Voter List Update

SIR Deadline
29 जुलाई यानी आज तक चलेगा SIR सत्यापन अभियान

रांची। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का अभियान 30 जून से शुरू हो रहा है। इस दौरान बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) 29 जुलाई तक घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे और उन्हें गणना प्रपत्र उपलब्ध कराएंगे। मतदाताओं को केवल इस प्रपत्र को सही ढंग से भरकर उस पर हस्ताक्षर कर बीएलओ को लौटाना होगा। इस चरण में किसी भी प्रकार का दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि हस्ताक्षरित गणना प्रपत्र समय पर जमा नहीं किया गया, तो संबंधित व्यक्ति का नाम प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं होगा। बीएलओ प्रपत्र लेने के लिए कम से कम तीन बार घर पहुंचेंगे।   1 अक्टूबर तक 18 वर्ष पूरे करने वाले बन सकेंगे मतदाता चुनाव आयोग ने इस पुनरीक्षण के लिए 1 अक्टूबर 2026 को अर्हता तिथि निर्धारित की है। यानी इस तिथि तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा नए मतदाता के रूप में पंजीकरण करा सकेंगे। नए मतदाताओं को गणना चरण या दावा-आपत्ति अवधि के दौरान फॉर्म-6 भरकर आवश्यक दस्तावेजों और घोषणा-पत्र के साथ जमा करना होगा। वहीं, दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में नाम स्थानांतरित कराने वाले मतदाताओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म-8 भरना होगा।   5 अगस्त को प्रारूप सूची, 7 अक्टूबर को अंतिम प्रकाशन विशेष पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और अद्यतन बनाना है, ताकि कोई पात्र मतदाता छूटे नहीं और अपात्र व्यक्तियों के नाम सूची में शामिल न रहें। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 5 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होगी, जिस पर 4 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। इनके निस्तारण के बाद 7 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।   आयोग ने स्पष्ट किया है कि मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित, एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत अथवा विदेशी नागरिकता प्राप्त कर चुके लोगों के नाम भी जांच के बाद मतदाता सूची से हटाए जाएंगे, जिससे सूची अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बन सके।

anjali kumari जून 29, 2026 0
Voter List Mapping
SIR: मतदाता सूची में मैपिंग के लिए 13 व 14 को सभी बूथों पर लगेगा विशेष कैंप

रांची। मतदाता सूची को सटीक बनाने के लिए 13 और 14 जून को सभी बूथों पर विशेष कैंप लगेगा। इस दौरान वोटर्स की मैपिंग की जायेगी। रांची के मतदाताओं की सुविधा के लिए जिला प्रशासन की ओर से एक बार फिर 'विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम' के तहत विशेष कैंप का आयोजन किया जाएगा। डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने जिले के सभी मतदान केंद्रों (बूथों) पर 13 और 14 जून को दो दिवसीय विशेष कैंप लगाने का निर्देश दिया है। सुबह 8 से दोपहर 4 बजे तक तैनात रहेंगी बीएलओ इस विशेष अभियान के तहत सभी बूथों पर सुबह 8:00 बजे से दोपहर 4:00 बजे तक बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) मतदाता सूची के साथ उपस्थित रहेंगी। हालांकि, जो बीएलओ जनगणना कार्य में भी लगी हुई हैं, वे दोपहर 1:00 बजे तक ही कैंप में मौजूद रहेंगी। मतदाताओं और उनके परिवार की होगी मैपिंग डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने बताया कि मतदाता सूची को पूरी तरह सटीक, त्रुटिहीन और अप-टू-डेट (अद्यतन) करने के लिए यह महाअभियान चलाया जा रहा है। कैंप के दौरान मतदाताओं के निवास, पहचान एवं अन्य आवश्यक जानकारियों का भौतिक सत्यापन (वेरिफिकेशन) किया जाएगा।   कागजात लाना अनिवार्य   जिन मतदाताओं ने अभी तक अपनी और अपने परिवार की मैपिंग नहीं कराई है, वे इस कैंप में जाकर इसे पूरा करा सकते हैं। इसके लिए मतदाताओं को बीएलओ द्वारा मांगे गए आवश्यक दस्तावेजों (पहचान और पते का प्रमाण) के साथ अपने-अपने मतदान केंद्र पर पहुंचना होगा। 15 जून तक चलेगी मैपिंग की प्रक्रिया इधर, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि राज्य में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (रिवीजन) से पूर्व मतदाताओं की मैपिंग की यह प्रक्रिया 15 जून तक जारी रहेगी। इसके बाद अगले चरण में इन्यूमरेशन फॉर्म (Enumeration Form) की छपाई और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के ट्रेनिंग (प्रशिक्षण) का कार्य शुरू किया जाएगा।

anjali kumari जून 12, 2026 0
Voter Mapping
झारखंड में वोटर मैपिंग पर चुनाव आयोग सख्त, जिलों को मिले जल्द पूरा करने का निर्देश

रांची। झारखंड में मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से पहले चल रहे वोटर मैपिंग अभियान को लेकर चुनाव आयोग ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) के. रवि कुमार ने सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ ऑनलाइन समीक्षा बैठक कर वोटर मैपिंग की प्रगति का आकलन किया और कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्यभर में मतदाताओं की मैपिंग का कार्य हर हाल में 15 जून तक पूरा किया जाए।   कई जिलों में धीमी गति पर नाराजगी समीक्षा बैठक के दौरान रांची समेत कुछ जिलों में अनमैप्ड मतदाताओं की संख्या अधिक होने और कार्य की धीमी रफ्तार पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी लंबित मामलों की नियमित समीक्षा कर मैपिंग प्रक्रिया को तय समयसीमा के भीतर पूरा करें। के. रवि कुमार ने बताया कि अब तक राज्य के लगभग 76 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है। हालांकि शहरी क्षेत्रों में यह कार्य अपेक्षाकृत धीमा है, जबकि ग्रामीण इलाकों में बेहतर प्रगति दर्ज की गई है।   मैप्ड और अनमैप्ड मतदाताओं के लिए अलग प्रक्रिया मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि जिन मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है, उन्हें विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। वहीं जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो पाएगी, उनका नाम तत्काल मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। ऐसे मतदाताओं को निर्वाचन पंजीकरण पदाधिकारी (ERO) द्वारा नोटिस जारी किया जाएगा, जिसके बाद उन्हें अपनी जन्मतिथि और पारिवारिक पहचान से जुड़े आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। दावे और आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 7 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा।   गलत मैपिंग पर भी होगी कार्रवाई बैठक में अधिकारियों को चेतावनी दी गई कि गलत मैपिंग वाले मामलों को "एनोमली केस" के रूप में चिन्हित किया जाएगा। ऐसे मामलों की सुनवाई ERO द्वारा की जाएगी और संबंधित मतदाताओं को भी अनमैप्ड मतदाताओं की तरह सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होगा। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अनमैप्ड मतदाताओं तक व्यक्तिगत रूप से पहुंचने का प्रयास करें तथा अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट और गैर-नागरिक श्रेणी के मतदाताओं की पहचान भी सुनिश्चित करें।   पात्र नागरिकों को जोड़ना है उद्देश्य के. रवि कुमार ने कहा कि SIR अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे। साथ ही यह भी जरूरी है कि गैर-भारतीय नागरिक इस प्रक्रिया का लाभ न उठा सकें।   उन्होंने निर्देश दिया कि 15 जून तक फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 से संबंधित सभी लंबित मामलों का निपटारा कर शून्य पेंडेंसी सुनिश्चित की जाए। समीक्षा बैठक में राज्य निर्वाचन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा सभी जिलों के निर्वाचन पदाधिकारी ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।

Unknown जून 2, 2026 0
Booth Level Officers conduct door-to-door voter verification campaign in four Indian states
चार राज्यों में घर-घर पहुंचेंगे BLO, 3.68 करोड़ से अधिक मतदाताओं का होगा सत्यापन

निर्वाचन आयोग ने ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के तीसरे चरण के तहत घर-घर सत्यापन अभियान शुरू कर दिया है। इस अभियान के दौरान बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) मतदाताओं के घर जाकर गणना प्रपत्रों का वितरण, संग्रह और सत्यापन करेंगे। आयोग के अनुसार, इस चरण में 3.68 करोड़ से अधिक मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने बताया कि इस विशेष अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और अद्यतन बनाना है, ताकि सभी पात्र नागरिकों के नाम सूची में शामिल किए जा सकें और अपात्र व्यक्तियों के नाम हटाए जा सकें। ओडिशा में सबसे अधिक मतदाता चारों राज्यों में कुल 3.67 करोड़ से अधिक मतदाता हैं। इनमें ओडिशा में सबसे अधिक 3.34 करोड़ मतदाता दर्ज हैं। राज्य में पुनरीक्षण कार्य के लिए 38,123 बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLO) और 8,391 बूथ स्तरीय एजेंटों (BLA) की तैनाती की गई है। वहीं, मिजोरम में 8.75 लाख, सिक्किम में 4.71 लाख और मणिपुर में 20.92 लाख मतदाता इस प्रक्रिया के दायरे में आएंगे। 14 मई से शुरू हुआ था तीसरा चरण निर्वाचन आयोग ने 14 मई से 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में चरणबद्ध तरीके से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का तीसरा चरण शुरू किया था। वर्तमान चरण में मतदाताओं से आवश्यक जानकारी एकत्र की जाएगी। मतदाता अपने भरे हुए गणना प्रपत्र BLO के माध्यम से जमा कर सकते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन माध्यम से भी आवेदन जमा करने की सुविधा उपलब्ध है। आयोग के अनुसार, जिन मतदाताओं के गणना प्रपत्र 28 जून या उससे पहले निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) को प्राप्त हो जाएंगे, उनके नाम मसौदा मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे। समय सीमा चूकने वालों को भी मिलेगा अवसर निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि जो मतदाता निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने प्रपत्र जमा नहीं कर पाएंगे, वे दावा एवं आपत्ति अवधि के दौरान निर्धारित घोषणा-पत्र के साथ फॉर्म-6 भरकर नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकेंगे। मतदाताओं से सहयोग की अपील आयोग ने सभी पात्र नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी और चुनाव अधिकारियों को सहयोग देने की अपील की है। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया से मतदाता सूचियां अधिक समावेशी, अद्यतन और विश्वसनीय बनेंगी। निर्वाचन आयोग ने दोहराया कि पात्रता तिथि पर 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का प्रत्येक भारतीय नागरिक, जो  

surbhi जून 1, 2026 0
election commission update
SIR पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी मुहर, चुनाव आयोग को मिली राहत

नई दिल्ली, एजेंसियां। SC ने वोटर रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बड़ा फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग की प्रक्रिया को पूरी तरह वैध करार दिया है। बुधवार को सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस Surya Kant और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि SIR प्रक्रिया में कोई खामी नहीं है और यह चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है।   चुनाव आयोग को मिली बड़ी राहत अदालत ने स्पष्ट कहा कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने और योग्य मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं, इसलिए चुनाव आयोग द्वारा की जा रही यह प्रक्रिया जरूरी है। अदालत ने यह भी माना कि आयोग किसी व्यक्ति को मतदाता सूची में शामिल करने से इनकार करने का अधिकार रखता है, यदि आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध न हों।   क्या था विवाद? याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि SIR प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के दायरे से बाहर है। विवाद मुख्य रूप से उस नियम को लेकर था, जिसमें जिन मतदाताओं या उनके परिवार का नाम 2002 या 2003 की वोटर सूची में नहीं था, उन्हें अपने पूर्वजों का लिंक साबित करना जरूरी बताया गया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इससे गरीब, प्रवासी और पिछड़े वर्ग के कई वास्तविक मतदाता मतदान अधिकार से वंचित हो सकते हैं, क्योंकि उनके पास पुराने दस्तावेज नहीं हैं।   आधार को भी मिली मान्यता सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता और सुविधा बढ़ाने के लिए आधार कार्ड को अतिरिक्त दस्तावेज के रूप में शामिल करने का निर्देश भी दिया था। चुनाव आयोग ने अदालत में कहा कि इस अभियान का उद्देश्य फर्जी और डुप्लीकेट वोटरों को हटाकर मतदाता सूची को शुद्ध बनाना है। कोर्ट के फैसले के बाद अब SIR प्रक्रिया पूरे देश में जारी रहेगी और चुनाव आयोग को इस अभियान को आगे बढ़ाने की कानूनी मंजूरी मिल गई है।

Unknown मई 27, 2026 0
Voter list update
SIR: जरूरी सूचना-23 मई को बूथ जांच से अपना नाम  2003 की सूची से नहीं मिला, तो कटेगा नाम

रांची। आने वाले चुनाव में मतदाताओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए जिला प्रशासन ने 23 मई को रांची जिले के सभी मतदान केंद्रों पर यूएन-मैप्ड इलेक्टर लिस्ट प्रकाशित करने का फैसला लिया है। अगर आपका नाम पुरानी मतदाता सूची से नई सूची में सही तरीके से मैप नहीं हुआ है, तो आने वाले चुनाव में दिक्कत हो सकती है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने शनिवार 23 मई को रांची जिले के सभी मतदान केंद्रों पर यूएन-मेप्ड इलेक्टोरल लिस्ट प्रकाशित करने का निर्णय लिया है। आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराये यह सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत जारी की जाएगी। इस दौरान जिन मतदाताओं का नाम वर्ष 2003 की एसआईआर मतदाता सूची से अब तक मैप नहीं हो पाया है, वे अपने संबंधित बूथ पर जाकर सूची में नाम जांच सकेंगे और मौके पर मौजूद बीएलओ की मदद से आवश्यक प्रक्रिया पूरी करा सकेंगे। सूची सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक उपलब्ध रहेगी। भविष्य में हो सकती है परेशानी ऐसे मतदाता, जिनका नाम वर्ष 2003 की एसआईआर मतदाता सूची से वर्तमान सूची में सही तरीके से मैप नहीं हो पाया है, उन्हें भविष्य में मतदान के दौरान परेशानी हो सकती है। इसी को देखते हुए यह विशेष व्यवस्था की जा रही है। मतदाता अपने संबंधित मतदान केंद्र पर पहुंच कर सूची में अपना नाम जांच सकेंगे। मौके पर मौजूद बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ जरूरी जानकारी देंगे और जरूरत पड़ने पर प्रक्रिया पूरी कराने में भी मदद करेंगे। नाम जुड़वाने के लिए ये हैं विकल्प 1. एन्यूमरेशन फॉर्म भरना होगा : बीएलओ द्वारा दिया गया फॉर्म सही जानकारी के साथ भरकर जमा करना होगा। पहचान और निवास से जुड़े दस्तावेज देने होंगे। यदि 2003 की सूची में नाम नहीं मिलता है, तो मतदाता को अपने दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें आधार, जन्म प्रमाणपत्र, निवास प्रमाण, स्कूल सर्टिफिकेट या अन्य स्वीकृत दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। 2. माता-पिता के 2003 रिकॉर्ड का उपयोग : अगर खुद का नाम 2003 की सूची में नहीं है, लेकिन माता या पिता का नाम उस सूची में है तो उनके पुराने वोटर रिकॉर्ड का अंश लगाकर प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। ऐसे मामलों में माता-पिता के लिए अलग दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी। 3. दावेदारी का मौका मिलेगा : जिनका डेटा मैप नहीं होगा, उन्हें निर्वाचन पदाधिकारी की ओर से नोटिस दिया जा सकता है। इसके बाद दस्तावेज देकर दावा पेश कर सकते हैं। 4. दावा-आपत्ति अवधि में आवेदन कर सकते हैं : ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद नाम जोड़ने, सुधार कराने या आपत्ति दर्ज करने का अवसर दिया जाता है।   क्यों जरूरी है यह जांच मतदाता सूची में नाम सही तरीके से मैप नहीं होने पर भविष्य में वोट डालने, नाम सत्यापन या चुनाव संबंधी अन्य प्रक्रियाओं में परेशानी आ सकती है। इसलिए जिला प्रशासन ने अपील की है कि लोग इस विशेष अभियान का लाभ उठाकर समय रहते अपना नाम सत्यापित करा लें। क्या करें मतदाता •    23 मई को अपने मतदान केंद्र पर जाएं •    सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक सूची जांचें •    यदि नाम यूएन-मैप्ड इलेक्टोरल लिस्ट में नहीं मिले तो तुरंत बीएलओ से संपर्क करें •    जरूरी जानकारी व दस्तावेज देकर मैपिंग पूरी कराएं •    आधार कार्ड व मतदाता पहचान पत्र लेकर जाएं सभी सातों विस के बूथों पर रहेगी व्यवस्था उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री के निर्देश पर रांची जिले के सभी सात विधानसभा क्षेत्रों - तमाड़ विधानसभा क्षेत्र, सिल्ली विधानसभा क्षेत्र, खिजरी विधानसभा क्षेत्र, रांची विधानसभा क्षेत्र, हटिया विधानसभा क्षेत्र, कांके विधानसभा क्षेत्र और मांडर विधानसभा क्षेत्र के सभी मतदान केंद्रों पर यह व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन ने सभी निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों, सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों तथा बीएलओ को मतदान केंद्रों पर मौजूद रहने का निर्देश दिया है। साथ ही शिक्षा और समाज कल्याण विभाग को भी अपने अधीन कार्यरत बीएलओ एवं पर्यवेक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया है।

Unknown मई 21, 2026 0
झारखंड डिजिटल जनगणना और वोटर लिस्ट अपडेट 2026
झारखंड में SIR पर रोक, वोटर लिस्ट अपडेट से पहले होगी डिजिटल जनगणना

रांची। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया फिलहाल रुक गयी है। अब राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने तय किया है कि पहले डिजिटल जनगणना कराई जाएगी और उसके बाद ही वोटर लिस्ट को अपडेट करने का काम आगे बढ़ेगा। यह निर्णय उन सभी राज्यों पर लागू होगा जहां SIR की प्रक्रिया लंबित है।   1 मई से शुरू होगी डिजिटल जनगणना राज्य में जनगणना की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 1 मई से 15 मई तक सेल्फ एन्यूमरेशन यानी नागरिकों द्वारा स्वयं अपनी जानकारी भरने की प्रक्रिया चलेगी। इसके बाद 16 मई से 14 जून तक हाउस लिस्टिंग का कार्य किया जाएगा। इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी और लोगों को पहली बार ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा मिलेगी।   वोटर मैपिंग में 72% काम पूरा झारखंड में 2003 की मतदाता सूची के आधार पर वर्तमान वोटरों की मैपिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। अब तक लगभग 72 प्रतिशत मतदाताओं का मिलान पूरा हो चुका है। राज्य में कुल 2.65 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से करीब 1.93 करोड़ का डेटा मिलान किया जा चुका है।   28% मतदाता अब भी जांच के दायरे में लगभग 28 प्रतिशत मतदाता ऐसे हैं जिनका विवरण या तो अधूरा है या वे स्थान बदल चुके हैं। इन सभी को आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे ताकि उनकी पहचान की पुष्टि की जा सके और सूची को अपडेट किया जा सके।   6.72 लाख रिकॉर्ड में त्रुटियां जांच के दौरान 6.72 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में गड़बड़ियां सामने आई हैं। इनमें लाखों लोगों की फोटो गलत है और कई नामों में त्रुटियां पाई गई हैं। बूथ लेवल अधिकारी इन सुधारों पर लगातार काम कर रहे हैं।   10 लाख नाम हटने की संभावना अधिकारियों के अनुसार मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं के करीब 10 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकते हैं। साथ ही पात्र नए मतदाताओं को सूची में जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है।

Unknown अप्रैल 18, 2026 0
Election Commission voter list revision process showing removal of names during SIR campaign across India
SIR अभियान: देशभर में 5.58 करोड़ वोटर लिस्ट से बाहर, गुजरात टॉप पर

नई दिल्ली: चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने देश की चुनावी तस्वीर में बड़ा बदलाव ला दिया है। अब तक करीब 5.58 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 9.55% है। यह अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक मतदाता पुनरीक्षण अभियान माना जा रहा है। दूसरे चरण में सबसे ज्यादा नाम हटे SIR के दूसरे चरण में 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया था, जिसकी प्रक्रिया अक्टूबर 2025 से शुरू होकर हाल ही में पूरी हुई। इस चरण में ही करीब 5.37 करोड़ वोटर लिस्ट से हटाए गए, जो लगभग 10.55% के बराबर है। अगर पहले चरण (जिसमें बिहार शामिल था) को भी जोड़ दें, तो कुल मतदाताओं की संख्या 58.87 करोड़ से घटकर 53.28 करोड़ रह गई है। किन राज्यों में चला अभियान दूसरे चरण में जिन प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया, उनमें राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, छत्तीसगढ़, गोवा के साथ-साथ अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, पुड्डुचेरी और लक्षद्वीप शामिल हैं। इन क्षेत्रों में कुल मतदाता संख्या 50.97 करोड़ से घटकर 45.59 करोड़ हो गई है। गुजरात टॉप, यूपी दूसरे नंबर पर नाम कटने के प्रतिशत के हिसाब से गुजरात सबसे ऊपर है, जहां 13.39% वोटर सूची से बाहर हुए। दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश है, जहां 13.23% नाम हटे। तीसरे नंबर पर छत्तीसगढ़ (11.77%) रहा। वहीं, पश्चिम बंगाल में 11.63% और तमिलनाडु में 11.55% नाम हटाए गए। सबसे ज्यादा गिरावट केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में दर्ज हुई, जहां 16.86% मतदाता कम हुए। संख्या के हिसाब से यूपी सबसे आगे हालांकि प्रतिशत के मामले में गुजरात आगे है, लेकिन कुल संख्या के लिहाज से उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा नाम हटे। यहां मतदाता संख्या 15.44 करोड़ से घटकर 13.39 करोड़ रह गई। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आयोग ने राज्य को अतिरिक्त समय भी दिया था। क्यों चलाया गया SIR अभियान चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को यह फैसला लिया था। करीब 20 साल बाद इतनी व्यापक समीक्षा की गई। तेजी से हो रहे शहरीकरण, पलायन और डुप्लीकेट या निष्क्रिय मतदाताओं को हटाने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया गया, ताकि वोटर लिस्ट को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाया जा सके। क्या है SIR की प्रक्रिया सामान्य पुनरीक्षण (SSR) के विपरीत, SIR में पूरी वोटर लिस्ट नए सिरे से तैयार की जाती है। इस बार सभी मतदाताओं को एक तय समय सीमा के भीतर फॉर्म जमा करना अनिवार्य किया गया था। जो लोग ऐसा नहीं कर पाए, उनके नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हट गए। कई मामलों में नागरिकता से जुड़े दस्तावेज भी मांगे गए, जिस पर विवाद हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।  

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
Voter finger with ink mark over West Bengal map highlighting 2026 election voter list decision
West Bengal Chunav 2026: 27 लाख वोटरों का आज होगा फैसला, ‘ग्रीन सिग्नल’ या मायूसी-सप्लीमेंट्री लिस्ट पर टिकी निगाहें

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले आज का दिन राज्य के करीब 27.2 लाख मतदाताओं के लिए बेहद अहम है। ये वे लोग हैं, जिनका नाम ‘अंडर एडजुडिकेशन’ श्रेणी में रखा गया था और जिनका मतदान अधिकार अब चुनाव आयोग की पहली सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट के जरिए तय होगा। दरअसल, ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न’ (SIR) के दौरान राज्य के लगभग 60 लाख मतदाताओं को इस श्रेणी में रखा गया था। यानी इन मतदाताओं के दस्तावेज़ों और पात्रता पर अंतिम निर्णय अभी लंबित था। अब जारी होने वाली पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट से इनमें से करीब आधे लोगों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी कि वे आगामी चुनाव में वोट डाल सकेंगे या नहीं। 8.6% वोटरों का भविष्य अधर में 28 फरवरी को जारी अंतिम मतदाता सूची में राज्य के करीब 7 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 8.6% यानी 60 लाख लोगों की स्थिति स्पष्ट नहीं थी। यही वजह है कि लाखों परिवारों में असमंजस और चिंता का माहौल है। चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, जिन मतदाताओं के दस्तावेज़ों में विसंगतियां पाई गईं या सुनवाई के दौरान संतोषजनक प्रमाण नहीं दिए गए, उन्हें ‘अंडर एडजुडिकेशन’ में रखा गया। तीन चरणों में आएगी सप्लीमेंट्री लिस्ट पहली सूची: 23 मार्च दूसरी सूची: अगले शुक्रवार तीसरी सूची: 3 अप्रैल पहली सूची जारी होने के बाद 27.2 लाख लोगों को अपने मतदान अधिकार की स्थिति का पता चल जाएगा, जबकि बाकी लोगों को अभी और इंतजार करना होगा। नाम नहीं आया तो क्या विकल्प? यदि किसी मतदाता का नाम सप्लीमेंट्री सूची में शामिल नहीं होता है, तो उसके पास अपील का विकल्प मौजूद रहेगा। वे: ECINET ऐप के माध्यम से ऑनलाइन अपील कर सकते हैं जिला मजिस्ट्रेट या उप-विभागीय अधिकारी के समक्ष आवेदन दे सकते हैं इसके लिए चुनाव आयोग ने 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल का गठन किया है। जमीनी स्तर पर बेचैनी और उम्मीद भवानीपुर की शिखा दास, जो पिछले चार दशकों से मतदान करती आ रही हैं, इस बार अपने नाम को लेकर अनिश्चितता में हैं। उनके परिवार के अन्य सदस्यों के नाम सूची में हैं, लेकिन उनका नाम रोका गया है। वहीं अलीपुर के सौरव चक्रवर्ती और कैनिंग के अकरमुल हक सरदार जैसे कई मतदाता अपने दस्तावेजों के आधार पर आश्वस्त हैं, लेकिन अंतिम सूची का इंतजार उन्हें बेचैन कर रहा है। प्रशासन अलर्ट मोड में राज्य सरकार ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि सूची जारी होने के बाद किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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