पटना: बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली एक बड़ी परियोजना को मंजूरी मिली है। बक्सर से भागलपुर तक 336 किलोमीटर लंबा 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा। प्रस्तावित एक्सप्रेसवे बिहार के 13 जिलों को जोड़ेगा और इसके बनने से लंबी दूरी के सफर का समय काफी कम होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में परियोजना को मंजूरी दी गई। यह एक्सप्रेसवे दक्षिण बिहार के कई जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के साथ व्यापार, उद्योग और माल ढुलाई के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किन 13 जिलों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे? बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे बिहार के बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, नवादा, जमुई, बांका और भागलपुर से होकर गुजरेगा। इससे इन जिलों के बीच आवागमन आसान होगा। बक्सर में एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है। इसके बाद दिल्ली और लखनऊ की तरफ से आने वाले वाहनों को पटना के भीड़भाड़ वाले रास्तों से गुजरने की जरूरत कम हो सकती है। बक्सर से भागलपुर का सफर होगा काफी तेज फिलहाल बक्सर से भागलपुर पहुंचने में सड़क की स्थिति और ट्रैफिक के आधार पर करीब 10 से 12 घंटे तक लग सकते हैं। एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह यात्रा करीब 4 से 5 घंटे में पूरी होने की उम्मीद है। इसका फायदा आम यात्रियों के साथ-साथ मालवाहक वाहनों को भी मिलेगा। लंबी दूरी की यात्रा में समय और ईंधन दोनों की बचत हो सकती है। सोन, पुनपुन, फल्गु और किऊल नदी पर बनेंगे पुल प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के रास्ते में कई नदियां आएंगी। इन्हें पार करने के लिए बड़े पुल और जरूरत के अनुसार एलिवेटेड स्ट्रक्चर बनाए जाने की योजना है। सोन, पुनपुन, फल्गु और किऊल जैसी नदियों पर बनने वाले पुल इस परियोजना के अहम हिस्से होंगे। ग्रीनफील्ड और एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे क्यों खास? यह परियोजना ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगी। इसका मतलब है कि इसे किसी मौजूदा सड़क को चौड़ा करके नहीं, बल्कि नए मार्ग पर विकसित किया जाएगा। साथ ही एक्सप्रेसवे एक्सेस कंट्रोल्ड होगा। आम सड़क की तरह गांव, बाजार या स्थानीय रास्तों से सीधे वाहन इसमें प्रवेश नहीं कर सकेंगे। इसके लिए निर्धारित एंट्री और एग्जिट प्वाइंट बनाए जाएंगे। योजना के अनुसार करीब 10 प्रमुख प्रवेश और निकास बिंदु बनाए जाने हैं। न चौराहे होंगे, न ट्रैफिक सिग्नल एक्सप्रेसवे पर सामान्य सड़कों की तरह जगह-जगह चौराहे और ट्रैफिक सिग्नल नहीं होंगे। रेलवे क्रॉसिंग की जरूरत भी नहीं होगी। स्थानीय सड़कों और आबादी वाले इलाकों को जोड़ने के लिए इंटरचेंज, फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए जाएंगे। इससे मुख्य एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार बनाए रखने में मदद मिलेगी। कई प्रमुख सड़कों से जुड़ेगा एक्सप्रेसवे बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे को बिहार की कई महत्वपूर्ण सड़कों से जोड़ने की योजना है। इनमें मोकामा-मिर्जाचौकी एनएच-33 ग्रीनफील्ड फोरलेन, सुल्तानगंज-अगुवानी फोरलेन अप्रोच रोड, मुंगेर-सबौर गंगा पथ और एनएच-80 शामिल हैं। इन कनेक्शनों से दक्षिण और पूर्वी बिहार के अलग-अलग हिस्सों के बीच सड़क नेटवर्क और मजबूत होने की उम्मीद है। एक्सप्रेसवे के आसपास बनेंगे इंडस्ट्रियल हब सरकार की योजना इस परियोजना को केवल बेहतर सड़क तक सीमित रखने की नहीं है। एक्सप्रेसवे के आसपास बड़े लैंड बैंक, इंडस्ट्रियल हब, इकोनॉमिक जोन और लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित करने की योजना है। इससे नए उद्योगों के लिए बेहतर आधार तैयार हो सकता है और बिहार में निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। व्यापार और रोजगार के लिए भी अहम परियोजना एक्सप्रेसवे बनने के बाद कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही तेज हो सकती है। उद्योगों को दूसरे राज्यों के बाजारों तक पहुंचने में भी सुविधा मिलेगी। इसके आसपास औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियां बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। ऐसे में इस परियोजना को बिहार के सड़क ढांचे के साथ-साथ आर्थिक विकास के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। PPP मॉडल पर विकसित करने की तैयारी बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित करने की योजना है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब डीपीआर कंसल्टेंट और ट्रांजेक्शन एडवाइजर की नियुक्ति जैसी प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई जाएंगी। फिलहाल परियोजना शुरुआती चरण में है। डीपीआर और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद निर्माण की समयसीमा को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।
Bihar Development Project: बिहार सरकार ने राज्य में खनिज संसाधनों के इस्तेमाल और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए बड़ा रोडमैप तैयार किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मुताबिक, नवंबर तक राज्य में 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम किया जा रहा है। वहीं, खनन गतिविधियां शुरू होने से सरकार को 6 से 7 हजार करोड़ रुपये तक अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद जताई गई है। 44 माइनिंग ब्लॉकों में सर्वे, 28 पर काम आगे बढ़ा मुख्यमंत्री के अनुसार बिहार में खनिज संसाधनों की संभावनाओं को लेकर कई ब्लॉकों का अध्ययन कराया गया है। कुल 44 माइनिंग ब्लॉकों में से 28 में सर्वे का काम आगे बढ़ चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि 30 सितंबर से पहले 30 से अधिक माइनिंग ब्लॉकों का आवंटन कर दिया जाए। अधिकारियों को पूरी प्रक्रिया को निर्धारित समय में पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई है। 15 अक्टूबर से खनन शुरू करने की तैयारी सरकार 15 अक्टूबर से बिहार में खनन गतिविधियां शुरू करने की दिशा में पहल कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए पत्थर समेत विभिन्न खनिजों की जरूरत है। ऐसे में उपलब्ध संसाधनों का योजनाबद्ध तरीके से इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार का दावा है कि खनिज संसाधनों से मिलने वाली रॉयल्टी का इस्तेमाल राज्य के विकास और जनता के हित में किया जाएगा। इन जिलों में खनिज संसाधनों की संभावना सरकार के अनुसार, रोहतास में लाइमस्टोन, औरंगाबाद में बड़ा मिनरल बेल्ट, जबकि जहानाबाद और जमुई में मैग्नेट से जुड़े संसाधनों की संभावना है। इसके अलावा गया, बांका और भागलपुर में भी खनिज संसाधनों की उपलब्धता का उल्लेख किया गया है। हालांकि, खनन गतिविधियों के विस्तार के साथ पर्यावरण और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक विरासतों के संरक्षण की चुनौती भी महत्वपूर्ण होगी। सरकार की ओर से कहा गया है कि विकास परियोजनाओं के दौरान विरासतों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। निवेश से रोजगार और राजस्व बढ़ने की उम्मीद मुख्यमंत्री ने नवंबर तक 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य की बात कही है। सरकार का अनुमान है कि खनन और उससे जुड़ी गतिविधियों से 6 से 7 हजार करोड़ रुपये तक राजस्व प्राप्त हो सकता है। अगर निवेश और खनन योजनाएं निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक आगे बढ़ती हैं, तो इससे बिहार में उद्योग, बुनियादी ढांचे और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। निवेशकों को सरकार का भरोसा मुख्यमंत्री ने निवेशकों से बिहार में उद्योग स्थापित करने की अपील की है। सरकार की ओर से निवेशकों को विभिन्न रियायतें और सहयोग देने का भरोसा दिया गया है।
पटना: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी को मिली हार के बाद बिहार की सियासत में नई रणनीति के संकेत दिखाई देने लगे हैं। चुनाव परिणाम के बाद पार्टी और राज्य सरकार की ओर से सवर्ण मतदाताओं से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता बढ़ी है। राजनीतिक हलकों में इसे बीजेपी के पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बांकीपुर उपचुनाव का मुकाबला केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहा। यूजीसी से जुड़े मुद्दे, पेपर लीक, भरत तिवारी एनकाउंटर और जेन-जी के विरोध जैसे मुद्दों ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया। इस चुनाव में जन सुराज के प्रशांत किशोर की जीत के बाद बीजेपी के सामने अपने पारंपरिक समर्थक वर्ग को लेकर नए सिरे से रणनीति बनाने की चुनौती खड़ी हुई है। सवर्ण आयोग ने जिलों में नियुक्त किए नोडल अधिकारी सरकार की ओर से सवर्ण आयोग की गतिविधियों को जिला स्तर तक पहुंचाने की दिशा में कदम उठाया गया है। आयोग ने विभिन्न जिलों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है। इसका उद्देश्य लोगों की शिकायतों को स्थानीय स्तर पर दर्ज कर उनका समाधान कराने की प्रक्रिया को आसान बनाना है, ताकि लोगों को अपनी समस्याएं लेकर बार-बार पटना न आना पड़े। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब सवर्ण समाज से जुड़े कई मुद्दे राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक मदद और नौकरी का ऐलान आरा में भरत तिवारी के एनकाउंटर को लेकर भी सरकार पर सवाल उठते रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। हालांकि, परिवार की ओर से न्याय की मांग अभी भी उठाई जा रही है। सरकार के इस फैसले को राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला चुनावी दौर में सवर्ण समाज के बीच चर्चा का प्रमुख विषय रहा था। EWS छात्रों के लिए मुफ्त कोचिंग पर जोर सरकार सवर्ण आयोग की सिफारिशों पर भी विचार कर रही है। इनमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त कोचिंग का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा सरकार द्वारा संचालित आवासीय विद्यालयों में EWS और सवर्ण वर्ग के विद्यार्थियों के दाखिले से जुड़े सुझावों पर भी विचार किया जा रहा है। इससे शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़े अवसरों को बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है। छात्रों की शिकायतों के लिए बनेगा विशेष पोर्टल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में छात्रों के लिए एक विशेष पोर्टल शुरू करने की घोषणा की थी। इस पोर्टल के जरिए छात्र स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर, परीक्षाओं और अन्य शैक्षणिक जरूरतों से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। सरकार का दावा है कि इन शिकायतों के समाधान के लिए समयबद्ध व्यवस्था बनाई जाएगी और करीब एक महीने के भीतर समस्याओं के निपटारे की कोशिश की जाएगी। पोर्टल के सोमवार से शुरू होने की बात कही गई है। बांकीपुर परिणाम ने बढ़ाई राजनीतिक चिंता बांकीपुर में बीजेपी की हार के बाद पार्टी के सामने सिर्फ एक सीट गंवाने की चुनौती नहीं है, बल्कि अपने पारंपरिक समर्थक वर्ग के बीच भरोसा बनाए रखने का सवाल भी खड़ा हुआ है। प्रशांत किशोर की जीत ने यह संकेत दिया है कि रोजगार, शिक्षा, विकास और स्थानीय मुद्दे जातीय समीकरणों के साथ मिलकर चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। अब सरकार की ओर से सवर्ण आयोग, EWS छात्रों, शिकायत निवारण और भरत तिवारी के परिवार को सहायता जैसे मुद्दों पर उठाए जा रहे कदमों को इसी व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है।
लखीसराय। बिहार के लखीसराय जिले में सावन की तीसरी सोमवारी पर अशोकधाम मंदिर के पास बड़ा हादसा हो गया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच अचानक भगदड़ मच गई। हादसे में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। CM सम्राट चौधरी ने किया मुआवजे का ऐलान हादसे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने घायलों के समुचित और तत्काल इलाज के लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश भी दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए घटना को बेहद दुखद बताते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। नीतीश कुमार और संजय झा ने भी जताया दुख पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जेडीयू नेता संजय झा ने भी अशोकधाम मंदिर हादसे पर दुख जताया। दोनों नेताओं ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की। ट्रेन आने के बाद मची अफरा-तफरी लखीसराय डीएम शैलेंद्र कुमार के अनुसार, अशोकधाम हॉल्ट पर एक साथ दोनों ओर से ट्रेन आ गई थी। ट्रेन को देखकर कुछ युवकों ने अचानक भागना शुरू कर दिया। इसी दौरान बिजली का एक पोल गिर गया। पोल गिरने के बाद वहां करंट फैलने की अफवाह फैल गई। हालांकि प्रशासन के मुताबिक उस समय बिजली की आपूर्ति बंद थी और तार भी कवर किया गया था। लेकिन अफवाह के कारण श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई और देखते ही देखते भगदड़ की स्थिति बन गई। अफवाह के बाद मची भगदड़ अफरा-तफरी के दौरान कई श्रद्धालु भीड़ में दब गए। हादसे में महिला श्रद्धालुओं की मौत हुई और कई अन्य लोग घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। प्रशासन की टीमें स्थिति को नियंत्रित करने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में जुटी हैं। हादसे के बाद मंदिर परिसर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।
पटना: बिहार में सड़क और रेल नेटवर्क के साथ अब हवाई कनेक्टिविटी को भी विस्तार देने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार छोटे शहरों, पर्यटन स्थलों और प्रमुख धार्मिक केंद्रों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने संशोधित उड़ान योजना (RCS 6.0) को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में नए एयरपोर्ट, हेलीपैड और मौजूदा हवाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर कई अहम निर्देश दिए गए। इन 5 जिलों में हवाई सुविधाओं पर जोर सरकार ने गोपालगंज के सबेया, अररिया के फारबिसगंज, किशनगंज, सारण और बेगूसराय के उलाव में हवाई सुविधाओं के विकास की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा औरंगाबाद, बांका, खगड़िया, नवादा, शेखपुरा और सीतामढ़ी जैसे जिलों में भी हेलीपैड या अन्य हवाई सुविधाएं विकसित करने की संभावनाएं तलाशने को कहा गया है। राजगीर से शाहाबाद तक हेलीपैड की योजना सरकार की योजना सिर्फ नए एयरपोर्ट तक सीमित नहीं है। राजगीर, गया, सासाराम, कैमूर और शाहाबाद क्षेत्र में हेलीपैड विकसित करने पर भी काम करने का निर्देश दिया गया है। इन स्थानों के चयन में इस बात को प्राथमिकता देने को कहा गया है कि हवाई सुविधा का लाभ आसपास के कई जिलों को मिल सके। साथ ही धार्मिक, ऐतिहासिक, पर्यटन और कारोबारी गतिविधियों को भी इससे बढ़ावा मिले। जमीन और तकनीकी जरूरतों का होगा आकलन मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रस्तावित एयरपोर्ट और हेलीपैड के लिए जल्द से जल्द जमीन की उपलब्धता, स्थान की उपयुक्तता, संभावित यात्रियों की संख्या और तकनीकी जरूरतों का आकलन करने का निर्देश दिया है। जिला प्रशासन के साथ समन्वय कर जमीन और अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। पर्यटन और कारोबार को मिल सकता है बड़ा फायदा सरकार का मानना है कि बेहतर हवाई कनेक्टिविटी से बिहार में पर्यटन, व्यापार, उद्योग, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है। राजगीर, गया, कैमूर और अन्य ऐतिहासिक एवं धार्मिक क्षेत्रों तक हवाई पहुंच आसान होने से पर्यटकों के लिए यात्रा सुविधाजनक हो सकती है। इससे स्थानीय होटल, परिवहन, छोटे कारोबार और अन्य सेवाओं को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। केंद्र के साथ मिलकर तैयार होंगे प्रस्ताव राज्य सरकार बिहार की जरूरतों के हिसाब से प्रस्ताव तैयार कर उन्हें केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों के साथ आगे बढ़ाएगी। अगर योजना जमीन पर उतरती है, तो बिहार के कई ऐसे जिले और पर्यटन केंद्र हवाई नेटवर्क से जुड़ सकते हैं, जहां फिलहाल एयर कनेक्टिविटी सीमित है। इससे राज्य में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
पटना: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजे के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। जन सुराज के विधायक प्रशांत किशोर ने दावा किया है कि उपचुनाव के परिणाम ने बिहार सरकार के कामकाज और राजनीतिक रुख पर असर डाला है। उन्होंने कहा कि सरकार का चरित्र बदलना शुरू हो गया है और आने वाले समय में नेतृत्व में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। बांकीपुर में आभार यात्रा के दौरान आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि उपचुनाव के नतीजे के बाद सरकार के बयानों और प्राथमिकताओं में बदलाव नजर आने लगा है। ‘अब एनकाउंटर की बात नहीं हो रही’ प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम आने के बाद से बिहार में एनकाउंटर और ‘हाफ एनकाउंटर’ जैसे बयानों की चर्चा कम हुई है। उन्होंने दावा किया कि पहले जिस तरह जाति और धर्म के आधार पर कार्रवाई की बातें कही जा रही थीं, अब सरकार का फोकस दूसरी चीजों पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एनकाउंटर के नाम पर जिन लोगों की हत्या हुई, उनके परिवारों को अब मुआवजा और नौकरी देने की बात की जा रही है तथा दोषियों पर कार्रवाई की चर्चा हो रही है। हालांकि, प्रशांत किशोर के ये आरोप और दावे राजनीतिक बयान के तौर पर सामने आए हैं। इन पर सरकार या संबंधित पक्ष का विस्तृत जवाब इस खबर में उपलब्ध नहीं है। ‘अब फैक्ट्रियों और रोजगार की बात हो रही’ प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर के परिणाम के बाद सरकार के राजनीतिक संदेश में बदलाव दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, अब मुख्यमंत्री की ओर से रात 11 बजे तक पढ़ाई की व्यवस्था और बिहार में फैक्ट्रियां लगाने तथा रोजगार पैदा करने जैसी बातें कही जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के रुख में बदलाव कितना स्थायी और कितना ईमानदार है, यह आने वाला समय बताएगा। लेकिन लोगों को यह बदलाव दिखाई देने लगा है। ‘सम्राट चौधरी को जाना ही पड़ेगा’ प्रशांत किशोर ने अपने भाषण में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर उपचुनाव से पहले ही उन्होंने कहा था कि यदि बीजेपी यहां से हारती है तो नेतृत्व में बदलाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक गलियारों में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है और उनका मानना है कि सम्राट चौधरी को पद छोड़ना पड़ेगा। प्रशांत किशोर ने यह भी दावा किया कि अधिकतम उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तक मौजूदा नेतृत्व को समय मिल सकता है, लेकिन उसके बाद बदलाव तय है। हालांकि, यह प्रशांत किशोर का राजनीतिक आकलन और दावा है। नेतृत्व परिवर्तन को लेकर सरकार या बीजेपी की ओर से किसी आधिकारिक फैसले की जानकारी इस रिपोर्ट में नहीं है। ‘लोगों के वोट की ताकत दिख रही है’ प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर के मतदाताओं के फैसले ने सरकार को अपना राजनीतिक रुख बदलने पर मजबूर किया है। उन्होंने इसे लोगों के वोट की ताकत बताया। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह विधायक के तौर पर अपना काम शुरू करने से पहले क्षेत्र के लोगों का आभार व्यक्त कर रहे हैं। आने वाले समय में वह विधायक की भूमिका में सक्रिय रूप से काम करेंगे। बिहार की राजनीति में बढ़ेगी हलचल? प्रशांत किशोर के बयान ऐसे समय आए हैं जब बिहार की राजनीति में नेतृत्व, कानून-व्यवस्था, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर राजनीतिक दल एक-दूसरे को घेर रहे हैं। उनका दावा कि सरकार का ‘चरित्र’ बदल रहा है और नेतृत्व भी बदलेगा, आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है। हालांकि, नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
पटना: बिहार की राजनीति में गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई एक बैठक ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। कैबिनेट की बैठक खत्म होने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बीजेपी कोटे के मंत्रियों के साथ अलग से बंद कमरे में बैठक की। बैठक का कोई आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिसके कारण इसके उद्देश्य को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि एनडीए सरकार में शामिल अन्य सहयोगी दलों के मंत्रियों को इस बैठक में शामिल नहीं किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मुख्यमंत्री ने केवल बीजेपी के मंत्रियों के साथ अलग बैठक क्यों की और क्या इसके पीछे सरकार के कामकाज से आगे कोई राजनीतिक या संगठनात्मक रणनीति भी थी? कैबिनेट खत्म होते ही बीजेपी मंत्रियों को बुलाया गया जानकारी के मुताबिक, पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास पर कैबिनेट बैठक समाप्त होने के बाद बीजेपी कोटे के मंत्रियों को अलग से बुलाया गया। बैठक में सिर्फ बीजेपी के मंत्री मौजूद रहे। बैठक को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, बताया गया है कि मुख्यमंत्री ने मंत्रियों के विभागीय कामकाज और सरकार की योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। बैठक के बाद मंत्री केदार गुप्ता ने आगामी समीक्षा बैठकों का जिक्र किया। इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि प्रशासनिक और विभागीय कामकाज भी बैठक के एजेंडे का हिस्सा रहा होगा। बंद कमरे की बैठक से बढ़ा सियासी सस्पेंस बैठक का स्वरूप और इसमें केवल बीजेपी मंत्रियों की मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। एनडीए की साझा सरकार में जेडीयू और अन्य सहयोगी दल भी शामिल हैं। ऐसे में केवल बीजेपी कोटे के मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री की अलग बैठक को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, बैठक को लेकर अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जिससे यह पुष्टि हो कि इसमें किसी बड़े राजनीतिक फैसले या गठबंधन से जुड़े मुद्दे पर चर्चा हुई। इसलिए फिलहाल बैठक को लेकर सामने आ रही राजनीतिक अटकलों को संभावनाओं के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। क्या विभागीय समीक्षा या चुनावी रणनीति? राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि मुख्यमंत्री और बीजेपी मंत्रियों के बीच हुई इस बैठक का वास्तविक उद्देश्य क्या था। इसके पीछे कई संभावनाएं देखी जा रही हैं: मंत्रियों के विभागीय कामकाज की समीक्षा सरकार की योजनाओं की प्रगति पर चर्चा आगामी समीक्षा बैठकों की तैयारी संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर रणनीति इनमें से किसी भी संभावना की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। मंत्रियों की चुप्पी ने बढ़ाई चर्चा बैठक समाप्त होने के बाद कई मंत्री मीडिया के सवालों से बचते नजर आए। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मंत्री मुख्यमंत्री आवास के पिछले रास्ते से भी बाहर निकले। मंत्रियों की इस तरह की चुप्पी ने बैठक को लेकर उत्सुकता और बढ़ा दी। हालांकि, किसी बैठक के बाद मीडिया से दूरी बनाना अपने आप में किसी बड़े राजनीतिक फैसले का प्रमाण नहीं माना जा सकता। बांकीपुर उपचुनाव और प्रशांत किशोर के बाद बदला माहौल? बिहार में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों ने बीजेपी के सामने नई चुनौतियां जरूर खड़ी की हैं। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजे और प्रशांत किशोर की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता को लेकर भी राज्य में चर्चा जारी है। ऐसे माहौल में बीजेपी के मंत्रियों की अलग बैठक को राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि बैठक में चुनावी रणनीति या किसी बड़े संगठनात्मक फैसले पर चर्चा हुई। अब सबसे बड़ा सवाल क्या? फिलहाल मुख्यमंत्री आवास की इस बैठक को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि कैबिनेट की बैठक के तुरंत बाद केवल बीजेपी कोटे के मंत्रियों के साथ अलग बैठक की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह महज विभागीय समीक्षा थी, या फिर बिहार बीजेपी की आगामी राजनीतिक रणनीति पर भी चर्चा हुई? क्या सरकार और संगठन के बीच किसी नए रोडमैप पर विचार हुआ? इन सवालों का स्पष्ट जवाब बैठक का आधिकारिक एजेंडा या आने वाले दिनों में सरकार और बीजेपी की ओर से सामने आने वाले बयान ही दे सकते हैं।
पटना: बिहार में मानसून के बीच मौसम के अचानक बदले मिजाज ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। राज्य के बांका, लखीसराय और पटना जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से कुल 9 लोगों की मौत हो गई। लगातार हो रही वज्रपात की घटनाओं के बीच इन हादसों ने ग्रामीण और खुले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मृतकों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की और सभी मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान देने का निर्देश दिया है। बांका में 5, लखीसराय में 3 और पटना में एक मौत मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, वज्रपात की सबसे अधिक घटनाएं बांका जिले में हुईं, जहां 5 लोगों की जान चली गई। इसके अलावा लखीसराय में 3 और पटना में एक व्यक्ति की मौत हुई है। आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं के बाद संबंधित इलाकों में शोक का माहौल है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। मृतकों के परिजनों को मिलेंगे 4-4 लाख रुपये मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वज्रपात में जान गंवाने वाले सभी लोगों के आश्रितों को तत्काल चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। सरकार की ओर से संबंधित अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि प्रभावित परिवारों को सहायता पहुंचाने में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। प्रशासन को राहत और सहायता से जुड़ी कार्रवाई तेजी से पूरी करने का निर्देश दिया गया है। खराब मौसम में घर से बाहर नहीं निकलने की अपील घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री ने लोगों से खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जब मौसम खराब हो और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका हो, तब लोगों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। खासकर खेतों, खुले मैदानों और अन्य खुले स्थानों में मौजूद लोगों को मौसम में बदलाव के संकेत मिलते ही सुरक्षित स्थान पर चले जाने की सलाह दी गई है। पेड़ और बिजली के खंभों से रहें दूर वज्रपात के दौरान पेड़ के नीचे खड़ा होना बेहद जोखिमपूर्ण हो सकता है। प्रशासन की ओर से लोगों को पेड़ों, बिजली के खंभों और खुले स्थानों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। मानसून के दौरान बिहार में वज्रपात की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग की चेतावनियों पर नजर रखना और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना जरूरी है। 9 मौतों के बाद फिर बढ़ी चिंता बिहार में एक ही दिन में तीन जिलों में 9 लोगों की मौत ने मानसून के दौरान वज्रपात से होने वाले नुकसान को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बारिश कमजोर होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर गरज-चमक वाले बादल बन रहे हैं, जिससे अचानक बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में किसानों, मजदूरों और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। मौसम खराब होते ही सुरक्षित स्थान पर पहुंचना जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है। खबर का सार कुल मौतें: 9 बांका: 5 मौतें लखीसराय: 3 मौतें पटना: 1 मौत मुआवजा: प्रत्येक मृतक के आश्रित को 4 लाख रुपये मुख्यमंत्री की अपील: खराब मौसम में अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और सुरक्षित स्थान पर रहें।
बिहार के दरभंगा जिले की अलीनगर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक मैथिली ठाकुर ने बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को मुख्यमंत्री के सामने रखा और जल्द समाधान की मांग की। मैथिली ठाकुर ने खास तौर पर घनश्यामपुर प्रखंड में सरकारी डिग्री कॉलेज की स्थापना और अलीनगर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न अस्पतालों में डॉक्टरों तथा स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति का मुद्दा उठाया। घनश्यामपुर में डिग्री कॉलेज की मांग मैथिली ठाकुर ने मुख्यमंत्री को बताया कि घनश्यामपुर प्रखंड में फिलहाल कोई डिग्री कॉलेज नहीं है। इसके कारण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को स्नातक स्तर की पढ़ाई के लिए दूसरे क्षेत्रों या जिलों का रुख करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए बाहर जाकर पढ़ाई करना अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता है। वहीं छात्राओं के सामने आवागमन और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी रहती हैं। इन परिस्थितियों के कारण कई मेधावी विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। विधायक ने मुख्यमंत्री से घनश्यामपुर में सरकारी डिग्री महाविद्यालय की स्थापना के लिए आवश्यक बजटीय प्रावधान करने की मांग की, ताकि स्थानीय विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़े। अस्पतालों में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी का मुद्दा बैठक के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी मैथिली ठाकुर ने मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने बताया कि अलीनगर विधानसभा क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घनश्यामपुर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तारडीह और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कैथवार, कुर्सों नादियामी तथा पुतई में चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है। इन स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टर, जीएनएम, एएनएम, स्टाफ नर्स, ड्रेसर और फार्मासिस्ट जैसे पद लंबे समय से रिक्त बताए गए हैं या उपलब्ध कर्मियों की संख्या जरूरत के मुकाबले कम है। विधायक के अनुसार इसका सीधा असर ग्रामीण आबादी की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। खासकर गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिलने में परेशानी होती है। तीनों प्रखंडों के अस्पतालों में नियुक्ति की मांग मैथिली ठाकुर ने मुख्यमंत्री से अलीनगर विधानसभा क्षेत्र के तीनों प्रखंडों—अलीनगर, तारडीह और घनश्यामपुर—के अस्पतालों में आवश्यक संख्या में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति करने की मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सरकार के सामने रखना उनकी जिम्मेदारी है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में सुधार से स्थानीय लोगों को सीधे लाभ मिलेगा। मुलाकात के दौरान कम दिखी मुस्कान, विधायक ने खुद बताई वजह मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान मैथिली ठाकुर के चेहरे पर सामान्य दिनों की तुलना में मुस्कान कुछ कम नजर आई। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चा हो सकती थी, लेकिन विधायक ने खुद इसकी वजह स्पष्ट कर दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री से मुलाकात से पहले उन्होंने अपने दांतों का इलाज कराया था। दांत में दर्द के कारण वह ठीक से मुस्कुरा नहीं पा रही थीं। इसी वजह से उनके चेहरे पर मुस्कान सामान्य से कम दिखाई दे रही थी। मैथिली ठाकुर की मुख्यमंत्री से यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अलीनगर क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर स्थानीय जरूरतों को सरकार के सामने रखने की कोशिश की जा रही है। अब इन मांगों पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर क्षेत्र के लोगों की नजर रहेगी।
पटना, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मुकेश कुमार और आकाश दीप को बिहार सरकार ने पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के पद पर नियुक्त किया है। दोनों खिलाड़ियों ने अब बिहार पुलिस में औपचारिक रूप से जॉइनिंग भी कर ली है। यह नियुक्ति बिहार सरकार की उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में सीधे नियुक्त करने वाली ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ नीति के तहत की गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सौंपा था नियुक्ति पत्र 24 जुलाई को पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुकेश कुमार और आकाश दीप को DSP पद का नियुक्ति पत्र सौंपा था। इस समारोह में दोनों क्रिकेटरों के अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल करने वाले कुल 19 खिलाड़ियों को अलग-अलग सरकारी पदों पर नियुक्ति दी गई थी। बिहार सरकार के अनुसार, इस साल अब तक 106 खिलाड़ियों को विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्ति दी जा चुकी है। सरकार का उद्देश्य खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में सम्मानजनक अवसर देना है। आकाश दीप और मुकेश कुमार का क्रिकेट करियर आकाश दीप बिहार के रोहतास जिले के रहने वाले हैं और भारतीय टीम के लिए टेस्ट क्रिकेट खेल चुके हैं। उन्होंने भारत के लिए 10 टेस्ट मैचों में 28 विकेट लिए हैं। वहीं मुकेश कुमार बिहार के गोपालगंज जिले से आते हैं। उन्होंने भारतीय टीम के लिए तीन टेस्ट मैच खेले हैं और सात विकेट हासिल किए हैं। दोनों तेज गेंदबाजों ने घरेलू क्रिकेट और भारतीय टीम में अपने प्रदर्शन के दम पर पहचान बनाई है। दोनों खिलाड़ी 2023 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा भी रहे हैं। इसी तरह की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों को देखते हुए बिहार सरकार ने उन्हें खेल कोटे के तहत DSP पद के लिए चुना। खेल से प्रशासन तक नई जिम्मेदारी DSP बनने के बाद दोनों खिलाड़ियों की भूमिका अब केवल क्रिकेट के मैदान तक सीमित नहीं रहेगी। बिहार पुलिस में उन्हें कानून-व्यवस्था और प्रशासन से जुड़ी जिम्मेदारियां निभानी होंगी। मुकेश कुमार और आकाश दीप ने इस नियुक्ति को बड़ी जिम्मेदारी बताया है। आकाश दीप ने नियुक्ति के बाद युवाओं और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने वाली इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए अपनी नई जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाने की बात कही। बिहार की खेल नीति के तहत खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी बिहार सरकार ने उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सीधे सरकारी नौकरी देने के लिए ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ नीति लागू की है। इसके तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के आधार पर सरकारी पद दिए जा रहे हैं। मुकेश कुमार और आकाश दीप को DSP बनाया जाना इसी नीति का बड़ा उदाहरण है। इससे पहले भी बिहार सरकार कई खिलाड़ियों को विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्त कर चुकी है। सरकार का कहना है कि इस तरह की पहल से युवाओं में खेल के प्रति रुचि बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को करियर सुरक्षा भी मिलेगी।
पटना, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। बैठक में बिहार में फिल्म निर्माण, शूटिंग के लिए राज्य की लोकेशन और फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद सुनील शेट्टी ने बताया कि वह अक्टूबर से बिहार में अपनी अगली फिल्म की शूटिंग शुरू करेंगे। अक्टूबर से शुरू होगी फिल्म की शूटिंग सुनील शेट्टी के मुताबिक उनकी फिल्म की शूटिंग बिहार में अक्टूबर से शुरू होने की योजना है। शूटिंग करीब 50 से 60 दिनों तक चल सकती है। फिल्म की शूटिंग के लिए बिहार के अलग-अलग हिस्सों में लोकेशन तलाशने और स्थानीय स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। अभिनेता ने बिहार में फिल्म निर्माण को लेकर सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि राज्य में फिल्मों की शूटिंग के लिए काफी संभावनाएं हैं। बिहार में ही फिल्म निर्माण पर जोर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के दौरान सिर्फ शूटिंग ही नहीं, बल्कि बिहार में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने को लेकर भी बातचीत हुई। सुनील शेट्टी ने कहा कि वह बिहार में फिल्म बनाएंगे और राज्य की प्रतिभाओं तथा स्थानीय संसाधनों को भी अवसर देने की दिशा में काम किया जा सकता है। इससे बिहार में फिल्म उद्योग को बढ़ावा मिलने और स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों तथा अन्य फिल्मकर्मियों के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। बिहार की फिल्म नीति पर भी हुई चर्चा मुलाकात में बिहार में फिल्म शूटिंग के लिए उपलब्ध सुविधाओं और राज्य सरकार की फिल्म नीति से जुड़े विषयों पर भी बातचीत हुई। सरकार चाहती है कि बिहार की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक लोकेशन को फिल्मों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाया जाए। सुनील शेट्टी की प्रस्तावित शूटिंग को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बिहार के दर्शकों को लेकर क्या बोले सुनील शेट्टी सुनील शेट्टी ने बिहार के दर्शकों को लेकर भी सकारात्मक बात कही। उनका कहना है कि बिहार में फिल्मों के लिए दर्शकों की मजबूत रुचि है और यहां फिल्म निर्माण का बेहतर माहौल तैयार किया जा सकता है। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद अभिनेता के बिहार में फिल्म शूट करने के ऐलान से राज्य में फिल्म उद्योग को लेकर नई उम्मीद जगी है। अब अक्टूबर में प्रस्तावित शूटिंग और फिल्म के प्रोजेक्ट से जुड़ी अन्य जानकारी का इंतजार है।
पटना: बिहार में 'हर घर तिरंगा अभियान 2026' के तहत निकाली गई तिरंगा यात्रा अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। कार्यक्रम राज्य सरकार की ओर से आयोजित किया गया था और इसके लिए बिहार कैबिनेट ने 6 करोड़ 12 लाख रुपये के खर्च को मंजूरी दी थी। इसके बावजूद 10 अगस्त को पटना में आयोजित मुख्य तिरंगा यात्रा में जेडीयू कोटे के दोनों उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव नजर नहीं आए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में निकली इस यात्रा में दोनों उपमुख्यमंत्रियों की गैरमौजूदगी ने एनडीए गठबंधन के भीतर राजनीतिक समीकरणों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, दोनों नेताओं की अनुपस्थिति के अलग-अलग कारण बताए गए हैं और इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है कि उनकी गैरमौजूदगी राजनीतिक असहमति की वजह से थी। सरकारी कार्यक्रम था, फिर भी JDU के दोनों डिप्टी CM अनुपस्थित यह तिरंगा यात्रा बीजेपी के संगठनात्मक कार्यक्रम के तौर पर नहीं, बल्कि राज्य सरकार के 'हर घर तिरंगा अभियान 2026' के तहत आयोजित की गई थी। बिहार कैबिनेट ने अभियान के लिए 6 करोड़ 12 लाख रुपये के व्यय को मंजूरी दी थी। कार्यक्रम के तहत पटना समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में तिरंगा यात्रा और रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई गई थी। राजधानी पटना में 10 अगस्त को आयोजित मुख्य यात्रा का नेतृत्व मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया। यात्रा जेपी गोलंबर से शुरू होकर कारगिल चौक तक गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग और सरकारी तंत्र से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे, लेकिन जेडीयू के दोनों उपमुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया। नेम प्लेट लगी, फिर हटानी पड़ी कार्यक्रम स्थल पर विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के नाम की नेम प्लेट लगाए जाने की बात भी सामने आई। इससे संकेत मिला कि दोनों नेताओं की कार्यक्रम में मौजूदगी की उम्मीद थी। लेकिन दोनों के नहीं पहुंचने के बाद उनकी नेम प्लेट हटा दी गई। इस घटनाक्रम को लेकर विपक्ष ने एनडीए सरकार पर सवाल उठाए और इसे गठबंधन के भीतर मतभेद से जोड़कर देखा। हालांकि, केवल किसी कार्यक्रम में नेताओं की अनुपस्थिति को राजनीतिक मतभेद का निश्चित प्रमाण नहीं माना जा सकता। दोनों नेताओं की गैरमौजूदगी के पीछे बताए गए व्यक्तिगत कारणों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव की गैरमौजूदगी की क्या वजह बताई गई? उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के बारे में बताया गया कि वह उस समय पटना से बाहर थे। वहीं, दूसरे उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के कार्यक्रम में शामिल नहीं होने के पीछे स्वास्थ्य संबंधी कारण बताया गया। यही वजह है कि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों नेताओं ने जानबूझकर कार्यक्रम से दूरी बनाई। हालांकि, राजनीतिक हलकों में इसे लेकर सवाल जरूर उठ रहे हैं कि अगर यह पूरी तरह सरकारी कार्यक्रम था, तो गठबंधन के दोनों प्रमुख सहयोगी नेताओं की मौजूदगी क्यों नहीं हुई। कला एवं संस्कृति विभाग ने संभाली थी जिम्मेदारी तिरंगा यात्रा के आयोजन की जिम्मेदारी कला एवं संस्कृति विभाग को दी गई थी। विभाग की ओर से कार्यक्रम की रूपरेखा और आयोजन की तैयारियां की गई थीं। 10 अगस्त को पटना में आयोजित मुख्य यात्रा जेपी गोलंबर से शुरू हुई और कारगिल चौक तक पहुंची। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यात्रा का नेतृत्व किया। यानी आयोजन का स्वरूप सरकारी था, जबकि पिछले वर्ष आयोजित तिरंगा यात्रा का स्वरूप अलग था। 2025 में बीजेपी ने अपने स्तर पर निकाली थी तिरंगा यात्रा साल 2025 में भी बिहार में तिरंगा यात्रा निकाली गई थी, लेकिन उस समय इसका आयोजन बीजेपी की ओर से पार्टी स्तर पर किया गया था। उस वक्त बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थे और सम्राट चौधरी तथा विजय कुमार सिन्हा उपमुख्यमंत्री थे। बीजेपी से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि उस समय पार्टी की ओर से यात्रा के लिए सरकारी फंड की मांग की गई थी, लेकिन सरकारी खर्च से आयोजन की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद बीजेपी ने अपने संगठनात्मक स्तर पर यात्रा आयोजित की। 2026 में स्थिति अलग है। इस बार 'हर घर तिरंगा अभियान' को राज्य सरकार के कार्यक्रम के तौर पर आयोजित किया गया और इसके लिए कैबिनेट से बजट को मंजूरी मिली। क्या JDU की दूरी के पीछे राजनीतिक संदेश है? यही वह सवाल है जिसने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है। वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश अश्क के मुताबिक, जेडीयू लंबे समय से बीजेपी के साथ सत्ता में है, लेकिन पार्टी अपनी सेक्युलर छवि को लेकर सतर्क रहती है और ऐसे कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखती है, जहां उसे अपनी राजनीतिक पहचान प्रभावित होने की आशंका हो। हालांकि, यह एक राजनीतिक विश्लेषण है, आधिकारिक तौर पर जेडीयू ने यह नहीं कहा है कि दोनों उपमुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति का कारण वैचारिक या राजनीतिक असहमति थी। गठबंधन के लिए क्या मायने रखता है यह घटनाक्रम? एनडीए सरकार में बीजेपी और जेडीयू के बीच सत्ता साझेदारी के लिहाज से दोनों उपमुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति निश्चित तौर पर चर्चा का विषय बनी है। लेकिन इसके आधार पर गठबंधन में दरार की कोई ठोस पुष्टि नहीं होती। एक तरफ कार्यक्रम का सरकारी स्वरूप और दूसरी तरफ जेडीयू के दोनों प्रमुख चेहरों की गैरमौजूदगी राजनीतिक सवाल जरूर खड़े करती है। दूसरी ओर, दोनों नेताओं की अनुपस्थिति के लिए व्यक्तिगत कारण भी बताए गए हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले सरकारी और राजनीतिक कार्यक्रमों में बीजेपी और जेडीयू के प्रमुख नेताओं की भागीदारी किस तरह रहती है। यही घटनाक्रम बताएगा कि 10 अगस्त की तिरंगा यात्रा महज संयोग थी या इसके पीछे वास्तव में कोई राजनीतिक संदेश भी छिपा था।
पटना । स्वतंत्रता दिवस से पहले सोमवार को राजधानी पटना में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में निकली यह यात्रा जेपी गोलंबर से शुरू होकर कारगिल चौक तक पहुंची। मुख्यमंत्री के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव और कई अन्य नेता एवं कार्यकर्ता शामिल हुए। हाथों में तिरंगा लिए बड़ी संख्या में लोग यात्रा में शामिल हुए और भारत माता की जय के नारे लगाए। जेपी गोलंबर से कारगिल चौक तक निकली यात्रा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करीब डेढ़ किलोमीटर तक पैदल तिरंगा लेकर यात्रा में शामिल हुए। जेपी गोलंबर पहुंचने के बाद उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोग तिरंगा लेकर पहुंचे और देशभक्ति के नारे लगाए। CM सम्राट बोले- 2047 तक शक्तिशाली देश बनेगा भारत अपने संबोधन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि तिरंगा देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देश के लाखों सैनिकों ने तिरंगे की आन और सम्मान के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत शांति में विश्वास करता है, लेकिन अगर कोई देश से लड़ने की कोशिश करता है तो भारत उसका मजबूती से जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2047 तक भारत दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में शामिल होगा। 10 से 17 अगस्त तक तिरंगा यात्रा का आह्वान सम्राट चौधरी ने लोगों से 10 से 17 अगस्त तक चलने वाली तिरंगा यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रखंड स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भी लोग भाग लें और इस मुहिम को सफल बनाएं। उन्होंने कहा कि तिरंगा केवल तीन रंगों वाला ध्वज नहीं है, बल्कि इसके पीछे स्वतंत्रता सेनानियों और पूर्वजों का बलिदान और लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना का इतिहास जुड़ा है। हर घर तिरंगा अभियान को बढ़ावा देने का उद्देश्य तिरंगा यात्रा का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लोगों में देशभक्ति की भावना को मजबूत करना और हर घर तिरंगा अभियान को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है। यात्रा में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, रामकृपाल यादव, विजय सिन्हा समेत कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। तिरंगा यात्रा के दौरान बदला गया ट्रैफिक रूट यात्रा को देखते हुए पटना में सुरक्षा और यातायात के विशेष इंतजाम किए गए थे। सुबह करीब 7 बजे से गांधी मैदान, डाकबंगला चौराहा, जेपी गोलंबर, कारगिल चौक और बुद्ध मार्ग के आसपास कुछ मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित की गई थी। लोगों की सुविधा के लिए वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था की गई थी। यात्रा समाप्त होने के बाद यातायात व्यवस्था सामान्य कर दी गई।
पटना, एजेंसियां। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए कि मंत्री, विधायक और सरकारी अधिकारियों के बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ें। सरकार का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता और सुविधाओं में सुधार करना है। सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने पर जोर सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहतर होने के साथ-साथ आधारभूत सुविधाओं को भी मजबूत किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि सरकारी विद्यालय आम लोगों के साथ-साथ उच्च पदों पर बैठे लोगों के परिवारों के लिए भी भरोसेमंद विकल्प बनें। इसके लिए स्कूलों में पढ़ाई, शिक्षक व्यवस्था, आधारभूत संरचना और अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल मुख्यमंत्री के बयान के पीछे मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि यदि सरकारी स्कूलों की व्यवस्था मजबूत होगी तो अभिभावकों का भरोसा भी बढ़ेगा। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने के साथ-साथ आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। बयान पर राजनीतिक चर्चा तेज मंत्री, विधायक और अधिकारियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की बात सामने आने के बाद इस बयान को लेकर राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई है। विपक्ष की ओर से सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की जा सकती है कि सरकारी स्कूलों में सुधार के लिए कौन-कौन से ठोस कदम और समयसीमा तय की गई है। वहीं, सरकार की ओर से इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने और स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में एक बड़े लक्ष्य के रूप में पेश किया जा रहा है।
पटना: बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश आज शाम 5 बजे बिहार विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) के रूप में शपथ लेंगे। इसके साथ ही लगभग आठ महीने तक किसी भी सदन का सदस्य बने बिना मंत्री रहने को लेकर चल रहा विवाद भी समाप्त हो जाएगा। बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह उन्हें शपथ दिलाएंगे। भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद राज्यपाल कोटे से दीपक प्रकाश को विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया था। अब शपथ लेने के बाद वे आधिकारिक रूप से बिहार विधान परिषद के सदस्य बन जाएंगे। आठ महीने तक बिना किसी सदन के सदस्य बने रहे मंत्री दीपक प्रकाश को नवंबर 2025 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री बनाया गया था। उस समय वे न तो विधानसभा और न ही विधान परिषद के सदस्य थे। इसके बाद मई 2026 में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में मंत्रिमंडल विस्तार हुआ, तब भी दीपक प्रकाश को मंत्री पद पर बनाए रखा गया। लगातार आठ महीने तक किसी भी सदन के सदस्य नहीं होने के बावजूद मंत्री बने रहने को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठाता रहा। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद तेज हुई प्रक्रिया जानकारी के अनुसार, दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की प्रक्रिया उस समय तेज हुई जब सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में बिहार सरकार से सवाल किया कि आखिर वे इतने लंबे समय तक बिना किसी सदन के सदस्य बने मंत्री कैसे बने रहे। सुनवाई के बाद भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार ने इस्तीफा दिया, जिससे रिक्त हुई सीट पर राज्यपाल कोटे से दीपक प्रकाश को मनोनीत किया गया। उपेंद्र कुशवाहा ने जताया आभार राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने दीपक प्रकाश के मनोनयन पर खुशी जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के कई वरिष्ठ नेताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सामाजिक माध्यम एक्स पर आधिकारिक अधिसूचना साझा करते हुए दीपक प्रकाश के विधान परिषद सदस्य बनने की जानकारी भी सार्वजनिक की। राजनीतिक और संवैधानिक रूप से अहम कदम दीपक प्रकाश का विधान परिषद सदस्य बनना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक और संवैधानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे लंबे समय से उठ रहे संवैधानिक सवालों पर विराम लगने की संभावना है और राज्य सरकार को विपक्ष के आरोपों का जवाब भी मिल गया है।
पटना: बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को राज्यपाल द्वारा बिहार विधान परिषद (MLC) के लिए मनोनीत किए जाने के बाद उन्होंने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे बड़ी जिम्मेदारी बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित एनडीए के वरिष्ठ नेताओं का आभार जताया और कहा कि वह पहले से अधिक समर्पण के साथ जनता की सेवा करेंगे। कई वरिष्ठ नेताओं का जताया आभार दीपक प्रकाश ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, भाजपा नेतृत्व, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और एनडीए के सभी सहयोगी दलों के नेताओं का धन्यवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें मिली नई जिम्मेदारी उनके लिए प्रेरणा है और वह अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगे। 'अब सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं' विपक्ष द्वारा पहले उठाए गए सवालों और मंत्री पद से इस्तीफे की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपक प्रकाश ने कहा कि अब सभी संवैधानिक और औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। इसलिए पहले उठाए गए सवाल अब अप्रासंगिक हो चुके हैं और उनका पूरा ध्यान केवल जनता की सेवा और विभागीय कार्यों पर रहेगा। 'सुप्रीम कोर्ट वाली बात अब इतिहास हो चुकी' जब उनसे उस मामले पर सवाल पूछा गया, जिसमें उनके मंत्री पद को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, तो उन्होंने कहा कि वह अब बीती बात है। उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट वाली बात अब इतिहास हो चुकी है। अब उन मुद्दों का कोई औचित्य नहीं है। मेरी प्राथमिकता अपने दायित्वों का पूरी ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ निर्वहन करना है।" मंत्री पद पर बने रहेंगे दीपक प्रकाश ने स्पष्ट किया कि वह मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां पहले की तरह निभाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि जनता के प्रति उनकी जवाबदेही पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है और वह विकास कार्यों को गति देने के लिए पूरी ताकत से काम करेंगे।
पटना: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में कुल 17 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, पर्यटन, न्यायिक व्यवस्था, जलापूर्ति, उद्योग और प्रशासनिक सुधार से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए। सरकार का कहना है कि इन निर्णयों का उद्देश्य राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना है। 16 मेडिकल कॉलेज और अस्पताल PPP मॉडल पर संचालित होंगे कैबिनेट का सबसे बड़ा फैसला 'सात निश्चय-3' के तहत राज्य के 16 ब्राउनफील्ड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों (डेंटल कॉलेज सहित) को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित और संचालित करने का है। इसके लिए PricewaterhouseCoopers (PwC) को ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त किया गया है और ₹8.27 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। राजगीर में बनेगा स्पोर्ट्स साइंस सेंटर खेल प्रतिभाओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राजगीर स्थित राज्य खेल अकादमी में स्पोर्ट्स साइंस सेंटर की स्थापना को मंजूरी दी गई। इस परियोजना पर करीब ₹25 करोड़ खर्च किए जाएंगे। वहीं ज्ञान भारतम मिशन के तहत प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और मेटाडाटा निर्माण के लिए ₹6.23 करोड़ की स्वीकृति भी दी गई। जलापूर्ति और MSME को बढ़ावा कैबिनेट ने अमृत 2.0 योजना के तहत जमालपुर जलापूर्ति परियोजना के लिए ₹102.22 करोड़ और मुंगेर जलापूर्ति परियोजना (फेज-1) के लिए ₹177.72 करोड़ मंजूर किए। साथ ही MSME निदेशालय के पुनर्गठन और पुरातत्व निदेशालय में तकनीकी पदों पर संविदा नियुक्तियों को भी मंजूरी दी गई। न्यायिक व्यवस्था होगी मजबूत राज्य सरकार ने पूर्णिया, भागलपुर और गया में NDPS मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन हेतु 27 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी। इसके अलावा SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए 19 अतिरिक्त विशेष न्यायालय स्थापित किए जाएंगे, जिनके लिए 171 नए पद स्वीकृत किए गए हैं। 330 गृह रक्षकों की होगी तैनाती बाल गृह, बालिका गृह और अन्य संरक्षण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए 330 गृह रक्षकों की तैनाती को मंजूरी दी गई। इस पर सरकार का वार्षिक खर्च करीब ₹14.53 करोड़ होगा। स्वास्थ्य और पर्यटन क्षेत्र में भी अहम फैसले कैबिनेट ने बिहार आयुष चिकित्सा सेवा नियमावली-2026 में संशोधन को मंजूरी दी। इसके साथ ही बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के लिए 6 नए प्रशासनिक पद और राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, पटना में 2 सुपरन्यूमरेरी पद सृजित किए गए। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री बिहार हेली-टूरिज्म एवं एयर टूरिज्म सेवा योजना-2026 को भी मंजूरी दी गई। 'हर घर तिरंगा' अभियान के लिए ₹6.12 करोड़ मंजूर कैबिनेट ने 'हर घर तिरंगा अभियान-2026' के सफल आयोजन के लिए ₹6.12 करोड़ की स्वीकृति दी। इसके अलावा पूर्वी चंपारण में केंद्रीय विद्यालय के लिए राज्य सरकार की भूमि 30 वर्ष की लीज पर उपलब्ध कराने और नवादा में बिहार औद्योगिक सुरक्षा बल (BISF) की स्थापना हेतु करीब 44 एकड़ सरकारी भूमि नि:शुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली।
पटना: बिहार की राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की। बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मंत्री, सांसद, विधायक, प्रदेश पदाधिकारी और चुनावी जिम्मेदारी संभालने वाले कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य हार के कारणों का विश्लेषण करना और भविष्य की रणनीति तय करना था। बैठक में कार्यकर्ताओं ने फीडबैक देते हुए कहा कि जन सुराज की ओर से यूट्यूब, फेसबुक और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बीजेपी को लेकर कई तरह की गलतफहमियां और कथित भ्रामक बातें फैलाई गईं। उनका कहना था कि पार्टी की ओर से इन दावों का समय पर और प्रभावी जवाब नहीं दिया गया, जिससे मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति बनी। युवाओं से दूरी भी बनी चिंता का विषय सूत्रों के अनुसार, समीक्षा बैठक में यह भी माना गया कि उपचुनाव में युवाओं का एक वर्ग बीजेपी से दूर होता नजर आया। पार्टी नेतृत्व ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए आने वाले समय में युवाओं से सीधे संवाद बढ़ाने, संगठन से जोड़ने और सोशल मीडिया पर अधिक सक्रिय रहने की रणनीति पर जोर दिया। संजय सरावगी ने लगाया गलत नैरेटिव फैलाने का आरोप बैठक के बाद बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि प्रशांत किशोर और जन सुराज ने सोशल मीडिया के जरिए झूठे नैरेटिव को बढ़ावा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं के बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और गलत सूचनाओं के माध्यम से जनता को भ्रमित करने की कोशिश की गई। सरावगी ने कहा कि पार्टी अब ऐसे प्रचार का मजबूती से जवाब देने की तैयारी करेगी। 7 अगस्त से शुरू होगा समरसता संकल्प अभियान संजय सरावगी ने बताया कि 7 अगस्त को पटना के गांधी मैदान स्थित ज्ञान भवन में श्री गुरु रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर समरसता संकल्प अभियान की शुरुआत की जाएगी। इस अभियान के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक पार्टी की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। 10 से 15 अगस्त तक निकलेगी तिरंगा यात्रा बीजेपी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 10 से 15 अगस्त तक पूरे बिहार में तिरंगा यात्रा निकालने का फैसला किया है। इसकी शुरुआत 10 अगस्त को पटना के जेपी गोलंबर से कारगिल चौक तक होगी। इस यात्रा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। 13 से 15 अगस्त तक चलेगा 'हर घर तिरंगा' अभियान इसके अलावा 13 से 15 अगस्त तक 'हर घर तिरंगा' अभियान भी चलाया जाएगा। इस दौरान सभी जिलों में तिरंगा यात्राएं निकाली जाएंगी और जिला कार्यालयों, जनप्रतिनिधियों के आवास, पार्टी कार्यालयों तथा मंडल और पंचायत स्तर तक तिरंगा फहराने का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
तेजस्वी यादव का सम्राट चौधरी पर हमला, बोले- 150 दिनों में NDA दो चुनाव हार चुकी है पटना, एजेंसियां। बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 के बाद राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यकाल को लेकर NDA सरकार पर निशाना साधा है। तेजस्वी यादव ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के करीब 150 दिनों के कार्यकाल में NDA राज्य में दो चुनाव हार चुकी है। सम्राट चौधरी सरकार पर तेजस्वी का निशाना तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद NDA को चुनावी मोर्चे पर झटके लगे हैं। उन्होंने सरकार की कार्यशैली और उसके प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठाए। तेजस्वी का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में राजनीतिक दल आगामी चुनावी गतिविधियों को लेकर अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं। ‘150 दिनों में दो चुनाव हारे’ का दावा तेजस्वी यादव ने अपने बयान में कहा कि सम्राट चौधरी के करीब 150 दिनों के कार्यकाल में NDA दो चुनाव हार चुकी है। हालांकि, यह बयान तेजस्वी यादव का राजनीतिक दावा है और इसे उसी रूप में देखा जाना चाहिए। विपक्ष लगातार NDA सरकार को उसके कामकाज और चुनावी प्रदर्शन के आधार पर घेरने की कोशिश कर रहा है। वहीं, सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से विपक्ष के आरोपों पर जवाब भी दिए जा रहे हैं। बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज सम्राट चौधरी के नेतृत्व में NDA सरकार बनने के बाद बिहार की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज है। तेजस्वी यादव लगातार सरकार के कामकाज को लेकर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, NDA नेता सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों को जनता के सामने रखने में जुटे हैं। ऐसे में तेजस्वी यादव का यह बयान बिहार की मौजूदा राजनीतिक खींचतान को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
पटना, एजेंसियां। राजधानी पटना के मुसल्लहपुर हाट स्थित चर्चित शिक्षक Khan Sir के कोचिंग संस्थान के बाहर मंगलवार रात हुई हिंसक घटना के बाद मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है, जबकि खान सर ने मुख्यमंत्री Samrat Choudhary से सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। बुधवार सुबह कोचिंग संस्थान के बाहर बड़ी संख्या में छात्र जमा हो गए और अपने शिक्षक के समर्थन में नारेबाजी की। नामजद FIR दर्ज, जांच शुरू खान सर ने इस मामले में नामजद एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस घटना के पीछे की वजह और हमलावरों की पहचान करने में जुटी है। सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है, जिसमें कुछ लोग कोचिंग संस्थान के बाहर पथराव और तोड़फोड़ करते दिखाई दे रहे हैं। गार्ड पर हमला, PMCH में भर्ती हमले में कोचिंग संस्थान का एक सुरक्षा गार्ड गंभीर रूप से घायल हो गया। खान सर के अनुसार गार्ड को बेरहमी से पीटा गया और उसका सिर फोड़ दिया गया। घायल गार्ड का इलाज पीएमसीएच में चल रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की मदद नहीं मिलती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। फायरिंग के दावे पर बदला बयान घटना के तुरंत बाद खान सर ने गोलीबारी होने का दावा किया था, लेकिन बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि तनावपूर्ण माहौल के कारण भ्रम की स्थिति बन गई थी। पुलिस ने भी अब तक की जांच में किसी प्रकार की फायरिंग से इनकार किया है। कम फीस को बताया विवाद की वजह खान सर का आरोप है कि उनकी कम फीस में शिक्षा देने की व्यवस्था कुछ अन्य कोचिंग संचालकों को पसंद नहीं आ रही है। उनका कहना है कि गरीब छात्रों को सस्ती शिक्षा उपलब्ध कराने की कोशिश के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। छात्रों से की शांति बनाए रखने की अपील बुधवार को बड़ी संख्या में छात्र कोचिंग के बाहर पहुंचे और प्रदर्शन करने लगे। खान सर ने छात्रों से शांत रहने, सड़क खाली करने और पुलिस को निष्पक्ष जांच का मौका देने की अपील की। सुरक्षा की मांग और प्रशासन पर भरोसा खान सर ने कहा कि घटना के बाद देर रात तक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने प्रशासन पर भरोसा जताते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन से अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी की है। CCTV फुटेज बना अहम सबूत घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज में 8 से 10 लोग चेहरे ढके हुए नजर आ रहे हैं। फुटेज में पथराव, पोस्टर फाड़ने और गार्ड के साथ मारपीट की तस्वीरें कैद हुई हैं। पुलिस इन्हीं सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।
बिहार : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की वोटिंग खत्म होते ही बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक 3 मई या 6 मई को नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। शपथ की तारीख पर मंथन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कैबिनेट विस्तार की तारीख भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति पर निर्भर करेगी। पश्चिम बंगाल से मिलने वाले राजनीतिक फीडबैक के आधार पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। अगर स्थिति अनुकूल रही तो 6 मई को विस्तार संभव है, जबकि किसी भी अनिश्चितता की स्थिति में यह प्रक्रिया 3 मई को पहले ही पूरी की जा सकती है। कितने मंत्री बन सकते हैं? बिहार में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। हालांकि, सभी पद एक साथ भरे जाने की संभावना कम है। पहले की तरह कुछ सीटें खाली रखी जा सकती हैं, ताकि भविष्य में राजनीतिक संतुलन साधा जा सके। क्या होगा सीट बंटवारे का फॉर्मूला? नई सरकार में भले ही मुख्यमंत्री भाजपा से हों, लेकिन जनता दल यूनाइटेड को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। पुराने फॉर्मूले के तहत जदयू को संख्या और अहम मंत्रालयों में प्राथमिकता मिल सकती है। चर्चा है कि भाजपा के करीब 14 और जदयू के 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। किन नेताओं की हो सकती है वापसी? पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा की वापसी लगभग तय मानी जा रही है। उन्हें कौन सा विभाग मिलेगा, इसे लेकर अभी अटकलें जारी हैं। राजस्व, भूमि सुधार और पथ निर्माण जैसे बड़े मंत्रालयों पर उनकी दावेदारी मानी जा रही है। सहयोगी दलों को भी मिलेगा मौका एनडीए के सहयोगी दलों को भी कैबिनेट में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को पहले की तरह जगह मिल सकती है। इन दलों से जुड़े प्रमुख नेता जैसे जीतन राम मांझी, चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा के करीबी चेहरों को मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है। नजरें पहली कैबिनेट पर अब बिहार की राजनीति में सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सम्राट चौधरी अपनी पहली कैबिनेट में किन चेहरों को शामिल करते हैं और कौन से अहम विभाग किस दल के हिस्से में जाते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।