Pankaj Tripathi Brother Attack: बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी के परिवार से जुड़ी एक चिंताजनक खबर सामने आई है। उनके बड़े भाई विजेंद्रनाथ त्रिपाठी पर बिहार के गोपालगंज जिले में कथित तौर पर जानलेवा हमला किया गया। इस घटना के बाद घायल विजेंद्रनाथ त्रिपाठी को बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया, जहां उनकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है। भाई पर हमले की खबर मिलते ही अभिनेता पंकज त्रिपाठी भी तुरंत पटना पहुंच गए। भाई की हालत स्थिर, अस्पताल में मौजूद हैं पंकज त्रिपाठी सूत्रों के मुताबिक, हमले में विजेंद्रनाथ त्रिपाठी को कई चोटें आई हैं, लेकिन फिलहाल उनकी स्थिति खतरे से बाहर है। पंकज त्रिपाठी इस समय अपने परिवार के साथ हैं और अस्पताल में भाई की देखरेख कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस घटना से अभिनेता काफी व्यथित हैं और फिलहाल किसी से बातचीत नहीं कर रहे हैं। जमीन विवाद को लेकर हुआ हमला स्थानीय पुलिस के अनुसार, यह घटना गोपालगंज जिले के बेलसंड तिवारी टोला गांव में रविवार देर रात हुई। बताया जा रहा है कि जमीन विवाद के कारण यह हमला किया गया। जानकारी के अनुसार, विजेंद्रनाथ त्रिपाठी रात में भोजन के बाद घर के बाहर टहल रहे थे, तभी आरोपी राजेश साह ने उन पर हमला कर दिया। आरोप है कि आरोपी ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद उन्हें पहले गोपालगंज मॉडल अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन स्थिति को देखते हुए बाद में पटना के एक बड़े अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। आरोपी गिरफ्तार, पुलिस कर रही जांच गोपालगंज पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी राजेश साह को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस उससे सख्ती से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस घटना में अन्य लोगों की भूमिका तो नहीं थी। गोपालगंज के एसपी विनय तिवारी के अनुसार, आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। हालांकि, अब तक परिवार की ओर से कोई औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और आसपास के क्षेत्रों में भी संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
पटना, एजेंसियां। पटना के चर्चित खान सर फायरिंग विवाद मामले में शुक्रवार को पटना सिविल कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के निदेशक रौशन आनंद की जमानत याचिका पर फैसला फिलहाल टल गया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार के लिए निर्धारित की है। वहीं खान सर के दोनों निजी सुरक्षा गार्डों की जमानत याचिकाएं अदालत ने खारिज कर दी हैं। रौशन आनंद की बेल पर सोमवार को होगी सुनवाई रौशन आनंद ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे बाद में एडीजे-33 की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया। सुनवाई के दौरान विरोधी पक्ष की ओर से बहस नहीं हो सकी। उनके अधिवक्ता ने अतिरिक्त समय की मांग करते हुए टाइम पीटिशन दायर किया, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने अगली सुनवाई सोमवार के लिए तय कर दी। खान सर के बॉडीगार्ड्स को नहीं मिली राहत मामले में खान सर के दोनों निजी सुरक्षा गार्डों की जमानत याचिका पर मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास अनुराग वर्मा की अदालत में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। इससे दोनों सुरक्षा गार्डों को फिलहाल न्यायिक राहत नहीं मिल सकी। खान सर को पहले मिल चुकी है अंतरिम राहत इस मामले में आर्म्स एक्ट और हत्या के प्रयास के आरोपी फैसल खान उर्फ खान सर को पहले ही अदालत से राहत मिल चुकी है। पटना सिविल कोर्ट ने उनके खिलाफ 'नो कोर्सिव एक्शन' का आदेश जारी किया है। इसका अर्थ है कि अगली सुनवाई या नए आदेश तक उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। 2 जून की घटना के बाद दर्ज हुई थीं दो एफआईआर यह पूरा मामला 2 जून को पटना के मुसल्लहपुर स्थित खान ग्लोबल स्टडीज कोचिंग सेंटर में हुए हंगामे, पथराव, मारपीट और कथित फायरिंग से जुड़ा है। घटना के बाद कदमकुआं थाना पुलिस ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं। पहली एफआईआर में रौशन आनंद समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि दूसरी प्राथमिकी सोशल मीडिया पर वायरल फायरिंग वीडियो के आधार पर दर्ज की गई थी। मामले की जांच अभी जारी है।
पटना, एजेंसियां। पटना में चर्चित फायरिंग मामले को लेकर शिक्षक और कोचिंग संचालक Khan Sir ने सिविल कोर्ट में अग्रिम जमानत (एंटीसिपेटरी बेल) याचिका दायर की है। अपनी याचिका में उन्होंने दावा किया है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं और गोलीबारी की घटना से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। मामले में अब मंगलवार को सुनवाई होगी। वकील ने सरेंडर की अटकलों पर लगाया विराम एफआईआर दर्ज होने के बाद यह चर्चा तेज थी कि खान सर अदालत में आत्मसमर्पण कर सकते हैं। हालांकि उनके अधिवक्ता अरविंद कुमार महुआर ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे सरेंडर नहीं करेंगे, बल्कि कानूनी प्रक्रिया के तहत अग्रिम जमानत की मांग करेंगे। इसी क्रम में सोमवार को पटना सिविल कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई। गार्ड्स की जमानत पर फैसला सुरक्षित मामले में गिरफ्तार दोनों सुरक्षा गार्डों की जमानत याचिका पर भी अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। दूसरी ओर, ज्ञान बिंदु कोचिंग के संचालक रोशन आनंद की रिहाई को लेकर भी अदालत में बहस हुई, लेकिन इस मामले में भी फैसला सुरक्षित रखा गया है। 2 जून की रात हुई थी फायरिंग पूरा मामला 2 जून की रात का है, जब खान सर की कोचिंग के बाहर फायरिंग, पथराव और मारपीट की घटना सामने आई थी। जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर रोशन आनंद को गिरफ्तार किया था। बाद में एक वीडियो सामने आया, जिसमें खान सर के दो गार्ड कथित तौर पर फायरिंग करते दिखाई दिए। गार्ड्स के बयान के बाद बढ़ीं मुश्किलें पुलिस पूछताछ में दोनों गार्डों ने कथित रूप से कहा कि उन्होंने खान सर के निर्देश पर गोली चलाई थी। इसी आधार पर पुलिस ने खान सर के खिलाफ हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। हालांकि खान सर ने इन आरोपों को खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया है।
पटना: चर्चित शिक्षक और खान ग्लोबल स्टडीज के संस्थापक फैजल खान उर्फ खान सर एक नए विवाद में घिर गए हैं। कोचिंग संस्थान के बाहर हुई फायरिंग और हंगामे के मामले में पटना पुलिस ने उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस का दावा है कि घटना के दौरान खान सर ने अपने सुरक्षा गार्डों को गोली चलाने के लिए उकसाया था। FIR में क्या है आरोप? कदमकुआं थाना में दर्ज एफआईआर के अनुसार, पुलिस पदाधिकारी अनिल कुमार के बयान के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि हंगामे के दौरान खान सर ने अपने बॉडीगार्ड्स से कहा था, “खड़े होकर क्या कर रहे हो, गोली चलाओ, जो होगा मैं देख लूंगा।” इसी बयान को आधार बनाकर पुलिस ने खान सर को भी मामले में आरोपी बनाया है। उनके खिलाफ हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट से जुड़ी धाराओं में जांच की जा रही है। दो बॉडीगार्ड गिरफ्तार घटना 2 जून की रात की बताई जा रही है, जब खान ग्लोबल स्टडीज के बाहर तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई थी। इस दौरान दो सुरक्षा गार्डों द्वारा हवाई फायरिंग किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने दोनों सुरक्षा गार्डों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए खान सर की भूमिका की भी जांच शुरू की गई। छात्रों के प्रदर्शन के बाद बढ़ा दबाव मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। गुरुवार को पटना के कारगिल चौक पर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। इससे पहले पुलिस ज्ञान बिंदु कोचिंग के संचालक रौशन आनंद को भी गिरफ्तार कर चुकी है, जिसके बाद कोचिंग संस्थानों से जुड़े विवादों पर बहस तेज हो गई। पुराने बयानों की भी जांच घटना वाली रात खान सर ने मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि कोचिंग पर हमला करने आए लोगों की ओर से गोली चलने की जानकारी मिली थी। अगले दिन उन्होंने कहा कि उन्होंने अफरातफरी में मिली शुरुआती सूचनाओं के आधार पर यह बयान दिया था। पुलिस अब उनके इन बयानों और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों का मिलान कर रही है। खान सर का पक्ष मामला दर्ज होने के बाद खान सर सार्वजनिक रूप से कम दिखाई दिए हैं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके सुरक्षा गार्डों ने आत्मरक्षा में फायरिंग की थी। उनका कहना है कि उस समय माहौल बेहद तनावपूर्ण था और सुरक्षा गार्डों ने अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की। आगे क्या? पुलिस फिलहाल वायरल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य सबूतों की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और अदालत की कार्यवाही के आधार पर मामले की दिशा तय होगी। फिलहाल यह मामला पटना में शिक्षा जगत और छात्रों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।
पटना, एजेंसियां। पटना स्थित अपने कोचिंग संस्थान पर हुए हमले और फायरिंग विवाद के बीच खान सर ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने फायरिंग को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया और कहा कि हालात ऐसे थे कि सुरक्षा गार्डों को कार्रवाई करनी पड़ी। पुलिस के पहुंचने से पहले बिगड़ चुके थे हालात खान सर ने कहा कि घटना के समय पुलिस मौके पर मौजूद नहीं थी और उसे पहुंचने में समय लगा। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक पुलिस नहीं पहुंची थी, तब तक सुरक्षा गार्ड क्या करते। उनके अनुसार सुरक्षा कर्मियों की जिम्मेदारी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और उन्होंने वही किया। ‘गार्ड ने किसी व्यक्ति को निशाना नहीं बनाया’ फायरिंग को लेकर उठ रहे सवालों पर खान सर ने कहा कि इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि सुरक्षा गार्ड ने किसी व्यक्ति को निशाना बनाकर गोली नहीं चलाई, बल्कि आत्मरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से कार्रवाई की गई थी। गार्ड के साथ मारपीट का आरोप खान सर ने बताया कि उनके गार्ड के साथ हमलावरों ने बुरी तरह मारपीट की थी। उनका कहना था कि गार्ड को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था। ऐसी स्थिति में सुरक्षा कर्मियों से निष्क्रिय रहने की उम्मीद नहीं की जा सकती। भावुक हुए खान सर छात्रों से बातचीत के दौरान खान सर ने कहा कि कुछ लोग चाहते हैं कि उनके साथ कोई बड़ी घटना हो जाए। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “ये लोग चाहते हैं कि खान सर के फोटो पर माला चढ़ जाए।” CCTV फुटेज दिखाकर दी सफाई विवाद के बीच खान सर छात्रों को CCTV फुटेज दिखाकर पूरी घटना समझाते नजर आए। वहीं फायरिंग का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। दोनों गार्डों से पूछताछ की गई है और उनके हथियार सत्यापन के लिए जब्त कर लिए गए हैं। मामले में नई एफआईआर दर्ज कर जांच जारी है।
पटना, एजेंसियां। पटना में मंगलवार रात खान सर की कोचिंग ग्लोबल स्टडीज पर हमला हुआ। हमले का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में कुछ लोग गार्ड को पीटते दिख रहे हैं। इस दौरान ईंट-पत्थर भी चलाए गए। पोस्टर भी फाड़ दिए। पुलिस ने ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रोशन आनंद समेत उनके दो सहयोगी अभिषेक और गौरव को गिरफ्तार किया है। तीनों से पुलिस पूछताछ कर रही है। गिरफ्तार आरोपी जायेंगे जेल टाउन DSP के मुताबिक, रौशन आनंद और उसके दोनों सहयोगियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की तैयारी चल रही है। खान सर ने हमले का आरोप ज्ञान बिंदु के डायरेक्टर और कोचिंग के कर्मियों पर लगाया है। बिहार में बनेगी कोचिंग नीति इस घटना के बाद बिहार शिक्षा विभाग ने कोचिंग नीति बनाए जाने की घोषणा की है। अगले 3 महीने के भीतर कोचिंग नीति तैयार की जाएगी। इसके तहत सभी कोचिंग संस्थानों के लिए एक ‘मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट’ तैयार किया जाएगा।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना से फिर एक बड़ी घटना सामने आई है। NEET की तैयारी कर रही 17 वर्ष की छात्रा का शव पत्रकार नगर थाना क्षेत्र स्थित एक हॉस्टल के कमरे में मिला है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। बता दें कि बीते जनवरी में जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत का मामले का अभी खुलासा भी नहीं हुआ है कि एक और घटना ने लोगों को स्तब्ध कर दिया है। घटना पत्रकार नगर थाना क्षेत्र के सचिवालय कॉलोनी रोड नंबर 2 स्थित ‘राधे कृष्ण हॉस्टल’ की है, जहां छात्रा का शव कमरे में फंदे से लटका हुआ पाया गया। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के इलाके में सनसनी फैल गई और हॉस्टल प्रबंधन ने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पीछे की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी। समस्तीपुर की रहने वाली थी छात्रा मृतक छात्रा मूल रूप से समस्तीपुर की रहने वाली थी। वह वर्ष 2024 से पटना में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी। परिवार ने बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए उसे पटना भेजा था। पुलिस ने परिजनों को मामले की जानकारी दे दी है। पुलिस ने शुरू की जांच घटना की सूचना मिलने के बाद पत्रकार नगर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही कमरे और आसपास के इलाके की जांच की जा रही है। पुलिस हॉस्टल प्रबंधन, अन्य छात्राओं और संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है, ताकि घटना के कारणों का पता लगाया जा सके।
पटना, एजेंसियां। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को एक बार फिर पटना स्थित सरकारी आवास 10, सर्कुलर रोड खाली करने का नोटिस जारी किया गया है। भवन निर्माण विभाग ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि उन्हें आवंटित नया सरकारी आवास ग्रहण कर पुराने बंगले को तत्काल खाली करना होगा। फिलहाल राबड़ी देवी अपने परिवार के साथ बिहार से बाहर हैं, जहां वह अपने पोते का जन्मदिन मनाने गई हैं। मंत्री नंदकिशोर राम को मिला आवास सरकारी आदेश के अनुसार, पटना केंद्रीय पूल के अंतर्गत आने वाला 10, सर्कुलर रोड अब बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित कर दिया गया है। इस संबंध में विभाग ने 27 मई 2026 को आधिकारिक पत्र जारी किया था। हालांकि, बंगला अभी तक खाली नहीं होने के कारण नए आवंटन पर अमल नहीं हो पाया है। पहले भी जारी हो चुका है आदेश विभाग ने बताया कि 25 नवंबर 2025 को ही राबड़ी देवी को बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के पद के अनुरूप 39, हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित किया गया था। इसके बाद कई बार उन्हें पुराने आवास को खाली करने के लिए कहा गया, लेकिन अब तक उन्होंने 10, सर्कुलर रोड का कब्जा नहीं छोड़ा है। ताजा नोटिस में विभाग ने दोबारा निर्देश दिया है कि राबड़ी देवी जल्द से जल्द हार्डिंग रोड स्थित आवास का कब्जा लें और वर्तमान में उपयोग कर रहे बंगले को खाली करें। विभाग के अनुसार, सक्षम प्राधिकार से मंजूरी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई के लिए पत्र जारी कर दिया गया है। पहले भी उठा था विवाद राबड़ी देवी और राजद की ओर से पहले भी इस नोटिस का विरोध किया जा चुका है। आवास खाली करने के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी हुई थी। हालांकि सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और नियमों के अनुसार आवासों का पुनः आवंटन किया जाता है। प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है बदलाव भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के सरकारी आवासों में समय-समय पर आवश्यकता और पात्रता के आधार पर बदलाव किए जाते हैं। इसलिए 10 सर्कुलर रोड का नया आवंटन कोई असामान्य फैसला नहीं है, बल्कि सरकार की नियमित प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राबड़ी देवी विभाग के निर्देशों का पालन करते हुए कब तक 10 सर्कुलर रोड का बंगला खाली करती हैं और नए आवंटित आवास में शिफ्ट होती हैं।
बिहार में अतिक्रमण के खिलाफ चल रहे सख्त बुलडोजर अभियान के बीच एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने इस कार्रवाई को लेकर सरकार के रुख को और स्पष्ट कर दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के अपने ही घर के बाहर बनी सीढ़ी पर बुलडोजर चला दिया गया। इस कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि कानून सबके लिए एक समान है—चाहे आम आदमी हो या खुद मुख्यमंत्री। अपने ही घर पर चला बुलडोजर पटना के पास अपने गृहक्षेत्र तारापुर में एक सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि करीब एक सप्ताह पहले उनके घर पर भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई। उनके घर के बाहर बनी सीढ़ी को तोड़ दिया गया, क्योंकि वह सरकारी जमीन पर बनी हुई थी। उन्होंने कहा, “जब मेरा घर नियमों के दायरे में आ सकता है, तो किसी और को छूट कैसे मिल सकती है।” ‘गलत है तो गलत है’—CM का स्पष्ट संदेश मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि अतिक्रमण करने वाला चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि निजी जमीन पर निर्माण करने वालों को डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन सरकारी जमीन पर कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस बयान के जरिए उन्होंने यह संकेत दिया कि सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सख्ती से अमल कर रही है। कब और क्यों शुरू हुआ अभियान? बिहार में अतिक्रमण हटाने का अभियान नवंबर 2025 के अंत में नई सरकार बनने के बाद तेज हुआ। इसकी शुरुआत समस्तीपुर से हुई और फिर पटना, मुजफ्फरपुर, लखीसराय, सीतामढ़ी और तारापुर समेत कई शहरों में इसे लागू किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़कों को चौड़ा करना, ट्रैफिक जाम से राहत दिलाना और सरकारी जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराना है। कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी सख्ती इस अभियान को और गति तब मिली जब पटना हाईकोर्ट ने अतिक्रमण के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया। इसके बाद राज्य सरकार ने 31 जनवरी 2026 तक विशेष ड्राइव चलाने और 1 अप्रैल 2026 से बड़े स्तर पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। क्या है इसका व्यापक असर? मुख्यमंत्री के घर पर कार्रवाई ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून के सामने सभी बराबर हैं। इससे प्रशासनिक सख्ती को लेकर जनता में एक मजबूत संकेत गया है कि नियमों का उल्लंघन किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कोचिंग से लौटे चचेरे भाइयों ने देखा मंजर Patna के गांधी मैदान थाना क्षेत्र में एक दुखद घटना सामने आई है। JEE परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र सौरभ कुमार ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। मंगलवार रात करीब 8:30 बजे यह घटना सामने आई, जब उसके साथ रह रहे दो चचेरे भाई कोचिंग से लौटे। दरवाजा नहीं खुलने पर उन्होंने अंदर झांककर देखा, जहां सौरभ फंदे से लटका हुआ मिला। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। कमरे से मिला सुसाइड नोट पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। जांच के दौरान कमरे से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा के अनुसार, नोट में छात्र ने लिखा कि वह पढ़ाई के दबाव में था और लगातार मेहनत के बावजूद उसे अच्छे परिणाम नहीं मिल रहे थे। इसी कारण उसने यह कदम उठाया। नोट में उसने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी मौत के लिए कोई अन्य व्यक्ति जिम्मेदार नहीं है। गया का रहने वाला था छात्र सौरभ कुमार गया जिले के आमस क्षेत्र का निवासी था और पटना में रहकर JEE परीक्षा की तैयारी कर रहा था। वह अपने दो चचेरे भाइयों–मुकेश कुमार और अक्षय कुमार–के साथ किराए के कमरे में रह रहा था। बताया जा रहा है कि तीनों अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। पुलिस जांच जारी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के साथ फॉरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाए। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और परिवार को सूचना दे दी गई है। आगे की कार्रवाई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और परिवार की शिकायत के आधार पर की जाएगी। बढ़ता दबाव बना चिंता का विषय यह घटना एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में परिवार और संस्थानों को बच्चों की मानसिक स्थिति पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
मुख्यमंत्री आवास पर धमकी भरा कॉल पटना: बिहार के मुख्यमंत्री Samrat Choudhary को जान से मारने की धमकी मिलने के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया। मुख्यमंत्री आवास पर आए एक फोन कॉल में सीधे तौर पर उन्हें निशाना बनाते हुए धमकी दी गई, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड में आ गईं। घटना सामने आते ही बिहार पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तेजी से जांच शुरू कर दी। शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि कॉल करने वाला शख्स लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है, जिससे उसे ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण हो गया था। तकनीकी सर्विलांस से मिला सुराग, कई लोकेशन बदली पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल ट्रैकिंग और अन्य तकनीकी साधनों की मदद से आरोपी की तलाश शुरू की। जांच में सामने आया कि आरोपी बिहार से बाहर जाकर छिपा हुआ था और गिरफ्तारी से बचने के लिए बार-बार अपनी लोकेशन बदल रहा था। लगातार निगरानी और ट्रैकिंग के बाद आखिरकार पुलिस को अहम सुराग मिला, जिससे उसकी सटीक लोकेशन का पता चल सका। गुजरात के सानंद में दबिश, संयुक्त ऑपरेशन में गिरफ्तारी पुलिस को जैसे ही आरोपी के गुजरात के सानंद इलाके में होने की जानकारी मिली, तुरंत बिहार और गुजरात पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई। इस टीम ने सानंद में छापेमारी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान शेखर यादव (32) के रूप में हुई है, जो बिहार के बांका जिले का रहने वाला है और गुजरात में मजदूरी करता था। धमकी के पीछे मकसद क्या? जांच में जुटी पुलिस फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आरोपी ने मुख्यमंत्री को धमकी क्यों दी। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है या फिर आरोपी ने व्यक्तिगत कारणों से ऐसा कदम उठाया। सुरक्षा एजेंसियां आरोपी के कॉल रिकॉर्ड, संपर्कों और पृष्ठभूमि की गहराई से जांच कर रही हैं। बिहार लाकर होगी कड़ी पूछताछ गुजरात पुलिस ने आरोपी को बिहार पुलिस के हवाले कर दिया है। उसे बिहार लाया जा रहा है, जहां उससे विस्तृत पूछताछ की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि कहीं इस मामले में और लोग शामिल तो नहीं हैं। शपथ के बाद एक्टिव मोड में CM गौरतलब है कि सम्राट चौधरी ने हाल ही में 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। इसके बाद से वे लगातार प्रशासनिक बैठकों और जनता दरबार के जरिए सक्रिय भूमिका में नजर आ रहे हैं। ऐसे में धमकी की यह घटना सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर रही है। सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, जांच जारी इस पूरे घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां हर एंगल से मामले की जांच कर रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
पटना: बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता Samrat Choudhary ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की कमान संभाल ली है। इसके साथ ही वे बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बन गए हैं। राजधानी पटना के लोक भवन में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल Syed Ata Hasnain ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह शपथ ग्रहण समारोह राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके साथ ही बिहार में एनडीए सरकार का नया स्वरूप सामने आया है। समारोह में Nitish Kumar, J. P. Nadda, Chirag Paswan समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे, जिसने इस बदलाव के राजनीतिक महत्व को और भी बढ़ा दिया। शपथ से पहले आस्था, फिर सत्ता मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले Samrat Choudhary पटना के राजवंशी नगर स्थित पंचरूपी हनुमान मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। सुबह से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और समारोह स्थल पर बड़ी संख्या में समर्थक और कार्यकर्ता मौजूद रहे। दो डिप्टी CM के साथ बना संतुलन नई सरकार में जदयू के दो वरिष्ठ नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है– Bijendra Prasad Yadav Vijay Kumar Chaudhary दोनों नेताओं ने राज्यपाल के समक्ष शपथ लेकर अपनी नई जिम्मेदारी संभाली। यह फैसला एनडीए के भीतर राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। “नीतीश से सीखा, अब आगे बढ़ाएंगे बिहार” शपथ से पहले मीडिया से बातचीत में Samrat Choudhary ने कहा कि: उन्हें पार्टी ने राज्य की सेवा का अवसर दिया है वे लगभग 30 वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं उन्होंने Nitish Kumar के साथ काम करते हुए प्रशासन चलाने का अनुभव हासिल किया उन्होंने यह भी कहा कि “समृद्ध बिहार” का जो सपना देखा गया है, उसे नई सरकार और मजबूती से आगे बढ़ाएगी। बीजेंद्र यादव: अनुभव और निरंतरता का चेहरा डिप्टी सीएम बने Bijendra Prasad Yadav बिहार की राजनीति के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। सुपौल से लगातार नौवीं बार विधायक 1990 में पहली बार विधानसभा पहुंचे जेपी आंदोलन से जुड़ाव संगठन और प्रशासन दोनों में मजबूत पकड़ उनकी नियुक्ति से सरकार को स्थिरता और अनुभव का लाभ मिलने की उम्मीद है। विजय चौधरी: ‘संकटमोचक’ की नई जिम्मेदारी दूसरे डिप्टी सीएम Vijay Kumar Chaudhary को Nitish Kumar का सबसे भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कई अहम विभागों का अनुभव प्रशासनिक मामलों में दक्ष राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, वे सरकार के भीतर तालमेल और संकट प्रबंधन की अहम कड़ी साबित होंगे। नई सरकार के सामने चुनौतियां और उम्मीदें नई सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी: रोजगार और उद्योग को बढ़ावा देना शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार बुनियादी ढांचे का विस्तार कानून-व्यवस्था को मजबूत रखना वहीं, जनता को उम्मीद है कि नई टीम “डबल इंजन” सरकार के जरिए विकास की रफ्तार तेज करेगी। एनडीए का नया राजनीतिक संदेश इस शपथ ग्रहण के साथ यह साफ संदेश गया है कि: भाजपा अब बिहार में नेतृत्व की भूमिका में है जेडीयू के अनुभवी नेताओं को सरकार में मजबूत स्थान दिया गया है गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने पर खास ध्यान दिया गया है बिहार में सत्ता का यह बदलाव सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति, अनुभव और संतुलन का नया अध्याय है। Samrat Choudhary के नेतृत्व में और Bijendra Prasad Yadav व Vijay Kumar Chaudhary के अनुभव के साथ अब नजर इस बात पर होगी कि यह नई सरकार राज्य को विकास और स्थिरता के नए रास्ते पर कितनी तेजी से आगे बढ़ा पाती है।
पटना: बिहार की राजनीति में आज बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब वरिष्ठ जेडीयू नेता Vijay Kumar Chaudhary ने डिप्टी मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राजधानी पटना में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह पर पूरे राज्य की नजरें टिकी रहीं। इस नई सियासी तस्वीर में एक तरफ Samrat Choudhary ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर नई शुरुआत की, वहीं दूसरी ओर Nitish Kumar के करीबी और भरोसेमंद सहयोगी विजय चौधरी को डिप्टी सीएम की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। नीतीश के भरोसेमंद को मिली कमान राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि Nitish Kumar ने सरकार के संतुलन और स्थिरता को बनाए रखने के लिए अपने सबसे अनुभवी नेता को आगे किया है। शपथ से पहले मीडिया से बातचीत में Vijay Kumar Chaudhary भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि उनकी पूरी राजनीति नीतीश कुमार के नेतृत्व में रही है और यह जिम्मेदारी उनके विश्वास का परिणाम है। अनुभव और प्रशासनिक पकड़ विजय चौधरी: बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं कई अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं जटिल प्रशासनिक मामलों को सुलझाने में माहिर माने जाते हैं इसी कारण उन्हें सरकार का “क्राइसिस मैनेजर” भी कहा जाता है। नई सरकार में क्या होगी भूमिका? नई सरकार में Vijay Kumar Chaudhary की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। बीजेपी नेतृत्व और जेडीयू के बीच तालमेल बैठाना प्रशासनिक फैसलों में स्थिरता बनाए रखना विकास योजनाओं को जमीन पर लागू करना विश्लेषकों का मानना है कि जहां Samrat Choudhary के पास ऊर्जा है, वहीं विजय चौधरी के पास अनुभव का मजबूत आधार है। विकास पर रहेगा फोकस डिप्टी सीएम बनने के बाद विजय चौधरी ने संकेत दिए कि सरकार: शिक्षा, वित्त और बुनियादी ढांचे पर खास ध्यान देगी “न्याय के साथ विकास” की नीति को आगे बढ़ाएगी एनडीए सरकार का नया संतुलन इस शपथ के साथ बिहार में एनडीए सरकार का नया स्वरूप सामने आया है। Vijay Kumar Chaudhary की नियुक्ति से यह संदेश गया है कि जेडीयू अब भी सरकार में मजबूत भूमिका निभा रही है। बिहार की सियासत में यह बदलाव केवल पदों का फेरबदल नहीं, बल्कि रणनीति और संतुलन का नया अध्याय है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विजय चौधरी अपने अनुभव के दम पर सरकार को कितनी मजबूती देते हैं और राज्य के विकास को नई दिशा कैसे देते हैं।
पटना: बिहार में लंबे समय से चर्चा में रहा बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। कागजों और योजनाओं तक सीमित यह महत्वाकांक्षी परियोजना अब जमीन पर उतरने की तैयारी में है। रेलवे ने इसके लिए सर्वे टीम का गठन कर दिया है और जुलाई-अगस्त से ग्राउंड सर्वे शुरू होने की संभावना है। यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर दिल्ली से वाराणसी होते हुए पटना और आगे सिलीगुड़ी तक जाएगा, जो देश के उत्तर और पूर्वी हिस्सों को नई गति और कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। दिल्ली से सिलीगुड़ी तक हाई-स्पीड कॉरिडोर इस परियोजना के तहत दिल्ली से वाराणसी तक करीब 756 किलोमीटर और वाराणसी से सिलीगुड़ी तक लगभग 744 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क प्रस्तावित है। यह कॉरिडोर देश के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण मार्गों में से एक होगा, जिससे लंबी दूरी की यात्रा बेहद तेज और सुविधाजनक हो जाएगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रोजेक्ट केवल यात्रा समय कम करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा देगा। बिहार के कई शहरों को मिलेगा सीधा लाभ बुलेट ट्रेन का रूट बिहार के कई प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगा, जिनमें बक्सर, आरा, पटना, मोकामा, हाथीदह, बेगूसराय, महेशखूंट, कटिहार और किशनगंज शामिल हैं। इन शहरों के जुड़ने से न केवल यात्रियों को तेज और आसान यात्रा का विकल्प मिलेगा, बल्कि व्यापार, उद्योग और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। खासकर पटना को हाई-स्पीड नेटवर्क से जोड़ना राज्य के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है। 650 KM एलिवेटेड ट्रैक, जमीन अधिग्रहण बड़ी चुनौती इस परियोजना के तहत बिहार में लगभग 650 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड ट्रैक बनाया जाएगा, जिससे ट्रेन बिना किसी रुकावट के तेज गति से दौड़ सके। इसके लिए करीब 1900 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की जरूरत होगी, जो इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा करना सरकार के लिए अहम परीक्षा साबित हो सकता है। यात्रा समय में ऐतिहासिक कमी बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद यात्रा समय में भारी कमी देखने को मिलेगी। वाराणसी से सिलीगुड़ी की दूरी करीब 2 घंटे 55 मिनट में पूरी हो सकेगी, जबकि दिल्ली से वाराणसी का सफर लगभग 3 घंटे 50 मिनट में तय होगा। वर्तमान में यही यात्राएं कई घंटों तक चलती हैं, ऐसे में यह परियोजना यात्रियों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। सर्वे के बाद बनेगी विस्तृत योजना (DPR) रेलवे का लक्ष्य इस वित्तीय वर्ष में सर्वे कार्य पूरा करना है। इसके बाद डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी, जिसमें परियोजना की लागत, समयसीमा और निर्माण की पूरी रणनीति तय होगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। कौन करेगा प्रोजेक्ट का संचालन इस पूरी परियोजना की जिम्मेदारी National High Speed Rail Corporation Limited के पास है, जो पहले से मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इस संस्था के अनुभव को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि बिहार में भी यह प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ेगा। पूर्वी भारत के विकास को मिलेगी रफ्तार यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर न केवल बिहार बल्कि पूरे पूर्वी भारत के लिए विकास का इंजन बन सकता है। बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश बढ़ेगा, उद्योगों को गति मिलेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह महत्वाकांक्षी योजना कब तक हकीकत का रूप लेती है।
पटना/मोकामा, एजेंसियां। बिहार में बढ़ते अपराध को लेकर मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह का बयान राजनीतिक बहस का नया कारण बन गया है। उन्होंने कहा कि “भगवान भी मुख्यमंत्री बन जाएं तो मर्डर नहीं रुकेगा।” इस बयान के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अपराध पर क्या बोले अनंत सिंह अनंत सिंह ने कहा कि बिहार में हत्या की घटनाएं पूरी तरह खत्म होना संभव नहीं है, क्योंकि अधिकतर अपराध आपसी रंजिश, निजी विवाद और दुश्मनी के कारण होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर घर में पुलिस तैनात नहीं कर सकती, इसलिए हर घटना को रोकना संभव नहीं है। पुराने बिहार से की तुलना अपने बयान में उन्होंने मौजूदा बिहार की तुलना पुराने दौर से भी की। उनका कहना था कि पहले राज्य में अपहरण और अपराध का डर ज्यादा था, जबकि अब हालात पहले से बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि अगर अब कहीं किडनैपिंग की घटना होती भी है, तो पीड़ित को जल्दी छोड़ दिया जाता है, जो बदलाव का संकेत है। CM चेहरे पर भी खुलकर बोले अनंत सिंह ने राजनीति पर भी बेबाकी से राय रखी। उन्होंने कहा कि जेडीयू से निशांत कुमार और बीजेपी से सम्राट चौधरी अच्छे मुख्यमंत्री बन सकते हैं। हालांकि, उन्होंने नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि उनके जैसा नेता दूसरा नहीं है और उनके काम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दंगल और परिवार की राजनीति उन्होंने अपने गांव नदमा में आयोजित होने वाले महा दंगल का भी जिक्र किया, जिसमें 100 से अधिक पहलवानों के भाग लेने और लाखों लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई। साथ ही संकेत दिए कि अब वे खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहते और अपने बड़े बेटे को राजनीति में आगे बढ़ाना चाहते हैं। बयान से बढ़ी सियासी हलचल अनंत सिंह के बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि विपक्ष और सत्ता पक्ष इस मुद्दे को किस तरह उठाते हैं।
पटना की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन ने बांकीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा देने का फैसला लिया है। करीब 20 वर्षों तक इस सीट का प्रतिनिधित्व करने के बाद उनका यह कदम बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। 20 साल का सफर, भावुक विदाई इस्तीफे से पहले नितिन नवीन ने एक भावुक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने दो दशक लंबे राजनीतिक सफर को याद किया। उन्होंने बताया कि 2006 में अपने पिता के निधन के बाद उपचुनाव के जरिए उन्होंने राजनीति में कदम रखा और उसी के बाद से जनता की सेवा में जुटे रहे। लगातार पांच बार विधायक चुने गए नितिन नवीन ने अपने पोस्ट में बांकीपुर की जनता को “परिवार” बताया और उनके विश्वास को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया। ‘जनता ने रास्ता दिखाया’ अपने संदेश में उन्होंने लिखा कि जनता ने उन्हें सिर्फ समस्याएं ही नहीं बताईं, बल्कि उनके समाधान का रास्ता भी दिखाया। उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को परिवार का हिस्सा बताते हुए कहा कि उनका सहयोग ही उनकी सफलता का आधार रहा है। उन्होंने बांकीपुर की जनता को “देवतुल्य” बताते हुए आभार जताया। नई जिम्मेदारी, लेकिन रिश्ता कायम नितिन नवीन ने स्पष्ट किया कि विधायक पद छोड़ने के बावजूद उनका जनता से रिश्ता खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें नई जिम्मेदारी दी है और वे उसी के माध्यम से बिहार और देश के विकास में योगदान देते रहेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम करने के अनुभव को भी अहम बताया। बांकीपुर में बढ़ेगी सियासी हलचल उनके इस्तीफे के बाद बांकीपुर विधानसभा सीट खाली हो जाएगी, जिससे उपचुनाव की स्थिति बनेगी। यह सीट बीजेपी के लिए काफी अहम मानी जाती है, ऐसे में आने वाले समय में उम्मीदवार चयन और रणनीति को लेकर पार्टी के भीतर हलचल तेज होना तय है। नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत राजनीतिक जानकारों के अनुसार, नितिन नवीन का इस्तीफा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत है। माना जा रहा है कि अब उनकी भूमिका राज्य से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीति में ज्यादा सक्रिय हो सकती है।
पटना: बिहार की राजधानी पटना से एक बेहद प्रेरणादायक और मानवीय घटना सामने आई है, जहां एक ट्रैफिक कॉन्स्टेबल की सूझबूझ और तत्परता ने एक जवान की जिंदगी बचा ली। बिहार पुलिस द्वारा साझा किए गए इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है, और अब हर कोई इस पुलिसकर्मी की सराहना कर रहा है। क्या है पूरा मामला? घटना पटना के मीठापुर बाइपास की है, जहां से गुजर रहे एक CISF जवान को अचानक सांस लेने में दिक्कत हुई और वह सड़क पर ही गिर पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत ट्रैफिक पुलिस को सूचना दी। कुछ ही पलों में एक ट्रैफिक कॉन्स्टेबल वहां पहुंचा और स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बिना देर किए CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू कर दिया। कैसे बची जवान की जान? वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जवान लगभग बेहोशी की हालत में था। ट्रैफिक कॉन्स्टेबल ने लगातार CPR देकर उसकी सांसें वापस लाने की कोशिश की। कुछ ही देर में जवान को होश आ गया, जिससे वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। इसके बाद कॉन्स्टेबल ने जवान को निर्देश दिया कि वह सिर नीचे रखे, पैर फैलाए और पानी पीकर खुद को सामान्य करे। उनकी सतर्कता और सही समय पर लिए गए फैसले ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया। बिहार पुलिस का संदेश इस घटना का वीडियो साझा करते हुए बिहार पुलिस ने लिखा- “बिहार पुलिस सदैव आपके साथ। हर संकट में आपके साथ, हर परिस्थिति में आपके लिए समर्पित। आपकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” सोशल मीडिया पर मिल रही जमकर तारीफ वीडियो वायरल होते ही लोग ट्रैफिक कॉन्स्टेबल की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “सैल्यूट इस जज्बे को।” दूसरे ने कहा, “CPR की ट्रेनिंग हर स्कूल-कॉलेज में जरूरी होनी चाहिए।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “वेलडन, बदलता हुआ बिहार।” क्यों खास है यह घटना? यह घटना सिर्फ एक जान बचाने की नहीं, बल्कि आपात स्थिति में सही प्रशिक्षण और त्वरित निर्णय की अहमियत को भी दर्शाती है। अगर हर नागरिक को CPR जैसी जीवन रक्षक तकनीक की जानकारी हो, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
सावरकरवाद- पटेलवाद के पोस्टरों से गरमाया माहौल, प्रशासन सतर्क; छात्र राजनीति में तेज हुई वैचारिक टकराहट पटना: बिहार की राजधानी स्थित पटना विश्वविद्यालय इन दिनों एक नए विवाद के केंद्र में है। ‘मनुस्मृति’ जलाने की घटना से शुरू हुआ विवाद अब पोस्टर पॉलिटिक्स में बदल गया है, जिससे पूरे कैंपस का माहौल तनावपूर्ण हो गया है। रातोंरात लगे भड़काऊ पोस्टर रविवार सुबह जब छात्र कैंपस पहुंचे, तो विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों पर कई विवादित पोस्टर लगे मिले। इन पोस्टरों में ‘शरियाबाद’ और ‘मीमवाद’ के खिलाफ नारे लिखे गए थे, वहीं ‘अंबेडकरवाद’, ‘सावरकरवाद’ और ‘पटेलवाद’ के समर्थन में संदेश दिए गए थे। इन पोस्टरों ने छात्र-छात्राओं के बीच बहस को और तेज कर दिया है। मनुस्मृति दहन से शुरू हुआ विवाद दरअसल, कुछ दिन पहले मनुस्मृति जलाने की घटना ने पूरे विवाद को जन्म दिया। यह घटना एक कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष मनीष यादव ने मंच से मनुस्मृति दहन किया और कुछ बयान दिए। इस घटना को लेकर कैंपस में दो धड़े बन गए-एक पक्ष इसे सामाजिक न्याय का प्रतीक मान रहा है, तो दूसरा इसे भारतीय परंपरा के खिलाफ बता रहा है। पोस्टर अभियान के पीछे छात्र संगठन सूत्रों के अनुसार, यह पोस्टर अभियान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्र नेताओं द्वारा चलाया गया है। बताया जा रहा है कि यह अभियान मनुस्मृति दहन के विरोध में शुरू किया गया। हालांकि, इसको लेकर आधिकारिक तौर पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। UGC मुद्दे ने और बढ़ाया तनाव इस पूरे घटनाक्रम के बीच University Grants Commission (UGC) से जुड़े मुद्दों पर भी छात्र संगठनों का विरोध जारी है। हाल ही में मशाल जुलूस और प्रदर्शन हुए, जिससे पहले से ही माहौल गरम था। अब पोस्टर वॉर ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। प्रशासन और पुलिस अलर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए कैंपस में निगरानी बढ़ा दी गई है।
‘बिहार स्पोर्ट्स कॉनक्लेव 2026’ में बड़ा रोडमैप पेश, मनरेगा मॉडल अब देशभर में होगा लागू बिहार अब खेलों के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। राजधानी पटना में आयोजित बिहार स्पोर्ट्स कॉनक्लेव 2026 में राज्य को ‘स्पोर्ट्स हब’ बनाने का महत्वाकांक्षी खाका पेश किया गया। केंद्रीय खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे और बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने साफ संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में बिहार खेलों के जरिए विकास और पहचान का नया केंद्र बन सकता है। गांव-गांव खेल मैदान बनाने की योजना कॉनक्लेव में सबसे ज्यादा चर्चा बिहार के ‘विलेज स्पोर्ट्स मॉडल’ की रही। इस मॉडल के तहत मनरेगा के सहयोग से गांव-गांव में खेल मैदान और छोटे स्टेडियम तैयार किए जा रहे हैं। इस पहल की केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे ने सराहना करते हुए कहा कि बिहार का यह मॉडल अब पूरे देश में लागू किया जाएगा। इससे ग्रामीण स्तर पर खेल प्रतिभाओं को निखारने का बड़ा मौका मिलेगा। खेल अब बनेगा रोजगार और पहचान का जरिया सरकार अब खेलों को केवल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि इसे रोजगार, विकास और सामाजिक पहचान से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बुनियादी ढांचे और नीतिगत समर्थन के जरिए बिहार आने वाले समय में देश के स्पोर्ट्स मैप पर मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है। ओलंपिक और कॉमनवेल्थ की मेजबानी की तैयारी खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने केंद्र सरकार से मांग की कि यदि भारत को 2036 ओलंपिक की मेजबानी मिलती है, तो बिहार को भी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की मेजबानी का मौका दिया जाए। उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि कॉमनवेल्थ गेम्स के कुछ इवेंट्स बिहार में आयोजित किए जा सकते हैं, क्योंकि राज्य में अब अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम और सुविधाएं विकसित हो रही हैं। खेल इतिहास से भी जुड़ा है बिहार बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक ने बताया कि राज्य का खेलों से जुड़ाव काफी पुराना रहा है। एक समय इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन का मुख्यालय भी बिहार में था और इसके अध्यक्ष जमशेदजी टाटा जैसे प्रतिष्ठित व्यक्ति रहे हैं। दिग्गज खिलाड़ियों ने बढ़ाया उत्साह कॉनक्लेव में अभिनव बिंद्रा और डोला बनर्जी जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को खास बना दिया। उनके अनुभवों से युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिली।
6500 करोड़ की मेगा परियोजना से पटना के जाम से मिलेगी राहत, बिहार की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव पटना: बिहार की राजधानी पटना में ट्रैफिक जाम से जूझ रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। जेपी गंगा पथ के विस्तार कार्य की शुरुआत हो चुकी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद दीघा से कोईलवर तक का 36 किलोमीटर का सफर महज 30 मिनट में तय किया जा सकेगा। 36 किलोमीटर लंबा मेगा प्रोजेक्ट यह फोरलेन सड़क दीघा जेपी सेतु से शुरू होकर शेरपुर-बिहटा होते हुए कोईलवर पुल तक जाएगी। कुल 36 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट में 18 किमी एलिवेटेड (ऊपर) और 18 किमी जमीन पर सड़क बनाई जाएगी। पथ निर्माण विभाग के अनुसार, इस परियोजना की कुल लागत लगभग 6500 करोड़ रुपये है, जो इसे बिहार की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में शामिल करता है। जाम से मिलेगी बड़ी राहत फिलहाल पटना से कोईलवर जाने के लिए लोगों को मनेर या खगौल-बिहटा रोड से होकर गुजरना पड़ता है, जहां अक्सर भारी जाम लगता है और सफर में डेढ़ से दो घंटे तक का समय लग जाता है। नई सड़क बनने के बाद यह दूरी आधे घंटे में पूरी हो सकेगी, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। पहली बार अपनाया गया हाइब्रिड मॉडल इस परियोजना में ‘हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल’ का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो बिहार में इस स्तर पर पहली बार लागू हो रहा है। इस मॉडल के तहत सड़क बनाने वाली एजेंसी को ही अगले 15 वर्षों तक इसका रखरखाव भी करना होगा, जिससे सड़क की गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी। बिहार के लिए बनेगा नया कनेक्टिविटी कॉरिडोर यह सड़क शेरपुर के पास प्रस्तावित छह लेन पुल से भी जुड़ेगी, जिससे उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच एक नया ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर तैयार होगा। इसका फायदा सारण, वैशाली, आरा और बक्सर जैसे इलाकों को सीधे मिलेगा। साथ ही, दानापुर और बिहटा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ट्रैफिक का दबाव भी काफी हद तक कम होगा। तय समय में पूरा करने का लक्ष्य इस प्रोजेक्ट को चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण कार्य हैदराबाद की कंपनी विश्व समुद्रा द्वारा किया जा रहा है और अधिकांश हिस्सों में जमीन अधिग्रहण का काम भी पूरा हो चुका है।
नवादा/पटना: बिहार के नवादा जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। JDU विधायक विभा देवी के छोटे बेटे अखिलेश कुमार की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें पटना ले जाया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना से परिवार और पूरे इलाके में शोक का माहौल है। तेज रफ्तार कार पेड़ से टकराई मिली जानकारी के अनुसार, अखिलेश कुमार गुरुवार शाम अपने घर से कार लेकर निकले थे। इसी दौरान उनकी गाड़ी अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक पेड़ से जा टकराई। हादसा इतना जबरदस्त था कि वे गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पटना में इलाज के दौरान हुई मौत घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत बेहतर इलाज के लिए पटना ले जाया गया। लेकिन हालत नाजुक होने के कारण डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। फिलहाल उनका पार्थिव शरीर पटना से नवादा स्थित पैतृक आवास लाया जा रहा है। परिवार में पसरा मातम इस हादसे के बाद विधायक विभा देवी और उनके पति राजवल्लभ प्रसाद यादव समेत पूरा परिवार गहरे सदमे में है। घटना की खबर मिलते ही नवादा जिले में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर पहुंचकर परिवार को सांत्वना दे रहे हैं। राजनीति से दूर, मिलनसार स्वभाव के थे अखिलेश अखिलेश कुमार सक्रिय राजनीति में नहीं थे, लेकिन उनका व्यवहार काफी मिलनसार बताया जाता है। वे अक्सर सामाजिक और पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होते थे और लोगों से सहजता से घुलमिल जाते थे। स्थानीय लोग उन्हें एक सरल और विनम्र व्यक्ति के रूप में याद कर रहे हैं। हाल ही में विधायक बनी थीं विभा देवी विभा देवी ने हाल ही में विधानसभा चुनाव जीतकर नवादा सीट से प्रतिनिधित्व किया है। वे राजवल्लभ प्रसाद यादव की पत्नी हैं, जो पूर्व में राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं। इस दर्दनाक हादसे ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है और पूरे इलाके में शोक का माहौल बना हुआ है। पूरे इलाके में शोक की लहर अखिलेश कुमार की असमय मौत से नवादा और आसपास के क्षेत्रों में दुख का माहौल है। लोग लगातार उनके आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।