वॉशिंगटन, एजेंसियां। वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ अमेरिका में चल रहे आपराधिक मामले में नया घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी न्याय विभाग और मादुरो के वकीलों ने संघीय अदालत में एक संयुक्त समय-सारिणी दाखिल की है, जिसमें जून 2027 से मुकदमे की सुनवाई शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। ड्रग तस्करी और नार्को-टेररिज्म के आरोप अमेरिका ने निकोलस मादुरो पर नार्को-टेररिज्म, ड्रग तस्करी और कोकीन को अमेरिका तक पहुंचाने की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। अमेरिकी अभियोजकों का दावा है कि यह मामला अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क से जुड़ा है। मादुरो इन सभी आरोपों से लगातार इनकार करते रहे हैं। अदालत में दाखिल हुई संयुक्त समय-सारिणी दोनों पक्षों की ओर से अदालत में दाखिल दस्तावेज के अनुसार, मुकदमे की तैयारी के लिए पर्याप्त समय देने की मांग की गई है। प्रस्ताव में कहा गया है कि सबूतों की समीक्षा, गवाहों की सूची और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद जून 2027 में ट्रायल शुरू किया जा सकता है। अंतिम फैसला अदालत करेगी। अमेरिका-वेनेजुएला संबंधों पर असर विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला अमेरिका और वेनेजुएला के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और प्रभावित कर सकता है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध लंबे समय से विवादों के कारण सामान्य नहीं रहे हैं। अदालत के अंतिम फैसले का इंतजार फिलहाल यह केवल प्रस्तावित समय-सारिणी है। मुकदमे की सुनवाई कब शुरू होगी, इसका अंतिम निर्णय संबंधित अमेरिकी संघीय अदालत करेगी। आने वाले महीनों में इस मामले में कई अहम कानूनी सुनवाई होने की संभावना है।
Horoscope Today 22 July 2026: 22 जुलाई 2026, बुधवार को चंद्रमा तुला राशि में स्वाति नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं। स्वाति नक्षत्र स्वतंत्रता, लचीलापन, कूटनीति और व्यापारिक कौशल का प्रतीक माना जाता है। वहीं सूर्य कर्क राशि में पुष्य नक्षत्र में स्थित हैं और गुरु अभी अस्त अवस्था में हैं। ऐसे में आज का दिन कई राशियों के लिए बातचीत, साझेदारी, यात्रा और नए अवसरों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाला है। आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल। मेष राशि आज व्यापार और साझेदारी के मामलों में समझदारी और कूटनीति से काम लेना लाभदायक रहेगा। जीवनसाथी के साथ किसी पुराने मतभेद को सुलझाने का अवसर मिलेगा। नौकरी और कारोबार में सफलता के योग हैं। नया बड़ा निवेश या समझौता फिलहाल कुछ दिन टालना बेहतर रहेगा। शुभ रंग: क्रीम शुभ अंक: 4 उपाय: भाई और मित्रों के साथ संबंध मधुर रखें। वृष राशि कार्यक्षेत्र में आज लचीला रवैया अपनाने से सफलता मिलेगी। जिद या अड़ियल व्यवहार नुकसान पहुंचा सकता है। स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें। परिवार और जीवनसाथी के साथ संवाद बेहतर रहेगा। शुभ रंग: लाल शुभ अंक: 2 उपाय: इत्र या सुगंधित वस्तुओं का प्रयोग करें। मिथुन राशि संतान और प्रेम संबंधों में आज सकारात्मक माहौल रहेगा। बच्चों को अपनी सोच के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर दें। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी और प्रेम संबंध मजबूत होंगे। शुभ रंग: पीला शुभ अंक: 4 उपाय: मूंग की दाल का दान करें। कर्क राशि घर-परिवार के किसी पुराने विवाद को शांतिपूर्वक सुलझाने का प्रयास करें। वाहन सुख मिल सकता है और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। धैर्य और विनम्रता आपके लिए लाभकारी रहेगी। शुभ रंग: पीला शुभ अंक: 7 उपाय: महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। सिंह राशि आज भाई-बहनों और करीबी लोगों के साथ संबंध मजबूत होंगे। छोटी यात्रा के योग बन रहे हैं। नौकरी और व्यापार में आपकी नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी। शुभ रंग: चेरी रेड शुभ अंक: 3 उपाय: पिता का सम्मान करें और उनका आशीर्वाद लें। कन्या राशि धन संबंधी मामलों में आज संतुलित निर्णय लें। खर्च बढ़ सकते हैं लेकिन जरूरी कार्यों पर होंगे। करियर में बड़े फैसले कुछ दिन बाद लेना बेहतर रहेगा। परिवार के साथ संवाद अच्छा रहेगा। शुभ रंग: काला शुभ अंक: 3 उपाय: 'ॐ बुधाय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। तुला राशि आज का दिन आपके लिए बेहद शुभ रहेगा। व्यापार, इंटरव्यू, मीटिंग और बातचीत में सफलता मिलने की संभावना है। आत्मविश्वास बढ़ेगा और नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। शुभ रंग: सफेद शुभ अंक: 7 उपाय: साफ-सफाई और अनुशासन बनाए रखें। वृश्चिक राशि विदेश या दूरस्थ स्थानों से लाभ मिलने की संभावना है। कोर्ट-कचहरी या पुराने मामलों में समझदारी से काम लें। खर्चों पर नियंत्रण रखना आवश्यक होगा। शुभ रंग: सफेद शुभ अंक: 2 उपाय: अपने पास लाल रंग का रुमाल रखें। धनु राशि मित्रों और बड़े भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा। नई जानकारी सीखने और नए अवसर मिलने के संकेत हैं। आय के नए स्रोत बन सकते हैं लेकिन गलत तरीकों से कमाई से बचें। शुभ रंग: ग्रे शुभ अंक: 5 उपाय: गुरु और बड़ों का सम्मान करें। मकर राशि करियर में आज कूटनीतिक व्यवहार लाभ देगा। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संबंध बेहतर रहेंगे। सरकारी कार्यों में सफलता मिलने के योग हैं। शुभ रंग: काला शुभ अंक: 10 उपाय: पक्षियों को दाना डालें और काले कुत्ते को रोटी खिलाएं। कुंभ राशि भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। धार्मिक कार्यों और यात्रा के योग बन रहे हैं। शिक्षा और करियर में नई दिशा मिल सकती है। गुरुजनों की सलाह लाभदायक साबित होगी। शुभ रंग: भूरा शुभ अंक: 9 उपाय: घर के पश्चिम दिशा को साफ रखें। मीन राशि आज निर्णय सोच-समझकर लें। जल्दबाजी या लालच नुकसान पहुंचा सकता है। पुराने दस्तावेज या वित्तीय मामलों में सावधानी बरतें। मानसिक तनाव से बचने के लिए धैर्य रखें। शुभ रंग: पीला शुभ अंक: 6 उपाय: भगवान विष्णु की पूजा करें और जरूरतमंदों की सहायता करें।
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने एलन मस्क और अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) के बीच हुए समझौते को मंजूरी दे दी है। हालांकि अदालत ने इस समझौते को लेकर कई गंभीर सवाल भी उठाए और कहा कि इसमें कुछ "रेड फ्लैग" यानी चिंताजनक पहलू दिखाई देते हैं। यह मामला 2022 में Twitter (अब X) के शेयरों की खरीद से जुड़ा है, जिसमें मस्क पर अपनी हिस्सेदारी की जानकारी तय समय से देर से सार्वजनिक करने का आरोप था। क्या था पूरा मामला? SEC के अनुसार, एलन मस्क ने मार्च और अप्रैल 2022 में Twitter के शेयर खरीदे थे, लेकिन नियमानुसार जानकारी देने में 11 दिनों की देरी की। नियामक का दावा था कि इस देरी के कारण मस्क निवेशकों को जानकारी मिलने से पहले कम कीमत पर शेयर खरीदते रहे, जिससे उन्हें लगभग 150 मिलियन डॉलर का वित्तीय लाभ हुआ। बाद में मस्क ने अक्टूबर 2022 में करीब 44 अरब डॉलर में Twitter का अधिग्रहण किया और इसका नाम बदलकर X कर दिया। समझौते के तहत कितना देना होगा जुर्माना? समझौते के अनुसार, एलन मस्क के नाम से जुड़े एक ट्रस्ट की ओर से 15 लाख डॉलर (1.5 मिलियन डॉलर) का भुगतान किया जाएगा। इसके साथ ही SEC द्वारा लगाए गए इस मामले के दावों का निपटारा हो जाएगा। मस्क का कहना है कि जानकारी देने में हुई देरी जानबूझकर नहीं, बल्कि अनजाने में हुई थी। जज ने SEC की कार्रवाई पर उठाए सवाल मामले की सुनवाई करने वाली अमेरिकी जिला अदालत की जज स्पार्कल सूकनानन ने कहा कि अदालत का काम केवल यह देखना है कि समझौता कानूनी रूप से उचित और निष्पक्ष है या नहीं। हालांकि उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि SEC ने मस्क से कथित आर्थिक लाभ की वसूली (Disgorgement) की मांग क्यों छोड़ दी। जज ने यह भी पूछा कि आखिर समझौता सीधे मस्क की बजाय उनके ट्रस्ट के साथ क्यों किया गया। अदालत ने टिप्पणी की कि इससे यह धारणा बन सकती है कि मस्क सार्वजनिक रूप से खुद को पूरी तरह निर्दोष बता सकें। SEC ने समझौते का किया बचाव SEC ने अदालत में कहा कि यह समझौता किसी तरह की मिलीभगत का परिणाम नहीं है। आयोग के अनुसार, 1.5 मिलियन डॉलर का जुर्माना इस तरह के मामलों में अब तक की सबसे बड़ी सिविल पेनल्टी है। नियामक ने यह भी कहा कि समझौते के तहत जारी आदेश भविष्य में मस्क पर भी लागू रहेगा, भले ही वे अपने ट्रस्ट के माध्यम से निवेश करें। राजनीतिक पहलू भी आया चर्चा में अपने आदेश में जज ने यह भी टिप्पणी की कि यह तय करना जनता का अधिकार है कि क्या सरकार ने इस मामले में एलन मस्क की पर्याप्त जवाबदेही तय की या नहीं। एलन मस्क पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार रह चुके हैं। वहीं इस मामले की सुनवाई करने वाली जज की नियुक्ति पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में हुई थी। क्या होगा आगे? अदालत की मंजूरी के साथ यह मामला फिलहाल समाप्त हो गया है, लेकिन फैसले में की गई टिप्पणियों ने SEC की कार्यप्रणाली और हाई-प्रोफाइल मामलों में नियामकीय पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त आव्रजन नीतियों को एक और कानूनी झटका लगा है। अमेरिकी संघीय अदालत ने एच-1बी वीजा के तहत विदेशी कुशल कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली कंपनियों पर 1 लाख डॉलर का अतिरिक्त शुल्क लगाने की योजना को अवैध घोषित कर दिया है। इस फैसले से अमेरिकी कंपनियों, विश्वविद्यालयों और विशेष रूप से भारतीय पेशेवरों को बड़ी राहत मिली है। अदालत के फैसले के बाद फिलहाल वह नियम लागू नहीं हो सकेगा, जिसके तहत नए एच-1बी वीजा आवेदन पर कंपनियों को भारी अतिरिक्त शुल्क चुकाना पड़ता। चूंकि एच-1बी वीजा धारकों में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है, इसलिए इस निर्णय को भारत के हजारों आईटी पेशेवरों, इंजीनियरों, डॉक्टरों और अन्य कुशल कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने योजना को बताया संविधान के खिलाफ अमेरिकी जिला न्यायालय के न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति के पास कांग्रेस की मंजूरी के बिना इस तरह का नया शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। अदालत ने माना कि यह कदम संविधान में निर्धारित शक्तियों के विभाजन के सिद्धांत का उल्लंघन करता है। अपने आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रशासनिक निर्णय के जरिए इतनी बड़ी वित्तीय बाध्यता लागू नहीं की जा सकती, जब तक कि उसके लिए विधायी मंजूरी न हो। क्या था ट्रंप प्रशासन का प्रस्ताव? ट्रंप प्रशासन ने सितंबर 2025 में घोषणा की थी कि नए एच-1बी वीजा आवेदनों पर 1 लाख डॉलर का अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। प्रशासन का तर्क था कि इससे अमेरिकी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों पर निर्भरता कम करेंगी और स्थानीय नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। व्हाइट हाउस का दावा था कि एच-1बी कार्यक्रम का कुछ कंपनियों द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा है और कम लागत पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर अमेरिकी नागरिकों के अवसर प्रभावित किए जा रहे हैं। कंपनियों पर कई गुना बढ़ जाता आर्थिक बोझ इस नियम के लागू होने से पहले एच-1बी वीजा से जुड़ी सामान्य फीस और अन्य शुल्क मिलाकर कंपनियों को लगभग 2,000 से 5,000 डॉलर तक खर्च करना पड़ता था। नया नियम लागू होने की स्थिति में यह लागत सीधे 1 लाख डॉलर से अधिक हो जाती, जिससे विदेशी प्रतिभाओं को नियुक्त करना अधिकांश कंपनियों के लिए बेहद महंगा हो जाता। विशेषज्ञों का मानना था कि इससे तकनीकी कंपनियों, विश्वविद्यालयों और स्वास्थ्य सेवा संस्थानों पर गंभीर असर पड़ सकता था। राज्यों और उद्योग संगठनों ने दी थी चुनौती इस नीति को कैलिफोर्निया सहित 20 डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले राज्यों ने अदालत में चुनौती दी थी। राज्यों का तर्क था कि राष्ट्रपति अकेले इस तरह का शुल्क नहीं लगा सकते और इसके लिए कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक है। इसके अलावा कई उद्योग संगठनों, विश्वविद्यालयों और कारोबारी संस्थाओं ने भी इस फैसले का विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे पहले से मौजूद कुशल कर्मचारियों की कमी और बढ़ सकती है। छह महीने पहले आया था अलग फैसला दिलचस्प बात यह है कि कुछ महीने पहले इसी मुद्दे पर एक अन्य संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन के पक्ष में फैसला दिया था। उस समय अदालत ने माना था कि राष्ट्रपति को ऐसे कदम उठाने का अधिकार प्राप्त है। बाद में अमेरिकी न्यायपालिका के अन्य फैसलों और संवैधानिक व्याख्याओं के आधार पर अदालत ने इस मामले में अलग दृष्टिकोण अपनाया और अतिरिक्त शुल्क को अवैध करार दिया। भारतीय पेशेवरों के लिए क्यों अहम है फैसला? एच-1बी वीजा अमेरिका में रोजगार पाने के इच्छुक भारतीय पेशेवरों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य वीजा माना जाता है। हर साल जारी होने वाले एच-1बी वीजा में सबसे बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की होती है। भारत के आईटी क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियां इसी कार्यक्रम के माध्यम से अपने कर्मचारियों को अमेरिका भेजती हैं। इसके अलावा हजारों भारतीय इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट, डॉक्टर, वित्त विशेषज्ञ और शोधकर्ता भी इसी वीजा के जरिए अमेरिका में काम करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 1 लाख डॉलर का अतिरिक्त शुल्क लागू हो जाता, तो भारतीय पेशेवरों की भर्ती पर सीधा असर पड़ता और कई कंपनियां नए आवेदनों से बचतीं। अमेरिका में कितने लोग H-1B पर काम कर रहे हैं? उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में अमेरिका में लगभग 7.30 लाख एच-1बी वीजा धारक कार्यरत हैं। इनके अलावा करीब 5.50 लाख आश्रित सदस्य, जिनमें पति-पत्नी और बच्चे शामिल हैं, भी अमेरिका में रह रहे हैं। अमेरिकी कानून के तहत निजी क्षेत्र के लिए हर वर्ष 65,000 एच-1बी वीजा जारी किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त अमेरिकी विश्वविद्यालयों से मास्टर या उससे उच्च डिग्री प्राप्त करने वाले आवेदकों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा निर्धारित हैं। आगे क्या होगा? अदालत के इस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन की योजना पर तत्काल प्रभाव से रोक लग गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती दे सकता है। यदि मामला अपील में जाता है, तो एच-1बी वीजा को लेकर कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रह सकती है। फिलहाल अदालत के फैसले ने विदेशी कुशल कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली कंपनियों और अमेरिका में अवसर तलाश रहे हजारों भारतीय पेशेवरों को बड़ी राहत दी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।