झारखंड

झारखंड: डिजिटल जनगणना शुरू

झारखंड में SIR पर रोक, वोटर लिस्ट अपडेट से पहले होगी डिजिटल जनगणना

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 18, 2026 0
झारखंड डिजिटल जनगणना और वोटर लिस्ट अपडेट 2026
Jharkhand Digital Census Voter List Update

रांची। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया फिलहाल रुक गयी है। अब राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने तय किया है कि पहले डिजिटल जनगणना कराई जाएगी और उसके बाद ही वोटर लिस्ट को अपडेट करने का काम आगे बढ़ेगा। यह निर्णय उन सभी राज्यों पर लागू होगा जहां SIR की प्रक्रिया लंबित है।

 

1 मई से शुरू होगी डिजिटल जनगणना

राज्य में जनगणना की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 1 मई से 15 मई तक सेल्फ एन्यूमरेशन यानी नागरिकों द्वारा स्वयं अपनी जानकारी भरने की प्रक्रिया चलेगी। इसके बाद 16 मई से 14 जून तक हाउस लिस्टिंग का कार्य किया जाएगा। इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी और लोगों को पहली बार ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा मिलेगी।

 

वोटर मैपिंग में 72% काम पूरा

झारखंड में 2003 की मतदाता सूची के आधार पर वर्तमान वोटरों की मैपिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। अब तक लगभग 72 प्रतिशत मतदाताओं का मिलान पूरा हो चुका है। राज्य में कुल 2.65 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से करीब 1.93 करोड़ का डेटा मिलान किया जा चुका है।

 

28% मतदाता अब भी जांच के दायरे में

लगभग 28 प्रतिशत मतदाता ऐसे हैं जिनका विवरण या तो अधूरा है या वे स्थान बदल चुके हैं। इन सभी को आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे ताकि उनकी पहचान की पुष्टि की जा सके और सूची को अपडेट किया जा सके।

 

6.72 लाख रिकॉर्ड में त्रुटियां

जांच के दौरान 6.72 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में गड़बड़ियां सामने आई हैं। इनमें लाखों लोगों की फोटो गलत है और कई नामों में त्रुटियां पाई गई हैं। बूथ लेवल अधिकारी इन सुधारों पर लगातार काम कर रहे हैं।

 

10 लाख नाम हटने की संभावना

अधिकारियों के अनुसार मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं के करीब 10 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकते हैं। साथ ही पात्र नए मतदाताओं को सूची में जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

झारखंड

View more
झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा जेटेट विज्ञापन विवाद
रद्द हो सकता है JTET का विज्ञापन, 21 अप्रैल से भरे जाने हैं फॉर्म

रांची। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी जेटेट का विज्ञापन रद्द किया जायेगा। भोजपुरी, अंगिका और मगही भाषाओं को लेकर चल रहे विवाद के कारण यह फैसला लेना विवशता है। झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने 21 अप्रैल से 21 मई तक आवेदन प्रक्रिया के लिए पिछले महीने विज्ञापन जारी किया था। यह विज्ञापन कैबिनेट की मंजूरी मिलने की उम्मीद में निकाला गया था, लेकिन गुरुवार को हुई बैठक में इस पर सहमति नहीं बन सकी। इसके चलते झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली 2026 को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।   भाषा विवाद के कारण फंसा पेंचः स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मंजूरी के बाद 26 मार्च को नियमावली 2026 की अधिसूचना जारी कर दी थी। साथ ही आवेदन की तारीखें भी घोषित कर दी गई थीं। हालांकि नियमावली में भोजपुरी, अंगिका और मगही जैसी प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल नहीं किया गया, जबकि सीमित क्षेत्रों में बोली जाने वाली उड़िया को जगह दी गई। इस फैसले का राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों ने विरोध किया। कैबिनेट बैठक में भी कई मंत्रियों ने इस पर आपत्ति जताई, लेकिन लंबी चर्चा के बावजूद अंतिम निर्णय नहीं हो सका। 10 साल से नहीं हुई परीक्षाः झारखंड में अब तक केवल 2012 और 2016 में ही शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित हुई है। पिछले 10 वर्षों से जेटेट नहीं होने के कारण अभ्यर्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर 2016 के बाद बीएड करने वाले उम्मीदवार न तो टीईटी दे पा रहे हैं और न ही शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल हो पा रहे हैं। अब यदि सरकार 20 अप्रैल तक नियमावली को पुराने स्वरूप में लागू करती है, तो बिना इन भाषाओं के आवेदन शुरू हो जाएंगे, लेकिन यदि संशोधन कर भाषाओं को जोड़ा जाता है, तो विज्ञापन वापस लेना पड़ेगा।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 18, 2026 0
झारखंड में बारिश और लू का अलर्ट - मौसम विभाग की चेतावनी

झारखंड में बदला मौसम, कहीं बारिश-आंधी तो कहीं लू का खतरा

धनबाद में शुभम यादव की हत्या - मेयर संजीव सिंह समर्थक

धनबाद में दिनदहाड़े मर्डर, घर में घुसकर मेयर समर्थक को मारी गोलियां

Dense fog and rising heat in Jharkhand weather change

झारखंड में मौसम का बदला मिजाज: धुंध के बाद बढ़ी गर्मी, 19–21 अप्रैल तक लू का अलर्ट

झारखंड बोर्ड मैट्रिक रिजल्ट वायरल स्क्रीनशॉट और वेबसाइट लिंक
JAC की लापरवाही से जारी हुआ मैट्रिक का रिजल्ट

रांची। झारखंड बोर्ड (JAC) 10वीं रिजल्ट को लेकर छात्रों के बीच बड़ा कन्फ्यूजन सामने आया है। बीते दिन यानी 17 अप्रैल को कक्षा 9वीं के फाइनल एग्जाम का रिजल्ट आया। वहीं मैट्रिक के छात्रों का दावा है कि रात को अचानक रिजल्ट वेबसाइट पर लाइव दिखने लगा, और  कुछ ही घंटों बाद सुबह उसका लिंक हटा दिया गया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर मार्कशीट के स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हो रहे हैं।   छात्रों ने क्या कहा ? छात्रों के अनुसार, जब उन्होंने आधिकारिक वेबसाइट jacresults.com खोली तो वहां 10वीं रिजल्ट का लिंक सक्रिय मिला। लिंक पर क्लिक करने पर पूरी मार्कशीट दिखाई दी, जिसमें छात्र का नाम, रोल नंबर, माता-पिता का नाम और विषयवार अंक भी शामिल थे। कई छात्रों ने दावा किया कि उन्होंने अपना रिजल्ट डाउनलोड भी कर लिया और उसके स्क्रीनशॉट साझा किए। अब सवाल उठ रहा है कि क्या रिजल्ट गलती से जारी हो गया था या यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी थी। बोर्ड की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।   संभावित कारणों पर चर्चा इस पूरे मामले को लेकर कई संभावनाएं सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि यह तकनीकी गलती हो सकती है या वेबसाइट टेस्टिंग के दौरान लिंक गलती से लाइव हो गया होगा। यह भी संभावना जताई जा रही है कि डेटा वेरिफिकेशन का काम अभी पूरा नहीं हुआ था। झारखंड एकेडमिक काउंसिल की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में छात्रों को सलाह दी जा रही है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट्स पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें।   जल्द आ सकता है आधिकारिक अपडेट मामले की गंभीरता को देखते हुए उम्मीद है कि बोर्ड जल्द ही स्थिति स्पष्ट करेगा। यदि यह तकनीकी त्रुटि है तो रिजल्ट दोबारा सही तरीके से जारी किया जा सकता है। फिलहाल छात्रों को धैर्य रखने की अपील की जा रही है।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 18, 2026 0
हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन टीएमसी के लिए बंगाल में चुनाव प्रचार करते हुए

हेमंत और कल्पना सोरेन TMC के लिए करेंगे बंगाल में प्रचार

सुदेश महतो का सीएम हेमंत सोरेन को पत्र - J-TET परीक्षा की मांग

सुदेश महतो ने सीएम को लिखा पत्र, J-TET जल्द कराने की उठाई मांग

झारखंड डिजिटल जनगणना और वोटर लिस्ट अपडेट 2026

झारखंड में SIR पर रोक, वोटर लिस्ट अपडेट से पहले होगी डिजिटल जनगणना

झारखंड में 46 आईपीएस और 17 आईएएस अधिकारियों का तबादला
झारखंड में 46  IPS का ट्रांसफर

रांची: झारखंड के पुलिस विभाग में अब तक का सबसे बड़ा हाई-लेवल फेरबदल हुआ है। शुक्रवार देर  रात 17 आईएएस और 46 आईपीएस बदले गए। सरकार ने इस बदलाव के जरिए न केवल एक दर्जन जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) और उपायुक्तों (DC)को बदला है, बल्कि कई वरिष्ठ अधिकारियों को महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रभार भी दिए हैं। IPS की ट्रांसफर लिस्ट में आईजी स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी में भी बदलाव किया गया है। कई प्रतीक्षारत अधिकारियों को नई पोस्टिंग मिली है, वहीं कुछ को ट्रेनिंग के बाद एसडीपीओ की कमान सौंपी गई है।   वरिष्ठ अधिकारियों को मिला अतिरिक्त प्रभारः नोटिफिकेशन के मुताबिक एडीजी सीआईडी मनोज कौशिक अब मुख्यालय एडीजी का अतिरिक्त कार्यभार भी संभालेंगे। वहीं, झारखंड पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के एमडी पंकज कम्बोज को आईजी मानवाधिकार की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। नरेंद्र कुमार सिंह को पलामू जोन का आईजी नियुक्त करते हुए आईजी अभियान का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इसके अलावा, ऋषभ कुमार झा को जेएपी-4 के साथ एसआईएसएफ कमांडेंट का प्रभार मिला है। इन जिलों को मिले नए एसपीः आईएएस-आईपीएस के इस बदलाव में राज्य के महत्वपूर्ण जिलों की कमान नए हाथों में दी गई है। नाथू सिंह मीणा को बोकारो, अमन कुमार को हजारीबाग और प्रवीण पुष्कर को देवघर का नया एसपी बनाया गया है। अन्य प्रमुख नियुक्तियों में आशुतोष शेखर को गढ़वा, निधि द्विवेदी को सरायकेला-खरसावां, कपिल चौधरी को पलामू और मुकेश कुमार लुनायत को रामगढ़ का एसपी नियुक्त किया गया है। वहीं, रांची, धनबाद और जमशेदपुर में नए ग्रामीण एसपी तैनात किए गए हैं।   आईजी और मुख्यालय स्तर पर नई नियुक्तियाः आईजी स्तर पर शैलेंद्र कुमार सिन्हा को बोकारो, माइकलराज एस को आईजी रेल और सुनील भास्कर को जेएपी आईजी की जिम्मेदारी मिली है। मुख्यालय स्तर पर प्रशांत आनंद को एसपी संचार एवं तकनीकी सेवा, सुमित कुमार अग्रवाल को एसपी विशेष शाखा और राजकुमार मेहता को एटीएस एसपी बनाया गया है। मूमल राजपुरोहित को रेल एसपी धनबाद की कमान सौंपी गई है। नौजवान अफसरों को एएसपी के तौर पर पोस्टिंगः ट्रांसफर लिस्ट में कई युवा और प्रशिक्षणरत अधिकारियों को भी अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। निखिल राय को रांची कोतवाली का एएसपी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, श्रुति को एसडीपीओ चैनपुर, दिव्यांश शुक्ला को एसडीपीओ हुसैनाबाद और राघवेंद्र शर्मा को एसडीपीओ पतरातू बनाया गया है। सैयद मुस्तफा हासमी को चक्रधरपुर का एसडीपीओ नियुक्त किया गया है, जबकि मनीष टोप्पो अब एसपी एससीआरबी होंगे।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 18, 2026 0
झारखंड में 17 आईएएस अधिकारियों का तबादला और नए डीसी की सूची

आधी रात बदले गये जमशेदपुर-देवघर समेत 17 जिलों के DC

JAC 9th result 2026

JAC 9वीं रिजल्ट जारी, 99.17% छात्र पास; बेटियों का शानदार प्रदर्शन

CCTV tender scam rumours

झारखंड : थानों में CCTV लगाने के नाम पर घोटाले की आहट, टेंडर पर उठे सवाल

0 Comments

Top week

Ranchi University protest
शिक्षा

लेट सेशन के खिलाफ रांची यूनिवर्सिटी में छात्रों का प्रदर्शन

Anjali Kumari अप्रैल 13, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?