रांची में त्योहार को लेकर हाई अलर्ट, ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव रांची में रामनवमी और चैती दुर्गा पूजा के अवसर पर शहर में भारी भीड़ और भव्य शोभायात्राओं को देखते हुए प्रशासन ने विशेष ट्रैफिक प्लान जारी किया है। 26 मार्च की शाम से लेकर 28 मार्च की रात तक राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर सामान्य वाहनों के परिचालन पर रोक रहेगी। प्रशासन ने साफ कहा है कि भारी वाहन शहर के अंदर प्रवेश नहीं करेंगे और उन्हें रिंग रोड के जरिए ही अपने गंतव्य तक जाना होगा। 26 मार्च: झांकियों के कारण शाम से ट्रैफिक पर ब्रेक 26 मार्च को विभिन्न अखाड़ों की झांकियों को देखते हुए शाम से ट्रैफिक व्यवस्था बदली रहेगी। पाबंदियां शाम 4:00 बजे से अगले दिन सुबह 6:00 बजे तक भारी वाहनों की एंट्री बंद शाम 5:00 बजे से रात 12:00 बजे तक छोटे मालवाहक भी प्रतिबंधित इन रास्तों पर पूरी तरह रोक किशोरी यादव चौक से अपर बाजार महावीर मंदिर चौक शहीद चौक सुभाष चौक सुजाता चौक इन मार्गों पर ऑटो, टोटो और नगर निगम बसों का परिचालन पूरी तरह बंद रहेगा। 27 मार्च: मुख्य शोभायात्रा, मेन रोड पूरी तरह सील रामनवमी के दिन रांची में सबसे बड़ा जुलूस निकलेगा, जिसके चलते शहर का मेन रोड पूरी तरह बंद रहेगा। भारी वाहन सुबह 8:00 बजे से 28 मार्च सुबह 4:00 बजे तक प्रवेश प्रतिबंधित ऑटो-टोटो दोपहर 12:30 बजे से रात 12:30 बजे तक बंद प्रमुख सील प्वाइंट्स (दोपहर 1:00 बजे से) SSP आवास चौक से कचहरी और शहीद चौक की ओर नो-एंट्री सर्कुलर रोड से वाहन केवल जेल चौक तक जाकिर हुसैन पार्क से कमिश्नर और रेडियम चौक की ओर रोक चडरी तालाब, प्लाजा चौक, पुरुलिया रोड से अल्बर्ट एक्का चौक की ओर बंद राजेंद्र चौक से ओवरब्रिज और सुजाता चौक की ओर प्रतिबंध पिस्का मोड़ से रातू रोड और न्यू मार्केट की ओर सामान्य ट्रैफिक बंद मेन रोड से जुड़ी सभी गलियां जैसे विष्णु गली, बुधिया गली और चर्च रोड भी पूरी तरह सील रहेंगी। 28 मार्च: दुर्गा विसर्जन के दौरान भी रहेगा ट्रैफिक डायवर्जन चैती दुर्गा विसर्जन के दिन भी ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव जारी रहेगा। समय सुबह 8:00 बजे से रात 12:00 बजे तक भारी वाहनों की एंट्री बंद रूट डायवर्जन विसर्जन जुलूस के अनुसार पुलिस जरूरत पड़ने पर ट्रैफिक डायवर्ट करेगी आम जनता के लिए जरूरी निर्देश लंबी दूरी के वाहन रिंग रोड का ही इस्तेमाल करें एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड के लिए विशेष व्यवस्था रहेगी आम लोगों को सलाह है कि घर से निकलने से पहले वैकल्पिक मार्ग की जानकारी जरूर लें
चक्रधरपुर: झारखंड के चक्रधरपुर रेल मंडल में सोमवार को बड़ा रेल हादसा हो गया। मुर्गामहादेव रोड स्टेशन के पास कोयला लदी मालगाड़ी के दो डिब्बे पटरी से उतर गए, जिससे पूरे क्षेत्र में रेल यातायात ठप हो गया। इस घटना के कारण अप और डाउन दोनों लाइनों पर ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है। दोनों लाइनें बाधित, कई ट्रेनें प्रभावित हादसे के बाद देवझर-बांसपानी रेलखंड पर परिचालन पूरी तरह बंद हो गया। इसका असर कई यात्री ट्रेनों पर पड़ा। टाटा-गुवा मेमू ट्रेन को रद्द कर दिया गया, जबकि कई ट्रेनों को बीच रास्ते से ही वापस लौटाना पड़ा। खुर्दा रोड-टाटा वंदे भारत एक्सप्रेस को बांसपानी स्टेशन पर रोक दिया गया, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा। बीच रास्ते में फंसी प्रमुख ट्रेनें इस घटना के चलते कई महत्वपूर्ण ट्रेनें बीच सेक्शन में ही अटक गईं। पुरी-बड़बिल इंटरसिटी बीच रास्ते में फंसी रही विशाखापटनम एक्सप्रेस को टाटानगर में ही रोक दिया गया हावड़ा-बड़बिल जनशताब्दी को टाटा में ही शॉर्ट टर्मिनेट करना पड़ा भीषण गर्मी के बीच फंसे यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन हरकत में आ गया। चक्रधरपुर से 140 टन की भारी क्रेन और डांगुवापोसी से एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन को मौके पर भेजा गया। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, मालगाड़ी में कोयला लदा होने के कारण बेपटरी डिब्बों को दोबारा ट्रैक पर लाना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। राहत और बहाली का काम तेजी से जारी है। कई ट्रेनें रद्द और शॉर्ट टर्मिनेट इस हादसे के कारण कई ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया गया: रद्द ट्रेनें: टाटा-गुवा-टाटा मेमू (68003/68004) पुरी-बड़बिल एक्सप्रेस (आंशिक रूप से रद्द) बड़बिल-पुरी एक्सप्रेस (आंशिक रूप से रद्द) शॉर्ट टर्मिनेट ट्रेनें: हावड़ा-बड़बिल जनशताब्दी टाटा में समाप्त बड़बिल-हावड़ा एक्सप्रेस टाटा से वापस पुरी-टाटा वंदे भारत बांसपानी में समाप्त लंबी दूरी की ट्रेनें बदले रूट से संचालित रेलवे ने कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग से चलाया: टाटा-विशाखापटनम एक्सप्रेस को चक्रधरपुर-राउरकेला-झारसुगुड़ा मार्ग से भेजा गया आनंद विहार-पुरी एक्सप्रेस को चांडिल-कांड्रा-टाटा-हिजली रूट से चलाया गया व्यस्त रेलखंड पर पड़ा बड़ा असर मुर्गामहादेव रोड स्टेशन देवझर और बांसपानी के बीच स्थित है, जो चक्रधरपुर रेल मंडल का सबसे व्यस्त मार्ग माना जाता है। यह इलाका लौह-अयस्क और कोयला परिवहन का प्रमुख रूट है, जहां बड़ी संख्या में मालगाड़ियां चलती हैं। ऐसे में इस हादसे का असर सिर्फ यात्री ट्रेनों पर ही नहीं, बल्कि माल ढुलाई और रेलवे के राजस्व पर भी पड़ने की संभावना है। यात्रियों को राहत का इंतजार रेलवे की ओर से ट्रैक को जल्द बहाल करने की कोशिश जारी है, लेकिन पूरी तरह सामान्य स्थिति बहाल होने में समय लग सकता है। तब तक यात्रियों को असुविधा झेलनी पड़ सकती है।
शपथ ग्रहण के साथ नई सरकार की शुरुआत झारखंड के धनबाद में बुधवार को नगर निगम की नई सरकार का गठन हो गया। धनबाद नगर निगम के नवनिर्वाचित मेयर संजीव सिंह ने 18 मार्च को पद और गोपनीयता की शपथ ली। उपायुक्त ने उन्हें पदभार दिलाया। उनके साथ ही 55 वार्ड पार्षदों ने भी शपथ ग्रहण किया। आज ही मिलेगा डिप्टी मेयर, मुकाबला दिलचस्प नगर निगम में डिप्टी मेयर पद को लेकर भी हलचल तेज है। आज ही 55 पार्षदों में से किसी एक को डिप्टी मेयर चुना जाएगा। अगर एक से अधिक उम्मीदवार सामने आते हैं तो चुनाव कराया जाएगा, अन्यथा निर्विरोध चयन की घोषणा होगी। देर रात तक चली लॉबिंग, चाय पार्टी में जुटे पार्षद डिप्टी मेयर पद को लेकर मंगलवार देर रात तक जोरदार लॉबिंग देखने को मिली। मेयर संजीव सिंह द्वारा आयोजित चाय पार्टी में 40 से अधिक पार्षदों के शामिल होने का दावा किया गया। इस दौरान उन्होंने सभी को एकजुट रहने और शहर के विकास के लिए साथ काम करने की अपील की। पिछले एक सप्ताह से इस पद को लेकर लगातार खींचतान चल रही थी, जो अब दो प्रमुख उम्मीदवारों तक सिमट गई है। “10 साल से रुके काम पूरे करना पहली प्राथमिकता” शपथ लेने के बाद मेयर संजीव सिंह ने शहरवासियों को बड़ा भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में जो विकास कार्य अधूरे रह गए हैं, उन्हें पूरा करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने वादा किया कि आने वाले पांच वर्षों में धनबाद की तस्वीर बदली हुई नजर आएगी और शहर को नई पहचान मिलेगी। चिरकुंडा में भी नई शुरुआत वहीं दूसरी ओर चिरकुंडा नगर परिषद में भी नई अध्यक्ष ने पदभार संभाल लिया है। सुनीता देवी को उप विकास आयुक्त सन्नी राज ने शपथ दिलाई। इस मौके पर परिषद के सभी सदस्य और अधिकारी मौजूद रहे। विकास को लेकर बढ़ी उम्मीदें धनबाद और चिरकुंडा में नई नगर सरकार बनने के बाद लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। लंबे समय से रुके विकास कार्यों के अब तेज़ी से पूरे होने की संभावना जताई जा रही है। शहरवासियों को उम्मीद है कि नई टीम बेहतर बुनियादी सुविधाएं और साफ-सुथरा प्रशासन देगी। धनबाद में नई नेतृत्व टीम के साथ विकास की नई उम्मीद जगी है, अब नजर इस बात पर रहेगी कि वादों को जमीन पर कितनी तेजी से उतारा जाता है।
झारखंड की लौहनगरी जमशेदपुर के युवा इंजीनियर अंश त्रिपाठी ने अद्भुत साहस का परिचय देते हुए खतरनाक होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलकर भारत पहुंचने में सफलता हासिल की। गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर जैसे ही उनका जहाज पहुंचा, उन्होंने सबसे पहले अपनी मां को फोन कर अपनी सलामती की खबर दी। इस खबर से परिवार ही नहीं, पूरे शहर में राहत और गर्व का माहौल है। पहली कॉल: “मां, मैं लौट आया हूं” मुंद्रा पोर्ट की सीमा में पहुंचते ही जैसे ही नेटवर्क मिला, अंश त्रिपाठी ने तुरंत अपनी मां चंदा त्रिपाठी को फोन लगाया। उन्होंने संक्षेप में कहा, “मां, मैं भारत पहुंच गया हूं और पूरी तरह सुरक्षित हूं। अभी जहाज पर थोड़ा काम है, बाद में आराम से बात करूंगा।” यह कुछ शब्द ही मां और परिवार के लिए सबसे बड़ी राहत बन गए, जिनका इंतजार कई दिनों से किया जा रहा था। घर में खुशी की लहर, टली बड़ी चिंता अंश की सुरक्षित वापसी की खबर मिलते ही जमशेदपुर के पारडीह स्थित उनके घर ‘आशियाना वुडलैंड’ में जश्न जैसा माहौल बन गया। उनके पिता मिथिलेश कुमार त्रिपाठी, जो पिछले दिनों चिंता में डूबे थे, बेटे की आवाज सुनकर भावुक हो उठे और चेहरे पर खुशी साफ झलकने लगी। मां की दुआओं ने बचाया मां चंदा त्रिपाठी ने बेटे की आवाज सुनते ही भावुक होकर कहा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे उनकी सांसें वापस लौट आई हों। उन्होंने बताया कि बेटे की आवाज में आत्मविश्वास साफ झलक रहा था, जिससे उन्हें भरोसा हो गया कि उनका बेटा सुरक्षित है। पत्नी को भी था पूरा विश्वास अंश की पत्नी चंदा मिश्रा त्रिपाठी, जो टाटा स्टील में CA के पद पर कार्यरत हैं, ने इसे ईश्वर की कृपा और भारत सरकार की कूटनीतिक सफलता बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने पति की क्षमता और साहस पर हमेशा भरोसा था। खतरनाक हालात में दिखाई बहादुरी अंश त्रिपाठी, जो शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में सेकंड इंजीनियर हैं, युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते हुए खतरनाक परिस्थितियों का सामना कर रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने धैर्य और सूझबूझ से अपने कर्तव्य को निभाया और सुरक्षित भारत लौट आए। देशसेवा की विरासत से मिला हौसला अंश के पिता मिथिलेश कुमार त्रिपाठी भारतीय वायुसेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं और बाद में यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, “मैंने देश के लिए वर्दी पहनकर सेवा की, आज मेरा बेटा समुद्र के रास्ते देश के लिए ऊर्जा लेकर आ रहा है। इससे बड़ा गर्व क्या हो सकता है।” प्रेरणादायक बनी अंश की कहानी अंश त्रिपाठी की यह कहानी सिर्फ एक सुरक्षित वापसी नहीं, बल्कि साहस, कर्तव्य और परिवार के अटूट विश्वास की मिसाल है। उनकी बहादुरी ने यह साबित कर दिया कि जब इरादे मजबूत हों, तो मुश्किल से मुश्किल हालात भी रास्ता छोड़ देते हैं।
मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव झारखंड में इन दिनों मौसम का मिजाज बदलता हुआ नजर आ रहा है। कभी पारा 36 डिग्री तक चढ़ जा रहा है तो कभी 30 डिग्री के आसपास सिमट जाता है। यही स्थिति न्यूनतम तापमान के साथ भी देखने को मिल रही है। पिछले 24 घंटों में जहां न्यूनतम तापमान 17–18 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा था, वहीं अब कई जिलों में यह गिरकर 11 से 14 डिग्री तक पहुंच गया है। इस तरह न्यूनतम तापमान में करीब 3 से 5 डिग्री की गिरावट देखी गई है। मौसम विभाग ने बताई वजह रांची मौसम केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार फिलहाल राज्य में मौसम ट्रांजिशन फेज में है, यानी मौसम धीरे-धीरे ठंड से गर्मी की ओर बढ़ रहा है। इसी कारण अधिकतम और न्यूनतम तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि दक्षिणी जिलों जैसे पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में न्यूनतम तापमान करीब 17 डिग्री तक रह सकता है, जबकि अन्य जिलों में यह 14 से 15 डिग्री के बीच रहने की संभावना है। मुख्य शहरों का तापमान और AQI शहर अधिकतम/न्यूनतम तापमान AQI रांची 31°C / 15°C 140 जमशेदपुर 36°C / 17°C 171 धनबाद 33°C / 15°C 156 बोकारो 34°C / 15°C 155 पलामू 36°C / 15°C 160 पूर्वी जिलों में गर्मी से राहत राज्य के उत्तर-पूर्वी जिलों जैसे देवघर, गोड्डा, साहिबगंज और दुमका में लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिली है। पहले जहां अधिकतम तापमान 35 डिग्री के आसपास पहुंच रहा था, वहीं अब यह घटकर करीब 32 डिग्री तक आ गया है। इसके साथ ही न्यूनतम तापमान भी 17 डिग्री से गिरकर लगभग 14 डिग्री तक दर्ज किया गया है। तापमान में आई इस गिरावट के कारण शाम के समय हल्की ठंड का एहसास हो रहा है। मध्य और पश्चिमी जिलों का हाल पलामू, रांची, खूंटी, लोहरदगा, कोडरमा, चतरा, लातेहार, रामगढ़, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद जैसे जिलों में अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री तक दर्ज किया जा रहा है। वहीं न्यूनतम तापमान 14 से 15 डिग्री के बीच बना हुआ है। कुछ स्थानों पर तापमान इससे भी नीचे चला गया है। बोकारो में न्यूनतम तापमान 13.6 डिग्री, गुमला में 11.4 डिग्री और खूंटी में सबसे कम 10.4 डिग्री दर्ज किया गया। इस वजह से लोगों को दिन में हल्की गर्मी तो सुबह और शाम के समय ठंडी हवा का एहसास हो रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।