रांची। रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में हुई चोरी और गार्ड बिरसा मुंडा की निर्मम हत्या ने झारखंड की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इस घटना के बाद एक और चर्चा तेज हो गई है कि क्या बीजेपी इस मुद्दे पर उस आक्रामकता के साथ नहीं उतरी, जिसके लिए वह जानी जाती है? बीजेपी की 'चुप्पी' के मायने राजधानी रांची के धुर्वा स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में हाल ही में हुई डकैती और सुरक्षा गार्ड बिरसा मुंडा की हत्या ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि राज्य की राजनीति में भी एक नया विमर्श छेड़ दिया है। विधानसभा से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर स्थित इस अति-सुरक्षित क्षेत्र में मंदिर के गर्भगृह की सुरक्षा में तैनात गार्ड को पत्थर से कुचलकर मार दिया गया और दान पेटी से करीब 3 लाख रुपये लूट लिए गए। इस घटना के बाद बड़ी संख्या लोग जुटे। हल्ला-हंगामा और प्रदर्शन हुआ। कांग्रेस नेता अजय नाथ शाहदेव वहां पहुंचे और मृतक के परिजनों को सांत्वना दिया। साथ ही दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। लेकिन, इतने बड़े घटनाक्रम के बाद भी किसी बड़े बीजेपी नेता का घटना स्थल पर नहीं पहुंचना कई सवाल खड़े करता है। हालांकि नेता विपक्ष बाबूलाल मरांडी ने प्रेस कांफ्रेस ने घटना का दोष सरकार पर मढ़ कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी। पर भाजपा की सक्रियता नहीं दिखी। जनता के बीच एक बड़ा सवाल यह उठा कि "मंदिर" और "हिंदुत्व" के मुद्दों पर तुरंत सड़क पर उतरने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बार वैसी सक्रिय क्यों नहीं दिखी? क्या बीजेपी ने इस मुद्दे पर 'वॉकओवर' दे दिया है या पर्दे के पीछे की राजनीति कुछ और है? क्या सच में बीजेपी 'गायब' रही? सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में यह बात उठी कि बीजेपी के बड़े नेता घटना के तुरंत बाद मौके पर क्यों नहीं पहुंचे। लेकिन, हकीकत के पन्ने पलटें तो तस्वीर थोड़ी अलग नजर आती है। घटना के 24-48 घंटों के भीतर बीजेपी ने अपनी रणनीति बदली प्रतिनिधिमंडल का दौरा: बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, केंद्रीय मंत्री संजय सेठ और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने मृतक बिरसा मुंडा के परिजनों से मुलाकात की। मुआवजे की मांग पार्टी ने राज्य सरकार से पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। आर्थिक सहायता बीजेपी ने अपनी ओर से पीड़ित परिवार को ₹50,000 की तत्काल सहायता राशि प्रदान की। 'कूद कर' न आने के पीछे के संभावित कारण आमतौर पर मंदिरों में तोड़फोड़ या हमले की स्थिति में बीजेपी इसे 'सांप्रदायिक' रंग देकर आक्रामक हो जाती है। करीब दो साल पहले बरियातू के एक दिर में हुई चोरी के बाद कई बीजेपी नेता सड़क पर उतर आये थे। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, तत्कालीन विधायक समरीलाल भी प्रदर्शन में शामिल रहे थे। लेकिन, इस मामले में बीजेपी की आक्रामकता थोड़ी संतुलित दिखी, इसके पीछे कुछ ठोस कारण हो सकते हैं: आरोपियों की पृष्ठभूमि पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि हत्या और लूट में शामिल तीनों आरोपी (देव कुमार, विकास महली और आयुष दत्ता) स्थानीय हैं और वे मंदिर के पास की ही बस्ती के रहने वाले हैं। जब अपराध "सांप्रदायिक" न होकर "आपराधिक" (लोकल गैंग द्वारा नशे के लिए की गई लूट) हो, तो राजनीतिक ध्रुवीकरण की गुंजाइश कम हो जाती है। पीड़ित की पहचान मृतक गार्ड बिरसा मुंडा आदिवासी समुदाय से थे। बीजेपी ने इसे "हिंदू मंदिर पर हमला" बनाने के बजाय "आदिवासी सुरक्षा" और "लॉ एंड ऑर्डर" का मुद्दा बनाया। पार्टी ने हेमंत सोरेन सरकार को घेरते हुए कहा कि "स्वयं को आदिवासी हितैषी बताने वाली सरकार में ही आदिवासी सुरक्षित नहीं हैं।" पुलिस की त्वरित कार्रवाई रांची पुलिस ने 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जब पुलिस तत्परता दिखाती है, तो विपक्ष के पास सड़क पर लंबे समय तक बैठने का मुद्दा कमजोर पड़ जाता है। बीजेपी का नया वार: 'मंदिर का कांग्रेसीकरण'... बीजेपी ने इस मुद्दे पर सीधे सड़क पर दंगा करने के बजाय एक नया राजनीतिक मोर्चा खोला है। प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि जगन्नाथपुर मंदिर समिति का "कांग्रेसीकरण" कर दिया गया है। बीजेपी का आरोप है कि "स्थानीय लोगों को मंदिर प्रबंधन से बाहर रखा गया है और समिति में राजनीतिक नियुक्तियां की गई हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। मंदिर परिसर नशेड़ियों का अड्डा बन गया है।" कानून-व्यवस्था पर सवाल भले ही बीजेपी ने इसे सांप्रदायिक मुद्दा नहीं बनाया, लेकिन पार्टी ने इसे "समानांतर सरकार" चलने का सबूत करार दिया है। विधानसभा के इतने करीब हत्या होना यह दर्शाता है कि अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ खत्म हो चुका है। बीजेपी ने मंदिर समिति और न्यास बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल खड़ा किया है। क्योंकि, इतने बड़े मंदिर की दान पेटी की सुरक्षा के लिए केवल एक बुजुर्ग गार्ड के भरोसे पूरी व्यवस्था छोड़ दी गई थी, जबकि दान पेटी में तीन लाख रुपये होने की बात कही जा रही है। चुप्पी या रणनीति? यह कहना गलत होगा कि बीजेपी इस मामले में बिल्कुल नहीं पहुंची, लेकिन यह सच है कि विरोध का स्वर 'मंदिर के अपमान' से ज्यादा 'सरकार की विफलता' पर केंद्रित रहा। बीजेपी अब झारखंड में "आदिवासी बनाम सरकार" के नैरेटिव पर काम कर रही है। चूंकि पीड़ित आदिवासी था और आरोपी स्थानीय अपराधी, इसलिए बीजेपी ने इसे धर्म के बजाय सुशासन के चश्मे से जनता के सामने पेश किया है। जगन्नाथपुर मंदिर कांड ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आस्था के केंद्र भी अब सुरक्षित नहीं हैं। यदि सरकार और प्रशासन ने मंदिरों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में यह मुद्दा और भी बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है।
मुख्यमंत्री आवास पर धमकी भरा कॉल पटना: बिहार के मुख्यमंत्री Samrat Choudhary को जान से मारने की धमकी मिलने के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया। मुख्यमंत्री आवास पर आए एक फोन कॉल में सीधे तौर पर उन्हें निशाना बनाते हुए धमकी दी गई, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड में आ गईं। घटना सामने आते ही बिहार पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तेजी से जांच शुरू कर दी। शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि कॉल करने वाला शख्स लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है, जिससे उसे ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण हो गया था। तकनीकी सर्विलांस से मिला सुराग, कई लोकेशन बदली पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल ट्रैकिंग और अन्य तकनीकी साधनों की मदद से आरोपी की तलाश शुरू की। जांच में सामने आया कि आरोपी बिहार से बाहर जाकर छिपा हुआ था और गिरफ्तारी से बचने के लिए बार-बार अपनी लोकेशन बदल रहा था। लगातार निगरानी और ट्रैकिंग के बाद आखिरकार पुलिस को अहम सुराग मिला, जिससे उसकी सटीक लोकेशन का पता चल सका। गुजरात के सानंद में दबिश, संयुक्त ऑपरेशन में गिरफ्तारी पुलिस को जैसे ही आरोपी के गुजरात के सानंद इलाके में होने की जानकारी मिली, तुरंत बिहार और गुजरात पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई। इस टीम ने सानंद में छापेमारी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान शेखर यादव (32) के रूप में हुई है, जो बिहार के बांका जिले का रहने वाला है और गुजरात में मजदूरी करता था। धमकी के पीछे मकसद क्या? जांच में जुटी पुलिस फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आरोपी ने मुख्यमंत्री को धमकी क्यों दी। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है या फिर आरोपी ने व्यक्तिगत कारणों से ऐसा कदम उठाया। सुरक्षा एजेंसियां आरोपी के कॉल रिकॉर्ड, संपर्कों और पृष्ठभूमि की गहराई से जांच कर रही हैं। बिहार लाकर होगी कड़ी पूछताछ गुजरात पुलिस ने आरोपी को बिहार पुलिस के हवाले कर दिया है। उसे बिहार लाया जा रहा है, जहां उससे विस्तृत पूछताछ की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि कहीं इस मामले में और लोग शामिल तो नहीं हैं। शपथ के बाद एक्टिव मोड में CM गौरतलब है कि सम्राट चौधरी ने हाल ही में 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। इसके बाद से वे लगातार प्रशासनिक बैठकों और जनता दरबार के जरिए सक्रिय भूमिका में नजर आ रहे हैं। ऐसे में धमकी की यह घटना सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर रही है। सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, जांच जारी इस पूरे घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां हर एंगल से मामले की जांच कर रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
लोकेशन बदलने की जानकारी से उलझी जांच Tata Consultancy Services (TCS) के नासिक यूनिट से जुड़े कथित धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न मामले में फरार आरोपी निडा खान की तलाश लगातार जारी है। पुलिस को उसके पति द्वारा दी गई लोकेशन पर पहुंचने के बाद भी सफलता नहीं मिली, जिससे जांच और उलझ गई है। पति ने बताया ठिकाना, मौके पर मिला बंद घर पुलिस पूछताछ में निडा खान के पति ने पहले बताया कि वह 14 अप्रैल के बाद एक रिश्तेदार के घर रह रही है। लेकिन जब पुलिस वहां पहुंची, तो घर बंद मिला और निडा का कोई पता नहीं चला। इसके बाद पति ने बयान बदलते हुए कहा कि उसकी मौसी उसे नासिक ले गई है। फिलहाल पुलिस के पास उसकी सटीक लोकेशन को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं है। मोबाइल फोन भी बंद, पुलिस की तलाश जारी सूत्रों के मुताबिक, निडा खान और उसके रिश्तेदारों के मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ हैं, जिससे उसे ट्रेस करना और मुश्किल हो गया है। पुलिस अब अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। क्या है पूरा मामला? यह मामला तब सामने आया जब एक महिला कर्मचारी ने अपने सहकर्मी पर शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया। जांच में यह भी सामने आया कि निडा खान, आरोपी दानिश शेख की बहन है और उस पर भी पीड़िता को धर्म बदलने के लिए दबाव बनाने का आरोप है। बाद में कई अन्य महिलाओं ने भी मानसिक और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। 7 गिरफ्तार, निडा खान अब भी फरार अब तक पुलिस इस मामले में 7 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें 6 पुरुष और एक महिला शामिल हैं। निडा खान अभी भी फरार है और उसकी तलाश जारी है। TCS की कार्रवाई: सस्पेंशन और सफाई TCS ने 9 अप्रैल को निडा खान को सस्पेंड कर दिया था। कंपनी ने अपने बयान में साफ किया है कि वह HR मैनेजर नहीं थीं, बल्कि एक प्रोसेस एसोसिएट के रूप में काम कर रही थीं और किसी भर्ती प्रक्रिया से उनका संबंध नहीं था। कंपनी ने यह भी कहा कि उसके आंतरिक सिस्टम में इस तरह की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई थी। साथ ही, जांच के लिए एक ओवरसाइट कमेटी भी बनाई गई है। अग्रिम जमानत की कोशिश निडा खान के परिवार का दावा है कि वह गर्भवती हैं और उन्होंने नासिक की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया है। उनके वकील का कहना है कि उनके खिलाफ गंभीर आरोप नहीं हैं। यह मामला अब कॉर्पोरेट सेक्टर में सुरक्षा और शिकायत प्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस और कंपनी की जांच के नतीजे आने के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ पाएगी।
ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस झारखंड के Jamtara जिले में शनिवार को एक सनसनीखेज मामला सामने आया। Bagdehri Police Station area के मुड़ाबेड़िया जंगल के पास स्थित एक कुएं से पुलिस ने तीन अज्ञात लोगों के शव बरामद किए हैं। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों के बीच कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। स्थानीय लोगों ने कुएं में शव दिखाई देने की सूचना पुलिस को दी थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और तीनों शवों को बाहर निकालकर अपने कब्जे में ले लिया। एक बच्ची, किशोर और पुरुष के होने की आशंका पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शव काफी पुराने हैं और सड़-गल चुके हैं, जिससे उनकी पहचान करना फिलहाल मुश्किल हो रहा है। शरीर की बनावट के आधार पर पुलिस का अनुमान है कि मृतकों में एक लगभग 4 वर्ष की बच्ची, एक 13 से 14 वर्ष का किशोर और करीब 35 से 40 वर्ष का एक पुरुष शामिल हो सकता है। घटनास्थल से मिला आधार कार्ड जांच के दौरान पुलिस को मौके से एक आधार कार्ड भी मिला है। इसे मामले में अहम सुराग माना जा रहा है। पुलिस अब आधार कार्ड के आधार पर मृतकों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। फिलहाल तीनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है। हत्या या हादसा? जांच जारी पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह हत्या का मामला है या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। समाचार लिखे जाने तक मृतकों की आधिकारिक पहचान नहीं हो सकी थी। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मामले की असली वजह सामने आ सकेगी।
पंजाबी गायक Sidhu Moose Wala की 2022 में हुई हत्या से जुड़े चर्चित मामले में Supreme Court of India ने दो आरोपियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने आरोपी पवन बिश्नोई और जगतार सिंह को जमानत देने का आदेश दिया है। मुकदमे की सुनवाई जारी रहने के दौरान दोनों आरोपियों को हिरासत से रिहा किया जाएगा। जस्टिस Vikram Nath और जस्टिस Sandeep Mehta ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। पवन बिश्नोई पर क्या है आरोप जांच एजेंसियों के अनुसार पवन बिश्नोई का संबंध गैंगस्टर Lawrence Bishnoi के गिरोह से बताया गया था। उस पर आरोप है कि उसने हत्या की साजिश में इस्तेमाल किए गए वाहन की व्यवस्था कर अपराध को अंजाम देने में लॉजिस्टिक मदद की थी। हालांकि अदालत में उसके वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल पर केवल बोलेरो वाहन की व्यवस्था करने का आरोप है, जिसे कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल किया गया था। अदालत की टिप्पणी सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि सुरक्षा के लिहाज से आरोपी का जेल में रहना उसके लिए बेहतर हो सकता है। इस पर बचाव पक्ष ने कहा कि उनके मुवक्किल का लॉरेंस बिश्नोई से कोई संबंध नहीं है और केवल उपनाम समान है। वकील ने यह भी बताया कि पवन बिश्नोई करीब तीन साल दस महीने से जेल में बंद है और उसके पास से कोई हथियार या अन्य बरामदगी नहीं हुई है। राज्य सरकार ने किया विरोध राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि हत्या में इस्तेमाल वाहन की व्यवस्था के लिए सह-आरोपियों की ओर से पवन बिश्नोई को करीब 41 कॉल किए गए थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि जेल के भीतर से मोबाइल फोन का इस्तेमाल कैसे हो रहा था और मामले की सुनवाई किस चरण में है। सरकार की ओर से बताया गया कि केस फिलहाल साक्ष्य दर्ज करने के चरण में है और कुछ संरक्षित गवाह आरोपियों के खिलाफ बयान दे चुके हैं। जगतार सिंह के खिलाफ आरोप सह-आरोपी जगतार सिंह के वकील ने अदालत में कहा कि मूसेवाला के घर के पास लगे कैमरे उनके मुवक्किल के घर की सुरक्षा के लिए लगाए गए थे, न कि गायक के घर की रेकी करने के लिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोनों आरोपियों को जमानत दे दी। 2022 में हुई थी हत्या पंजाब के मानसा जिले में मई 2022 में 28 वर्षीय Sidhu Moose Wala की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह अपनी एसयूवी में यात्रा कर रहे थे। इस हत्याकांड की जिम्मेदारी कनाडा में बैठे गैंगस्टर Goldy Brar ने ली थी, जिसे लॉरेंस बिश्नोई का करीबी माना जाता है। यह मामला देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक बन गया था।
4 साल के बच्चे को 45% तक झुलसन, पुलिस ने केस दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की महाराष्ट्र के Nagpur जिले के कोराडी इलाके में होली का त्योहार एक परिवार के लिए दर्दनाक हादसे में बदल गया। चार साल के मासूम पर उसकी ही दादी ने कथित रूप से खौलता पानी डाल दिया, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गया। पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सामने आया है। यह घटना 3 मार्च को आरामशिन क्षेत्र के वार्ड नंबर-2 में हुई। समाचार एजेंसी Press Trust of India (पीटीआई) के अनुसार, बच्चा घर के बाहर रंग से भरी स्प्रे बोतल लेकर खेल रहा था। इसी दौरान उसने अनजाने में अपनी दादी सिंधु ठाकरे पर रंग छिड़क दिया। बताया जा रहा है कि उस समय दादी होलिका दहन के लिए गर्म किए गए पानी से बाल्टी भर रही थीं। रंग पड़ने से नाराज होकर उन्होंने गुस्से में वही खौलता पानी बच्चे पर उंडेल दिया। दर्द से चीख उठा मासूम, अस्पताल में भर्ती सीसीटीवी फुटेज में दिखता है कि काले रंग की साड़ी पहने महिला बाल्टी लेकर चल रही है। बच्चा उनके पास आकर रंग छिड़कने की कोशिश करता है। तभी महिला बाल्टी का पानी उस पर फेंक देती है। इसके बाद बच्चा दर्द से चिल्लाते हुए दूर भागता नजर आता है। घटना के तुरंत बाद एक अन्य महिला ठंडे पानी की बाल्टी लेकर आती है और बच्चे पर डालती है ताकि जलन कम हो सके। कुछ देर बाद दादी भी ठंडा पानी डालती दिखाई देती हैं। बच्चे ओम के शरीर के निचले हिस्से में गंभीर जलन हुई है। डॉक्टरों के अनुसार, उसे करीब 45 प्रतिशत तक जलने की चोट आई है। फिलहाल उसे नागपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने बताया कि महिला के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जांच जारी है। बाराबंकी में रंग को लेकर बवाल, 11 लोग घायल उधर उत्तर प्रदेश के Barabanki जिले में भी होली के दौरान विवाद हिंसा में बदल गया। रंग खेलने को लेकर दो पक्षों के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि लाठी-डंडे और लोहे की रॉड तक चलने लगे। करीब 10 मिनट तक चले इस झगड़े में कम से कम 11 लोग घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव कर हालात को काबू में किया। स्थानीय निवासी अवधेश ने आरोप लगाया कि विरोधी पक्ष के लोग उसके घर में घुस आए और परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की। जब वह और अन्य लोग रोकने पहुंचे तो उन्हें भी पीटा गया। फिलहाल पुलिस ने मामला शांत होने की बात कही है, लेकिन दोनों घटनाओं ने त्योहार की खुशियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। त्योहार की खुशियों में सावधानी जरूरी होली आपसी प्रेम और भाईचारे का पर्व है, लेकिन छोटी सी लापरवाही या गुस्सा बड़ी दुर्घटना में बदल सकता है। नागपुर और बाराबंकी की घटनाएं यही संदेश देती हैं कि त्योहार के दौरान संयम और सतर्कता बेहद जरूरी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।