाला पोस्ट बताया। G7 बैठक के बाद बढ़ा विवाद ट्रंप ने इससे पहले दावा किया था कि G7 शिखर सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए विशेष आग्रह किया था। मेलोनी ने इस दावे को सार्वजनिक रूप से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह झूठ बताया था। अब नए मीम के बाद दोनों नेताओं के बीच कथित तनातनी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। AI पोस्ट को लेकर बढ़ रही चिंता हाल के महीनों में ट्रंप लगातार AI से तैयार तस्वीरों और मीम्स का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए कर रहे हैं। उनके समर्थक इन्हें व्यंग्य बताते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इस तरह की पोस्ट भ्रामक जानकारी, राजनीतिक ध्रुवीकरण और सामाजिक तनाव को बढ़ा सकती हैं। ट्रंप के ताजा पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है, हालांकि इस पर व्हाइट हाउस या बराक ओबामा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वॉशिंगटन: अमेरिका की 250वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ के जश्न के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में आ गए हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर व्हाइट हाउस के लिए एक कथित "Golden Gift" की तस्वीर साझा की, लेकिन बाद में मीडिया की जांच में यह तस्वीर AI-जनरेटेड (कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनाई गई) पाई गई। क्या था ट्रंप का दावा? ट्रंप ने पोस्ट में व्हाइट हाउस की Truman Balcony पर एक विशाल सुनहरे बाज (Golden Eagle) की तस्वीर साझा की। तस्वीर में बाज अपने फैले हुए पंखों के साथ बालकनी पर बैठा दिखाई देता है, जबकि बालकनी पर अमेरिकी ध्वज वाले एक बड़े शील्ड (कवच) को भी दर्शाया गया है। पोस्ट के साथ ट्रंप ने लिखा: "व्हाइट हाउस के 250वें जन्मदिन के वर्ष के लिए एक गोल्डन गिफ्ट।" इसके बाद व्हाइट हाउस के आधिकारिक X अकाउंट ने भी इस पोस्ट को रीशेयर किया। फैक्ट चेक में क्या सामने आया? अमेरिकी समाचार चैनल CNN की पड़ताल में दावा किया गया कि यह तस्वीर वास्तविक नहीं है। जांच में सामने आए प्रमुख बिंदु: वास्तविक Truman Balcony की बनावट और रेलिंग तस्वीर से मेल नहीं खाती। तस्वीर में दिखाया गया विशाल सुनहरा बाज वास्तव में वहां मौजूद नहीं था। शील्ड पर केवल 11 सितारे दिखाई देते हैं, जबकि अमेरिकी इतिहास के अनुसार मूल 13 उपनिवेशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए ऐसे प्रतीकों में सामान्यतः 13 सितारे होते हैं। फोटोग्राफर ने भी पेश किया सबूत फ्रीलांस फोटोग्राफर Andrew Leyden ने ट्रंप की पोस्ट के कुछ समय बाद रात करीब 9:30 बजे ट्रूमैन बालकनी की वास्तविक तस्वीरें साझा कीं। उनकी तस्वीरों में न तो कोई विशाल सुनहरा बाज दिखाई दिया और न ही वह शील्ड, जिसका जिक्र ट्रंप की पोस्ट में था। नए पासपोर्ट डिजाइन पर भी चर्चा इसी बीच ट्रंप ने अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक कथित 'लिमिटेड एडिशन' अमेरिकी पासपोर्ट का डिजाइन भी साझा किया। पोस्ट किए गए डिजाइन में: ट्रंप को ऐतिहासिक Resolute Desk पर बैठे हुए दिखाया गया है। पृष्ठभूमि में United States Declaration of Independence का चित्रण है। नीचे ट्रंप के हस्ताक्षर भी प्रदर्शित किए गए हैं। ट्रंप ने इसके साथ संदेश लिखा: "Welcome, but be good." AI कंटेंट को लेकर फिर छिड़ी बहस इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हस्तियों और सरकारी संस्थानों द्वारा साझा की जाने वाली AI-जनरेटेड तस्वीरों की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि, इस मामले में व्हाइट हाउस या ट्रंप की ओर से AI-जनरेटेड तस्वीर साझा किए जाने के आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Donald Trump Iran Warning: मध्य पूर्व में शांति बहाली की कोशिशों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन इसी दौरान ट्रंप ने ईरान को सीधे सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देकर तनाव बढ़ा दिया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर दी धमकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक सख्त पोस्ट साझा करते हुए कहा कि ईरान को लेबनान में सक्रिय अपने समर्थित सशस्त्र गुटों और प्रॉक्सी संगठनों को तुरंत हिंसक गतिविधियां रोकने के लिए कहना चाहिए। ट्रंप ने लिखा, "यदि ईरान ने अपने भारी भुगतान पाने वाले प्रॉक्सी संगठनों को तबाही मचाने से नहीं रोका, तो अमेरिका फिर से बड़ा हमला करेगा। यह हमला पिछले सप्ताह की कार्रवाई से भी कहीं अधिक भीषण होगा।" शांति वार्ता के बीच बढ़ा कूटनीतिक दबाव ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए महत्वपूर्ण वार्ता चल रही है। इस बैठक में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं और परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा तथा आर्थिक प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। ट्रंप की नई चेतावनी ने इस शांति प्रक्रिया पर अनिश्चितता के बादल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ईरान पर अतिरिक्त कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। लेबनान में ईरान समर्थित गुटों को लेकर अमेरिका चिंतित अमेरिका लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि ईरान लेबनान में सक्रिय अपने समर्थित संगठनों, विशेष रूप से हिज्बुल्लाह, के जरिए क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करता है। वॉशिंगटन का मानना है कि इन संगठनों की गतिविधियां न केवल इजरायल बल्कि पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए चुनौती हैं। ट्रंप ने अपने संदेश में स्पष्ट संकेत दिया कि यदि ईरान ने इन समूहों पर नियंत्रण नहीं किया, तो अमेरिका सैन्य विकल्प अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। वार्ता पर पड़ सकता है असर विश्लेषकों का कहना है कि एक तरफ शांति वार्ता और दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई की खुली चेतावनी, दोनों मिलकर अमेरिका-ईरान संबंधों को और जटिल बना सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ईरान ट्रंप की चेतावनी पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या स्विट्जरलैंड में जारी वार्ता किसी ठोस समझौते तक पहुंच पाती है। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच ट्रंप का यह बयान एक बार फिर इस क्षेत्र की नाजुक स्थिति को उजागर करता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर पूर्व राष्ट्रपति Joe Biden पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उनके कार्यकाल में अमेरिका ने तेज़ प्रगति की, जबकि देश की गिरावट बाइडेन प्रशासन के दौरान हुई। ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के उस बयान का जिक्र किया जिसमें अमेरिका को “गिरावट की ओर बढ़ता देश” बताया गया था। ट्रंप ने कहा कि वह शी जिनपिंग की बात से “100 फीसदी सहमत” हैं, लेकिन यह टिप्पणी उनके कार्यकाल पर नहीं बल्कि बाइडेन सरकार के दौर पर लागू होती है। ‘बाइडेन के समय देश कमजोर हुआ’ ट्रंप ने कहा कि बाइडेन प्रशासन के चार वर्षों में अमेरिका को आर्थिक और सामाजिक स्तर पर काफी नुकसान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि खुली सीमाओं, ज्यादा टैक्स, गलत व्यापार समझौतों और बढ़ते अपराध ने देश को कमजोर किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर किए गए पोस्ट में ट्रंप ने ट्रांसजेंडर नीतियों, महिलाओं के खेलों में पुरुषों की भागीदारी और DEI (डाइवर्सिटी, इक्विटी और इन्क्लूजन) नीतियों की भी आलोचना की। ‘मेरे नेतृत्व में अमेरिका ने जबरदस्त उछाल देखा’ ट्रंप ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका ने केवल 16 महीनों में बड़ी आर्थिक सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, 401K निवेश मजबूत हुए और अमेरिका फिर से आर्थिक ताकत के रूप में उभरा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे शक्तिशाली बनी रही और ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया। ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ रिश्तों में सुधार और रिकॉर्ड निवेश आने का भी दावा किया। ‘शी जिनपिंग ने दी थी बधाई’ ट्रंप ने अपने बयान में दावा किया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें बधाई दी थी। उन्होंने कहा कि उनके शासनकाल में रोजगार के अवसर बढ़े और कई नीतिगत बदलावों ने अमेरिका को मजबूत बनाया। हालांकि ट्रंप के इन दावों पर विपक्षी डेमोक्रेटिक नेताओं की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Donald Trump और Pope Leo XIV के बीच विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। ट्रंप ने खुद को Jesus Christ जैसा दिखाते हुए एक AI तस्वीर शेयर की, जिससे नया बवाल खड़ा हो गया है। AI फोटो से छिड़ा विवाद ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर जो तस्वीर शेयर की, उसमें वे लंबे चोगे में एक बीमार व्यक्ति को हाथ लगाकर ठीक करते नजर आते हैं। बैकग्राउंड में अमेरिकी झंडा, मिलिट्री प्लेन और फरिश्तों जैसी छवियां दिखती हैं–जो बाइबिल में वर्णित चमत्कारों की ओर इशारा करती हैं। पोप पर ट्रंप का हमला ट्रंप ने पोप लियो XIV को विदेशी मामलों में “बेकार” और अपराध रोकने में “कमजोर” बताया। उनका कहना है कि चर्च को राजनीति से दूर रहकर शांति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर वे राष्ट्रपति न होते, तो पोप इस पद तक नहीं पहुंच पाते। ईरान-वेनेजुएला पर टकराव ईरान और वेनेजुएला के मुद्दे पर दोनों के बीच मतभेद और गहरा गया है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि पोप अमेरिका के सख्त रुख की आलोचना कर रहे हैं, जबकि वे खुद राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं। कोविड और चर्च का मुद्दा ट्रंप ने कोविड काल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय धार्मिक संगठनों को दबाव झेलना पड़ा, लेकिन पोप इस मुद्दे पर खुलकर नहीं बोले। उन्होंने पोप के भाई लुईस की तारीफ करते हुए उन्हें ‘MAGA’ समर्थक बताया। ‘लेफ्ट’ नेताओं से करीबी पर सवाल ट्रंप ने पोप की कथित तौर पर वामपंथी नेताओं से नजदीकी पर भी सवाल उठाए और कहा कि इससे चर्च की छवि प्रभावित हो रही है। विवाद क्यों बढ़ा? दरअसल, पोप लगातार युद्ध के खिलाफ शांति और कूटनीति की बात कर रहे हैं, जबकि ट्रंप इसे अपनी नीतियों में दखल मानते हैं। 60 Minutes की एक रिपोर्ट में भी अमेरिकी चर्च नेताओं ने ट्रंप की नीतियों पर नैतिक सवाल उठाए हैं।
US-Iran Ceasefire: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर कथित शुल्क वसूली को लेकर ईरान पर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने साफ कहा है कि यदि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूल रहा है, तो उसे तुरंत बंद करना होगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा कि ऐसी रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं, जिनमें ईरान द्वारा टैंकरों से शुल्क लेने की बात कही गई है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यह कदम पूरी तरह अस्वीकार्य है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दोहराया कि होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखना अमेरिका-ईरान के बीच हुए दो हफ्तों के युद्धविराम समझौते की अहम शर्त है। ट्रंप के मुताबिक, इस मार्ग से तेल की आपूर्ति हर हाल में जारी रहेगी - चाहे ईरान की मदद से या उसके बिना। ‘ईरान कर रहा बेहद खराब काम’ ट्रंप ने ईरान के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह समझौते के अनुरूप काम नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही को संभालने में ईरान विफल रहा है और उसका रवैया “बेहद खराब” है। उन्होंने इस स्थिति को “शर्मनाक” बताते हुए कहा कि अगर ईरान समझौते का पालन नहीं करता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। क्या टैंकरों से वसूला जा रहा टोल? दरअसल, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से उनकी श्रेणी और सामान के आधार पर शुल्क लेने की योजना बना रहा है। इसी मुद्दे पर ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे तुरंत बंद करने की मांग की है। अमेरिकी सेना रहेगी तैनात ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी थी कि जब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक अमेरिकी सेना क्षेत्र में तैनात रहेगी। उन्होंने कहा कि ईरान को समझौता तोड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और स्ट्रेट को पूरी तरह सुरक्षित और खुला रखना होगा। इस्लामाबाद में शांति वार्ता की तैयारी इसी बीच, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की तैयारी चल रही है। दोनों देशों ने फिलहाल दो हफ्तों के अस्थायी सीजफायर पर सहमति जताई है, लेकिन शर्तों को लेकर मतभेद अभी भी बने हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने प्रतिबंधों में राहत समेत 10 मांगें रखी हैं, जबकि अमेरिका ने 15 बिंदुओं वाला प्रस्ताव दिया है। होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण और संभावित शुल्क वसूली इस वार्ता का सबसे बड़ा विवादित मुद्दा बना हुआ है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक ईरान के साथ हुआ समझौता पूरी तरह लागू नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी सेना ईरान के आसपास तैनात रहेगी। ट्रंप की सीधी चेतावनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ट्रंप ने लिखा कि अमेरिका के सभी जहाज, विमान और सैन्य बल ईरान के भीतर और आसपास मौजूद रहेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि समझौते का किसी भी तरह उल्लंघन होता है, तो अमेरिका की प्रतिक्रिया “अब तक की सबसे बड़ी, मजबूत और घातक” होगी। परमाणु मुद्दे पर सख्त रुख ट्रंप ने दोहराया कि Iran को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह अमेरिका की नीति का प्रमुख हिस्सा है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बड़ा बयान ट्रंप ने यह भी कहा कि Strait of Hormuz पूरी तरह खुला और सुरक्षित रहेगा। उन्होंने इसे वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम बताते हुए कहा कि इसके बंद होने की आशंकाएं “फर्जी” हैं। ‘अमेरिका इज बैक’ - सैन्य तैयारी का संकेत अपने बयान के अंत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना लगातार खुद को और मजबूत कर रही है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। उन्होंने ‘America is back’ लिखते हुए यह संदेश दिया कि अमेरिका वैश्विक स्तर पर अपनी ताकत दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप का यह बयान संकेत देता है कि अमेरिका फिलहाल ईरान को लेकर कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर वैश्विक राजनीति और कूटनीति में और तेज़ी देखने को मिल सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।