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होली बनी खौफनाक: रंग डालने पर दादी ने मासूम पोते पर उंडेला खौलता पानी, CCTV में कैद घटना

surbhi मार्च 5, 2026 0
Child playing Holi sprayed color as grandmother throws hot water in Nagpur CCTV incident
Nagpur Holi Incident Child Burned Case

4 साल के बच्चे को 45% तक झुलसन, पुलिस ने केस दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की

महाराष्ट्र के Nagpur जिले के कोराडी इलाके में होली का त्योहार एक परिवार के लिए दर्दनाक हादसे में बदल गया। चार साल के मासूम पर उसकी ही दादी ने कथित रूप से खौलता पानी डाल दिया, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गया। पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सामने आया है।

यह घटना 3 मार्च को आरामशिन क्षेत्र के वार्ड नंबर-2 में हुई। समाचार एजेंसी Press Trust of India (पीटीआई) के अनुसार, बच्चा घर के बाहर रंग से भरी स्प्रे बोतल लेकर खेल रहा था। इसी दौरान उसने अनजाने में अपनी दादी सिंधु ठाकरे पर रंग छिड़क दिया।

बताया जा रहा है कि उस समय दादी होलिका दहन के लिए गर्म किए गए पानी से बाल्टी भर रही थीं। रंग पड़ने से नाराज होकर उन्होंने गुस्से में वही खौलता पानी बच्चे पर उंडेल दिया।

 

दर्द से चीख उठा मासूम, अस्पताल में भर्ती

सीसीटीवी फुटेज में दिखता है कि काले रंग की साड़ी पहने महिला बाल्टी लेकर चल रही है। बच्चा उनके पास आकर रंग छिड़कने की कोशिश करता है। तभी महिला बाल्टी का पानी उस पर फेंक देती है। इसके बाद बच्चा दर्द से चिल्लाते हुए दूर भागता नजर आता है।

घटना के तुरंत बाद एक अन्य महिला ठंडे पानी की बाल्टी लेकर आती है और बच्चे पर डालती है ताकि जलन कम हो सके। कुछ देर बाद दादी भी ठंडा पानी डालती दिखाई देती हैं।

बच्चे ओम के शरीर के निचले हिस्से में गंभीर जलन हुई है। डॉक्टरों के अनुसार, उसे करीब 45 प्रतिशत तक जलने की चोट आई है। फिलहाल उसे नागपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पुलिस ने बताया कि महिला के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जांच जारी है।

 

बाराबंकी में रंग को लेकर बवाल, 11 लोग घायल

उधर उत्तर प्रदेश के Barabanki जिले में भी होली के दौरान विवाद हिंसा में बदल गया। रंग खेलने को लेकर दो पक्षों के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि लाठी-डंडे और लोहे की रॉड तक चलने लगे।

करीब 10 मिनट तक चले इस झगड़े में कम से कम 11 लोग घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव कर हालात को काबू में किया।

स्थानीय निवासी अवधेश ने आरोप लगाया कि विरोधी पक्ष के लोग उसके घर में घुस आए और परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की। जब वह और अन्य लोग रोकने पहुंचे तो उन्हें भी पीटा गया।

फिलहाल पुलिस ने मामला शांत होने की बात कही है, लेकिन दोनों घटनाओं ने त्योहार की खुशियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

त्योहार की खुशियों में सावधानी जरूरी

होली आपसी प्रेम और भाईचारे का पर्व है, लेकिन छोटी सी लापरवाही या गुस्सा बड़ी दुर्घटना में बदल सकता है। नागपुर और बाराबंकी की घटनाएं यही संदेश देती हैं कि त्योहार के दौरान संयम और सतर्कता बेहद जरूरी है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Prime Minister Narendra Modi addresses the Indian community in Jakarta, highlighting India-Indonesia ties and referring to the Bollywood film Kuch Kuch Hota Hai.
इंडोनेशिया में पीएम मोदी का फिल्मी अंदाज, बोले- भारत और इंडोनेशिया मिलें तो 'कुछ कुछ' नहीं, 'बहुत कुछ' होता है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित एक भव्य सामुदायिक कार्यक्रम में भारतीय प्रवासियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को खास अंदाज में पेश करते हुए बॉलीवुड फिल्म 'कुछ कुछ होता है' का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि इंडोनेशिया में यह फिल्म बेहद लोकप्रिय है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "मैंने राष्ट्रपति प्रबोवो से भी कहा कि जब भारत और इंडोनेशिया साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं, तो सिर्फ 'कुछ कुछ' नहीं, बल्कि 'बहुत कुछ' होता है।" उनके इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं। सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने पर जताया आभार प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किए जाने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों और इंडोनेशिया में रहने वाले भारतीय समुदाय का सम्मान है। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार दोनों देशों के बीच मजबूत मित्रता, विश्वास और लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों का प्रतीक है। राष्ट्रपति प्रबोवो के बयान का किया जिक्र पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि "उनमें भारत का DNA है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि यह डीएनए किसी प्रयोगशाला का नहीं, बल्कि दोनों देशों की साझा संस्कृति, सभ्यता, परंपरा और आपसी विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति प्रबोवो के इस बयान ने करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया। भारत और इंडोनेशिया सिर्फ दोस्त नहीं, पड़ोसी भी प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से ही नहीं, बल्कि भौगोलिक रूप से भी बेहद करीब हैं। उन्होंने बताया कि भारत के ग्रेट निकोबार द्वीप और इंडोनेशिया के आचेह प्रांत के बीच केवल 150 किलोमीटर की दूरी है, जो दोनों देशों की निकटता को दर्शाती है। भारत की विकास यात्रा का भी किया जिक्र अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की तेज आर्थिक प्रगति और बुनियादी ढांचे के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हाल ही में देश में शुरू हुई नई रिफाइनरी में इतना स्टील इस्तेमाल हुआ है कि उससे 40 एफिल टावर या 5 बुर्ज खलीफा बनाए जा सकते हैं। वहीं, इसमें लगी केबल की लंबाई इतनी है कि उससे पूरी पृथ्वी को दो बार लपेटा जा सकता है। पीएम ने कहा कि आज भारत रिफाइनिंग क्षमता के मामले में दुनिया के शीर्ष चार देशों में शामिल है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की भी दी जानकारी प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्र सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत मात्र 20 रुपये सालाना में 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे करीब 60 करोड़ लोग जुड़े हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि रोजाना करीब डेढ़ रुपये के प्रीमियम पर जीवन बीमा की सुविधा मिल रही है, जो एक कप कॉफी की कीमत से भी कम है। भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगी नई मजबूती प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, निवेश, पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों की साझेदारी आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास को नई गति मिलेगी।  

Deepshikha जुलाई 8, 2026 0
Congress leader Digvijaya Singh addressing the media over the Ayodhya Ram Mandir Trust meeting and alleged donation irregularities.

राम मंदिर ट्रस्ट बैठक के बाद कांग्रेस का हमला, दिग्विजय सिंह ने VHP-RSS और SIT जांच पर उठाए सवाल

A student wearing a Tulsi mala and tilak outside a school in Purulia amid a dispute over religious symbols and transfer certificate allegations.

तुलसी की माला और तिलक को लेकर विवाद: छात्रा को टीसी देने का आरोप, स्कूल ने किया इनकार

Priests at Haridwar's Mansa Devi Temple wearing pocketless kurtas as part of new measures to ensure transparency in temple donations.

राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद बड़ा फैसला: मनसा देवी मंदिर में पुजारी अब बिना जेब वाले कुर्ते पहनेंगे

CISF personnel deployed at a coal mining site after receiving new powers to take action against illegal coal mining and coal theft under the MMDR Act.
कोयला चोरी पर सरकार का बड़ा एक्शन, CISF को मिले नए कानूनी अधिकार; अवैध खनन माफियाओं पर कसेगा शिकंजा

नई दिल्ली: अवैध कोयला खनन और कोयला चोरी पर सख्ती बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को बड़े कानूनी अधिकार सौंप दिए हैं। अब CISF खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) के तहत सीधे कार्रवाई कर सकेगी। सरकार का मानना है कि यह कदम "जीरो कोल लीकेज प्लान" को लागू करने में अहम साबित होगा। अब सीधे दर्ज कर सकेगी केस नए अधिकार मिलने के बाद CISF अवैध खनन, कोयला चोरी और तस्करी के मामलों में बिना किसी अन्य एजेंसी का इंतजार किए सीधे अदालत में मामला दर्ज करा सकेगी। इसके अलावा बल को संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी, तलाशी और अवैध रूप से निकाले गए कोयले व अन्य खनिजों को जब्त करने का अधिकार भी मिल गया है। मशीनें और वाहन भी होंगे जब्त CISF अब अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, भारी मशीनें और परिवहन में उपयोग किए जा रहे वाहनों को मौके पर ही जब्त कर सकेगी। इससे कोयला चोरी और तस्करी के नेटवर्क पर सीधा असर पड़ने की उम्मीद है। अधिकारियों ने संभाली कमान नए अधिकार मिलने के बाद CISF के डीआईजी के. पी. सिंह आसनसोल के शीतलपुर स्थित CISF मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने वरिष्ठ कमांडेंट राहुल सिंह गौतम और अधिकारियों के साथ बैठक कर नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) मुख्यालय पहुंचकर सीएमडी सतीश झा के साथ भी बैठक की और अवैध खनन रोकने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। हाई लेवल बैठक के बाद लिया गया फैसला यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद लागू किया जा रहा है। विशेष रूप से झारखंड के धनबाद और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती कोयला चोरी की घटनाओं को देखते हुए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। 'जीरो कोल लीकेज प्लान' पर जोर सरकार ने संवेदनशील खनन क्षेत्रों में CISF की तैनाती बढ़ाने और क्विक रिस्पांस टीम (QRT) गठित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अवैध कोयला परिवहन रोकने के लिए GST अधिकारियों की मदद से प्रत्येक कोयला वाहन के ई-वे बिल का मौके पर सत्यापन भी किया जाएगा। माफियाओं पर होगी कड़ी कार्रवाई सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय संपदा की चोरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। CISF को मिले नए कानूनी अधिकारों से अवैध खनन और कोयला तस्करी में शामिल माफियाओं के खिलाफ तेज और प्रभावी कार्रवाई संभव होगी।  

Deepshikha जुलाई 8, 2026 0
Devotees participate in Guruji's Prakatya Diwas celebrations with satsang, bhajans, and prayers at Westend Mall, Janakpuri, New Delhi.

जनकपुरी के वेस्टएंड मॉल में धूमधाम से मनाया गया गुरुजी का प्राकट्य दिवस, भव्य सत्संग में उमड़े श्रद्धालु

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हावड़ा के बालुहाटी में इंडियन ऑयल स्टेशन पर गैस रिसाव, समय रहते काबू; बड़ा हादसा टला

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Badrinath Temple in Uttarakhand, where authorities have ordered a high-level probe into alleged irregularities in donation management.
राम मंदिर के बाद अब बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा विवाद, जांच के लिए हाई लेवल कमेटी गठित; PA सस्पेंड, FIR दर्ज

देहरादून: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं के बाद अब उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में भी दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर विवाद सामने आया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है। PA निलंबित, दर्ज हुई FIR श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चेयरमैन कार्यालय में तैनात पर्सनल असिस्टेंट (PA) प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर दिया है। उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। समिति का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी। तीन सदस्यीय हाई लेवल कमेटी करेगी जांच जांच समिति की अध्यक्षता गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप करेंगे। समिति में एनएचएम के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी और स्वास्थ्य विभाग के निदेशक (वित्त) जगत सिंह चौहान को सदस्य बनाया गया है। समिति को मामले की विस्तृत जांच करने, संबंधित अधिकारियों और विशेषज्ञों से जानकारी लेने तथा भविष्य में दान प्रबंधन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दान प्रबंधन प्रणाली की होगी समीक्षा जांच के दौरान मंदिर में चढ़ावे के संग्रह, रिकॉर्ड, लेखा-जोखा और वित्तीय प्रबंधन की प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाएगी। सरकार का कहना है कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है। मायावती ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख Mayawati ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए राम मंदिर और बद्रीनाथ धाम दोनों मामलों की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी पूरी जांच होनी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य में धार्मिक संस्थानों के दान और चढ़ावे के प्रबंधन में किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना न रहे। सरकार ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा उत्तराखंड सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच समिति ने मामले से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।  

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