राष्ट्रीय

CM को धमकी, आरोपी गिरफ्तार

बिहार के CM सम्राट चौधरी को जान से मारने की धमकी: फोन कॉल से हड़कंप, गुजरात से आरोपी गिरफ्तार

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Security tightened at Bihar CM residence after threat call
Threat Call to Bihar CM Residence

 

मुख्यमंत्री आवास पर धमकी भरा कॉल

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री Samrat Choudhary को जान से मारने की धमकी मिलने के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया। मुख्यमंत्री आवास पर आए एक फोन कॉल में सीधे तौर पर उन्हें निशाना बनाते हुए धमकी दी गई, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड में आ गईं।

घटना सामने आते ही बिहार पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तेजी से जांच शुरू कर दी। शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि कॉल करने वाला शख्स लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है, जिससे उसे ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण हो गया था।

तकनीकी सर्विलांस से मिला सुराग, कई लोकेशन बदली

पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल ट्रैकिंग और अन्य तकनीकी साधनों की मदद से आरोपी की तलाश शुरू की। जांच में सामने आया कि आरोपी बिहार से बाहर जाकर छिपा हुआ था और गिरफ्तारी से बचने के लिए बार-बार अपनी लोकेशन बदल रहा था।

लगातार निगरानी और ट्रैकिंग के बाद आखिरकार पुलिस को अहम सुराग मिला, जिससे उसकी सटीक लोकेशन का पता चल सका।

गुजरात के सानंद में दबिश, संयुक्त ऑपरेशन में गिरफ्तारी

पुलिस को जैसे ही आरोपी के गुजरात के सानंद इलाके में होने की जानकारी मिली, तुरंत बिहार और गुजरात पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई।

इस टीम ने सानंद में छापेमारी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान शेखर यादव (32) के रूप में हुई है, जो बिहार के बांका जिले का रहने वाला है और गुजरात में मजदूरी करता था।

धमकी के पीछे मकसद क्या? जांच में जुटी पुलिस

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आरोपी ने मुख्यमंत्री को धमकी क्यों दी। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है या फिर आरोपी ने व्यक्तिगत कारणों से ऐसा कदम उठाया।

सुरक्षा एजेंसियां आरोपी के कॉल रिकॉर्ड, संपर्कों और पृष्ठभूमि की गहराई से जांच कर रही हैं।

बिहार लाकर होगी कड़ी पूछताछ

गुजरात पुलिस ने आरोपी को बिहार पुलिस के हवाले कर दिया है। उसे बिहार लाया जा रहा है, जहां उससे विस्तृत पूछताछ की जाएगी।

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि कहीं इस मामले में और लोग शामिल तो नहीं हैं।

शपथ के बाद एक्टिव मोड में CM

गौरतलब है कि सम्राट चौधरी ने हाल ही में 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। इसके बाद से वे लगातार प्रशासनिक बैठकों और जनता दरबार के जरिए सक्रिय भूमिका में नजर आ रहे हैं।

ऐसे में धमकी की यह घटना सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर रही है।

सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, जांच जारी

इस पूरे घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां हर एंगल से मामले की जांच कर रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Indian Air Force AN-32 aircraft crash site in Assam Jorhat runway emergency aftermath
असम के जोरहाट में बड़ा हादसा: लैंडिंग के दौरान IAF का AN-32 विमान क्रैश, 5 जवान शहीद

रूटीन उड़ान बनी दर्दनाक हादसा असम के जोरहाट में शनिवार को भारतीय वायुसेना (IAF) का एक AN-32 ट्रांसपोर्ट विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस भीषण हादसे में विमान में सवार 6 कर्मियों में से 5 की मौत हो गई, जबकि 1 व्यक्ति गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। सुबह 10 बजे हुई थी उड़ान, पैराड्रॉप मिशन पर था विमान जानकारी के अनुसार, यह विमान सुबह करीब 10 बजे एक रूटीन सॉर्टी के तहत जोरहाट एयरबेस से चाबुआ के लिए उड़ान भर चुका था। इसका उद्देश्य पैराड्रॉप अभ्यास करना था। लेकिन उड़ान के कुछ समय बाद ही पायलट ने तकनीकी कारणों से वापस लैंडिंग की अनुमति मांगी। लैंडिंग के दौरान विमान रनवे से अचानक भटक गया, पास की टैक्सीवे को पार कर गया और फिर दो हिस्सों में टूटकर आग की चपेट में आ गया। तुरंत शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन हादसे की सूचना मिलते ही एयरबेस पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। घायल जवान को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। वायुसेना ने घटनास्थल को सुरक्षित कर शुरुआती जांच शुरू कर दी है। शहीद जवानों की पहचान इस हादसे में शहीद हुए जवानों की पहचान इस प्रकार हुई है: स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार सार्जेंट जितेंद्र शर्मा अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत अग्निवीरवायु दानिश आलम IAF ने जताया गहरा शोक भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर पांचों जवानों के बलिदान पर गहरा दुख जताया। IAF ने कहा कि देश उनके सर्वोच्च बलिदान को हमेशा याद रखेगा और शोकाकुल परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। AN-32 विमान से जुड़े हादसों का इतिहास AN-32 विमान भारतीय वायुसेना का एक महत्वपूर्ण ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है, जिसे 1984 में पूर्व सोवियत संघ से लिया गया था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इससे जुड़े कई बड़े हादसे सामने आए हैं। 2016 में बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक AN-32 विमान लापता हो गया था, जिसमें 29 लोगों की मौत हुई थी। 2019 में अरुणाचल प्रदेश के मेचुका के पास विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें 13 जवान शहीद हुए थे। यह इस विमान श्रेणी का तीसरा बड़ा हादसा माना जा रहा है।  

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एयरबेस के भीतर हुआ हादसा, जांच शुरू असम के जोरहाट स्थित भारतीय वायुसेना (IAF) के एयरबेस पर शुक्रवार को एक सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विमान एयरबेस के भीतर सुरक्षित लैंडिंग के बाद अचानक आग की चपेट में आ गया, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के तुरंत बाद एयरबेस की आपातकालीन और अग्निशमन टीमों को मौके पर भेजा गया। आग पर काबू पाने के लिए राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। पायलट और क्रू की स्थिति पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार फिलहाल भारतीय वायुसेना की ओर से विमान के प्रकार, हादसे के कारण और पायलट या अन्य क्रू सदस्यों की स्थिति को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, विमान रनवे पर उतरने के बाद किसी तकनीकी गड़बड़ी का शिकार हुआ, जिसके बाद उसमें आग लग गई। हालांकि दुर्घटना की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। वायुसेना ने शुरू की जांच हादसे के बाद भारतीय वायुसेना ने घटना की जांच शुरू कर दी है। तकनीकी विशेषज्ञ विमान के ब्लैक बॉक्स और अन्य उपकरणों की जांच कर रहे हैं ताकि दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा सके। जोरहाट एयरबेस भारतीय वायुसेना का एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र है और पूर्वोत्तर क्षेत्र में रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जाता है। अधिकृत जानकारी आने के बाद ही नुकसान और हादसे की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।  

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एल नीनो की आधिकारिक एंट्री, मानसून के दौरान और होगा मजबूत; IMD की चेतावनी से बढ़ी चिंता

भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में सक्रिय हुआ एल नीनो भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि एल नीनो (El Nino) की स्थिति विकसित हो चुकी है और दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान इसके और अधिक मजबूत होने की संभावना है। मौसम विभाग की इस चेतावनी ने कृषि, जल संसाधन और तापमान को लेकर नई चिंताएं बढ़ा दी हैं। IMD की जून 2026 की ENSO और इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) बुलेटिन के अनुसार, मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच चुका है। इसके साथ ही वातावरण ने भी इस समुद्री गर्मी पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है, जो एल नीनो की पूर्ण सक्रियता का संकेत माना जाता है। मानसून पर पड़ सकता है असर भारत में एल नीनो का इतिहास अक्सर कमजोर मानसून, लंबे शुष्क दौर, अधिक गर्मी और कुछ क्षेत्रों में सूखे की स्थिति से जुड़ा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि एल नीनो और मजबूत होता है तो कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा सकती है। IMD ने बताया कि जून-अगस्त के दौरान मध्य प्रशांत क्षेत्र में समुद्री तापमान सामान्य से ऊपर बना रहेगा और जुलाई से यह प्रभाव पूर्वी प्रशांत तक और अधिक फैल सकता है। मॉडल पूर्वानुमानों के अनुसार इस बार मानसून सीजन के बड़े हिस्से में मध्यम से मजबूत एल नीनो प्रभाव देखने को मिल सकता है। किन शहरों और राज्यों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत एल नीनो की स्थिति में उत्तर-पश्चिम, मध्य और कुछ दक्षिणी राज्यों में गर्मी और बारिश की कमी का खतरा बढ़ सकता है। इनमें प्रमुख रूप से: Delhi Jaipur Ahmedabad Nagpur Hyderabad Bengaluru Rajasthan Madhya Pradesh Maharashtra Gujarat इन क्षेत्रों में हीटवेव, जल संकट और फसलों पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। क्या राहत भी मिल सकती है? हालांकि IMD ने कहा है कि वर्तमान में हिंद महासागर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) तटस्थ स्थिति में है और मानसून के अधिकांश समय तक ऐसा ही रहने की संभावना है। लेकिन Japan Meteorological Agency का अनुमान है कि जुलाई के आसपास सकारात्मक IOD विकसित हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह एल नीनो के नकारात्मक प्रभावों को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है और भारत में मानसूनी बारिश को सहारा मिल सकता है। किसानों और आम लोगों के लिए क्या है संकेत? विशेषज्ञों का कहना है कि एल नीनो का मतलब हर बार सूखा नहीं होता, लेकिन यह मानसून की अनिश्चितता बढ़ा देता है। इसलिए किसानों को मौसम आधारित कृषि सलाह पर ध्यान देने और जल संरक्षण उपायों को अपनाने की जरूरत होगी। आने वाले हफ्तों में मानसून की प्रगति और एल नीनो की तीव्रता पर मौसम विभाग लगातार नजर रखेगा। यदि इसकी ताकत बढ़ती है तो देश के कई हिस्सों में बारिश का पैटर्न प्रभावित हो सकता है।  

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Deepshikha जून 8, 2026 0

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