काराकास: वेनेजुएला के ला गुआरा प्रांत में आए विनाशकारी भूकंप के बाद राहत और बचाव कार्य अभूतपूर्व परिस्थितियों में चल रहा है। अस्पतालों के क्षतिग्रस्त होने और मरीजों की भारी संख्या के कारण अब मैकडॉनल्ड्स के रेस्टोरेंट, बस टर्मिनल और अन्य सार्वजनिक स्थान अस्थायी अस्पतालों में बदल दिए गए हैं। 7.2 और 7.5 तीव्रता के लगातार आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, 2,600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12,600 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मैकडॉनल्ड्स बना फील्ड हॉस्पिटल ला गुआरा के काराबालेदा इलाके में स्थित एक मैकडॉनल्ड्स रेस्टोरेंट अब फील्ड हॉस्पिटल के रूप में काम कर रहा है। जहां कभी बर्गर और फ्रेंच फ्राइज परोसे जाते थे, वहां अब मरीजों का इलाज किया जा रहा है। रेस्टोरेंट की छत से आईवी फ्लूइड की बोतलें लटकाई गई हैं और फूड काउंटर पर दवाइयां तथा मेडिकल सामग्री रखी गई है। वहीं, भोजन के रूप में लोगों को दान में मिली अरेपास (वेनेजुएला की पारंपरिक रोटी) और सैंडविच वितरित किए जा रहे हैं। 33 वर्षीय वालंटियर सर्जन कार्लीज फिगुएरा ने बताया कि यहां 30 से अधिक डॉक्टर लगातार घायलों का इलाज कर रहे हैं। उनके अनुसार, अधिकांश मरीज हाई ब्लड प्रेशर, घबराहट, डायरिया और अन्य आपात स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। बस टर्मिनल में चल रहा इलाज कैटिया ला मार बस टर्मिनल को भी अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र में बदल दिया गया है, जहां अब तक करीब 4,000 मरीजों का उपचार किया जा चुका है। यहां निजी सहयोग से जुटाए गए मेडिकल उपकरणों के सहारे डॉक्टर लगातार इलाज में जुटे हैं। 16 घंटे मलबे में फंसा रहा 13 वर्षीय बच्चा 13 वर्षीय इवरसन मदीना भूकंप के बाद अपने घर के मलबे में करीब 16 घंटे तक फंसा रहा। उसे गंभीर चोटों के साथ बाहर निकाला गया। इवरसन ने बताया, "मुझे लगा था कि मैं कभी बाहर नहीं निकल पाऊंगा। जब दमकलकर्मी पहुंचे, तब उम्मीद जगी।" इस हादसे में उसने अपनी दादी और एक रिश्तेदार को अपनी आंखों के सामने खो दिया। डॉक्टरों ने सुनाई भयावह तस्वीर डॉक्टर मारिया जोस पिनो, जिन्होंने स्वयं इस भूकंप का सामना किया, बताती हैं कि सड़कों पर हर तरफ तबाही का मंजर था। उनके अनुसार, "सड़कों पर शव पड़े थे, मुर्दाघरों में जगह नहीं बची थी और कई शवों का अंतिम संस्कार तक समय पर नहीं हो पा रहा था।" पैर में चोट होने के बावजूद वह लगातार राहत कार्य में जुटी हुई हैं। महामारी का खतरा बढ़ा भूकंप में 150 से अधिक बहुमंजिला इमारतें पूरी तरह ढह चुकी हैं। हजारों लोग राहत शिविरों और अस्थायी आश्रयों में रह रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चेतावनी दी है कि भीड़भाड़ वाले शिविरों में अब संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। डॉ. एंटोनियो ओलाइज़ोला के अनुसार, राहत शिविरों में डायरिया, पेचिश, पेट संक्रमण और उल्टी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। उनका कहना है कि अब भूकंप के बाद महामारी को रोकना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। राहत अभियान जारी स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्यकर्मी और स्वयंसेवी संगठन लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं। हालांकि भारी तबाही और सीमित संसाधनों के कारण प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं पर भारी दबाव बना हुआ है।
काराकास: वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के आठ दिन बाद एक ऐसा रेस्क्यू ऑपरेशन सफल हुआ, जिसे राहतकर्मी किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं। ला गुएरा स्थित एक शॉपिंग मॉल के मलबे में दबे सिक्योरिटी गार्ड हर्नान अल्बर्टो गिल फ्लोरेस को करीब 70 घंटे तक चले जटिल अभियान के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस अभियान में आठ देशों के बचावकर्मियों और विशेषज्ञों ने मिलकर हिस्सा लिया। 29 फीट मलबे के नीचे फंसे थे गार्ड सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, हर्नान अल्बर्टो गिल फ्लोरेस ला गुएरा के गैलेरियास प्लाया ग्रांडे शॉपिंग मॉल में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में कार्यरत थे। भूकंप के दौरान पार्किंग क्षेत्र का एक हिस्सा ढह गया, जिससे वह करीब 29 फीट गहरे मलबे के नीचे दब गए। रविवार को राहत एजेंसियों को सूचना मिली कि मलबे के नीचे किसी व्यक्ति के जीवित होने की संभावना है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बचाव दलों ने संयुक्त अभियान शुरू किया। रडार और साउंड डिटेक्शन से मिली जिंदगी की उम्मीद कोस्टा रिका रेड क्रॉस के अनुसार, रेस्क्यू टीमों ने रडार, सोनार और साउंड डिटेक्शन उपकरणों की मदद से मलबे के नीचे जीवन के संकेतों की पुष्टि की। इसके बाद विशेषज्ञों ने बेहद सावधानी से मलबे के बीच सुरक्षित रास्ता बनाया। बचाव अभियान के दौरान राहतकर्मी एक छोटे से छेद के जरिए गिल तक भोजन, पानी, दवाइयां और आवश्यक लाइफ सपोर्ट सामग्री पहुंचाते रहे। 70 घंटे तक चला चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन चिली फायर ब्रिगेड सहित कई देशों की टीमों ने लगातार तीन दिनों तक अभियान चलाया। मलबा लगातार खिसकने का खतरा बना हुआ था, जिससे ऑपरेशन और भी कठिन हो गया। रेस्क्यू के दौरान जारी एक वीडियो में मलबे के बीच से गिल की उंगलियां हिलती हुई दिखाई दीं। बाद में उनका सिर और कंधा मलबे से बाहर निकालने में सफलता मिली और उन्हें सुरक्षित एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में स्थिर है हालत वेनेजुएला रेड क्रॉस के पैरामेडिक लुइस रोड्रिगेज के मुताबिक, जब गिल को अस्पताल ले जाया गया, तब वह पूरी तरह होश में थे और उनकी हालत स्थिर थी। फिलहाल उनका इलाज जारी है। पत्नी ने कहा- वह एक हीरो की तरह डटे रहे गिल की पत्नी गुसविमार गोंजालेस ने कहा कि उन्हें लगा था कि उनके पति अब जीवित नहीं होंगे। लेकिन उनके सुरक्षित बाहर आने की खबर ने पूरे परिवार को नई उम्मीद दी। उन्होंने कहा, "उन्होंने एक हीरो की तरह हार नहीं मानी और आखिरकार जिंदगी की इस लड़ाई को जीत लिया।" संयुक्त राष्ट्र ने बताया 'चमत्कार' संयुक्त राष्ट्र की आपदा मूल्यांकन एवं समन्वय टीम (UNDAC) के सदस्य सेबेस्टियन मोकोरक्वेर ने कहा कि आठ दिन तक मलबे में जीवित रहना असाधारण घटना है। उन्होंने कहा कि इतनी लंबी अवधि तक सीमित संसाधनों के बीच किसी व्यक्ति का जीवित बचना वास्तव में चमत्कार जैसा है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मिली सफलता इस रेस्क्यू अभियान में वेनेजुएला के अलावा चिली, कोस्टा रिका और अन्य देशों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। राहत एजेंसियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय समन्वय और लगातार प्रयासों की बदौलत यह अभियान सफल हो सका। वेनेजुएला में भूकंप के बाद राहत एवं बचाव कार्य अभी भी जारी है और कई प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने का काम लगातार किया जा रहा है।
काराकास: दक्षिण अमेरिकी देश Venezuela में आए भीषण भूकंपों के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार अब तक 1,943 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 58,870 से अधिक इमारतें क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि मलबा हटाने का कार्य जारी होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। हजारों मौतों की आशंका अमेरिकी United States Geological Survey के आकलन के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में वास्तविक नुकसान और मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। संयुक्त राष्ट्र के वेनेजुएला स्थित मानवीय समन्वयक Gianluca Rampolla ने बताया कि संभावित बढ़ती मृत्यु संख्या को देखते हुए सरकार और संयुक्त राष्ट्र लगभग 10,000 बॉडी बैग की व्यवस्था करने की तैयारी कर रहे हैं। राहत कार्यों में संसाधनों की कमी भूकंप से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक La Guaira में राहत अभियान जारी है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार कई स्थानों पर ईंधन और भारी मशीनों की कमी के कारण मलबा हटाने का काम प्रभावित हो रहा है। भारत का 'ऑपरेशन अमिस्ताद' भारत ने प्रभावित लोगों की सहायता के लिए ऑपरेशन अमिस्ताद (Operation Amistad) के तहत चिकित्सा सहायता अभियान शुरू किया है। भारतीय मेडिकल टीमें प्रभावित इलाकों में घायलों का उपचार कर रही हैं और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। S. Jaishankar ने डॉक्टर्स डे के अवसर पर वेनेजुएला में तैनात भारतीय चिकित्सा दलों की सराहना करते हुए उनके मानवीय योगदान को प्रेरणादायक बताया। विदेश मंत्रालय ने साझा किए राहत कार्य Ministry of External Affairs के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें साझा कीं, जिनमें भारतीय फील्ड हॉस्पिटल की टीमें प्रभावित लोगों को चिकित्सा सहायता देती दिखाई दे रही हैं। साझा किए गए वीडियो में स्थानीय नागरिकों ने भी भारतीय मेडिकल टीमों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन समय में भारत की सहायता उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रही है। नासा का आकलन NASA के शोधकर्ताओं के अनुसार, हालिया दोहरे भूकंपों से वेनेजुएला के मध्य और उत्तरी हिस्सों में करीब 58,870 इमारतें क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। राहत एजेंसियां अभी भी खोज एवं बचाव, चिकित्सा सहायता और पुनर्वास कार्यों में जुटी हुई हैं, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में हालात सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।
कराकास, एजेंसियां। वेनेजुएला में 24 जून को आए दो शक्तिशाली भूकंपों के बाद हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, 50 हजार से अधिक लोग अब भी लापता हैं, जबकि राहत और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में लगातार अभियान चला रहे हैं। मृतकों की संख्या 1,400 के पार ताजा आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भूकंप में 1,400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं। पहले मृतकों की संख्या 920 बताई गई थी, लेकिन लगातार चल रहे राहत कार्यों के दौरान यह आंकड़ा बढ़ता गया। प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में इमारतें ढह गई हैं और कई सड़कें तथा संचार सेवाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। मलबे में जारी है खोज अभियान राहतकर्मी, सेना और स्थानीय स्वयंसेवक राजधानी कराकास और ला गुआइरा सहित सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाकर जीवित लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई स्थानों पर भारी मशीनों की कमी के कारण बचाव कार्य धीमा पड़ा है, जबकि विदेशी राहत दल भी अभियान में शामिल हो चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय मदद पहुंचनी शुरू संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, यूरोपीय देशों और कई लैटिन अमेरिकी देशों ने राहत सामग्री, मेडिकल टीम और खोज एवं बचाव विशेषज्ञ वेनेजुएला भेजे हैं। मानवीय संगठनों का कहना है कि लाखों लोग भोजन, पेयजल, दवाइयों और अस्थायी आश्रय की जरूरत से जूझ रहे हैं। आफ्टरशॉक से बढ़ी चिंता भूकंप के बाद लगातार आ रहे हल्के झटकों (आफ्टरशॉक) के कारण लोगों में दहशत बनी हुई है। प्रशासन ने नागरिकों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने और राहत एजेंसियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि लापता लोगों की वास्तविक संख्या में बदलाव हो सकता है, क्योंकि राहत अभियान आगे बढ़ने के साथ कई लोगों का पता लगाया जा रहा है।
India Operation Amistad Venezuela: वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने बड़ा मानवीय राहत अभियान शुरू किया है। ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ के तहत भारतीय वायुसेना के दो C-17 विमान 35 टन से अधिक राहत सामग्री, दवाइयां, मेडिकल उपकरण और सेना की विशेष मेडिकल टीम लेकर वेनेजुएला के लिए रवाना हुए हैं। भारत ने शुरू किया ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप के बाद भारत ने त्वरित मानवीय सहायता मिशन शुरू किया है, जिसे ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ नाम दिया गया है। स्पेनिश भाषा में Amistad का अर्थ ‘दोस्ती’ होता है। यह नाम भारत और वेनेजुएला के बीच सहयोग और मानवीय संबंधों को दर्शाता है। C-17 विमानों से भेजी गई राहत सामग्री भारतीय वायुसेना के दो C-17 ग्लोबमास्टर विमान हिंडन एयरबेस से वेनेजुएला के लिए रवाना हुए। इनमें शामिल हैं: 35 टन से अधिक राहत सामग्री दवाइयां और चिकित्सा उपकरण आपातकालीन राहत सामग्री दो BHISHM क्यूब्स (पोर्टेबल मोबाइल अस्पताल) जयशंकर ने दी जानकारी विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक्स पर लिखा: “ऑपरेशन अमिस्ताद जारी है। भारतीय वायुसेना के दो C-17 विमान वेनेजुएला के लिए रवाना हुए हैं। इनमें भूकंप राहत के लिए जरूरी सहायता, भारतीय सेना की फील्ड हॉस्पिटल यूनिट और 35 टन से अधिक राहत सामग्री शामिल है।” क्या हैं BHISHM क्यूब्स? BHISHM (भारत हेल्थ इनिशिएटिव फॉर सहयोग, हित और मैत्री) क्यूब्स भारत की स्वदेशी तकनीक से विकसित पोर्टेबल मोबाइल अस्पताल हैं। इन्हें युद्ध, भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं में ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर तेजी से चिकित्सा सहायता पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। मरून कैप में रवाना हुए भारतीय जवान भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल यूनिट से 41 सदस्यीय मेडिकल दल वेनेजुएला भेजा गया है। इसमें 9 मेडिकल अधिकारी शामिल हैं। यह टीम मरून बेरेट (Maroon Cap) में रवाना हुई, जो भारतीय सेना की एयरबोर्न और विशेष बलों की पहचान मानी जाती है। वेनेजुएला में तबाही का मंजर बुधवार को वेनेजुएला में 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप आए। इन्हें देश में एक सदी के सबसे बड़े भूकंपों में गिना जा रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान काराकस और ला ग्वायरा में हुआ, जहां कई इमारतें ढह गईं और हजारों लोग बेघर हो गए। मौत और घायल आंकड़ा संख्या मृतक 235+ घायल 1500+ लापता हजारों आपात स्थिति घोषित वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने देश में पूर्ण आपात स्थिति घोषित कर दी है। सरकार ने पुनर्निर्माण के लिए शुरुआती तौर पर 20 करोड़ डॉलर के फंड की घोषणा की है। दुनिया भर से मिल रही मदद भारत के अलावा अमेरिका, ब्राजील, अर्जेंटीना, चिली, मैक्सिको और बोलीविया समेत कई देशों ने भी वेनेजुएला को राहत सहायता देने की घोषणा की है।
काराकस: वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंपों के बाद हालात अब भी सामान्य नहीं हो पाए हैं। बुधवार को आए दो भीषण भूकंपों से हुई तबाही के बीच शुक्रवार को देश के उत्तरी तट के पास एक और भूकंप दर्ज किया गया। इस नए झटके से किसी बड़े नुकसान की तत्काल सूचना नहीं मिली है, लेकिन पहले से प्रभावित इलाकों में लोगों के बीच दहशत का माहौल बना हुआ है। फिर महसूस हुए भूकंप के झटके यूरोपीय-भूमध्यसागरीय भूकंप विज्ञान केंद्र (EMSC) के अनुसार, शुक्रवार दोपहर उत्तरी वेनेजुएला में 4.9 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके झटके राजधानी काराकस, मराकाय और आसपास के कई इलाकों में महसूस किए गए। राहत की बात यह रही कि इस बार किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना सामने नहीं आई। वहीं, अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण (USGS) ने भी 4.7 तीव्रता के एक अन्य भूकंप की पुष्टि की। एजेंसी के मुताबिक, इसका केंद्र एल लिमोन से लगभग 54 किलोमीटर उत्तर में था और इसकी गहराई करीब 10 किलोमीटर दर्ज की गई। विशेषज्ञ इसे हाल ही में आए बड़े भूकंपों का आफ्टरशॉक मान रहे हैं। दो बड़े भूकंपों में 920 लोगों की मौत बुधवार को वेनेजुएला में कुछ ही सेकंड के अंतराल पर 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप आए थे। इन्हें देश में पिछले एक सदी से अधिक समय में आए सबसे विनाशकारी भूकंपों में गिना जा रहा है। इन भूकंपों से सबसे अधिक तबाही ला ग्वाइरा, काराकस और उत्तरी तटीय राज्यों में हुई। कई बहुमंजिला इमारतें ढह गईं, सड़कें और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। वेनेजुएला की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिग्ज के अनुसार, अब तक 920 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 3,360 से अधिक लोग घायल हुए हैं। 50 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता अधिकारियों के अनुसार, करीब 50 हजार लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। कई इलाकों में भारी मशीनों और खोजी कुत्तों की मदद से अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन को आशंका है कि मलबे से और शव मिलने के साथ मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच रही मदद भीषण आपदा के बाद कई देशों ने वेनेजुएला की सहायता के लिए राहत सामग्री और विशेषज्ञ टीमें भेजी हैं। अमेरिका, भारत, मैक्सिको, स्पेन, जर्मनी, स्विट्जरलैंड और कोलंबिया से मेडिकल टीमें, खोज एवं बचाव दल, प्रशिक्षित खोजी कुत्ते, अस्थायी अस्पताल और आपातकालीन राहत सामग्री प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच रही है। भारत ने भी मानवीय सहायता के तहत दो C-130 विमान भेजे हैं, जिनमें करीब 35 टन राहत सामग्री पहुंचाई गई है। इसके साथ 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल की 41 सदस्यीय मेडिकल टीम, जिसमें 9 डॉक्टर शामिल हैं, राहत कार्यों के लिए रवाना हुई है। भारत ने दो BHISHMA पोर्टेबल हॉस्पिटल भी सहायता मिशन में भेजे हैं। राहत अभियान सबसे बड़ी प्राथमिकता वेनेजुएला सरकार के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, घायलों का इलाज करना और लाखों प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाना है। लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स के कारण बचाव कार्यों में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की है।
Venezuela Earthquake: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक 235 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। राहत एजेंसियों का कहना है कि हजारों लोग अब भी लापता हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। वेनेजुएला के स्वास्थ्य मंत्री कार्लोस अल्वाराडो ने सरकारी मीडिया से बातचीत में बताया कि अस्पतालों में अब तक 235 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। उन्होंने कहा कि कई घायलों की हालत गंभीर है और लापता लोगों की तलाश जारी रहने के कारण स्थिति लगातार बदल रही है। एक सदी के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में शामिल बुधवार शाम आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के लगातार दो भूकंपों को वेनेजुएला के इतिहास के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में गिना जा रहा है। तेज झटकों से कई शहरों में इमारतें ढह गईं, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और हजारों लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। भूकंप का असर पड़ोसी देशों तक महसूस किया गया। ब्राजील के अमेजन क्षेत्र में भी एहतियात के तौर पर कई इमारतों
Venezuela Earthquake: वेनेजुएला में बुधवार को आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंपों ने भारी तबाही मचा दी है। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने गुरुवार को पुष्टि करते हुए बताया कि अब तक कम से कम 164 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 971 लोग घायल हुए हैं। सरकार का कहना है कि राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है और मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है। 30 आफ्टरशॉक्स से बढ़ी मुश्किलें डेल्सी रोड्रिगेज ने बताया कि शुरुआती दो बड़े भूकंपों के बाद अब तक करीब 30 आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए हैं। सबसे अधिक नुकसान पहले आए दो तेज झटकों से हुआ। कई रिहायशी और व्यावसायिक इमारतें पूरी तरह ढह गई हैं, जबकि अनेक भवन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। राहत एजेंसियों की टीमें लगातार मलबा हटाकर फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं। अधिकारियों के अनुसार, कई इलाकों में बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र और IMF से मांगी मदद सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यवाहक राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सरकार राहत और बचाव अभियान को तेज करने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में भेजे जा सकें। उन्होंने यह भी बताया कि पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए लगभग 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर के शुरुआती सहायता पैकेज को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से भी बातचीत की जा रही है। ला गुएरा सबसे अधिक प्रभावित सरकार के अनुसार, ला गुएरा प्रांत इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। यहां बड़ी संख्या में इमारतें ढह गई हैं और कई इलाकों में सड़क व संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे राहत कार्यों में कठिनाई आ रही है। भूकंप के झटके इतने शक्तिशाली थे कि पड़ोसी देशों तक महसूस किए गए। ब्राजील के अमेजन क्षेत्र में एहतियात के तौर पर कई इमारतों को खाली कराया गया। मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी बचाव दल क्षतिग्रस्त इमारतों में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाएं, राहत सामग्री और अस्थायी शिविरों की व्यवस्था शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी प्रभावित क्षेत्रों की पूरी तरह जांच नहीं हो जाती, तब तक मृतकों की अंतिम संख्या बताना संभव नहीं होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेनेजुएला में आई इस विनाशकारी आपदा पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी संदेश में उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के साथ खड़ा है और हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की। अमेरिका ने भेजी मानवीय सहायता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने घोषणा की है कि अमेरिका वेनेजुएला के लिए तत्काल खोज एवं बचाव दल, चिकित्सा संसाधन और मानवीय सहायता भेज रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी एजेंसियां स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत कार्यों में सहयोग कर रही हैं। जापान में भी आया 7.2 तीव्रता का भूकंप इसी बीच गुरुवार को जापान के उत्तरी तट के पास भी 7.2 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। हालांकि जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने स्पष्ट किया कि इस भूकंप के बाद सुनामी का कोई खतरा नहीं है। भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 50 किलोमीटर की गहराई में था। इसके झटके पूर्वोत्तर जापान के कई इलाकों के साथ राजधानी टोक्यो में भी महसूस किए गए। जापान में फिलहाल बड़े नुकसान की सूचना नहीं जापान सरकार के शीर्ष प्रवक्ता मिनोरू किहारा ने बताया कि अब तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि सरकार की आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत कार्य शुरू किए जाएंगे।
कराकास: वेनेजुएला के उत्तर-मध्य क्षेत्र में गुरुवार तड़के आए 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने लोगों में दहशत फैला दी। भूकंप के झटके राजधानी कराकास समेत देश के कई हिस्सों में महसूस किए गए, जबकि पड़ोसी देश Colombia में भी कंपन दर्ज किया गया। तेज झटकों के बाद लोग घरों, कार्यालयों और अन्य इमारतों से बाहर निकल आए, जिससे कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कम गहराई में था भूकंप का केंद्र अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण United States Geological Survey के अनुसार, भूकंप की तीव्रता 7.1 मापी गई। इसका केंद्र वेनेजुएला के मोंटालबान क्षेत्र में जमीन से करीब 13 किलोमीटर की कम गहराई पर स्थित था। कम गहराई के कारण सतह पर झटके अधिक तीव्रता से महसूस किए गए और कई इमारतों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आईं। राजधानी कराकास में दिखा असर भूकंप का सबसे ज्यादा असर राजधानी Caracas में देखने को मिला। कई इमारतों की दीवारों में दरारें पड़ गईं, जबकि कुछ भवनों के प्रवेश द्वारों पर लगे कांच टूट गए। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में लोग घबराकर इमारतों से बाहर निकलते दिखाई दे रहे हैं। कुछ फुटेज में निवासियों को भूकंप के बाद अपने घरों और कार्यालयों से जरूरी सामान निकालते हुए भी देखा गया। सुनामी का अलर्ट जारी, फिर हटाया गया भूकंप के बाद अमेरिकी सुनामी चेतावनी प्रणाली ने एहतियात के तौर पर Puerto Rico, अमेरिकी और ब्रिटिश वर्जिन द्वीप समूह के लिए सुनामी अलर्ट जारी किया था। इसके अलावा वेनेजुएला के तट के निकट स्थित Aruba, Curaçao और Bonaire में भी ऊंची और खतरनाक लहरों की आशंका जताई गई थी। बाद में विशेषज्ञों द्वारा स्थिति का आकलन किए जाने के बाद चेतावनी वापस ले ली गई और सुनामी का खतरा टल गया। वैज्ञानिकों ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं अमेरिकी सुनामी अलर्ट सर्विस ने स्पष्ट किया कि भूकंप के बाद समुद्र में ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी, जिससे विनाशकारी सुनामी उत्पन्न हो सके। वैज्ञानिकों ने भूकंप के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद कहा कि फिलहाल लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है और स्थिति नियंत्रण में है। नुकसान का आकलन जारी स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन कर रही हैं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, कुछ इमारतों को संरचनात्मक क्षति पहुंची है, लेकिन बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की कोई आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। अधिकारियों ने नागरिकों से सतर्क रहने, क्षतिग्रस्त भवनों में प्रवेश न करने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
नई दिल्ली/काराकस: वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने दुख और संवेदना व्यक्त की है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने आपदा में जान गंवाने वालों के प्रति शोक जताते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के साथ मजबूती से खड़ा है और जरूरत पड़ने पर हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है। वेनेजुएला में आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने राजधानी काराकस समेत कई शहरों में भारी तबाही मचाई है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार हजारों इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जबकि कई क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। पीएम मोदी ने जताई संवेदना प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी संदेश में कहा कि भारत सरकार और देशवासियों की ओर से वेनेजुएला के लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की जाती है। उन्होंने लिखा, "भारत की ओर से मैं वेनेजुएला सरकार और वहां के लोगों, विशेष रूप से उन परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं जिन्होंने इस त्रासदी में अपने प्रियजनों को खो दिया है। हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं और इस कठिन समय में सभी प्रभावित लोगों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। भारत हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है।" वेनेजुएला में आपातकाल घोषित भूकंप के बाद वेनेजुएला सरकार ने कई प्रभावित क्षेत्रों में आपातकाल घोषित कर दिया है। कार्यवाहक राष्ट्रपति Delcy Rodríguez ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए आपदा में जान-माल के नुकसान की पुष्टि की और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार निगरानी कर रही है और प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन संसाधन भेजे जा रहे हैं। उन्होंने मृतकों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं की। हजारों मौतों की आशंका विशेषज्ञ एजेंसियों के प्रारंभिक आकलन के अनुसार भूकंप का असर बेहद व्यापक हो सकता है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने चेतावनी दी है कि इस आपदा में भारी जनहानि और बड़े पैमाने पर संपत्ति का नुकसान होने की आशंका है। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक मृतकों की संख्या हजारों में पहुंच सकती है। राहत-बचाव अभियान जारी काराकस और अन्य प्रभावित शहरों में आपातकालीन दल, सेना और बचाव एजेंसियां मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। कई इलाकों में संचार और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई है, जिससे राहत कार्यों में चुनौतियां सामने आ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से भी वेनेजुएला को सहायता और समर्थन के संदेश मिल रहे हैं। भारत सहित कई देशों ने जरूरत पड़ने पर मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की पेशकश की है।
वेनेजुएला, एजेंसियां। वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद पूरी दुनिया से संवेदनाएं और सहायता के प्रस्ताव सामने आ रहे हैं। भारत ने भी इस आपदा पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए वेनेजुएला की सरकार और वहां के लोगों को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिलाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूकंप में जान गंवाने वालों के प्रति शोक व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों के साथ एकजुटता जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा कि वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप से हुई तबाही से वह अत्यंत दुखी हैं। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। साथ ही कहा कि इस कठिन समय में भारत वेनेजुएला के साथ खड़ा है और हरसंभव मदद देने के लिए तैयार है। दो शक्तिशाली भूकंपों से मची तबाही जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम वेनेजुएला में लगातार दो शक्तिशाली भूकंप आए। पहला झटका रिक्टर पैमाने पर 7.2 तीव्रता का था, जबकि लगभग 39 सेकंड बाद दूसरा और अधिक शक्तिशाली 7.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप का केंद्र कैरेबियाई तट के पास मोरोन क्षेत्र में था। झटकों का असर राजधानी कराकास समेत देश के कई हिस्सों में महसूस किया गया और कंपन लगभग 1,700 किलोमीटर दूर ब्राजील के अमेजन क्षेत्र तक पहुंचा। एयरपोर्ट बंद, आपातकाल लागू भूकंप के बाद कई इमारतों, मकानों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें हैं। देश के प्रमुख सिमोन बोलिवार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी क्षति पहुंची है, जिसके चलते उसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। हालात को देखते हुए सरकार ने देश में आपातकाल लागू कर दिया है और सभी आपात सेवाओं को सक्रिय कर दिया गया है। वैश्विक समर्थन की लहर वेनेजुएला की इस त्रासदी पर दुनिया के कई देशों और नेताओं ने समर्थन जताया है। विभिन्न देशों ने राहत और बचाव कार्यों में सहयोग की पेशकश की है। अधिकारियों के अनुसार, नुकसान का आकलन जारी है और मृतकों की संख्या हजारों तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।