अखिलेश यादव

पेपर लीक कानून और परीक्षाओं को लेकर अखिलेश यादव का सरकार पर हमला
पेपर लीक कानून को लेकर अखिलेश यादव का सरकार पर हमला, बोले- छात्रों की आवाज सुननी होगी

संसद में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सियासत तेज   नई दिल्ली, एजेंसियां। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख और लोकसभा सांसद अखिलेश यादव ने पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की परेशानियों को समझना होगा और उनकी आवाज सुननी होगी। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।   छात्रों के भविष्य का मुद्दा उठाया   अखिलेश यादव ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि परीक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए ताकि मेहनत करने वाले छात्रों के साथ अन्याय न हो। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं युवाओं के भरोसे को कमजोर करती हैं।   सरकार ला रही है सख्त व्यवस्था   केंद्र सरकार की ओर से पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए सख्त प्रावधानों वाले कानून और नियमों पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है।   विपक्ष लगातार उठा रहा है मुद्दा   मानसून सत्र के दौरान विपक्ष लगातार नीट, पेपर लीक और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर हमला कर रहा है। विपक्ष का कहना है कि छात्रों की समस्याओं पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए।   युवाओं के मुद्दे पर बढ़ी राजनीतिक गर्मी   पेपर लीक का मामला पिछले कुछ समय से देशभर में बड़ा मुद्दा बना हुआ है। छात्र संगठन और विपक्ष लगातार परीक्षा सुधारों की मांग कर रहे हैं, वहीं सरकार ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।    

ranjan kumar tiwari जुलाई 29, 2026 0
Akhilesh Yadav
अखिलेश यादव का सोनम वांगचुक के अनशन पर बयान, बोले- "जब बीमारी ROOT में है तो FRUIT के इलाज से कोई नहीं मानने वाला"

लखनऊ, एजेंसियां। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि अगर समस्या की जड़ में बीमारी है तो सिर्फ ऊपर-ऊपर का समाधान करने से बात नहीं बनेगी।   अखिलेश ने सरकार पर साधा निशाना   अखिलेश यादव ने अपने बयान में लिखा कि "जब बीमारी ROOT में है तो FRUIT के इलाज से कोई नहीं मानने वाला"। उन्होंने इस बयान के जरिए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि समस्याओं का स्थायी समाधान मूल कारणों को दूर करने से ही संभव है।   सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद तोड़ा अनशन   लद्दाख से जुड़े मुद्दों और छात्रों के समर्थन में अनशन कर रहे सोनम वांगचुक ने सरकार के आश्वासन के बाद अपना अनशन समाप्त किया। इसके बाद अखिलेश यादव की यह प्रतिक्रिया सामने आई।   बीजेपी पर भी किया हमला   अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में बीजेपी पर निशाना साधते हुए लिखा कि देश की कई समस्याओं की जड़ राजनीतिक व्यवस्था से जुड़ी हुई है। उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए और बदलाव की जरूरत बताई।   सपा नेताओं ने भी दी प्रतिक्रिया   सपा नेताओं ने सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के फैसले का स्वागत किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि जीवन की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन जिन मुद्दों को लेकर आंदोलन हुआ है, उनका समाधान होना चाहिए।

abhishek singh जुलाई 24, 2026 0
Govind Dev Giri
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सवालों पर भड़के ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष, इंटरव्यू रोकने की हुई कोशिश

अयोध्या, एजेंसियां। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में जांच तेज होने के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी का एक वीडियो चर्चा में है। एबीपी न्यूज से बातचीत के दौरान जिम्मेदारी से जुड़े सवाल पूछे जाने पर वह नाराज हो गए। इस दौरान उनके समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों ने पत्रकार का माइक हटाने और इंटरव्यू रोकने की भी कोशिश की। हालांकि बाद में स्थिति सामान्य होने पर कोषाध्यक्ष ने सवालों का जवाब दिया।   जिम्मेदारी स्वीकार की, लेकिन गिनती से किया किनारा संवाददाता ने जब गोविंद देव गिरी से पूछा कि बतौर कोषाध्यक्ष क्या इस पूरे मामले में उनकी भी जिम्मेदारी बनती है, तो उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के हर सदस्य की जिम्मेदारी होती है और उनकी भी जिम्मेदारी है। हालांकि इस्तीफे के सवाल पर उन्होंने साफ इनकार करते हुए कहा कि उनका दानपात्र (हुंडी) में होने वाली नकदी की गिनती से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल ट्रस्ट के खातों में आने वाले धन का लेखा-जोखा रखने तक सीमित है।   चोरी मामले में अब तक दो इस्तीफे और आठ गिरफ्तारियां राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद अब तक दो लोगों ने इस्तीफा दिया है, जबकि पुलिस आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट भी सौंप चुका है और जांच आगे बढ़ रही है।   अखिलेश यादव की पोस्ट के बाद सामने आया था मामला यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाया था। शुरुआत में ट्रस्ट ने आरोपों से इनकार किया था, लेकिन बाद में चोरी की पुष्टि होने पर एसआईटी जांच गठित की गई। जांच के दौरान ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा से भी पूछताछ की गई। फिलहाल पुलिस और एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
SBSP chief Om Prakash Rajbhar addresses media and claims Samajwadi Party MPs are in touch with BJP and NDA leaders.
TMC, शिवसेना के बाद अब सपा में बड़ी टूट का दावा, ओपी राजभर बोले- कई सांसद BJP के संपर्क में

  उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष Om Prakash Rajbhar ने समाजवादी पार्टी (सपा) को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि Samajwadi Party में जल्द बड़ी टूट हो सकती है और उसके कई सांसद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा एनडीए के संपर्क में हैं। राजभर ने दावा किया कि हाल के दिनों में अन्य विपक्षी दलों में हुई टूट के बाद अब सपा के भीतर भी असंतोष बढ़ रहा है और इसका असर संसद के आगामी मानसून सत्र में दिखाई दे सकता है। 'कई सांसद भाजपा के संपर्क में' एएनआई से बातचीत में ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि पूर्वांचल के पिछड़े और दलित समुदाय से आने वाले सपा के कई सांसद पार्टी की कार्यशैली से असंतुष्ट हैं। उन्होंने दावा किया कि ये नेता भाजपा और एनडीए के साथ आने के इच्छुक हैं। राजभर ने कहा, "टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) के बाद अब समाजवादी पार्टी में भी बड़ी टूट देखने को मिल सकती है। कई सांसद हमारे मंत्रियों और भाजपा नेतृत्व के संपर्क में हैं।" मानसून सत्र में दिख सकता है असर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी प्रमुख ने दावा किया कि संसद के मानसून सत्र के दौरान सपा में बिखराव सामने आ सकता है। उनके अनुसार, कई सांसद विपक्ष का साथ छोड़कर एनडीए में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने इशारों में कहा कि सपा प्रमुख Akhilesh Yadav की कार्यशैली को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है, जिसके कारण कई नेता वैकल्पिक राजनीतिक रास्ते तलाश रहे हैं। अखिलेश यादव का पलटवार ओम प्रकाश राजभर के दावे पर समाजवादी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए राजभर पर पलटवार किया। अखिलेश यादव ने कहा, "भविष्यवाणी करने वाले पहले अपनी पार्टी की भविष्यवाणी करें। पता नहीं इस बार भाजपा उन्हें 75 सीटें दे रही है, 50 सीटें दे रही है या फिर केवल आश्वासन ही मिलेगा।" उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ओम प्रकाश राजभर ने पहले भी भाजपा गठबंधन में ज्यादा सीटें मिलने की अफवाह फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की थी। यूपी की राजनीति में बढ़ी अटकलें ओम प्रकाश राजभर के दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही समाजवादी पार्टी के किसी सांसद ने पार्टी छोड़ने के संकेत दिए हैं। इसके बावजूद उनके बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी दलों में संभावित पुनर्संरेखण और दल-बदल की चर्चाओं के बीच राजभर का यह बयान आने वाले महीनों में प्रदेश की सियासत को और गर्मा सकता है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav addresses party leaders while announcing plans to challenge BJP in Gorakhpur ahead of UP Assembly Elections 2027.
योगी के गढ़ गोरखपुर में बीजेपी को घेरने की तैयारी में सपा, अखिलेश बोले- 2027 में कमल नहीं खिलने देंगे

  लखनऊ/गोरखपुर: समाजवादी पार्टी (सपा) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चुनौती देने का बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इस बार समाजवादी पार्टी गोरखपुर में बीजेपी को शून्य पर लाने के लिए पूरी ताकत से काम करेगी। गोरखपुर में कार्यकर्ता सम्मेलन की तैयारी लखनऊ में पार्टी की बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि जल्द ही गोरखपुर में सपा कार्यकर्ताओं का बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल जल्द ही सम्मेलन की तारीख की घोषणा करेंगे। अखिलेश यादव ने कहा, "हमने संकल्प लिया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर में बीजेपी को कड़ी चुनौती देंगे। जहां भी हमारी कमियां हैं, उन्हें दूर किया जाएगा और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाएगा।" कार्यकर्ताओं के सम्मान की बात सपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी अपने प्रत्येक कार्यकर्ता के सम्मान और उनके सुख-दुख में भागीदारी के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मजबूत संगठन और कार्यकर्ताओं की एकजुटता के दम पर पार्टी 2027 के चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था पर योगी सरकार को घेरा अखिलेश यादव ने योगी सरकार के दस साल के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को कमजोर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने में असफल रही है। उन्होंने कहा, "भाजपा ने झूठे वादे करके जनता को गुमराह करने का काम किया है। प्रदेश के लोग बदलाव चाहते हैं और समाजवादी पार्टी उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए तैयार है।" ओपी राजभर के बयान पर भी किया पलटवार सपा प्रमुख ने मंत्री ओपी राजभर के हालिया बयान पर भी तंज कसा। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा, "दाना और गाना, कब तक चलेगा ये अफसाना।" अखिलेश यादव के इस बयान को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गोरखपुर समेत पूर्वांचल में सपा की आक्रामक चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें गोरखपुर में होने वाले प्रस्तावित कार्यकर्ता सम्मेलन और सपा की आगे की राजनीतिक रणनीति पर टिकी हैं।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
Akhilesh Yadav speaking at a press briefing criticizing the women reservation bill and government policies.
महिला आरक्षण पर अखिलेश यादव का हमला, बोले– “PDA के हक को मारने की साजिश”

महिला आरक्षण को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने केंद्र सरकार की पहल पर सवाल उठाते हुए इसे “पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के अधिकारों को खत्म करने की साजिश” करार दिया है। केंद्र सरकार द्वारा इस मुद्दे पर तेजी दिखाते हुए विशेष संसदीय सत्र बुलाए जाने के बीच अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X (पूर्व में ट्विटर)’ पर लंबी पोस्ट लिखकर भाजपा पर तीखा हमला बोला। “जल्दबाजी में लाया जा रहा है बिल” Akhilesh Yadav ने कहा कि महिला आरक्षण को जिस तरह जल्दबाजी में लाया जा रहा है, उससे केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने लिखा कि भाजपा को अब “वोटरों का अकाल” पड़ गया है, इसलिए नए वर्गों को अपने पक्ष में लाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। “जब पुराने समर्थक भाजपा से दूर हो रहे हैं, तब हर बार नए लोगों को लुभाने के लिए ऐसे फैसले लिए जाते हैं,” उन्होंने कहा। जनगणना और जातिगत आरक्षण का मुद्दा सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर जनगणना टाल रही है। उनके मुताबिक, “अगर जनगणना होगी तो जातिगत जनगणना की मांग भी उठेगी और उसके आधार पर आरक्षण की बात भी सामने आएगी, जिसे भाजपा कभी लागू नहीं करना चाहती।” उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल इसी बड़े राजनीतिक समीकरण का हिस्सा है। PDA के अधिकारों पर चोट का आरोप अखिलेश यादव ने अपने “PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक)” फार्मूले का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें “A” यानी आधी आबादी (महिलाएं) भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल वास्तव में PDA वर्ग के अधिकारों को कमजोर करने की साजिश है, जिससे सामाजिक न्याय का संतुलन बिगड़ सकता है। महिलाओं की स्थिति पर भी उठाए सवाल सपा प्रमुख ने भाजपा सरकार में महिलाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महंगाई, बढ़ती गैस सिलेंडर कीमतें और रोजमर्रा के खर्चों ने महिलाओं की रसोई पर सीधा असर डाला है। “भाजपा सरकार में सबसे ज्यादा परेशान अगर कोई है, तो वो महिलाएं ही हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों की स्थिति खराब हो रही है, जिससे महिलाओं के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जमीनी उदाहरण देकर घेरा Akhilesh Yadav ने मेरठ और नोएडा की महिलाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उनके दर्द को समझना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर सरकार इस बिल को लेकर गंभीर है, तो इसे आम महिलाओं के बीच जाकर घोषित करना चाहिए, ताकि उनकी वास्तविक समस्याओं को समझा जा सके। “चुनावी चाल है महिला आरक्षण” सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा अक्सर चुनाव से पहले इस तरह के बड़े मुद्दे उठाकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि इस बार भी महिलाओं को केंद्र में रखकर वही “पुरानी राजनीतिक चाल” चली जा रही है, लेकिन जनता अब जागरूक हो चुकी है। महिला आरक्षण को लेकर Akhilesh Yadav का यह बयान स्पष्ट करता है कि आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा चुनावी विमर्श बनने वाला है। सपा इसे सामाजिक न्याय और PDA के अधिकारों से जोड़कर पेश कर रही है, जबकि केंद्र सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण के रूप में सामने रख रही है।

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 23, 2026 0