बहराइच, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित गतिविधियों से जुड़े संगठन 'वारिस पंजाब दे' के वांछित आरोपी बिक्रमजीत सिंह को गिरफ्तार किया है। उसके साथ एक अमेरिकी नागरिक को भी पकड़ा गया, जो बिना वैध दस्तावेजों के भारत में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। दोनों को सशस्त्र सीमा बल (SSB) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पकड़ा गया। नेपाल के रास्ते भारत में दाखिल होने की कोशिश नाकाम जांच एजेंसियों के अनुसार, बिक्रमजीत सिंह लंबे समय से पुलिस की नजर में था और उसके खिलाफ पहले से मामले दर्ज थे। सुरक्षा बलों को सूचना मिली थी कि वह नेपाल सीमा के रास्ते आवाजाही कर सकता है। इसके बाद रूपईडीहा बॉर्डर क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई गई और कार्रवाई कर उसे पकड़ लिया गया। अमेरिकी नागरिक से पूछताछ, सुरक्षा एजेंसियां जुटीं जांच में कार्रवाई के दौरान पकड़े गए अमेरिकी नागरिक के पास भारत में प्रवेश से जुड़े वैध दस्तावेज नहीं मिले। सुरक्षा एजेंसियां अब उसकी पहचान, भारत आने के उद्देश्य और अन्य संपर्कों की जांच कर रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और पूछताछ जारी है। सीमा सुरक्षा को लेकर एजेंसियां सतर्क भारत-नेपाल सीमा पर हाल के दिनों में संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि अवैध प्रवेश, संगठित अपराध और देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े किसी भी नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
वृंदावन, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट स्टार विराट कोहली और बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा एक बार फिर अपनी आध्यात्मिक यात्रा को लेकर चर्चा में हैं। दोनों ने उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचकर उनसे मुलाकात की और आशीर्वाद लिया। इस दौरान कपल बेहद सादगी भरे अंदाज में नजर आये। उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। आश्रम में कुछ समय बिताया, आध्यात्मिक चर्चा में हुए शामिल जानकारी के अनुसार, विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए और कुछ समय उनके साथ आध्यात्मिक चर्चा में बिताया। दोनों ने महाराज के सामने बैठकर उनकी बातें सुनीं और जीवन, आध्यात्मिकता तथा सकारात्मक सोच से जुड़े संदेशों को ग्रहण किया। इस दौरान दोनों काफी शांत और श्रद्धा भाव में नजर आए। सादगी भरे अंदाज की हो रही चर्चा वृंदावन पहुंचने के दौरान विराट और अनुष्का का सादा पहनावा भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। दोनों ने बिना किसी बड़े तामझाम के आश्रम पहुंचकर दर्शन किए। सोशल मीडिया पर फैंस उनकी इस सादगी की तारीफ कर रहे हैं और इसे उनकी निजी आस्था से जुड़ा कदम बता रहे हैं। पहले भी प्रेमानंद महाराज से मिल चुके हैं विराट-अनुष्का यह पहली बार नहीं है जब विराट कोहली और अनुष्का शर्मा प्रेमानंद महाराज के दर्शन करने पहुंचे हैं। इससे पहले भी दोनों कई बार वृंदावन आकर महाराज से आशीर्वाद ले चुके हैं। दोनों की धार्मिक और आध्यात्मिक यात्राएं पहले भी सुर्खियों में रही हैं। विराट और अनुष्का ने इससे पहले भी कई धार्मिक स्थलों का दौरा किया है। वे उत्तराखंड के मंदिरों, बाबा नीम करोली आश्रम और अन्य आध्यात्मिक स्थानों पर भी नजर आ चुके हैं। आईपीएल सफलता के बाद भी पहुंचे थे वृंदावन इससे पहले विराट कोहली और अनुष्का शर्मा आईपीएल में आरसीबी की सफलता के बाद भी वृंदावन पहुंचे थे। उस समय भी दोनों ने प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की थी। महाराज ने उन्हें जीवन में विनम्रता, धैर्य और ईश्वर के प्रति विश्वास बनाए रखने का संदेश दिया था। फैंस ने सोशल मीडिया पर दी सकारात्मक प्रतिक्रिया विराट और अनुष्का की इस यात्रा के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने उनकी आस्था और सादगी की प्रशंसा की, जबकि कुछ यूजर्स ने इसे परिवार और व्यक्तिगत जीवन में आध्यात्मिक जुड़ाव का उदाहरण बताया। प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचते हैं कई बड़े चेहरे वृंदावन के प्रेमानंद महाराज देशभर में प्रसिद्ध संतों में से एक हैं। उनसे मिलने के लिए खेल, फिल्म और उद्योग जगत की कई बड़ी हस्तियां समय-समय पर पहुंचती रही हैं। विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की यह मुलाकात भी इसी कारण चर्चा का विषय बनी हुई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। हरियाली तीज का पर्व सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है और यह विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि के लिए निर्जला या फलाहार व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से दांपत्य जीवन में प्रेम, सौहार्द और स्थिरता बनी रहती है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम 6:46 बजे से शुरू होकर 15 अगस्त की शाम 5:28 बजे तक रहेगी। चूंकि व्रत और पर्व उदयातिथि के आधार पर मनाए जाते हैं, इसलिए हरियाली तीज 15 अगस्त 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। जानें शुभ मुहूर्त और व्रत के नियम हरियाली तीज के दिन पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:50 से 5:35 बजे तक, अभिजित मुहूर्त 12:17 से 1:08 बजे तक और विजय मुहूर्त 2:51 से 3:42 बजे तक रहेगा। वहीं गोधूलि मुहूर्त 7:06 से 7:29 बजे और अमृत काल रात 8:18 से 9:53 बजे तक रहेगा। चौघड़िया के अनुसार शुभ, लाभ और अमृत काल भी पूजा के लिए अनुकूल माने गए हैं। इस दिन महिलाओं को क्या पहना चाहिए ? इस दिन महिलाओं को हरे या लाल रंग के वस्त्र पहनने, सोलह श्रृंगार करने और हाथों में मेहंदी रचाने की परंपरा है। पूजा में मायके से प्राप्त श्रृंगार सामग्री का उपयोग शुभ माना जाता है। व्रत के दौरान विवाद और नकारात्मकता से दूर रहने, शुभ मुहूर्त से पहले पारण न करने तथा रात्रि में भजन-कीर्तन और शिव-पार्वती के जागरण का विशेष महत्व बताया गया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पंजाब सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में हरियाली तीज बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। इस अवसर पर मायके से विवाहित बेटियों को वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, घेवर, मिठाइयां और उपहार भेजने की परंपरा भी निभाई जाती है, जो पारिवारिक स्नेह और रिश्तों की मजबूती का प्रतीक मानी जाती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) ने राजनीति के साथ-साथ खेल जगत में भी अपनी पहचान मजबूत की है। उन्होंने 49वीं उत्तर प्रदेश स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज (कांस्य) मेडल अपने नाम किया। प्रतियोगिता में उनकी सफलता के बाद समर्थकों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी। दिल्ली में आयोजित हुई प्रतियोगिता 49वीं यूपी स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप का आयोजन दिल्ली में किया गया, जिसमें प्रदेश के कई अनुभवी और उभरते निशानेबाजों ने हिस्सा लिया। राजा भैया ने कड़े मुकाबले के बीच बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक हासिल किया। समर्थकों में खुशी की लहर राजा भैया की इस उपलब्धि के बाद प्रतापगढ़ और कुंडा क्षेत्र में उनके समर्थकों ने खुशी जताई। सोशल मीडिया पर भी उन्हें लगातार बधाइयां दी जा रही हैं और उनके खेल कौशल की सराहना की जा रही है। शूटिंग के प्रति पुराना लगाव राजा भैया की शूटिंग खेल में लंबे समय से रुचि रही है। राजनीतिक व्यस्तताओं के बावजूद उन्होंने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। राजनीति के साथ खेल में भी बनाई पहचान राजा भैया की इस सफलता को उनके समर्थक राजनीति के साथ खेल के क्षेत्र में भी बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह पदक युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करेगा और सार्वजनिक जीवन के साथ खेलों में सक्रिय रहने का सकारात्मक संदेश देगा।
लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि "2017 से पहले उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं था, बल्कि उस समय की सरकार की सोच और कार्यशैली बीमार थी।" उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों की नीतियों और निर्णयों के कारण प्रदेश विकास की दौड़ में पीछे रह गया था। '2017 से पहले न नीति थी, न नियत' मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले सरकार के पास न स्पष्ट नीति थी और न ही जनहित में काम करने की नियत। उनके अनुसार, भ्रष्टाचार, अपराध और माफिया का प्रभाव शासन व्यवस्था पर हावी था, जबकि मौजूदा सरकार ने कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देकर निवेश और विकास का माहौल बनाया हुआ है। विपक्ष पर साधा निशाना योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले की सरकारों ने प्रदेश की छवि को नुकसान पहुंचाया, जबकि वर्तमान सरकार ने बुनियादी ढांचे, एक्सप्रेसवे, मेडिकल कॉलेज, एयरपोर्ट और औद्योगिक निवेश के जरिए उत्तर प्रदेश को नई पहचान दिलाने का प्रयास किया है। विकास कार्यों का किया जिक्र मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज उत्तर प्रदेश निवेश, रोजगार और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में बेहतर कानून-व्यवस्था और सुशासन के कारण देश-विदेश की कंपनियां निवेश के लिए आगे आ रही हैं। सदन में बयान पर छिड़ी राजनीतिक बहस योगी आदित्यनाथ के इस बयान के बाद विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने सरकार के दावों पर सवाल उठाए, जबकि भाजपा ने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए इसे प्रदेश के विकास का वास्तविक चित्र बताया।
महाप्रसाद में मालपुआ का क्यों है विशेष महत्व? ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर अपनी प्राचीन परंपराओं, भव्य रथ यात्रा और दिव्य महाप्रसाद के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। मंदिर में भगवान जगन्नाथ को प्रतिदिन छप्पन भोग अर्पित किए जाते हैं, जिनमें 'मालपुआ', जिसे स्थानीय भाषा में 'आमलु' कहा जाता है, विशेष स्थान रखता है। यह केवल स्वादिष्ट प्रसाद नहीं, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा और सात्विक भोजन संस्कृति का प्रतीक भी माना जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान को अर्पित किए जाने वाले भोग में शुद्ध और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाता है, इसलिए इसमें रिफाइंड चीनी या मैदा की बजाय गुड़ और गेहूं के आटे का प्रयोग किया जाता है। महाप्रसाद में गुड़ का ही क्यों होता है इस्तेमाल? जगन्नाथ मंदिर की रसोई में भोजन बनाने के नियम सदियों से चले आ रहे हैं। इन्हीं परंपराओं के अनुसार महाप्रसाद में रिफाइंड चीनी की जगह गुड़ का उपयोग किया जाता है। गुड़ मालपुए को प्राकृतिक मिठास, गहरा सुनहरा-भूरा रंग और सोंधी खुशबू देता है। इसके साथ बड़ी इलायची, सौंफ, काली मिर्च, केसर और खाने वाला कपूर मिलाकर इसका स्वाद और भी विशेष बनाया जाता है। यही वजह है कि मंदिर के मालपुए का स्वाद सामान्य मालपुए से अलग माना जाता है। मालपुआ बनाने के लिए आवश्यक सामग्री 1 कप गुड़ (बारीक कटा या कुचला हुआ) 1.5–2 कप गेहूं का आटा 2 छोटे चम्मच दूध 4–5 केसर के रेशे 1 छोटा टुकड़ा खाने वाला कपूर 1 बड़ी इलायची 1 बड़ा चम्मच सौंफ 8–10 काली मिर्च आवश्यकतानुसार पानी तलने के लिए घी या तेल ऐसे बनाएं पारंपरिक मालपुआ सबसे पहले गुड़ को पानी में भिगोकर पूरी तरह घुलने दें। बड़ी इलायची, सौंफ और काली मिर्च को दरदरा कूट लें। अब गुड़ के घोल में थोड़ा-सा खाने वाला कपूर, दूध और धीरे-धीरे गेहूं का आटा मिलाकर बिना गांठ वाला बैटर तैयार करें। इसमें तैयार मसाला और केसर का पानी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। एक कड़ाही में घी या तेल गर्म करें। बैटर को कलछी से डालें और धीमी से मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक तलें। अतिरिक्त तेल निकालकर केले के पत्ते पर सजाएं और ऊपर तुलसी दल रखकर भगवान जगन्नाथ को भोग अर्पित करें। बनाने में कितना समय लगेगा? तैयारी का समय: 15 मिनट पकाने का समय: 20–25 मिनट कुल समय: लगभग 35–40 मिनट प्रति मालपुआ अनुमानित पोषण कैलोरी: 180–220 kcal कार्बोहाइड्रेट: 28–32 ग्राम प्रोटीन: 3–4 ग्राम फैट: 6–8 ग्राम महाप्रसाद की खास बातें गुड़ और गेहूं के आटे से तैयार पारंपरिक सात्विक प्रसाद। रिफाइंड चीनी और मैदे का उपयोग नहीं किया जाता। प्राकृतिक मसाले स्वाद और सुगंध बढ़ाते हैं। भगवान जगन्नाथ के छप्पन भोग का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। धार्मिक परंपराओं और शुद्धता के नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है। ध्यान दें: मंदिर में बनने वाले महाप्रसाद की विधि और परंपराएं धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। घर पर तैयार की गई रेसिपी स्वाद और सामग्री में कुछ भिन्न हो सकती है।
लंदन, एजेंसियां। ब्रिटेन सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के समर्थन पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार ने नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत IRGC को पहली बार "स्टेट थ्रेट" (राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा) घोषित किया है। अब ब्रिटेन में IRGC के लिए समर्थन जुटाना, उसकी मदद करना या उसके हित में गतिविधियां चलाना अपराध माना जाएगा। 14 साल तक की जेल का प्रावधान ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के अनुसार, नए कानून के तहत IRGC का समर्थन करने, उसके लिए काम करने या उसे किसी भी प्रकार की सहायता पहुंचाने पर अधिकतम 14 साल की जेल हो सकती है। वहीं यदि कोई व्यक्ति IRGC की ओर से जासूसी, तोड़फोड़ या हिंसक गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसे आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। यह फैसला क्यों लिया गया? ब्रिटिश सरकार का आरोप है कि IRGC की कुद्स फोर्स ने ब्रिटेन में यहूदी और इजरायली समुदाय से जुड़े कई ठिकानों पर हुए हमलों के पीछे सक्रिय भूमिका निभाई। सरकार का कहना है कि ईरान समर्थित संगठन Islamic Movement of Companions of the Right (IMCR) ने लंदन समेत कई स्थानों पर आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं की जिम्मेदारी ली थी। इन्हीं घटनाओं के बाद यह कार्रवाई की गई।
Ayodhya Real Estate News: राम मंदिर के उद्घाटन के बाद अयोध्या देश के सबसे तेजी से उभरते रियल एस्टेट और आध्यात्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल हो गया है। शहर में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और बढ़ती निवेश संभावनाओं के बीच बॉलीवुड के कई बड़े सितारे भी यहां निवेश कर रहे हैं। इसी कड़ी में अभिनेता अमिताभ बच्चन और रणबीर कपूर के अयोध्या में किए गए रियल एस्टेट निवेश एक बार फिर चर्चा में हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमिताभ बच्चन ने अयोध्या में विभिन्न प्रॉपर्टीज़ के जरिए लगभग ₹90 करोड़ का निवेश किया है, जबकि रणबीर कपूर ने ₹3.31 करोड़ की कीमत वाला एक प्रीमियम प्लॉट खरीदा है। अमिताभ बच्चन का अयोध्या में बड़ा निवेश रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमिताभ बच्चन ने डेवलपर The House of Abhinandan Lodha (HoABL) की परियोजनाओं सहित अयोध्या में कई संपत्तियों में निवेश किया है। उनके निवेश का कुल अनुमान लगभग ₹90–100 करोड़ के बीच बताया जा रहा है। अमिताभ बच्चन की प्रमुख प्रॉपर्टीज़ सरयू प्लॉट: लगभग 10,000 वर्ग फुट का प्लॉट, जिसकी अनुमानित कीमत ₹14.5 करोड़ बताई जाती है। हवेली अवध: करीब 5,372 वर्ग फुट का प्लॉट, जिसकी कीमत लगभग ₹4.54 करोड़ है। प्रीमियम लग्जरी प्लॉट: सरयू डेवलपमेंट के पास लगभग 25,000 वर्ग फुट का प्लॉट, जिसकी कीमत करीब ₹40 करोड़ बताई गई है। 67 एकड़ भूमि: परिवार की कंपनी AB Corp Ltd के माध्यम से लगभग ₹35 करोड़ में खरीदी गई जमीन। हरिवंश राय बच्चन मेमोरियल ट्रस्ट: दिवंगत कवि हरिवंश राय बच्चन की स्मृति में प्रस्तावित स्मारक के लिए लगभग 54,454 वर्ग फुट भूमि का पंजीकरण कराया गया है। रणबीर कपूर ने भी खरीदा प्रीमियम प्लॉट अभिनेता रणबीर कपूर ने भी अयोध्या के लग्जरी रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने सरयू टाउनशिप में लगभग 2,134 वर्ग फुट का प्रीमियम प्लॉट खरीदा है, जिसकी कीमत ₹3.31 करोड़ बताई गई है। बताया जाता है कि यह निवेश उन्होंने अपनी फिल्म 'रामायण' में भगवान राम की भूमिका निभाने से पहले किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने इस निवेश को परिवार के लिए दीर्घकालिक संपत्ति और विशेष भावनात्मक महत्व वाला निर्णय बताया है। राम मंदिर के बाद अयोध्या बना निवेश का नया केंद्र राम मंदिर के उद्घाटन के बाद अयोध्या में रियल एस्टेट, होटल, हॉस्पिटैलिटी और पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों में तेजी से निवेश बढ़ा है। शहर में लग्जरी आवासीय परियोजनाओं के साथ-साथ व्यावसायिक विकास भी तेज़ी से हो रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव अयोध्या को वैश्विक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं: महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन बेहतर सड़क और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी प्रस्तावित नमो भारत कॉरिडोर सहित विभिन्न परिवहन परियोजनाएं इन परियोजनाओं के कारण अयोध्या का रियल एस्टेट बाजार निवेशकों और डेवलपर्स के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।
अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच के बीच अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। दान की गिनती करने वाले 20 कर्मचारियों के इस्तीफे के बाद चढ़ावे की गिनती की व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। कर्मचारियों ने बढ़ते कार्यभार और मानसिक दबाव को इस्तीफे की वजह बताया है। जांच के बाद आधे से ज्यादा कर्मचारी हुए अलग पुलिस सूत्रों के अनुसार, पहले मंदिर में दान की राशि गिनने के लिए करीब 40 कर्मचारी तैनात थे। कथित चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद कई कर्मचारियों ने नियमित रूप से ड्यूटी पर आना बंद कर दिया। शुरुआत में रोजाना केवल 15 से 20 कर्मचारी ही काम कर रहे थे। अब 20 कर्मचारियों के इस्तीफे के बाद यह संख्या घटकर लगभग एक दर्जन रह गई है। बढ़ते काम और सख्त प्रक्रिया से बढ़ा दबाव इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों ने अपने पत्र में लिखा है कि जांच के बाद दान गिनने की पूरी प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक सख्त हो गई है। हर चरण में अतिरिक्त जांच, सत्यापन और निगरानी के कारण काम का दबाव काफी बढ़ गया है। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार बढ़ते कार्यभार और मानसिक तनाव के चलते जिम्मेदारी निभाना मुश्किल हो गया था। चढ़ावा चोरी मामले के बाद बदली व्यवस्था राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हैं। इसके बाद ट्रस्ट ने दान की गिनती की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। अब हर चरण की निगरानी की जा रही है, जिससे प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक समय लेने लगी है। ट्रस्ट के सामने नई चुनौती कर्मचारियों के लगातार इस्तीफों से ट्रस्ट के सामने दान गिनने की व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। अब ट्रस्ट को नई टीम तैयार करने के साथ-साथ पारदर्शिता और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हुए चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया को सामान्य करना होगा। जांच जारी कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। वहीं, ट्रस्ट प्रशासन का फोकस अब दान गिनने की व्यवस्था को बिना किसी बाधा के जारी रखने और नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने पर है।
मुंबई: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे और कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं कांग्रेस ने इस प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से कराने की मांग उठाई है। उद्धव ठाकरे का बीजेपी पर तंज महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि कुछ लोग नारा देते हैं, "अयोध्या तो बस एक झांकी थी, अभी काशी और मथुरा बाकी है", लेकिन मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए अब उन्हें इन धार्मिक स्थलों की भी चिंता हो रही है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज किसी भी व्यक्ति को मंदिरों के नाम पर भ्रष्टाचार या गड़बड़ी करने की अनुमति नहीं देगा। उद्धव ठाकरे ने कहा, "हम निडर, मासूम और देश से प्रेम करने वाले हिंदू हैं, लेकिन बेवकूफ नहीं। अगर कोई हिंदुत्व के नाम पर मंदिरों को लूटने की कोशिश करेगा तो हिंदू समाज उसे माफ नहीं करेगा।" उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन पर हिंदुओं के हितों की रक्षा की जिम्मेदारी है, उन्हीं पर सवाल उठ रहे हैं। 'चोरी का मामला सुलझने तक शांत नहीं बैठेंगे' उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना (UBT) इस मामले को गंभीरता से उठा रही है और जब तक पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आती तथा दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनकी पार्टी शांत नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे ने हिंदुओं को जागरूक करने का काम किया था और मंदिरों से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार स्वीकार नहीं किया जा सकता। कांग्रेस ने भी साधा निशाना कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति तीन बातों पर आधारित है— वोट चोरी, सीट चोरी, और चंदा चोरी। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इतने गंभीर मामले पर सरकार की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया आनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच की मांग कांग्रेस ने इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की है। जयराम रमेश ने कहा कि यदि चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप सही हैं, तो पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। क्या है पूरा मामला? राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन का मामला उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद सामने आया था। इसके आधार पर 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई। अब तक पुलिस इस मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस के अनुसार, छह आरोपियों के पास से लगभग 80 लाख रुपये नकद और कुछ विदेशी मुद्रा बरामद की गई है। मामले की जांच फिलहाल जारी है और ट्रस्ट तथा जांच एजेंसियों की ओर से आगे की कार्रवाई की जा रही है। राजनीतिक दल इस मुद्दे को लेकर लगातार एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। एक महिला पर अपने पति की हत्या कर शव को घर के बाथरूम के फर्श के नीचे दफनाने का आरोप लगा है। हैरानी की बात यह है कि आरोपी महिला ने खुद ही पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। पुलिस ने जांच के दौरान बाथरूम का फर्श खुदवाया, जहां से शव बरामद हुआ। गुमशुदगी की शिकायत ने खोला हत्या का राज पुलिस के मुताबिक, 45 वर्षीय सुरेंद्र शर्मा के लापता होने की शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस को पत्नी रूबी शर्मा के बयानों पर संदेह हुआ। पूछताछ में विरोधाभास मिलने पर पुलिस ने घर की तलाशी ली और बाथरूम का फर्श खुदवाया, जहां सुरेंद्र का शव दबा मिला। शव दबाकर ऊपर डाल दिया था कंक्रीट सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) अमीषा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रूबी शर्मा ने कथित तौर पर पति की हत्या करने के बाद शव को बाथरूम के फर्श के नीचे दबा दिया और ऊपर से कंक्रीट डालकर सबूत मिटाने की कोशिश की। पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या के पीछे की वजह जानने के लिए उससे पूछताछ की जा रही है। शराब और घरेलू विवाद की बात सामने आई प्रारंभिक जांच और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, महिला ने पूछताछ में बताया कि पति की शराब की लत और आए दिन होने वाले घरेलू विवादों से परेशान होकर उसने करीब डेढ़ महीने पहले हत्या की थी। पुलिस अभी इस दावे की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। पड़ोसियों को पहले से था शक स्थानीय निवासी गौरव दीक्षित ने बताया कि सुरेंद्र शर्मा और उनकी पत्नी के बीच अक्सर झगड़े होते थे। सुरेंद्र मूल रूप से राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले थे और पिछले नौ वर्षों से आगरा की रेणुका धाम कॉलोनी में परिवार के साथ रह रहे थे। पड़ोसियों के मुताबिक, जब सुरेंद्र कई दिनों तक दिखाई नहीं दिए तो उन्होंने रूबी शर्मा से कई बार उनके बारे में पूछा, लेकिन वह हर बार अलग-अलग बहाने बनाकर बात टाल देती थी। इसी वजह से आसपास के लोगों को शक होने लगा था। पुलिस कर रही है मामले की विस्तृत जांच पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पूछताछ के आधार पर हत्या के कारणों और घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
अयोध्या: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे को लेकर सामने आए कथित अनियमितताओं के मामले ने नया राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि बजरंग दल के संस्थापक और पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार ने दावा किया है कि उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत की है। इस बीच, उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो कथित वित्तीय अनियमितताओं और दान प्रबंधन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। RSS ने संयम बरतने की अपील की RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने हिंदू समाज से अपील करते हुए कहा कि मामले को लेकर धैर्य बनाए रखें और किसी भी अफवाह या भड़काऊ प्रचार से बचें। उनके अनुसार, कुछ हिंदू विरोधी और राष्ट्र विरोधी ताकतें इस विवाद का फायदा उठाकर समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश कर सकती हैं। 'मंदिर प्रबंधन की कमियां दूर हों' होसबाले ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को इस पूरे मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर के प्रबंधन और व्यवस्था में यदि कहीं कोई कमी है तो उसे जल्द दूर किया जाना चाहिए, ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रहे। विनय कटियार ने ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की पूर्व भाजपा सांसद और बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा की है। कटियार ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। उनके इस बयान पर अब तक सरकार या जांच एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब तक आठ गिरफ्तार, दो पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा पुलिस के अनुसार, इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी चंपत रायऔर अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। SIT कर रही है पूरे मामले की जांच उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) दान प्रबंधन, वित्तीय लेन-देन और कथित अनियमितताओं से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज अयोध्या राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संगठनों और नेताओं के बयान सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल सभी की नजर SIT की जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
कौशांबी, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में 26 जून को हुए भीषण एलपीजी टैंकर हादसे का सीसीटीवी वीडियो सामने आने के बाद घटना एक बार फिर चर्चा में है। वायरल फुटेज में साफ दिखाई देता है कि एलपीजी गैस से भरा एक टैंकर तेज रफ्तार में टोल प्लाजा की ओर बढ़ता है और अचानक नियंत्रण खोकर डिवाइडर से टकराते हुए सीधे टोल बूथ में घुस जाता है। टक्कर के कुछ ही क्षण बाद टैंकर से गैस का रिसाव शुरू हो जाता है और फिर जोरदार विस्फोट से पूरा इलाका आग और धुएं की चपेट में आ जाता है। 24 सेकेंड के वीडियो में कैद हुआ खौफनाक मंजर करीब 24 सेकेंड के सीसीटीवी फुटेज में दो टैंकर टोल प्लाजा की ओर आते दिखाई देते हैं। इसी दौरान एक टैंकर अचानक अनियंत्रित होकर टोल बूथ से टकरा जाता है। टक्कर के बाद हुए गैस रिसाव ने कुछ ही सेकेंड में भयावह रूप ले लिया और भीषण धमाके के साथ आग की ऊंची लपटें उठने लगीं। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास का पूरा इलाका धुएं से भर गया। पांच लोगों की मौत, राहत-बचाव में जुटा प्रशासन इस दर्दनाक हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। विस्फोट के बाद लगी आग इतनी भीषण थी कि उसकी लपटें करीब दो किलोमीटर दूर से भी दिखाई दे रही थीं। आग पर काबू पाने के लिए जिले की सभी फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। पुलिस, प्रशासन और राहत-बचाव दल ने तत्काल अभियान चलाकर घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो हादसे का सीसीटीवी वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई लोगों ने इसे साझा करते हुए सड़क सुरक्षा और खतरनाक ज्वलनशील पदार्थों के सुरक्षित परिवहन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और यह पता लगाया जा रहा है कि टैंकर के अनियंत्रित होने के पीछे तकनीकी खराबी, चालक की लापरवाही या कोई अन्य कारण जिम्मेदार था। यह हादसा भारी वाहनों के संचालन और सुरक्षा मानकों के पालन की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करता है।
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एलिवेटेड रोड पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब चलती कार के अंदर अचानक एक जहरीला कोबरा सांप दिखाई दिया। घटना बुधवार सुबह की बताई जा रही है। कार चला रही महिला ने घबराने के बजाय बेहद सूझबूझ का परिचय देते हुए वाहन को सुरक्षित सड़क किनारे रोका और तुरंत ट्रैफिक पुलिस को सूचना दी। समय रहते कार्रवाई होने से बड़ा हादसा टल गया। कार के अंदर दिखा कोबरा, तुरंत रोकी गाड़ी जानकारी के मुताबिक महिला नोएडा की ओर जा रही थीं। इसी दौरान उन्हें कार के अंदर एक जहरीला कोबरा दिखाई दिया। सांप को देखते ही उन्होंने घबराने के बजाय संयम बनाए रखा और सुरक्षित स्थान पर कार रोककर बाहर निकल गईं। इसके बाद ट्रैफिक पुलिस को सूचना दी गई। ट्रैफिक पुलिस और रेस्क्यू टीम ने संभाला मोर्चा सूचना मिलते ही ट्रैफिक पुलिस मौके पर पहुंची और आसपास का ट्रैफिक नियंत्रित किया। बाद में रेस्क्यू टीम ने सावधानीपूर्वक कार के भीतर मौजूद कोबरा को सुरक्षित बाहर निकाला। पूरी कार्रवाई के दौरान किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पुलिसकर्मी और रेस्क्यू टीम कार से कोबरा को निकालते हुए दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स महिला की हिम्मत और ट्रैफिक पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं। यूपी पुलिस से जुड़े अकाउंट ने भी किया शेयर UP POLICE NEWS @UPPOLICE_NEWS5 नाम के एक एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट से भी घटना का वीडियो साझा किया गया है। पोस्ट में दावा किया गया कि गाजियाबाद के एलिवेटेड रोड पर चलती कार में कोबरा निकलने के बाद ट्रैफिक पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षित रेस्क्यू किया और संभावित दुर्घटना को टाल दिया। सावधानी और सूझबूझ से टला बड़ा खतरा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वाहन चलाते समय कार में सांप दिखाई दे तो घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान पर गाड़ी रोकें, वाहन से बाहर निकलें और तुरंत पुलिस या वन विभाग की रेस्क्यू टीम को सूचना दें। खुद सांप को पकड़ने या हटाने की कोशिश करना खतरनाक हो सकता है।
नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर के कथित दान गबन मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कहा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष Alok Kumar ने स्पष्ट किया कि संगठन अपने अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष Champat Rai के खिलाफ किसी कार्रवाई पर तभी विचार करेगा, जब जांच रिपोर्ट सामने आएगी। उन्होंने कहा कि चंपत राय ने विशेष जांच दल (SIT) की जांच के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है और फिलहाल संगठन जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा है। 'घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, हिंदुओं की भावनाएं आहत हुईं' आलोक कुमार ने कहा कि दान से जुड़े कथित घोटाले की खबरें बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं और इससे देश-दुनिया के करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि मामले में किसी तरह का बचाव या बहाना बनाने का सवाल नहीं है। पुलिस और SIT को निष्पक्ष तरीके से हर पहलू की जांच करनी चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। 'राम मंदिर ट्रस्ट के लिए VHP जिम्मेदार नहीं' VHP प्रमुख ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के समय ही स्पष्ट कर दिया गया था कि राम मंदिर के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी VHP की नहीं है। उन्होंने कहा कि चंपत राय भले ही VHP के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, लेकिन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में उनकी नियुक्ति VHP ने नहीं की थी। इसलिए ट्रस्ट में उनकी भूमिका को संगठन का प्रतिनिधित्व नहीं माना जा सकता। 'चुनावी वजहों से मुद्दे को बढ़ाया जा रहा' आलोक कुमार ने आरोप लगाया कि VHP, Rashtriya Swayamsevak Sangh और प्रधानमंत्री कार्यालय को इस मामले से जोड़ने की कोशिशें राजनीतिक कारणों से की जा रही हैं। उनके अनुसार, अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस मुद्दे को तूल दिया जा रहा है। VHP ने रखीं चार प्रमुख मांगें आलोक कुमार ने बताया कि VHP ने इस मामले में चार प्रमुख मांगें रखी हैं— तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में निष्पक्ष जांच हो। मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में प्रतिदिन की जाए। दोषी पाए जाने वालों को चार से पांच महीने के भीतर सजा दिलाई जाए। उन्होंने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती और किसी व्यक्ति पर औपचारिक रूप से आरोप तय नहीं होते, तब तक उसके खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। फिलहाल SIT को अपनी जांच रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रस्तुत करनी है, जिसके बाद ट्रस्ट और संबंधित संगठनों द्वारा आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जा सकता है।
अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक 6 जुलाई को आयोजित होने की संभावना है। बैठक ऐसे समय प्रस्तावित है, जब राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के आरोपों और ट्रस्ट के दो वरिष्ठ सदस्यों के इस्तीफों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बैठक में ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे और भविष्य की कार्ययोजना पर भी विचार किया जा सकता है। इससे पहले विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया था कि बैठक 7 जुलाई को होगी, लेकिन अब इसके एक दिन पहले 6 जुलाई को आयोजित होने की संभावना जताई जा रही है। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर हो सकती है चर्चा सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दिया है। यह घटनाक्रम राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के आरोपों के बाद सामने आया है। बैठक में दोनों नेताओं के इस्तीफों पर चर्चा होने की संभावना है। यदि ट्रस्ट इन्हें स्वीकार करता है तो ट्रस्ट में तीन पद रिक्त हो जाएंगे। इनमें एक पद पहले से ही खाली है, क्योंकि ट्रस्ट सदस्य बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा के निधन के बाद से उस स्थान पर नियुक्ति नहीं की गई है। ट्रस्ट के पुनर्गठन पर भी हो सकता है विचार सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास, वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरन सहित कुछ अन्य वरिष्ठ न्यासी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से पहले जैसी सक्रिय भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं। ऐसे में बैठक में ट्रस्ट के पुनर्गठन और रिक्त पदों पर नए सदस्यों की नियुक्ति को लेकर भी चर्चा हो सकती है। सीईओ नियुक्ति के लिए नियमों में बदलाव जरूरी बैठक में ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को लेकर भी विचार-विमर्श संभव है। यदि केंद्र सरकार ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद सृजित करना चाहती है, तो इसके लिए पहले ट्रस्ट की नियमावली में संशोधन करना होगा। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान नियमों के तहत सीईओ की नियुक्ति संभव नहीं है और इसके लिए औपचारिक संशोधन आवश्यक होगा। इन नामों की चर्चा सूत्रों के अनुसार, संभावित सीईओ के लिए राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा का नाम पहले से चर्चा में है। इसके अलावा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश्वर राम मिश्र का नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल बताया जा रहा है। ट्रस्ट या सरकार की ओर से इन नामों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बैठक पर रहेगी सभी की नजर राम मंदिर ट्रस्ट की यह बैठक संगठनात्मक बदलाव, रिक्त पदों पर नियुक्ति और प्रशासनिक सुधारों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक के एजेंडे और संभावित फैसलों को लेकर अभी तक ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
नई दिल्ली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए अपने संसदीय दल का गठन कर दिया है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता केसी त्यागी को संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया है। राजनीतिक जानकार इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति को धार देने की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं। राष्ट्रीय लोक दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में संसदीय दल के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसी प्रस्ताव के आधार पर मंगलवार को 15 सदस्यीय संसदीय दल की घोषणा की गई। 15 सदस्यीय संसदीय दल का गठन आरएलडी के संसदीय दल में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी समेत कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें मेजर जनरल बिशंभर दयाल, पूर्व सांसद तारीफ सिंह, मुंशी राम, पूर्व मंत्री अशोक यादव, पूर्व सांसद मलूक नागर, सांसद राजकुमार सांगवान, विधायक राजपाल बालियान, राजस्थान के पूर्व विधायक अब्दुर सगीर खान, विधान परिषद सदस्य योगेश चौधरी, राजस्थान विधायक सुभाष गर्ग, यशपाल बघेल, अनिल दुबे, रमा नागर और बबीता तोमर शामिल हैं। इसके अलावा किसान नेता युद्धवीर सिंह, विजय पूनिया, सुखबीर गठीना और चंद्रबली यादव को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। यूपी चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की रणनीति आरएलडी का पारंपरिक जनाधार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में माना जाता है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले संसदीय दल का गठन संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक संदेश दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी देकर संगठन और चुनावी तैयारी को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। कौन हैं केसी त्यागी? केसी त्यागी का जन्म वर्ष 1950 में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने मुरादनगर से स्कूली शिक्षा और मेरठ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन के दौरान ही उनका झुकाव समाजवादी आंदोलन की ओर हुआ और वे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की विचारधारा से प्रभावित होकर राजनीति में सक्रिय हुए। उन्होंने 1984 में लोकदल के टिकट पर पहला लोकसभा चुनाव लड़ा, जीत नहीं मिली। इसके बाद 1989 में जनता दल के उम्मीदवार के रूप में गाजियाबाद से लोकसभा चुनाव जीतकर पहली बार सांसद बने। समाजवादी राजनीति से जेडीयू तक का सफर जनता दल के विभाजन के बाद केसी त्यागी कुछ समय के लिए समाजवादी पार्टी से जुड़े। बाद में नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस द्वारा गठित समता पार्टी में शामिल हुए। समता पार्टी के जनता दल (यूनाइटेड) में विलय के बाद वे लंबे समय तक जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्य प्रवक्ता रहे। वर्ष 2013 से 2016 तक वे राज्यसभा सदस्य भी रहे। हाल के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद उन्होंने जेडीयू छोड़कर राष्ट्रीय लोक दल का दामन थाम लिया। गठबंधन राजनीति का लंबा अनुभव केसी त्यागी को गठबंधन राजनीति और संगठन संचालन का लंबा अनुभव है। विभिन्न समाजवादी दलों और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के साथ उनके करीबी संबंध रहे हैं। आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन में आवाज उठाने के कारण उन्हें मीसा (MISA) के तहत जेल भी जाना पड़ा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जयंत चौधरी ने उन्हें संसदीय बोर्ड की जिम्मेदारी देकर पार्टी के संगठनात्मक अनुभव और चुनावी रणनीति को मजबूत करने का संदेश दिया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले यह नियुक्ति आरएलडी की चुनावी तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।
भारत की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी Vodafone Idea (Vi) ने बिना किसी बड़े ऐलान के अपना नया सालभर वाला प्रीपेड प्लान लॉन्च कर दिया है। इस प्लान की कीमत ₹4,600 रखी गई है, जो मौजूदा समय में Jio और Airtel के कई वार्षिक प्रीपेड प्लानों से महंगा माना जा रहा है। कंपनी का दावा है कि इस प्लान में अनलिमिटेड डेटा मिलता है, लेकिन इसकी शर्तें जानना भी जरूरी है। यह प्लान फिलहाल Vi की आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर उपलब्ध है। ₹4,600 वाले प्लान में क्या मिलेगा? Vi के इस नए एनुअल प्रीपेड प्लान की वैधता 365 दिन है। इसमें ग्राहकों को पूरे साल के लिए कई बेसिक सुविधाएं मिलती हैं। प्लान के प्रमुख फायदे: 365 दिनों की वैधता अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग प्रतिदिन 100 मुफ्त SMS अनलिमिटेड डेटा (शर्तों के साथ) हालांकि, इस प्लान में किसी भी OTT प्लेटफॉर्म जैसे Netflix, Amazon Prime Video, JioHotstar या अन्य स्ट्रीमिंग सर्विस का मुफ्त सब्सक्रिप्शन शामिल नहीं किया गया है। क्या सच में मिलेगा अनलिमिटेड डेटा? Vi इस प्लान को अनलिमिटेड डेटा प्लान के तौर पर पेश कर रही है, लेकिन वास्तव में इसमें फेयर यूसेज पॉलिसी (FUP) लागू होती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्राहकों को हर 28 दिनों के लिए 300GB डेटा मिलेगा। यानी डेटा पूरी तरह बिना सीमा वाला नहीं है। 4G और 5G दोनों नेटवर्क पर यही डेटा सीमा लागू होगी। इसका मतलब है कि 5G इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को भी अलग से अनलिमिटेड हाई-स्पीड डेटा नहीं मिलेगा। एक दिन का खर्च कितना पड़ेगा? अगर पूरे साल की कीमत को 365 दिनों में बांटा जाए, तो इस प्लान की लागत करीब ₹12.60 प्रतिदिन बैठती है। जो ग्राहक लंबे समय तक बार-बार रिचार्ज नहीं कराना चाहते, उनके लिए यह एक सुविधाजनक विकल्प हो सकता है। हालांकि, इसकी कीमत प्रतिस्पर्धी कंपनियों के मुकाबले अधिक है। 5G अभी भी सीमित शहरों तक Vi ने भले ही यह प्रीमियम प्लान लॉन्च कर दिया हो, लेकिन कंपनी की 5G सेवा अभी पूरे देश में उपलब्ध नहीं है। फिलहाल Vi की 5G सर्विस चुनिंदा शहरों और क्षेत्रों में ही उपलब्ध है, जिनमें शामिल हैं— दिल्ली मुंबई कोलकाता गुजरात के कुछ हिस्से कर्नाटक के कुछ इलाके कंपनी धीरे-धीरे अपने 5G नेटवर्क का विस्तार कर रही है। 5G सेवा का लाभ लेने के लिए ग्राहकों के पास 5G स्मार्टफोन होना चाहिए और वे 5G कवरेज वाले क्षेत्र में होने चाहिए। अच्छी बात यह है कि इसके लिए नया SIM कार्ड लेने की जरूरत नहीं पड़ती। Jio और Airtel से कितना अलग है यह प्लान? Vi का यह प्लान कीमत के मामले में Jio और Airtel के कई वार्षिक प्लानों से महंगा है। हालांकि, इसमें OTT सब्सक्रिप्शन जैसी अतिरिक्त सुविधाएं शामिल नहीं हैं। ऐसे में यह प्लान उन ग्राहकों के लिए अधिक उपयोगी हो सकता है जो पूरे साल की वैधता और अधिक डेटा चाहते हैं, लेकिन जिन यूजर्स के लिए OTT बेनिफिट और व्यापक 5G कवरेज महत्वपूर्ण है, वे अन्य टेलीकॉम कंपनियों के विकल्पों की भी तुलना कर सकते हैं।
नई दिल्ली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए अपने संसदीय दल का गठन कर दिया है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता केसी त्यागी को संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया है। राजनीतिक जानकार इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति को धार देने की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं। राष्ट्रीय लोक दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में संसदीय दल के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसी प्रस्ताव के आधार पर मंगलवार को 15 सदस्यीय संसदीय दल की घोषणा की गई। 15 सदस्यीय संसदीय दल का गठन आरएलडी के संसदीय दल में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी समेत कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है। इनमें मेजर जनरल बिशंभर दयाल, पूर्व सांसद तारीफ सिंह, मुंशी राम, पूर्व मंत्री अशोक यादव, पूर्व सांसद मलूक नागर, सांसद राजकुमार सांगवान, विधायक राजपाल बालियान, राजस्थान के पूर्व विधायक अब्दुर सगीर खान, विधान परिषद सदस्य योगेश चौधरी, राजस्थान विधायक सुभाष गर्ग, यशपाल बघेल, अनिल दुबे, रमा नागर और बबीता तोमर शामिल हैं। इसके अलावा किसान नेता युद्धवीर सिंह, विजय पूनिया, सुखबीर गठीना और चंद्रबली यादव को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। यूपी चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की रणनीति आरएलडी का पारंपरिक जनाधार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में माना जाता है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले संसदीय दल का गठन संगठनात्मक मजबूती और राजनीतिक संदेश दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी देकर संगठन और चुनावी तैयारी को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। कौन हैं केसी त्यागी? केसी त्यागी का जन्म वर्ष 1950 में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने मुरादनगर से स्कूली शिक्षा और मेरठ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन के दौरान ही उनका झुकाव समाजवादी आंदोलन की ओर हुआ और वे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की विचारधारा से प्रभावित होकर राजनीति में सक्रिय हुए। उन्होंने 1984 में लोकदल के टिकट पर पहला लोकसभा चुनाव लड़ा, जीत नहीं मिली। इसके बाद 1989 में जनता दल के उम्मीदवार के रूप में गाजियाबाद से लोकसभा चुनाव जीतकर पहली बार सांसद बने। समाजवादी राजनीति से जेडीयू तक का सफर जनता दल के विभाजन के बाद केसी त्यागी कुछ समय के लिए समाजवादी पार्टी से जुड़े। बाद में नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस द्वारा गठित समता पार्टी में शामिल हुए। समता पार्टी के जनता दल (यूनाइटेड) में विलय के बाद वे लंबे समय तक जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्य प्रवक्ता रहे। वर्ष 2013 से 2016 तक वे राज्यसभा सदस्य भी रहे। हाल के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद उन्होंने जेडीयू छोड़कर राष्ट्रीय लोक दल का दामन थाम लिया। गठबंधन राजनीति का लंबा अनुभव केसी त्यागी को गठबंधन राजनीति और संगठन संचालन का लंबा अनुभव है। विभिन्न समाजवादी दलों और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के साथ उनके करीबी संबंध रहे हैं। आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन में आवाज उठाने के कारण उन्हें मीसा (MISA) के तहत जेल भी जाना पड़ा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जयंत चौधरी ने उन्हें संसदीय बोर्ड की जिम्मेदारी देकर पार्टी के संगठनात्मक अनुभव और चुनावी रणनीति को मजबूत करने का संदेश दिया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले यह नियुक्ति आरएलडी की चुनावी तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।
कासगंज: उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में मंगलवार को एक प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। राहत की बात यह रही कि विमान उड़ा रही महिला प्रशिक्षु पायलट सुरक्षित बच गई। हादसे में विमान को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जबकि घटना की जांच शुरू कर दी गई है। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के अनुसार, चेतक एविएशन का सेसना-152 (VT-AFB) प्रशिक्षण विमान अलीगढ़ से सोलो प्रशिक्षण उड़ान पर था। उड़ान के दौरान विमान की आपात स्थिति उत्पन्न होने पर उसकी कासगंज के एक खेत में क्रैश-लैंडिंग हो गई। हाई-टेंशन बिजली लाइन से टकराया विमान पुलिस के मुताबिक, अलीगढ़ हवाई अड्डे से उड़ान भरने के बाद विमान कासगंज पुलिस लाइंस क्षेत्र के ऊपर उड़ान भर रहा था। इसी दौरान उसकी ऊंचाई अचानक कम होने लगी। क्रैश-लैंडिंग से पहले विमान एक हाई-टेंशन बिजली लाइन से टकरा गया, जिससे बिजली के तार टूट गए और विमान को भी भारी नुकसान पहुंचा। इसके बाद एयरक्राफ्ट पास के खेत में गिर गया। महाराष्ट्र की रहने वाली हैं प्रशिक्षु पायलट घायल प्रशिक्षु पायलट की पहचान कायनात के रूप में हुई है, जो महाराष्ट्र की रहने वाली हैं। हादसे के तुरंत बाद उन्हें एंबुलेंस के जरिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें मामूली चोटें आई हैं और उनकी हालत फिलहाल स्थिर है। मौके पर पहुंची पुलिस और बचाव टीमें घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। दुर्घटनास्थल की घेराबंदी कर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई। बिजली विभाग की टीम ने टूटी हुई हाई-टेंशन लाइन की मरम्मत का काम शुरू किया, जबकि अलीगढ़ से भी तकनीकी टीम को जांच के लिए कासगंज भेजा गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान अचानक तेजी से नीचे आया और कुछ ही क्षणों बाद खेत में गिर गया। तकनीकी खराबी की आशंका, DGCA करेगी जांच प्रारंभिक तौर पर हादसे की वजह तकनीकी खराबी मानी जा रही है, अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा। DGCA ने घटना की जांच शुरू कर दी है और विमान के तकनीकी रिकॉर्ड, उड़ान से जुड़े डेटा तथा अन्य पहलुओं की जांच की जाएगी।
नई दिल्ली: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। इस विवाद में अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा भी खुलकर सामने आ गई हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर सवाल उठाते हुए मंदिर में चढ़ाए गए सोने, चांदी और नकद दान के हिसाब को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि मंदिर में आए हजारों करोड़ रुपये के दान और बड़ी मात्रा में सोना-चांदी के संबंध में पारदर्शिता नहीं है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है। '3500 करोड़ रुपये के कच्चे दान का हिसाब कहां है?' महुआ मोइत्रा ने कहा कि वर्ष 2020 में ऑडिट के दौरान यह चिंता जताई गई थी कि मंदिर में आने वाले "रॉ डोनेशन" (बिना रसीद वाले दान) का व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक करीब 3,500 करोड़ रुपये का ऐसा दान आया, जिसका पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक नहीं किया गया। उनके मुताबिक, श्रद्धालुओं को यह जानने का अधिकार है कि उनके द्वारा दिया गया दान किस प्रकार सुरक्षित रखा गया और उसका उपयोग कैसे किया गया। 1250 किलो सोना और 70 किलो चांदी को लेकर उठाए सवाल टीएमसी सांसद ने दावा किया कि मंदिर में चढ़ाए गए 1,250 किलो सोने, 70 किलो चांदी और लगभग 200 करोड़ रुपये नकद दान के संबंध में स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सिंधी समुदाय द्वारा दान की गई एक-एक किलो वजन वाली 200 चांदी की ईंटों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने पूछा कि इन बहुमूल्य दानों का वर्तमान विवरण क्या है। 'सिर्फ कर्मचारियों की गिरफ्तारी से जवाबदेही खत्म नहीं होती' महुआ मोइत्रा ने इस मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की कार्रवाई और अब तक हुई गिरफ्तारियों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि केवल कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी से पूरे मामले की जवाबदेही तय नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, तो पूरे प्रशासनिक ढांचे की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। योगी सरकार और केंद्र पर भी साधा निशाना महुआ मोइत्रा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने इस मामले का राजनीतिकरण नहीं करने की अपील की थी। टीएमसी सांसद ने कहा कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है और ऐसे में दान की पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सवाल उठाना राजनीतिक नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का विषय है। जांच जारी, ट्रस्ट ने आरोपों से किया इनकार इस बीच, कथित अनियमितताओं के मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है। मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और नकदी भी बरामद होने का दावा किया गया है। वहीं, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहले भी कहा है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई चांदी की ईंटें, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा उनके रखरखाव और रिकॉर्ड की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं। ऐसे में दान में कथित गड़बड़ी और उससे जुड़े सभी आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।