आयुष्मान भारत

West Bengal Finance Minister presents budget announcing Ayushman Bharat funding and new medical infrastructure projects.
बंगाल बजट: आयुष्मान भारत योजना के लिए 3,100 करोड़ रुपये का प्रावधान, 7 करोड़ लोगों को मिलेगा मुफ्त इलाज

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने अपने पहले बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ी प्राथमिकता देते हुए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के लिए 3,100 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की है। वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए कहा कि इस योजना के तहत राज्य के करीब 7 करोड़ लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिलेगा। वित्त मंत्री ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। योजना से बाहर रहने वाले गरीबों को भी मिलेगी सहायता सरकार ने उन गरीब परिवारों के लिए भी विशेष व्यवस्था की है, जो किसी कारणवश आयुष्मान भारत योजना के दायरे में नहीं आ पाएंगे। वित्त मंत्री ने घोषणा की कि ऐसे जरूरतमंद लोगों को मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि किसी भी व्यक्ति को इलाज के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। उत्तर बंगाल में बनेगा AIIMS, कैंसर अस्पताल की भी घोषणा बजट में स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है। वित्त मंत्री ने घोषणा की कि उत्तर बंगाल में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा क्षेत्र में एक विशेष कैंसर अस्पताल का भी निर्माण होगा। सरकार ने सुंदरबन, पुरुलिया, दार्जिलिंग और बीरभूम जैसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने का भी ऐलान किया है। सुंदरबन और पुरुलिया में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाए जाएंगे, जबकि सिउरी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को उन्नत कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में परिवर्तित किया जाएगा। अलीपुरदुआर और पश्चिम बर्धमान में खुलेंगे नए मेडिकल कॉलेज राज्य सरकार ने अलीपुरदुआर और पश्चिम बर्धमान में नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की भी घोषणा की है। वहीं, दीघा में ट्रॉमा केयर सेंटर खोला जाएगा, जिससे दुर्घटनाओं और आपात स्थितियों में लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें। राज्य के बाहर इलाज कराने वालों को भी मिलेगी मदद वित्त मंत्री ने कहा कि हर वर्ष बड़ी संख्या में पश्चिम बंगाल के लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए चेन्नई के वेल्लोर और मुंबई जैसे शहरों का रुख करते हैं। इसे देखते हुए सरकार इन शहरों में इलाज कराने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए कम लागत पर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराएगी। सरकार का कहना है कि इन घोषणाओं का उद्देश्य राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, गरीबों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना और दूरदराज के इलाकों में चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच बढ़ाना है।  

Deepshikha जून 23, 2026 0
Ayushman Bharat health insurance scheme launched in West Bengal to provide cashless medical treatment benefits.
बंगाल में आज से आयुष्मान भारत लागू, करोड़ों लोगों को मिलेगा 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार सोमवार से आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) को लागू करने जा रही है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल इस योजना को अपनाने वाला देश का 36वां राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बन जाएगा। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) और पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री Jagat Prakash Nadda और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari मौजूद रहेंगे। क्या मिलेगा योजना के तहत? आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर मिलेगा। योजना के तहत लाभार्थी देशभर के सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में गंभीर बीमारियों का इलाज बिना नकद भुगतान के करा सकेंगे। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य खर्च के कारण परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है। पूरे देश में लागू होगी योजना पश्चिम बंगाल के जुड़ने के साथ ही आयुष्मान भारत योजना अब देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो जाएगी। केंद्र सरकार इसे दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक मानती है। सामान्य राज्यों में योजना के वित्तीय खर्च का वहन केंद्र और राज्य सरकारें 60:40 के अनुपात में करती हैं। पश्चिम बंगाल में भी यही व्यवस्था लागू होगी। स्वास्थ्य साथी बनाम आयुष्मान भारत पिछली सरकार ने लंबे समय तक राज्य में आयुष्मान भारत लागू नहीं किया था और अपनी राज्य स्तरीय स्वास्थ्य योजना ‘स्वास्थ्य साथी’ को प्राथमिकता दी थी। स्वास्थ्य साथी योजना के तहत राज्य के भीतर इलाज की सुविधा उपलब्ध थी, जबकि आयुष्मान भारत के तहत लाभार्थी देशभर के पंजीकृत अस्पतालों में उपचार प्राप्त कर सकेंगे। यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे मरीजों के लिए अधिक व्यापक विकल्प मान रहे हैं। लाखों परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, योजना लागू होने के बाद राज्य के करोड़ों नागरिकों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा। विशेष रूप से गंभीर बीमारियों के इलाज में होने वाले भारी खर्च से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव राज्य सरकार का कहना है कि आयुष्मान भारत के लागू होने से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी और मरीजों को राज्य की सीमाओं से बाहर भी गुणवत्तापूर्ण उपचार का विकल्प मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य ढांचे को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।  

Deepshikha जून 8, 2026 0
West Bengal cabinet meeting led by Suvendu Adhikari approving Ayushman Bharat and major governance reforms.
पश्चिम बंगाल में ‘डबल इंजन सरकार’ की शुरुआत, पहली कैबिनेट बैठक में आयुष्मान भारत समेत कई बड़े फैसों को मंजूरी

पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलावों की शुरुआत हो गई है। राज्य की पहली कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगी, जिनमें सबसे प्रमुख Ayushman Bharat योजना को राज्य में लागू करना रहा। इस फैसले पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने खुशी जताई और कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों का कल्याण उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अब राज्य के लोगों को दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना का लाभ मिलेगा, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग को बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। पीएम मोदी ने ‘डबल इंजन सरकार’ पर दिया जोर पीएम मोदी ने अपने संदेश में “डबल इंजन सरकार” का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय से विकास योजनाओं की डिलीवरी तेज और निर्बाध होगी। उन्होंने लिखा कि पश्चिम बंगाल के लोगों तक केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के पहुंचाया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषक इसे केंद्र और राज्य सरकार के बीच नए तालमेल का संकेत मान रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी सरकार के बड़े फैसले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। इनमें आयुष्मान भारत योजना लागू करने के अलावा सीमा सुरक्षा बल को बॉर्डर फेंसिंग के लिए जमीन उपलब्ध कराने का फैसला भी शामिल है। सरकार ने सरकारी नौकरियों के लिए आयु सीमा में पांच साल की छूट देने की घोषणा की है। इसके साथ ही राज्य में Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) लागू करने को भी मंजूरी दी गई। केंद्र की योजनाओं का रास्ता साफ नई सरकार ने कई केंद्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन में आ रही बाधाओं को हटाने का भी फैसला किया है। इनमें PM Vishwakarma Yojana, Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana और Pradhan Mantri Ujjwala Yojana जैसी योजनाएं शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों, श्रमिकों, कारीगरों और गरीब परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। आयुष्मान भारत लागू होना क्यों अहम माना जा रहा? विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना लागू होना बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक बदलाव है। पिछले कई वर्षों से राज्य में यह योजना पूरी तरह लागू नहीं हो पाई थी। भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान इसे प्रमुख मुद्दा बनाया था और प्रधानमंत्री मोदी ने प्रचार के दौरान वादा किया था कि राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही आयुष्मान भारत को मंजूरी दी जाएगी। अब सरकार इसे अपनी बड़ी उपलब्धि और “डबल इंजन मॉडल” की शुरुआत के रूप में पेश कर रही है।  

surbhi मई 12, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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वरिष्ठ संपादक एवं प्रतिष्ठित पत्रकार दीपेश कुमार का हृदयाघात से निधन

anjali kumari जून 24, 2026 0