हरारे, एजेंसियां। भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का तीसरा और अंतिम मुकाबला आज (26 जुलाई) हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा। भारतीय टीम पहले दो मुकाबले जीतकर सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना चुकी है। अब कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुवाई में टीम इंडिया की नजर जिम्बाब्वे का 3-0 से क्लीन स्वीप करने पर होगी, जबकि मेजबान टीम सम्मान बचाने के इरादे से मैदान में उतरेगी। सीरीज जीत के बाद बेंच स्ट्रेंथ को मिल सकता है मौका दूसरे टी20 के बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने संकेत दिए थे कि अंतिम मुकाबले में टीम संयोजन में बदलाव हो सकता है। तेज गेंदबाज प्रिंस यादव की हैमस्ट्रिंग चोट के कारण उनकी उपलब्धता पर संशय बना हुआ है। ऐसे में भारतीय टीम कुछ युवा खिलाड़ियों को मौका देकर अपनी बेंच स्ट्रेंथ भी आजमा सकती है। हालांकि टीम का लक्ष्य जीत का सिलसिला जारी रखते हुए सीरीज में क्लीन स्वीप करने का होगा। युवा खिलाड़ियों पर रहेंगी निगाहें भारत के लिए इस सीरीज में ईशान किशन, तिलक वर्मा, वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा ने शानदार प्रदर्शन किया है। गेंदबाजी में भी युवा खिलाड़ियों ने प्रभावित किया है। तीसरे मुकाबले में भी इन खिलाड़ियों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी, जबकि जिम्बाब्वे अपने घरेलू मैदान पर आखिरी मैच जीतकर सीरीज का अंत सकारात्मक तरीके से करना चाहेगा।
हरारे, एजेंसियां। भारत के युवा ऑलराउंडर अभिषेक शर्मा ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में गेंद से शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। उन्होंने अपने 4 ओवर के स्पेल में केवल 17 रन देकर 3 विकेट झटके और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारतीय ओपनर द्वारा सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। उनके शानदार स्पेल की बदौलत जिम्बाब्वे की टीम 220 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 129 रन पर सिमट गई और भारत ने मुकाबला 90 रन से जीतकर सीरीज पर 2-0 से कब्जा जमा लिया। बल्लेबाजी के बाद गेंद से भी दिखाया दम अभिषेक शर्मा इस मुकाबले में बल्लेबाजी से बड़ी पारी नहीं खेल सके, लेकिन गेंदबाजी में उन्होंने शानदार वापसी की। उन्होंने अपने स्पेल में तीन महत्वपूर्ण विकेट चटकाकर जिम्बाब्वे को बड़े लक्ष्य का पीछा करने से पहले ही बैकफुट पर धकेल दिया। उनकी कसी हुई गेंदबाजी के चलते मेजबान टीम नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही और 129 रन पर सिमट गई। ऑलराउंड प्रदर्शन से बढ़ा टीम का भरोसा अभिषेक शर्मा का यह रिकॉर्ड उनके ऑलराउंडर के रूप में बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाता है। भारतीय टीम प्रबंधन लंबे समय से उन्हें ऐसे खिलाड़ी के रूप में तैयार कर रहा है जो बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंद से भी मैच का रुख बदल सके। जिम्बाब्वे दौरे पर उनका प्रदर्शन टीम के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इस जीत के साथ भारत ने सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है और अब तीसरे टी20 में क्लीन स्वीप के इरादे से उतरेगा।
हरारे, एजेंसियां। भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 90 रन से जीत दर्ज की और तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। इस जीत के साथ श्रेयस अय्यर ने भारतीय टी20 टीम के कप्तान के रूप में अपनी पहली द्विपक्षीय सीरीज जीत हासिल की। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 219/5 का मजबूत स्कोर बनाया, जिसके जवाब में जिम्बाब्वे की टीम 17.5 ओवर में 129 रन पर सिमट गई। ईशान किशन और तिलक वर्मा ने खेली तूफानी पारियां भारत की ओर से ईशान किशन ने 44 गेंदों पर 81 रन की शानदार पारी खेली, जबकि तिलक वर्मा ने नाबाद 60 रन बनाकर टीम को 200 के पार पहुंचाया। श्रेयस अय्यर ने भी 25 रन की उपयोगी पारी खेली। बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की शुरुआत खराब रही और टीम नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही। भारत की ओर से अभिषेक शर्मा ने 3 विकेट, जबकि यश ठाकुर और प्रिंस यादव ने 2-2 विकेट लेकर मेजबान टीम की बल्लेबाजी को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। अय्यर के लिए राहत की जीत, अब क्लीन स्वीप पर नजर श्रेयस अय्यर के लिए यह जीत खास मानी जा रही है। इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे की निराशा के बाद उन्होंने कप्तान के रूप में पहली टी20 सीरीज अपने नाम की है। भारत ने दो मैच जीतकर सीरीज पर कब्जा कर लिया है और अब उसकी नजर तीसरे एवं अंतिम मुकाबले में जीत हासिल कर जिम्बाब्वे का 3-0 से क्लीन स्वीप करने पर होगी। दूसरी ओर, जिम्बाब्वे की टीम आखिरी मैच जीतकर सम्मान बचाने की कोशिश करेगी।
हरारे। भारत और जिम्बाब्वे के बीच गुरुवार से शुरू हो रही तीन मैचों की टी20 सीरीज के पहले मुकाबले में युवा बल्लेबाज अभिषेक शर्मा के पास दो बड़े रिकॉर्ड अपने नाम करने का सुनहरा मौका है। टी20 क्रिकेट में अब तक 199 पारियों में 5,984 रन बना चुके अभिषेक को छह हजार रन का आंकड़ा छूने के लिए सिर्फ 16 रन की जरूरत है। यह उपलब्धि हासिल करते ही वह भारत की ओर से टी20 क्रिकेट में 6,000 रन पूरे करने वाले चौथे बल्लेबाज बन जाएंगे। उनसे पहले केवल विराट कोहली, केएल राहुल और शुभमन गिल ही इस खास क्लब का हिस्सा हैं। अभिषेक के पास भारत-जिम्बाब्वे टी20 मुकाबलों में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बनने का भी मौका है। फिलहाल उन्होंने छह मैचों में 179 रन बनाए हैं, जबकि जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा 11 मैचों में 194 रन के साथ इस सूची में शीर्ष पर हैं। पहले टी20 में 16 रन बनाते ही अभिषेक यह रिकॉर्ड भी अपने नाम कर सकते हैं। इसके अलावा, यदि अभिषेक इस सीरीज में 142 रन और जोड़ लेते हैं तो वह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में शिखर धवन को भी पीछे छोड़ देंगे। इंग्लैंड दौरे पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद अब उनकी नजरें जिम्बाब्वे के खिलाफ शानदार प्रदर्शन कर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाने और अपने नाम नए रिकॉर्ड दर्ज कराने पर होंगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट के दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह ने युवा बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने वैभव की आक्रामक बल्लेबाज़ी से प्रभावित होकर उन्हें नया नाम "टर्मिनेटर-6" दिया। युवराज ने कहा कि भारतीय क्रिकेट में अब निडर बल्लेबाज़ों की नई पीढ़ी तैयार हो चुकी है और वैभव उनमें सबसे खास खिलाड़ियों में से एक हैं। 'मैं टर्मिनेटर, अभिषेक टर्मिनेटर-4 और वैभव टर्मिनेटर-6' युवराज सिंह ने मजाकिया अंदाज़ में कहा, "मैं टर्मिनेटर हूं, अभिषेक शर्मा टर्मिनेटर-4 हैं और वैभव सूर्यवंशी टर्मिनेटर-6 हैं।" उन्होंने कहा कि आज के युवा बल्लेबाज़ पहले से कहीं अधिक आक्रामक और आत्मविश्वास से भरे हुए हैं तथा किसी भी गेंदबाज़ के खिलाफ खुलकर खेलने से नहीं डरते। वैभव के उज्ज्वल भविष्य की भविष्यवाणी युवराज ने वैभव सूर्यवंशी को "भविष्य का बड़ा खिलाड़ी" बताते हुए कहा कि वह बेहद गंभीर, मेहनती और सीखने के इच्छुक क्रिकेटर हैं। उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन मिलने पर वैभव भारतीय क्रिकेट के अगले बड़े सितारे बन सकते हैं। युवराज ने यह भी संकेत दिया कि अगर मौका मिला तो वह वैभव का मार्गदर्शन करने के लिए तैयार हैं। युवा खिलाड़ियों की निडर सोच की सराहना पूर्व भारतीय स्टार ने कहा कि मौजूदा दौर के बल्लेबाज़ टी20 क्रिकेट की वजह से शुरुआत से ही आक्रामक खेलने के आदी हैं। उन्होंने अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ियों की तारीफ करते हुए कहा कि यही निडर रवैया भारतीय क्रिकेट को भविष्य में और मजबूत बनाएगा।
मैनचेस्टर, एजेंसियां। भारत और इंग्लैंड के बीच ओल्ड ट्रैफर्ड, मैनचेस्टर में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में इंग्लैंड ने रोमांचक अंदाज में 4 विकेट से जीत दर्ज कर ली। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 190/7 का चुनौतीपूर्ण स्कोर बनाया, लेकिन इंग्लैंड ने 19 ओवर में 191/6 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। ईशान किशन और अभिषेक शर्मा ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत की शुरुआत तेज रही। अभिषेक शर्मा ने 24 गेंदों में 43 रन, जबकि ईशान किशन ने 40 गेंदों पर 49 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने अपने अंतरराष्ट्रीय पदार्पण पर 10 गेंदों में 14 रन बनाए, जिसमें दो छक्के शामिल रहे। अंत में तिलक वर्मा की उपयोगी पारी की बदौलत भारत ने 190/7 का मजबूत स्कोर खड़ा किया। इंग्लैंड की ओर से सैम करन ने सबसे ज्यादा 3 विकेट लिए। जैकब बेथेल की विस्फोटक पारी ने पलटा मैच 191 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही। फिल सॉल्ट और जोस बटलर पहले ही ओवर में बिना खाता खोले आउट हो गए। इसके बाद जैकब बेथेल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 46 गेंदों में नाबाद 76 रन बनाए। उन्हें हैरी ब्रूक (39 रन) और टॉम बैंटन (39 रन) का अच्छा साथ मिला। इंग्लैंड ने 19वें ओवर में लक्ष्य हासिल कर मुकाबला जीत लिया। अर्शदीप की शानदार गेंदबाजी भी नहीं बचा सकी भारत को भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 ओवर में 40 रन देकर 3 विकेट झटके। अक्षर पटेल और वरुण चक्रवर्ती को एक-एक सफलता मिली, लेकिन डेथ ओवरों में भारतीय गेंदबाज इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर दबाव नहीं बना सके। मैच का निर्णायक मोड़ रवि बिश्नोई का 17वां ओवर रहा, जिसमें इंग्लैंड ने तेजी से 29 रन बटोरे और जीत की नींव रखी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और इंग्लैंड के बीच डरहम के चेस्टर-ली-स्ट्रीट में खेला गया पहला टी-20 मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ गया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट पर 189 रन बनाए, लेकिन लगातार बारिश के कारण इंग्लैंड अपनी पारी शुरू नहीं कर सका और मैच रद्द घोषित कर दिया गया। मैच भले ही बेनतीजा रहा, लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने कई यादगार रिकॉर्ड अपने नाम किए। सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने महज 24 गेंदों में 59 रन की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें 6 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। इसी दौरान उन्होंने सिर्फ 785 गेंदों में टी-20 इंटरनेशनल में 100 छक्के पूरे कर दुनिया के सबसे तेज बल्लेबाज बनने का रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने वेस्टइंडीज के ईविन लुईस (789 गेंद) का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। साथ ही, अभिषेक इंग्लैंड की धरती पर सबसे तेज टी-20 अर्धशतक लगाने वाले भारतीय भी बन गए। उन्होंने केवल 20 गेंदों में फिफ्टी पूरी कर केएल राहुल का 27 गेंदों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। श्रेयस ने कप्तानी में रचा इतिहास भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने 47 गेंदों में 68 रन की शानदार पारी खेली और इंग्लैंड में टी-20 अंतरराष्ट्रीय में अर्धशतक लगाने वाले पहले भारतीय कप्तान बन गए। उन्होंने विराट कोहली के 47 रन के पुराने रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। यह टी-20 अंतरराष्ट्रीय में बतौर कप्तान उनकी पहली फिफ्टी रही। मैच के अन्य अहम पलों में ईशान किशन का लगातार दूसरे मैच में रन आउट होना और अभिषेक शर्मा का डीआरएस के बाद एलबीडब्ल्यू आउट होना शामिल रहा। वहीं, चेस्टर-ली-स्ट्रीट में भारत का लगातार तीसरा अंतरराष्ट्रीय मुकाबला भी बारिश के कारण बिना नतीजे के समाप्त हुआ। हालांकि मैच पूरा नहीं हो सका, लेकिन अभिषेक और श्रेयस की पारियों ने भारतीय टीम के लिए सकारात्मक संकेत जरूर दिए।
IPL का मंच हमेशा से नए सितारों को जन्म देने के लिए जाना जाता है, लेकिन जब महज 15 साल का खिलाड़ी दुनिया के बड़े-बड़े गेंदबाजों के सामने बेखौफ अंदाज में बल्लेबाजी करता है, तो क्रिकेट जगत चौंक उठता है। इस समय चर्चा के केंद्र में हैं Vaibhav Suryavanshi, जिनकी विस्फोटक बल्लेबाजी ने अनुभवी खिलाड़ियों को भी चुनौती दे दी है। वहीं दूसरी ओर Abhishek Sharma लंबे समय से अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते रहे हैं। लेकिन IPL 2026 में दोनों के प्रदर्शन की तुलना ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। कम उम्र में बड़ा धमाका वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में IPL डेब्यू कर इतिहास रच दिया। 14 साल की उम्र में मैदान पर उतरकर उन्होंने पहली ही गेंद पर छक्का जड़कर अपनी निडरता का परिचय दिया। दूसरी तरफ, अभिषेक शर्मा ने 2018 में अपने डेब्यू मैच में ही 46 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। दोनों खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही आक्रामक क्रिकेट की झलक दिखाई है। IPL 2026: आंकड़ों की सीधी टक्कर मौजूदा सीजन में वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। 4 मैचों में 200 रन औसत: 50.00 स्ट्राइक रेट: 266.67 18 चौके और 18 छक्के उनकी 26 गेंदों में 78 रनों की पारी ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया है। वहीं अभिषेक शर्मा भी पीछे नहीं हैं: 4 मैचों में 129 रन औसत: 32.25 स्ट्राइक रेट: 218.64 28 गेंदों में 74 रन की विस्फोटक पारी हालांकि आंकड़ों के हिसाब से इस समय वैभव बढ़त बनाए हुए हैं। करियर आंकड़े क्या कहते हैं? वैभव ने IPL 2025 में 7 मैचों में 252 रन बनाए थे, जिसमें उनका स्ट्राइक रेट 206.55 रहा। कम मैचों में ही उन्होंने अपनी छाप छोड़ दी। दूसरी ओर, अभिषेक शर्मा का अनुभव कहीं ज्यादा है। उन्होंने अब तक 81 मैचों में 1945 रन बनाए हैं, जिसमें उनका स्ट्राइक रेट 165.81 रहा है। पावरप्ले में तेजी से रन बनाने में उनका कोई मुकाबला नहीं रहा। क्या बदल रहा है भारतीय टी20 का भविष्य? अभिषेक शर्मा ने जिस तरह आक्रामक बल्लेबाजी की नई परिभाषा गढ़ी, वैभव सूर्यवंशी उसी राह पर चलते हुए उसे और आगे ले जाते दिख रहे हैं। इतनी कम उम्र में इस स्तर की निडरता यह संकेत देती है कि भारतीय टी20 क्रिकेट का भविष्य और भी आक्रामक और रोमांचक होने वाला है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।