आतंकवाद

Indian Ambassador addresses the UN Security Council, criticizing Pakistan over terrorism and Afghanistan-related issues.
UNSC में भारत का पाकिस्तान पर बड़ा हमला, कहा- अफगानिस्तान में नागरिकों की मौत पर जवाबदेही से नहीं बच सकता इस्लामाबाद

  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अफगानिस्तान की स्थिति पर हुई बैठक के दौरान भारत ने पाकिस्तान को कड़े शब्दों में घेरा। भारत ने पाकिस्तान पर राज्य प्रायोजित दुष्प्रचार फैलाने, आतंकवाद के मुद्दे पर झूठा नैरेटिव गढ़ने और अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों के दौरान नागरिकों की मौतों पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत परवथानेनी हरीश ने कहा कि पाकिस्तान अपने यहां सक्रिय आतंकी संगठनों की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय भारत विरोधी प्रचार के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। 'फितना अल हिंदुस्तान' शब्दावली पर भारत की आपत्ति अपने संबोधन में हरीश ने पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे "फितना अल हिंदुस्तान" शब्द को भ्रामक बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बिना किसी ठोस साक्ष्य के अपने देश में सक्रिय उग्रवादी संगठनों को भारत से जोड़ने का प्रयास करता रहा है। भारत ने कहा कि धार्मिक शब्दावली का इस्तेमाल कर गलत सूचना फैलाना एक सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान का हिस्सा है, जिसका मकसद वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाना है। 'नफरत की फैक्ट्री' चला रहा पाकिस्तान भारत ने पाकिस्तान के प्रचार तंत्र को "नफरत की फैक्ट्री" करार देते हुए कहा कि वहां का सत्ता प्रतिष्ठान लंबे समय से भारत विरोधी माहौल तैयार करता रहा है। हरीश ने कहा कि पाकिस्तान अपनी जनता का ध्यान राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक चुनौतियों और आंतरिक सुरक्षा समस्याओं से हटाकर बाहरी खतरों की ओर मोड़ने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने पाकिस्तान में सेना के बढ़ते प्रभाव और नागरिक संस्थाओं पर उसके बढ़ते नियंत्रण पर भी सवाल उठाए। अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों को लेकर घेरा भारत ने अफगानिस्तान के भीतर पाकिस्तान द्वारा की गई सैन्य कार्रवाइयों को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि किसी भी सैन्य अभियान को आतंकवाद विरोधी कार्रवाई बताकर नागरिकों की मौत को उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या, बच्चों का अनाथ होना और आम लोगों का घायल होना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। भारत ने पाकिस्तान पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर वह इस्लामी एकजुटता की बात करता है और दूसरी ओर रमजान जैसे पवित्र महीने में भी हवाई हमले करता है। UNAMA रिपोर्ट का हवाला, सैकड़ों नागरिकों की मौत भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान (UNAMA) की रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाइयों का सबसे बड़ा खामियाजा अफगान नागरिकों को भुगतना पड़ा है। सुरक्षा परिषद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार इन हमलों में 372 नागरिकों की मौत हुई, जबकि 397 अन्य घायल हुए। भारत ने उन रिपोर्टों का भी जिक्र किया जिनमें काबुल स्थित एक नशामुक्ति अस्पताल पर हमले और भारी जनहानि की बात कही गई थी। आतंकवाद पर भारत का दो टूक संदेश क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। हरीश ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का नाम लेते हुए कहा कि इन संगठनों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने आईएसआईएल और अल-कायदा जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों के खिलाफ भी सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया। अफगानिस्तान के खिलाफ 'ट्रेड एंड ट्रांजिट टेररिज्म' का आरोप भारत ने पाकिस्तान पर अफगानिस्तान के खिलाफ आर्थिक और रणनीतिक दबाव बनाने का आरोप भी लगाया। हरीश ने कहा कि समुद्र तक सीधी पहुंच न रखने वाले अफगानिस्तान के लिए व्यापार और पारगमन मार्गों को बाधित करना अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र की भावना के विपरीत है। उन्होंने इसे "ट्रेड एंड ट्रांजिट टेररिज्म" करार देते हुए कहा कि किसी भूमिबद्ध देश की भौगोलिक कमजोरियों का इस तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। भारत ने गिनाई अफगानिस्तान के लिए अपनी मदद भारत ने अपने संबोधन में अफगानिस्तान के लिए जारी मानवीय सहायता का भी जिक्र किया। भारत ने बताया कि वह अब तक 50 हजार टन से अधिक गेहूं, 420 टन दवाइयां और वैक्सीन अफगानिस्तान को उपलब्ध करा चुका है। हाल के भूकंपों के दौरान भी भारत ने राहत सामग्री भेजी थी। भारत जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित अफगान बच्चों के इलाज में भी सहयोग कर रहा है और स्थानीय स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने के प्रयासों में शामिल है। हजारों छात्रों को मिली छात्रवृत्ति शिक्षा क्षेत्र में योगदान का उल्लेख करते हुए भारत ने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक लगभग 3,000 अफगान छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। इनमें करीब 1,000 छात्राएं शामिल हैं। भारत ने भविष्य में महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों और शिक्षा कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त सहायता देने की भी प्रतिबद्धता जताई। क्रिकेट कूटनीति का भी किया जिक्र अपने संबोधन के अंत में भारत ने अफगानिस्तान के साथ सांस्कृतिक और जनस्तरीय संबंधों का उल्लेख किया। हरीश ने कहा कि इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में अफगान खिलाड़ियों का प्रदर्शन दोनों देशों के लोगों को जोड़ने का काम करता है। उन्होंने कहा कि भारत भविष्य में द्विपक्षीय क्रिकेट श्रृंखला आयोजित करने की दिशा में भी प्रयास कर रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत हो सकें। अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को घेरने की रणनीति जारी UNSC में भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह आतंकवाद, दुष्प्रचार और नागरिकों के खिलाफ हिंसा जैसे मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने का प्रयास जारी रखेगा।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
US Secretary Marco Rubio speaks on India's concerns over Pakistan-based terrorist networks during New Delhi visit.
पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क पर भारत की चिंता जायज, बोले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो

अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने भारत और पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर बड़ा बयान दिया है। दिल्ली दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से पाकिस्तान की जमीन से सक्रिय आतंकी संगठनों को लेकर चिंता जताता रहा है और यह चिंता पूरी तरह नई नहीं है। रूबियो ने यह बयान उस सवाल के जवाब में दिया, जिसमें उनसे पूछा गया था कि क्या भारत ने अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थ भूमिका को लेकर कोई आपत्ति जताई है। इस पर उन्होंने कहा कि भारत की मुख्य चिंता पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को लेकर रहती है, क्योंकि ये संगठन भारत को निशाना बनाते हैं। उन्होंने साफ कहा कि ईरान मुद्दे पर पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भारत ने कोई विशेष आपत्ति दर्ज नहीं कराई। रूबियो के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के बीच जो मुद्दे हैं, उनकी प्रकृति अलग है और बातचीत के दौरान आतंकवाद तथा सुरक्षा से जुड़े विषय जरूर उठे। अजीत डोभाल से हुई अहम बैठक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को नई दिल्ली में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval से मुलाकात की। बैठक के दौरान भारत ने पाकिस्तान से संचालित आतंकी ढांचे को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। सूत्रों के मुताबिक, डोभाल ने कहा कि आतंकवाद अब केवल एक विचारधारा नहीं, बल्कि एक पूरा संगठित इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकी नेटवर्क अब भी सक्रिय हैं और लगातार काम कर रहे हैं। इस दौरान विदेश मंत्री S. Jaishankar के साथ भी विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। ईरान मुद्दे पर क्या बोले रूबियो? ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव पर बात करते हुए रूबियो ने कहा कि बातचीत अभी जारी है और जल्द कोई बड़ा घटनाक्रम सामने आ सकता है। उन्होंने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट खोलने और परमाणु मुद्दे पर तय समयसीमा के भीतर समाधान निकालने को लेकर एक मजबूत प्रस्ताव तैयार किया गया है। रूबियो ने कहा कि इस पहल को खाड़ी देशों समेत दुनिया के कई देशों का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करेंगे और किसी खराब समझौते को स्वीकार नहीं किया जाएगा। भारत की सुरक्षा चिंताओं पर अमेरिका का संकेत मार्को रूबियो के बयान को भारत की लंबे समय से उठाई जा रही आतंकवाद संबंधी चिंताओं पर अमेरिकी समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों और उनके नेटवर्क का मुद्दा उठाता रहा है।  

surbhi मई 25, 2026 0
Donald Trump announces joint US-Nigeria operation killing senior ISIS commander in Nigeria
नाइजीरिया में ISIS का बड़ा आतंकी ढेर, ट्रंप बोले- मेरे निर्देश पर चला ऑपरेशन

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि आतंकवादी संगठन Islamic State के वैश्विक स्तर के दूसरे सबसे बड़े कमांडर अबू-बिलाल अल-मिनुकी को अमेरिकी और नाइजीरियाई सेनाओं के संयुक्त ऑपरेशन में मार गिराया गया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘Truth Social’ पर इस ऑपरेशन की जानकारी देते हुए कहा कि यह मिशन उनके निर्देश पर बेहद गुप्त और जटिल तरीके से अंजाम दिया गया। ‘अफ्रीका में छिपने की कोशिश कर रहा था’ ट्रंप ने कहा कि अबू-बिलाल अल-मिनुकी अफ्रीका में छिपकर ISIS के वैश्विक नेटवर्क को संचालित करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने उसकी गतिविधियों और लोकेशन को ट्रैक कर लिया। उन्होंने लिखा, “दुनिया के सबसे सक्रिय आतंकवादियों में से एक को खत्म करने के लिए अमेरिकी सेना और नाइजीरिया की सशस्त्र सेनाओं ने बेहद सटीक और कठिन मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।” ISIS के ग्लोबल ऑपरेशन को बड़ा झटका ट्रंप के अनुसार, अबू-बिलाल अल-मिनुकी ISIS के वैश्विक संचालन में अहम भूमिका निभा रहा था और वह अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की साजिशों में भी शामिल था। उन्होंने कहा, “उसकी मौत के बाद ISIS के वैश्विक ऑपरेशन को बड़ा नुकसान पहुंचा है।” नाइजीरिया सरकार को दिया धन्यवाद ट्रंप ने इस अभियान में सहयोग के लिए Nigeria सरकार और वहां की सेना का धन्यवाद भी किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। लंबे समय से तलाश में था आतंकी रिपोर्ट्स के मुताबिक, अबू-बिलाल अल-मिनुकी लंबे समय से अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की निगरानी में था। वह अफ्रीका के विभिन्न हिस्सों में लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था। अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि वह ISIS के नेटवर्क को फिर से संगठित करने और नए हमलों की योजना बनाने में जुटा हुआ था। वैश्विक आतंकवाद पर अमेरिका का बड़ा संदेश विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऑपरेशन अमेरिका की आतंकवाद विरोधी नीति के तहत एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। मध्य पूर्व और अफ्रीका में ISIS की गतिविधियों को लेकर हाल के महीनों में चिंता बढ़ी थी। ऐसे में इस कार्रवाई को आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi praising Indian armed forces during Operation Sindoor anniversary event
ऑपरेशन सिंदूर पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, बोले- आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त जवाब

Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय सेना की बहादुरी और देश की आतंकवाद विरोधी नीति की सराहना की है. पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख, मजबूत इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आतंकवाद और उसे समर्थन देने वाले नेटवर्क के खिलाफ अपनी लड़ाई में पूरी तरह अडिग है. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भारत हर आतंकी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है. भारतीय सेना के शौर्य को किया सलाम पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने अद्भुत साहस, सटीक रणनीति और मजबूत समन्वय का परिचय दिया. उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या करने वालों को भारतीय सुरक्षा बलों ने करारा जवाब दिया. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि पूरा देश भारतीय जवानों की वीरता और समर्पण को सलाम करता है. उन्होंने कहा कि इस अभियान ने दुनिया को भारतीय सेना की तैयारी, पेशेवर क्षमता और तीनों सेनाओं के मजबूत तालमेल की ताकत दिखायी. आत्मनिर्भर भारत की ताकत भी दिखी पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती क्षमता को भी सामने रखा. उन्होंने कहा कि आधुनिक सैन्य तकनीक, स्वदेशी रक्षा उपकरण और बेहतर समन्वय ने इस अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभायी. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सुरक्षा बलों के बीच बढ़ती एकजुटता और सामरिक क्षमता आज देश की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है. क्यों शुरू किया गया था ऑपरेशन सिंदूर? ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा संयुक्त रूप से चलाया गया सैन्य अभियान था. यह ऑपरेशन 7 मई से 10 मई 2025 के बीच पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में आतंकवादी ठिकानों और सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर अंजाम दिया गया था. यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गयी थी. उस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर पर्यटक शामिल थे. आतंकवाद के खिलाफ भारत का संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को साफ संदेश दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत पूरी मजबूती और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ता रहेगा.  

surbhi मई 7, 2026 0
Security forces arrest four OGWs in Srinagar’s Hazratbal area with weapons and cash seized during anti-terror operation
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को मदद देने वाले 4 ओवरग्राउंड वर्कर्स गिरफ्तार, महिला भी शामिल

  जम्मू-कश्मीर की राजधानी Srinagar में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देने के आरोप में चार ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक महिला भी शामिल है। हजरतबल इलाके से हुई गिरफ्तारी पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई बुधवार रात शहर के Hazratbal इलाके में की गई। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जाहूर अहमद मीर, बशीर अहमद भट, गुलाम मोहम्मद भट और शाजिया मोहम्मद के रूप में हुई है। सभी आरोपी हजरतबल क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं। हथियार और नकदी बरामद सुरक्षा बलों ने आरोपियों के कब्जे से एक हैंड ग्रेनेड, AK-47 की 15 गोलियां, चार मोबाइल फोन और नकदी बरामद की है। अधिकारियों का कहना है कि ये लोग आतंकियों को जरूरी सामग्री और जानकारी उपलब्ध कराते थे, जिससे उनकी गतिविधियों को मदद मिलती थी। कड़े कानूनों के तहत मामला दर्ज पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क के अन्य संभावित कनेक्शन की भी जांच कर रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता जारी अधिकारियों का कहना है कि घाटी में आतंकवाद के खिलाफ अभियान लगातार जारी है और ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। इस गिरफ्तारी को सुरक्षा बलों की एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है, जिससे आतंकियों के नेटवर्क को कमजोर करने में मदद मिलेगी।  

surbhi अप्रैल 23, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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