सिएटल, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 16 में स्पेन के खिलाफ होने वाले अहम मुकाबले से पहले पुर्तगाल के कप्तान Cristiano Ronaldo ने आलोचकों और पत्रकारों पर तीखा हमला बोला। 41 वर्षीय स्टार फुटबॉलर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पिछले 23 वर्षों से लोग उन्हें "खत्म" करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वे आज भी मजबूती से मैदान में डटे हुए हैं। रोनाल्डो ने कहा रोनाल्डो ने कहा, "आप लोग 23 साल से मुझे खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक समझ जाना चाहिए कि यह बेकार है, लेकिन फिर भी कोशिश जारी है।" उन्होंने माना कि उम्र के साथ उनके खेल में बदलाव आया है, लेकिन वह अब भी टीम के लिए अहम योगदान दे रहे हैं। इस विश्व कप में उनके नाम तीन गोल दर्ज हैं, जिनमें उज्बेकिस्तान के खिलाफ दो और क्रोएशिया के खिलाफ एक पेनल्टी गोल शामिल है। "मैं कब रुकूंगा, यह मैं तय करूंगा, आप नहीं" प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे लगातार संन्यास और भविष्य को लेकर सवाल पूछे गए तो रोनाल्डो नाराज दिखे। उन्होंने दो टूक कहा, "मैं कब रुकूंगा, यह मैं तय करूंगा, आप नहीं।" उन्होंने मुस्कुराते हुए एक पत्रकार की ओर इशारा कर कहा कि उन्हें लोगों के चेहरे अच्छी तरह याद रहते हैं और वह जानते हैं कि कौन उन्हें पसंद नहीं करता। रोनाल्डो ने कहा भावुक अंदाज में रोनाल्डो ने कहा कि उन्होंने फुटबॉल और जिंदगी दोनों में अपना सब कुछ झोंक दिया है। उनके मुताबिक, स्पेन के खिलाफ मैच का नतीजा चाहे जो भी हो, उन्हें अपने करियर पर कोई पछतावा नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि 40 वर्ष की उम्र के बाद मिली आलोचनाओं ने उन्हें और मजबूत बनाया है। स्पेन के खिलाफ मुकाबले को लेकर रोनाल्डो ने इसे कठिन चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि जीत के लिए पुर्तगाल को आत्मविश्वास, कड़ी मेहनत और बहादुरी के साथ खेलना होगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्व कप जीतने या हारने से उनकी पहचान नहीं बदलने वाली, क्योंकि उन्होंने हमेशा अपना शत-प्रतिशत दिया है।
अर्लिंगटन: फुटबॉल की दुनिया के सबसे महान खिलाड़ियों में शुमार अर्जेंटीना के सुपरस्टार लियोनेल मेसी आज 24 जून को अपना 39वां जन्मदिन मना रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी मेसी का प्रदर्शन दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों को हैरान कर रहा है। फीफा विश्व कप 2026 में उनका शानदार फॉर्म जारी है और शुरुआती दो मुकाबलों में ही वह पांच गोल दाग चुके हैं। हाल ही में ऑस्ट्रिया के खिलाफ मुकाबले में मेसी ने दो गोल करके एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली। इसके साथ ही वह फीफा विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उनके नाम अब कुल 18 विश्व कप गोल दर्ज हो चुके हैं। इससे पहले उन्होंने अल्जीरिया के खिलाफ हैट्रिक लगाकर जर्मनी के महान स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोज के 16 गोल के रिकॉर्ड की बराबरी की थी। 39 की उम्र में भी कायम है मेसी का जादू ऑस्ट्रिया के खिलाफ मुकाबले में मेसी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उम्र उनके खेल पर कोई असर नहीं डाल पाई है। टूर्नामेंट के शुरुआती दो मैचों में ही पांच गोल कर चुके मेसी की तारीफ करते हुए ऑस्ट्रिया के कोच राल्फ रंगनिक ने कहा कि 39 साल की उम्र में इस तरह का प्रदर्शन असाधारण है और यही उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में सर्वश्रेष्ठ बनाता है। जन्मदिन पर भावुक भी हैं मेसी इस खास दिन पर मेसी भावनात्मक दौर से भी गुजर रहे हैं। उनके पिता अर्जेंटीना में अस्वस्थ हैं और वह अपने परिवार से लगभग 10 हजार किलोमीटर दूर विश्व कप में टीम की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। बावजूद इसके उन्होंने निजी चिंताओं को अपने खेल पर हावी नहीं होने दिया और अर्जेंटीना के अब तक हुए सभी पांच गोल खुद किए हैं। मेसी ने कहा, "विश्व कप का हर मैच कठिन है। कोई टीम आसानी से मौके नहीं देती, लेकिन मैं हर पल का आनंद ले रहा हूं।" पेनल्टी मिस करने के बाद शानदार वापसी ऑस्ट्रिया के खिलाफ मैच के शुरुआती मिनटों में मेसी पेनल्टी पर गोल करने से चूक गए थे। उनके शॉट के पोस्ट के बाहर जाने से स्टेडियम में सन्नाटा छा गया था। हालांकि, आठ बार के बैलन डी'ओर विजेता मेसी ने बाद में शानदार वापसी करते हुए दो गोल दागे और अपनी गलती की भरपाई कर दी। मेसी ने मैच के बाद कहा, "पेनल्टी मिस करने से मैं काफी नाराज था, लेकिन बाद में इसकी भरपाई करने में सफल रहा।" यही मेसी की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। वह हर असफलता के बाद और अधिक मजबूती के साथ वापसी करते हैं। स्टॉपेज टाइम में भी दिखी वही पुरानी फुर्ती मैच के स्टॉपेज टाइम में मेसी ने अपना 18वां विश्व कप गोल दागा। पहले प्रयास को गोलकीपर ने रोक दिया, लेकिन मेसी ने शानदार नियंत्रण और ड्रिब्लिंग का प्रदर्शन करते हुए कई डिफेंडरों को छकाकर गेंद को जाल में पहुंचा दिया। 70 हजार दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में मौजूद अधिकांश अर्जेंटीनी समर्थकों ने इस पल का जोरदार जश्न मनाया। लियोनेल मेसी के बड़े रिकॉर्ड 6 विश्व कप (2006-2026) खेलने वाले पहले खिलाड़ी। लगातार 6 विश्व कप मैचों में गोल करने वाले इकलौते फुटबॉलर। 18 विश्व कप गोल के साथ ऑलटाइम टॉप स्कोरर। 26 गोल योगदान (18 गोल + 8 असिस्ट), जिससे उन्होंने पेले के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। 28 विश्व कप मैच खेलकर सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी बने। विश्व कप में कुल 2489 मिनट मैदान पर बिताने का रिकॉर्ड। 12 मैन ऑफ द मैच अवॉर्ड जीतने वाले एकमात्र खिलाड़ी। दो बार गोल्डन बॉल (2014 और 2022) जीतने वाले दुनिया के अकेले फुटबॉलर। 128 सफल ड्रिब्लिंग के साथ डिएगो माराडोना के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। 39 साल की उम्र में भी लियोनेल मेसी जिस स्तर का प्रदर्शन कर रहे हैं, वह उन्हें सिर्फ एक महान खिलाड़ी नहीं बल्कि फुटबॉल इतिहास का 'अल्टीमेट किंग' साबित करता है।
Lionel Messi World Cup Record: फुटबॉल के महान खिलाड़ी लियोनेल मेसी ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। अर्जेंटीना के कप्तान ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ऑस्ट्रिया के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए दो गोल दागे और इसी के साथ विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए। इससे पहले यह रिकॉर्ड जर्मनी के दिग्गज स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोज के नाम था, जिन्होंने अपने करियर में वर्ल्ड कप में 16 गोल किए थे। अब मेसी 18 गोल के साथ उनसे आगे निकल चुके हैं। रिकॉर्ड टूटने पर मिरोस्लाव क्लोज ने दी बधाई अपना रिकॉर्ड टूटने के बाद मिरोस्लाव क्लोज ने मेसी की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा, "मैं हमेशा से कहता आया हूं कि मेसी का कोई मुकाबला नहीं है। वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर हैं। मुझे उनका मुश्किल परिस्थितियों से लड़ने और हर चुनौती से ऊपर उठने का तरीका बेहद पसंद है।" क्लोज ने यह भी कहा था कि अगर कोई खिलाड़ी उनका रिकॉर्ड तोड़ सकता है, तो वह लियोनेल मेसी ही हैं। छठा वर्ल्ड कप खेल रहे हैं मेसी लियोनेल मेसी साल 2006 से लगातार फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रहे हैं और 2026 का टूर्नामेंट उनके करियर का छठा विश्व कप है। वर्ल्ड कप में मेसी का सफर 2006 – 1 गोल 2014 – 4 गोल 2022 – 7 गोल और अर्जेंटीना को चैंपियन बनाया 2026 – अब तक 5 गोल (अल्जीरिया के खिलाफ 3 और ऑस्ट्रिया के खिलाफ 2) मेसी का मौजूदा फॉर्म शानदार है और वह एक बार फिर अर्जेंटीना को विश्व विजेता बनाने के मिशन पर नजर आ रहे हैं। ऑस्ट्रिया के खिलाफ ऐसा रहा मुकाबला मैच के शुरुआती दौर में ऑस्ट्रिया के मजबूत डिफेंस ने अर्जेंटीना को काफी परेशान किया। हालांकि, 38वें मिनट में मेसी ने अपनी शानदार ड्रिब्लिंग और फिनिशिंग का नमूना पेश करते हुए पहला गोल दागा और टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद ऑस्ट्रिया ने बराबरी की भरपूर कोशिश की, लेकिन इंजरी टाइम के 95वें मिनट में मेसी ने दूसरा गोल करके मुकाबले पर अर्जेंटीना की पकड़ मजबूत कर दी और टीम को जीत दिलाई। मेसी के इस प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और महान खिलाड़ी बड़े मंच पर इतिहास रचने का हुनर रखते हैं।
नई दिल्ली: फीफा वर्ल्ड कप 2026 में शुक्रवार (19 जून) को कनाडा और कतर के बीच खेले गए मुकाबले के बाद मैदान पर तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। वैंकूवर में खेले गए इस मैच में कनाडा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कतर को 6-0 से करारी शिकस्त दी, लेकिन मैच के अंत में खिलाड़ियों के बीच हुई तीखी झड़प ने मुकाबले की चर्चा का रुख बदल दिया। कनाडा की बड़ी जीत के बावजूद टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता मिडफील्डर इस्माइल कोने की चोट रही। एक खतरनाक टक्कर के बाद उन्हें गंभीर चोट लगी और स्ट्रेचर की मदद से मैदान से बाहर ले जाना पड़ा। इस्माइल कोने की चोट के बाद बढ़ा विवाद मुकाबले के दौरान कतर के खिलाड़ी असीम मदीबो और कनाडा के मिडफील्डर इस्माइल कोने के बीच जोरदार टक्कर हुई। इस चुनौती में कोने बुरी तरह घायल हो गए और मेडिकल टीम को तुरंत मैदान पर बुलाना पड़ा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें स्ट्रेचर पर मैदान से बाहर ले जाया गया। घटना की VAR समीक्षा के बाद रेफरी ने असीम मदीबो को रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर भेज दिया। मैच खत्म होते ही भिड़ गए दोनों टीमों के खिलाड़ी घटना के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया। अंतिम सीटी बजते ही मैदान पर तीखी बहस शुरू हो गई, जो बाद में धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। बताया जा रहा है कि कनाडा के खिलाड़ी पूरे मैच के दौरान कतर की आक्रामक टैकलिंग से नाराज थे और इसी वजह से माहौल और अधिक गर्म हो गया। कोच भी बहस में हुए शामिल स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि दोनों टीमों के मुख्य कोच भी विवाद का हिस्सा बन गए। कनाडा के कोच जेसी मार्श और कतर के कोच जुलेन लोपेटेगी के बीच भी मैदान पर बहस देखने को मिली। हालांकि, बाद में अधिकारियों और सपोर्ट स्टाफ ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया। कनाडा की शानदार जीत विवाद से पहले कनाडा ने पूरे मैच में अपना दबदबा बनाए रखा और कतर को 6-0 से हराकर शानदार जीत दर्ज की। हालांकि, इस्माइल कोने की चोट और मैच के बाद हुए हंगामे ने इस जीत की चमक कुछ फीकी कर दी।
विश्व कप अभियान से पहले तकनीक का सहारा ले रही है ब्राजील टीम पांच बार की विश्व चैंपियन टीम Brazil national football team शनिवार को न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में अपने पहले मुकाबले में Morocco national football team का सामना करेगी। लंबे समय से विश्व कप खिताब का इंतजार कर रही ब्राजील टीम इस बार मैदान के साथ-साथ आधुनिक तकनीक पर भी बड़ा भरोसा जता रही है। टीम के मुख्य कोच Carlo Ancelotti और उनका सपोर्ट स्टाफ खिलाड़ियों की फिटनेस, प्रदर्शन और रिकवरी पर नजर रखने के लिए अत्याधुनिक प्लेयर ट्रैकिंग तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। क्लबों से भी लगातार जुटाया जाता है खिलाड़ियों का डेटा ब्राजील टीम के स्पोर्ट्स साइंस प्रमुख Guilherme Passos के अनुसार, जब खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम के साथ नहीं होते, तब भी उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों के क्लब नियमित रूप से ट्रैकिंग सिस्टम से जुड़ी जानकारी साझा करते हैं। इस डेटा को राष्ट्रीय टीम के डेटाबेस में जोड़ा जाता है, जिससे कोचिंग स्टाफ खिलाड़ियों की फिटनेस और मैच तैयारी का लगातार आकलन कर सकता है। इससे यह समझना आसान हो जाता है कि खिलाड़ी किस स्थिति में हैं और उनकी शारीरिक तैयारी का स्तर क्या है। स्मार्ट वेस्ट से मिलती है खिलाड़ियों की हर गतिविधि की जानकारी ब्राजील के खिलाड़ी विशेष "स्मार्ट वेस्ट" पहनते हैं, जिनमें कई सेंसर लगे होते हैं। ये सेंसर खिलाड़ियों की स्प्रिंट गति, हृदय गति, थकान के स्तर, रिकवरी प्रक्रिया और मैदान पर उनकी गतिविधियों से जुड़ा डेटा रिकॉर्ड करते हैं। इस जानकारी का विश्लेषण स्पोर्ट्स साइंस टीम करती है और फिर कोचिंग स्टाफ को खिलाड़ियों की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया जाता है। इससे खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और मैच रणनीति तैयार करने में मदद मिलती है। तेज खिलाड़ियों के लिए अलग रणनीति बनाते हैं कोच पासोस के मुताबिक, यदि कोई खिलाड़ी बेहद तेज गति से दौड़ने वाला है, तो उसकी मांसपेशियों की रिकवरी पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो जाता है। ऐसे खिलाड़ियों के लिए ट्रेनिंग और आराम की योजना अलग बनाई जाती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी खिलाड़ी की स्पीड उसकी सबसे बड़ी ताकत है, तो कोच उसे ऐसी रणनीति में इस्तेमाल कर सकते हैं जहां जवाबी हमले (काउंटर अटैक) अधिक प्रभावी हों। इस तरह डेटा केवल फिटनेस नहीं बल्कि खेल की रणनीति तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। केवल आंकड़े नहीं, खिलाड़ियों की भूमिका भी होती है अहम पासोस ने एक दिलचस्प उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि एक खिलाड़ी मैच में केवल छह किलोमीटर दौड़ रहा था, जबकि बाकी खिलाड़ी लगभग दोगुनी दूरी तय कर रहे थे। शुरुआती नजर में ऐसा लग सकता था कि वह खिलाड़ी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर रहा है। हालांकि, जब कोचिंग स्टाफ ने वीडियो फुटेज और सामरिक स्थिति का विश्लेषण किया तो पता चला कि वह खिलाड़ी हमेशा सही स्थान पर मौजूद रहता था और टीम की रणनीति के अनुसार बेहद प्रभावी भूमिका निभा रहा था। इससे स्पष्ट हुआ कि केवल दौड़ने की दूरी ही किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन का सही पैमाना नहीं होती। अंतिम फैसला डेटा नहीं, कोच की सोच तय करती है स्पोर्ट्स साइंस प्रमुख ने यह भी कहा कि कई बार किसी खिलाड़ी का शारीरिक डेटा बेहद शानदार होता है, लेकिन इसके बावजूद कोच उसे टीम में शामिल नहीं करते। इसका कारण यह होता है कि तकनीकी क्षमता, मानसिक मजबूती और टीम की खेल शैली में फिट बैठना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, आधुनिक तकनीक खिलाड़ियों से जुड़ी अहम जानकारी उपलब्ध कराती है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण काम उस डेटा को समझना और उसे मैदान पर उपयोगी फैसलों में बदलना होता है। यही वजह है कि विश्लेषकों और कोचों की भूमिका आज पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
ब्राज़ील के स्टार फुटबॉलर नेमार के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। आगामी FIFA World Cup 2026 से पहले टीम के मुख्य कोच कार्लो एंचेलोटी ने साफ कर दिया है कि अनुभवी फॉरवर्ड के लिए टीम के दरवाजे अभी भी खुले हैं। चोट के कारण लंबे समय से मैदान से दूर चल रहे नेमार के लिए यह बयान किसी “करियर बूस्ट” से कम नहीं माना जा रहा। एंचेलोटी का भरोसा–“अभी भी समय है” एंचेलोटी ने कहा कि नेमार के पास पूरी फिटनेस हासिल करने के लिए अभी समय है और यदि वह खुद को शारीरिक रूप से साबित करते हैं, तो टीम में उनकी वापसी संभव है। कोच ने स्पष्ट किया कि वर्ल्ड कप टीम में वही खिलाड़ी चुने जाएंगे जो पूरी तरह फिट होंगे, लेकिन नेमार जैसे अनुभवी खिलाड़ी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चोट से वापसी की राह पर नेमार 34 वर्षीय नेमार अक्टूबर 2023 से चोट के कारण टीम से बाहर चल रहे थे। उन्होंने दिसंबर में घुटने की सर्जरी करवाई थी और हाल ही में एक और प्रक्रिया से गुजरे हैं। हालांकि, अब उनकी फिटनेस में सुधार देखा जा रहा है। उन्होंने हाल ही में क्लब स्तर पर 90 मिनट का पूरा मैच खेला, जो उनकी वापसी की दिशा में बड़ा संकेत है। फैंस का अटूट समर्थन हालांकि नेमार हाल के स्क्वाड में शामिल नहीं किए गए थे, लेकिन फैंस का समर्थन उनके साथ बना हुआ है। फ्रांस के खिलाफ एक वार्म-अप मैच के दौरान भी दर्शकों ने उनका नाम लेकर समर्थन जताया। एंचेलोटी ने भी माना कि नेमार ब्राज़ीलियाई फुटबॉल के इतिहास में एक खास स्थान रखते हैं और उनकी प्रतिभा टीम के लिए अब भी अहम हो सकती है। चौथे वर्ल्ड कप की तैयारी नेमार अपने करियर का चौथा वर्ल्ड कप खेलने की तैयारी में हैं। 79 अंतरराष्ट्रीय गोल के साथ वह ब्राज़ील के सर्वकालिक शीर्ष स्कोरर हैं। अब उनकी नजर सिर्फ एक चीज पर है–फिटनेस हासिल करना और टीम में अपनी जगह पक्की करना। फिटनेस ही बनेगी चयन की कुंजी नेमार के लिए रास्ता खुला जरूर है, लेकिन चुनौती भी उतनी ही बड़ी है। उन्हें अगले कुछ हफ्तों में अपनी फिटनेस और प्रदर्शन से खुद को साबित करना होगा। अगर वह ऐसा करने में सफल रहते हैं, तो 2026 वर्ल्ड कप में एक बार फिर नेमार का जादू देखने को मिल सकता है।
वैश्विक खेल जगत में भू-राजनीतिक तनाव का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। ईरान की फुटबॉल फेडरेशन ने FIFA से अनुरोध किया है कि उसके 2026 विश्व कप मुकाबलों को अमेरिका से हटाकर मेक्सिको में आयोजित किया जाए। सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चिंता ईरान के फुटबॉल प्रमुख मेहदी ताज के अनुसार, मौजूदा युद्ध हालात में टीम की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने साफ कहा कि यदि खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती, तो टीम अमेरिका यात्रा नहीं करेगी। यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी संकेत दिया था कि ईरानी टीम की सुरक्षा अमेरिका में चुनौतीपूर्ण हो सकती है। क्या बदलेगा मैच का वेन्यू? फिलहाल ईरान के ग्रुप स्टेज मैच लॉस एंजेलिस और सिएटल में तय हैं, लेकिन अब उन्हें मेक्सिको शिफ्ट करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस पर FIFA की ओर से अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं आया है। युद्ध का असर खेल पर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने हालात को और जटिल बना दिया है। इस वजह से: ईरान की भागीदारी पर सवाल खड़े हुए खिलाड़ियों की सुरक्षा चिंता का विषय बनी टूर्नामेंट के लॉजिस्टिक्स पर असर पड़ सकता है हालांकि Asian Football Confederation ने साफ किया है कि ईरान अब भी विश्व कप में खेलने के लिए निर्धारित है और उसने आधिकारिक तौर पर टूर्नामेंट से हटने की घोषणा नहीं की है। अनिश्चितता के बीच तैयारियां जारी दूसरी टीमों ने अभी अपनी तैयारियां जारी रखी हैं। न्यूजीलैंड की टीम ने भी कहा है कि जब तक कोई आधिकारिक बदलाव नहीं होता, वे तय कार्यक्रम के अनुसार ही तैयारी करेंगे। यह मामला सिर्फ खेल नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अगर ईरान के मैच अमेरिका से मेक्सिको शिफ्ट होते हैं, तो यह FIFA विश्व कप के इतिहास में एक बड़ा और अभूतपूर्व फैसला साबित हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।