मुंबई, एजेंसियां। 13 जून से अफगानिस्तान के खिलाफ शुरू हो रही वनडे सीरीज के लिए रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या ने अपनी फिटनेस पास कर ली है। रोहित शर्मा आईपीएल में हैमस्ट्रिंग इंजरी का शिकार हो गए थे, तो वहीं, हार्दिक पांड्या को पीठ में चोट लगी थी। बीसीसीआई सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या ने फिटनेस क्लियरेंस पास कर लिया है और बहुत जल्द टीम के साथ जुड़ जाएंगे। टीम इंडिया अफगानिस्तान के खिलाफ पहला मुकाबला 13 जून को धर्मशाला में खेलेगी। विराट कोहली पूरी सीरीज से बाहर है इससे पहले बताया गया था कि सीनियर खिलाड़ी रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या की अफगानिस्तान के खिलाफ 3 मैचों की वनडे सीरीज में उपलब्धता बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से मिले फिटनेस क्लियरेंस पर निर्भर करेगा। रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या आईपीएल में मुंबई इंडियंस की टीम में शामिल थे। रोहित शर्मा को जहां लिंगरिंग हैमस्ट्रिंग इंजरी हुई थी तो वहीं ऑल-राउंडर हार्दिक पांड्या को पीठ में दर्द की शिकायत हुई थी। बता दें कि विराट कोहली, हैमस्ट्रिंग इंजरी की वजह से अफगानिस्तान के खिलाफ पूरी सीरीज से बाहर हो गए हैं। उन्हें खिताबी मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए खेलते हुए खिंचाव हुआ था। वह रन भागते समय लड़खड़ाते नजर आए थे। इंग्लैंड दौरे से वापसी करेंगे विराट कोहली! बीसीसीआई से जुड़े सूत्र ने बताया कि विराट कोहली आईपीएल के खिताबी मुकाबले में चोटिल हो गए थे और वह अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में उपलब्ध नहीं हैं। उनकी चोट को अभी हफ्ता ही बीता है, तो कहा नहीं जा सकता है कि कब तक वापसी कर पाएंगे। हालांकि, हम उम्मीद जताते हैं कि विराट कोहली इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से वापसी कर लेंगे, लेकिन अभी पक्का नहीं कहा जा सकता। फिजियो ने भी कोई टाइमलाइन तय नहीं किया है। विराट कोहली की जगह युवा यशस्वी जायसवाल को अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में शामिल किया गया है। अफगानिस्तान के खिलाफ पहला वनडे मुकाबला 13 जून को धर्मशाला में खेला जाएगा। दूसरा मैच, 17 जून को लखनऊ में तो वहीं तीसरा वनडे चेन्नई में 20 जून को होगा है। अफगानिस्तान के खिलाफ टीम इंडिया अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए टीम इस प्रकार है। शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, यशस्वी जायसवाल, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), हार्दिक पांड्या, नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, प्रिंस यादव, गुरनूर बराड़ और हर्ष दुबे।
रांची। झारखंड क्रिकेट के इतिहास में पहली बार आईपीएल की तर्ज पर झारखंड टी-20 लीग का आयोजन किया जा रहा है। इस बहुप्रतीक्षित टूर्नामेंट का शुभारंभ 10 जून से जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम, रांची में होगा। प्रतियोगिता की सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और राज्य के क्रिकेट प्रेमियों के बीच इसे लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। लीग का मुख्य उद्देश्य झारखंड के युवा खिलाड़ियों को बड़ा मंच उपलब्ध कराना और राज्य की क्रिकेट प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। कनिका कपूर की प्रस्तुति से सजेगा उद्घाटन समारोह टूर्नामेंट के उद्घाटन समारोह को भव्य बनाने के लिए बॉलीवुड की मशहूर गायिका कनिका कपूर लाइव कॉन्सर्ट से जलवा बिखेरेंगी । झारखंड क्रिकेट के सबसे बड़े सितारे और भारतीय क्रिकेट के दिग्गज महेंद्र सिंह धोनी इस लीग के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। जेएससीए के उपाध्यक्ष संजय पांडेय के अनुसार, धोनी ने कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति दे दी है। वे खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करेंगे और झारखंड क्रिकेट को नई दिशा देने के इस प्रयास का समर्थन करेंगे। धोनी की मौजूदगी ने खिलाड़ियों और प्रशंसकों का उत्साह कई गुना बढ़ा दिया है। रोजाना खेले जाएंगे दो मुकाबले लीग चरण में प्रतिदिन दो मैच आयोजित किए जाएंगे। पहला मुकाबला छोटानागपुर रॉयल्स और रांची टाइटंस के बीच दोपहर 12 बजे खेला जाएगा। दूसरा मैच शाम 7:30 बजे होगा। टूर्नामेंट के सेमीफाइनल मुकाबले 22 जून को खेले जाएंगे, जबकि फाइनल 23 जून को रात 7:30 बजे आयोजित होगा। दो मजबूत टीमों के बीच होगी पहली टक्कर, जानिए कौन कौ खिलाड़ी है दोनों टीमों में ? छोटा नागपुर रॉयल्स: विराट सिंह, मोहम्मद नाजिम सिद्दीकी, विकाश सिंह, कुमार कुशाग्र, सुप्रियो चक्रवर्ती, पंकज यादव, मोहित कुमार, दीपांशु रावत, सोनू कुमार सिंह, वरुण कुमार सिंह, ऋत्विक पाठक, दुर्गेश कुमार, चंदन मुखी, आर्यमान लाला, श्रेष्ठ सागर, राहुल रजक, अविनाश कुमार, हिमांशु द्विवेदी। रांची टाइटंस: शिखर मोहन, राजनदीप सिंह, श्रेष्ठ, जतिन पांडे, सौरभ शेखर, आयुष भारद्वाज, प्रिंस मुर्मू, आर्यन हुडा, यश भगत, ईशान ओम, कुमार अंकित, सचिन यादव, ओम सिंह, सत्या सेतु, प्रेम कुमार चौरसिया, मुकेश कुमार, युवराज सिंह, युवराज कुमार।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच से पहले टीम संयोजन को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवा बल्लेबाज साईं सुदर्शन को टेस्ट क्रिकेट में नंबर-3 पर बल्लेबाजी करने का अवसर दिया जाएगा। गंभीर का मानना है कि सुदर्शन को अब तक इस क्रम पर पर्याप्त मौके नहीं मिले हैं और उनकी प्रतिभा को साबित करने के लिए निरंतर अवसर आवश्यक हैं। आईपीएल प्रदर्शन का मिलेगा फायदा गंभीर ने कहा कि साईं सुदर्शन शानदार फॉर्म में हैं और हाल ही में आईपीएल में 700 से अधिक रन बना चुके हैं। ऐसे में कुछ मैचों के आधार पर उनका मूल्यांकन करना उचित नहीं होगा। उन्होंने संकेत दिया कि अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट में सुदर्शन को प्राथमिकता मिल सकती है, जबकि देवदत्त पडिक्कल को इंतजार करना पड़ सकता है। श्रीलंका दौरे के लिए स्पिन आक्रमण की तैयारी भारतीय टीम प्रबंधन अगस्त में होने वाले श्रीलंका दौरे को ध्यान में रखते हुए स्पिन विभाग को मजबूत करने की योजना बना रहा है। गंभीर ने बताया कि टीम श्रीलंका में दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला के लिए चार स्पिनरों के साथ उतरने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि युवा स्पिनरों मानव सुथार और हर्ष दुबे के बीच प्रतिस्पर्धा है। दोनों गेंदबाजों की शैली अलग-अलग है और यह टेस्ट मैच टीम को चौथे स्पिनर के विकल्प को परखने का अवसर देगा। ऋषभ पंत को दिया समर्थन उप-कप्तानी से हटाए जाने के बावजूद गंभीर ने ऋषभ पंत का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि टीम पंत की आक्रामक बल्लेबाजी शैली में कोई बदलाव नहीं चाहती, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैच की परिस्थितियों को समझना और उसके अनुसार खेलना भी उतना ही जरूरी है। भविष्य की टेस्ट योजनाओं पर फोकस गंभीर ने कहा कि अलग-अलग देशों में खेलने के लिए अलग रणनीति और तैयारी की जरूरत होती है। उन्होंने संकेत दिया कि भारतीय टीम आगामी विदेशी दौरों, विशेषकर श्रीलंका और न्यूजीलैंड जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपने टेस्ट संयोजन को मजबूत करने पर काम कर रही है।
Delhi Capitals ने आईपीएल 2026 के 62वें मुकाबले में Rajasthan Royals को 5 विकेट से हराकर प्लेऑफ की उम्मीदों को जिंदा रखा है। इस जीत के साथ दिल्ली कैपिटल्स अंकतालिका में सातवें स्थान पर पहुंच गई, जबकि राजस्थान रॉयल्स की राह अब और कठिन हो गई है। अब राजस्थान को प्लेऑफ में जगह बनाने के लिए अपने बाकी दोनों मुकाबले हर हाल में जीतने होंगे। राजस्थान की पारी: जुरेल और पराग ने संभाला मोर्चा टॉस जीतकर दिल्ली ने पहले गेंदबाजी का फैसला किया। राजस्थान की शुरुआत अच्छी नहीं रही और यशस्वी जायसवाल सिर्फ 12 रन बनाकर आउट हो गए। टीम का पहला विकेट 19 रन पर गिरा। इसके बाद वैभव सूर्यवंशी और ध्रुव जुरेल ने पारी को संभाला। दोनों बल्लेबाजों के बीच दूसरे विकेट के लिए 70 रन की साझेदारी हुई। सूर्यवंशी 46 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद ध्रुव जुरेल और रियान पराग ने तीसरे विकेट के लिए 72 रन जोड़कर राजस्थान को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। रियान पराग ने 51 रन की शानदार पारी खेली, जबकि जुरेल ने 53 रन बनाए। हालांकि आखिरी ओवरों में राजस्थान की बल्लेबाजी लड़खड़ा गई और टीम 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 193 रन ही बना सकी। दिल्ली के लिए गेंदबाजी में: मिचेल स्टार्क ने 4 विकेट लुंगी एनगिडी ने 2 विकेट माधव तिवारी ने 2 विकेट हासिल किए। दिल्ली की शानदार शुरुआत 194 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दिल्ली कैपिटल्स की शुरुआत बेहद मजबूत रही। अभिषेक पोरेल और केएल राहुल ने पहले विकेट के लिए शतकीय साझेदारी कर राजस्थान के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। अभिषेक पोरेल ने 51 रन की अहम पारी खेली। इसके बाद साहिर पारख सिर्फ 9 रन बनाकर आउट हो गए। केएल राहुल ने भी शानदार बल्लेबाजी करते हुए 56 रन बनाए। उनके आउट होने तक दिल्ली मजबूत स्थिति में पहुंच चुकी थी। अक्षर पटेल और आशुतोष शर्मा ने दिलाई जीत मध्यक्रम में डेविड मिलर और ट्रिस्टन स्टब्स जल्दी आउट हो गए, लेकिन कप्तान अक्षर पटेल एक छोर पर टिके रहे। उन्होंने नाबाद 34 रन बनाकर टीम को जीत के करीब पहुंचाया। अंत में आशुतोष शर्मा ने तेज 18 रन बनाकर दिल्ली को 5 विकेट से यादगार जीत दिला दी। राजस्थान की ओर से: जोफ्रा आर्चर ने 2 विकेट बृजेश शर्मा ने 2 विकेट लिए। प्लेऑफ की रेस हुई और रोमांचक इस जीत के बाद दिल्ली कैपिटल्स ने प्लेऑफ की उम्मीदों को जिंदा रखा है। वहीं राजस्थान रॉयल्स के लिए अब हर मुकाबला फाइनल जैसा हो गया है। आने वाले मैच तय करेंगे कि कौन सी टीम अंतिम चार में जगह बना पाएगी।
Chennai Super Kings और Sunrisers Hyderabad के बीच आज आईपीएल 2026 का 63वां मुकाबला चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम यानी चेपॉक में खेला जाएगा। प्लेऑफ की रेस अब बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुकी है और ऐसे में यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए किसी फाइनल से कम नहीं माना जा रहा। ऋतुराज गायकवाड़ की कप्तानी वाली चेन्नई सुपर किंग्स के लिए यह मैच “करो या मरो” की स्थिति में है। पिछले मुकाबले में लखनऊ से मिली हार के बाद टीम पर दबाव बढ़ गया है। दूसरी ओर, पैट कमिंस की अगुवाई वाली हैदराबाद इस मैच को जीतकर प्लेऑफ का टिकट लगभग पक्का करना चाहेगी। हेड टू हेड में CSK का दबदबा दोनों टीमों के बीच अब तक कुल 23 मुकाबले खेले गए हैं। इनमें चेन्नई ने 15 मैच जीते हैं, जबकि हैदराबाद को 8 मुकाबलों में सफलता मिली है। हालांकि हालिया फॉर्म की बात करें तो सनराइजर्स का पलड़ा थोड़ा भारी नजर आता है। पिछले सीजन में भी हैदराबाद ने चेन्नई को हराया था और इस सीजन के पहले मुकाबले में भी SRH ने जीत दर्ज की थी। चेपॉक की पिच कैसी रहेगी? चेन्नई का चेपॉक स्टेडियम लंबे समय से स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार माना जाता रहा है, लेकिन इस सीजन में तस्वीर कुछ अलग दिखाई दी है। यहां बल्लेबाजों ने खुलकर रन बनाए हैं और कई बार 200 से ज्यादा का स्कोर भी देखने को मिला है। हालांकि पिच कुछ मौकों पर धीमी भी रही है, जिससे स्पिनर्स को टर्न और अतिरिक्त मदद मिली। ऐसे में आज का मुकाबला बैट और बॉल दोनों के बीच शानदार टक्कर वाला हो सकता है। टॉस बन सकता है बड़ा फैक्टर इस सीजन में चेपॉक में खेले गए 6 मुकाबलों में से 4 मैच लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम ने जीते हैं। यही वजह है कि टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी का फैसला ले सकती है। चेपॉक में अब तक कुल 97 आईपीएल मैच खेले गए हैं: पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम जीती – 51 बार लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम जीती – 44 बार 2 मुकाबले टाई रहे मौसम बिगाड़ सकता है खेल चेन्नई में आज गर्मी और उमस काफी ज्यादा रहने वाली है। शाम के समय बादल छाए रहने और हल्की बारिश या गरज के आसार भी बताए जा रहे हैं। तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है, जबकि रात में यह 27 डिग्री के आसपास रह सकता है। ऐसे में खिलाड़ियों की फिटनेस भी अहम भूमिका निभाएगी। किसका पलड़ा भारी? अगर घरेलू परिस्थितियों और रिकॉर्ड की बात करें तो चेन्नई सुपर किंग्स को हल्का फायदा मिल सकता है। लेकिन मौजूदा फॉर्म और आक्रामक बल्लेबाजी को देखें तो सनराइजर्स हैदराबाद भी किसी तरह कमजोर नहीं दिख रही। चेन्नई के लिए ऋतुराज गायकवाड़, शिवम दुबे और स्पिन अटैक अहम होंगे, जबकि हैदराबाद को ट्रेविस हेड, अभिषेक शर्मा और पैट कमिंस से बड़ी उम्मीदें होंगी। आज का मुकाबला सिर्फ दो अंकों का नहीं, बल्कि प्लेऑफ की उम्मीदों और दबाव की असली परीक्षा भी होगा।
आईपीएल 2026 में रविवार का दिन गेंदबाजों के नाम रहा, जहां दो मुकाबलों में कुल 26 विकेट गिरे और गेंदबाजों ने मैच पर पूरा नियंत्रण बनाए रखा। इस शानदार प्रदर्शन के बीच Kagiso Rabada ने पर्पल कैप की दौड़ में बड़ी छलांग लगाई। रबाडा का शानदार स्पेल, GT को दिलाई जीत Gujarat Titans के तेज गेंदबाज रबाडा ने Chennai Super Kings के खिलाफ 4 ओवर में 25 रन देकर 3 विकेट झटके। उनकी तेज रफ्तार (145 किमी/घंटा) और अतिरिक्त बाउंस ने बल्लेबाजों को खासा परेशान किया। चेन्नई के चेपॉक में पिच पर मौजूद नमी का उन्होंने पूरा फायदा उठाया और विपक्षी टीम को बैकफुट पर धकेल दिया। इस प्रदर्शन के बाद रबाडा अब 8 पारियों में 13 विकेट के साथ पर्पल कैप लिस्ट में संयुक्त तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। उनसे आगे Anshul Kamboj और Eshan Malinga हैं, जिनके नाम 14-14 विकेट दर्ज हैं। ऑरेंज कैप की रेस में जबरदस्त उतार-चढ़ाव जहां गेंदबाजों ने चमक बिखेरी, वहीं बल्लेबाजी रैंकिंग में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिला। Virat Kohli, जो पहले नंबर पर थे, एक ही दिन में पांचवें स्थान पर खिसक गए। दिल्ली में KL Rahul ने नाबाद 152 रन की पारी खेलकर टॉप पोजिशन हासिल की, लेकिन उनकी बादशाहत ज्यादा देर टिक नहीं पाई। जयपुर में युवा बल्लेबाज Vaibhav Sooryavanshi ने सिर्फ 37 गेंदों में 103 रन बनाकर बराबरी कर ली और बेहतर स्ट्राइक रेट के चलते ऑरेंज कैप अपने नाम कर ली। इसके कुछ ही देर बाद Abhishek Sharma ने 29 गेंदों में 57 रन बनाकर 380 रन के साथ टॉप पोजिशन पर कब्जा कर लिया। वहीं Heinrich Klaasen (349 रन), Shubman Gill (330 रन) और कोहली (328 रन) टॉप-5 में बने हुए हैं। मुकाबला अब और दिलचस्प आईपीएल 2026 में पर्पल और ऑरेंज कैप की रेस लगातार रोमांचक होती जा रही है। गेंदबाज और बल्लेबाज दोनों ही अपनी-अपनी कैटेगरी में टॉप पर पहुंचने के लिए जोर लगा रहे हैं, जिससे टूर्नामेंट का रोमांच और बढ़ गया है।
एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए एक रोमांचक मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने गुजरात टाइटंस (GT) को 5 विकेट से मात देकर शानदार जीत दर्ज की। यह मैच शुरुआत से ही हाई-स्कोरिंग और उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन अंत के ओवरों में गुजरात की कमजोर बल्लेबाजी और आरसीबी की सधी हुई गेंदबाजी ने पूरा खेल बदल दिया। गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल ने हार के बाद खुलकर अपनी टीम की खामियों को स्वीकार किया और बताया कि आखिर कहां मैच हाथ से निकल गया। आखिरी ओवर बने हार की सबसे बड़ी वजह: शुभमन गिल शुभमन गिल ने कहा कि गुजरात टाइटंस 16वें से 19वें ओवर के बीच पूरी तरह मैच पर पकड़ खो बैठी। उन्होंने बताया कि: 17वें, 18वें और 19वें ओवर में एक भी बाउंड्री नहीं लग सकी इसी वजह से टीम का स्कोर उम्मीद से काफी कम रह गया टीम जिस टोटल की ओर बढ़ रही थी, वह पूरा नहीं हो सका गिल के मुताबिक, यही वह निर्णायक मोड़ था जिसने मैच का रुख बदल दिया। मिडिल ओवर्स में भी नहीं मिला जरूरी ब्रेकथ्रू गिल ने गेंदबाजी विभाग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पावरप्ले के बाद टीम सही स्थिति में थी, लेकिन विकेट निकालने में नाकाम रही। उन्होंने स्वीकार किया कि: शुरुआती ओवर्स में प्रदर्शन ठीक रहा लेकिन मिडिल ओवर्स में दबाव बनाए नहीं रखा जा सका विकेट न मिलने की वजह से आरसीबी को वापसी का मौका मिल गया विराट कोहली का जीवनदान साबित हुआ टर्निंग पॉइंट मैच का एक अहम मोड़ तब आया जब विराट कोहली को शुरुआती ओवरों में जीवनदान मिला। वाशिंगटन सुंदर ने मोहम्मद सिराज की गेंद पर उनका आसान कैच छोड़ दिया, तब कोहली बिना खाता खोले खेल रहे थे। इसके बाद कोहली ने अपनी पारी को संभालते हुए आरसीबी को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। साई सुदर्शन की शतकीय पारी, फिर भी नहीं मिला फायदा गुजरात टाइटंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 205/3 का मजबूत स्कोर खड़ा किया। इसमें सबसे बड़ा योगदान रहा: साई सुदर्शन का 58 गेंदों पर शानदार 100 रन एक समय GT 16 ओवर में 170/2 पर थी और 220+ स्कोर की ओर बढ़ती दिख रही थी, लेकिन 16वें ओवर में सुदर्शन के आउट होने के बाद रनगति धीमी पड़ गई। आरसीबी की गेंदबाजी ने पलटा मैच आरसीबी के गेंदबाजों ने आखिरी ओवरों में कमाल का प्रदर्शन किया। सुयश शर्मा भुवनेश्वर कुमार जोश हेजलवुड इन तीनों ने मिलकर अगले ओवरों में गुजरात को पूरी तरह रोक दिया और लगातार तीन ओवरों में एक भी बाउंड्री नहीं दी, जिससे दबाव पूरी तरह आरसीबी की ओर चला गया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।