मुंबई, एजेंसियां। 13 जून से अफगानिस्तान के खिलाफ शुरू हो रही वनडे सीरीज के लिए रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या ने अपनी फिटनेस पास कर ली है। रोहित शर्मा आईपीएल में हैमस्ट्रिंग इंजरी का शिकार हो गए थे, तो वहीं, हार्दिक पांड्या को पीठ में चोट लगी थी। बीसीसीआई सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या ने फिटनेस क्लियरेंस पास कर लिया है और बहुत जल्द टीम के साथ जुड़ जाएंगे। टीम इंडिया अफगानिस्तान के खिलाफ पहला मुकाबला 13 जून को धर्मशाला में खेलेगी। विराट कोहली पूरी सीरीज से बाहर है इससे पहले बताया गया था कि सीनियर खिलाड़ी रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या की अफगानिस्तान के खिलाफ 3 मैचों की वनडे सीरीज में उपलब्धता बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से मिले फिटनेस क्लियरेंस पर निर्भर करेगा। रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या आईपीएल में मुंबई इंडियंस की टीम में शामिल थे। रोहित शर्मा को जहां लिंगरिंग हैमस्ट्रिंग इंजरी हुई थी तो वहीं ऑल-राउंडर हार्दिक पांड्या को पीठ में दर्द की शिकायत हुई थी। बता दें कि विराट कोहली, हैमस्ट्रिंग इंजरी की वजह से अफगानिस्तान के खिलाफ पूरी सीरीज से बाहर हो गए हैं। उन्हें खिताबी मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए खेलते हुए खिंचाव हुआ था। वह रन भागते समय लड़खड़ाते नजर आए थे। इंग्लैंड दौरे से वापसी करेंगे विराट कोहली! बीसीसीआई से जुड़े सूत्र ने बताया कि विराट कोहली आईपीएल के खिताबी मुकाबले में चोटिल हो गए थे और वह अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में उपलब्ध नहीं हैं। उनकी चोट को अभी हफ्ता ही बीता है, तो कहा नहीं जा सकता है कि कब तक वापसी कर पाएंगे। हालांकि, हम उम्मीद जताते हैं कि विराट कोहली इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से वापसी कर लेंगे, लेकिन अभी पक्का नहीं कहा जा सकता। फिजियो ने भी कोई टाइमलाइन तय नहीं किया है। विराट कोहली की जगह युवा यशस्वी जायसवाल को अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में शामिल किया गया है। अफगानिस्तान के खिलाफ पहला वनडे मुकाबला 13 जून को धर्मशाला में खेला जाएगा। दूसरा मैच, 17 जून को लखनऊ में तो वहीं तीसरा वनडे चेन्नई में 20 जून को होगा है। अफगानिस्तान के खिलाफ टीम इंडिया अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए टीम इस प्रकार है। शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, यशस्वी जायसवाल, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), हार्दिक पांड्या, नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, प्रिंस यादव, गुरनूर बराड़ और हर्ष दुबे।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अफगानिस्तान की स्थिति पर हुई बैठक के दौरान भारत ने पाकिस्तान को कड़े शब्दों में घेरा। भारत ने पाकिस्तान पर राज्य प्रायोजित दुष्प्रचार फैलाने, आतंकवाद के मुद्दे पर झूठा नैरेटिव गढ़ने और अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों के दौरान नागरिकों की मौतों पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत परवथानेनी हरीश ने कहा कि पाकिस्तान अपने यहां सक्रिय आतंकी संगठनों की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय भारत विरोधी प्रचार के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। 'फितना अल हिंदुस्तान' शब्दावली पर भारत की आपत्ति अपने संबोधन में हरीश ने पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे "फितना अल हिंदुस्तान" शब्द को भ्रामक बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बिना किसी ठोस साक्ष्य के अपने देश में सक्रिय उग्रवादी संगठनों को भारत से जोड़ने का प्रयास करता रहा है। भारत ने कहा कि धार्मिक शब्दावली का इस्तेमाल कर गलत सूचना फैलाना एक सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान का हिस्सा है, जिसका मकसद वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाना है। 'नफरत की फैक्ट्री' चला रहा पाकिस्तान भारत ने पाकिस्तान के प्रचार तंत्र को "नफरत की फैक्ट्री" करार देते हुए कहा कि वहां का सत्ता प्रतिष्ठान लंबे समय से भारत विरोधी माहौल तैयार करता रहा है। हरीश ने कहा कि पाकिस्तान अपनी जनता का ध्यान राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक चुनौतियों और आंतरिक सुरक्षा समस्याओं से हटाकर बाहरी खतरों की ओर मोड़ने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने पाकिस्तान में सेना के बढ़ते प्रभाव और नागरिक संस्थाओं पर उसके बढ़ते नियंत्रण पर भी सवाल उठाए। अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों को लेकर घेरा भारत ने अफगानिस्तान के भीतर पाकिस्तान द्वारा की गई सैन्य कार्रवाइयों को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि किसी भी सैन्य अभियान को आतंकवाद विरोधी कार्रवाई बताकर नागरिकों की मौत को उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या, बच्चों का अनाथ होना और आम लोगों का घायल होना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। भारत ने पाकिस्तान पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर वह इस्लामी एकजुटता की बात करता है और दूसरी ओर रमजान जैसे पवित्र महीने में भी हवाई हमले करता है। UNAMA रिपोर्ट का हवाला, सैकड़ों नागरिकों की मौत भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान (UNAMA) की रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाइयों का सबसे बड़ा खामियाजा अफगान नागरिकों को भुगतना पड़ा है। सुरक्षा परिषद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार इन हमलों में 372 नागरिकों की मौत हुई, जबकि 397 अन्य घायल हुए। भारत ने उन रिपोर्टों का भी जिक्र किया जिनमें काबुल स्थित एक नशामुक्ति अस्पताल पर हमले और भारी जनहानि की बात कही गई थी। आतंकवाद पर भारत का दो टूक संदेश क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। हरीश ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का नाम लेते हुए कहा कि इन संगठनों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने आईएसआईएल और अल-कायदा जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों के खिलाफ भी सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया। अफगानिस्तान के खिलाफ 'ट्रेड एंड ट्रांजिट टेररिज्म' का आरोप भारत ने पाकिस्तान पर अफगानिस्तान के खिलाफ आर्थिक और रणनीतिक दबाव बनाने का आरोप भी लगाया। हरीश ने कहा कि समुद्र तक सीधी पहुंच न रखने वाले अफगानिस्तान के लिए व्यापार और पारगमन मार्गों को बाधित करना अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र की भावना के विपरीत है। उन्होंने इसे "ट्रेड एंड ट्रांजिट टेररिज्म" करार देते हुए कहा कि किसी भूमिबद्ध देश की भौगोलिक कमजोरियों का इस तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। भारत ने गिनाई अफगानिस्तान के लिए अपनी मदद भारत ने अपने संबोधन में अफगानिस्तान के लिए जारी मानवीय सहायता का भी जिक्र किया। भारत ने बताया कि वह अब तक 50 हजार टन से अधिक गेहूं, 420 टन दवाइयां और वैक्सीन अफगानिस्तान को उपलब्ध करा चुका है। हाल के भूकंपों के दौरान भी भारत ने राहत सामग्री भेजी थी। भारत जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित अफगान बच्चों के इलाज में भी सहयोग कर रहा है और स्थानीय स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने के प्रयासों में शामिल है। हजारों छात्रों को मिली छात्रवृत्ति शिक्षा क्षेत्र में योगदान का उल्लेख करते हुए भारत ने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक लगभग 3,000 अफगान छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। इनमें करीब 1,000 छात्राएं शामिल हैं। भारत ने भविष्य में महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों और शिक्षा कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त सहायता देने की भी प्रतिबद्धता जताई। क्रिकेट कूटनीति का भी किया जिक्र अपने संबोधन के अंत में भारत ने अफगानिस्तान के साथ सांस्कृतिक और जनस्तरीय संबंधों का उल्लेख किया। हरीश ने कहा कि इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में अफगान खिलाड़ियों का प्रदर्शन दोनों देशों के लोगों को जोड़ने का काम करता है। उन्होंने कहा कि भारत भविष्य में द्विपक्षीय क्रिकेट श्रृंखला आयोजित करने की दिशा में भी प्रयास कर रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत हो सकें। अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को घेरने की रणनीति जारी UNSC में भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह आतंकवाद, दुष्प्रचार और नागरिकों के खिलाफ हिंसा जैसे मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने का प्रयास जारी रखेगा।
न्यू चंडीगढ़, एजेंसियां। भारत ने न्यू चंडीगढ़ में खेले गए टेस्ट मैच में अफगानिस्तान को पारी और 300 रन से हरा दिया। यह टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम की अब तक की सबसे बड़ी जीत है। भारत की पिछली सबसे बड़ी जीत पारी और 272 रन के अंतर से थी। जो 2018 में वेस्टइंडीज के खिलाफ राजकोट में मिली थी। अफगानिस्तान ने दूसरी पारी में 112 पर ढेर मैच के तीसरे दिन अफगानिस्तान की टीम दूसरी पारी में 112 रन बनाकर ऑलआउट हो गई। इससे पहले भारत ने अपनी पहली पारी 564/8 के स्कोर पर घोषित कर दी थी। इसके जवाब में अफगानिस्तान की पहली पारी 152 रन पर सिमट गई थी और उसे फॉलोऑन खेलना पड़ा। मानव सुथार प्लेयर ऑफ द् मैच अफगानिस्तान की दूसरी पारी में वॉशिंगटन सुंदर ने 4 और कुलदीप यादव ने 3 विकेट लिए। डेब्यू मैच खेल रहे मानव सुथार और मोहम्मद सिराज ने 1-1 विकेट लिया। सुथार ने अफगानिस्तान की पहली पारी में 6 विकेट लिए थे। इस तरह उन्होंने मैच में 7 विकेट लिए। उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। भारत की 186वीं टेस्ट जीत, वेस्टइंडीज को पीछे छोड़ा भारतीय टीम ने टेस्ट क्रिकेट में 599 मैचों में 186वीं जीत हासिल की है। भारत ने सबसे ज्यादा टेस्ट मैच जीतने के मामले में वेस्टइंडीज को पीछे छोड़ दिया है। वेस्टइंडीज के नाम 592 मैचों में 185 जीत है। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका भारत से आगे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने 882 मैचों में 426 मैच जीते हैं। इंग्लैंड ने 1095 मैचों में 405 में जीत हासिल की है। वहीं, साउथ अफ्रीका ने 479 टेस्ट में 191 जीते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय बल्लेबाजों ने अफगानिस्तान के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मैच में अपनी बल्लेबाजी का कौशल दिखाते हुए पहली पारी में रनों का अम्बार लगा दिया। टीम इंडिया ने अपनी पहली पारी 127 ओवरों में 8 विकेट खोकर 564 रनों के विशाल स्कोर पर घोषित की। भारत की ओर से कप्तान शुभमन गिल और अनुभवी केएल राहुल ने शानदार शतकीय पारियां खेलीं जिससे भारतीय टीम 564 रनों का विशाल स्कोर खड़ी कर सकी। टॉप भारतीय बल्लेबाजों का कमाल अफगानिस्तान के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मैच में भारत की शुरुआत अच्छी रही। सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल (24 रन) के जल्दी आउट होने के बाद केएल राहुल और साई सुदर्शन ने टीम इंडिया के पारी को संभाला। राहुल ने बेहद सधे हुए अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 165 गेंदों पर 11 चौकों की मदद से शानदार 100 रन बनाए। वहीं, नंबर तीन पर आए साई सुदर्शन ने उनका बखूबी साथ निभाया और 104 गेंदों में 13 चौकों की मदद से 81 रनों की आक्रामक पारी खेली। इन दोनों के बीच हुई बेहतरीन साझेदारी ने टीम इंडिया के बड़े स्कोर की मजबूत नींव रखी। कप्तान शुभमन गिल का एक और शतक इसके बाद कप्तान शुभमन गिल ने 177 गेंदों का सामना करते हुए 15 चौके और 1 छक्के की बदौलत 126 रनों की कप्तानी पारी खेली। विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने भी मध्यक्रम में तेजी से रन बटोरे और मात्र 121 गेंदों में 6 चौके और 3 गगनचुंबी छक्के लगाते हुए 81 रन ठोक दिए। हालांकि, ध्रुव जुरेल (19 रन) बड़ी पारी नहीं खेल पाए लेकिन निचले क्रम में वाशिंगटन सुंदर ने नाबाद 52 रनों का बहुमूल्य योगदान देकर भारत का स्कोर 550 के पार पहुंचाया। अंत में मानव सुथार (28 रन) और मोहम्मद सिराज (22 रन) ने भी छोटे लेकिन उपयोगी कैमियो खेले। मोहम्मद सलीम सैफी बने संकटमोचक दूसरी तरफ,अफगानिस्तान के गेंदबाजी लाइनअप पर एक नजर डालें तो तेज गेंदबाज मोहम्मद सलीम सैफी अफगानिस्तान टीम के इकलौते संकटमोचक बनकर इस मैच में उभरे। सैफी ने 27 ओवरों में 140 रन खर्च कर 6 महत्वपूर्ण विकेट अपने नाम किए। इनके अलावा जियाउर रहमान शरिफी और कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी को 1-1 विकेट मिली।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।